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21st century is the century of knowledge, says Prime Minister Modi
India has the potential to become the manufacturing hub for the world: PM Narendra Modi
In history, whenever knowledge has been the driving force of the world, India has provided leadership: PM Modi
Today India is demographically the youngest country in the world, with young dreams full of energy: PM Narendra Modi
The current generation of youngsters don't want to be job seekers. The youth wants to be job creators: PM Modi
Global agencies say India is the fastest growing economy in the world: PM

मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, नौजवान साथियों, और इस समय online नॉर्थ ईस्‍ट के कई विद्यार्थी भी इस समारोह में शरीक हैं। मैं उन सबका भी स्‍वागत करता हूं।

सब से पहले मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मुझे आने में बहुत विलंब हुआ, क्‍योंकि आज सुबह सिक्किम से मुझे चलना था। लेकिन weather साथ नहीं दे रहा था। बार बार समय बदलना पड़ रहा था। लेकिन आखिकार पहुंच ही गया। कभी-कभी देर होती है, लेकिन पहुंचता हूं। आज यहां दो महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हैं। एक तो IIIT का, नये भवन का शिलान्‍यास और दूसरा ICT Academy की शुरूआत। हम सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है, लेकिन 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है इसका कारण क्‍या है। तो पूरा विश्‍व ये मानता है कि 21वीं सदी ये ज्ञान की सदी है। information की सदी है और इसलिए information , knowledge के क्षेत्र में जो अगुवाई करेगा वो दुनिया की अगुवाई करेगा। वो लीडरशिप करेगा और दूसरा महत्‍वपूर्ण कारण है आज भारत विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसख्‍ंया इस देश में 35 साल से कम उम्र की है, कई तो 35 से भी नीचे है। जिस देश मे सदियों से यह परंपरा रही है कि जब-जब मानव जाति नाजुक दौर से गुजरी है हमेशा हमेशा भारत ने नेतृत्‍व किया है और 21वीं सदी में demographic dividend ये हमारी ताकत है इतनी बड़ी संख्‍या में जिस देश के पास नौजवान हों उसके सपने भी नौजवान होते हैं और जवान सपनों में समर्पण का भाव भी होता है, ऊर्जा भी होती है। भारत इस परिस्थिति का फायदा कैसे उठाए, इस अवसर को भारत किस प्रकार से दुनिया के विश्‍व के पटल पर एक शक्ति के रूप में उभर सकें। ये अवसर भी है, चुनौती भी है और जिंदगी बिना चुनौतियों के कभी सफल नहीं होती है। जो चुनौतियों को पार करता है वो ही अवसर को पाता है और वही अवसर को सिद्धि में परिवर्तित कर सकता है। आज पूरे विश्‍व में जितने भी मानको पर चर्चा होती है चाहे वर्ल्‍ड बैंक का रिपोर्ट देख लीजिए। IMF का रिपोर्ट देख लीजिए। credit rating agency, global level की कुछ कहें, एक बात साफ साफ उभर करके आती है और सर्व दूर से एक ही प्रकार से आती है और वो ये कि आज बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कोई economy है। वो economy का नाम है हिन्‍दुस्‍तान।

आए दिन खबरें आती है कि दुनिया में ये हो रहा है। वो हो रहा है। पूरे विश्‍व में आर्थिक मंदी का माहौल है। विश्‍व आर्थिक संकट में घिरा हुआ है। ऐसे संकट के काल में एक अकेला हिन्‍दुस्‍तान अपने पैरों पर स्थिर खड़ा है और तेज गति से आगे भी बढ़ रहा है और ये भी विश्‍व मानता है कि आने वाले दिनों में भारत इससे भी अधिक गति से आगे बढ़ने वाला है। ये जो अवसर आया है। इस अवसर का फायदा अगर उठाना है। तो हमें हमारी युवा शक्ति पर ध्‍यान केन्द्रित करना होगा और इसलिए सरकार ने जिन बातों पर ध्‍यान दिया है वे बिखरी हुई चीजें नहीं हैं। सरकार में हैं कुछ करना पड़ता है चलो कुछ करते रहें ऐसा भी नहीं हैं। एक के बाद एक कदम एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं, interlinked हैं। एक के बाद एक कदम अंतिम परिणाम को प्राप्‍त करने का अवसर है। पहली बार इस देश में skill development एक अलग department बनाया गया। पहले क्‍या था। हर department अपने-अपने तरीके से skill department का काम करता था। लेकिन जब इतने बड़े department के एक कोने में skill department चलता है तो उसमें focus नहीं रहता था। चीजें चलती थी, कागज पर सब दिखता था। लेकिन धरती पर नजर नहीं आता था। हमने अलग skill department बनाया और पूरे देश में 21वीं सदी के अनुकूल किस प्रकार का मैन पावर तैयार करना चाहिए, किस प्रकार का Human resource development करना चाहिए और न सिर्फ हिन्‍दुस्‍तान वैश्विक संदर्भ में global perspective में आप कल्‍पना कर सकते हैं जब दुनिया पूरी बूढ़ी हो, दुनिया के पास पैसे हों। उद्योग कारखाने लगे हुए हों। लेकिन चलाने के लिए नौजवान न हो तो क्‍या होगा। पूरी विश्‍व को 2030 के बाद बहुत बड़ी मात्रा में human resource की आवश्‍यकता पड़ने वाली है। globally man power पहुंचाने का काम अगर कोई कर सकता है तो हिन्‍दुस्‍तान कर सकता है। दूनिया के हर कोने में भारत का नौजवान जा करके उस देश के जीवन में बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। वो दिन दूर नहीं है। जब पूरे global requirement को अगर ध्‍यान में रखें तो आज से हमारा प्रयास है कि हिन्‍दुस्‍तान में वो Human resource development हो वो man power तैयार हो जो आने वाले दिनों में global requirement को पूरी कर पाएं।

