भारत माता की 'जय'!

अमेरिका में बसे हुए मेरे प्‍यारे भाईयों और बहनों!

आज इस समारोह में विशेष रूप से उपस्थित अमेरिका की राजनीति के सभी श्रेष्‍ठ महानुभाव और भारत में भी टीवी और इंटरनेट के माध्‍यम से कार्यक्रम को देख रहे सभी भाईयों-बहनों!

आज कई लोग इस सभागृह में पहुंच नहीं पाएं है, वो बाहर खड़े हैं, उनका भी मैं स्‍मरण करता हूं। आप सब को नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

नवरात्रि का पर्व, ये शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्रि का पर्व शुद्धिकरण का पर्व है। नवरात्रि का पर्व समर्पण भाव को अधिक तीव्र बनाने का पर्व है। ऐसे पावन पर्व पर मुझे आप सबसे मिलने का अवसर मिला है, मैं बहुत भाग्‍यशाली हूं कि मेरे देशवासी, जिन्‍होंने हजारों मील दूर यहां रहकर के भारत की इज्‍जत को बढ़ाया है। भारत की आन-बान-शान को बढ़ाया है। वरना एक जमाना था, हमारे देश को सांप-सपेरों वालों का देश माना जाता था। अगर आप न होते, हमारे देश की युवा पीढ़ी न होती, Information Technology के क्षेत्र में आप लोगों ने जो कमाल करके दिखाया है, वो न होता तो आज भी दुनिया शायद हमें सांप-सपेरों का ही देश मानती।

मैं कुछ वर्ष पहले ताइवान गया, तब तो मैं मुख्‍यमंत्री नहीं था, प्रधानमंत्री नहीं था। एक Interpreter मेरे साथ था। कुछ दिन साथ रहने के बाद परिचय हो गया। एक दिन वो मुझे पूछता है कि आपको अगर बुरा न लगे तो मैं आपको एक सवाल पूछना चाहता हूं। मैंने कहा मुझे बुरा नहीं लगेगा, पूछिए क्‍या पूछना चाहते हैं। उसने बोला, आपको बुरा नहीं लगेगा न! मैंने कहा नहीं लगेगा, पूछिए क्‍या पूछना चाहते हैं। फिर भी वो झिझक रहा था। फिर उसने कहा कि मैंने सुना है कि भारत में तो काला जादू होता है, Black Magic होता है। सांप-सपेरे का देश है। लोग सांप को ही खेल करते रहते हैं, यही है क्‍या? मैंने कहा नहीं! हमारे देश का अब बहुत Devaluation हो गया है। मैंने कहा हमारे पूर्वज तो सांप के साथ खेलते थे, लेकिन हम Mouse के साथ खेलते हैं। हमारे नौजवान Mouse को घुमाते हैं, सारी दुनिया को डुलाते हैं।

आप सबने अपने व्‍यवहार के द्वारा, अपने संस्‍कारों के द्वारा, अपनी क्षमता के द्वारा अमेरिका के अंदर बहुत इज्‍जत कमाई है। आपके माध्‍यम से, न सिर्फ अमेरिका में, बल्कि अमेरिका में बसने वाले और देशों के लोगों के कारण भी, दुनिया में भी भारत के लिए एक सकारात्‍मक पहचान बनाने में आपकी बहुत बड़ी अहम भूमिका रही है। भारत में अभी-अभी चुनाव हुए। आपमें से बहुत लोग होंगे जिनको चुनाव में मतदान करने का सौभाग्‍य नहीं मिला। लेकिन आप सभी होंगे, जिस दिन नतीजे आए होंगे, आप सोये नहीं होंगे।

यहां एक भी व्‍यक्ति ऐसा नहीं होगा जो उस रात सो पाया होगा। जितना जश्‍न हिन्‍दुस्‍तान मना रहा था, उससे भी कई गुणा ज्‍यादा जश्‍न दुनिया भर में फैला हुआ भारतीय समाज मना रहा था। आपमें से बहुत सारे लोग भारत के चुनाव अभियान के साथ जुड़े थे, वो आए थे, अपना समय दिया था। मैं उनको मिल कर Thanks भी नहीं कह पाया था। आज, मैं सबको Thanks कहता हूं, रूबरू आकर कहता हूं कि आप आए, हिन्‍दुस्‍तान के गांवों में महीनों तक रहे। भारत के लोकतंत्र में एक अभूतपूर्व विजय की घटना घटी। इसे चरितार्थ करने में आपका योगदान रहा।



30 साल के बाद! आप लोग 30 साल के बाद से परिचित हैं। 30 साल के बाद भारत में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी। ये चुनाव नतीजे, हिन्‍दुस्‍तान के किसी Political पंडित के गले ये परिणाम नहीं उतरते थे। Opinion Makers भी Opinion बनाने में असफल रहे। हिन्‍दुस्‍तान के गांव, गरीब, अनपढ़ लोगों ने Opinion Maker का Opinion बना दिया। गरीब से गरीब व्‍यक्ति की भी लोकतंत्र में कितनी निष्‍ठा है, लोकतंत्र में उसकी कितनी अहमियत है, इसका उदाहरण, ये भारत के चुनाव ने बताया है। लेकिन चुनाव जीतना, वो सिर्फ पद ग्रहण नहीं होता। चुनाव जीतना, वो किसी कुर्सी पर विराजने का कार्यक्रम नहीं होता। चुनाव जीतना, एक जिम्‍मेदारी होती है।

जब से मैंने इस कार्य का दायित्‍व संभाला है, 15 मिनट भी vacation नहीं लिया। हम एक भी vacation नहीं लेंगे और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं। हिंदुस्‍तान में आपने मुझे जो दायित्‍व दिया है, देशवासियों ने जो दायित्‍व दिया है, हम ऐसा कभी कुछ भी नहीं करेंगे, जिनके कारण आपको नीचा देखने की नौबत आए। हमारे देश में एक ऐसा उमंग और उत्‍साह का माहौल है। देश के लोग बदलाव चाहते हैं। देश बदलाव चाहता है। विश्‍व जिस प्रकार से आर्थिक गतिविधियों से आगे बढ़ रहा है, भारत का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी कहने लगा है, कब तक ऐसे जियेंगे। बदलाव चाहता है, और मेरे सारे देशवासियों, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, भारत की आर्थिक स्थिति को बदलने में, भारत के सामाजिक जीवन में सामर्थ देने में, भारत के व्‍यक्तिगत जीवन में quality of life के लिए आपने जिस सरकार को चुनाव है, वह कोई कमी रखेगी।

मैं इस बात को भली-भांति जानता हूं कि यहां बैठे हुए आप सब के मन में भी भारत के लिए वर्तमान सरकार से अनेक-अनेक अपेक्षाएं हैं। भारत के नागरिकों के मन में भी भारत के लिए वर्तमान सरकार से अनेक-अनेक अपेक्षाएं हैं। लेकिन मैं विश्‍वास से कह सकता हूं, ये सरकार अपने कार्यकाल के दरम्यान जन सामान्‍य की आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण करने में शत-प्रतिशत सफल होगी।

जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था तो एक बार मैंने एक कार्यक्रम में कहा था, मैंने कहा- जिसको हिंदुस्‍तान वापस आना है, जल्‍दी आइए, देर मत कीजिए।तब मुझे पता नहीं था कि ये दायित्‍व मेरे जिम्‍मे आपने वाला है लेकिन अब यहां रहने वाला हर व्‍यक्ति, कितने ही सालों से अमेरिका में बसा हो अब उसको भी लगने लगा है, एक पैर तो हिंदुस्‍तान में रखना ही चाहिए। मेरे प्‍यारे देशवासियों, सारा विश्‍व इस बात में convince है कि 21वीं सदी एशिया की सदी हैं। अमेरिका के भी गणमान्‍य राजनेताओं ने पब्लिकली ये कहा है कि 21वीं सदी, कोई कहता है एशिया की सदी है, कोई कहता है हिंदुस्‍तान की सदी है।

ऐसे ही नहीं कहा जाता है, भारत के पास वो सामर्थ्‍य है, वो संभावनाएं है, और अब संजोग भी है। इसलिए आप कल्‍पना कीजिए, आज हिंदुस्‍तान दुनिया का सबसे नौजवान देश है। दुनिया की सबसे पुरातन संस्‍कृति वाला देश और दुनिया का सबसे नौजवान देश। एक ऐसा अद्भुत मिलन है, ऐसा अद्भुत संयोग पैदा हुआ है, आज भारत में 65% population 35 age group से नीचे है। 35 से कम आयु के 65% जिस देश के पास नौजवान हो, जिसके पास ऐसी सामर्थ्‍यवान भुजाएं हों, जिसकी अंगुलियों में कंप्‍यूटर के माध्‍यम से दुनिया से जुड़ने की ताकत पड़ी हो, जिस देश का नौजवान अपने सामर्थ से अपना भविष्‍य बनाने के लिए कृत संकल्‍प हो, उस देश को पीछे मुड़कर के देखने की आवश्‍यकता नहीं है।

निराशा का कोई काम नहीं है साथियों। मैं बहुत विश्‍वास के साथ कहता हूं, ये देश बहुत तेज गति से आगे बढ़ने वाला है। इन नौजवानों के सामर्थ से आगे बढ़ने वाला है। भारत के पास तीन ऐसी चीजें हैं आज जो दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। लेकिन हमारा दायित्‍व बनता है कि हमारी इन तीन शक्तियों को हम पहचानें। हमारी इन तीन शक्तियों को विश्‍व के सामने प्रस्‍तुत करें। हमारी इन तीन शक्तियों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर के mobilise करें, तीव्र गति से आगे बढ़े।

वो तीन चीजें हैं, जब सवा सौ करोड़ देशवासियों ने आर्शीवाद दे दिया तो वो ईश्‍वर का ही आर्शीवाद होता है। जनता जनार्दन ईश्‍वर का रूप होता है। जनता जनार्दन वो भगवान का रूप होता है और जब जनता जनार्दन का आर्शीवाद होता है तो वह स्‍वयं परमात्‍मा का आर्शीवाद होता है। वो तीन चीजें, जिसके लिए भारत गर्व कर सकता है और जिसके आधार पर भारत आगे बढ़ सकता है।

एक डेमोक्रेसी, लोकतंत्र। ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है, सबसे बड़ी पूंजी है। मैं देख रहा था, जब चुनाव अभियान, मई महीने की भयंकर गर्मी। बदन पर कपड़े ना हो, ऐसा गरीब व्‍यक्ति भी जनसभाओं में सुनने के लिए पहुंचाता था, उस आशा के साथ पहुंचता था। यही लोकतंत्र है, जिस लोकतंत्र के माध्‍यम से आशा आकाक्षाओं को पूर्व करता है। भारत में लोकतंत्र सिर्फ व्‍यवस्‍था नहीं है। भारत में लोकतंत्र आस्‍था है। आस्‍था है, विश्‍वास है।

दूसरी ताकत है Demographic Dividend. जिस देश के पास 35 से कम उम्र के 65 प्रतिशत नौजवान हों, इससे बड़ा इस देश को और क्‍या चाहिए! इससे बड़ी क्‍या सम्‍पदा हो सकती है! और तीसरी बात, demand. पूरा विश्‍व भारत की तरफ नज़र कर रहा है। क्‍यों! क्‍योंकि उसे मालूम है सवा सौ करोड़ का देश है, बहुत बड़ा बाजार है, बहुत ज्‍यादा demand है। ये तीनों चीज़ें किसी एक देश के पास हो, ऐसा आज दुनिया में कहीं नहीं है। इसी सामर्थ्‍य के आधार पर, इसी शक्ति के भरोसे भारत नई ऊंचाईयों को पार करेगा, ये मेरा विश्‍वास है।

अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। सारी दुनिया के लोग अमेरिका में आ करके बसे हैं और भारत के लोग सारी दुनिया में जा करके बसे हैं। दुनिया का कोई कोना नहीं होगा जहां आपको भारतीय न मिले। अमेरिका का कोई शहर ऐसा नहीं है जहां दुनिया का कोई नागरिक न मिले। कितनी मिली-जुली बातें हैं! और इसलिए भाईयों-बहनों! भारत आने वाले दिनों में ……मेरा स्‍पष्‍ट मत रहा है कि सरकारें विकास नहीं कर पाती है। सरकार ज्‍यादा से ज्‍यादा अपनी स्‍कीम लागू कर सकती है। रोड बना लेगी, अस्‍पताल बना लेगी, स्‍कूल बना लेगी। उसकी बजट की सीमाएं होती हैं। विकास तब होता है जब जन-भागीदारी होती है। दुर्भाग्‍य से अब तक हमारे देश में सरकारों ने development का ठेका लिया था। हमने, development की जिम्‍मेदारी, मिलजुल कर सवा सौ करोड़ देशवासी और सरकार मिल करके करेंगे, ये रास्‍ता हमने अपनाया।

हमारे देश में एक और दिक्‍कत है.. और अगर देश को प्रगति करनी है तो सरकार का दायित्‍व बनता है- Good Governance. आप लोग भी.. आपकी क्‍या शिकायत होती होगी- यही न कि साहब, airport पर उतरे थे.. ऐसा हुआ; Visa लेने गए थे.. पता नहीं । भले ही मैं हज़ारों मील दूर रहता हूं आपसे, लेकिन आपके दर्द को भी भलीभांति जानता हूं। आपकी पीड़ा को मैं भलीभांति जानता हूं और इसलिए भाईयो-बहनों! हमारी ये कोशिश है कि हम विकास को एक जन-आंदोलन बनाएं और जब मैं विकास को जन-आंदोलन बनाने की बात कहता हूं….!

हम लोग आज़ादी के इतिहास से भलीभांति परिचित हैं। अंग्रेज़ लोग हमारे देश में शासन करते थे, उसके पहले कई लोगों ने हमारे देश पर शासन किया। करीब हज़ार 12 सौ साल तक हम गुलाम रहे, लेकिन अगर इतिहास देखेंगे, हर समय कोई न कोई ऐसा महापुरूष मिला है, जिसने देश के लिए बलिदान दिया है। आप सिक्‍ख परम्‍परा के सभी गुरूओं के नाम लो, एक के बाद एक! देश के लिए कितना बलिदान! भगत सिंह त‍क उस परम्‍परा को देखिए। आज भी सीमा पर हमारे सरदार देश के लिए जीने-मरने को तैयार होते हैं।

हर युग में, हर युग में महापुरूषों ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। लेकिन! वो बलिदान देते थे, फांसी पर चढ़ जाते थे, विदेशियों की गोलियों का शिकार हो जाते थे। फिर कोई नया पैदा होता था, फिर वो कुछ करता था, फिर वो खत्‍म होता था, फिर कोई तीसरा पैदा होता था। मरने वालों की संख्‍या कम नहीं थी, लेकिन वो अकेला आता था देश के लिए जी-जान से लड़ जाता था, शहीद हो जाता था। पांच-पचास अपने यार-दोस्‍तों की टोली ले करके लड़ पड़ता था। लेकिन महात्‍मा गांधी जी ने क्‍या किया!

महात्‍मा गांधी जी ने आज़ादी को जन-आंदोलन बना दिया। कोई खादी पहनता है, तो आज़ादी के लिए पहनता है, कोई किसी बच्‍चे को पढ़ाता है तो आज़ादी के लिए पढ़ाता है, कोई किसी भूखे को खाना खिलाता है तो आज़ादी के लिए खिलाता है, कोई सफाई करता है, झाडू लगाता है तो आज़ादी के लिए। उन्‍होंने हर व्‍यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार, ये दिशा दी, ये सामर्थ्‍य दिया और हर हिन्‍दुस्‍तानी को लगने लगा कि मैं भी आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा हूं। ये महात्‍मा गांधी का सबसे बड़ा contribution था।

आज़ादी की जंग में पूरे हिन्‍दुस्‍तान को, हर नागरिक को अपने काम के माध्‍यम से ही.. ये मैं देश के लिए करता हूं ये भाव जगा करके आज़ादी के आंदोलन को एक नई ताकत दी थी। भाईयों-बहनों! जिस प्रकार से आज़ादी का आंदोलन एक जन-आंदोलन था, वैसे ही विकास.. ये जन-आंदोलन बनना जरूरी है। हिन्‍दुस्‍तान के सवा सौ करोड़ देशवासियों को लगना चाहिए कि मैं बच्‍चों को अच्‍छी तरह शिक्षा देता हूं, मैं भले ही शिक्षक हूं, मैं देश की सेवा कर रहा हूं, मैं प्रधानमंत्री से भी अच्‍छा काम कर रहा हूं। एक सफाई करने वाला सफाई कर्मचारी होगा, वो अच्‍छी सफाई करता है, क्‍यों! क्योंकि मेरे देश के शान बान के लिए काम करता हूं। यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए। यह देश सेवा होगी। एक डाक्‍टर भी गरीब परिवार के मरीज की सेवा करेगा, और सेवाभाव से करेगा। गरीब की जिंदगी भी मूल्‍यवान होती है और वह डॉक्‍टर भी राष्‍ट्रभक्ति के लिए काम करता है।

मेरी कोशिश यह है कि विकास एक जन आंदोलन बने। सवा सौ करोड़ देशवासी, ये विकास के जन आंदोलन का हिस्‍सा बने। और हर कोई, जो भी करता है, मैं देश के लिए करूं। मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिसके कारण मेरे देश को नुकसान हो, ये भाव मुझे जगाना है। और मुझे विश्‍वास है और मुझे विश्‍वास है कि फिर एक बार वो दिन आए। फिर एक बार माहौल बना है, हर कोने में हिन्दुस्तानी को लगता है कि अब देश को आगे ले जाना है। इसी सवा सौ करोड़ देशवासियों की इच्‍छाशक्ति, यही मेरा संबल है, यही मेरी ताकत है। इसी पर मेरा भरोसा है, जिसके कारण 21वीं सदी का नेतृत्‍व हिंदुस्‍तान के करने की पूरी संभावना है।

हमारे नौजवान, आने वाले दिनों में, आप लोग जो पढ़ते होंगे, उनको पता होगा, 2020 के समय आते-आते दुनिया में इतनी बड़ी मात्रा में वर्ककोर्स की जरूरत पड़ने वाली है। इनके यहां सब बूढ़े-बूढ़े सब लोग होंगे। दुनिया के पास काम करने वाले लोग नहीं होंगे। हम पूरी दुनिया को workforce supply कर पाएंगे। आज पूरे विश्‍व को नर्सिंग क्षेत्र में इतनी मांग है। अगर भारत से हम नर्सिंग की training करके दुनिया में भेजें तो उनके लिए बहुत बड़ा उपकार है। आज विश्‍व को teachers की मांग है। Maths और Science के teachers नहीं मिलते। क्‍या भारत ये teachers export नहीं कर सकता है। जिस देश के पास नौजवान हो, वह नौजवानों की क्षमता बढ़ा करके, विश्‍व में जिस प्रकार के manpower की जरूरत है, भारत अपनी युवा शक्ति के माध्‍यम से दुनिया में छा जाने की ताकत रखता है। दुनिया में जगह बनाने की ताकत रखता है।

भारत के नौजवानों का talent, दुनिया को उसका लोहा मानना पड़ेगा मेरे भाइयों-बहनों। आप लोगों ने यहां आकर के क्‍या कमाल नहीं किया है। आखिरकर जो अनाज खाकर के आप आए हैं, जो पानी पीकर के आप आए हैं, वही तो अनाज-पानी हम भी तो खा रहे हैं। अगर आप कर सकते हैं तो हम क्‍यों नहीं कर सकते? हम भी कर सकते हैं। talent देखिए इस देश की।

आपको अहमदाबाद में अगर एक किलोमीटर ऑटो रिक्‍शा में जाना है तो करीब 10 रुपये खर्च होते हैं। एक किलोमीटर अगर ऑटो रिक्‍शा में जाना है तो 10 रुपए खर्च होते हैं। भारत के talent का कमाल देखिए 650 million किलोमीटर, 65 करोड़ किलोमीटर Mars की यात्रा की हमने और सारा Indigenous, छोटे-छोटे कारखानों में पुर्जें बने थे, उसको इकट्ठा करके Mars का प्रयोग किया गया। अहमदाबाद में 1 किलोमीटर ऑटो रिक्‍शा में जाना है तो 10 रुपये लगते हैं, हमें मार्स पर पहुंचने में सिर्फ 7 रुपये लगे एक किलोमीटर पर। 7 रुपये में 1 किलोमीटर, यह हमारी talent नहीं है तो क्‍या है। यह हमारे नौजवानों का सामर्थ्‍य नहीं है तो क्‍या है? इतना ही नहीं, दुनिया में हिंदुस्‍तान पहला देश है जो पहले ही प्रयास में Mars पर पहुंचने में सफल हुआ है।

अमेरिका और भारत सिर्फ नीचे ही बात कर रहे हैं, ऐसा नहीं है, Mars में भी बात कर रहे हैं। 22 तारीख को अमेरिका पहुंचा, 24 को हम पहुंच गए और इतना ही नहीं, हॉलीवुड की फिल्‍म बनाने का जितना बजट होता है, उससे कम बजट में Mars पर पहुंच गया।

जिसके पास ये talent हो, जिस देश के पास ये सामर्थ्‍य हो, वह देश कई नई ऊंचाइयों को पार कर सकता है और उसको पार करने के लिए हमने एक बीड़ा उठाया है, Skill Development। हमारे नौजवानों में, उसके हाथ में हुनर हो, काम करने का अवसर हो, तो एक आधुनिक हिंदुस्‍तान खड़ा करने की उसकी ताकत होती है। इसलिए Skill Development पर हमने बल दिया है। नई सरकार बनने के बाद Skill Development के लिए अलग ministry बना दी गई है। और पूरी शक्ति और हम इसमें दुनिया के देशों के अनुभव को भी share करने वाले हैं। हम उनको निमंत्रण देने वाले है, आइए, Skill Development में हमारे साथ जुडि़ये। विश्‍व की Skill Universities हैं, आए, हमारे साथ जुड़े। हम इस प्रकार का Skill Development करना चाहते हैं, जिसमें हमारे दो इरादे है। एक वो Skill Development जो लोग तैयार होकर के Job Creator बने, दूसरा वो जिनकी Job Creator बनने की संभावना नहीं है, पर Job पाने के लिए पहली पसंद में पसंद हो जाए, उस प्रकार का वो नौजवान तैयार हो।

हमारे यहां कुछ वर्षों पहले बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण हुआ था, Nationalisation हुआ था बैंकों का। इस इरादे से हुआ था कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति को, भारत की जो मुख्‍य धारा है आर्थिक, बैंकिंग क्षेत्र, Financial क्षेत्र, उसका उन्‍हें सदभाग्‍य मिला और बहुत बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन गया था। जो लोग 70’s के इतिहास के कालखंड को जानते होंगे, उनको मालूम होगा। देखिए हुआ क्‍या, इतनी सारी बैंक होने के बाद भी भारत में 50% परिवार ऐसे हैं, जिनका बेचारों को बैंक में खाता ही नहीं है और उसके कारण वह साहूकार से ब्‍याज पर पैसे लेता है। गरीब आदमी को साहूकार कैसे लूटता है, आपको मालूम है।

