Share
 
Comments

मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूं, मुझे विलम्‍ब हुआ, आपको बहुत प्रतीक्षा करनी पड़ी। लेकिन नागपुर हवाई अड्डे पर इतनी तेज बारिश थी, यहां पहुंचने का कोई रास्‍ता ही नहीं मिल रहा था। आखिरकार आप लोगों की बात वरूण देवता ने सुन ली और बारिश रूक गई और इसके कारण, मैं आप सबके बीच पहुंच पाया।

किसी भी देश में अगर विकास करना है तो सबसे पहले प्राथमिकता देनी होती है, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को। और अगर, समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बनाने में हम सफल होते हैं, तो विकास की संभावनाएं अपने आप बढ़ जाती है। और उसमें भी सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है बिजली की। आज टेक्‍नोलोजी का युग है, किसान भी अपने खेत में हर प्रकार के काम के लिए बिजली का उपयोग करता है। पहले तो शायद, या तो दीपक जलाने के लिए या जमीन में से पानी निकालने के लिए वह बिजली का उपयोग करता था। लेकिन आज कृषि क्षेत्र में भी बहुत बड़ी मात्रा में बिजली से चलने वाले साधनों का उपयोग होता है। ग्रामीण जीवन में भी अगर क्‍वालिटी ऑफ लाइफ में चेंज लाना है तो बिजली से शुरूआत होती है।

आज गांव में, डॉक्‍टर रात में रूकने को तैयार नहीं, शिक्षक गांव में रुकने को तैयार नहीं, पटवारी गांव में रुकने को तैयार नहीं। वो शाम को दफ्तर बंद करके शहर चला जाता है। इनके मुसीबत का कारण क्‍या है? अगर गांव में बिजली है, पंखा चलता है, एसी चलता है, टी. वी. चलता तो उसको रात को रुकने का मन करता है। और रात को रुकता है तो धीरे-धीरे गांव से उसका लगाव होता है। गांव के सुख-दुख का वह साथी बन जाता है। इसलिए बिजली जितनी जल्‍दी हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में पहुंचे यह हमारी प्राथमिकता है। आजादी के इतने सालों के बाद भी जहां बिजली है, वहां भी 24 घंटे बिजली नहीं मिलती है। कहीं 4 घंटे मिलती है, कहीं 6 घंटे कहीं, कहीं 8 घंटे और कहीं 10 घंटे बिजली मिलती है। अब मुझे बताइए कि क्‍या 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? बिजली चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर बिजली का उत्‍पादन नहीं होगा तो बिजली मिलेगी कहां से? अगर बिजली के कारखाने नहीं लगेंगे तो बिजली आएगी कहां से? इसलिए आपने देखा होगा, मेरी नई सरकार बनने के बाद मैंने सर्वाधिक जो कार्यक्रम किए हैं, वो बिजली से जुड़े हुए कार्यक्रम किए हैं।

मैं भूटान गया तो; भूटान में बहुत पानी है। उस पानी के माध्‍यम से बिजली पैदा करना, सस्‍ती बिजली पैदा करने की संभावना है। भूटान में जाकर वो काम किया, उनसे योजना आगे बढ़ाई। अभी नेपाल गया तो नेपाल में भी हिमालय की नदियां बहुत हैं, उनमें से बिजली पैदा हो सकती है। बिजली के काम को वहां गति देने के लिए वहां की सरकार से विस्‍तार से बातें की। जम्‍मू-कश्‍मीर गया वहां भी पानी की संभावना है। वहां पर बिजली की चिंता की। क्‍लीन एनर्जी, ये जितनी संभावनाएं बनती हैं, उन सारों को टैप करने का प्रयास है। आखिरकार कोशिश यह है कि आने वाले कुछ वर्षों में हिन्‍दुस्‍तान के हर गांव में हर गरीब से गरीब के परिवार को भी 24 घंटे बिजली पहुंचाना है। और जब बिजली आती है तो सिर्फ अंधेरा जाता है- ऐसा नहीं है। सिर्फ टी. वी. पर सीरियल देखने को मिलती है ऐसा नहीं हैं। बिजली आती है तो उसके साथ उद्योग भी आते हैं। रोजगार की संभावनाएं पैदा होती है। अपने इस क्षेत्र में आज 1000 मेगावाट बिजली का कारखाना राष्‍ट्र को समर्पित हो रहा है, लेकिन साथ-साथ 1320 मेगावाट बिजली नई उत्‍पादन का एक और कारखाना लगाने का शिलान्‍यास भी हो रहा है और इसके कारण विदर्भ के पूरे क्षेत्र में बिजली प्राप्‍त होना सरल हो जाएगा।

