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भारत माता की जय..!

दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए,

भारत माता की जय..!

भारत माता की जय..!

मित्रों, मैं अपनी बात बताऊं उससे पहले कुछ बातों के लिए मैं प्रार्थना करना चाहता हूँ। आज आतंकवादियों ने हमारे देश के सुरक्षा बलों पर हमला किया, हमारे देश के जवान मारे गए। कुछ दिन पहले आतंकवादियों ने नैरोबी में हमला किया, कई हमारे हिन्दुस्तान के भाई-बहन मारे गए। मैं आप सब से प्रार्थना करता हूँ कि जहाँ हम हैं वहीं से, जहाँ हम बैठे हैं वहीं से दो मिनट का मौन रख कर के हमारे इन शहीद जवानों के प्रति हम श्रद्घांजलि अर्पित करेंगे..!

ओम शांति, शांति, शांति..!

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, आज तमिलनाडु की धरती पर इस नए इतिहास को रचने का काम जो किया है, उस प्रदेश की टीम के अध्यक्ष श्रीमान पॉन राधाकृष्णन जी, इस युवाओं की रैली को आयोजित करने में हमारे जो युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं जिन्होंने पूरी शक्ति लगाई ऐसे हमारे नौजवान साथी बाल गणपति श्रीमान एल. जी., श्रीमान लक्ष्मणानंद जी, सी. पी. राधाकृष्णन जी, भाई एच. राजा, मोहन राजुलु, मंच पर विराजमान सभी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गण..!

I have great pleasure and honor in visiting Tamilnadu. The great Tamil poet Ramalingam Pillai wrote that “Tamizhan endroru inam undu, Thaniye avarkkoru gunam undu” (There is a race called Tamils, they have a unique character)..! What is that special character? I consider three things very special in the people of Tamilnadu. They are, Tamil people are hardworking people, Tamil people are sincere people and above all, Tamil people are royal and loyal people..! For Tamil people, work place is worship place. Tamil is not only one of the oldest languages of the world but also one of the few living ancient languages. I am very fond of knowing about ‘Sangam’ literature. Due to the hard work and dedication of the people Tamilnadu is one of the most advanced states of the country. The products of Tamilnadu are competitive in the national and International markets. Only Tamil could invent e-Mail..! The top software companies of the world like Microsoft, Oracle or name any, the bulk of their masterminds are from Tamilnadu. Tamilnadu and Gujarat share many common features. These two states played a leading role in the freedom struggle. If Gandhi ji is from Gujarat, his conscious keeper Rajaji is from Tamilnadu. While Tamil people came to Gujarat in large numbers to make Gujarat the Manchester of india, you have a substantial population of Gujaratis who are called Saurashtrians in Tamilnadu contributing in the growth of Tamilnadu. While you have a Mini Gujarat in Sowcarpet, we have a Mini Tamilnadu in Gujarat called Maninagar. And for your information, Maninagar is my Assembly Constituency..! The voters of Maninagar and particularly the voters of Tamilnadu, those who are living in Maninagar, have elected me with thumping majority. The people of Tamilnadu and Gujarat have mingled with each other like sugar and milk without any problem what so ever. Both are the coastal states, both have a long history of sea based trade and commerce with other ancient civilizations. Being costal and border states, we have also common problems. While Gujarat fishermen are arrested and tortured by Pakistan, the fishermen in Tamilnadu are often are arrested by Sri Lankan army..!

Text of Shri Narendra Modi's speech at Trichy, Tamilnadu

मित्रों, आप लोगों को लगता होगा कि हमारे फिशरमैन को श्रीलंका उठा कर के क्यों ले जाता है, हमारे फिशरमैन को पाकिस्तान उठा कर के क्यों ले जाता है..? मित्रों, ये ले जाने की हिम्मत इसलिए करते हैं क्योंकि समस्या उस समुद्र के भीतर नहीं है जहाँ मछुआरे जाते हैं, समस्या उस दिल्ली सरकार की दुर्बलता में है जिसके कारण ये दुर्दशा होती है..! अगर हमें, गुजरात हो या तमिलनाडु, केरल हो या कर्नाटक, अगर समुद्रतट पर रहने वाले हमारे मछुआरे भाईयों की रक्षा करनी है, उनको सुरक्षित रखना है, मछुआरों को बेरोकटोक अपनी रोजी-रोटी कमाने का अधिकार देना है, तो हमारी पहली जिम्मवारी बनती है दिल्ली में बैठी हुई दुर्बल सरकार को, वीक गवर्नमेंट को हटाना..! मित्रों, पाकिस्तान इतनी बड़ी मात्रा में गुजरात से फिशरमैन को उठा कर ले जाता है, छह-छह महीना, एक-एक साल तक जेलों में रखता है और इतना टॉर्चर करता है और अब वो परंपरा आज श्रीलंका में भी शुरू हुई है, उसका मूल कारण ये है कि पड़ौसी देश हिन्दुस्तान को ‘टैकन फॉर ग्राटेंड’ मानते हैं और उसके कारण ये परिस्थिति पैदा होती है..! मुझे बताया गया था कि अटल जी की जब सरकार थी तब श्रीलंका से फिशरमैन को कोई परेशानी नहीं थी, गुजरात के भी फिशरमैन पकड़े जाते थे तो पन्द्रह दिन में लौट कर आते थे, लेकिन आजकल तो उनकी बोट भी पाकिस्तान रख लेता है, एक-एक, दो-दो लाख रूपये की बोट पाकिस्तान अपने पास रख लेता है और उसका उपयोग हिन्दुस्तान को परेशान करने के लिए करता है।

भाइयों-बहनों, I was talking about Gujarat and Tamilnadu relation..! Gujarat is a cotton grower state and Tamilnadu is a state which consumes maximum cotton from Gujarat. Trichy has always been the hub of higher education. I am glad to know that last year Regional Engineering College of Trichy was ranked the best technical institution in the country, even overtaking IITs..! Who can forget the contribution of BHEL Trichy, which supplies boilers at almost all the power stations in the country..? It is a matter of pride for Trichy that Dr. Abdul Kalam, the Ex-President of India, studied in the St. Joseph’s college, Trichy..! We can go on listing the factors that make Trichy unique. When Gandhi ji started his ‘Dandi March’, on the same day, we must remember this historical event which Trichy, Tamilnadu and the country can feel proud of. On the same day of ‘Dandi March’, a march from Trichy led by VOC started from ‘Vedaranyam’ for making salt..!