दूसरी तरफ भारत सिर्फ सेवादार बना रहे क्‍या ? ये बात हमें मंजूर नहीं है और इसलिए हमारे देश में Make in India का अभियान चलाया है। आज देश पेट्रोलियम पैदावार के बाद सबसे ज्‍यादा इम्‍पोर्ट जो पहली तीन चार चीजें हैं देश में जिसमे हमारी सबसे ज्‍यादा धन हमारे विदेश में जाता है। उसमें एक है electronic goods का import। चाहे लैपटॉप हो, चाहे मोबाइल फोन हो, चाहे electronic medical devices हो। अब जिस देश में ऐसी बढि़या IIT हो जिस गुवाहाटी के IT के, जो गुवाहाटी यहाँ के IIT के कारण पहचाना जाता है। यहां के IIT ने गुवाहाटी को एक नई पहचान दी है। लेकिन उस देश में electronic goods भी हमें इम्‍पोर्ट करना पड़े । ये अच्‍छी बात है क्‍या। Thermometer भी बाहर से लाना है। बीपी कम हुआ ठीक हुआ नहीं ठीक हुआ वो भी foreign का instrument तय करेगा क्‍या।

दोस्‍तों ये चीजे बदलनी है। मैं आज आपके बीच आया हूं चुनौती को ले करके, कम से कम electronic goods ये तो हम बना सकते हैं ऐसा नहीं हम दुनिया को दे सकते हैं। इस देश के पास टेलेंट की कमी नहीं है, इरादों की भी कमी नहीं है। हर नौजवान के पास कुछ न कुछ करने का इरादा है तो क्‍यों न हम हमारे देश की इस requirement को ध्यान में रखते हुए मेक इन इंडिया की बात को आगे बढ़ाएं। और दुनिया ने भारत के लोगों का लोहा माना है। आज सिलिकॉन मेले में जाइए। Address तो यूएसए का है। लेकिन चेहरा हिन्‍दुस्‍तानी है। हर तीसरी चौथी कंपनी का सीईओ हिन्‍दुस्‍तानी है। 50 परसेंट 60 परसेंट काम करने वाले नौजवान हिन्‍दुस्‍तानी है। इस देश के पास टेलेंट भी है।

भारत ने Mars Mission किया। ऑरबिट में हम पहुंचे। दूनिया में हम पहले देश हैं जो Mars Orbit Mission में पहले ही ट्रायल में सफल हो गये। दुनिया के और देशों में सफलता 20-20-25 बार ट्रायल करने पर मिली। भारत को पहली बार मिल गई। और खर्चा कितना आप गुवाहाटी में एक किलोमीटर ऑटो रिक्‍शा में जाए तो दस रुपया लगता होगा। हम मार्स मिशन में सिर्फ सात रुपए किलोमीटर पर गए। हॉलीवुड की फिल्‍म का जो खर्चा होता है उससे कम खर्चें में हम मार्स मिशन पर पहुंचे। ये कैसे संभव हुआ। हमारे नौजवानों के talent के कारण, तजुर्बे के कारण। कुछ कर गुजरने के इरादे के कारण। जिस देश के पास ये सामर्थ्‍य हो तो वो देश का प्रधानमंत्री make in India का सपना क्‍यों न देखे। हमारा दूसरा क्षेत्र है Defence. क्‍या भारत अपनी सुरक्षा के लिए आजादी के 70 साल के बाद भी औरों पर dependent रहे। अश्रु गैस है न अश्रु गैस, रोने के लिए भी tear gas, वो भी बाहर से लाना पड़ता है। ये स्‍थिति अब बदलनी है दोस्‍तों। हम हमारी रक्षा के लिए जो आवश्‍यकताएं हैं वो तो हम बनाएं। इतना ही नहीं दुनिया को हम supply भी करे, ये ताकत हमारी होनी चाहिए।

