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21st century is the century of knowledge, says Prime Minister Modi
India has the potential to become the manufacturing hub for the world: PM Narendra Modi
In history, whenever knowledge has been the driving force of the world, India has provided leadership: PM Modi
Today India is demographically the youngest country in the world, with young dreams full of energy: PM Narendra Modi
The current generation of youngsters don't want to be job seekers. The youth wants to be job creators: PM Modi
Global agencies say India is the fastest growing economy in the world: PM

मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, नौजवान साथियों, और इस समय online नॉर्थ ईस्‍ट के कई विद्यार्थी भी इस समारोह में शरीक हैं। मैं उन सबका भी स्‍वागत करता हूं।

सब से पहले मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मुझे आने में बहुत विलंब हुआ, क्‍योंकि आज सुबह सिक्किम से मुझे चलना था। लेकिन weather साथ नहीं दे रहा था। बार बार समय बदलना पड़ रहा था। लेकिन आखिकार पहुंच ही गया। कभी-कभी देर होती है, लेकिन पहुंचता हूं। आज यहां दो महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हैं। एक तो IIIT का, नये भवन का शिलान्‍यास और दूसरा ICT Academy की शुरूआत। हम सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है, लेकिन 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है इसका कारण क्‍या है। तो पूरा विश्‍व ये मानता है कि 21वीं सदी ये ज्ञान की सदी है। information की सदी है और इसलिए information , knowledge के क्षेत्र में जो अगुवाई करेगा वो दुनिया की अगुवाई करेगा। वो लीडरशिप करेगा और दूसरा महत्‍वपूर्ण कारण है आज भारत विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसख्‍ंया इस देश में 35 साल से कम उम्र की है, कई तो 35 से भी नीचे है। जिस देश मे सदियों से यह परंपरा रही है कि जब-जब मानव जाति नाजुक दौर से गुजरी है हमेशा हमेशा भारत ने नेतृत्‍व किया है और 21वीं सदी में demographic dividend ये हमारी ताकत है इतनी बड़ी संख्‍या में जिस देश के पास नौजवान हों उसके सपने भी नौजवान होते हैं और जवान सपनों में समर्पण का भाव भी होता है, ऊर्जा भी होती है। भारत इस परिस्थिति का फायदा कैसे उठाए, इस अवसर को भारत किस प्रकार से दुनिया के विश्‍व के पटल पर एक शक्ति के रूप में उभर सकें। ये अवसर भी है, चुनौती भी है और जिंदगी बिना चुनौतियों के कभी सफल नहीं होती है। जो चुनौतियों को पार करता है वो ही अवसर को पाता है और वही अवसर को सिद्धि में परिवर्तित कर सकता है। आज पूरे विश्‍व में जितने भी मानको पर चर्चा होती है चाहे वर्ल्‍ड बैंक का रिपोर्ट देख लीजिए। IMF का रिपोर्ट देख लीजिए। credit rating agency, global level की कुछ कहें, एक बात साफ साफ उभर करके आती है और सर्व दूर से एक ही प्रकार से आती है और वो ये कि आज बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कोई economy है। वो economy का नाम है हिन्‍दुस्‍तान।

आए दिन खबरें आती है कि दुनिया में ये हो रहा है। वो हो रहा है। पूरे विश्‍व में आर्थिक मंदी का माहौल है। विश्‍व आर्थिक संकट में घिरा हुआ है। ऐसे संकट के काल में एक अकेला हिन्‍दुस्‍तान अपने पैरों पर स्थिर खड़ा है और तेज गति से आगे भी बढ़ रहा है और ये भी विश्‍व मानता है कि आने वाले दिनों में भारत इससे भी अधिक गति से आगे बढ़ने वाला है। ये जो अवसर आया है। इस अवसर का फायदा अगर उठाना है। तो हमें हमारी युवा शक्ति पर ध्‍यान केन्द्रित करना होगा और इसलिए सरकार ने जिन बातों पर ध्‍यान दिया है वे बिखरी हुई चीजें नहीं हैं। सरकार में हैं कुछ करना पड़ता है चलो कुछ करते रहें ऐसा भी नहीं हैं। एक के बाद एक कदम एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं, interlinked हैं। एक के बाद एक कदम अंतिम परिणाम को प्राप्‍त करने का अवसर है। पहली बार इस देश में skill development एक अलग department बनाया गया। पहले क्‍या था। हर department अपने-अपने तरीके से skill department का काम करता था। लेकिन जब इतने बड़े department के एक कोने में skill department चलता है तो उसमें focus नहीं रहता था। चीजें चलती थी, कागज पर सब दिखता था। लेकिन धरती पर नजर नहीं आता था। हमने अलग skill department बनाया और पूरे देश में 21वीं सदी के अनुकूल किस प्रकार का मैन पावर तैयार करना चाहिए, किस प्रकार का Human resource development करना चाहिए और न सिर्फ हिन्‍दुस्‍तान वैश्विक संदर्भ में global perspective में आप कल्‍पना कर सकते हैं जब दुनिया पूरी बूढ़ी हो, दुनिया के पास पैसे हों। उद्योग कारखाने लगे हुए हों। लेकिन चलाने के लिए नौजवान न हो तो क्‍या होगा। पूरी विश्‍व को 2030 के बाद बहुत बड़ी मात्रा में human resource की आवश्‍यकता पड़ने वाली है। globally man power पहुंचाने का काम अगर कोई कर सकता है तो हिन्‍दुस्‍तान कर सकता है। दूनिया के हर कोने में भारत का नौजवान जा करके उस देश के जीवन में बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। वो दिन दूर नहीं है। जब पूरे global requirement को अगर ध्‍यान में रखें तो आज से हमारा प्रयास है कि हिन्‍दुस्‍तान में वो Human resource development हो वो man power तैयार हो जो आने वाले दिनों में global requirement को पूरी कर पाएं।