मित्रों, आज जो मैंने मेरे भाषण के प्रारंभ में हमारे जवानों को श्रद्घाजंलि देने के लिए दो मिनट मौन के लिए आपसे प्रार्थना की थी, लेकिन मन में बहुत पीड़ा होती है, बहुत गुस्सा आता है कि दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है कि युद्घ में हमारे जितने जवान मारे गए उससे ज्यादा हमारे जवान टैररिस्टों की गोलियों से मारे गए हैं..! मित्रों, हम सब के मन में एक सवाल उठता है कि सवा सौ करोड़ का देश... और क्या ताकत है विदेशियों की कि इटली के लोग केरल के समुद्री तट पर आ कर के हमारे मछुआरों को भून दें..? क्या कारण है कि पाकिस्तान की सेना हिन्दुस्तान की धरती पर हमारे सेना के जवानों के सिर काट कर ले जाए..? क्या कारण है कि पाकिस्तान की सेना आ कर के सीमा पर हमारे सुरक्षा बल के जवानों पर गोलियां चला कर के उनको भून दे..? और उसके बाद भी दिल्ली की सरकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ प्रोटोकॉल के तहत चिकन बिरयानी के भोजन समारंभ आयोजित करी है..! मित्रों, हिन्दुस्तान के हर नागरिक के मन में सवाल उठता है कि क्या हम इतने दुर्बल हैं, क्या हम इतने कमजोर हैं कि आए दिन हमारे पडौसी आकर के जो चाहे हमारे साथ करते रहे और हम हाथ पर हाथ रख कर के, आंख बंद करके, मुंह पर ताला लगा कर के इन सारी चीजों को झेलने के लिए इस देश को मजबूर करते रहें..? मैं आप लोगों से एक सवाल पूछना चाहता हूँ, राजा तमिल में आपसे पूछेंगे और मैं आप सबसे एक आवाज में जवाब चाहता हूँ..! हमारे सेना के जवानों को दिन-रात मार दिया जाता हो, निर्दोष नागरिकों को मार दिया जाता हो, आतंकवाद आए दिन हमें परेशान करता हो, तो क्या ऐसे समय प्रधानमंत्री को पाकिस्तान के नेताओं के साथ बातचीत करने की जल्दबाजी करनी चाहिए क्या..? फिर से बोलिए, एक बार फिर से बोलिए..! प्रधानमंत्री जी, ये ना मैं बोल रहा हूँ, ना भारतीय जनता पार्टी बोल रही है, ये सिर्फ दूर सुदूर बैठे हुए तमिलनाडु में त्रिची के नौजवान आपको कह रहे हैं..!

भाइयों-बहनों, मैं आज दो घटनाओं का स्मरण करवाना चाहता हूँ..! कुछ समय पहले ब्राज़ील के जीवन में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। कोई देश स्वाभिमान के साथ कैसे जीता है, आत्मगौरव के साथ कैसे गुजारा करता है, ये हमें दुनिया से सीखना पड़ेगा..! ब्राज़ील के अंदर एक घटना घटी, ब्राज़ील को पता चला कि अमेरिकन गवर्नमेंट ब्राज़ील के अंदर जासूसी कर रही है, खुफिया एजेंसी के माध्यम से ब्राज़ील की हर गतिविधि पर अमेरिका ध्यान रख रहा है। ये बात का जब पता चला तब ब्राज़ील जैसे छोटे देश ने अमेरिका के एक डेलिगेशन का ब्राज़ील की धरती पर स्वागत करने से इनकार कर दिया और अमेरिका को सीधा-सीधा ब्राज़ील ने संदेश दे दिया था..! भाइयों-बहनों, ब्राज़ील के सम्मान के लिए ब्राज़ील की सरकार ने जो निर्णय लिया क्या उसका हमें गौरव करना चाहिए या नहीं करना चाहिए..? मैं एक और दूसरी घटना आपको बताता हूँ। अभी कुछ समय पहले अमेरिका की जासूसी संस्था में काम करने वाले स्नोडेन पर आरोप लगा कि स्नोडेन ने अमेरिका की जासूसी संस्था की कुछ बातें लीक कर दी है, देशद्रोह किया है, और ये सारी बातें बाहर आई..! अमेरिकन गवर्नमेंट स्नोडेन को अरेस्ट करना चाहती थी, लेकिन स्नोडेन वहाँ से भाग कर के रशिया चला गया। रशिया ने स्नोडेन को आश्रय दिया इस बात से नाराज हो कर के ओबामा रशिया जाने वाले थे, उन्होंने रशिया को मना कर दिया कि तुमने हमारे एक देशद्रोही को आपके वहाँ पनाह दी है इसलिए मैं रशिया नहीं आऊंगा। ओबामा ने अपनी ताकत दिखाई..! मित्रों, हम लोगों को सोचना होगा..! दुनिया का कोई छोटा देश हो या बड़ा देश हो, लेकिन जब उसके स्वाभिमान पर चोट होती है, उसके राष्ट्र गौरव पर चोट पहुंचती है तो बाकी सारे हिसाब-किताब छोड़ कर के वो देश अपनी इज्जत के लिए, अपने गौरव के लिए, अपने सम्मान के लिए खड़ा हो जाता है और दुनिया की किसी भी ताकत की परवाह नहीं करता..! मित्रों, इसलिए मैं कहना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री जी, आप अमेरिका में गए हुए हैं, ये देश आपसे जानना चाहता है कि आपकी प्राथमिकता क्या है..? क्या हिन्दुस्तान का स्वाभिमान आपकी प्राथमिकता है, हिन्दुस्तान का गौरव आपकी प्राथमिकता है, हिन्दुस्तान के जवानों के खून का सम्मान आपकी प्राथमिकता है कि दुनिया के दबाव में दुनिया में अच्छा दिखने के लिए बातचीत करने का उतावलापन दिखाना आपकी प्रारियोरिटी है..? इसका जवाब ये देश आपसे सुनना चाहता है..! भाइयों-बहनों, देश में एक ऐसी सरकार है जिस सरकार के होने के कारण ना इस देश में हमारी माताएं-बहनें सुरक्षित हैं, ना इस सरकार के कारण सीमा पर तैनात हमारे जवान सलामत है..! इस सरकार के रहते हुए ना चाइना के सीमा पर हमारी भूमि सलामत है..! इस सरकार के रहते हुए गुजरात हो, तमिलनाडु हो या केरल हो, हमारे मछुआरे सलामत नहीं हैं..! अगर इस देश में ऐसी सरकार रहने के कारण पूरा देश असलामत हो तो सबसे पहला काम होता है ये असलामती पैदा करने वाली इस निक्कमी सरकार को उखाड़ के फैंक देना चाहिए..!