मेरे गौरा समाज के लोग यहां बैठे है, उनको पता है। क्‍या सरकारी खजाना गरीबों की भलाई के लिए नहीं उपयोग होना चाहिए? क्‍या सरकारी खजाना सिर्फ अमीरों के लिए होना चाहिए। इसलिए हमने एक आते ही प्रधानमंत्री जनधन योजना को लांच किया और मैं आज बड़े गर्व के साथ कहता हूं। सरकार चलती है, इसका सबूत क्‍या है? सिर्फ दो सप्‍ताह के भीतर भीतर 4 करोड़ परिवारों के खाते खोलने में ये बैंक वाले घर-घर गए थे। आपने कभी सोचा है कि बैंक वाला आपके घर आए। पोस्‍ट वाला तो आता है बेचारा, बैंक वाला कभी नहीं आता है। स्थिति बदली जा सकती है, लोगों को Motivate किया जा सकता है और परिणाम प्राप्‍त किया जा सकता है।

हमने यह कहा था कि zero-balance से account खोला जाएगा। लेकिन मेरे देश के नागरिकों की ईमानदारी देखिए! मोदी ने भले ही कहा कि जीरो बैलेंस से अकांउट खोलूंगा लेकिन इन नागरिकों ने 15 सौ करोड़ रुपया बैंक में जमा करवाया। अब मुद्दा इस बात का है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी देश के विकास में अपनी भागीदारी को किस प्रकार से करता है उसका ये जीता-जागता उदाहरण है। यही चीज़ें हैं जो बदलाव लाती है।

भारत के पास बहुत संभावनाएं हैं। मैंने अभी एक कार्यक्रम launch किया है और पूरे विश्‍व को निमंत्रण देता हूं, मैं यहां बैठे हुए आपको भी निमंत्रण देता हूं। मेरा निमंत्रण इस बात के लिए है- Make In India. अगर आज, आपको Human Recourses चाहिए, आपको Effective Governance चाहिए, अगर आपको Low Cost Production चाहिए तो भारत से बड़ी कोई अवसर की जगह नहीं हो सकती भाईयों! हम इस पर बल दे रहे हैं और ‘Make in India’ के लिए…..!

आखिरकार बाहर से आते समय लोग क्‍या कहते है.. कि साहब, आते तो हैं लेकिन सरकार में इतने धक्‍के खाने पड़ते हैं, इधर जाएं, उधर जाएं। अब मैं आपको कहता हूं- वो दिन चले गए। Online सारी व्‍यवस्‍था है और इस ‘Make In India’ Campaign से तो आप अपने मोबाइल फोन से सरकार के साथ जुड़ सकते हैं, यहां तक उसको Develop किया है। आप अपना application, अपनी बातें, अपनी requirement मोबाइल फोन के जरिए भारत सरकार को दे सकते है।

यहां जो नौजवान हैं, जो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, यहां जो पहली पीढ़ी के लोग हैं, जो बुर्जुग लोग हैं, जिनके मन में है कि देश के लिए कुछ करना है उनसे मैं आग्रह करता हूं कि मेरी एक Website है- www.mygov.in उसमें मैंने आपके सुझावों के लिए, आप अगर जुड़ना चाहते हैं, उसके लिए बहुत अच्‍छी व्‍यवस्‍था रखी है। मैं चाहता हूं कि आज इसको आज, यहां से जाने के बाद आप चेक किजिए और देखिए कि आप कहां मेरे साथ जुड़ सकते हैं। आप आईये। भारत का भाग्‍य बदलने के लिए हम सब की इच्‍छा है। आप उसके साथ जुडि़ए। Technology का सर्वाधिक प्रयोग करके हम अपनी ताकत का परिचय कर सकते हैं, हम अपनी ताकत का Contribution भी कर सकते हैं।

‘Make in India’, ease of business. हमारे यहां पहली जो सरकारें थी वे इस बात का गर्व करती थीं कि हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया, हमने फलाना कानून बनाया, हमने ढिकाना कानून बनाया। आपने पूरे चुनाव के Campaign में देखा होगा, यही बातें चलती थीं। हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया। मैंने काम दूसरा शुरू किया है। मैंने, कानून जितने पुराने हैं, बेकार कानून हैं, सबको खत्‍म करने का काम शुरू किया है। इतने out-dated कानून! ऐसा कानूनों का जाल! कोई भी व्‍यक्ति बेचारा एक बार अंदर गया तो बाहर नहीं निकल सकता। मैंने Specially Expert लोगों की कमेटी बनाई है, उनको कहा है- निकालो! अगर हर दिन एक कानून मैं खत्‍म कर सकता हू्ं तो मुझे सबसे ज्‍यादा आनंद होगा।

अगर Good Governance की बात मैं बात करता हूं तो Governance easy हो, effective हो और Governance जन-सामान्‍य की आशाओं, आकांक्षाओं की पूर्ति लिए होना चाहिए, उस पर हम बल दे रहे हैं।

आपने अखबारों में पढ़ा होगा। अखबारों में छपता था कि आजकल दिल्‍ली में सरकारी अफसर समय पर दफ्तर पहुंचते हैं। अब मुझे बताइये भइया, कि ये कोई न्‍यूज़ है क्‍या! लेकिन हमारे देश में ये खबर थी सरकारी अफसर समय पर दफ्तर जाते हैं। ये समाचार मुझे इतनी पीड़ा देते थे कि क्‍या समय पर जाना जिम्‍मेदारी नहीं है क्‍या? ये कोई खबर होती है क्‍या! लेकिन हालात ऐसे बने हुए थे।

इन दिनों मैंने एक अभियान चलाया है- सफाई का अभियान। मैं जानता हूं आपको, सबको ये प्रिय होगा। लोगों को लगेगा कि प्रधानमंत्री को तो कितने बड़े-बड़े काम करने चाहिए। ये काम कोई प्रधानमंत्री के करने के काम हैं! भाईयों मैं नहीं जानता कि करने वाले काम हैं या नहीं लेकिन मैंने तय किया है कि टॉयलेट बनाने का काम करुंगा।

कभी-कभी लोग मुझसे पूछते हैं- मोदी जी बड़ा vision बताओ ना! बड़ा vision! मैंने उनको कहा देखिए, मैं चाय बेचते-बेचते यहां आया हूं। मैं एक बहुत ही छोटा इंसान हूं। मैं बहुत ही सामान्य इंसान हूं। मेरा बचपन भी ऐसा ही बीता है और छोटा हूं इसलिए मेरा मन भी छोटे-छोटे काम करने में लगता है। छोटे-छोटे लोगों के लिए काम करने में मेरा मन लगता है। लेकिन छोटा हूं इसलिए छोटे-छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करने का इरादा रखता हूं।

अब देखिए हमारे देश में, गंगा.. आप मुझे बताइए आप में से कोई ऐसा होगा जिसके मन की यह इच्छा नहीं होगी कि अपने मां-बाप को कभी न कभी तो गंगा स्नान के लिए ले जाए। हर एक के मन की यह इच्छा रही होगी। लेकिन जब पढ़ता है कि गंगा इतनी मैली हो गई है, उसको लगता है कि……!

आप मुझे बताइए भैया, हमारी गंगा शुद्ध होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए गंगा? गंगा साफ होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। सफाई में सारे देशवासियों को मदद करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए। आप लोगों के भी गंगा सफाई में मेरी मदद करनी है कि नहीं करनी है। पक्का करोगो?

भाइयों-बहनों, हजारों करोड़ रुपए अब तक खर्च हो चुके हैं। मैंने जब ये बात उठाई तो लोग कहते हैं मोदी जी आप अपने आप को मार रहे हो। ऐसी चीजों को क्यों हाथ लगाते हो? अगर सरल चीजों को हाथ लगाना होता तो लोग मुझे प्रधानमंत्री नहीं बनाते। मुश्किल कार्यों को तो हाथ लगाने के लिए ही तो मुझे बनाया है। मेरी सवा सौ करोड़ देशवासियों की गंगा के प्रति जो आस्था है, उस आस्था में मेरी भी आस्था है और गंगा की सफाई, ये आस्था से जुड़ा हुआ विषय तक सीमित नहीं है।

आज दुनिया में climate को लेकर जितनी चिंता होती है, पर्यावरण को लेकर के जितनी चिंता होती है, उस दृष्टि से भी गंगा की सफाई आवश्यक है। इतना ही नहीं, गंगा के किनारे की जो आवस्था है, उत्तराखंड हो, उत्तर प्रदेश है, बिहार हो, बंगाल हो। करीब-करीब भारत की 40 प्रतिशत जनसंख्या की आर्थिक गतिविधि ये गंगा मैया पर निर्भर है। अगर वह गंगा फिर से प्राणवान बनती है, सामर्थवान बनती है, तो मेरे सारे 40 प्रतिशत जनसंख्या वहां का किसान होगा, वहां का कारीगर होगा, उनकी जिदंगी में बदलाव आएगा और इसलिए यह एक बहुत बड़ा economic agenda भी है ये।

150 वर्ष हो रहे हैं महात्मा गांधी को, 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आ रही है। महात्मा गांधी ने हमें आजादी दी, हमने महात्मा गांधी क्या दिया। मुझे बताइए, ये सवाल हमें, हर हिंदुस्तानी को पूछना चाहिए कि नहीं पूछना चाहिए। जिस गांधी ने हमें आजादी दी, उस गांधी को हमने क्या दिया। कभी गांधी मिल जाएंगे, जब पूछेंगे तो जवाब कुछ दे पाएंगे क्या? और इसलिए 2019 में जब महात्मा गांधी के 150 वर्ष पूरे हों, तब पूरा भारत ये संकल्प करे, हम महात्मा गांधी को जो सबसे प्रिय जो चीजें थी, वह दें।

एक उनको प्रिय था हिंदुस्तान की आजादी और दूसरा उनको प्रिय था सफाई। गांधी जी स्वच्छता में कभी Compromise नहीं करते थे। बड़े अडिग रहते थे। गांधीजी ने हमें आजादी दिलाई थी। भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त किया। क्या भारत मां को गंदगी से मुक्त करना, यह हमारी जिम्मेवारी है या नहीं है। क्या हम 2019 में जब गांधीजी की 150 वीं जयंती आए, तब महात्मा गांधी के चरणों में स्वच्छ-साफ हिंदुस्तान उनके चरणों में दे सकते हैं कि नहीं दे सकते हैं? जिस महापुरुष ने हमें आजादी दी, उस महापुरुष को हम ये दे सकते हैं कि नहीं दे सकते हैं? देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए? ये जिम्मेदारी उठानी चाहिए कि नहीं उठानी चाहिए? अगर एक बार सवा सौ करोड़ देशवासी तय कर लें कि मैं गंदगी नहीं करुंगा, तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो हिंदुस्तान को गंदा कर सकती है।

सन 2022 में हमारी आजादी के 75 साल होंगे। हमारे यहां जब 75 साल होते हैं जीवन में, बड़ा महत्व होता है। भारत की परंपरा में 75 साल बड़े महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आजादी के 75 साल कैसे मनाएं जाए। अभी से तैयारी क्यों न करें? हमारे मन में एक सपना है और आप सबके आशीर्वाद से वह सपना पूरा होगा। मेरे मन में सपना है, मेरे मन में सपना है कि 2022 में, जब भारत के 75 साल हो तब तक हमारे देश में कोई परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो। ये ऐसी छोटी-छोटी बातें मैं आपसे बता रहा हूं, लेकिन यही छोटी-छोटी बातें हैं, जो भारत का भाग्य बदलने वाली हैं और भाग्य बदलने के काम में हम सब मिल कर के जुड़े हैं।