जब मैं यहां चुनाव के दिनों में यहां आया था, मैं यवतमाल इलाके में गया था, जब हमारे किसान भाई आत्‍महत्‍या करते हैं ,उनके परिवारों में गया था, हजारों किसानों को आत्‍महत्‍या करनी पड़े, इससे बड़ी कोई पीड़ा नहीं हो सकती। और जब मैंने वहां पूछा तो कई किसानों ने मुझे बताया कि उनके यहां पानी 20-25 मीटर नीचे है। ज्‍यादा नहीं 20-25 मीटर। लेकिन बिजली न होने के कारण पानी का कोई प्रबंध नहीं है और उनके कारण अकाल की नौबत आती है। किसान कर्जदार बन जाता है और किसान को आत्‍महत्‍या की नौबत आती है। अगर ये बिजली हम पहुंचाते हैं तो जिन किसानों को अपनी खेती में बिजली की आवश्‍यकता है। उनको आवश्‍यक बिजली मिले, कम दामों में मिले, और कभी उसको अकाल के संकट से गुजरने की नौबत आये तो इन बिजली के द्वारा निकाले गये पानी के माध्‍यम से वो अपना साल भर का गुजारा कर सकता है और इसलिए बिजली, वो सिर्फ सुख वैभव का साधन नहीं है। बिजली विकास के लिए पर्याय बन गई है।

हमारी सरकार का यह प्रयास है कि हिन्‍दुस्‍तान में जहां-जहां बिजली उत्‍पादन की संभावनाएं हैं। चाहे विन्‍ड एनर्जी की हो, सोलर एनर्जी हो, कोयले से पैदा एनर्जी हो, गैस से पैदा होने वाली एनर्जी हो, इतना ही नहीं शहरों में अगर कूड़े-कचरे से अगर बिजली पैदा होती हो तो उसको भी करना है। लिग्‍नाइट से पैदा होती हों तो उसे भी करना है। ऊर्जा के जितने स्रोत हैं उन सारे स्रोतों का उपयोग करते हुए और हो सके उतना ज्‍यादा क्‍लीन एनर्जी की तरफ जाने का हमारा प्रयास है। हमारे देश में सौर ऊर्जा बहुत बड़ी मात्रा में है। सौर ऊर्जा से निकली हुई बिजली एक जमाने में बहुत महंगी थी। लेकिन अब उसमें काफी सुधार हुआ है। अब वो इतनी महंगी नहीं पड़ती, जितना पहले कभी सोचा जाता था। और अल्‍टीमेटली, वो सस्‍ती पड़ती है क्‍योंकि फ्यूल की कोई जरूरत नहीं पड़ती। और ये पूरे देश में सोलर एनर्जी का भी जाल बिछाने का इस सरकार का इरादा है, और इतना ही नहीं एक दिन वो आ सकता है, कि जब हम, रूफ टॉप पर लगाकर हर परिवार अपने छत पर अपनी जरूरत की बिजली पैदा कर सके। सोलर एनर्जी के द्वारा पैदा कर सके बिजली का खर्चा बच जाए, यहां तक इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। दुनिया के कुछ देशों ने प्रयोग सफल किये हैं, भारत जैसा देश जिसके पास इतनी सूर्य शक्ति हो उस सूर्य शक्ति का हम भरपूर उपयोग करना चाहते हैं। हमारे यहां शास्‍त्रों में सूर्य भगवान की कल्‍पना सात घोड़े के रथ पर सवार की गई है। उसके चित्र भी बनते हैं कि सूर्य भगवान सात घोड़े के रथ पर सवार होते हैं। सूर्य भगवान ऊर्जा का प्रतीक है। और ये जो सात घोड़े हैं न, आज के जमाने में नये रूप में देखता हूं मैं उनको। ये ऊर्जा के सात स्रोत हैं- कोयला है, गैस है, पानी है, लिगनाईट है, सोलर है, विन्‍ड है, कूड़ा-कचरा है। इसमें से बिजली पैदा हो सकती है। इन सातों घोड़ों से ये सूर्य का रथ चल सकता है, ऊर्जा का रथ चल सकता है और इस काम को करने की दिशा में हम प्रयासरत हैं।

मैं आज जब विदर्भ में आया हूं, और किसानों की आत्‍महत्‍या को मैं कभी भूल नहीं सकता हूं। सरकार ने एक योजना, मैंने 15 अगस्‍त को लाल किले से उसकी घोषणा की थी- प्रधानमंत्री जन धन योजना। ये प्रधानमंत्री जन धन योजना का लाभ सबसे ज्‍यादा हमारे किसान ले सकते हैं। अब ये किसान को आत्‍महत्‍या करने की नौबत इसलिए आती है कि वो साहूकार से कर्ज लेता है और साहूकार से कर्ज लेने के कारण जब कर्ज चुका नहीं पाता है, तो ब्‍याज के संकटों के कारण आखिरकार वो मौत के लिए खुद को तैयार कर लेता है।