हम मोबाइल के बिना जी नहीं सकते और आप में से कई लोग है, मेरे से जुड़े हुए हैं, फेसबुक पर, ट्वीटर पर। कुछ लोग मेरी Narendra Modi app पर भी कुछ न कुछ लिखते रहते हैं गुवाहाटी से। लेकिन मोबाइल फोन बाहर से लाना पड़ता है और इसलिए दोस्‍तों हमारे जो IITs है। हमारी IIIT है। हमारी technical institutions है। वहां make in India का मुझे माहौल create करना है। अभी से विद्यार्थी के मन में विचार होना चाहिए कि मैं शस्‍त्रार्थों की दुनिया में भारत को ये अमानत दूंगा ताकि दुनिया हमें कुछ न कर पाए।

हम ICT के क्षेत्र में जा रहे हैं। ICT हम व्‍यापार-धंधे के लिए नए-नए सॉफ्टवेयर बनाने की ताकत create कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और सारी दुनिया के सामने है। वो चुनौती है, cyber security की। हर कोई परेशान है, कहीं कोई हाई-जैक तो नहीं कर लेगा। मेरी पूरी फाइल चली तो नहीं जाएगी। मैं research कर रहा हूं, कोई उठा तो नहीं ले जाएगा। दुनिया को कोई ठप्‍प तो नहीं कर देगा। हवाई जहाज उड़ता होगा और cyber attack करके उसको वही रोक दिया जा सकता है और फिर वो नीचे ही आएगा। ये संकट है, दुनिया डरी हुई है। technology ने जहां-जहां पर हमको पहुंचाया है तो उसके साथ हमारे सामने चुनौतियां भी आई हैं। क्‍या हमारे विद्यार्थी, हमारे नौजवान विश्‍व को cyber security देने के लिए नेतृत्‍व नहीं कर सकते क्‍या? अगर दुनिया में किसी को भी cyber security की जरूरत होगी, भारत के नौजवान पर उसको भरोसा करना पड़ेगा, तब जाकर के उसका काम होगा। ये नहीं कर सकते क्‍या?

और इसलिए दोस्‍तों skill development से लेकर के make in India. दो दिन पहले आप में से कई लोग शायद मेरे साथ वीडियो कॉंफ्रेंस में जुड़े हुए होंगे। जब मैं दो दिन पहले दिल्‍ली में ‘स्‍टार्ट-अप’ का आरंभ किया। जब मैं पहले ‘स्‍टार्ट-अप’ कह रहा था तो कुछ लोगों को तो पता ही नही पड़ता, क्‍या कह रहा है ये। ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’. जब लालकिले से हमने कहा तो ऐसे ही आकर के चला गया विषय। पता ही नहीं चला, कहीं रजिस्‍टर्ड ही नहीं हुआ। लेकिन अभी जब ‘स्‍टार्ट-अप’ का कार्यक्रम हुआ, लाखों नौजवानों ने रजिस्‍ट्रेशन कराया। एक नया mood बना है, देश में। नौजवान सोच रहा है मैं रोजगार के लिए apply नहीं करूंगा, मैं अपने पैरों पर नई चीज खोजकर के दुनिया के बाजार में ले आऊंगा, नए तरीके से ले आऊंगा।

‘स्‍टार्ट-अप’ का एक माहौल बना है। वर्तमान में जो नई पीढ़ी है वो job-seeker नहीं बनना चाहती है, वो job-creator बनना चाहती है और सरकार ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’ के भरोसे उसे बल देना चाहती है और इसलिए अभी आपने देखा होगा, हमने कई नई योजनाएं घोषित की है, नए initiative लिए हैं क्‍योंकि भारत दुनिया का ‘स्‍टार्ट-अप’ का capital बन सकता है जिस देश के पास इतनी talent हो, वो दुनिया का capital बन सकता है और मैंने ये देखा, आपने भी शायद टीवी पर इन चीजों को ध्‍यान से देखा होगा, नहीं देखा होगा तो इंटरनेट पर सारी चीजें इन दिनों available है। 22-25-27-30 साल के नौजवान अरबों-खरबों रुपयों का व्‍यापार करने लगे हैं और दो-तीन साल में करने लगे हैं और पांच हजार- दस हजार- 25 हजार लोगों को रोजगार दे रहे हैं just अपना दिमाग और technology का उपयोग करते हुए।