Text of Shri Narendra Modi's speech at Trichy, Tamilnadu

मित्रों, दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसने पूरे हिन्दुस्तान के अर्थतंत्र को कमजोर कर दिया, दुर्बल कर दिया, निक्कमा कर दिया..! दिल्ली में ऐसी सरकार बेठी है जिसने भारत के रूपये को भी कमजोर कर दिया, आज रूपये की कोई ताकत नजर नहीं आ रही है..! अगर दिल्ली में ये सरकार ऐसे ही बैठी रही तो कल हमें रूपया सूक्ष्मदर्शी यंत्र से खेाजना पड़ेगा..! इस देश के आर्थिक पंडितों का कहना है, अर्थनीति को जानने समझने वाले, फाइनेंस को समझने वाले लोगों का कहना है कि आज जो हिन्दुस्तान की आर्थिक स्थिति है, अगर आने वाले पाँच साल तक ऐसी ही स्थिति बनी रही तो हिन्दुस्तान के करोड़ों-करोड़ों नौजवान जो आज रोजगार कमाते हैं, वे बेरोजगार हो जाएंगे और हिन्दुस्तान की तरूणाई फुटपाथ पर भीख मांगती हुई नजर आएगी, इतनी दुर्दशा होने की संभावनाएं इस देश के अर्थशास्त्री कर रहे हैं..! मित्रों, इस दिल्ली की सरकार की नीतियों के कारण हमारे देश के सारे उद्योग ठप्प होते जा रहे हैं और छोटे-छोटे उद्योग को ताले लगते जा रहे हैं..! ये त्रिची में आज ‘भेल’ पूरा का पूरा संकट में घिरा पड़ा है, ‘भेल’ के लिए ऐन्सलेरी एक्टिविटी करने वाले छोटे-छोटे उद्योग पर ताले लग रहे हैं और ताले लगने के लिए दिल्ली की सरकार की नीतियाँ जिम्मेदार हैं..! उनको अमीरों को खुश करना है, अमीरों का भला करना, इस देश की पचास-पचहत्तर जो बड़ी कंपनियाँ हैं उनके लिए हिन्दुस्तान की तिजोरी लुटा देना, यही उनकी कार्यशैली रही है। लेकिन हमारे जो छोटे कारखाने वाले लोग हैं, छोटे-छोटे और मार्जिनल काम करने वाले लोग हैं, पाँच-दस नौजवानों को रोजगार देने वाले लोग हैं, उनको बुरी तरह परेशान करना यही दिल्ली की नीतियाँ रही हैं..! मित्रों, बड़े-बड़े उद्योगकार जो हजारों करोड़ रुपयों के उद्योग चला रहे हैं, बैंकों के कोई दो सौ करोड़ रुपया डूबा रहा है, कोई पाँच सौ करोड़ रूपया डूबा रहा है, कोई दो हजार करोड़ रूपया डूबा रहा है... लेकिन हमने कभी किसी अखबार में किसी बड़े उद्योग का नाम नहीं सुना होगा, किसी बड़े उद्योगकार की फोटो नहीं देखी होगी..! लेकिन अगर एक बेचारा छोटे उद्येागकार एक-दो लाख रूपया बैंक को नहीं भर पा रहा है, लोन वापस नहीं कर पा रहा है, तो ये बैंक वाले, ये दिल्ली की सरकार अखबार में उसके फोटो के साथ एडर्टाइजमेंट देते हैं कि ये पैसे नहीं दे रहा है और उसको आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर देते हैं..! देश के आर्थिक विकास का अगर रोड मैप बनाते हैं तो उस रोड मैप के केन्द्र बिंदु में हमारे देश का नौजवान होना चाहिए, हमारे विकास की यात्रा में हमारे देश के नौजवानों की टैलेंट काम में आनी चाहिए, हमारे देश के विकास में हमारे नौजवानों का पुरूषार्थ काम में आना चाहिए..! और विकास उन छोटे-छोटे उद्योगों का होना चाहिए, लाखों-करोड़ों छोटे-छोटे उद्योगों का जाल बिछाना चाहिए ताकि हमारे देश के नौजवान को रोजगार मिले, उसको कभी किसी के पास अपना हाथ फैलाने की नौबत नहीं आनी चाहिए..! नौजवान मित्रों, मैं आपसे अनुरोध करता हूँ, आपके पिताजी को मजबूरन जिंदगी जीनी पड़ी होगी, आपके दादाजी को मजबूरन जिंदगी जीनी पड़ी होगी, आपके बड़े भाई को मजबूरन जिंदगी गुजारनी पड़ी होगी, लेकिन मेरे नौजवान मित्रों, आप संकल्प करें कि आप मजबूरी में जीना नहीं चाहते, आप सम्मान के साथ जीना चाहते हैं, मेहनत करके कमाई करके जीना चाहते हैं और इसके लिए रोजगार दे ऐसी सरकार चाहते हैं..!