ये प्रधानमंत्री जन धन योजना के द्वारा हर परिवार का बैंक एकाउंट खोलने का हमारा प्रयास है और मेरा भी आग्रह है आप सबको। 28 तारीख को ये योजना प्रारंभ होगी। आप सबके परिवार का अगर बैंक एकाउंट नहीं है, तो बैंक एकाउंट खोल दीजिए। और अगर आप बैंक एकाउंट खोलेंगे तो बैंक की तरफ से आपको एक डैबिट कार्ड मिलेगा और उसके साथ ही आपके परिवार के लिए एक लाख रूपये का इंश्‍योरेंस भारत सरकार निकालेगी। एक लाख रूपये का बीमा उसके साथ आपका बन जाएगा। इसके कारण एक सुरक्षा की गारंटी बनेगी। और इसलिए मैं किसान भाईयों से, विशेष कर के विदर्भ के हमारे किसान भाइयों से आग्रह करता हूं कि साहूकारों के चक्‍कर से मुक्ति के लिए, ये प्रधानमंत्री जन धन योजना जो मुख्‍य रूप से गरीबों के लिए है, आप अपना खाता खोलिए और आप ही अपना भाग्‍यविधाता बनिए। ये योजना उसी काम के लिए आने वाली है।

इस बार बजट आपने देखा होगा, सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की घोषणा की है। इन इन्‍फ्रास्‍टक्‍चर का एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र ये भी है। जिस प्रकार से रोड को गांवों को जोड़ा जाता है, उसी प्रकार से पानी की व्‍यवस्‍था खेतों तक पहुंचाने का प्रबंध भी होना चाहिए। और हमारे देश का किसान इतना ताकतवर है एक बार उसको अगर पानी मिल जाए तो मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत हमारा किसान रखता है। इसलिए हर क्षेत्र में पानी कैसे पहुंचे, पानी बचाने का काम कैसे हो, जल संचय भी अच्‍छी तरह हो, जल सिंचन भी अच्‍छी तरह हो। उस पर बल देकर के हमारी कृषि को आज जो संकटों के घेरे में रहती है, आशंका के बादल छाये रहते हैं, बारिश हुई तो किसान के लिए जिंदगी ठीक, बारिश नहीं हुई तो किसान को मुसीबत। ये जो स्थिति है, उसमें से कुछ एश्‍योरेंस की स्थिति बने। इस दिशा में प्रयास दिल्‍ली में बैठी हुई भारत सरकार का है। और इसलिए किसान को बिजली मिले, किसान को पानी मिले।

गांवों के जीवन में भी बदलाव लाना है, बहुत तेजी से दुनिया बदल रही है। हमने डिजिटल इंडिया की बात कही है। हम जानते हैं कि शायद ही कोई परिवार ऐसा होगा जिसके पास मोबाईल फोन न हो। मोबाइल फोन की हमें इतनी आदत हो गई है, अगर घंटा दो घंटा बैटरी डिसचार्ज हो जाए तो हम परेशान हो जाते हैं जैसे हम ही डिसचार्ज हो गये हों। मन से एकदम असंतुलित हो जाते हैं। और कनेक्टिविटी नहीं मिलती है तो भी परेशान हो जाते हैं। उस टेक्‍नोलोजी का हमारे जीवन से इतना जुड़ाव हो गया है। इसलिए टेक्‍नोलॉजी के माध्‍यम से शासन व्‍यवस्‍थाओं को सुचारू रूप से चलाने में बहुत बड़ी मदद मिल सकती है। उसी मदद के हेतु डिजिटल इंडिया के द्वारा आपके मोबाइल फोन में ही आपकी सरकार क्‍यों न हो? आपकी सरकार आपकी हथेली में क्‍यों न हो। ये काम मुश्किल नहीं है। बड़ा देश है पूरा करना एक दिन में संभव नहीं होता लेकिन काम संभव है। और इसलिए भाईयों और बहनों उस काम को करने का संकल्‍प भी हमने किया है, जिसकी हमने शुरूआत कर दी है।

