Congress' model for MP was 'laapata model': PM Modi

Published By : Admin | November 8, 2023 | 12:00 IST
Despite several decades of Congress rule, Poverty had remained a constant phenomenon in India: PM Modi
Today’s date symbolizes the decisive action taken against Congress’ corrupt intentions enabling a corruption-free society: PM Modi
Congress is well-oiled machinery that indulges in systemic corruption significantly looting the people of India: PM Modi
Congress has absolutely deprived the people of MP. The betting scandal of Chhattisgarh, Lal Diary of Rajasthan, and false promises of Karnataka and Himachal Pradesh are other examples of the same: PM Modi

भारत माता की...

भारत माता की...

जागेश्वरनाथ की...

जागेश्वर नाथ की...

सबई जनों खों हमाई तरफ से राम-राम पोंचे!

दमोह में एक तरफ जैन तीर्थ कुंडलपुर और जागेश्वरधाम है, वहीं दूसरी तरफ ये आल्हा-उदल की शौर्य भूमि भी है। ये नारीशक्ति की प्रेरणा, रानी दुर्गावती और अवंती बाई की भी कर्मस्थली रही है। इस पावन धरा पर आप सभी मेरे परिवारजन, और आप सभी मेरे परिपारजनों का दर्शन प्राप्त करना इससे बड़ी खुशी और जिंदगी में क्या हो सकती है। यहां आपका इतनी बड़ी संख्या में आना, हम सभी पर अपना स्नेह बरसाना, आशीर्वाद देना, 3 दिसंबर को आने वाले नतीजों का ऐलान कर रहा है। आज दमोह कह रहा है, पूरा मध्य प्रदेश कह रहा है, हर मतदाता कह रहा है- एक बार फिर... एक बार फिर... एक बार फिर...

मेरे परिवारजनों,
आप सभी के आशीर्वाद से, पूरे विश्व में आज भारत का परचम लहरा रहा है। लहरा रहा है ना? लहरा रहा है ना? पूरे विश्व में भारत का परचम लहरा रहा है ना? आपको गर्व हो रहा है? आपको गर्व हो रहा है? आज, ज़मीन से लेकर अंतरिक्ष तक भारत का गौरवगान हो रहा है। भारत का चंद्रयान वहां पहुंचा है, जहां दुनिया का कोई देश नहीं पहुंच। भारत में हुए G20 सम्मेलन की प्रशंसा पूरे विश्व में हो रही है। भारत के युवा बेटे-बेटियां खेल के मैदान में आज नए-नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं। भारत की एक गाथा बुंदेले-हरबोलों.. ये हम बचपन से सुनते थे और ये गाथा आज हम दुनिया को सुना रहे हैं। भारत का ये गौरवगान संभव ना हो पाता, अगर एमपी का इतना आशीर्वाद मुझ पर ना होता। ये आपका स्नेह, आपका प्यार और इसी के कारण गांव के लोग हों या शहर के लोग हो, पढ़े-लिखे लोग हो या अनपढ़ लोग हो, पुरुष हो या स्त्री हो, लोग यही कहते हैं-एमपी के मन में... एमपी के मन में... एमपी के मन में... और मोदी के मन में... और मोदी के मन में... और मोदी के मन में...

मेरे परिवारजनों,
एमपी के मन में मोदी है। गरीब, दलित, वंचित, पिछड़े और आदिवासी के मन में मोदी के लिए अपार प्यार है। क्योंकि मोदी कुछ नहीं है सिर्फ और सिर्फ आपका सेवक है। आपका जीवन बेहतर हो, आपके जीवन से मुश्किलें कम हों, यही मेरी प्राथमिकता है। देश को आज़ाद हुए इतने साल हो चुके हैं। इतने वर्षों से कांग्रेस देश से एक ही झूठ बार-बार बोलती आ रही है। देश से गरीबी खत्म करने का नारा देती आ रही है। लेकिन कांग्रेस कभी गरीबी खत्म नहीं कर पाई, क्योंकि कांग्रेस के नेताओं की नीयत ठीक नहीं थी। कांग्रेस के राज में गरीब औऱ गरीब होता गया, अमीर और अमीर होते गए। आज केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है। भाजपा के सेवाकाल में देश गरीबी से बाहर निकल रहा है, अपनी गरीबी दूर कर रहा है।