2015, अगला वर्ष, बड़ा महत्वपूर्ण वर्ष है। आप सब प्रवासी भारतीय हैं, क्योंकि आप भारत से बाहर आए हैं, आपकी तरह एक M K Gandhi भी थे, मोहनदास करमचंद गांधी। ये भी प्रवासी भारतीय थे। महात्मा गांधी जनवरी 1915 में भारत वापस आए थे। जनवरी 2015 गांधी के भारत आने के 100 साल हो रहे हैं। 8-9 जनवरी, हिंदुस्तान में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। आप में से कई लोग उसमें आते हैं। इस बार प्रवासी भारतीय दिवस अहमदाबाद में होने वाला है। महात्मा गांधी के भारत आने को शताब्दी हो रही है, इसलिए हर प्रवासी भारतीय, जो कि हिंदुस्तान से बाहर गया है…… महात्मा गांधी, विदेश गए, बैरिस्टर बने, सुख-वैभव की पूरी संभावनाएं थीं। लेकिन देश के लिए जीना पसंद किया।

मैं आपसे अनुरोध करता हूं, उन सबसे प्रेरणा लेकर के आइए, हम भी अपने वतन का, अपनी मातृभूमि का, जिस धरती पर जन्म लिया, उसका कर्ज चुकाने के लिए अपनी तरफ से कोई न कोई प्रयास करें। अपने हिसाब से कोई न कोई कोशिश करें।

कुछ बातें मुझे कहनी हैं आप लोगों से , प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ बातें मेरे मन में आई हैं, उसको ध्यान में रखते हुए कुछ बातें मैं कहना चाहता हूं। एक तो PIO card holder जो हैं, उनकी visa की कुछ समस्याएं हैं। हमने निर्णय लिया है, PIO card holder को आजीवन visa दिया जाएगा। खुश?

उससे भी आगे जो लंबे समय तक हिंदुस्तान रहते हैं, उनको पुलिस थाने जाना पड़ता है। अब उनको पुलिस थाने जाना नहीं पड़ेगा। उसी प्रकार से मुझे बताया गया कि PIO तथा OCI स्कीमों के प्रावधानों में फर्क होने के कारण भारतीय मूल के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर Spouse के भारतीय मूल के न होने पर, कठिनाई और बढ़ जाती है। किसी ने यहां शादी कर ली बेचारा मुसीबत में फंस जाता है। मेरे साथियों मैं आपको खुशखबरी देता हूं कि कुछ ही महीनों में हम PIO तथा OCI schemes मिलाकर के एक बना देते हैं। एक नई scheme, जो कठिनाइयां हैं उनको दूर करके एक नई स्‍कीम आने वाले कुछ ही महीनों में, उसको हम तैयार कर देंगे।

तीसरी बात है.. अभी इंतजार कीजिए, मैं बोल रहा हूं। अमेरिका में हमारे दूतावास और consulate, भारत में पर्यटन की इच्‍छा से आने वाले US Nationals के लिए हम long term visa प्रदान करेंगे। चौथी बात, बिना किसी कठिनाई के अमेरिकी टूरिस्‍ट भारत की यात्रा कर सके, इसके लिए हमने ‘Electronic Travel authorisation’ तथा ‘Visa on arrival’ की सुविधा को बहुत ही निकट भविष्‍य में इसको भी लागू कर देंगे।

इन चीजों को सुनिश्चित करने के लिए सेवाओं की speed भी बढ़े। यहां भारतीयों की संख्या भी बहुत है। अब धन की इतनी मात्रा है कि हर छोटे-मोटे काम में लोग आते जाते रहते हैं। और जो outsourcing service है, वह कम पड़ जाती है, और इसलिए हमने कहा है कि जो outsourcing services हैं, उसका दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि आपका ज्यादा समय न जाए, ज्यादा कठिनाइयां न हों और सरलता से आपको visa प्राप्त हो। यह साफ-साफ हमने कहा है। और मुझे विश्वास है कि आपकी जो कठिनाइयां मेरे ध्यान में आई थी, मैंने यहां से आने से पहले ही इस विषय में विस्तार से निर्णय करके इन चीजों को पूरा किया है।

आप इतनी बड़ी संख्या में आए, नवरात्रि के पवित्र त्योहार पर आए। और मैं भी बोलता ही चला जा रहा हूं। घड़ी की ओर नहीं देख रहा हूं।

मैं हृदय से आप सबका बहुत आभारी हूं। आपने मुझे बहुत प्यार दिया है। शायद, शायद मैं पिछले 15 साल से देख रहा हूं, शायद इतना प्यार हिन्दुस्तान के किसी राजनेता को नहीं मिला। मैं आपका बहुत आभारी हूं। मैं, मैं ये कर्ज चुकाउंगा। ये कर्ज चुकाउंगा। आपके सपनों का भारत बना करके कर्ज चुकाउंगा।

हम मिल कर के, हम सब मिल कर के भारत मां की सेवा करें, हमसे जो हो सके, हमारे देशवासियों के लिए करें। अपने वतन के लिए करें। जिस धरती पर जन्म लिया, जिस स्कूल में हमने शिक्षा पाई, इसमें जो हो सकता है, करें। इसी एक अपेक्षा के साथ फिर एक बार हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

बहुत बहुत धन्यवाद।

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NDA formed on principles of 'Nation First', not for power: Shri Narendra Modi Ji
June 07, 2024
NDA formed on principles of 'Nation First', not for power: Shri Narendra Modi Ji
Shri Narendra Modi Ji takes dig at INDI bloc over Lok Sabha results, EVM 'hacking' charge
NDA has become synonymous with good governance in the past 10 years, says Shri Narendra Modi Ji

भारत माता की.. भारत माता की।

मैं सबसे पहले तो इस सभागृह में उपस्थित एनडीए घटक दलों के सभी नेतागण, नवनिर्वाचित सभी सांसदगण और हमारे राज्यसभा के भी सांसदगण आप सबका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। मेरे लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह को आज मुझे यहां स्वागत करने का अवसर मिला है, जो साथी विजय हो करके आए हैं वे सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं लेकिन जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है ना उन्होंने दिन देखा ना रात देखी और इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ताओं ने जो पुरुषार्थ किया है, परिश्रम किया है मैं आज संविधान सदन के इस सेंट्रल हॉल से सिर झुकाकर के उनको प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मेरा बहुत सौभाग्य है कि एनडीए के नेता के रूप में आप सब साथियों ने सर्वसम्मति से चुनकर के मुझे एक नया दायित्व दिया है और इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। व्यक्तिगत जीवन में एक मैं जवाबदारी का अहसास करता हूं जब 2019 में इस सदन में मैं बोल रहा था आप सबने मुझे नेता के रूप में चुना था और तब मैंने एक बात पर बल दिया था- ‘विश्वास’, आज जब आप मुझे फिर से एक बार ये दायित्व देते हैं इसका मतलब है कि हम दोनों के बीच आपस में विश्वास का सेतु इतना मजबूत है। ये अटूट रिश्ता विश्वास की मजबूत धरातल पर है और ये सबसे बड़ी पूंजी होती है और इसलिए ये पल मेरे लिए भावुक करने वाले भी हैं और आप सबके प्रति जितना धन्यवाद करूं उतना कम है।

साथियों,

बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं शायद उनको सूट नहीं करता होगा लेकिन हिंदुस्तान के इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखिए कि एनडीए आज देश में 22 राज्यों में लोगों ने उनको सरकार बनाकर के सेवा करने का मौका दिया है। हमारा ये अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की असली जो स्पिरिट है जो भारत का आत्मा है भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है उसका एक अर्थ में प्रतिबिंब है और मैं इसलिए कह रहा हूं कि थोड़ी नजर करें हमारे देश में 10 ऐसे राज्य जहां हमारे आदिवासी बंधुओं की संख्या प्रभावी रूप से है, निर्णायक रूप से है। जहां आदिवासियों की आबादी ज्यादा है ऐसे 10 राज्यों में से 7 राज्यों में एनडीए सेवा कर रहा है। साथियों, हम सर्वपंथ समभाव के हमारे संविधान को समर्पित है और देश में चाहे हमारा गोवा हो या हमारा नॉर्थ ईस्ट हो जहां बहुत बड़ी मात्रा में हमारे ईसाई भाई-बहन रहते हैं आज उन राज्यों में भी एनडीए के रूप में सेवा का अवसर हमें मिला हुआ है।

साथियों,

प्री-पोल अलायंस हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में और हिंदुस्तान की राजनीति में गठबंधन के इतिहास में प्री-पोल अलायंस इतना सफल कभी भी नहीं हुआ है जितना की एनडीए हुआ है और ये गठबंधन का विजय हमने बहुमत हासिल किया है और कई बार मैं कह चुका हूं शब्द अलग होंगे लेकिन मेरे भाव उसमें एक सातत्य है। सरकार चलाने के लिए बहुमत आवश्यक है लोकतंत्र का वो ही एक सिद्धांत है लेकिन देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी होता है और देशवासियों को मैं यहां से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने जिस प्रकार से हमें बहुमत देकर के सरकार चलाने का सौभाग्य दिया है ये हम सबका दायित्व है कि हम सर्वमत का निरंतर प्रयास करेंगे और देश को आगे ले जाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।

साथियों,

एनडीए को करीब-करीब 3 दशक हो चुके हैं यानी कि आजादी के 75 साल में 3 दशक एनडीए ये सामान्य घटना नहीं है विविधता से भरे हुए अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक रचना के बीच में ये 3 दशक की यात्रा ये एक बहुत बड़ी मजबूती का संदेश देती है और आज मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं कि एक समय वो था कि संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इस अलायंस का हिस्सा था, व्यवस्थाओं से जुड़ा रहता था और आज सदन में बैठ करके आपके साथ काम करते-करते मेरा भी नाता इससे 30 सालों का रहा है और मैं कह सकता हूं हकीकत, तथ्यों के आधार पर कह सकता हूं ये सबसे सफल अलायंस है। हम गर्व से कह सकते हैं कि 5 साल का टर्म होता है इस अलायंस ने 30 साल में से 5-5 साल के तीन टर्म सफलतापूर्वक पार किए हैं और अलायंस चौथे टर्म में एंटर कर रहा है।

साथियों,

इस बात को जो राजनीति के विशेषज्ञ हैं अगर मुक्त मन से, मुक्त मन शब्द बहुत महत्ता है वे सोचेंगे तो पाएंगे कि एनडीए सत्ता प्राप्त करने का या सरकार चलाने का कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है, ये राष्ट्र प्रथम की मूल भावना से नेशन फर्स्ट के प्रति कमिटेड वैसा ये समूह है और 30 साल का लंबा कालखंड शुरू में शायद असेंबल हुआ होगा लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि भारत की राजनीति व्यवस्था में एक ऑर्गेनिक अलायंस है और ये मूल्य स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी, श्री प्रकाश सिंह जी बादल, श्री बाला साहेब ठाकरे, श्री जॉर्ज फर्नांडिस, श्री शरद यादव अनगिनत नाम में कह सकता हूं इन लोगों ने जिस बीज को बोया था वो आज भारत की इस जनता ने विश्वास का सिंचन कर-करके इस बीज को वटवृक्ष बना दिया है और हम सबके पास ऐसे महान नेताओं की विरासत है और हमें इसका गर्व है। बीते 10 वर्षों में हमने एनडीए की उसी विरासत, उसी मूल्यों को लेकर के निरंतर आगे बढ़ने का और देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जैसा मैंने कहा मुक्त मन से राजनीति के विश्लेषक अगर विश्लेषण करेंगे तो देखेंगे कि एनडीए के ये जो लोग दिखते हैं ना उसमें कॉमन चीज नजर आती है और वो है गुड गवर्नेंस। इन सबने अपने-अपने समय में, अपने-अपने कार्यकाल में जब-जब जहां सेवा करने का मौका मिला है गुड गवर्नेंस इस देश को दिया है और इस प्रकार से एनडीए एक प्रकार से एनडीए कहते ही गुड गवर्नेंस ये अपने आप पर्यायवाची बन जाता है।