आज जब मैं, बिजली के इस कार्यक्रम के लिए आया हूं, तब सरकार का काम है, बिजली उत्‍पादन हो। सरकार का काम है बिजली उत्‍पादन करने वालों को कोयला मिले, गैस मिले, जो आवश्‍यक ईंधन हैं, फ्यूल हैं वो मिले। लेकिन नागरिकों के नाते हमारी, भी जिम्‍मेदारी है। और वो है, बिजली बचाना। आज अगर हमारा सौ रूपये का बिल आता है तो हमें तय करना चाहिए कि अगले महीने का बिल 90 रूपये का कैसे आये। दस रूपये कैसे बचायें। अगर दस रुपये बचाएंगे तो बच्‍चों के लिए दूध ला सकते हैं। ये सब संभव है। थोड़ा सा जागरूता से प्रयास करना पड़ता है। और अगर हम सब नागरिक बिजली बचाने का काम करें तो, बिजली उत्‍पादन करने में जितना खर्च लगता है, उससे ज्‍यादा देशभक्ति का काम बिजली बचाकर करके भी हो सकता है। और बिजली बचाना ये कोई उपकार नहीं है। हम ‍बिजली बचाते हैं तो हमारा खर्चा भी बचता है, हमारा बिल भी कम आता है। परिवार को लाभ होता है। देश को भी लाभ होता है। और इसलिए मैं सभी नागरिक भाई-बहनों से सार्वजनिक रूप से आग्रह करता हूं कि आप घर में सब परिवार के लोग बैठकर तय करो कि अगले महीने हमारे बिजली के बिल में कितनी कमी लानी चाहिए। कोई दस रुपये तय करें कोई 20 रुपये तय करें कोई 25 रुपये तय करें कोई 50 रुपये करें और अगले महीने का जब बिल आये तो परिवार के लोग बैठ करके चर्चा करें कि भई, तय किया था दस रुपये बिल कम करेंगे वो नहीं हुआ। आठ रुपये कम हुआ। क्‍या कमी रह गई। परिवार में एक चर्चा स्‍वभाव बनना चाहिए। बिजली के अलग बजट पर चर्चा होनी चाहिए परिवार में। और मैं तो स्‍कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी कहता हूं, टीचर्स को भी कहता हूं, वो बच्‍चों को शिक्षा दें कि हर बच्‍चा अपने घर में अपने परिवार के माता-पिता बड़े भाई जो भी हों, उनसे शपथ लें कि अपने घर में हम बिजली बचाएंगे। एक बार बिजली बचाने का माहौल बन गया तो जीवन बदल जाता है।

हमें बिजली की आदत इतनी हो गई है कि पूर्णिमा का जो पूर्ण चांद होता है उस चांद की शीतलता क्‍या होती है, वो हम भूल गये है। अरे कभी तो पूर्णिमा की रात को बिजली बंद करके देखो तो सही आसमान में, बिजली भी बचेगी और चंद्रमा शीतलता का अनुभव भी होगा। एक सहज स्‍वभाव हम कैसे बनाएं और अगर सहज स्‍वभाव बनाते हैं, तो हम राष्‍ट्र की सेवा में काम आ सकते हैं और इसलिए मैं भाईयों और बहनों, आपसे आग्रह करता हूं कि हम सब विकास की ओर कोई न कोई कदम उठायें। हमारी आने वाली पीढी को अगर रोजगार दिलाना है, उनको सुख चैन की जिंदगी जीने की व्‍यवस्‍था हमें करनी है, तो विकास की राह पर हमें चलना आज से ही शुरू करना पड़ेगा। विकास का एक ही मंत्र लेकर हम चलेंगे। आप देखिए, देखते-देखते ही बदलाव शुरू हो जाएगा।

आज किसान भी, उसके अगर तीन बेटे हैं तो क्‍या योजना करता है। वो योजना ये करता है, कि चलो ये छोटे वाला बेटा खेती संभालेगा। लेकिन दो बेटे शहर में जाएंगे नौकरी करेंगे। किसान भी अपने तीन बेटे में से दो बेटों को नौकरी के लिए भेजता है। क्‍योंकि उसको लगता है कि परिवार चलाना है तो नौकरी के लिए जाना पड़ेगा। इसका मतलब रोजगार की संभावनाएं नई तलाशनी पड़ेगी। और रोजगार की संभावनाएं नई तलाशनी हैं तो वह औद्योगिक विकास के द्वारा होगा। ये बिजली के माध्‍यम से इस क्षेत्र में छोटे-छोटे कारखाने लगे। यहां के नौजवान खुद कोई उत्‍पादन के क्षेत्र में जाएं। मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में जाएं। इतना ही नहीं, गांव में तो कृषि आधारित उद्योग भी शुरू किये जा सकते हैं। जिसके कारण किसान को भी लाभ होगा। उद्योग आएगा तो रोजगार भी बढ़ेगा। इसलिए कृषि आधारित रोजगार उद्योग और उसके आधार पर ग्रामीण नौजवान को रोजगार इस काम के लिए हम बिजली का उपयोग कैसे करें। आज जो काम हम स्‍थानीय कुम्‍हार है, वो मिट्टी का काम करता है, लेकिन अगर बिजली से चलने वाला यंत्र उसको मिल गया तो अपना कुम्‍हारी काम में पहले दस रुपये का काम करता था अब सौ रुपये का काम करने लग जाएगा। टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करके उसका उत्‍पादन बढ़ेगा। उसकी क्‍वालिटी भी बढ़ेगी। हरेक क्षेत्र में हम कैसे आगे बढ़ें, हम उत्‍पादन ज्‍यादा कैसे दें और देश की आर्थिक विकास यात्रा में एक नागरिक के नाते हम भी भागीदार बने उसी दायित्‍व को लेकर के अगर हम चलेंगे तो मुझे विश्‍वास है, देश को आगे बढ़ाने का जो हमारा सपना है, सवा सौ करोड़ देशवासी उन सपनों को जरूर साकार कर पाएंगे। ये मेरा विश्‍वास है।

