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PM inaugurates four Particularly Vulnerable Tribal Groups skilling centres under PM Kaushal Vikas Yojana
‘India’s daughters and mothers are my ‘raksha kawach’ (protective shield)’
“In today's new India, the flag of women’s power is flying from Panchayat Bhawan to Rashtrapati Bhavan”
“I have confidence that you will face all the adversity but will not allow any harm to come to Cheetahs”
“Women power has become the differentiating factor between the India of the last century and the new India of this century”
“Over a period of time, ‘Self Help Groups’ turn into ‘Nation Help Groups’”
“Government is working continuously to create new possibilities for women entrepreneurs in the village economy”
“There will be always some item made from coarse grains in the menu of visiting foreign dignitaries”
“Number of women in the police force across the country has doubled from 1 lakh to more than 2 lakhs”

भारत माता की - जय,

भारत माता की - जय,

भारत माता की - जय,

मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्रीमान मंगुभाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीमान शिवराज सिंह जी चौहान, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मेरे साथीगण, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायक साथी, विशाल संख्या में पधारे हुए अन्य सभी महानुभाव और आज इस कार्यक्रम के केंद्र बिंदु में है, जिनके लिए ये कार्यक्रम है, ऐसी बहुत बड़ी संख्या में उपस्थित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी माताओं-बहनों को प्रणाम!

आप सभी का स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में बहुत-बहुत स्वागत है। अभी हमारे मुख्यमंत्री जी ने, हमारे नरेन्द्र सिंह जी तोमर ने मेरे जन्मदिवस को याद किया। मुझे ज्यादा याद नहीं रहता है, लेकिन अगर सुविधा रही, अगर कोई कार्यक्रम जिम्मे नहीं है तो आमतौर पर मेरा प्रयास रहता है कि मेरी मां के पास जाऊं, उनको चरण छुकर के आर्शीवाद लूं। लेकिन आज मैं मां के पास तो नहीं जा सका। लेकिन मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल के, अन्य समाज के गांव-गांव में मेहनत करने वाली ये लाखों माताएं आज मुझे यहां आर्शीवाद दे रही हैा। ये दृश्य आज मेरी मां जब देखेगी, उसको जरूर संतोष होगा कि भले बेटा आज उसके पास तो नहीं गया, लेकिन लाखों माताओं ने मुझे आर्शीवाद दिया है। मेरी मां को आज ज्यादा प्रसन्न्ता होगी। आप इतनी बड़ी तादाद में माताएं-बहनें, बेटियां ये आपका आशीर्वाद हम सबके लिए बहुत बड़ी ताकत है। एक बहुत बड़ी ऊर्जा है, motivation है। और मेरे लिए तो देश की माताएं बहनें, देश की बेटियां वो मेरा सबसे बड़ा रक्षाकवच है। शक्ति का स्त्रोत है, मेरी प्रेरणा है।

इतनी बड़ी विशाल संख्या में आए भाई-बहन आज एक और महत्वपूर्ण दिवस है। आज विश्वकर्मा पूजा भी हो रही है। विश्वकर्मा जयंती पर स्वयं सहायता समूहों का इतना बड़ा सम्मेलन, अपने आप में एक बहुत बड़ी विशेषता के रूप में मैं देखता हूं। मैं आप सभी को, सभी देशवासियों को विश्वकर्मा पूजा की भी अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मुझे आज इस बात की भी खुशी है कि भारत की धरती पर अब 75 साल बाद चीता फिर से लौट आया है। अब से कुछ देर पहले मुझे कुनो नेशनल पार्क में चीतों को छोड़ने का सौभाग्य मिला। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं। करूं आग्रह? आप जवाब दें तो करूं? आग्रह करूं? आग्रह करूं सबको? ये मंच वालों को भी आग्रह करूं? सबका कहना है कि मैं आग्रह करूं। आज इस मैदान से हम पूरे विश्व को एक संदेश देना चाहते हैं। आज जब आठ चीते 75 साल करीब-करीब उसके बाद हमारी देश की धरती पर लौट आए हैं। दूर अफ्रीका से आए हैं। लंबी सफर करके आए हैं। हमारे बहुत बड़े मेहमान आए हैं। इन मेहमानों के सम्मान में मैं एक काम कहता हूं करोगे? इन मेहमानों के सम्मान में हम सब अपनी जगह पर खड़े होकर दोनों हाथ ऊपर करके ताली बजाकर के हमारे मेहमानों को स्वागत करें। जोर से ताली बजाएं और जिन्होंने हमें ये चीते दिए हैं। उन देशवासियों का भी हम धन्यवाद करते हैं। जिन्होंने लंबे अर्से के बाद हमारी ये कामना पूरी की है। जोरों से ताली बजाइये साथियों। इन चीतों के सम्मान में ताली बाजाइये। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