दिल्ली की सरकार की नीतियाँ कैसी हैं..! उनकी नीतियों के कारण इस देश में 20,000 मेगावॉट बिजली पैदा करने की क्षमता रखने वाले कारखाने बंद पड़े हैं..! क्यों..? उन कारखानों को बिजली पैदा करने के लिए कोयला चाहिए, गैस चाहिए, ये उपलब्ध नहीं है। एक तरफ कोयले की खदाने पड़ी हैं, दूसरी तरफ बिजली पैदा करने वाले कारखाने तैयार बैठे हैं और तीसरी तरफ हिन्दुस्तान के कई राज्य बिजली के लिए तरस रहे हैं, अंधेरे में गुजारा कर रहे हैं, उनको दो-चार घंटे भी बिजली उपलब्ध नहीं होती है..! भाइयों-बहनों, क्या इन स्थितियों को बदला नहीं जा सकता है..? लेकिन दिल्ली की सरकार को बदलना नहीं है। उनको तो वही काम करने है जिसमें करप्शन की सुविधा हो, जनसामान्य का भला हो उन कामों में उनकी रूचि नहीं है..!

मित्रों, दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट का एक जजमेंट आया। जिस आधार कार्ड के नाम पर पूरे हिन्दुस्तान में कांग्रेस के लोग नाच रहे थे और ना जाने देश को लोगों को क्या कोई बड़ी जड़ी बूटी दे दी है जो उनके हर सकंटों से मुक्ति दिलाएगी, उस आधार कार्ड पर ऐसा खेल खेल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट से ऐसी डांट पड़ी है, ऐसी डांट पड़ी है..! आज सवाल ये है प्रधानमंत्री जी, ये देश पूछना चाहता है कि आधार कार्ड के पीछे कितने रूपये खर्च हुए, ये रूपये कहाँ गए, आधार कार्ड का लाभ किसको मिला..? सुप्रीम कोर्ट ने जो सवाल उठाए हैं, उन सवालों के जवाब ये देश की जनता मांगती है आपसे..!

नौजवान मित्रों, मैं आज एक बात पहली बार आप लोगों के सामने रखने जा रहा हूँ। पिछले तीन साल से मैं लगातार गुजरात की तरफ से प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखता रहा हूँ, और मैंने आधार कार्ड के संबंध में गंभीर सवाल उठाए थे। मैंने उनसे चेतावनी दी थी कि गुजरात हमारा सीमावर्ती राज्य है, आप इस प्रकार से किसी के माध्यम से किसी को भी आधार कार्ड देते जाओगे तो हिन्दुस्तान में जो इन्फिल्ट्रेशन करने वाले लोग हैं उनको बढ़ावा मिलेगा, पड़ौसी देशों के लोग हमारे यहाँ घुस जाएंगे, गैरकानूनी तरीके से वो हमारे यहाँ के नागरिक बन जाएंगे, हमारा हक छीन लेंगे, आप इस पर गंभीरता से सोचिए..! मैंने उसकी पद्घति के संबंध में सवाल उठाए थे। आज जो सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं, वो सारे सवाल तीन साल पहले मैं देश के प्रधानमंत्री के सामने उठा चुका हूँ..! मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि आप नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग बुलाइए, मुख्यमंत्रियों के साथ इस विषय में डिबेट किजिए, चर्चा कीजिए..! आधार कार्ड के नाम पर आप इस देश में एक नया संकट लाओगे, आप इस पर गंभीरता से सोचो..! उन्होंने नहीं सोचा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डंडा मारा तब उनको समझ में आया..! आज जब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किये हैं तब मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूँ कि वे देश की जनता को बताएं कि जब आधार कार्ड की योजना आई तो क्या उन्हीं की सरकार के सभी डिपार्टमेंट इसमें सहमत थे..? क्या केबिनेट के सभी सदस्य सहमत थे..? क्या ये सच नहीं है कि फाइलों पर अलग-अलग डिपार्टमेंट ने इसका विरोध किया था..? प्रधानमंत्री जी, देश जानना चाहता है कि क्या हिन्दुस्तान के सभी राज्य आपकी इस योजना से सहमत थे..? क्या हिन्दुस्तान के राज्यों ने सवालिया निशान नहीं खड़े किये थे..? लेकिन ये अरबों-खरबों रूपयों को आपने उड़ा दिया, गरीब के पेट में जाने वाले पैसे आपने राजनीतिक रंग दिखाने के लिए पूरे कर दिए और इसलिए आपको देश को जवाब देना चाहिए..!