इतनी बड़ी संख्‍या में आप लोगों का आना ये छोटी बात नहीं है। ये एनटीपीसी वालों ने, बिजली के कई कार्यक्रम पहले भी किये होंगे। कई उद्घाटन भी किये होंगे। लेकिन शायद, इतनी बड़ी संख्‍या में लोगों को कभी देखा नहीं होगा। ये जन-सैलाब यहां है इसका कारण क्‍या है। उसका कारण साफ है, देश की जनता को विकास चाहिए और जहां भी विकास की बात होगी, मैं विश्‍वास से कहता हूं कि देश की जनता इसी प्रकार से जुड़ जाएगी। देश की जनता विकास के लिए ज्‍यादा प्रतीक्षा करने को तैयार नहीं है। ये जन सैलाब इस बात का प्रतीक है कि उसको एक मात्र काम में विश्‍वास है, विकास। और इसलिए भाईयों-बहनों विकास की दिशा में हमें आगे बढ़ना है।

आज देश में जब भी कहीं जाते हैं तो समान्‍य मानव को एक बात की चिढ़ है, गुस्‍सा है, दु:ख है, पीड़ा है, और वो है भ्रष्‍टाचार। भ्रष्‍टाचार ने हमारे देश को तबाह करके रखा हुआ है। और हालत ये बन गई है, कि कुछ लोगों के जीवन में भ्रष्‍टाचार, शिष्‍टाचार बन गया है। देशवासीयो आईए, मैं इस काम को करना चाहता हूं। मेरी मदद कीजिए। ये बीमारी देश से निकालनी है और निकाली जा सकती है। और एक बार अगर समाज मेरे साथ जुड़ गया मैं नहीं मानता हूं कि किसी ताकत है कि अब ये पाप करने की हिम्‍मत करेगा। ये भ्रष्‍टाचार के खिलाफ बोलने से कई लोगों को जरा परेशानी होती है। लेकिन कितने दिन तक हम चीजों को छिपाकर रखेंगे। आप मुझे बताइए पाप है या नहीं ये हमारे घरों में। हमारे देश में, हमारे समाज में, पाप है कि नहीं, भईया ? बताइए है या नहीं है ? तो कब तक छिपाकर रखेंगे ? इस पाप से हमें मुक्ति पानी है और हम सबने मिलकर के इस दिशा में कदम उठाना है। हम सबका सहयोग होगा तो, मैं नहीं मानता भ्रष्‍टाचारी कुछ कर सकते हैं, भाइयों। ये अलग-थलग पड़ जाएंगे। अब उनको भी लगना पड़ेगा कि समाज की सोच बदल चुकी है। हम भी अब सीधी लाइन में चलें। पहले जितना पाप किया कर लिया कि अब हमें पाप करने का अवसर नहीं मिलेगा ये बात हमें करनी होगी।

पूरे देश में ये एक अलख जगानी है, इन चीजों पर हमने सफलता पानी है अगर जनता का सहयोग मिलता है, ये काम कठिन नहीं है। ये बीमारी ज्‍यादा मुश्किल काम नहीं है और मेरा विश्‍वास है, इन स्थितियों को प्राप्‍त किया जा सकता है। आपके आशीर्वाद से इस बीमारी से भी देश को मुक्ति दिलाने में हम सफल होंगे। हम महाराष्‍ट्र के अंदर संकल्‍प करें, इस बीमारी से हमें मुक्ति लानी है। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने में बात पहुंच जाएगी क्‍योंकि महाराष्‍ट्र तो है, जहां से लोक मान्‍य तिलक जी ने कहा था – ‘स्‍वराज मेरा जन्‍मसिद्ध अधिकार है’। वही तो महाराष्‍ट्र कहता है, ‘स्‍वराज मेरा जन्‍मसिद्ध अधिकार है’। उस बात को हम लेकर चलें ।