मैं देश के लोगों को, मध्य प्रदेश के लोगों को इस ऐतिहासिक अवसर पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। लेकिन इससे भी ज्यादा मैं आप सबको, इस इलाके के नागरिकों को एक विशेष बधाई देता हूं। हिन्दुस्तान तो बहुत बड़ा है। जंगल भी बहुत है। वन्य पशु भी बहुत जगह पर हैं। लेकिन ये चीते आपके यहां आने का भारत सरकार ने निर्णय क्यों किया? क्या कभी आपने सोचा है? यही तो सबसे बड़ी बात है। ये चीता आपको सुपुर्द इसलिए किया है कि आप पर हमारा भरोसा है। आप मुसीबत झेलेंगे, लेकिन चीते पर मुसीबत नहीं आने देंगे, ये मेरा विश्वास है। इसी के कारण आज मैं आप सबको ये आठ चीतों की जिम्मेदारी सुपुर्द करने के लिए आया हूं, और मुझे पूरा विश्वास है इस देश के लोगों ने कभी मेरे भरोसे को तोड़ा नहीं है। मध्य प्रदेश के लोगों ने कभी भी मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने दी है और ये श्योपुर इलाके के लोगों को भी मुझे पूरा भरोसा है कि मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने देंगे। आज मध्य प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों द्वारा राज्य में 10 लाख पौधों का रोपण भी किया जा रहा है। पर्यावरण की रक्षा के लिए आप सभी का ये संगठित प्रयास, भारत का पर्यावरण के प्रति प्रेम, पौधे में भी परमात्मा देखने वाला मेरा देश आज आपके इन प्रयासों से भारत को एक नई ऊर्जा मिलने वाली है।

साथियों,

पिछली शताब्दी के भारत और इस शताब्दी के नए भारत में एक बहुत बड़ा अंतर हमारी नारी शक्ति के प्रतिनिधित्व के रूप में आया है। आज के नए भारत में पंचायत भवन से लेकर राष्ट्रपति भवन तक नारीशक्ति का परचम लहरा रहा है। मुझे बताया गया है कि यहां श्‍योपुर जिले में एक मेरी आदिवासी बहन, जिला पंचायत की अध्‍यक्ष के रूप में काम कर रही हैं। हाल ही में संपन्‍न हुए पंचायत चुनावों में पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 17 हज़ार बहनें जनप्रतिनिधि के रूप में चुनी गई हैं। ये बड़े बदलाव का संकेत है, बड़े परिवर्तन का आह्वान है।

साथियों,

आजादी की लड़ाई में सशस्त्र संघर्ष से लेकर सत्याग्रह तक, देश की बेटियां किसी से पीछे नहीं रहीं हैं। आज जब भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। तब हमने, हम सबने देखा है कैसे जब हर घर में तिरंगा फहरा तो उसमें आप सभी बहनों ने, महिला स्वयं सहायता समूहों ने कितना बड़ा काम किया है। आपके बनाए तिरंगों ने राष्ट्रीय गौरव के इस क्षण को चार चांद लगा दिये। कोरोना काल में, संकट की उस घड़ी में मानव मात्र की सेवा करने के इरादे से आपने बहुत बड़ी मात्रा में मास्क बनाएं, पीपीई किट्स बनाने से लेकर लाखों-लाख तिरंगे यानि एक के बाद एक हर काम में देश की नारीशक्ति ने हर मौके पर, हर चुनौती को अपनी उद्यमिता के कारण देश में नया विश्वास पैदा किया और नारीशक्ति का परिचय दे दिया है। और इसलिए आज मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ एक स्टेटमेंट करना चाहता हूं। बडी जिम्मेदारी के साथ करना चाहता हूं। पिछले 20-22 साल के शासन व्यवस्था के अनुभव के आधार पर कहना चाहता हूं। आपके समूह का जब जन्म होता है। 10-12 बहनें इकट्ठी होकर के कोई काम शुरू करती हैं। जब आपका इस एक्टिविटी के लिए जन्म होता है। तब तो आप स्वयं सहायता समूह होते हैं। जब आपके कार्य की शुरूआत होती है। एक-एक डग रखके काम शुरू करते हैं। कुछ पैसे इधर से कुछ पैसे इधर से इकट्ठे करके कोशिश करते हैं तब तक तो आप स्वंय सहायता समूह हैं। लेकिन मैं देखता हूं आपके पुरुषार्थ के कारण, आपके संकल्प के कारण देखते ही देखते ये स्वयं सहायता समूह राष्ट्र सहायता समूह बन जाते हैं। और इसलिए कल आप स्वयं सहायता समूह होंगे, लेकिन आज आप राष्ट्र सहायता समूह बन चुके हैं। राष्ट्र की सहायता कर रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों की यही ताकत आज़ादी के अमृतकाल में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बहुत अहम भूमिका बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आज प्रतिबद्ध है, कटिबद्ध है।