दूसरी तरफ भारत सिर्फ सेवादार बना रहे क्‍या ? ये बात हमें मंजूर नहीं है और इसलिए हमारे देश में Make in India का अभियान चलाया है। आज देश पेट्रोलियम पैदावार के बाद सबसे ज्‍यादा इम्‍पोर्ट जो पहली तीन चार चीजें हैं देश में जिसमे हमारी सबसे ज्‍यादा धन हमारे विदेश में जाता है। उसमें एक है electronic goods का import। चाहे लैपटॉप हो, चाहे मोबाइल फोन हो, चाहे electronic medical devices हो। अब जिस देश में ऐसी बढि़या IIT हो जिस गुवाहाटी के IT के, जो गुवाहाटी यहाँ के IIT के कारण पहचाना जाता है। यहां के IIT ने गुवाहाटी को एक नई पहचान दी है। लेकिन उस देश में electronic goods भी हमें इम्‍पोर्ट करना पड़े । ये अच्‍छी बात है क्‍या। Thermometer भी बाहर से लाना है। बीपी कम हुआ ठीक हुआ नहीं ठीक हुआ वो भी foreign का instrument तय करेगा क्‍या।

दोस्‍तों ये चीजे बदलनी है। मैं आज आपके बीच आया हूं चुनौती को ले करके, कम से कम electronic goods ये तो हम बना सकते हैं ऐसा नहीं हम दुनिया को दे सकते हैं। इस देश के पास टेलेंट की कमी नहीं है, इरादों की भी कमी नहीं है। हर नौजवान के पास कुछ न कुछ करने का इरादा है तो क्‍यों न हम हमारे देश की इस requirement को ध्यान में रखते हुए मेक इन इंडिया की बात को आगे बढ़ाएं। और दुनिया ने भारत के लोगों का लोहा माना है। आज सिलिकॉन मेले में जाइए। Address तो यूएसए का है। लेकिन चेहरा हिन्‍दुस्‍तानी है। हर तीसरी चौथी कंपनी का सीईओ हिन्‍दुस्‍तानी है। 50 परसेंट 60 परसेंट काम करने वाले नौजवान हिन्‍दुस्‍तानी है। इस देश के पास टेलेंट भी है।

भारत ने Mars Mission किया। ऑरबिट में हम पहुंचे। दूनिया में हम पहले देश हैं जो Mars Orbit Mission में पहले ही ट्रायल में सफल हो गये। दुनिया के और देशों में सफलता 20-20-25 बार ट्रायल करने पर मिली। भारत को पहली बार मिल गई। और खर्चा कितना आप गुवाहाटी में एक किलोमीटर ऑटो रिक्‍शा में जाए तो दस रुपया लगता होगा। हम मार्स मिशन में सिर्फ सात रुपए किलोमीटर पर गए। हॉलीवुड की फिल्‍म का जो खर्चा होता है उससे कम खर्चें में हम मार्स मिशन पर पहुंचे। ये कैसे संभव हुआ। हमारे नौजवानों के talent के कारण, तजुर्बे के कारण। कुछ कर गुजरने के इरादे के कारण। जिस देश के पास ये सामर्थ्‍य हो तो वो देश का प्रधानमंत्री make in India का सपना क्‍यों न देखे। हमारा दूसरा क्षेत्र है Defence. क्‍या भारत अपनी सुरक्षा के लिए आजादी के 70 साल के बाद भी औरों पर dependent रहे। अश्रु गैस है न अश्रु गैस, रोने के लिए भी tear gas, वो भी बाहर से लाना पड़ता है। ये स्‍थिति अब बदलनी है दोस्‍तों। हम हमारी रक्षा के लिए जो आवश्‍यकताएं हैं वो तो हम बनाएं। इतना ही नहीं दुनिया को हम supply भी करे, ये ताकत हमारी होनी चाहिए।