फिर आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्‍यवाद। मेरे साथ पूरी ताकत के साथ बोलिए

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

Share your ideas and suggestions for Mann Ki Baat now!
PM invites participation for ‘Pariksha Pe Charcha 2022'
Explore More
Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi

Popular Speeches

Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi
Indian economy has recovered 'handsomely' from pandemic-induced disruptions: Arvind Panagariya

Media Coverage

Indian economy has recovered 'handsomely' from pandemic-induced disruptions: Arvind Panagariya
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Our youth has a key role in taking India to new heights in the next 25 years: PM Modi
January 24, 2022
Share
 
Comments
“Sacrifice of Sahibzadas of Guru Gobind Singh Ji for India's civilization, culture, faith and religion is incomparable”
“Today we feel proud when we see the youth of India excelling in the world of startups. We feel proud when we see that the youth of India are innovating and taking the country forward”
“This is New India, which does not hold back from innovating. Courage and determination are the hallmark of India today”
“Children of India have shown their modern and scientific temperament in the vaccination program and since January 3, in just 20 days, more than 40 million children have taken the corona vaccine”

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के हमारे साथी स्मृति ईरानी जी, डॉक्टर महेंद्रभाई, सभी अधिकारीगण, सभी अभिभावक एवं शिक्षकगण, और भारत के भविष्य, ऐसे मेरे सभी युवा साथियों!

आप सबसे बातचीत करके बहुत अच्छा लगा। आपसे आपके अनुभवों के बारे में जानने को भी मिला। कला-संस्कृति से लेकर वीरता, शिक्षा से लेकर इनोवेशन, समाजसेवा और खेल, जैसे अनेकविध क्षेत्रों में आपकी असाधारण उपलब्धियों के लिए आपको अवार्ड मिले हैं। और ये अवार्ड एक बहुत बड़ी स्‍पर्धा के बाद आपको मिले हैं। देश के हर कोने से बच्‍चे आगे आए हैं। उसमें से आपका नंबर लगा है। मतलब कि अवार्ड पाने वालों की संख्‍या भले कम है, लेकिन इस प्रकार से होनहार बालकों की संख्‍या हमारे देश में अपरम्‍पार है। आप सबको एक बार फिर इन पुरस्कारों के लिए बहुत बहुत बधाई। आज National Girl Child Day भी है। मैं देश की सभी बेटियों को भी बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों

आपके साथ-साथ मैं आपके माता-पिता और टीचर्स को भी विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ। आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं, इसके पीछे उनका भी बहुत बड़ा योगदान है। इसीलिए, आपकी हर सफलता आपके अपनों की भी सफलता है। उसमें आपके अपनों का प्रयास और उनकी भावनाएं शामिल हैं।

मेरे नौजवान साथियों,

आपको आज ये जो अवार्ड मिला है, ये एक और वजह से बहुत खास है। ये वजह है- इन पुरस्कारों का अवसर! देश इस समय अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है। आपको ये अवार्ड इस महत्वपूर्ण कालखंड में मिला है। आप जीवन भर, गर्व से कहेंगे कि जब मेरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा था, तब मुझे ये अवार्ड मिला था। इस अवार्ड के साथ आपको बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी मिली है। अब दोस्तों की, परिवार की, समाज की, हर किसी की आपसे अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। इन अपेक्षाओं का आपको दबाव नहीं लेना है, इनसे प्रेरणा लेनी है।

युवा साथियों, हमारे देश के छोटे छोटे बच्चों ने, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आज़ादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आज़ादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था, उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।

आपने टीवी देखा होगा, मैं पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात श्रीमान बलदेव सिंह और श्रीमान बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आज़ादी के तुरंत बाद जो युद्ध हुआ था कश्‍मीर की धरती पर, अभी तो इनकी उम्र बहुत बड़ी है, तब वो बहुत छोटी उम्र के थे और उन्‍होंने उस युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। और हमारी सेना में पहली बार बाल-सैनिक के रूप में उनकी पहचान की गई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में अपनी सेना की मदद की थी।

इसी तरह, हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोविन्द सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान! साहिबज़ादों ने जब असीम वीरता के साथ, धैर्य के साथ, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबज़ादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसम्बर को 'वीर बाल दिवस' की भी शुरुआत की है। मैं चाहूँगा कि आप सब, और देश के सभी युवा वीर साहिबज़ादों के बारे में जरूर पढ़ें।