साथियों,

मेरा ये अनुभव रहा है कि जिस भी सेक्टर में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, उस क्षेत्र में, उस कार्य में सफलता अपने आप तय हो जाती है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसको महिलाओं ने नेतृत्व दिया है। आज गांवों में खेती हो, पशुपालन का काम हो, डिजिटल सेवाएं हों, शिक्षा हो, बैंकिंग सेवाएं हों, बीमा से जुड़ी सेवाएं हों, मार्केटिंग हो, भंडारण हो, पोषण हो, अधिक से अधिक क्षेत्रों में बहनों-बेटियों को प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है। मुझे संतोष है कि इसमें दीन दयाल अंत्योदय योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमारी आज जो बहनें हैं, उसका भी काम देखिए, कैसे-कैसे विविध मोर्चों को संभालती है। कुछ महिलाएं पशु सखी के रूप में, कोई कृषि सखी के रूप में, कोई बैंक सखी के रूप में, कोई पोषण सखी के रूप में, ऐसी अनेक सेवाओं की ट्रेनिंग लेकर वे शानदार काम कर रही हैं। आपके सफल नेतृत्व, सफल भागीदारी का एक उत्तम उदाहरण जल जीवन मिशन भी है। अभी मुझे एक बहन से कुछ बातचीत करने का मौका भी मिला। हर घल पाइप से जल पहुंचाने के इस अभियान में सिर्फ 3 वर्षों में 7 करोड़ नए पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इनमें से मध्य प्रदेश में भी 40 लाख परिवारों को नल से जल पहुंचाया जा चुका है और जहां-जहां नल से जल पहुंच रहा है, वहां माताएं-बहनें डबल इंजन की सरकार को बहुत आशीर्वाद देती हैं। मैं इस सफल अभियान का सबसे अधिक श्रेय मेरे देश की माताओं-बहनों को आपको देता हूं। मुझे बताया गया है कि मध्य प्रदेश में 3 हज़ार से अधिक नल जल परियोजनाओं का प्रबंधन आज स्वयं सहायता समूहों के हाथ में है। वे राष्ट्र सहायता समूह बन चुके हैं। पानी समितियों में बहनों की भागीदारी हो, पाइपलाइन का रख-रखाव हो या पानी से जुड़ी टेस्टिंग हो, बहनें-बेटियां बहुत ही प्रशंसनीय काम कर रही हैं। ये जो किट्स आज यहां दी गई हैं, ये पानी के प्रबंधन में बहनों-बेटियों की भूमिका को बढ़ाने का ही प्रयास है।

साथियों,

पिछले 8 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने में हमने हर प्रकार से मदद की है। आज पूरे देश में 8 करोड़ से अधिक बहनें इस अभियान से जुड़ चुकी हैं। मतलब एक प्रकार से आठ करोड़ परिवार इस काम में जुड़े हुए हैं। हमारा लक्ष्य है कि हर ग्रामीण परिवार से कम से कम एक महिला, एक बहन हो, बेटी हो, मां हो इस अभियान से जुड़े। यहां मध्य प्रदेश की भी 40 लाख से अधिक बहनें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 2014 से पहले के 5 वर्षों में जितनी मदद दी गई, बीते 7 साल में उसमें लगभग 13 गुणा बढ़ोतरी हुई है। हर सेल्फ हेल्प ग्रुप को पहले जहां 10 लाख रुपए तक का बिना गारंटी का ऋण मिलता था, अब ये सीमा भी दोगुनी यानि 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख की गई है। फूड प्रोसेसिंग से जुड़े सेल्फ हेल्प ग्रुप को नई यूनिट लगाने के लिए 10 लाख रुपए से लेकर 3 करोड़ रुपए तक की मदद दी जा रही है। देखिए माताओं-बहनों पर, उनकी ईमानदारी पर, उनके प्रयासों पर, उनकी क्षमता पर कितना भरोसा है सरकार का कि इन समूहों को 3 करोड़ रुपया देने के लिए तैयार हो जाते हैं।