मेरे परिवारजनों,
आज पूरी दुनिया भारत में हो रहे विकास की चर्चा कर रही है। 2014 में जब हम सरकार में आए, हमारा सेवाकाल शुरू हुआ। आपके आशीर्वाद से 2014 में हमारा सेवाकाल प्रारंभ हुआ तब हमारा देश दुनिया की अर्थव्यवस्था में 10वें नंबर की आर्थिक ताकत था। हमारी अर्थव्यवस्था जब 10वें नंबर से ऊपर होने लगी, तब उतनी चर्चा नहीं हुई। हम नौ से आठ पर पहुंचे, हम आठ से सात पर पहुंचे, हम सात नंबर से छह पर पहुंचे, कहीं कोई चर्चा नहीं हुई। लेकिन जैसे ही हम छह से पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था बने, हर कोई इसी बारे में बात करने लगा। अखबारों में लेख छपने लगे, टीबी पर डिबेट होने लगी, क्योंकि 5वें नंबर की अर्थव्यवस्था बनने के साथ ही हमने उस देश को पीछे छोड़ दिया, जिसने हम पर 200 साल तक राज किया था। सेवाभाव से समर्पण भाव से काम करते हैं, तो 10वें से पांचवें नंबर पर पूरी ताकत के साथ पहुंचते हैं। और ये मोदी ने आपको गारंटी दी है। ये मोदी की गारंटी है लिख लीजिए- जब तीसरी बार मेरा सेवाकाल शुरू होगा मैं इस देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्था में लाकर रहूंगा भाइयों। हमारी गारंटी खजाने लुटाने की नहीं होती है हमारी गारंटी देश को आन बान शान के साथ आगे ले जाने की होती है। हमारी गारंटी वोट बटोरने की नहीं होती है, हमारी गारंटी मेरे देश के सामर्थ्य बढ़ाने की होती है।

साथियों,
जब किसी देश का आर्थिक सामर्थ्य बढ़ता है, तो उसके नागरिकों का सामर्थ्य बढ़ता है, उसके नागरिकों की कमाई बढ़ती है। जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ती है, तो गरीबों पर खर्च करने के लिए देश के पास पैसे भी ज्यादा आते हैं। इसलिए आज का ये समय, कांग्रेस से सबसे ज्यादा सावधान रहने का है। कांग्रेस वो पार्टी है, जो गरीबों के हक का पैसा छीन लेती है। कांग्रेस वो पार्टी है, जो हजारों करोड़ रुपए के घोटाले करती है। कांग्रेस वो पार्टी है, जो एक समाज को दूसरे से लड़ाकर, कुर्सी कब्जा करने का खेल खेलती है। कांग्रेस के लिए देश का विकास जरूरी नहीं, राज्य का विकास जरूरी नहीं। कांग्रेस के लिए सिर्फ अपना स्वार्थ ही जरूरी है। और कांग्रेस का हाल देखिए, 2014 में जब देश ने दस साल तक कार्य करने का मौका दिया था। आपको पता ही होगा कि देश के प्रधानमंत्री क्या कर रहे थे, क्या बोल रहे थे। क्योंकि उन्हें कोई काम करना ही नहीं था, रिमोट से चल रहा था, सब रिमोट से। लेकिन ये कांग्रेस की रिमोट की आदत नहीं जा रही है। उस समय प्रधानमंत्री रिमोट से चल रहे थे, इन दिनों कांग्रेस के अध्यक्ष रिमोट से चल रहे हैं। कांग्रेस के अध्यक्ष सीनियर मोस्ट लोगों में से एक है। मेरे अच्छे मित्र भी है लेकिन आज उनका हाल ऐसा कर दिया है कि वे कुछ कर नहीं पाते। नाममात्र के लिए रख दिया है उनको। लेकिन मैं कभी-कभी देखता हूं कि हमारे कांग्रेस के अध्यक्ष जी जब खुद के मूड में आ जाते हैं। कभी ये रिमोट का चार्जिंग खत्म हो गया हो, कनेक्टिविटी टूट गई हो, तो उनके मुंह से कुछ अच्छी बातें निकल जाती हैं। मैंने कहीं पढ़ा कि कल उन्होंने पांडवों को याद किया। जब रिमोट चलता है तब वो सनातन को गाली देते हैं, लेकिन रिमोट बंद हो गया तो उन्होंने कल पांडवों को याद किया मतलब सनातन को याद किया। और उन्होंने ये कहा कि भाजपा में पांच पांडव है। देखिए, जब सच बोलते हैं तो कैसी बातें निकलती है। हमें गर्व है कि हम पांच पांडवों की राह पर चल रहे हैं, इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है।