और जमाना App का है, हर चीज का App बनता है और दुनिया जुड़ जाती है। मैं भी अब जुड़ गया लेकिन हमारे नौजवानों की जो बुद्धिमत्‍ता है वो कुछ कर गुजरने की बुद्धिमत्‍ता है और इसलिए skill development से लेकर के ‘स्‍टार्ट-अप’ तक की यात्रा Make in India. पहले Make for India और बाद में Make for Global, ये requirement को पूरा करने के लिए हम आगे बढ़ना चाहते हैं और उसमें technical force एक बहुत बड़ी आवश्‍यकता है। हर हाथ में हुनर होना चाहिए। कभी-कभी हम लोग रोते बैठते हैं। हमारे देश में कुछ ये भी आदत है। समस्‍याएं होती है। हर किसी के नसीब में मक्‍खन पर लकीर करने का सौभाग्‍य नहीं होता है। पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत होनी चाहिए और अगर हम अपने आप को युवा कहते हैं तो उसकी पहली शर्त यह होती है कि वो मक्‍खन पर लकीर करने के रास्‍ते न ढूंढे, वो पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत के लिए सोचे। अगर यही इरादे लेकर के हम चलते हैं तो हम अपनी तो जिन्‍दगी बनाते हैं लेकिन कइयों की जिन्‍दगी में बदलाव लाने के लिए कारण भी बनते हैं।

तो भारत में हमारी जितनी भी academic institutions है, technical institutions है, हमारी Universities है। चाहे हमारी आईआईटी हो या हमारी आईटीआई हो, छोटी से छोटी technical इकाई से लेकर के, top most technical venture, इन दोनों के अंदर एकसूत्रता होनी चाहिए और हम देश की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए सामर्थ्‍यवान बने। समस्‍याएं अपने आप उसका रास्‍ता भी खोजकर के आती है। कोई समस्‍या ऐसी नहीं होती जिसकी कोख में समाधान भी पलता न हो। सिर्फ पहचानने वाला चाहिए। हर समस्‍या की कोख में समाधान भी पलता है, उस समाधान को पकड़ने वाला चाहिए, समस्‍या का समाधान निकल आता है।

मैं चाहूंगा मेरे नौजवान चीजों को देखे तो उसके मन में पहले ये न आए कि यार ऐसा क्यों है। जो सो है सो है, यार ये है ऐसा करेंगे तो ये नहीं रहेगा। हम बदलाव ला सकते हैं। हमारी विचार प्रक्रिया को हम बदले।

पिछले दिनों राष्‍ट्रपति भवन में स्‍कूल के कुछ बच्‍चों को बुलाया गया था। हमारे राष्‍ट्रपति जी ऐसे लोगों को काफी encourage करने के अनेक कार्यक्रम करते रहते हैं। तो उन्‍होंने कहा, मोदी जी एक बार आइए, जरा देखिए। आठवीं, नौवीं, दसवीं कक्षा के बच्‍चे थे और मैंने देखा कि ‘स्‍वच्‍छ भारत’ के विषय में technology क्‍या role कर सकती है, कौन-सी innovative equipment create किया जा सकता है जो स्‍वच्‍छ भारत के लिए next requirement जो process है उसको पूरा कर सके। आठवीं-नौवी कक्षा के बच्‍चों ने ऐसी-ऐसी चीजें बनाई थी, मैं हैरान था। इसका मतलब यह हुआ कि हर समस्‍या का समाधान करने के लिए हमारे पास सामर्थ्‍य होता है।

अगर इंडिया के पास million problem है तो हिन्‍दुस्‍तान के पास billion brain भी है और इसलिए दोस्‍तों नया भवन तो मिलेगा। हिन्‍दुस्‍तान के पूर्वी छोर में ये ज्ञान का सूरज ऐसा तेज होकर के निकले कि पूरे हिन्‍दुस्‍तान को ज्ञान से प्रकाशित कर दे, ये मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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बड़ी संख्या में उपस्थित भाइयों और बहनो 

केम छो, बधा ? 

मुझे लगता है कि आज मैदान छोटा पड़ रहा है | बाहर भी कहीं जगह नहीं है | आप को याद है कि यहां आखिरी बार किस प्रधानमंत्री ने मुलाकात की थी? नहीं..., नहीं...., कोई प्रधानमंत्री तो आये होंगे ? चलो, कोई बात नहीं | ये सब मेरे नसीब में ही लिखा है ! 