साथियों,

गांव की अर्थव्यवस्था में, महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए, उनके लिए नई संभावनाएं बनाने के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के माध्यम से हम हर जिले के लोकल उत्पादों को बड़े बाज़ारों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसका बहुत बड़ा लाभ विमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी हो रहा है। थोड़ी देर पहले यहां वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट अभियान से जुड़ी बहनों के साथ मुझे बातचीत करने का मौका मिला। कुछ उत्पाद को देखने का मौका मिला और कुछ उत्पाद उन्होंने मुझे उपहार में भी दिए हैं। ग्रामीण बहनों द्वारा बनाए गए ये उत्पाद मेरे लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अनमोल हैं। मुझे खुशी है कि यहां मध्य प्रदेश में हमारे शिवराज जी की सरकार ऐसे उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। सरकार ने अनेक ग्रामीण बाज़ार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनों के लिए ही बनाए हैं। मुझे बताया गया है कि इन बाज़ारों में स्वयं सहायता समूहों ने 500 करोड़ रुपए से अधिक के उत्पादों की बिक्री की है। 500 करोड़, यानि इतना सारा पैसा आपकी मेहनत से गांव की बहनों के पास पहुंचा है।

साथियों,

आदिवासी अंचलों में जो वन उपज हैं, उनको बेहतरीन उत्पादों में बदलने के लिए हमारी आदिवासी बहनें प्रशंसनीय काम कर रही हैं। मध्य प्रदेश सहित देश की लाखों आदिवासी बहनें प्रधानमंत्री वनधन योजना का लाभ उठा रही हैं। मध्य प्रदेश में आदिवासी बहनों द्वारा बनाए बेहतरीन उत्पादों की बहुत अधिक प्रशंसा भी होती रही है। पीएम कौशल विकास योजना के तहत आदिवासी क्षेत्रों में नए स्किलिंग सेंटर्स से इस प्रकार के प्रयासों को और बल मिलेगा।

माताओं-बहनों,

आजकल ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसलिए सरकार का जो GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस पोर्टल है, उस पर भी आपके उत्पादों के लिए, ‘सरस’ नाम से विशेष एक स्थान रखा गया है। इसके माध्यम से आप अपने उत्पाद सीधे सरकार को, सरकारी विभागों को बेच सकते हैं। जैसे यहां श्योपुर में लकड़ी पर नक्काशी का इतना अच्छा काम होता है। इसकी देश में बहुत बड़ी डिमांड है। मेरा आग्रह है कि आप अधिक से अधिक इसमें खुद को, अपने उत्पादों को ये GeM में रजिस्टर करवाइये।

साथियों,

सितंबर का ये महीना देश में पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। भारत की कोशिशों से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अगला वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोटे अन्नाज के वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। मध्य प्रदेश तो पोषण से भरे इस मोटे अनाज के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। विशेष रूप से हमारे आदिवासी अंचलों में इसकी एक समृद्ध परिपाटी है। हमारी सरकार द्वारा कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, और मैंने तो तय किया है अगर भारत सरकार में किसी विदेशी मेहमान के लिए खाना देना है तो उसमें कुछ न कुछ तो मोटे अनाज का होना ही चाहिए। ताकि मेरा जो छोटा किसान काम करता है। वो विदेशी मेहमान की थाली में भी वो परोसा जाना चाहिए। स्वयं सहायता समूहों के लिए इसमें बहुत अधिक अवसर हैं।

साथियों,

एक समय था, जब घर-परिवार के भीतर ही माताओं-बहनों की अनेक समस्याएं थीं, घर के फैसलों में भूमिका बहुत सीमित होती थी। अनेक घर ऐसे होते थे अगर बाप और बेटा बात कर रहे हैं व्यापार की, काम की और अगर मां घर से किचन में से बाहर आ गई तो तुरंत बेटा बोल देता है या तो बाप बोल देता है-जा जा तू रसोड़े में काम कर, हमको जरा बात करने दे। आज ऐसा नहीं है। आज माताओं-बहनों के विचार सुझाव परिवार में भी उसका महत्व बढ़ने लगा है। लेकिन इसके पीछे योजनाबद्ध तरीके से हमारी सरकार ने प्रयास किए हैं। पहले ऐसे सोचे-समझे प्रयास नहीं होते थे। 2014 के बाद से ही देश, महिलाओं की गरिमा बढ़ाने, महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में जुटा हुआ है। शौचालय के अभाव में जो दिक्कतें आती थीं, रसोई में लकड़ी के धुएं से जो तकलीफ होती थी, पानी लेने के लिए दो-दो, चार-चार किलोमीटर जाना पड़ता था। आप ये सारी बातें अच्छी तरह जानती हैं। देश में 11 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाकर, 9 करोड़ से ज्यादा उज्जवला के गैस कनेक्शन देकर और करोड़ों परिवारों में नल से जल देकर के आपका जीवन आसान बनाया है।