आपने ये भी जरूर देखा होगा, कल दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नेताजी से हमें सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है- कर्तव्य की, राष्ट्रप्रथम की! नेताजी से प्रेरणा लेकर हम सबको, और युवा पीढ़ी को विशेष रूप से देश के लिए अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ना है।

साथियों,

हमारी आजादी के 75 साल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज हमारे सामने अपने अतीत पर गर्व करने का, उससे ऊर्जा लेने का समय है। ये समय वर्तमान के संकल्पों को पूरा करने का है। ये समय भविष्य के लिए नए सपने देखने का है, नए लक्ष्य निर्धारित करके उन पर बढ़ने का है। ये लक्ष्य अगले 25 सालों के लिए हैं, जब देश अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे करेगा।

अब आप कल्‍पना कीजिए, आज आप में से ज्‍यादातर लोग 10 और 20 के बीच की उम्र के हैं। जब आजादी के सौ साल होंगे तब आप जीवन के उस पड़ाव पर होंगे, तब ये देश कितना भव्‍य, दिव्‍य, प्रगतिशील, ऊंचाइयों पर पहुंचा हुआ, आपका जीवन कितना सुख-शांति से भरा हुआ होगा। यानी, ये लक्ष्य हमारे युवाओं के लिए हैं, आपकी पीढ़ी और आपके लिए हैं। अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा, देश का जो सामर्थ्य बढ़ेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारी युवा पीढ़ी की है।

साथियों,

हमारे पूर्वजों ने जो बोया, उन्‍होंने जो तप किया, त्‍याग किया, उसके फल हम सबको नसीब हुए हैं। लेकिन आप वो लोग हैं, आप एक ऐसे कालखंड में पहुंचे हैं, देश आज उस जगह पर पहुंचा हुआ है कि आप जो बोऐंगे उसके फल आपको खाने को मिलेंगे, इतना जल्‍दी से बदलाव होने वाला है। इसीलिए, आप देखते होंगे, आज देश में जो नीतियाँ बन रही हैं, जो प्रयास हो रहे हैं, उन सबके केंद्र में हमारी युवा पीढ़ी है, आप लोग हैं।

आप किसी सेक्टर को सामने रखिए, आज देश के सामने स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं, स्टैंडअप इंडिया जैसे प्रोग्राम चल रहे हैं, डिजिटल इंडिया का इतना बड़ा अभियान हमारे सामने है, मेक इन इंडिया को गति दी जा रही है, आत्मनिर्भर भारत का जनआंदोलन देश ने शुरू किया है, देश के हर कोने में तेजी से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ले रहा है, हाइवेज़ बन रहे हैं, हाइस्पीड एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं, ये प्रगति, ये गति किसकी स्पीड से मैच करती है? आप लोग ही हैं जो इन सब बदलावों से खुद को जोड़कर देखते हैं, इन सबके लिए इतना excited रहते हैं। आपकी ही जेनेरेशन, भारत ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी इस नए दौर को लीड कर रही है।

आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के CEO, हर कोई उसकी चर्चा कर रहा है, ये CEO कौन हैं, हमारे ही देश की संतान हैं। इसी देश की युवा पीढ़ी है जो आज विश्‍व में छाई हुई है। आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि भारत के युवा स्टार्ट अप की दुनिया में अपना परचम फहरा रहे हैं। आज हमें गर्व होता है, जब हम देखते हैं कि भारत के युवा नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं, देश को आगे बढ़ा रहे हैं। अब से कुछ समय बाद, भारत अपने दमखम पर, पहली बार अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने वाला है। इस गगनयान मिशन का दारोमदार भी हमारे युवाओं के पर ही है। जो युवा इस मिशन के लिए चुने गए हैं, वो इस समय कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

साथियों,

आज आपको मिले ये अवार्ड भी हमारी युवा पीढ़ी के साहस और वीरता को भी celebrate करते हैं। ये साहस और वीरता ही आज नए भारत की पहचान है। कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई हमने देखी है, हमारे वैज्ञानिकों ने, हमारे वैक्सीन Manufacturers ने दुनिया में लीड लेते हुये देश को वैक्सीन्स दीं। हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी बिना डरे, बिना रुके देशवासियों की सेवा की, हमारी नर्सेस गाँव गाँव, मुश्किल से मुश्किल जगहों पर जाकर लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं, ये एक देश के रूप में साहस और हिम्मत की बड़ी मिसाल है।