साथियों,
आप कल्पना कर सकते हैं, गरीबों का पैसा लूटने के लिए कांग्रेस ने एक खास मशीन बनाई थी। आपको पता है? कांग्रेस ने एक खास मशीन बनाई थी, आपको मालूम है? मैं बताऊं? मैं बताऊ? एक बार कांग्रेस के प्रधानमंत्री ने उसका उल्लेख किया था। वो मशीन ऐसी थी जिसमें सरकार अगर सौ रुपये भेजती थी तो उसमें से 85 रुपए सीधे कांग्रेस नेताओं की तिजोरी में पहुंच जाते थे, सिर्फ 15 रुपये ही लोगों के पास जाते थे। ये उनके प्रधानमंत्री ने कहा था। 2014 में जब हमारी सरकार बनी, तो मैंने कहा कि ऐसे तो मैं कभी चलने नहीं दूंगा। मैंने सबसे पहले कांग्रेस की इस भ्रष्ट मशीन के सारे टायर पंचर कर दिए। हमने आधार-मोबाइल और बैंक खातों की ऐसी त्रिशक्ति बनाई कि कांग्रेस की भ्रष्ट मशीन टिक ही नहीं पाई। और फिर देशवासियों को आज की तारीख भी याद है जब भ्रष्टाचारियों पर बहुत बड़ी कार्रवाई हुई थी। जो लोग नोटों के गद्दों पर सोते थे, उनकी नींद उड़ गई थी और देश का गरीब भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होते देख मोदी का जय जयकार कर रहा था। इसलिए आज की तारीख आते ही कांग्रेस ऐसे बिलबिलाती है, जैसे सबसे ज्यादा काली कमाई उसी को बैंकों में जमा करानी पड़ी हो। आज भी कांग्रेस सबसे ज्यादा मुझे, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दिन में सौ-सौ बार गालियां देती है। हजारों करोड़ रुपए के घोटाले में जो लोग जमानत पर हैं, उन्हें मोदी से तकलीफ होनी बहुत स्वभाविक ही है। ये लोग जो मुझे गालियां देते हैं उनके नाम निकालकर देख लेना। ये सारे लोग किसी न किसी केस में फंसे हुए हैं, भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं और जमानत पर जिंदगी गुजार रहे हैं। लेकिन ये लोग चाहे मुझे कितनी ही गालियां दे, भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई नहीं रुकेगी। मुझे जरा आप बताइए... दमोह के मेरे भाइयो-बहनों इतनी बड़ी तादाद में आए हैं ज्यादा लोग धूप में तप रहे हैं.. लेकिन मुझे प्यार से सच्चाई बता दीजिए- क्या मुझे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए? भ्रष्टाचारियों को जेल भेजना चाहिए? भ्रष्टारियों ने जो लूटा है वो देश को वापस मिलना चाहिए? जो लूटा है वो लोटाना पड़ेगा कि नहीं पड़ेगा? क्या आपका आशीर्वाद है ना? मुझे यही आशीर्वाद मेरी ताकत है। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए ही आपने मुझे इस सेवा के लिए जन्म दिया है।