हम मोबाइल के बिना जी नहीं सकते और आप में से कई लोग है, मेरे से जुड़े हुए हैं, फेसबुक पर, ट्वीटर पर। कुछ लोग मेरी Narendra Modi app पर भी कुछ न कुछ लिखते रहते हैं गुवाहाटी से। लेकिन मोबाइल फोन बाहर से लाना पड़ता है और इसलिए दोस्‍तों हमारे जो IITs है। हमारी IIIT है। हमारी technical institutions है। वहां make in India का मुझे माहौल create करना है। अभी से विद्यार्थी के मन में विचार होना चाहिए कि मैं शस्‍त्रार्थों की दुनिया में भारत को ये अमानत दूंगा ताकि दुनिया हमें कुछ न कर पाए।

हम ICT के क्षेत्र में जा रहे हैं। ICT हम व्‍यापार-धंधे के लिए नए-नए सॉफ्टवेयर बनाने की ताकत create कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और सारी दुनिया के सामने है। वो चुनौती है, cyber security की। हर कोई परेशान है, कहीं कोई हाई-जैक तो नहीं कर लेगा। मेरी पूरी फाइल चली तो नहीं जाएगी। मैं research कर रहा हूं, कोई उठा तो नहीं ले जाएगा। दुनिया को कोई ठप्‍प तो नहीं कर देगा। हवाई जहाज उड़ता होगा और cyber attack करके उसको वही रोक दिया जा सकता है और फिर वो नीचे ही आएगा। ये संकट है, दुनिया डरी हुई है। technology ने जहां-जहां पर हमको पहुंचाया है तो उसके साथ हमारे सामने चुनौतियां भी आई हैं। क्‍या हमारे विद्यार्थी, हमारे नौजवान विश्‍व को cyber security देने के लिए नेतृत्‍व नहीं कर सकते क्‍या? अगर दुनिया में किसी को भी cyber security की जरूरत होगी, भारत के नौजवान पर उसको भरोसा करना पड़ेगा, तब जाकर के उसका काम होगा। ये नहीं कर सकते क्‍या?

और इसलिए दोस्‍तों skill development से लेकर के make in India. दो दिन पहले आप में से कई लोग शायद मेरे साथ वीडियो कॉंफ्रेंस में जुड़े हुए होंगे। जब मैं दो दिन पहले दिल्‍ली में ‘स्‍टार्ट-अप’ का आरंभ किया। जब मैं पहले ‘स्‍टार्ट-अप’ कह रहा था तो कुछ लोगों को तो पता ही नही पड़ता, क्‍या कह रहा है ये। ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’. जब लालकिले से हमने कहा तो ऐसे ही आकर के चला गया विषय। पता ही नहीं चला, कहीं रजिस्‍टर्ड ही नहीं हुआ। लेकिन अभी जब ‘स्‍टार्ट-अप’ का कार्यक्रम हुआ, लाखों नौजवानों ने रजिस्‍ट्रेशन कराया। एक नया mood बना है, देश में। नौजवान सोच रहा है मैं रोजगार के लिए apply नहीं करूंगा, मैं अपने पैरों पर नई चीज खोजकर के दुनिया के बाजार में ले आऊंगा, नए तरीके से ले आऊंगा।

‘स्‍टार्ट-अप’ का एक माहौल बना है। वर्तमान में जो नई पीढ़ी है वो job-seeker नहीं बनना चाहती है, वो job-creator बनना चाहती है और सरकार ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’ के भरोसे उसे बल देना चाहती है और इसलिए अभी आपने देखा होगा, हमने कई नई योजनाएं घोषित की है, नए initiative लिए हैं क्‍योंकि भारत दुनिया का ‘स्‍टार्ट-अप’ का capital बन सकता है जिस देश के पास इतनी talent हो, वो दुनिया का capital बन सकता है और मैंने ये देखा, आपने भी शायद टीवी पर इन चीजों को ध्‍यान से देखा होगा, नहीं देखा होगा तो इंटरनेट पर सारी चीजें इन दिनों available है। 22-25-27-30 साल के नौजवान अरबों-खरबों रुपयों का व्‍यापार करने लगे हैं और दो-तीन साल में करने लगे हैं और पांच हजार- दस हजार- 25 हजार लोगों को रोजगार दे रहे हैं just अपना दिमाग और technology का उपयोग करते हुए।

और जमाना App का है, हर चीज का App बनता है और दुनिया जुड़ जाती है। मैं भी अब जुड़ गया लेकिन हमारे नौजवानों की जो बुद्धिमत्‍ता है वो कुछ कर गुजरने की बुद्धिमत्‍ता है और इसलिए skill development से लेकर के ‘स्‍टार्ट-अप’ तक की यात्रा Make in India. पहले Make for India और बाद में Make for Global, ये requirement को पूरा करने के लिए हम आगे बढ़ना चाहते हैं और उसमें technical force एक बहुत बड़ी आवश्‍यकता है। हर हाथ में हुनर होना चाहिए। कभी-कभी हम लोग रोते बैठते हैं। हमारे देश में कुछ ये भी आदत है। समस्‍याएं होती है। हर किसी के नसीब में मक्‍खन पर लकीर करने का सौभाग्‍य नहीं होता है। पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत होनी चाहिए और अगर हम अपने आप को युवा कहते हैं तो उसकी पहली शर्त यह होती है कि वो मक्‍खन पर लकीर करने के रास्‍ते न ढूंढे, वो पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत के लिए सोचे। अगर यही इरादे लेकर के हम चलते हैं तो हम अपनी तो जिन्‍दगी बनाते हैं लेकिन कइयों की जिन्‍दगी में बदलाव लाने के लिए कारण भी बनते हैं।