मित्रों, इस देश की एकता को अगर बनाए रखना है, इस देश को प्रगति की राह पर ले जाना है, तो कांग्रेस की भागला करो और राजनीति करो, कांग्रेस की जो डिविसिव मेन्टेलिटी है, कांग्रेस के डीएनए में, कांग्रेस के जेनेटिक्स में डिविसिव नेचर इनहेरेन्ट है और उसने समय-समय पर भागला करो, विभाजन करो, तोड़ो उसी की राजनीति की है..! कांग्रेस पार्टी मन से, वचन से, कर्म से डिविसिव है। देश पूरा जब आजादी का जंग लड़ रहा था, ये कांग्रेस पार्टी है जिसने सबसे पहले हिन्दुस्तान के दो टुकड़े कर दिए, देश को दो टुकड़ो में बांट दिया..! इतना ही नहीं, हिन्दुस्तान की शासन व्यवस्था को भी उन्होंने दो टुकड़ों में तोड़ दिया। कश्मीर के लिए उन्होंने अलग व्यवस्था की और बाकी हिन्दुस्तान के लिए अलग व्यवस्था की..! कश्मीर के लिए अलग प्रधानमंत्री, कश्मीर के लिए अलग संविधान, कश्मीर का अलग झंडा... एक ही देश में दो टुकड़े करने का पाप ये डिविसिव कांग्रेस ने किया था..! ये डिविसिव कांग्रेस पानी के मुद्दे पर एक राज्य को दूसरे राज्य से लड़ाती रही..! साठ-साठ साल तक नदियों के पानी के बंटवारे के नाम पर देश के हर राज्य को डिविसिव कांग्रेस ने तोड़ा, मरोड़ा, परेशान किया... ये पाप कांग्रेस ने किया है। ये डिविसिव कांग्रेस ने भाषा के नाम पर नए-नए तूफान खड़े करके भाषावार राज्यों की रचना करके, भाषा के नाम पर देश को लड़ाने का, देश को विभाजित करने का काम किया है। 1857 में हिन्दुस्तान का एक-एक मुसलमान, हिन्दुस्तान का एक-एक हिन्दु, हिन्दुस्तान का एक-एक इसाई, हिन्दुस्तान का एक-एक नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर के गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था। लेकिन ये कांग्रेस पार्टी ने जब नेतृत्व किया तो हिन्दु और मुसलमान को अलग किया, हिन्दु और मुसलमान के बीच दरार करने का काम ये डिविसिव कांग्रेस ने किया है। धर्म के आधार पर देश में विभाजन करने का काम, वोट बैंक की राजनीति का काम, यही डिविसिव कांग्रेस का काम है। यही डिविजिव कांग्रेस है जिसने जाति के नाम पर अगड़े और पिछड़े की लड़ाई शुरू करवाई और देश के हर तबके को अगले और पिछड़े के बीच में, फॉरवर्ड और बैकवर्ड के रूप में दरार पैदा करने का काम ये डिविसिव कांग्रेस ने किया है..! ये कांग्रेस पार्टी डिविसिव है, उसकी सोच ने गांव को अलग कर दिया, शहर को अलग कर दिया..! गाँव को शहर से लड़ा दिया और शहर को गाँव से लड़ा दिया, ये डिविसिव कांग्रेस के नेतृत्व का परिणाम है..! भाई को भाई से लड़ाना, देश की एकता को तोड़ना और अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करना, अपनी वोट बैंक की राजनीति को करते रहना, ये डिविसिव कांग्रेस का नेचर है..! हिन्दुस्तान को बचाना है, हिन्दुस्तान को आगे बढ़ाना है तो ये डिविसिव कांग्रेस से हमें मुक्ति पानी चाहिए, हमेशा-हमेशा के लिए ये डिविसिव कांग्रेस को खत्म करना चाहिए..!

मैं और आप जितना कांग्रेस का जानते हैं, उससे ज्यादा कांग्रेस को नस-नस में समझने वाला अगर कोई व्यक्ति है, कांग्रेस को हर प्रकार से समझने वाला कोई व्यक्ति है, तो वो व्यक्ति है महात्मा गांधी..! और महात्मा गांधी ने कांग्रेस को बराबर पहचाना था, उनके चरित्र को बराबर जाना था, उनके कारनामों को बराबर जाना था, उसके डिविसिव डीएनए को बराबर जाना था, और इसलिए महात्मा गांधी के जीवन की एक इच्छा थी कि इस देश में से कांग्रेस को खत्म किया जाए..! ये महात्मा गांधी की इच्छा थी, इसको पूरा करने का दायित्व हम सभी देशवासियों का है। और इसलिए मित्रों, इस देश को बचाने के लिए हमारा संकल्प होना चाहिए, कांग्रेस मुक्त भारत..! इस देश को बचाने के लिए कांग्रेस के साथ मिले हुए जो भी लोग हैं उनसे इस देश को मुक्ति दिलानी चाहिए और कांग्रेस के कारनामों को अपने-अपने दलों में करने वाले भी जो लोग हैं उन सबसे भी देश को मुक्ति दिलाने का हमें संकल्प करना चाहिए..!

भाइयों-बहनों, मैं तमिलनाडु में पहले भी आया हूँ, मैंने सार्वजनिक कार्यक्रम पहले भी किए हैं, लेकिन in my whole political carrier I have seen such a huge, huge gathering..! I have never seen in my life..! I was told that behind this ground, there is a bridge and behind that bridge, there is another ground. That ground is also fully covered by youth..!