साथियों,

हम लोगों के सभी के कार्यकाल में चाहे मैं गुजरात में रहा हूं चाहे बाबू हमारे आंध्र में रहे हो या नीतीश जी ने बिहार के लिए भरपूर सेवा की हम सबके अंदर केंद्र बिंदु में गरीब का कल्याण केंद्रस्थ रहा है और देश ने एनडीए के, गरीब कल्याण के, गुड गवर्नेंस के 10 साल को देखा है इतना ही नहीं है मैं कह सकता हूं देश ने इसे जिया है। जनता-जनार्दन ने सरकार क्या होती है, सरकार क्यों होती है, सरकार किसके लिए होती है, सरकार कैसे काम करती है इसको पहली बार अनुभव किया है वरना जनता और सरकारों के बीच में खाई की व्यवस्था ही बनी हुई थी हमने उसको पाट दिया है। हमने सबका प्रयास का मंत्र देश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए चरितार्थ करके देखा है।

साथियों,

एनडीए सरकार में हम अगले 10 साल में मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं, अगले 10 साल में गुड गवर्नेंस, विकास, नागरिकों के जीवन में क्वालिटि ऑफ लाइफ और मेरा व्यक्तिगत रूप से एक बहुत बड़ा ड्रीम है, मैं लोकतंत्र की समृद्धि को जब सोचता हूं तो मैं चाहता हूं कि सामान्य मानवी के जीवन में से और खासकर के मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग उनके जीवन में से सरकार की दखल जितनी कम हो उतनी लोकतंत्र की मजबूती है और आज के टेक्नोलॉजी के युग में बहुत आसानी से हम वरना एक दिन में 10 काम हो तो 10 अलग-अलग वो सारी चीजें मांगेंगे। हम बदलाव चाहते हैं। गुड गवर्नेंस का ये भी एक महत्वपूर्ण पहलू है हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे, गुड गवर्नेंस का नया अध्याय लिखेंगे, जनता- जनार्दन की भागीदारी का नया अध्याय लिखेंगे और सब मिल करके विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे।

साथियों,

एनडीए में और मैं अगर विस्तार से कहूं तो सदन में किसी भी दल का कोई भी जन प्रतिनिधि होगा मेरे लिए सब बराबर है जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूं तो मैं सदन में भी चाहे वो लोकसभा हो या राज्यसभा हमारे लिए सब बराबर है और ये ही एक भाव है जिसके कारण 30 साल से एनडीए अलायंस मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। अपना-पराया कुछ नहीं है। सबको गले लगाने में हमने कभी कोई कमी नहीं रखी है उसी का परिणाम है कि जनता का विश्वास भी जीत पाते हैं। साथियों, हमने 2024 में जिस टीम भावना से काम किया है और ग्रास रूट लेवल पर किया है सिर्फ फोटो ऑप नेता मिल करके हाथ हिलाएं और तुम- तुम्हारे रास्ते मैं-मेरे ऐसा नहीं है ग्रास रूट लेवल तक सबने मिल करके ये जो काम किया है और उसी ने हमें ऑर्गेनिक अलायंस का सामर्थ्य दिया है। एक- दूसरे का सहयोग किया है, हर किसी ने यही सोचा जहां कम- वहां हम अगर कोई कमी है तो मैं आऊंगा मैं मेहनत करूंगा लेकिन तुम्हें कमी नहीं रहने दूंगा जहां कम- वहां हम यह हर कार्यकर्ता ने जी करके दिखाया है और तभी तो जीत आती है। साथियों, कभी-कभी मैं कह सकता हूं कि हमारा 10 साल का अनुभव है, भारत के हर क्षेत्र का और भारत के हर नागरिक का जो एस्पिरेशंस हैं, रीजनल एस्पिरेशंस हैं वे और नेशनल एस्पिरेशंस इसका एक अटूट नाता होना चाहिए, इसके बीच में हवा तक गुजर ना सके इतना जुड़ाव होना चाहिए तब देश आगे बढ़ेगा।

साथियों,

इस चुनाव में मैं कुछ उल्लेख जरूर करना चाहूंगा जो मेरी नजरिए से मैंने देखा है दक्षिण भारत में एनडीए ने एक नई राजनीति की नींव मजबूत की है अब देखिए कर्नाटक एंड तेलंगाना अभी- अभी तो इनकी सरकारें बनी थीं लेकिन पल भर में ही लोगों का विश्वास टूट गया, भ्रम से लोग बाहर आ गए और एनडीए को गले लगा लिया। कर्नाटक और तेलंगाना में दोनों जगह। साथियों, तमिलनाडु में, मैं तमिलनाडु की टीम को भी बधाई देना चाहूंगा और वहां हमारा एनडीए समूह बहुत बड़ा भी है और कईयों को पता था हम शायद एक सीट नहीं ला पाएंगे लेकिन इस लड़ाई में हम साथ रहेंगे और मैंने बहुत से एनडीए के साथी तमिलनाडु में ऐसे हैं कि जिनका कोई उम्मीदवार नहीं था लेकिन इस झंडे को ऊंचा रखने के लिए वो जी जान से जुटे रहे और इसलिए आज तमिलनाडु में भले हम सीट नहीं जीत पाए लेकिन जिस तेजी से एनडीए का वोट शेयर बढ़ा है वो साफ-साफ संदेश दे रहा है कल में क्या लिखा हुआ है?

साथियों,

पुडुचेरी हो, केरल हो.. केरल हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं के बलिदान यूडीएफ हो या एलडीएफ हो शायद हिंदुस्तान के राजनीतिक जीवन में इतना जुल्म एक विचारधारा को लेकर के जीने वाले लोगों पर हुआ होगा तो सिर्फ मैं कह सकता हूं केरल में हुआ होगा, जम्मू- कश्मीर से भी ज्यादा हुआ है उसके बावजूद भी सामने कहीं विजय नजर नहीं आता था उन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा में कभी पीछे नहीं रहे पीढ़ियां खपा दी, पीढ़ियां खपा दी और आज पहली बार संसद में केरल से हमारा प्रतिनिधि बनके आया है। साथियों, अरुणाचल में हमने लगातार हमारी सरकार बनती रही है और भारी समर्थन से बनती है। सिक्किम में भी हमारे एनडीए की सरकार करीब- करीब क्लीन स्वीप के साथ, अरुणाचल क्लीन स्वीप, आंध्र मैं अभी बाबू को पूछ रहा था बोले हिस्टोरिकल ये सबसे हाईएस्ट विक्ट्री है और जो यहां दिखता है ना पवन, ये पवन नहीं आंधी है। आंध्र ने इतना बड़ा हमारे प्रति जनमत दिया है जी हिंदुस्तान के लिए एक सामान्य मानवी की विकास की जो जिजीविषा है उसका प्रतिबिंब है और महाप्रभु जगन्नाथ और मैंने अनुभव किया हमेशा, मैं हमेशा मानता हूं ईश्वर के अनेक रूप होते हैं लेकिन जब मैं भगवान महाप्रभु जगन्नाथ जी को याद करता हूं तो मैं हमेशा मानता हूं ये गरीबों के देवता हैं और वहां जो क्रांति रूप परिणाम आया है मैं एक रिवोल्यूशन देख रहा हूं और मैं इसके साथ कह सकता हूं कि विकसित भारत का हमारा जो सपना है आने वाले 25 वर्ष पहले मैंने 10 साल कहा था यहां मैं 25 साल कह रहा हूं आने वाले 25 साल महाप्रभु जगन्नाथ जी की कृपा से उड़ीसा देश की विकास यात्रा के ग्रोथ इंजन में से एक होगा।

साथियों,

हम लोग 4 जून के नतीजे चल रहे थे मैं तो अपने काम में कुछ व्यस्त था बाद में फोन आना शुरू हो गए तो मैंने किसी को पूछा यार ये तो ठीक है आंकड़े- वाकड़े तो मुझे ये बताओ कि ईवीएम जिंदा है कि मर गया क्योंकि ये लोग तय करके बैठे थे कि भारत के लोकतंत्र और लोकतंत्र की प्रक्रिया के प्रति विश्वास ही लोगों का उठ जाए और लगातार ईवीएम को गाली देना और मुझे तो लगता था शायद इस बार वो ईवीएम की अर्थी जुलूस निकालेंगे लेकिन चार जून शाम आते- आते उनको ताले लग गए ईवीएम ने उनको चुप कर दिया ये ताकत है भारत के लोकतंत्र की, ये ताकत है भारत की निष्पक्षता की, ये भारत की ताकत है भारत के चुनावी तंत्र की, चुनाव आयोग की और मैं मानता हूं कि ये आशा करता हूं कि पांच साल तो अब ईवीएम शायद मुझे नहीं सुनाई देगा लेकिन जब 2029 में हम जाएंगे तो फिर से शायद ईवीएम को लेकर के नाचने की शुरुआत करेंगे। क्योंकि इनके सुधरने की संभावनाएं बहुत कम है। आप देखिए चुनाव के समय मैंने पहली बार देखा शायद हर तीसरे दिन इलेक्शन कमीशन के काम में रुकावट आए इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए गए, भांति-भांति की एप्लीकेशन और एक ही टोली थी और लोकतंत्र के प्रति जिनका भारी अविश्वास है ऐसे लोग सुप्रीम कोर्ट का उपयोग करते हुए कैसे रुकावट डाले इसका निरंतर प्रयास करते रहे। और चुनाव आयोग की ताकत का एक बड़ा हिस्सा अदालतों में पीक आवर्स में चुनाव के पीक आवर्स में यानी कितनी निराशा लेकर के ये लोग मैदान में आए थे, कि उन्होंने पूरा हमला उसी इंस्टिट्यूट पर लगा दो, ताकि चुनाव के कोई भी परिणाम आए हम दुनिया के सामने भारत को भी बदनाम कर ले ये षड्यंत्र का हिस्सा था दोस्तों, और कभी भी देश उनको माफ नहीं करेगा। साथियों, इंडी गठबंधन वाले जब ईवीएम का विरोध करते हैं तो मैं सिर्फ एक चुनाव के रूप में नहीं देख रहा मैं मानता हूं ये लोग मन से पिछली शताब्दी के सोच वाले लोग हैं, वे टेक्नोलॉजी का महत्व ना समझते हैं ना टेक्नोलॉजी स्वीकार करने को तैयार हैं और ये सिर्फ ईवीएम में दिखाई दिया ऐसा नहीं यूपीआई में दिखाया जब हमने कहा कि हिंदुस्तान के लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन करेंगे फिनटेक की दुनिया में आज हिंदुस्तान का नाम हो गया मानने को तैयार नहीं, आधार आज देश की पहचान बना है मैं तो देख रहा हूं कि मुझे कई देश कहते हैं हमें आधार की पद्धति से आगे बढ़ना है आप कैसे मदद कर सकते उस आधार को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बार.. बार.. बार.. बार जाकर के परेशानियां पैदा की यानी मूलत: ये प्रगति के विरोधी, आधुनिकता के विरोधी, टेक्नोलॉजी के विरोधी इंडी अलायंस हमने देखा है।