तो भारत में हमारी जितनी भी academic institutions है, technical institutions है, हमारी Universities है। चाहे हमारी आईआईटी हो या हमारी आईटीआई हो, छोटी से छोटी technical इकाई से लेकर के, top most technical venture, इन दोनों के अंदर एकसूत्रता होनी चाहिए और हम देश की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए सामर्थ्‍यवान बने। समस्‍याएं अपने आप उसका रास्‍ता भी खोजकर के आती है। कोई समस्‍या ऐसी नहीं होती जिसकी कोख में समाधान भी पलता न हो। सिर्फ पहचानने वाला चाहिए। हर समस्‍या की कोख में समाधान भी पलता है, उस समाधान को पकड़ने वाला चाहिए, समस्‍या का समाधान निकल आता है।

मैं चाहूंगा मेरे नौजवान चीजों को देखे तो उसके मन में पहले ये न आए कि यार ऐसा क्यों है। जो सो है सो है, यार ये है ऐसा करेंगे तो ये नहीं रहेगा। हम बदलाव ला सकते हैं। हमारी विचार प्रक्रिया को हम बदले।

पिछले दिनों राष्‍ट्रपति भवन में स्‍कूल के कुछ बच्‍चों को बुलाया गया था। हमारे राष्‍ट्रपति जी ऐसे लोगों को काफी encourage करने के अनेक कार्यक्रम करते रहते हैं। तो उन्‍होंने कहा, मोदी जी एक बार आइए, जरा देखिए। आठवीं, नौवीं, दसवीं कक्षा के बच्‍चे थे और मैंने देखा कि ‘स्‍वच्‍छ भारत’ के विषय में technology क्‍या role कर सकती है, कौन-सी innovative equipment create किया जा सकता है जो स्‍वच्‍छ भारत के लिए next requirement जो process है उसको पूरा कर सके। आठवीं-नौवी कक्षा के बच्‍चों ने ऐसी-ऐसी चीजें बनाई थी, मैं हैरान था। इसका मतलब यह हुआ कि हर समस्‍या का समाधान करने के लिए हमारे पास सामर्थ्‍य होता है।

अगर इंडिया के पास million problem है तो हिन्‍दुस्‍तान के पास billion brain भी है और इसलिए दोस्‍तों नया भवन तो मिलेगा। हिन्‍दुस्‍तान के पूर्वी छोर में ये ज्ञान का सूरज ऐसा तेज होकर के निकले कि पूरे हिन्‍दुस्‍तान को ज्ञान से प्रकाशित कर दे, ये मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Text of PM’s Address at the convocation of Visva Bharti University at Santiniketan in West Bengal
May 25, 2018
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PM Modi describes India’s democratic system of governance as a great teacher, which inspires over 125 crore people
The teachings of the Vedas, which describe the entire world as one nest, or one home, are reflected in the values of Visva Bharati University: PM
India and Bangladesh are two nations, whose interests are linked to mutual cooperation and coordination among each other: PM Modi
Gurudev Rabindranath Tagore is respected widely across the world; he is a global citizen: PM Modi
Institutions such as Visva Bharati University have a key role to play in the creation of a New India by 2022: PM Modi

मंच पर विराजमान बंग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी, पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल श्रीमान केसरी नाथ जी त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी जी, विश्‍व भारती के उपाचार्य प्रोफेसर सबूज कोली सेन जी और रामकृष्‍ण मिशन विवेकानंद इंस्‍टीटयूट के उपाचार्य पूज्‍य स्‍वामी आत्‍मप्रियानंद जी और यहां मौजूद विश्‍व भारती के अध्‍यापकगण और मेरे प्‍यारे युवा साथियों।

मैं सबसे पहले विश्‍व भारती के चांसलर के नाते आप सबकी क्षमा मांगता हूं। क्‍योंकि जब मैं रास्‍ते में आ रहा था। तो कुछ बच्‍चे इशारे से मुझे समझा रहे थे कि पीने का पानी भी नहीं है। आप सबको जो भी असुविधा हुई है। चांसलर के नाते ये मेरा दायित्‍व बनता है और इसलिए मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूं।