ब्रिज के उस पार जो हजारों नौजवान बैठे हैं, ना वो मुझे देख पा रहे हैं और ना मैं उन्हें देख पा रहा हूँ..! मैं उन नौजवानों की क्षमा मांगता हूँ क्योंकि ये मैदान छोटा पड़ गया, लेकिन मैं उनको विश्वास दिलाता हूँ कि ये मैदान भले छोटा पड़ गया, लेकिन हमारा दिल छोटा नहीं है, आपके लिए हमारे दिल में जगह है..! जो लोग तमिलनाडु की राजनीति को जानते समझते हैं, जो हिन्दुस्तान की राजनीति को जानते समझते हैं, उनके लिए ये इशारा काफी है..! ये परिवर्तन की आंधी नजर आ रही है मित्रों, ये तमिलनाडु से उठी हुई ताकत, नौजवानों की ताकत, दिल्ली को ठिकाने पर लगा कर रहेगी, ये दृश्य मैं अपने सामने देख रहा हूँ..! जहाँ-जहाँ भी मेरी नजर पहुंचती है, कोई भी कोना ऐसा नहीं है जहाँ ये काले बाल वाले नौजवान नजर ना आते हो..! क्या यूथ का समंदर इक्कठा हुआ है, दोस्तों..! मैं तमिलनाडु के नौजवानों के माध्यम से हिन्दुस्तान के नौजवानों को विश्वास देता हूँ, मेरे तमिलनाडु के नौजवानों को विश्वास देता हूँ कि आज आपने भारतीय जनता पार्टी पर जो भरोसा किया है, हम कभी भी आपके इस भरोसे को टूटने नहीं देंगे, आपके सपनों को टूटने नहीं देंगे..! आपके अरमानों को पूरा करने के लिए ईश्वर ने हमें जितनी शक्ति दी है, वो पूरी शक्ति आपके कल्याण के लिए हम लगाएंगे..! तमिलनाडु के नौजवान, आज आपने मुझे एक नई ताकत दी है, भाजपा को नई ताकत दी है, एक नया विश्वास आपने दिया है, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ..! और युवा मोर्चा की पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई देता हूँ, आप लोगों ने अभूतपूर्व काम करके दिखाया है, आपका बहुत बहुत अभिनंदन करता हूँ..! मित्रों, आखिर में मैं आपसे ‘वंदे मातरम्’ बुलवाऊंगा और आप दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से मेरे साथ ‘वंदे मातरम्’ बोल कर के आज जो हमारे जवान शहीद हुए हैं, उन जवानों को भारत माता का स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि देंगे, पूरी ताकत से मेरे साथ बोलना होगा,

वंदे मातरम्...!

पूरी ताकत से, उन जवानों तक पहुंचनी चाहिए, दोस्तों..!

वंदे मातरम्...!

वंदे मातरम्...!

वंदे मातरम्...!

वंदे मातरम्...!

वंदे मातरम्...!

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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age: PM Modi
June 07, 2021
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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age
25 per cent vaccination that was with states will now be undertaken by Government of India: PM
Government of India will buy 75 per cent of the total production of the vaccine producers and provide to the states free of cost: PM
Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojna extended till Deepawali: PM
Till November, 80 crore people will continue to get free food grain every month: PM
Corona, Worst Calamity of last hundred years: PM
Supply of vaccine is to increase in coming days: PM
PM informs about development progress of new vaccines
Vaccines for children and Nasal Vaccine under trial: PM
Those creating apprehensions  about vaccination are playing with the lives of people: PM

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार! कोरोना की दूसरी वेव से हम भारतवासियों की लड़ाई जारी है।  दुनिया के अनेक देशों की तरह, भारत भी इस लड़ाई के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममें से कई लोगों ने अपने परिजनों को, अपने परिचितों को खोया है। ऐसे सभी परिवारों के साथ मेरी पूरी संवेदनाएं हैं।

साथियों,

बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। कोविड अस्पताल बनाने से लेकर ICU बेड्स की संख्या बढ़ानी हो, भारत में वेंटिलेटर बनाने से लेकर टेस्टिंग लैब्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार करना हो, कोविड से लड़ने के लिए बीते सवा साल में ही देश में एक नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत कभी भी महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। ऑक्सीजन रेल चलाई गई, एयरफोर्स के विमानों को लगाया गया, नौसेना को लगाया गया। बहुत ही कम समय में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के प्रॉडक्शन को 10 गुना से ज्यादा बढ़ाया गया। दुनिया के हर कोने से, जहां कही से भी, जो कुछ भी उपलब्ध हो सकता था उसको प्राप्त करने का भरसक प्रयास  किया गया, लाया गया। इसी तरह ज़रूरी दवाओं के production को कई गुना बढ़ाया गया, विदेशों में जहां भी दवाइयां उपलब्ध हों, वहां से उन्हें लाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी गई।

साथियों,

कोरोना जैसे अदृश्य और रूप बदलने वाले दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी हथियार, कोविड प्रोटोकॉल है, मास्क, दो गज की दूरी और बाकी सारी सावधानियां उसका पालन ही है। इस लड़ाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं, इनी गिनी है। कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता?  आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू भी नहीं हो पाता था। पोलियो की वैक्सीन हो, Smallpox जहां गांव में हम इसको चेचक कहते हैं। चेचक की  वैक्सीन हो, हेपिटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों  ने दशकों तक इंतज़ार किया था। जब 2014 में देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज, 2014 में भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के ही आसपास था। और हमारी दृष्टि में ये बहुत चिंता की बात थी। जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा था, उस रफ्तार से, देश को शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब-करीब 40 साल लग जाते। हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को लॉन्च किया। हमने तय किया कि मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन किया जाएगा और देश में जिसको भी वैक्सीन की जरूरत है उसे वैक्सीन देने का प्रयास होगा। हमने मिशन मोड में काम किया, और सिर्फ 5-6 साल में ही वैक्सीनेशन कवरेज 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई। 60 से 90,  यानि हमने वैक्सीनेशन की स्पीड भी  बढ़ाई और दायरा भी बढ़ाया।

 हमने बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कई नए टीकों को भी भारत के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया। हमने ये इसलिए किया, क्योंकि हमें हमारे देश के बच्चों की चिंता थी, गरीब की चिंता थी, गरीब के उन बच्चों की चिंता थी जिन्हें कभी टीका लग ही नहीं पाता था। हम शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज की तरफ बढ़ रहे थे कि कोरोना वायरस ने हमें घेर लिया। देश ही नहीं, दुनिया के सामने फिर पुरानी आशंकाएं घिरने लगीं कि अब भारत कैसे इतनी बड़ी आबादी को बचा पाएगा? लेकिन साथियों,जब नीयत साफ होती है, नीति स्पष्ट होती है, निरंतर परिश्रम होता है, तो नतीजे भी मिलते हैं। हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने एक साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन्स लॉन्च कर दीं। हमारे देश ने, देश के वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी हैं।