माताओं-बहनों,

गर्भावस्था के दौरान कितनी समस्याएं थीं, ये आप बेहतर जानती हैं। ठीक से खाना-पीना भी नहीं हो पाता था, चेकअप की सुविधाओं का भी अभाव था। इसलिए हमने मातृवंदना योजना शुरु की। इसके तहत 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे गर्भवती महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। मध्य प्रदेश की भी बहनों को इसके तहत करीब 1300 करोड़ रुपए ऐसी गर्भवती महिलाओं के खाते में पहुंचे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत मिल रहे 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज ने भी गरीब परिवार की बहनों की बहुत बड़ी मदद की है।

माताओं-बहनों,

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अच्छे परिणाम आज देश अनुभव कर रहा है। बेटियां ठीक से पढ़ाई कर सकें, उनको स्कूल बीच में छोड़नी ना पड़े, इसके लिए स्कूलों में बेटियों के लिए अलग से शौचालय बनाए, सेनिटेरी पैड्स की व्यवस्था की गई। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत लगभग ढाई करोड़ बच्चियों के अकाउंट खोले गए हैं।

साथियों,

आज जनधन बैंक खाते देश में महिला सशक्तिकरण के बहुत बड़े माध्यम बने हैं। कोरोना काल में सरकार अगर आप बहनों के बैंक खाते में सीधे पैसा ट्रांसफर कर पाई है, तो उसके पीछे जनधन अकाउंट की ताकत है। हमारे यहां संपत्ति के मामले में ज्यादातर नियंत्रण पुरुषों के पास ही रहता है। अगर खेत है तो पुरुष के नाम पर, दुकान है तो पुरुष के नाम पर, घर है तो पुरुष के नाम पर, गाड़ी है तो पुरुष के नाम पर, स्कूटर है तो पुरुष के नाम पर, महिला के नाम पर कुछ नहीं और पति नहीं रहे तो बेटे के नाम पर चला जाए। हमने इस परिपाटी को खत्म करके मेरी माताओं-बहनों को ताकत दी है। आज प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाला घर हम सीधा सीधा महिलाओं के नाम पर देते हैं। महिला उसकी मालिक बन जाती है। हमारी सरकार ने देश की 2 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को अपने घर की मालकिन बनाया है। ये बहुत बड़ा काम है माताओं-बहनों। मुद्रा योजना के तहत भी अभी तक देशभर में 19 लाख करोड़ रुपए का बिना गारंटी का ऋण छोटे-छोटे व्यापार-कारोबार के लिए दिया जा चुका है। ये जो पैसा है उसमें से लगभग 70 प्रतिशत मेरी माताएं-बहनें जो उद्यम करती हैं उन्होंने प्राप्त किया है। मुझे खुशी है कि सरकार के ऐसे प्रयासों के कारण आज घर के आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है।

साथियों,

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण उन्हें समाज में भी उतना ही सशक्त बनाता है। हमारी सरकार ने बेटियों के लिए सारे, जितने दरवाजे बंद थे ना, सारे दरवाजे को खोल दिए हैं। अब बेटियां सैनिक स्कूलों में भी दाखिल हो रही हैं, पुलिस कमांडो में जाकर के देश की सेवा कर रही हैं। इतना ही नहीं सीमा पर भारत मां की बेटी, भारत मां की रक्षा करने का काम फौज में जाकर कर रही है। पिछले 8 वर्षों में देशभर की पुलिस फोर्स में महिलाओं की संख्या 1 लाख से बढ़कर दोगुनी यानि 2 लाख से भी अधिक हो चुकी है। केंद्रीय बलों में भी अलग-अलग जो सुरक्षा बल हैं, आज हमारी 35 हज़ार से अधिक बेटियां देश के दुश्मनों से, आतंकवादियों से टक्कर ले रही हैं दोस्तों। आतंकवादियों को धूल चटा रही हैं। ये संख्या 8 साल पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। यानि परिवर्तन आ रहा है, हर क्षेत्र में आ रहा है। मुझे आपकी ताकत पर पूरा भरोसा है। सबका प्रयास से एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र बनाने में हम ज़रूर सफल होंगे। आप सब ने इतनी बड़ी संख्या में आकर के हमें आशीर्वाद दिए हैं। आपके लिए अधिक काम करने की आपने मुझे प्रेरणा दी है। आपने मुझे शक्ति दी है। मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके जोर से बोलिये,