साथियों,

इस देश के लिए ये भी चिंता का विषय है कि विश्व में भारत के लोकतंत्र की ताकत को कम आंकने का प्रयास और कितना एक्सट्रीम है मैं दुनिया में ढोल पीट रहा हूं कि हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी है और ये दुनिया में जाकर के बता रहे नहीं नहीं हमारे देश में तो डेमोक्रेसी जैसा कुछ नहीं वो मोदी बैठ गया है वो चाय बेचने वाला यहां पहुंच कैसे गया कुछ तो गड़बड़ की होगी ये जो इनकी मनोस्थिति है जी। भारत के नागरिकों को चुनाव प्रक्रिया के प्रति अविश्वास पैदा करने का जो उनका षड्यंत्र है मैं मानता हूं कि अब दुनिया भी भारत के लोकतंत्र की विविधता, विशालता, व्यापकता, गहनता इन सबको भी जानने- समझने के लिए आकर्षित होगी ऐसे इस चुनाव के नतीजे में देख रहा हूं। साथियों, जब एक तारीख को मतदान पूरा हुआ और 4 तारीख को काउंटिंग इस बीच की चीजों को आप देखिए योजनाबद्ध तरीके से देश को हिंसा की आग में झोंकने का बयान दिए जाते रहे। यहां इकट्ठे होना यहां पहुंचना यहां करना कुछ लोग इस चीज को गंभीर नहीं लेंगे लेकिन ये बहुत गंभीर है आप भारत के लोकतंत्र को पहले उसकी व्यवस्था को अनादर करते हो अब परिणाम आने से पहले एक ऐसा माहौल बना दो कि बस आग लगा देंगे, हर प्रकार से उन शब्दों का अर्थ यही निकलता है उन्होंने देश को उस दिशा में ले जाने का प्रयास किया था लगातार देश को गुमराह करने का प्रयास किया गया, देश के लोगों को बांटने का प्रयास किया अरे चुनाव एक ऐसा लोकोत्सव हो होता है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को हम जोड़े, तोड़ने के लिए नहीं होता है लेकिन हर प्रकार से कोशिश यही की गयी। साथियों, मैं मानता हूं कि 2024 के लोकसभा के चुनाव के जो नतीजे हैं हर पैरामीटर से देखेंगे दुनिया ये मानती है और मानेगी ये एनडीए का महा विजय है और आपने देखा दो दिन कैसा चला जैसे हम तो हार चुके हैं गए सब चारों तरफ यही दिखता था क्योंकि उनको अपने कार्यकर्ताओं का मोरल हाई करने के लिए ऐसे काल्पनिक, फरेब ये करने पड़ रहे और साथियों गठबंधन के इतिहास में अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो ये सबसे मजबूत गठबंधन की सरकार है लेकिन कोशिश ये की गई कि इस विजय को स्वीकार ना करना उसको पराजय के छाया में डुबो के रखना लेकिन उसके ऐसी चीजों की बाल मृत्यु हो जाती है और हो भी गई लेकिन देशवासी जानते हैं कि ना हम हारे थे ना हम हारे हैं लेकिन चार तारीख के बाद हमारा जो व्यवहार रहा है वो हमारी वो पहचान बताता है कि हम विजय को पचाना जानते हैं, हमारे संस्कार ऐसे हैं कि विजय की गोद में उन्माद पैदा नहीं होता है और ना ही पराजित लोगों के प्रति उपहास करने के हमारे संस्कार हैं। हम विजय को भी पचाते हैं और पराजित का भी उपहास करने की विकृति हम नहीं पालते ये हमारे संस्कार हैं। आप किसी भी बालक को पूछो कि भाई लोकसभा के चुनाव के पहले सरकार किसकी थी तो कहेगा एनडीए 24 के नतीजों के बाद सरकार किसकी बनी एनडीए तो हारे कहां से भाई पहले भी एनडीए थी, आज भी एनडीए और कल भी एनडीए है। आप सोचिए 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को नहीं छू पाई और अगर मैं 14, 19 और 24 तीन चुनाव को जोड़ करके कहूं कांग्रेस के कुल तीन चुनाव जोड़ दूं और इन तीन चुनाव में जितनी सीटें इन्हें मिली है उससे ज्यादा हमें इस चुनाव में मिली है और मैं साफ देख रहा हूं। साथियों, इंडी वालों को ये अंदाज नहीं है वे धीरे-धीरे पहले तो डूब रहे थे अब तेज गति से ये गर्त में जाने वाले हैं। साथियों, इंडी अलायंस वाले देश के सामान्य नागरिकों की जो समझ है आज भी वो उसके सामर्थ्य को समझ नहीं पाए या समझना चाहते नहीं हैं भारत के सामान्य व्यक्ति की भी एक समझ है और जो जमीन से जुड़ा रहता है ना वो समझ को छूता है, समझता है, पहचानता है वो वहां नहीं है। साथियों, इन लोगों का जो व्यवहार रहा है चार तारीख के बाद मैं आशा करता था कि वे लोकतंत्र का सम्मान करेंगे लेकिन उनके व्यवहार से लगता है कि शायद उनमें ये संस्कार आएं इसके लिए हमें और इंतजार करना पड़ेगा और तो मैं ज्यादा कुछ कह नहीं सकता और ये वो लोग हैं जो खुद की पार्टी के पीएम का अपमान करते हैं, उसके निर्णयों को फाड़ देते हैं खुद की पार्टी के विदेशी मेहमान आ जाएं तो उसके लिए चेयर नहीं होती थी ये सारे दृश्य आपने देखें हैं और मैं समझता हूं कि इन सारी स्थितियों में से हम लोकतंत्र की मजबूती और जनता- जनार्दन के प्रति आस्था इसको हम साथियों लोकतंत्र हमें सबका सम्मान करना सिखाती है, विपक्ष में भी जो सांसद जीत करके आए हैं मैं उनको भी बधाई देता हूं और मैं पिछले 10 वर्ष में एक चीज मिस कर रहा था कि डिबेट, पार्टिसिपेशन, क्वालिटी ऑफ डिबेट्स मैं मिस कर रहा हूं लेकिन मैं आशा करता हूं अब इस नया जो सदन बना है वो कमी मुझे खलेगी नहीं शायद हमारे साथी भी राष्ट्र हित की नियत के साथ सदन में आएंगे और भले वो विपक्ष में बैठे होंगे लेकिन राष्ट्र के विपक्ष में नहीं है हमारे विपक्ष में है, राष्ट्र में तो हम सब एक ही दिशा में है, राष्ट्र में हमारा कोई पक्ष- विपक्ष नहीं है, राष्ट्र में हम 140 करोड़ है और मैं आशा करता हूं कि वो राष्ट्र हित की भावना को लेकर के सदन में आएंगे, सदन को समृद्धि देने में वे कुछ न कुछ योगदान करेंगे।

साथियों,

24 का जनादेश एक बात को बार-बार मजबूती दे रहा है कि देश को आज के वातावरण में सिर्फ और सिर्फ एनडीए पर ही भरोसा है और जब इतना अटूट विश्वास है इतना भरोसा है तो स्वाभाविक है देश की अपेक्षाएं भी बढ़ेंगी और मैं इसे अच्छा मानता हूं और हम सबका कर्तव्य भी मानता हूं और इन अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए और मैंने पहले भी कहा था जो 10 वर्ष हमने काम किया है वो तो ट्रेलर है और वो मेरा चुनावी वाक्य नहीं था ये मेरा कमिटमेंट है हमें और तेजी से और विस्तार से और तेज गति से देश के आकांक्षाओं को पूर्ण करने में रत्ती भर भी विलंब नहीं ही करना है। जनता- जनार्दन चाहती है हम पहले से ज्यादा डिलीवर करें, जनता चाहती है कि हम खुद ही हमारे पुराने रिकॉर्ड तोड़े और मैं साथियों एक तरफ एनडीए रखू दूसरी तरफ भारत के लोगों के सपने और संकल्पों को रखूं तो मैं कहूंगा एनडीए- न्यू इंडिया, डेवलप इंडिया, एस्पिरेशनल इंडिया और इसी सपने और संकल्पों को पूरा करना ये हम सबका संकल्प भी है, कमिटमेंट भी है और हमारे पास रोड मैप भी है।

साथियों,

एनडीए ने हमेशा करप्शन फ्री, रिफॉर्म ओरिएंटेड, स्थिर सरकार देश को दी है जब- जब हमें अवसर मिला हम लोगों ने काम किया है उसके सामने कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए अब उन्होंने पुरानी अपनी छवि सुधारने के लिए नाम बदल दिया लेकिन पहचान घोटालों की है आए दिन घोटाले यही पहचान रही है और नाम बदलने के बावजूद भी देश उनके घोटालों को नहीं भूला है, उनको नकारा है और मैं कह सकता हूं साथियों इंडी अलायंस वालों ने एक व्यक्ति का अप्रोच करने के वन प्वाइंट एजेंडा के कारण देश की जनता ने उनको ही अपोजिशन में बिठा दिया है। एनडीए विकसित भारत इस संकल्प को लेकर के चुनाव में गया था, देश के लिए सकारात्मक सोच को लेकर के गया था, देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य को समझ कर के नए अवसरों को लेकर के देश को आगे बढ़ने की बात लेकर के गया था जबकि हमारे सामने जो लोग थे वो भ्रम फैलाना झूठ फैलाना यही गुमराह करने वाले काम यही करते रहे थे। अब एनडीए और उनका का देखें इवन नामांकन में जाएंगे तो भी आपको दिखेगा उनका चुनाव प्रचार उनका नामांकन हम लोगों का एक- एक दृश्य देख लीजिए और उनका एक- एक दृश्य देखिए कितना बड़ा अंतर है हर चीज में उनका कैरेक्टर दिखाई देता है और क्या रहा फोटो ऑफ के लिए तो उन्होंने अलायंस घोषित कर दिया लेकिन कितने ही राज्यों में वो आपस में लड़ते रहे हैं चुनावी जंग में एक- दूसरे की पीठ में छुरा भोकते रहे कभी उन्होंने कहा ये तो हमारा वैचारिक अलायंस है वो विचार लेवल पर ठीक है बाकी नीचे तो हमारा अपना हम तैयार करेंगे और अब फिर उन्होंने कहा हम तो सीट के आधार पर अलायंस करेंगे टोटल ना भी करें ये भी खेल खेला और अभी- अभी तो चुनाव पूरा हुआ और शुरु कर दिया कि ये तो हमारा अलायंस लोकसभा के चुनाव के लिए था बाद में नहीं है ये भी शुरू कर दिया यानी मैंने बहुत पहले कहा था आप देख लेना 4 जून के बाद बिखराव शुरू हो जाएगा और वो शुरू हो चुका है इसका मतलब ये हुआ कि वो सिर्फ और सिर्फ सत्ता सुख के लिए एक- दूसरे का साथ देने की कोशिश करते थे लेकिन उनमें उनका अगर स्वार्थ निश्चित होता तो तो साथ देना वरना नहीं देना ये कैरेक्टर था। साथियों, ये लोग कितने ही बड़े झूठ बोलते रहे हैं और आप देखिए चुनाव के समय उन्होंने देश के सामान्य नागरिक को गुमराह करने के लिए जो पर्चियां बांटी ये देंगे और वो देंगे और ढिकाना देंगे फलाना देंगे दो दिन से मैं देख रहा हूं कि कांग्रेस के दफ्तरों पर लोग कतार लगाकर खड़े हैं कि पर्ची है एक लाख रुपए कहां है लाओ भाई मांग रहे हैं लोग यानी आपने जनता- जनार्दन की आंखों में कैसा उनको भ्रमित किया, कैसी आंख में धूल झोंक दी वो बेचारा सामान्य नागरिक मान के चलता था हां भाई चार जून के बाद रुपया मिल जाएगा इसलिए वो जाकर खड़ा रह गया और अब उसको धक्का मारा जा रहा है, डंडे मारे जा रहे वहां से निकाला जा रहा है अब इस प्रकार का चुनाव ये अपने आप में देश के गरीबों का अपमान है, हमारे देश के सामान्य नागरिकों का अपमान है और कभी भी देश ऐसी हरकतों को ना भूलता है, ना ही माफ कभी करता है।