प्रधानमंत्री होने के नाते मुझे देश के कई विश्‍वविद्यालयों के convocation में हिस्‍सा लेने का अवसर मिला है। वहां मेरी सहभागिता अतिथि के रूप में होती है लेकिन यहां मैं एक अतिथि नहीं बल्कि आचार्य यानि चांसलर के नाते आपके बीच में आया हूं। यहां जो मेरी भूमिका है वो इस महान लोकतंत्र के कारण है। प्रधानमंत्री पद की वजह से है। वैसे ये लोकतंत्र भी अपने आप में एक आचार्य तो है जो सवा सौ करोड़ से अधिक हमारे देशवासियों को अलग-अलग माध्‍यमों से प्रेरित कर रहा है। लोकतांत्रिक मूल्‍यों के आलोक में जो भी पोषित और शिक्षित होता है वो श्रेष्‍ठ भारत और श्रेष्‍ठ भविष्‍य के निर्माण में सहायक होता है।

हमारे यहां कहा गया है। कि आचार्यत विद्याविहिता साघिष्‍ठतम प्राप्‍युति इति यानि आचार्य के पास जाएं उसके बगैर विद्या, श्रेष्‍ठता और सफलता नहीं मिलती। ये मेरा सौभाग्‍य है कि गुरुदेव रविन्‍द्र नाथ ठाकुर की इस पवित्र भूमि पर इतने आचार्यों के बीच मुझे आज कुछ समय बिताने का सौभाग्‍य मिला है।

जैसे किसी मंदिर के प्रागंन में आपको मंत्रोच्‍चार की ऊर्जा महसूस होती है। वैसी ही ऊर्जा मैं विश्‍व भारती, विश्‍वविद्यालय के प्रागंन में अनुभव कर रहा हूं। मैं जब अभी कार से उतरकर मंच की तरफ आ रहा था तो हर कदम, मैं सोच रहा था कि कभी इसी भूमि पर यहां के कण-कण पर गुरुदेव के कदम पड़े होंगें। यहां कहीं आस-पास बैठकर उन्‍होंने शब्‍दों को कागज पर उतारा होगा। कभी कोई धुन, कोई संगीत गुनगुनाया होगा। कभी महात्‍मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी। कभी किसी छात्र को जीवन का, भारत का, राष्‍ट्र के स्‍वाभिमान का मतलब समझाया होगा।

साथियों, आज इस प्रागंण में हम परंपरा को निभाने के लिए एकत्र हुए हैं। यह अमरकुंज लगभग एक सदी से ऐसे कई अवसरों का साक्षी रहा है। बीते कई वर्षों से जा आपने यहां सीखा उसका एक पड़ाव आज पूरा हो रहा है। आपमें से जिन लोगों को आज डिग्री मिली है उनको मैं ह्दयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और भविष्‍य के लिए असीम शुभकामनाएं मैं उनको देता हूं। आपकी ये डिग्री, आपकी ये शैक्षिणिक योग्‍यता का प्रमाण है। इस नाते ये अपने-आप में महत्‍वपूर्ण है। लेकिन आपने यहां सिर्फ ये डिग्री ही हासिल की है ऐसा नहीं है। आपने यहां से जो सीखा, जो पाया वो अपने आप में अनमोल है। आप एक समृद्ध विरासत के वारिस है। आपका नाता एक ऐसी गुरु शिष्‍य परंपरा से है। जो जितनी पुरातन है उतनी ही आधुनिक भी है।

वैदिक और पौराणिक काल में जिसे हमारे ऋषियों-मुनियों ने सींचा। आधुनिक भारत में उसे गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर जैसे मुनिषयों ने आगे बढ़ाया। आज आपको जो ये सप्‍तपरिणय का गुच्‍छ दिया गया है। ये भी सिर्फ पते नहीं है। बल्कि एक महान संदेश है। प्र‍कृति किस प्रकार से हमें एक मनुष्‍य के नाते, एक राष्‍ट्र के नाते उत्‍तम सीख दे सकती है। ये उसी का एक परिचायक, उसकी मिसाल है। यही तो इस अप्रतिम संस्‍था के पीछे की भावना, यही तो गुरुदेव के विचार हैं, जो विश्‍व भारती की आधारशिला बनी।

भाईयों और बहनों यत्र विश्‍वम भवेतेक निरम यानि सारा विश्‍व एक घोसला है, एक घर है। ये वेदों की वो सीख है। जिसको गुरुदेव ने अपने बेशकीमती खजाने के विश्‍व भारती का धैय वाक्‍य बनाया है। इस वेद मंत्र में भारत की समृद्ध परंपरा का सार छुपा है। गुरुदेव चाहते थे कि ये जगह उद्घोषणा बने जिसको पूरा विश्‍व अपना घर बनाए। घोसले और घरोंदों को जहां एक ही रूप में देखा जाता है। जहां संपूर्ण विश्‍व को समाहित करने की भावना हो। यही तो भारतीयता है। यही वसुधैव कुटुम्‍बकम् का मंत्र है। जो हजारों वर्षों से इस भारत भूमि से गुंजता रहा और और इसी मंत्र के लिए गुरुदेव ने पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।