भारत माता की - जय,

भारत माता की - जय,

भारत माता की - जय,

भारत माता की - जय,

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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Text of PM’s address at the India Mobile Congress & launch of 5G services in India
October 01, 2022
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PM inaugurates 6th edition of India Mobile Congress
“5G is a knock on the doors of a new era in the country. 5G is the beginning of an infinite sky of opportunities”
“New India will not remain a mere consumer of technology, but India will play an active role in the development and implementation of that technology”
“With 5G, India is setting a global standard in telecom technology for the first time”
“From exporting zero mobile phones in 2014, today we have become a mobile phone exporting country worth thousands of crores”
“I always had full faith in the understanding, wisdom and inquisitive mind of the common man of the country”
“Digital India has given a platform to small traders, small entrepreneurs, local artists and artisans”
“5G technology will not be limited to speedy internet access, but it has the capability to change lives”

इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगीगण, देश के उद्योगजगत के प्रतिनिधिगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

ये समिट तो ग्लोबल है लेकिन आवाज लोकल है। इतना ही नहीं आगाज भी लोकल है। आज 21वीं सदी के विकसित होते भारत के सामर्थ्य का, उस सामर्थ्य को देखने का, उसके प्रदर्शन का एक विशेष दिवस है। आजादी के अमृत महोत्सव के इस ऐतिहासिक कालखंड में एक अक्टूबर 2022, ये तारीख इतिहास में दर्ज होने वाली है। दूसरा ये नवरात्र का पर्व चल रहा है। शक्ति उपासना का पर्व होता है और 21वीं सदी की जो सबसे बड़ी शक्ति है उस शक्ति को नई ऊंचाई पर ले जाने का आज भी आरंभ हो रहा है। आज देश की ओर से, देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की ओर से, 130 करोड़ भारतवासियों को 5G के तौर पर एक शानदार उपहार मिल रहा है। 5G, देश के द्वार पर नए दौर की दस्तक लेके आया है। 5G, अवसरों के अनंत आकाश की शुरुआत है। मैं प्रत्येक भारतवासी को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

मैं गौरव से भरे इन क्षणों के साथ ही, मुझे खुशी इस बात की भी है कि 5G की शुरुआत में ग्रामीण स्कूलों के बच्चे भी हमारे साथ सहभागी हैं, गाँव भी सहभागी हैं, मजदूर-गरीब भी सहभागी हैं। अभी मैं यूपी के एक ग्रामीण स्कूल की बेटी 5G होलोग्राम टेक्नालजी के जरिए रूबरू हो रहा था। जब मैं 2012 के चुनाव में होलोग्राम लेकर के चुनाव प्रसार कर रहा था तो दुनिया के लिए अजूबा था। आज वो घर-घर पहुंच रहा है। मैंने महसूस किया कि नई तकनीक उनके लिए किस तरह पढ़ाई के मायने बदलते जा रही है। इसी तरह, गुजरात, महाराष्ट्र और ओड़िशा के गाँवों के सुदूर स्कूल तक, 5G के जरिए बच्चे बड़े-बड़े विशेषज्ञों के साथ क्लास में नई-नई चीजें सीख रहे हैं। उनके साथ नए दौर की क्लास का हिस्सा बनना, ये वाकई बहुत रोमांचित करने वाला अनुभव है।

साथियों,

5G को लेकर भारत के प्रयासों का एक और संदेश है। नया भारत, टेक्नॉलजी का सिर्फ़ consumer बनकर नहीं रहेगा बल्कि भारत उस टेक्नॉलजी के विकास में, उसके implementation में बहुत बड़ी active भूमिका निभाएगा। भविष्य की wireless टेक्नॉलजी को design करने में, उस से जुड़ी manufacturing में भारत की बड़ी भूमिका होगी। 2G, 3G, 4G के समय भारत टेक्नॉलजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा। लेकिन 5G के साथ भारत ने नया इतिहास रच दिया है। 5G के साथ भारत पहली बार टेलीकॉम टेक्नॉलजी में global standard तय कर रहा है। भारत लीड कर रहा है। आज इन्टरनेट का इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति इस बात को समझ रहा है कि 5G, Internet का पूरा आर्किटेक्चर बदल कर रख देगा। इसलिए भारत के युवाओं के लिए आज 5G बहुत बड़ी opportunity लेकर आया है। मुझे खुशी है कि विकसित भारत का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा हमारा देश, दुनिया के अन्य देशों के साथ किस तरह कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। ये भारत की बहुत बड़ी सफलता है, डिजिटल इंडिया अभियान की बहुत बड़ी सफलता है।