साथियों,

हमारे यहाँ कहा जाता है- विश्वासेन सिद्धि: अर्थात, हमारे प्रयासों में हमें सफलता तब मिलती है, जब हमें स्वयं पर विश्वास होता है। हमें पूरा विश्वास था कि हमारे वैज्ञानिक बहुत ही कम समय में वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर लेंगे। इसी विश्वास के चलते जब हमारे वैज्ञानिक अपना रिसर्च वर्क कर ही रहे थे तभी हमने लॉजिस्टिक्स और दूसरी तैयारियां शुरू कर दीं थीं। आप सब भली-भांति जानते हैं कि पिछले साल यानि एक साल पहले, पिछले साल अप्रैल में, जब कोरोना के कुछ ही हजार केस थे, उसी समय वैक्सीन टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया था। भारत में, भारत के लिए वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को सरकार ने हर तरह से सपोर्ट किया। वैक्सीन निर्माताओं को क्लिनिकल ट्रायल में मदद की गई, रिसर्च और डवलपमेंट के लिए ज़रूरी फंड दिया गया, हर स्तर पर सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली। 

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत मिशन कोविड सुरक्षा के माध्यम से भी उन्हें हज़ारों करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गये। पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन का ट्रायल भी एडवांस स्टेज पर चल रहा है। वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दूसरे देशों की कंपनियों से भी वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इधर हाल के दिनों में, कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा हमारे बच्चों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस दिशा में भी 2 वैक्सीन्स का ट्रायल तेजी से चल रहा है। इसके अलावा अभी देश में एक 'नेज़ल' वैक्सीन पर भी रिसर्च जारी है। इसे सिरिन्ज से न देकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। देश को अगर निकट भविष्य में इस वैक्सीन पर सफलता मिलती है तो इससे भारत के वैक्सीन अभियान में और ज्यादा तेजी आएगी।

साथियों,

इतने कम समय में वैक्सीन बनाना, अपने आप में पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। वैक्सीन बनने के बाद भी दुनिया के बहुत कम देशों में वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ, और ज्यादातर समृद्ध देशों में ही शुरू हुआ। WHO ने वैक्सीनेशन को लेकर गाइडलाइंस दीं। वैज्ञानिकों ने वैक्सीनेशन की रूप रेखा रखी। और भारत ने भी जो अन्य देशों की best practices थी , विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक  थे, उसी आधार पर चरणबद्ध तरीके से वैक्सीनेशन करना तय किया। केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्रियों के साथ हुई अनेकों बैठकों से जो सुझाव मिले, संसद के विभिन्न दलों के साथियों द्वारा जो सुझाव मिले, उसका भी पूरा ध्यान रखा। इसके बाद ही ये तय हुआ कि जिन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसलिए ही, हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स, 60 वर्ष की आयु से ज्यादा के नागरिक, बीमारियों से ग्रसित 45 वर्ष से ज्यादा आयु के नागरिक, इन सभी को वैक्सीन पहले लगनी शुरू हुई। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर कोरोना की दूसरी वेव से पहले हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन नहीं लगी होती तो क्या होता? सोचिए, हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ को वैक्सीन ना लगी तो क्या होता? अस्पतालों में सफाई करने वाले हमारे भाई-बहनों को, एंबुलेंस के हमारे ड्राइवर्स भाई - बहनों को वैक्सीन ना लगी होती तो क्या होता? ज्यादा से ज्यादा हेल्थ वर्कर्स का वैक्सीनेशन होने की वजह से ही वो निश्चिंत होकर दूसरों की सेवा में लग पाए, लाखों देशवासियों का जीवन बचा पाए।

लेकिन देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं। दलील ये दी गई कि संविधान में चूंकि Health-आरोग्य, प्रमुख रूप से राज्य का विषय है, इसलिए अच्छा है कि ये सब राज्य ही करें। इसलिए इस दिशा में एक शुरूआत की गई। भारत सरकार ने एक बृहद गाइडलाइन बनाकर राज्यों को दी ताकि राज्य अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार काम कर सकें। स्थानीय स्तर पर कोरोना कर्फ्यू लगाना हो, माइक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाना हो, इलाज से जुड़ी व्यवस्थाएं हो, भारत सरकार ने राज्यों की इन मांगों को स्वीकार किया।

साथियों,

इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए Age Group क्यों बनाए गए? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया।

साथियों,

काफी चिंतन-मनन के बाद इस बात पर सहमति बनी कि राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी प्रयास करना चाहती हैं, तो भारत सरकार क्यों ऐतराज करे? और भारत सरकार ऐतराज क्यों करे? राज्यों की इस मांग को देखते हुए, उनके आग्रह को ध्यान में रखते हुए 16 जनवरी से जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसमें प्रयोग के तौर पर एक बदलाव किया गया। हमने सोचा कि राज्य ये मांग कर रहे हैं, उनका उत्साह है, तो चलो भई 25 प्रतिशत काम उन्ही की शोपित कर दिया जाये, उन्ही को दे दिया जाए। स्वभाविक है, एक मई से राज्यों को 25 प्रतिशत काम उनके हवाले दिया गया, उसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने-अपने तरीके से प्रयास भी किए। 