सबसे पहले मैं अमरेली जिला के सहकारी जगत की प्रशंसा करता हूं | और अब इस में नयी पीढ़ी मैदान में कूद पडी है | एक जमाना था | सहकारी जगत में रतुभाई और सभी महानुभाव सक्रिय थे | सहकारी और राजकीय – दोनों क्षेत्र इन महानुभावो के नियंत्रण में थे | लेकिन पिछले कुछ समय से नयी टीम अमरेली जिला को विकास की नई ऊंचाई पर अग्रसर कर रही है | मैंने अमरेली के एपीएमसी मार्केट की मुलाकात इससे पहले भी ली थी | लेकिन आज हमारे पीपी ने जो कमाल की है और जो मॉडल खड़ा किया है, वो सचमुच काबिलेदाद है | पीपी और उनकी टीम को बहुत बहुत बधाई | 

दिलीपभाई कर्मशील है | कार्य ही उनका जीवन है | वो काम के बिना रह नही सकते | कुछ न कुछ नया करना, कैसे करना ये सब सोचते रहते है | मुझे याद है कि गुजरात में हमारी पूर्व सरकारो ने ऐसे निर्णय लिये थे कि सौराष्ट्र में डेरी उद्योग का कभी विकास ही न हो | कभी आये ही नहीं | कैसी दुर्दशा ! हमने नीतिगत परिवर्तन किये | सबसे पहले दिलीपभाई ने तय किया कि इस स्थिति को बदलेंगे | और आज मुझे संतोष है कि उन्होंने वो काम कर दिखाया | आज पूरे अमरेली पंथक को लाभ हुआ | पूरे अमरेली पंथक के पशुपालको, किसानो, दूध उत्पादन के साथ प्रत्यक्ष-परोक्ष रुप से जुडे हुए लोगो को दूध के लिये उचित बाजार मिला | इतना ही नहीं, उनको दूध के बदले में पर्याप्त और उचित कीमत भी प्राप्त हुई | आज मुझे संतोष इस बात का है कि इतनी सफलता पर काम स्थगित न हुआ, पर एपीएमसी ने आधुनिक टैक्नौलोजी का इस्तमाल किया, सॉइल टेस्टिंग लैब का निर्माण किया, बाजार में आये माल के ग्रेडेशन के लिये लैब बनाई, और भारत सरकार ने जो ई-नाम योजना बनाई है, जिसमें किसान हिन्दुस्तान के कोई भी बाजार में जहां उसको सबसे ज्यादा दाम मिले वह खुदका माल बेच सके उसके लिए भारत सरकार ने एक डिज़िटल प्लेटफॉर्म बनाया है, उस डिज़िटल प्लेटफॉर्म के लिए ग्रेडेशन की लैब अनिवार्य होती है, और वह काम भाई पीपी ने कर दिखाया है। मै 100 प्रतिशत मानता हूँ कि गुजरात के अन्य एपीएमसी के लिए भी अमरेली ने नयी राह दिखाई है, नया मार्ग दिखाया है। मैं उन्हें अभिनन्दन देता हूँ और गुजरात में एपीएमसी की दुनिया में अमरेली सबसे पहला था। और आज छ दशकों के बाद फिर से... अमरेली आधुनिक टेक्नोलॉजी की दुनिया में नयी राह दिखानेवाला पहला बना है, उसके लिए अभिनन्दन के पात्र है। 

आज दो चीजो की तरफ मुझे आप का ध्यान आकर्षित करना है | 

एक तो आज यहां पर sweet revolution मधु क्रांति, यह मधु क्रांति का शुभारंभ हो रहा है और दूसरा गुजरात का 1600 किलोमीटर का समुद्री तट जो Blue revolution को लीड कर सकता है। हमारे मछुआरे भाई-बहन, हमारी सामुद्रिक संपदा वो एक नई क्रांति की मिसाल ले करके आगे बढ़ सकती है और यह दोनों चीजें गुजरात के ग्रामीण और समुद्री तट को एक नया आयाम देने का आरंभ इस योजनाओं से हो रहा है। भारत सरकार की कल्‍पना है कि जैसे white revolution हुआ, green revolution हुआ वैसे sweet revolution यानी मधु क्रांति की भी हमने तेज गति से प्रगति करनी चाहिए और अमरेली जिले ने.. मैंने आपसे करीब आपसे एक-आध साल पहले दिलीप भाई और सबके साथ बात की थी कि जब हम दूध लेने के लिए जाते हैं तो किसानों के यहां से दूध लाते हैं वैसे ही मधु भी collect कर सकते हैं। और अगर कोई अपने यहाँ 50 Bee लगा दे तो साल में कम से कम दो लाख रुपयों का मधु वो बेच सकता है, शहद बेच सकता है। यह अतिरिक्‍त income है और मधुमक्‍खी के होने के कारण खेत की पैदावर में भी बढ़ोत्‍तरी होती है, क्‍योंकि मधु एक प्रकार से पूरक व्‍यवस्‍था मधुमक्‍खी करती है। 