साथियों
आज मजाल है कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए पैसा भेजे और कोई पंजा बीच में से उसे लूट के ले जाए, वो जमाना चला गया। इसी साल मध्य प्रदेश के लोगों को केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक खातों में भेजे हैं। इसमें से एक भी पैसा कोई पंजा लूट नहीं पाया है। जानते हैं क्यों? क्योंकि वो यहां सरकार में नही है। अगर गलती से भी कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकार में आ गई, तो हर काम में 85 परसेंट कमीशन तय है। ये उनके एक प्रधानमंत्री 85 परसेंट तय करके गए हैं। फिर ना यहां विकास होगा और ना ही कोई काम। कांग्रेस फिर से मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य बना देगी। इसलिए मध्य प्रदेश के लोगों को, विशेषकर आज की युवा पीढ़ी को कांग्रेस से बहुत सावधान रहना है।

मेरे परिवारजनों,
भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, गरीब का विकास है, गरीब का कल्याण है। हम बहुत नेक नीयत से आपके जीवन की हर परेशानी दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। गरीब से गरीब परिवार के पास अपना पक्का घर हो, इसलिए हमने 4 करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनाकर गरीबों को दिए है। आप जरा बताएंगे कितने घर? जरा इधर से आवाज आए कि कितने घर बनाकर दिए? गरीबों को कितने घर दिए? माताए-बहने जरा बताइए, कितने घर बना के दिए? कितने घर दिए? राम मंदिर बनाया ये तो याद है, 4 करोड़ गरीबों के घर बनाए, ये भी याद रखिए। पहले करोड़ों देशवासी खुले में शौच के लिए मजबूर थे। इसलिए हमने शौचालय की, इज्जतघर की सुविधा दी। पहले देश के करीब ढाई करोड़ से ज्यादा घरों में लोग, बिना बिजली के अंधेरे में रह रहे थे। भाजपा सरकार ने ऐसे ढाई करोड़ परिवारों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया। हमारे देश के गरीब परिवारों की माताओं-बहनों के जीवन में तो सिर्फ धुआं ही धुआं था। हमने उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। महंगे इलाज के कारण, गरीब और गरीब हो रहा था। इसलिए भाजपा ने गरीबों को 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी। जब कोरोना का इतना बड़ा संकट आया, तो ये हमारी ही सरकार है जिसने हर गरीब को मुफ्त वैक्सीन लगवाई। वो वैक्सीन विदेश में लोगों को कई-कई सौ भी लग नहीं पाती थी वो काम आपके बेटे ने मुफ्त में वैक्सिन लगा कर के किया है। आप मुझे बताइए, आप लोगों को वैक्सीन लगा था कि नहीं लगा था? जरा हाथ ऊपर कर के बताइए लगा था कि नहीं लगा था? क्या आपको एक रुपया देना पड़ा था? कोई पैसा देना पड़ा था क्या? ये आबका बेटा आपकी जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात मेहनत करता था कि नहीं करता था?

साथियों,
ये मोदी है जो अपने 80 करोड़ देशवासियों को मुफ्त राशन देने की गारंटी दे रहा है। कितना बड़ा वो संकट का काल था, दुनिया भर के लोग परेशान थे मौत मंडरा रही थी, कोरोना ने डरा कर रखा था। घर से काम पर भी जाना मुश्किल था। अरे बेटा भी मां के कमरे में जाने से डरता था, कहीं कोरोना मां को ना लग जाए। बेटा भी चिंतित रहता था। वो दिन थे। अब आपका बेटा दिल्ली में बैठे-बैठे दिन-रात आपकी चिंता करता था। इसलिए मैंने तय किया था, कि संकट कितना भी भयंकर क्यों ना आ जाए मैं गरीब के घर का चूल्हा बूझने नहीं दूंगा। मैं किसी गरीब के मां के बच्चे को भूखा नहीं सोने दूंगा। मैं किसी के घर में भूख की आवाज सुनाई दे वो दिन हिंदूस्तान में आने नहीं दूंग और इसलिए 80 करोड़ लोगों को अन्न मुफ्त में देने का काम शुरू किया। भाइयों-बहनों ये योजना योजना इसी दिसंबर में पूरी हो रही है। आप बताइये मुझे इस योजना को आगे चलाना चाहिए कि नहीं चलाना चाहिए? इन गरीबों को मुफ्त अनाज देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए? ये दिसंबर के बाद भी मिलते रहना चाहिए कि नहीं मिलते रहना चाहिए? इससे गरीब को मदद मिलती है कि नहीं मिलती है? भाइयों-बहनों मैंने निश्चय किया है कि मैं इन 80 करोड़ लोगों को अब आने वाले 5 साल के लिए इस योजना को बढ़ाने का मेरा निश्चय है। बताइये, मैने सही किया कि गलत किया? सही किया कि गलत किया? मुझे निश्चय अच्छा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? आपने मुझे अच्छा संकल्प करने के लिए बिठाया है ना?तो करना चाहिए ना? ये कांग्रेस वाले के पेट में चूहें दौड़ रहे हैं.. ये दो दिन से लगे हैं कि इलेक्शन कमीशन में जाएंगे.. मोदी के खिलाफ शिकायत करेंगे। वो गरीबों को मुफ्त अनाज देने की बात कर कैसे सकता है। मोदी अपने आप को समझता क्या है। अरे भाई तुझे जो करना है कर ले बाबा, मेरे तो गरीब मेरे हैं मैं तो उनके लिए जो करता हूं, जो सजा मिल जाए भुगत लूंगा, लेकिन गरीबों का काम मैं नहीं छोड़ूंगा। गरीबों की सेवा करना मैं नहीं छोड़ूंगा, कांग्रेसवालों को जो करना है करता रहे। वो अपना पाप करते रहे मैं मेरा पुण्य करता रहूंगा।