साथियों वेदों, उपनिषदों की भावना जितनी हजारों साल से पहले से सार्थक थी उतनी ही सौ साल पहले जब गुरुदेव शांति निकेतन में पधारे। आज 21वीं सदी की चुनौतियों से जुझते विश्‍व के लिए भी ये उतनी ही प्रासंगिक है। आज सीमाओं के दायरे में बंधे राष्‍ट्र एक सच्‍चाई है। लेकिन ये भी सच है इस भू-भाग की महान परंपरा को आज दुनिया globalization के रूप में जी रही है। आज यहां हमारे बीच में बंग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी भी मौजूद हैं। शायद ही कभी ऐसा मौका आया हो। कि एक convocation में दो देश के प्रधानमंत्री मौजूद हों।

भारत और बंग्‍लादेश दो राष्‍ट्र हैं लेकिन हमारे हित एक-दूसरे के साथ समन्‍वय और सहयोग से जुड़े हुए हैं। culture हो या public policy हम एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इसी का एक उदाहरण बंग्‍लादेश भवन है। जिसका थोड़ी में हम दोनों वहां जाकर के उद्घाटन करने वाले हैं। ये भवन भी गुरुदेव के vision का ही प्रतिबिंब है।

साथियों, मैं कई बार हैरान रह जाता हूं। जब देखता हूं कि गुरुदेव का व्‍यक्तित्‍व का ही नहीं बल्कि उनकी यात्राओं का विस्‍तार भी कितना व्‍यापक था। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान मुझे अनेक ऐसे लोग मिलते हैं। जो बताते हैं कि टैगोर कितने साल पहले उनके देश में आए थे। उन देशों में आज भी बहुत सम्‍मान के साथ गुरुदेव को याद किया जाता है। लोग टैगोर के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश करते हैं।

अगर हम अफगानिस्‍तान जाएं तो काबुली वाला की कहानी का जिक्र हर अफगानिस्‍तानी करता ही रहता है। बड़े गर्व के साथ करता है। तीन साल पहले जब मैं तजाकिस्‍तान गया तो वहां पर मुझे गुरुदेव की एक मूर्ति का लोकार्पण करने का भी अवसर मिला था। गुरुदेव के लिए वहां के लोगों में जो आदर भाव मैंने देखा वो मैं कभी भूल नहीं सकता।

दुनिया के अनेक विश्‍वविद्यालयों में टैगोर आज भी अध्‍ययन का विषय है। उनके नाम पर chairs हैं अगर मैं कहूं कि गुरुदेव पहले भी ग्‍लोबल सि‍टिजन थे और आज भी है। तो गलत नहीं होगा। वैसे आज इस अवसर पर उनका गुजरात से जो नाता रहा उसका वर्णन करने के मोह से मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। गुरुदेव का गुजरात से भी एक विशेष नाता रहा है। उनके बड़े भाई सत्‍येंद्रनाथ टैगोर जो सिविल सेवा join करने वाले पहले भारतीय थे। काफी समय वे अहमदाबाद में भी रहे। संभवत: वो तब अहमदाबाद के कमीशनर हुआ करते थे। और मैंने कहीं पढ़ा था। कि पढ़ाई के लिए इंगलैंड जाने से पहले सत्‍येंद्रनाथ जी अपने छोटे भाई को छ: महीने तक अंग्रेजी साहित्‍य के अध्‍ययन वहीं अहमदाबाद में कराया था। गुरुदेव की आयु तब सिर्फ 17 साल की थी। इसी दौरान गुरुदेव ने अपने लोकप्रिय नोवल खुदितोपाशान के महत्‍वपूर्ण हिस्‍से और कुछ कविताएं भी अहमदाबाद में रहते हुए लिखी थी। यानि एक तरह से देखें तो गुरुदेव के वैश्विक पटल पर जीत स्‍थापित होने में एक छोटी सी भूमिका हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने की रही है, उसमें गुजरात भी एक है।

साथियों, गुरुदेव मानते थे कि हर व्‍यक्ति का जन्‍म किसी न किसी लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए होता है। प्रत्‍येक बालक अपनी लक्ष्‍य प्राप्ति की दिशा में बढ़ सके इसके लिए योग्‍य उसे बनाना इसमें शिक्षा का महत्‍वपूर्ण योगदान है। वो बच्‍चों के लिए कैसी शिक्षा चाहते थे। उसकी झलक उनकी कविता power of affection में हम अनुभव कर सकते हैं। वो कहते थे कि शिक्षा केवल वही नहीं है जो विद्यालय में दी जाती है। शिक्षा तो व्‍यक्ति के हर पक्ष का संतुलित विकास है जिसे समय और स्‍थान के बंधन में बांधा नहीं जा सकता है। और इसलिए गुरुदेव हमेशा चाहते थे कि भारतीय छात्र बाहरी दुनिया में भी जो कुछ हो रहा है उससे भली-भांति परिचित रहे। दूसरे देशों के लोग कैसे रहते हैं, उनके सामाजिक मूल्‍य क्‍या हैं, उनकी सांस्‍कृतिक विरासत क्‍या है। इस बारे में जानने पर वो हमेशा जोर देते थे। लेकिन इसी के साथ वो ये भी कहते थे। कि भारतीयता नहीं भूलनी चाहिए।