आज मुझे उसका शिलान्‍यास करने का अवसर मिला और दूसरा हिंदुस्‍तान के किसी भी कोने में जाइये तो शुभ काम के अंदर मिठाई खिलाते हैं, गुजरात अकेला है जो शुभ काम में आइसक्रीम खिलाता है और आज अमरेली डेयरी आइसक्रीम का भी प्‍लांट लगा रहा है। दोनों नई योजनाओं के लिए मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएं और करीब चार सौ लाख रुपये इन दो योजनाओं के लिए भारत सरकार की तरफ से मिलेंगे, ताकि यह काम आगे बढ़े। 

मैं किसान भाईयों से आग्रह करूंगा कि मधु क्रांति, शहद, मधु मक्‍खी का पालन खेत में कोई अतिरिक्‍त मेहनत के बिना स्‍वाभाविक रूप से किया जा सकता है और स्‍वाभाविक रूप से हम उसकी अगर व्‍यवस्‍था करें, मार्केटिंग की तो बहुत बड़ी कमाई हो सकती है। और इतना ही नहीं मानो मार्केटिंग नहीं भी हुआ अरे घर में बच्‍चे खाएंगे तो भी शहद सेहत के लिए अच्‍छा होता है। और इसलिए एक मधु क्रांति के लिए पूरे गुजरात में जहां डेयरी का नेटवर्क है उसके साथ यह मधु क्रांति जोड़ करके नये revolution की ओर जाना है। 

भारत का समुद्री तट विशाल है, लेकिन गुजरात का समुद्री तट Blue revolution में बहुत बड़ा contribution करता है। हम water way की तरफ बढ रहे हैं। घोघा दहेज फेरी सर्विस की तरफ बढ़ रहे हैं। हम port development में काम कर रहे हैं, हम port led development में काम कर रहे हैं, हम सामुद्रिक तटीय रास्‍ते से अगर उधर आंध्र के अंदर विशाखा पट्टनम के अंदर सामान भेजना है, तो हमारे मोर्बी के टाइल समुद्री मार्ग से हम पूर्व में कलकत्‍ते तक कम से कम खर्चे से पहुंचा सकते हैं। यानी एक प्रकार से Blue revolution सामुद्रिक शक्ति की ओर बल देने की दिशा में सरकार काम कर रही है, जिसके कारण गुजरात के समुद्री तट पर रहने वाले लोगों की आजीविका में एक बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। गुजरात के समुद्री तट के जो नौजवान हैं उनको नेवी में जाने के लिए प्रोत्‍साहित करना, उनको train करना, उनको guide करना और उसके कारण हमारे समुद्री तट का जो नौजवान है वो भारत माता की सेवा के लिए नेवी में भी जाये, उसके प्रोत्‍साहन के लिए योजनाओं को भी आज भारत सरकार बल दे रही है। 


हमारे रूपाला जी मुझे बता रहे थे कि युवराज मेहता के जाने के बाद यहां एक भी कॉलेज में नई नहीं आई थी। यह सिर्फ हम लोग आए तो यह युवराज भाई मेहता के बाद यहां पर शिक्षा क्षेत्र में revolution का काम हुआ है। Broad gauge railway, National Highway अमरेली के लोगों ने आशा छोड़ दी थी कि कभी मौका आएगा कि नहीं आएगा। दिल्‍ली में आपने मुझे सेवा करने का मौका दिया आपकी दोनों मांगे आज तेजी गति से आगे बढ़ रही है। 

भाईयो-बहनो, 2022 हमारी आज़ादी के 75 साल हो रहे हैं | अमरेली जिला आज़ादी के आंदोलन में आगे रहनेवाले ज़िलो में, अमरेली जिला रहा है और 2022, आज़ादी के 75 साल कैसे मनायें, आज़ादी के लिए लडाई लडनेवालों को कैसा भारत दें, उनके सपनों का भारत कैसे दें, मुझे लगता है कि यह जो समय है, अपना अमरेली ज़िला, अमरेली की नगरपालिकाएं, अमरेली ज़िले की तहसील पंचायत, अमरेली की ज़िला पंचायत, ग्राम-पंचायतें, सहकारी संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थाएं, सामाजिक संस्थाएं संकल्प करें कि 2022, पांच साल के अंदर हमारे द्वारा हम इतना करके, देश को हम इतना दे कर ही रहेंगे, यह संकल्प करें और पांच साल में रोज़ का कौनसा कार्यक्रम होगा, वह करके परिपूर्ण करें, संकल्प से सिद्धी की यात्रा हम परिपूर्ण करें | हमारा सपना है कि 2022 में हमारे देश के किसान की आय दुगनी हो जाये | 