इसी तरह, सीमाओं पर डटे हमारे सैनिकों की वीरता को देखिए। देश की रक्षा के लिए उनकी जांबाजी हमारी पहचान बन गई है। हमारे खिलाड़ी भी आज वो मुकाम हासिल कर रहे हैं, जो भारत के लिए कभी संभव नहीं माने जाते थे। इसी तरह, जिन क्षेत्रों में बेटियों को पहले इजाजत भी नहीं होती थी, बेटियाँ आज उनमें कमाल कर रही हैं। यही तो वो नया भारत है, जो नया करने से पीछे नहीं रहता, हिम्मत और हौसला आज भारत की पहचान है।

साथियों,

आज भारत, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करने के लिए निरंतर कदम उठा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे आपको पढ़ने में, सीखने में और आसानी होगी। आप अपनी पसंद के विषय पढ़ पाएं, इसके लिए भी शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश भर के हजारों स्कूलों में बन रही अटल टिंकरिंग लैब्स, पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही बच्चों में इनोवेशन का सामर्थ्य बढ़ा रही हैं।

साथियों,

भारत के बच्चों ने, युवा पीढ़ी ने हमेशा साबित किया है कि वो 21वीं सदी में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कितने सामर्थ्य से भरे हुए हैं। मुझे याद है, चंद्रयान के समय, मैंने देशभर के बच्चों को बुलाया था। उनका उत्साह, उनका जोश मैं कभी भूल नहीं सकता। भारत के बच्चों ने, अभी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी अपनी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया है। 3 जनवरी के बाद से सिर्फ 20 दिनों में ही चार करोड़ से ज्यादा बच्चों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है। ये दिखाता है कि हमारे देश के बच्चे कितने जागरूक हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का कितना एहसास है।

साथियों,

स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय भी मैं भारत के बच्चों को देता हूं। आप लोगों ने घर-घर में बाल सैनिक बनकर, स्‍वच्‍छाग्रही बनकर अपने परिवार को स्वच्छता अभियान के लिए प्रेरित किया। घर के लोग, स्वच्छता रखें, घर के भीतर और बाहर गंदगी ना हो, इसका बीड़ा बच्चों ने खुद उठा लिया था। आज मैं देश के बच्चों से एक और बात के लिए सहयोग मांग रहा हूं। और बच्‍चे मेरा साथ देंगे तो हर परिवार में परिवर्तन आएगा। और मुझे विश्‍वास है ये मेरे नन्‍हें-मुन्‍हें साथी, यही मेरी बाल सेना मुझे इस काम में बहुत मदद करेगी।

जैसे आप स्वच्छता अभियान के लिए आगे आए, वैसे ही आप वोकल फॉर लोकल अभियान के लिए भी आगे आइए। आप घर में बैठ करके, सब भाई-बहन बैठ करके एक लिस्‍ट बनाइए, गिनती करिए, कागज ले करके देखिए, सुबह से रात देर तक आप जो चीजों का उपयोग करते हैं, घर में जो सामान है, ऐसे कितने Products हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, विदेशी हैं। इसके बाद घर के लोगों से आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई Product खरीदा जाए तो वो भारत में बना हो। उसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो, जिसमें भारत के युवाओं के पसीने की सुगंध हो। जब आप भारत में बनी चीजें खरीदेंगे तो क्‍या होने वाला है। एकदम से हमारा उत्‍पादन बढ़ने लग जाएगा। हर चीज में उत्पादन बढ़ेगा। और जब उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। जब रोजगार बढ़ेंगे तो आपका जीवन भी आत्मनिर्भर बनेगा। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का अभियान, हमारी युवा पीढ़ी, आप सभी से भी जुड़ा हुआ है।

साथियों,

आज से दो दिन बाद देश अपना गणतन्त्र दिवस भी मनाएगा। हमें गणतन्त्र दिवस पर अपने देश के लिए कुछ नए संकल्प लेने हैं। हमारे ये संकल्प समाज के लिए, देश के लिए, और पूरे विश्व के भविष्य के लिए हो सकते हैं। जैसे कि पर्यावरण का उदाहरण हमारे सामने है। भारत पर्यावरण की दिशा में आज इतना कुछ कर रहा है, और इसका लाभ पूरे विश्व को मिलेगा।

मैं चाहूँगा कि आप उन संकल्पों के बारे में सोचें जो भारत की पहचान से जुड़े हों, जो भारत को आधुनिक और विकसित बनाने में मदद करें। मुझे पूरा भरोसा है, आपके सपने देश के संकल्पों से जुड़ेंगे, और आप आने वाले समय में देश के लिए अनगिनत कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

इसी विश्वास के साथ आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत बधाई,

सभी मेरे बाल मित्रों को बहुत-बहुत प्‍यार, बहुत-बहुत बधाई, बहुत बहुत धन्यवाद !