साथियों,

जब हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो कुछ लोग समझते हैं कि ये सिर्फ एक सरकारी योजना है। लेकिन डिजिटल इंडिया सिर्फ एक नाम नहीं है, ये देश के विकास का बहुत बड़ा विजन है। इस विजन का लक्ष्य है उस टेक्नॉलजी को आम लोगों तक पहुंचाना, जो लोगों के लिए काम करे और लोगों के साथ जुड़कर काम करे। मुझे याद है, जब मोबाइल सेक्टर से जुड़े इस विजन के लिए strategy बनाई जा रही थी, तो मैंने कहा था कि हमारी अप्रोच टुकड़ों-टुकड़ों में नहीं होनी चाहिए, बल्कि holistic होनी चाहिए। डिजिटल इंडिया की सफलता के लिए जरूरी था कि वो इस सेक्टर के सभी आयामों को एक साथ कवर करे। इसलिए हमने 4 Pillars पर और चार दिशाओं में एक साथ फोकस किया। पहला - डिवाइस की कीमत, दूसरा - डिजिटल कनेक्टिविटी, तीसरा - डेटा की कीमत, चौथा और जो सबसे जरूरी है - ‘digital first’ की सोच।

साथियों,

जब हम पहले पिलर की बात करते हैं, डिवाइस की कीमत की बात करते हैं, तो एक बात बहुत स्पष्ट है। डिवाइस की कीमत तभी कम हो सकती है जब हम आत्मनिर्भर हों, और आपको याद होगा बहुत लोगों ने आत्मनिर्भर की मेरी बात की मजाक उड़ाई थी। 2014 तक, हम करीब 100 प्रतिशत मोबाइल फोन आयात करते थे, विदेशों से इम्पोर्ट करते थे, और इसलिए, हमने तय किया कि हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। हमने mobile manufacturing units को बढ़ाया। 2014 में जहां देश में सिर्फ 2 mobile manufacturing units थी, 8 साल पहले 2, अब उनकी संख्या 200 के ऊपर है। हमने भारत में मोबाइल फोन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए incentive दिए, प्राइवेट सेक्टर को प्रोत्साहित किया। आज इसी योजना का विस्तार आप PLI scheme में भी देख रहे हैं। इन प्रयासों का नतीजा बहुत पॉजिटिव रहा। आज भारत, मोबाइल फोन उत्पादन करने में दुनिया में नंबर 2 पर हैं। इतना ही नहीं जो कल तक हम मोबाइल इम्पोर्ट करते थे। आज हम मोबाइल एक्सपोर्ट कर रहे हैं। दुनिया को भेज रहे हैं। जरा सोचिए, 2014 में जीरो मोबाइल फोन निर्यात करने से लेकर आज हम हजारों करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात करने वाले देश बन गये हैं, एक्सपोर्ट करने वाले देश बन चुके हैं। स्वाभाविक है इन सारे प्रयासों का प्रभाव डिवाइस की कीमत पर पड़ा है। अब कम कीमत पर हमें ज्यादा फीचर्स भी मिलने लगे हैं।