भाईयो-बहनो, अगर योजनाबद्ध तरीके से हम आगे बढें, सुनिश्चितता से आगे बढें, तो हिन्दुस्तान के किसान में ताक़त है कि सरकार, समाज, किसान साथ मिलकर यह सिद्धी को प्राप्त कर सकें | पर उसके लिए परंपरागत जो पद्धतियां है उनसे हटकर आधुनिकता की ओर जाना पडेगा | नई चीजों का स्वीकार करना पडेगा | आज नर्मदा योजना परिपूर्ण हुई, वह गौरवपूर्ण दिन है गुजरात के जीवन का | अत्यंत गौरवपूर्ण दिन है यह, पर नर्मदा का पानी अगर टपक सिंचाई से उपयोग करने की आदत रखें, हमारी खेती का प्रकार टपक सिंचाई से जोडकर करें, तो सिर्फ हमारा ही नहीं, आनेवाले 100 साल तक हमारी पीढ़ियों का हम भला कर सकेंगे और इसलिए हमने नर्मदा के पानी का उस तरह से उपयोग करने का हमने सुनिश्चित किया है | गुजरात ने बडा कदम उठाया है | देश में टपक सिंचाई का जो काम चल रहा है, उसमें से 25 प्रतिशत सिर्फ गुजरातने करके दिखाया है वह गुजरात के किसान अभिनंदन के पात्र है | पर बात वहीं से नहीं अटकती | अभी भी बहुत कुछ करने का अवकाश है और उस दिशा में हम प्रयास करें | कृषि के साथ दूसरी दो चीज़े | अनेक किसान सोलर पम्प की दिशा में गये है | एक रूपया बिजली का बिल आयेगा ही नहीं | खुद के खेत में सोलर पेनल लगाना, उसी से पम्प चलाना, पानी उसी से निकालना, किसान का बिजली का बिल बच जाये और किसान को हज़ारो रूपये का खर्चा बच जायेगा | अनेक किसान बडे पैमाने पर अब सूर्यशक्ति से चलनेवाले पम्प की ओर बढ रहे है | टपक सिंचाई हो, सोलर पम्प हो, सूर्यशक्ति से चल सके ऐसी बिजली की व्यवस्था हो, आप ही मुझे बताइये कि खर्चा कम होगा या नहीं होगा ? आय बढेगी कि नहीं बढेगी ? और हमारी ज़मीन का सद उपयोग हो और इसलिए मेरी किसानो से विनती है कि इस दिशा में भी वह आगे आये | और सहकारी आंदोलन करने वाले मित्र इसमें भी आगे बढ सकें | सभी किसान इकट्ठा होकर खेत के करीब सोलर पेनल लगाकर, साथ मिलकर बिजली का उत्पादन करें और इसके कारण किसानो का जो प्रमुख खर्च है पानी और बिजली, उसमें से किसान बाहर आ जायेगा | आप सोचो कि किसान के जीवन में कितना बदलाव आयेगा और एक बात मै आग्रहपूर्वक कहूंगा कि हम बाहर की ओर तार लगाकर हमारी दो-तीन मीटर ज़मीन बरबाद करते हैं | वहां पर अगर हम टिम्बर की खेती करें, लकड़ी की खेती करें और ईमारती लकड़ी का उत्पादन करें तो भारत सरकार नया कानून लाने की दिशा में विचार कर रही है कि जो किसान अपने खेत के छोर पर इस तरह के इमारती लकड़ी का उत्पादन करेगा, उस खेत में वह बडे होकर उसको बेचने का हक उसको मिले , सरकार का जंगल खाता किसी भी प्रकार से उसे परेशान न करे और किसान की ताक़त बढें ऐसा कानून लाने की दिशा में यह सरकार काम कर रही है | ज़मीन जो बरबाद हो रही है और आज देश ईमारती लकड़ी विदेश से आयात करता है | हमारे देश का किसान चाहे तो ईमारती लकड़ी की खेती करके दुनिया में से लानेवाला लकडा बंध हो जाये तो किसान की आय बढेगी या नहीं बढेगी ? उसके साथ पशुपालन |

 
हमारे यहां दुनिया में प्रति पशु जितना दूध उत्पादन है, हमारे यहां बहुत कम है | उनका पालन जिस तरह से होना चाहिये, उनको बीमारियों से बचाने की व्यवस्था होनी चाहिये | जिस तरह का उसे घांस खिलाना चाहिये, वह हमारी पुरानी रीत के मुताबिक जो खायें वह खाये, उसके कारण हमारे पशु उनकी शक्ति के मुकाबले कम दूध दे रहे है| आज किसान क्या करता है ज़्यादा दूध उत्पादन करना हो तो दो के बजाये चार पशु करता है, चार के बदले आठ पशु पाले और उसके कारण खर्चा बढता जाता है | उसके बजाये दो पशु कैसे ज़्यादा दूध दें उसके तरफ ध्यान केन्द्रित करें तो किसान की आय बढ जायेगी और किसान के ऊपर का बोझ कम हो जायेगा और उसके कारण खास करके पशुपालन का काम हमारी बहने करती है उनकी उत्तम ट्रेनिंग हो उस दिशा में काम करने की दिशा में हम आगे बढ रहे है | 