मुझे बताया गया है कि एक बार अमेरिका में agriculture पढ़ने गए अपने दामाद को चिट्ठी लिखकर भी उन्‍होंने ये बात विस्‍तार से समझायी थी। और गुरुदेव ने अपने दामाद को लिखा था कि वहां सिर्फ कृषि की पढ़ाई ही काफी नहीं है। बल्कि स्‍थानीय लोगों से मिलना-जुलना ये भी तुम्‍हारी शिक्षा का हिस्‍सा है। और आगे लिखा लेकिन अगर वहां के लोगों को जानने के फेर में तुम अपने भारतीय होने की पहचान खोने लगो तो बेहतर है कि कमरे में ताला बंद करके उसके भीतर ही रहना।

भारतीय राष्‍ट्रीय आंदोलन में टैगोर जी का यही शैक्षणिक और भारतीयता में ओतप्रोत दर्शन एक दूरी बन गया था। उनका जीवन राष्‍ट्रीय और वैश्विक विचारों का समावेश था जो हमारी पुरातन परंपराओं का हिस्‍सा रहा है। ये भी एक कारण रहा कि उन्‍होंने यहां विश्‍व भारती में शिक्षा की अलग ही दुनिया का सर्जन किया। सादगी यहां की शिक्षा का मूल सिद्धांत है। कक्षाएं आज भी खुली हवा में पेड़ों के नीचे चलाई जाती हैं। जहां मनुष्‍य और प्रकृति के बीच सीधा संवाद होता है। संगीत, चित्रकला, नाट्य अभिनय समेत मानव जीवन के जितने भी आयाम होते हैं, उन्‍हें प्रकृति की गोद में बैठकर निखारा जा रहा है।

मुझे खुशी है कि जिन सपनों के साथ गुरुदेव ने इस महान संस्‍थान की नींव रखी थी। उनको पूरा करने की दिशा में ये निरंतर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा को skill development से जोड़कर और उसके माध्‍यम से सामान्‍य मानवी के जीवन स्‍तर को उपर उठाने का उनका प्रयास सराहनीय है।

मुझे बताया गया है यहां के लगभग 50 गांवों में आप लोगों ने साथ मिलकर, आप उनके साथ जुड़कर के विकास के सेवा के काम कर रहे हैं। जब आपके इस प्रयास के बारे में मुझे बताया गया तो मेरी आशाएं और आंकाक्षाएं आपसे जरा बढ़ गई हैं। और आशा उसी से बढ़ती है जो कुछ करता है। आपने किया है इसलिए मेरी आपसे अपेक्षा भी जरा बढ़ गई हैं।

Friends 2021 में इस महान संस्‍थान के सौ वर्ष पूरे होने वाले हैं आज जो प्रयास आप 50 गांव में कर रहे हैं क्‍या अगले दो-तीन वर्षों में इसको आप सौ या दौ सौ गांव तक ले जा सकते हैं। मेरा एक आग्रह होगा कि अपने प्रयासों को देश की आवश्‍यकताओं के साथ ओर जोडि़ए। जैसे आप ये संकल्‍प ले सकते हैं कि 2021 तक जब इस संस्‍थान की शताब्‍दी हम मनाएगें, 2021 तक ऐसे सौ गांव विकसित करेंगे यहां के हर घर में बिजली कनेक्‍शन होगा, गैस कनेक्‍शन होगा, शौचालय होगा, माताओं और बच्‍चों का टीकाकरण हुआ होगा, घर के लोगों को डिजिटल लेनदेन आता होगा। उन्‍हें कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर महत्‍वपूर्ण फार्म ऑनलाइन भरना आता होगा।

आपको ये भली भांति पता है कि उज्‍ज्‍वला योजना के तहत दिए जा रहे गैस कनेक्‍शन और स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालयों ने महिलाओं की जिंदगी आसान करने का काम किया है। गांवों में आपके प्रयास, शक्ति की उपासक, इस भूमि में नारी शक्ति को सशक्‍त करने का काम करेगा और इसके अलावा ये भी प्रयास किया जा सकता है। कि इन सौ गांवों को प्रकृति प्रेमी, प्रकृति पूजन गांव कैसे बनाया जाए। जैसे आप प्रकृति के सरंक्षण की तरह हैं, कार्य करते हैं। वैसे ही ये गांव भी आपके मिशन का हिस्‍सा बनेगा। यानि ये सौ गांव उस विजन को आगे बढ़ाएं जहां जल भंडारण की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍थाएं विकसित करके जल सरंक्षण किया जाता हो। लकड़ी न जलाकर वायु संरक्षण किया जाता हो। स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखते हुए प्राकृतिक खाद्य का उपयोग करते हुए भूमि संरक्षण किया जा सकता है।