मेरे परिवारजनों,
भाजपा का प्रयास सिर्फ सुविधाएं जुटाने तक सीमित नहीं है। हम गरीब, SC/ST/OBC परिवारों को, उनकी शिक्षा और कौशल के लिए भी अवसर दे रहे हैं। कांग्रेस के नेता उनके लिए तो अपने बेटे-बेटियों से आग कुछ दिखता ही नहीं। उनको अपने बेटे-बेटियों के भविष्य की चिंता होती है, मेरे लिए तो आप सब परिवारजन है, आपके बेटे का कल्याण यही तो मेरे देश का कल्याण है। आज भी यहां एमपी कांग्रेस में यही खेल चल रहा है। गांव का, गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवार का बेटा-बेटी डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बन पा रहा, कांग्रेस को परवाह ही नहीं थी। कांग्रेस ने अंग्रेज़ी में मेडिकल-इंजीनियरिंग की पढ़ाई को अनिवार्य बनाया। मोदी, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आया, ताकि गरीब से गरीब परिवार के बच्चे को भी अच्छी शिक्षा मिल सके। हमने स्थानीय भाषाओं में मेडिकल-इंजीनियरिंग की पढ़ाई का विकल्प दिया। इसमें मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन कांग्रेस की सोच क्या है, ये भी आपको जानना चाहिए। कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाते ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर रोक लगा दी। वो नहीं चाहती कि गरीब के आगे बढ़ने के रास्ते में भाषा की दीवार खत्म हो। कांग्रेस नहीं चाहती कि गरीब को स्कूल से ही लैब की ट्रेनिंग मिले। कांग्रेस नहीं चाहती कि गरीब के बच्चे भी स्पोर्ट्स और क्रिएटिव फील्ड में आगे आएं। यहां मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को मौका मिला, तो उसका हर फैसला गरीब के बच्चों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए होगा। इसलिए आपको बहुत सावधान रहना है।