साथियों,

हमारे लिए संतोष की बात है कि हम एक कमिटमेंट से काम करते रहे हैं 10 साल में हमने 25 करोड़ गरीबों को गरीबी से बाहर निकाला है, गरीब कल्याण का एक सुरक्षित मजबूत कवच दिया है हमने उसको और उसके अंदर भी एक नए एस्पिरेशन पैदा हुई कि हां अब मुझे गरीब नहीं रहना है और उसके लिए मुझसे जो हो सके मैं हर अवसर का फायदा उठाऊंगा। तीन करोड़ गरीबों को घर ऐसे कहने का आंकड़ा नहीं जी कितनी मेहनत पड़ती है मुझे मालूम है लेकिन हम सफलतापूर्वक इसको कर पाए हैं। चार करोड़ लोगों को दे चुके हैं, तीन करोड़ का हम संकल्प लेकर के आज से आगे बढ़ेंगे यानी ये भी हिम्मत है कि चार करोड़ देने के बाद जिन परिवारों का विस्तार हुआ है, जरूरत पड़ी है और राज्यों की भी उसमें इच्छा है तीन करोड़ नए घर बनाने का संकल्प। 70 वर्ष की आयु से ऊपर के व्यक्तियों को नागरिकों को 5 लाख रुपए तक इलाज के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था। मुद्रा योजना के तहत हमारे नौजवानों को कारोबार के लिए 20 लाख तक की उनकी बैंक से उनको लोन मिले इसकी व्यवस्था ये मैं समझता हूं कि वायदा हमारे तीसरे कार्यकाल की ये गारंटियां हैं सब मैं अभी बताता नहीं हूं लेकिन इन गारंटी के प्रति हम कमिटेड है और उसे पूर्ण करने के लिए हम कोई कमी नहीं रखेंगे। साथियों, गरीब का सशक्तिकरण और मिडिल क्लास को सुविधा ये हमारी प्राथमिकता है क्योंकि मध्यम वर्ग अब इस देश का एक बहुत बड़ा चालक वर्ग है, भारत की ग्रोथ स्टोरी में ये ऐसे- ऐसे नए फोर्सेस मैं देख रहा हूं जो हमारी बहुत बड़ी शक्ति बनने वाले हैं और इसलिए हम उस पर भी उतना ही और मिडिल क्लास की बचत कैसे बढ़े, सेविंग कैसे बने उसके लिए उसके क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए हम क्या कर सकते हैं हमारी योजनाओं का विस्तार कैसे किया जाए हमारे नीति नियमों में बदलाव कैसे किया जाए उस पर भी हम आने वाले दिनों में काम करेंगे।

साथियों,

पंचायत से पार्लियामेंट तक हमारी नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी ये हमारा कमिटमेंट है और हमने हमारे पिछले कार्यकाल में नारी शक्ति बंधन अधिनियम करके उस बात को हमने आगे बढ़ाया और वो दिन दूर नहीं होगा जब हमारे सदन में बहुत बड़ी तादाद में हमारी माताएं- बहनें देश का नेतृत्व करती हुई दिखाई देंगी। इस पूरे चुनाव में हम सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट देने वाली पार्टी रहे हैं ये हमारा कमिट है। हमारी महिला सांसदों को जो आशीर्वाद देश की जनता ने दिया है मैं इसके लिए विशेष रूप से उनका आभार व्यक्त करता हूं और साथियों आपने देखा होगा जी-20 समिट में दुनिया के सामने एक विषय लेकर के हम बड़े आग्रह से गए हैं और वो है एंपावरमेंट ऑफ वूमेन, डेवलपमेंट ऑफ वूमेन इन सारी बातों से तो हम परिचित हैं हमने एक नया शिफ्ट किया है और हम जी 20 समिट से भी इसको आगे बढ़ा रहे हैं वूमेन लेड डेवलपमेंट। एक बार हमारा प्रकार का कमिटमेंट बनता है तो परिवर्तन बिल्कुल साफ नजर आता है।

साथियों,

एनडीए का ये कार्यकाल बड़े फैसलों का है, तेज विकास का है और अब हम समय गंवाना नहीं चाहते कि हम पांच नंबर की इकोनॉमी से तीन नंबर की इकोनॉमी पर पहुंचना है और ये खाली पांच और तीन का आंकड़ा नहीं है उसके कारण जो अर्थव्यवस्था का कद बन जाता है वो सामान्य मानवी की आशा- आकांक्षाओं को पूरी करने के लिए सरलता बढ़ जाती है जी। देश के लिए जो जरूरतें हैं वो आराम से पूरी करने का सामर्थ्य बन जाता है और इसलिए हम उस दिशा में बड़ी कोशिश करके आगे बढ़ना चाहते हैं राज्यों का सहयोग भी उसमें उतना ही महत्त्वपूर्ण है और भारत के संविधान ने हमसे जिस प्रकार का दिशा- निर्देश किया है कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का लेकिन मैंने उसमें आग्रह रखा है कॉम्पिटेटिव कोऑपरेटिव फेडरलिज्म हमारे राज्यों के बीच में भी तंदुरुस्त स्पर्धा हो राज्य और केंद्र के बीच में भी तंदुरुस्त स्पर्धा हो हम अच्छा करने की स्पर्धा करें और उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं और हमने देखा है जब कॉम्पिटेटिव कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की बात करता हूं आपने देखा जी- 20 समिट हम एक जगह पर कर सकते थे हम भी मालाएं पहन करके फोटो निकलवा सकते थे लेकिन हिंदुस्तान के अनेक शहरों में 200 से ज्यादा मीटिंग हुई और दुनिया भर के नीति निर्धारक जो कहे जी- 20 देशों के और बाकी भी पांच- सात देशों के वो हिंदुस्तान के कोने- कोने गए उनके देशों में जाकर के भारत की विविधता भारत की विशालता इसकी चर्चा कर रहे हैं उनके लिए आश्चर्य है ये, हमने तो दिल्ली आकर के वापस जाते थे पता ही नहीं था कि देश इतना बड़ा है, ये अपनी एक ताकत का परिचय हुआ है। हमने कोविड में देखा राज्यों के साथ कोऑपरेशन के साथ हमने जिस प्रकार से लड़ाई लड़ी और एक सूत्र में रह कर लड़ाई लड़ी, दल किसी का भी हो सरकार में लेकिन हमने इस काम को किया क्योंकि हमारा कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म के प्रति कमिटमेंट है। एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट एक ऐसा मॉडल है गवर्नेंस का जिसमें राज्य भी उतना ही सक्रियता से हमारे साथ जुड़े हुए हैं और दुनिया के लिए जो डेवलपिंग कंट्रीज हैं उनके लिए गवर्नेंस का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत हो रहा है जिसका आप तो केस स्टडी के रूप में दुनिया के अनेक यूनिवर्सिटी केस स्टडी करना शुरू की अब उसको हम आगे बढ़ाते हुए एस्पिरेशनल ब्लॉक की तरफ ले जा रहे हैं ताकि हमारे ग्रास रूट लेवल पर भी जो वीक एरियाज हैं जहां सुविधाएं भी सामान्य एवरेज से भी नीचे हैं उसको हम जल्दी से जल्दी स्टेज की एवरेज तक लाना चाहते हैं। देश का रीजन कोई भी क्षेत्र हो सर्वांगीण विकास को लेकर के हम चलेंगे। साथियों, गत 10 वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हमने एक बहुत बड़ा यानी सोचने में भी बदलाव लाएं जमीन पर तो लाएं ही लाएं वरना हमारे देश में सोचा चलेगा यार एक बार कर लो ना उस सारे में से बदलाव नहीं अब तो अच्छा ही चाहिए, बड़ा ही चाहिए, जल्दी से जल्दी पहुंचाने वाला चाहिए, सामान्य मानवी के मन को हमने इससे प्रेरित भी किया है और पुरुषार्थ करके हमने उस दिशा में काम किया है। पांच साल में हमें गति शक्ति यानी इस प्रकार के प्लेटफार्म पर जो काम किया है जो काम 6-6, 8-8 महीने तक नहीं होता था वो आज 15-20 दिन में कर सकते हैं सब टेक्नोलॉजी का उपयोग करके हम काम कर रहे हैं और ये जब होता है तो उसका मूल फायदा देश के नौजवानों के लिए रोजगार के अति अवसर बन जाते हैं उनके लिए जीवन में सिलेक्शन के लिए बहुत बड़ा दायरा बढ़ जाता है और वो हमें साथियों आज भारत दुनिया में विश्व के लिए एक नया मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है और जब हम मैन्युफैक्चरिंग हब कह रहे तब सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक गुड्स या सर्विसेज की मैं बात नहीं कर रहा हूं मैं फूड प्रोसेसिंग में भी आज दुनिया में हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और वो भारत के किसानों को बहुत बड़ी ताकत देने वाला है। उसी प्रकार से स्पेस हो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो, स्टार्टअप्स की बात हो, स्किल जॉब अपॉर्चुनिटी की बात हो आज भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा, बढ़ रहा है ये मेरा विश्वास है। साथियों, मुद्रा योजना, ड्रोन दीदी, विश्वकर्मा योजना इसने भी नई संभावनाओं को जन्म दिया है।

साथियों,

हमारी संस्कृति, हमारी विरासत उसके प्रति हम जितना ध्यान केंद्रित करेंगे दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इसलिए हम उन दिशा में और मैं मानता हूं भारत के लिए टूरिज्म एक ऐसा एवेन्यू है जो गत शताब्दी में हमें कभी यानी आज से लेकर के पीछे के 100 साल मैं कहूं ऐसा अवसर नहीं मिला है जैसा आने वाले 25 साल में मिलने वाला है। दुनिया भारत की तरफ मुड़ने वाली है अब हमारा काम है हम इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को विकसित करें, हमारी विरासत के प्रति हमारा पर्यटन का विकास करते हुए एक विन विन सिचुएशन का हम फायदा उठाएं और उसमें बहुत अधिक निवेश की संभावनाएं मैं देखता हूं और ये एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें हर स्तर के लोग कमाते हैं गरीब से गरीब आदमी भी कमाता है और बड़ी- बड़ी होटल वाला भी कमाता है हर कोई इसमें कमाता है और हमने टूरिज्म पर हम बल देना चाहते हैं बहुत पोटेंशियल है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र खुले हैं इसका फायदा इसको मिलता है एयरवे हो, रेलवे हो, हमारे एक्सप्रेसवे हो ये हमारा यातायात जितना बेहतर हो रहा है, हमारा डिजिटल कनेक्टिविटी का जो काम है ये इसके लिए बहुत बड़ा पॉजिटिव ग्राउंड तैयार कर रहा है और जिसका फायदा मिलने वाला है और जो वोकल फॉर लोकल और रीजनल टूरिज्म इसको एक बल देने का काम है। साथियों, अब दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर रही है जिस समय औद्योगिक क्रांति हुई उस समय हम गुलामी के दौर से गुजरे तो औद्योगिक क्रांति का जितना फायदा लेना चाहिए हम नहीं ले पाए अब एक नया युग शुरू हो रहा है हरित युग, ग्रीन एरा भारत के पास बहुत संभावनाएं हैं इसका नेतृत्व करने की और हम इसके लिए आने वाले दिनों में ग्रीन हाइड्रोजन की बात हो ग्रीन एनर्जी हो या ग्रीन जॉब्स हो या ग्रीन मोबिलिटी हो इन सारे विषयों को हम इतनी तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि हरित युग का नेतृत्व दुनिया में भारत का सामर्थ्य सिद्ध कर दें ये हम चाहते हैं। साथियों, इसी सिलसिले में इस 5 जून को जब पर्यावरण दिवस था 4 जून को नतीजे आ गए थे तो उसी दिन मेरे मन में एक विचार आया कि कार्यक्रम 5 जून को हमने आरंभ किया- ‘एक पेड़ मां के नाम’, हर किसी को मां के प्रति श्रद्धा होती है और मैं भी देशवासियों को कहूंगा कि आने वाले समय में कभी आपकी माता जी का जन्मदिन हो या कोई और शुभ दिन हो अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाइए और मां जीवित है तो साथ लेकर जाइए उनकी फोटो आप सोशल मीडिया में अपलोड कीजिए और मां नहीं हैं उनकी फोटो रख करके एक पेड़ लगाइए और वो अपनी मां का भी सम्मान होगा और धरती मां की सेवा होगी हम इन दो माताओं की सेवा करें।