भारत सरकार की गोबर धन योजना का भरपूर फायदा उठा जा सकता है। ऐसे तमाम कार्य जिनकी चेक लिस्‍ट बनाकर आप उन्‍हें पूरा कर सकते हैं।

साथियों, आज हम एक अलग ही विषय में अलग ही चुनौतियों के बीच जी रहे हैं। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2022 तक जबकि आजादी के 75 साल होंगे। न्‍यू इंडिया बनाने का संकल्‍प लिया है। इस संकल्‍प की सिद्धि में शिक्षा और शिक्षा से जुड़ें आप जैसे महान संस्‍थानों की अहम भूमिका है। ऐसे संस्‍थानों से निकले नौजवान देश को नई ऊर्जा देते हैं। एक नई दिशा देते हैं। हमारे विश्‍वविद्यालय सिर्फ शिक्षा के संस्‍थान न बने। लेकिन सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी हो, इसके लिए प्रयास निरंतर जारी है।

सरकार द्वारा उन्‍नत भारत अभियान के तहत विश्‍वविद्यालयों को गांव के विकास के साथ जोड़ा जा रहा है। गुरुदेव के विजन के साथ-साथ न्‍यू इंडिया की आवश्‍यकताओं के अनुसार हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है।

इस बजट में revitalizing infrastructure & system in education यानि RISE नाम से एक नई योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके तहत अगले चार साल में देश के education system को सुधारने के लिए एक लाख करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। Global Initiative of Academic Network यानि ज्ञान भी शुरू किया गया। इसके माध्‍यम से भारतीय संस्‍थाओं ने पढ़ाने के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्‍ठ शिक्षकों को आमंत्रित किया जा रहा है।

शैक्षिक संस्‍थाओं को पर्याप्‍त सुविधाएं मिलें इसके लिए एक हज़ार करोड़ रुपये के निवेश के साथ Higher Education Financing Agency शुरू की गई है। इससे प्रमुख शैक्षिक संस्‍थाओं में High Quality Infrastructure के लिए निवेश में मदद मिलेगी। कम उम्र में ही Innovation का mindset करने के लिए अब उस दिशा में हमें देश भर में 2400 स्‍कूलों को चुना। इन स्‍कूलों में Atal Tinkering Labs के माध्‍यम से हम छठी से 12वीं कक्षा के छात्रों पर फोकस कर रहे हैं। इन Labs में बच्‍चों को आधुनिक तकनीक से परिचित करवाया जा रहा है।

साथियों आपका ये संस्‍थान education में innovation का जीवन प्रमाण है। मैं चाहूंगा कि विश्‍व भारती के 11000 से ज्‍यादा विद्यार्थी innovation को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजनाओं का ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ उठाएं। आप सभी यहां से पढ़कर निकल रहे हैं। गुरुदेव के आर्शीवाद से आपको एक विजन मिला है। आप अपने साथ विश्‍व भारती की पहचान लेकर के जा रहे हैं। मेरा आग्रह होगा आपसे इसके गौरव को और ऊंचा करने के लिए आप निरंतर प्रयास करते रहें। जब समाचारों में आता है कि संस्‍थान के छात्र ने अपने innovation के माध्‍यम से, अपने कार्यों से 500 या हजार लोगों की जिंदगी बदल दी तो लोग उस संस्‍थान को भी नमन करते हैं।

आप याद रखिए, जो गुरुदेव ने कहा था “जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐशे तबे एकला चलो रे” अगर आपके साथ चलने के लिए कोई तैयार नहीं है तब भी अपने लक्ष्‍य की तरफ अकेले ही चलते रहो। लेकिन आज मैं यहां आपको यह कहने आया हूं। कि अगर आप एक कदम चलेंगे तो सरकार चार कदम चलने के लिए तैयार है।

जनभागीदारी के साथ बढ़ते हुए कदम ही हमारे देश की 21वीं सदी में उस मकाम तक ले जाएगें जिसका वो अधिकारी है। जिसका सपना गुरुदेव ने भी देखा था।

साथियो गुरुदेव ने अपने निधन से कुछ समय पहले गांधी जी को कहा था कि विश्‍व भारती वो जहाज है। जिसमें उनके जीवन का सबसे बहुमूल्‍य खजाना रखा हुआ है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई थी कि भारत के लोग हम सभी इस बहुमूल्‍य खजाने को संजोकर रखें। तो इस खजाने को न सिर्फ संजोने बल्कि इसको और समृद्ध करने की बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी हम सब पर है। विश्‍व भारती विश्‍वविद्यालय न्‍यू इंडिया के साथ-साथ विश्‍व को नए रास्‍ते दिखाती रहे। इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं।

आप अपने, अपने माता-पिता, इस संस्‍थान और इस देश के सपनों को साकार करें इसके लिए आपको एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।