मेरे परिवारजनों,
मैं एमपी के, बुंदेलखंड के सभी युवा साथियों से, विशेष रूप से फर्स्ट टाइम वोटर्स से एक बात कहना चाहता हूं। जो पहली बार मतदान करने के लिए जाने वाले हैं। देखिए आने वाले 25 साल, आज जो 18-20 साल के नौजवान हैं ना, आने वाला 25 साल आपके लिए, आपके करियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। ये 25 साल विकसित भारत के निर्माण के भी हैं। आपके माता-पिता को कांग्रेस ने जो कठिनाइयां दीं, जिन मूसीबतों से आपके माता-पिता को जूझना पड़ा, मैं नहीं चाहता कि आपको भी उन मूसीबतों से जूझना पड़े। आपको अच्छी जिंदगी मिले, दिन-रात मिहनत करके आपकी जिंदगी को उन मूसीबतों से मुक्त कराना चाहता हूं। लेकिन मेरे भाइयों-बहनों, मेरे नौजवानों आपको भी बहुत सतर्क रहना होगा। क्योंकि ये कांग्रेस वाले ऐसे-ऐसे खेल करते रहते हैं। उनके लिए झूठ बोलना कोई मुश्किल काम नहीं है। इस क्षेत्र ने कांग्रेस को 60 साल मौका दिया था। 60 साल, फिर भी बुंदेलखंड को कांग्रेस ने सिर्फ सूखा दिया, पलायन दिया। अब भी कांग्रेस के पास वही लोग हैं जो पिछले 40-50 साल से राजनीति कर रहे हैं। उनके ही कारनामों और करतूतों के कारण एमपी बेहाल था। और जहां मौका मिल भी रहा है, वहां कांग्रेस ने कर क्या लिया? छत्तीसगढ़ में सट्टेबाज़ी है और राजस्थान में काले कारनामों की लाल डायरी है। सट्टा? सरकार में मुख्यमंत्री का कमरा और सट्टा? और सट्टेबाज कह रहा है मैंने मुख्यमंत्री को 500 करोड़ रुपये दिया है। क्या आप मध्य प्रदेश को ऐसा हाल कराना चाहते हैं क्या? ऐसी बर्बादी चाहते हैं क्या? कांग्रेस का मतलब ही है बर्बादी की गारंटी भाइयों। वहां की जनता, इन्हें सबक सिखाने के लिए खुद सड़कों पर उतर आई है। कांग्रेस ने हिमाचल और कर्नाटका में भी झूठे वायदों की झड़ी लगाई थी। कांग्रेस ने वहां चुनाव से पहले वादा किया था कि महिलाओं के खाते में पैसे डाले जाएंगे। माताएं-बहनें आज भी इंतज़ार कर रही हैं कि उनका पैसा कब खाते में आएगा?

साथियों,
ये कांग्रेस भी जानती है कि एमपी का युवा इनके भ्रष्ट और अक्षम ट्रैक रिकॉर्ड पर विश्वास नहीं करता। इसलिए ये लोग झूठ का पिटारा लेकर घूम रहे हैं। इन लोगों के रेडियो पर हमेशा एक ही ट्रैक बजता है। 2018 में जो झूठ बांटा था, वही नए लिफाफे में लेकर आए हैं। ये कहते हैं कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे। अरे, 2018 में 10 दिन में किसानों का कर्जमाफी का वादा करके गए थे। 15 महीना आपको मौका मिला था किसान इंतजार करते रहे। कर्जमाफी के नाम पर कांग्रेस बरसों तक किसानों को ठगती रही है। वहीं डबल इंजन सरकार में हर किसान को 12 हज़ार रुपए की गारंटी मिली है। केंद्र सरकार के साथ-साथ एमपी सरकार भी किसानों के खाते में 6-6 हजार रुपये भेज रही है। कांग्रेस का समय होता तो ये पैसा दिल्ली से चलता तो भी किसानों तक नहीं पहुंच पाता।

मेरे परिवारजनों,
बीते वर्षों में बुंदेलखंड में सिंचाई की सुविधा के लिए अभूतपूर्व काम हुआ है। दमोह जिले में ही 150 से अधिक सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। पंचम नगर परियोजना, यहां के किसानों के लिए समृद्धि की धारा लेकर आई है। केन-बेतवा लिंक नहर जब सत्य बन जाएगा हकीकत बन जाएगी, तो दमोह सहित पूरे बुंदेलखंड के लाखों किसानों का जीवन बदल जाएगा। 45 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट से मध्य प्रदेश के 10 जिलो को लाभ होगा। इससे मध्य प्रदेश के लगभग 9 लाख हेक्टेयर खेत को सिंचाई का पानी मिलेगा। इससे 45 लाख लोगों को पीने के पानी की सुविधा भी मिलेगी। बुंदेलखंड के अनेक जिलों में अटल भूजल योजना के तहत भी पानी का स्तर बढ़ाने का काम चल रहा है। बुंदेलखंड में साढ़े 5 सौ से ज्यादा अमृत सरोवर भी बनाए गए हैं। मैंने बुंदेलखंड की माताओं-बहनों को उनके घर तक पाइप से पानी पहुंचाने की भी गारंटी दी है। बुंदेलखंड के 7 लाख से ज्यादा घरों में नल से जल की सुविधा मिल चुकी है। 3 दिसंबर को फिर भाजपा सरकार बनने के बाद, इस काम को और तेज़ किया जाएगा।