एक प्रकार से किसान सुरक्षित बने, पहली बार देश मे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि बीमा योजना पहली बार ऐसी योजना आयी है कि कुदरत रुठ गई हो और फसल न मिली हो, तो भी बीमा की पैसे मिलें | पकने के बाद अगर खेत में माल पडा हो और अगर पंद्रह दिन में बारिश आये तो भी फसल के पैसे मिले इस प्रकार का फसल बीमा पहली बार हिन्दुस्तान में भारत सरकार लायी है | और एक रूपये में किसान को सिर्फ दो पैसे ही देने है | 98 पैसे की ज़िम्मेदारी केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर उठाती है, किसान को सिर्फ दो पैसे की ही ज़िम्मेदारी उठानी है | एक रूपये के सामने दो पैसा, इतना बडा काम दिल्ली में आपने किसानो को प्रेम करती सरकार बिठायी है, उसके कारण मुमकिन हुआ है | और आज किसान उसका लाभ भी ले रहा है | 

किसान फसल बीमा की ओर बढ रहे है | जिसको गलत करने की आदत होती है उसको टाईम लगेगा पर मुझे पता है कि उनको लगेगा कि गलत करने के बावजूद भी हमें फायदा मिल रहा है , अच्छी तरह से जी सकते है, तो गलत करनेवाले आदमी दूसरी ओर हो जायेगा और सही करनेवालों को भरपूर लाभ होगा ऐसी यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है | 

हमारे देश में कृषि तो होती है पर उसके बावजूद लाखों-करोडो के फ़ल-फ्रूट बर्बाद हो जाता है | हमने एक प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना बनाई है | यह प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत उत्पादित हुए माल का वेल्यू एडिशन, उसकी मूल्य वृद्धि, कच्चा आम बेचो तो कम रूपये मिलेंगे, पक्के आम बेचो तो ज़्यादा पैसे मिलेंगे यह मूल्य वृद्धि हुई | कच्चे आम का अचार बनाकर बेचो तो और पैसे मिलेंगे और अचार भी अच्छी तरह से पैक करके और एडवर्टाइज करके बेचो तो ज्यादा पैसे मिलेंगे यह उसकी मूल्य वृद्धि हुई | हरी मिर्च बेचो तो सस्ती मिलेंगी, लाल हो तो महंगी हो और पाउडर बनाओ तो और भाव बढेंगे | जैसे मूल्यवृद्धि होती है तो किसानो को लाभ होता है | दूध बेचे तो कम पैसे मिलेंगे, खोया बनाकर बेचो तो ज्यादा पैसे मिलेंगे उसमें भी पेढे बनाकर बेचो तो ओर ज़्यादा पैसे मिलेंगे | सरकार ने किसानो को मूल्यवृद्धि के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना बनाई है | बड़े पैमाने पर फूड पार्क बनाने की योजना बनाई है | इस नवम्बर महीने में पूरी दुनिया की कंपनियों को बुलाकर फूड प्रोसेसिंग के लिए किसान जो उत्पादन करते हैं उसके मूल्यवृद्धि के लिए दुनिया की कम्पनियां उनका हाथ पकडे, उनकी उंगलियाँ पकडकर आगे ले जाये और उसके लिए भारत सरकार हिन्दुस्तान के किसान आगे आये, उनको प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, जिसमें हज़ारो करोड का बजट देने का इस सरकार ने तय किया है | 

भाईयो-बहनो गुजरात का गांव समृद्ध बने, गुजरात का किसान समृद्ध बने, देश के किसानो को इस योजना का लाभ मिले, देश का किसान समृद्ध हो और देश के ग्रामीण जीवन में एक आर्थिक क्रांति का वातावरण करने की दिशा में अनेक कामों को लेकर आज जब भारत सरकार आगे बढ रही है तब अमरेली ज़िले ने सहकारी क्षेत्र के तहत श्वेत क्रांति, मधुक्रांति, ब्लु रिवोल्यूशन, एपीएमसी, डेरी इंजीनियरिंग अनेक प्रकल्पो को हाथ में जब लिया है तब भारत सरकार हमेशा आपके साथ रहेगी, आप आगे बढेंगे तो भारत सरकार को हमेशा आपके साथ देखोगे ऐसी इस भारत सरकार की नीति है और उसका लाभ हिन्दुस्तान का कोई भी ज़िला उठा सकता है | कोई भी सहकारी ज़िला उठा सकता है | अमरेली उसका भरपूर लाभ उठाये, गुजरात के ज़िले भरपूर लाभ उठाये, मेरी आप सभी को बहुत शुभकामनायें है | 



बहुत बहुत धन्यवाद मित्रों