इतने बड़े काम में किस तरह की कठिनाइयां आती हैं, ये भी उनके ध्यान में आने लगा, उनको पता चला। पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन की क्या स्थिति है, इसकी सच्चाई से भी राज्य परिचित हुए। और हमने देखा, एक तरफ मई में सेकेंड वेव, दूसरी तरफ वैक्सीन के लिए लोगों का बढ़ता रुझान और तीसरी तरफ राज्य सरकारों की कठिनाइयां। मई में दो सप्ताह बीतते-बीतते कुछ राज्य खुले मन से ये कहने लगे कि पहले वाली व्यवस्था ही अच्छी थी। धीरे-धीरे इसमें कई राज्य सरकारें जुड़ती चली गईं। वैक्सीन का काम राज्यों पर छोड़ा जाए, जो इसकी वकालत कर रहे थे, उनके विचार भी बदलने लगे। ये एक अच्छी बात रही कि समय रहते राज्य, पुनर्विचार की मांग के साथ फिर आगे आए। राज्यों की इस मांग पर, हमने भी सोचा कि देशवासियों को तकलीफ ना हो, सुचारू रूप से उनका वैक्सीनेशन हो, इसके लिए एक मई के पहले वाली, यानि 1 मई के पहले 16 जनवरी से अप्रैल अंत तक जो व्यवस्था थी, पहले वाली पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।

 

साथियों,

आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइड-लाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। संयोग है कि दो सप्ताह बाद, 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी है। 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। यानि देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है।

 अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। गरीब हों, निम्न मध्यम वर्ग हों, मध्यम वर्ग हो या फिर उच्च वर्ग, भारत सरकार के अभियान में मुफ्त वैक्सीन ही लगाई जाएगी। हां, जो व्यक्ति मुफ्त में वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते, प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, उनका भी ध्यान रखा गया है। देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत,  प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।

साथियों,

हमारे शास्त्रों में कहा गया है-प्राप्य आपदं न व्यथते कदाचित्, उद्योगम् अनु इच्छति चा प्रमत्तः॥ अर्थात्, विजेता आपदा आने पर उससे परेशान होकर हार नहीं मानते, बल्कि उद्यम करते हैं, परिश्रम करते हैं, और परिस्थिति पर जीत हासिल करते हैं। कोरोना से लड़ाई में 130 करोड़ से अधिक भारतीयों ने अभी तक की यात्रा आपसी सहयोग, दिन रात मेहनत करके तय की है। आगे भी हमारा रास्ता हमारे श्रम और सहयोग से ही मजबूत होगा। हम वैक्सीन प्राप्त करने की गति भी बढ़ाएंगे और वैक्सीनेशन अभियान को भी और गति देंगे। हमें याद रखना है कि, भारत में वैक्सीनेशन की रफ्तार आज भी दुनिया में बहुत तेज है, अनेक विकसित देशों से भी तेज है। हमने जो टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाया है- Cowin, उसकी भी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अनेक देशों ने भारत के इस प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने में रुचि भी दिखाई है। हम सब देख रहे हैं कि वैक्सीन की एक एक डोज कितनी महत्वपूर्ण है, हर डोज से एक जिंदगी जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने ये व्यवस्था भी बनाई है कि हर राज्य को कुछ सप्ताह पहले ही बता दिया जाएगा कि उसे कब, कितनी डोज मिलने वाली है। मानवता के इस पवित्र कार्य में वाद-विवाद और राजनीतिक छींटाकशी, ऐसी बातों को कोई भी अच्छा नहीं मानता है। वैक्सीन की उपलब्धता के अनुसार, पूरे अनुशासन के साथ वैक्सीन लगती रहे, देश के हर नागरिक तक हम पहुंच सकें, ये हर सरकार, हर जनप्रतिनिधि, हर प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रिय देशवासियों,

टीकाकरण के अलावा आज एक और बड़े फैसले से मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं। पिछले वर्ष जब कोरोना के कारण लॉकडाउन लगाना पड़ा था तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, 8 महीने तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन की व्यवस्था हमारे देश ने की थी। इस वर्ष भी दूसरी वेव के कारण मई और जून के लिए इस योजना का विस्तार किया गया था। आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है। यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। इस प्रयास का मकसद यही है कि मेरे किसी भी गरीब भाई-बहन को, उसके परिवार को, भूखा सोना ना पड़े।

साथियों,

देश में हो रहे इन प्रयासों के बीच कई क्षेत्रों से वैक्सीन को लेकर भ्रम और अफवाहों की  चिंता बढ़ाती है। ये चिंता भी मैं आपके सामने व्यक्त करना चाहता हूं। जब से भारत में वैक्सीन पर काम शुरू हुआ, तभी से कुछ लोगों द्वारा ऐसी बातें कही गईं जिससे आम लोगों के मन में शंका पैदा हो। कोशिश ये भी हुई कि भारत के वैक्सीन निर्माताओं का हौसला पस्त पड़ जाए और उनके सामने अनेक प्रकार की बाधाएं आएं। जब भारत की वैक्सीन आई तो अनेक माध्यमों से शंका-आशंका को और बढ़ाया गया। वैक्सीन न लगवाने के लिए भांति-भांति के तर्क प्रचारित किए गए। इन्हें भी देश देख रहा है। जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। मैं भी आप सबसे, समाज के प्रबुद्ध लोगों से, युवाओं से अनुरोध करता हूँ, कि आप भी वैक्सीन को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करें। अभी कई जगहों पर कोरोना कर्फ्यू में ढील दी जा रही है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमारे बीच से कोरोना चला गया है। हमें सावधान भी रहना है, और कोरोना से बचाव के नियमों का भी सख्ती से पालन करते रहना है। मुझे पूरा विश्वास है, हम सब कोरोना से इस जंग में जीतेंगे, भारत कोरोना से जीतेगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी देशवासियों का बहुत बहुत धन्यवाद!