मेरे परिवारजनों,
ये चुनाव, सिर्फ विधायक चुनने के लिए नहीं हैं। ये चुनाव, मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देने के लिए है। खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अद्भुत प्रगति की है। बीना रिफाइनरी भी आने वाले समय में इस क्षेत्र में उद्योगों को बल देने वाली बहुत बड़ी शक्ति के रूप में प्रगति करेगी। सतधरु परियोजना से इस क्षेत्र में अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर को बल मिला है। अब हमें एमपी को देश के टॉप-5 औद्योगिक राज्यों के स्थान पर पहुंचाना है, ताकि हमारे नौजवानों को यहीं पर अधिक से अधिक रोज़गार मिले। ये तभी संभव है जब यहां ज्यादा से ज्यादा निवेश आएगा। ये तभी संभव है जब यहां पूर्ण बहुमत से भाजपा की डबल इंजन सरकार फिर बनेगी। अगर यहां कदम-कदम पर मोदी के काम को रोकने वाली सरकार होगी, तो इससे एमपी पिछड़ जाएगा। इसलिए दमोह सहित पूरे बुंदेलखंड की हर सीट, हर बूथ पर कमल का फूल खिलना चाहिए।

आप यहां से घर-घर जाएंगे?... घर-घर जाएंगे?... हर बूथ में जाएंगे? लोगों को मिलेंगे? कमल खिलाएंगे? ज्यादा से ज्याद मतदान करवाएंगे? हर उम्मीदवार को जिताएंगे ? भाजपा की सरकार बनांएंगे? आप दिन-रात काम करेंगे? य सभा बहुत बड़ी हो गई। दूह-दूर भी लोग दिख रहे हैं। अब ऐसा तो नहीं होगा ना कि अब तो हो गया, बहुत बढ़िया हो गया चलो सो जाओ, ऐसा तो नहीं होगा ना? पक्का? हर मतदादा कार्यकर्ता बनना चाहिए। हर मतदादा कार्यकर्ता बनना चाहिए। हर मतदाता कमल का पहरगीर बनना चाहिए और हमें कमल को हर बूथ पर जिताकर आना चाहिए। जरूर करोगे काम? घर-घर जाकर के करोगो? गांव-गांव जाकर के करोगे? अच्छा मेरा एक काम करोगे? क्यो आवाज धीमी हो गई? मेरा काम करोगे क्या? ये मेरा काम है पर्सनल। करोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताओ कि करोगे? अरे वाह, सबने हाथ ऊपर किया। पक्का करोगे? अच्छा एक काम करना, जब भी आप गांव में जाएं, लोगों से मिलने जाएं, जो भी मिले जिससे भी आप मिले उससे आप कहिए कि मोदी जी डमोह आए थे और मोदी जी ने आपको प्रणाम भेजा है। मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे? घर-घर पहुंचा देंगे? हर बुजुर्ग तक मरे प्रणाम पहुंचेंगे? हर माता-बहन तक मेरा प्रणाम पहुंचेगा? नौजवान तक मेरी आवाज पहुंचेगी। मेरे साथियों जब मेरा प्रणाम पहुंचता है ना, तो वे मुझे आशीर्वाद देते हैं। और उनके आशीर्वाद मेरी इतनी बड़ी ताकत होती है कि मुझे देश के लिए 24 घंटे काम करने की हिम्मत आ जाती है, इसलिए हर परिवार तक मेरा प्रणाम पहुंचा देना। मेरे साथ बोलिए, भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... बहुत-बहुत धन्यवाद।

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6th dec 2025 Text of PM’s address at the Hindustan Times Leadership Summit
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।