साथियों,

एनडीए अब भारत आइसोलेशन में नहीं जी सकता, वैश्विक परिवेश में भारत की भूमिका दिनों दिन बहुत बढ़ती चली जा रही है। 2014 में जब एनडीए की सरकार बनी पूरे विश्व में उसी एक पल से एक नया जिज्ञासा पैदा हुई थोड़ी आशा के संकेत उनको नजर आने लगे और फिर उस बदलाव बहुत बड़ा तेजी से आया और पिछले 10 वर्ष में भारत ने जिन कामों को बल दिया है आज भारत की छवि विश्व बंधु की बन चुकी है दोस्तों, विश्व हमें एक बंधु के रूप में स्वीकार कर रहा है और जब दुनिया हमें विश्व बंधु के रूप में स्वीकारती है तो हमारी वैश्विक जिम्मेवारियों को भी हमने हमारे आने वाले रोड मैप में महत्व देना ही होगा और भारत की सफल विदेश नीति ने अच्छे परिणाम भी दिए हैं। हमने हर संकट को उस प्रकार से हैंडल किया जिस प्रकार से मानवीय मूल्यों को हमने प्राथमिकता दी उसका परिणाम है कि सामान्य मानवी के मन में ये विश्व बंधु वाला भाव बहुत मजबूत हुआ और भारत का सेवा भाव का जो कैरेक्टर है उसको विश्व ने पहचाना है चाहे यूक्रेन का संकट हो चाहे अफगानिस्तान का संकट हो हर हमारे लोगों को बचाना हो हमने किसी भी क्षेत्र में हमने कोई कमी नहीं रखी है और साथियों इस क्षमता के कारण भारत में निवेश की संभावनाएं बहुत बढ़ने वाली है मैं राज्यों से भी कहूंगा कि आप प्रगतिशील नीतियां बनाकर रेडी रहिए विश्व आज आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है और जो राज्य ज्यादा स्पष्ट नीतियों के साथ आएगा जो राज्य उन कंपनियां विदेश से आने वाले लोगों को ठीक से हैंडल करेगा उसको बेनिफिट मिलने ही वाला है और भारत ने जो नीतियां बनाई हैं, भारत ने जो वातावरण बनाया है उसका लाभ भारत के हर राज्य को मिलना चाहिए और उस दिशा में हम तेजी से काम करना चाहते हैं। साथियों, हमने जी-20 समिट में देखा है दुनिया का भारत के प्रति नजरिया बदला है जो लोग इन चीजों को माइन्यूटली देखते हो उनको पता होगा कि जी- 20 एक प्रकार से कई संकटों से गुजर रहा था उतार- चढ़ाव आते रहते थे, बिखराव भी नजर आ रहा था लेकिन भारत में जी-20 आने के बाद नए प्राण से भर गया है, नया सामर्थ्य आ गया है और ये भारत की ताकत है कि उसने पूरे विश्व को जोड़ने में जी-20 के माध्यम से बहुत बड़ा काम किया है और उसके इन दिनों भी जो परिणाम आए इसके बाद मेरा काफी समय विदेश के सरकारों से फोन पर अभिनंदन स्वीकार करने में गया और शायद मुझे 14 और 19 में भी ऐसा अनुभव नहीं था जितना इस बार फ्लो है। दुनिया के करीब-करीब अब नाम लें उसने भारत को शुभेच्छा व्यक्त की है या बात करने की कोशिश की है यानी ये वैश्विक जो हमारा ताकत है उसका परिचय करवा रहा है और उसके कारण मैं मानता हूं कि विश्व में हमारा सम्मान और साथ-साथ भारत में निवेश ये दोनों संभावनाएं बढ़ रही हैं।

साथियों,

हमारे संविधान का ये 75वां वर्ष है हम चाहते हैं कि संविधान हमारी संवैधानिक संस्थाओं का संरक्षण भर इसके मात्र के लिए है ऐसा नहीं कोई अदालत में धाराओं का उपयोग करके काम करने के लिए नहीं है ये एक हमारी भावना है, हमारा स्पिरिट है और हमें इस 75 साल को ऐसे मनाना है ताकि हम संविधान के स्पिरिट को जन- जन तक पहुंचाएं, हर जन को संविधान की जो भावना है, कर्तव्य की भावना है अनेक बातें उनके प्रति समर्पण उसका बढ़ें उस दिशा में हम काम करना चाहते हैं। साथियों, छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष के उत्सव में देश आज रंगा हुआ है और हम हमारे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है क्योंकि उसमें राष्ट्र प्रथम की भावना है। छत्रपति शिवाजी महाराज को याद करते ही राष्ट्र प्रथम की भावना हमें मजबूती देती है और इसलिए हम देश में इसी एजेंडा को आगे रखते हुए और जब इसी समय 350 साल का पर्व आया है तो हमें अपनी पॉलिसी और परफॉर्मेंस और सामान्य मानवी का जीवन बेहतर करना है उस पर जरा भी विलंब नहीं करना है। साथियों, विकास की सारी तैयारियां, रोड मैप लेकर हम चलेंगे ही चल रहे हैं लेकिन साथ- साथ हम नए- नए सांसद आए हैं कुछ पुराने सांसद हैं कोई ज्यादा अनुभवी सांसद भी हैं आप देखते हैं कि इन दिनों पिछले दो दिन से आप टीवी पर देखते होंगे एक भी सच्चाई मुझे उसमें नजर नहीं आई कोई ये कह रहा है कोई वो कह रहा था सब मैंने कहा कि भाई पूछो तो ये जानकारी लाते कहां से हैं। गप- गोले चला रहे हैं किसी के खाते में कुछ भी डाल कर के चल रहा है मतलब ये थोड़े दिन क्योंकि 10 साल से ऐसे अवसर नहीं मिले हैं तो शायद ये उबाल जरा ज्यादा रहेगा लेकिन आप मान के चलिए जी ऐसे लोग कोई पहुंचेंगे बस साब मेरा अच्छा संबंध है मंत्री में आपका नंबर कर सकता हूं आया हमें भी पता नहीं होता यार हो सकता है मिनिस्टर बनने का ये रास्ता होगा तो हम भी गलती से उसका हाथ पकड़ लेते हैं और वो पता नहीं वो किस खाई में डुबो देता है कभी-कभी तो शायद आप तो टेक्नोलॉजी ऐसी है कि हो सकता है मेरे सिग्नेचर से कोई लिस्ट बाहर निकल जाए कि ये मंत्री बन गए हो सकता है कोई बुद्धिमान डिपार्टमेंट भी बांट दें तो आजकल कई लोग सरकार बनाने में लगे हुए हैं, मंत्री पद बांट रहे हैं, पद बांट रहे हैं, व्यवस्था बांट रहे हैं मैं आपसे आग्रह पूर्वक कहता हूं और जो मोदी को जानते हैं ये सारे प्रयास निरर्थक है भाई। आप भी किसी का फोन आ जाए तो 10 बार वेरीफाई कीजिए कि जिसने फोन किया है वो सचमुच में अथॉरिटी है अदर वाइज कोई भी कहेगा कि भाई आपका नाम हो गया है सुबह परिवार को बुला लीजिए शपथ समारोह में आना है हो गया तो ऐसी गप बाजी करने वाली एक बहुत बड़ी फौज रहती है कुछ लोग आदतन करते रहते हैं, कुछ लोग मजा आती है और कुछ लोग बद इरादे से करते हैं मेरा सभी सांसदों से आग्रह है कि हम इन सारे षड्यंत्रों का शिकार ना बनें। दूसरा हमारे जो इंडी अलायंस वालों ने इस चुनाव में फेक न्यूज में एक्सपर्टाइज कर लिया डबल पीएचडी कर लिया है उन्होंने वो शायद इसका भरपूर उपयोग करेंगे हम कृपा करके इन चीजों से दूर रहें, अफवाहों से दूर रहें ये जो टीम बैठी है वो अनुभवी टीम है मुझे भी सही सलाह देने वाली टीम है और इसलिए टीम मिलकर के बहुत सही निर्णय करने वाली है। कृपा करके ब्रेकिंग न्यूज के आधार पर देश चलेगा नहीं ये मान के चलिए।

साथियों,
विकसित भारत का संकल्प लेकर के हम चले हैं तीन नंबर की इकोनॉमी पहुंचना मैं जानता हूं निश्चित रोड मैप के साथ उसको हम पार करने वाले हैं और मैंने पहले भी कहा था कि मेरा पल- पल देश के नाम है, मेरा पल-पल आप लोगों के नाम है, मैं 24/7 अवेलेबल हूं। हमें मिलकर के देश को आगे बढ़ाना है। फिर से एक बार आप लोगों ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, जो प्यार दिखाया है और जो समर्थन दिया है वाकई मैं मानता हूं भारत के लोकतंत्र की एक बहुत बड़ी ताकत है मैं जितना आपका आभार व्यक्त करूं उतना कम है और मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं आपकी आशा- अपेक्षाओं को पूरी करने में परिश्रम करने में कोई कमी नहीं रखूंगा। मेरे लिए जन्म सिर्फ और सिर्फ वन लाइफ- वन मिशन और वो है मेरी भारत माता। ये मिशन है 140 करोड़ देशवासियों के सपनों को पूरा करने के लिए खप जाना, ये मिशन है 140 करोड़ देशवासियों को हजार साल की मुसीबतों से जो गुजरी हुई पीढ़ी दर पीढ़ी है उसे मुक्ति दिला करके सम्मान के साथ विश्व में मेरा हर देशवासी दुनिया उसे देखे तो उसका मन कर जाए काश ये हिंदुस्तान का है अरे नजर मिल जाए तो अच्छा होगा ये मैं स्थिति पैदा करना चाहता हूं। उसका मन लालायित होना चाहिए हिंदुस्तानी है अरे यार जरा हाथ मिला लूं कुछ एनर्जी मुझे भी आ जाए मैं देश को इस ऊंचाई पर ले जाना चाहता हूं और साथियों मुझे पक्का विश्वास है आपका साथ, आपका सहयोग, आपका अनुभव बहुत बड़े परिणामों की संभावनाएं लेकर के आया है। लोकसभा का ये गठन उन सभी आकांक्षाओं को पूरा करेगा मैं फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।