साथियों,

डिवाइस Cost के बाद जो दूसरे पिलर पर हमने काम किया, वो है डिजिटल कनेक्टिविटी का। आप भी जानते हैं कि कम्युनिकेशन सेक्टर की असली ताकत कनेक्टिविटी में है। जितने ज्यादा लोग कनेक्ट होंगे, इस सेक्टर के लिए उतना अच्छा है। अगर हम ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की बात करें, तो 2014 में 6 करोड़ यूजर्स थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 80 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। अगर हम इंटरनेट कनेक्शन की संख्या की बात करें, तो 2014 में जहां 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, वहीं आज इसकी संख्या करीब-करीब 85 करोड़ पहुंच रही है। ये बात भी नोट करने वाली है कि आज शहरों में इंटरनेट यूजर्स की संख्या के मुकाबले हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। और इसकी एक खास वजह है। 2014 में जहां देश में 100 से भी कम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंचा था, आज एक लाख 70 हजार से भी ज्यादा पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंच चुका है। अब कहां 100, कहां एक लाख 70 हजार। जैसे सरकार ने घर-घर बिजली पहुंचाने की मुहिम शुरू की, जैसे हर घर जल अभियान के जरिए हर किसी तक साफ पानी पहुंचाने के मिशन पर काम किया, जैसे उज्जवला योजना के जरिए गरीब से गरीब आदमी के घर में भी गैस सिलेंडर पहुंचाया, जैसे हमने करोड़ों की तादाद में लोग बैंक अकाउंट से वंचित थे। करोड़ों लोग जो बैंक से नहीं जुड़े थे। आजादी के इतने साल के बाद जनधन एकाउंट के द्वारा हिन्दुस्तान के नागरिकों को बैंक के साथ जोड़ दिया। वैसे ही हमारी सरकार, Internet for all के लक्ष्य पर काम कर रही है।

साथियों,

Digital connectivity बढ़ने के साथ ही डेटा की कीमत भी उतनी ही अहम हो जाती है। ये डिजिटल इंडिया का तीसरा पिलर था, जिस पर हमने पूरी शक्ति से काम किया। हमने टेलीकॉम सेक्टर के रास्ते में आने वाली तमाम अड़चनों को हटाया। पहले विजन की कमी और पारदर्शिता के अभाव में टेलीकॉम सेक्टर को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। आप परिचित हैं कि कैसे हमने 4G तकनीक के विस्तार के लिए policy support दिया। इससे डेटा की कीमत में भारी कमी आई और देश में डेटा क्रांति का जन्म हुआ। देखते ही देखते ये तीनों फैक्टर, डिवाइस की कीमत, डिजिटल कनेक्टिविटी और डेटा की कीमत – इसका Multiplier Effect हर तरफ नजर आने लगा।

लेकिन साथियों,

इन सबके साथ एक और महत्वपूर्ण काम हुआ। देश में ‘digital first’ की सोच विकसित हुई। एक वक्त था जब बड़े-बड़े विद्वान इलीट क्लास, उसके कुछ मुट्ठी भर लोग, सदन के कुछ भाषण देख लेना, कैसे-कैसे भाषण हमारे नेता लोग करते हैं। वे मजाक उड़ाते थे। उनको लगता था कि गरीब लोगों में क्षमता ही नहीं है, ये डिजिटल समझ ही नहीं सकते, संदेह करते थे। उन्हें शक था कि गरीब लोग डिजिटल का मतलब भी नहीं समझ पाएंगे। लेकिन मुझे देश के सामान्य मानवी की समझ पर, उसके विवेक पर, उसके जिज्ञासु मन पर हमेशा भरोसा रहा है। मैंने देखा है कि भारत का गरीब से गरीब व्यक्ति भी नई तकनीकों को अपनाने में आगे रहता है और मैं एक छोटा अनुभव बताता हूं। शायद ये 2007-08 का कालखंड होगा या 2009-10 का मुझे याद नहीं है। मैं गुजरात में मुख्यमंत्री रहा लेकिन एक क्षेत्र ऐसा रहा जहां मैं कभी गया नहीं और बहुत ही Tribal इलाके में, बहुत ही पिछड़ा, मैं हमारे सरकार के अधिकारियों ने भी मुझे एक बार वहां कार्यक्रम करना ही करना है, मुझे जाना है। तो वो इलाका ऐसा था कोई-कोई बड़ा प्रोजेक्ट की संभावना नहीं थी, फॉरेस्ट लेंड थी, कोई संभावना रही थी। तो आखिर में एक चिलिंग सेंटर, दूध का चिलिंग सेंटर वो भी 25 लाख रुपये का। मैनें कहा भले वो 25 लाख का होगा, 25 हजार का होगा मैं खुद उद्धघाटन करूंगा। अब लोगों को लगता है ना भई चीफ मिनिस्टर को इससे नीचे तो करना नहीं चाहिए। लेकिन मुझे ऐसा कुछ होता नहीं है। तो मैं उस गांव में गया और जब वहां मैं एक पब्लिक मीटिंग करने के लिए भी जगह नहीं थी तो वहां से 4 किलोमीटर दूर स्कूल का छोटा सा मैदान था। वहां पब्लिक मीटिंग आर्गेनाइज की गई।

लेकिन जब वो चिलिंग सेंटर पर गया मैं तो आदिवासी माताएं-बहनें दूध भरने के लिए कतार में खड़ी थीं। तो दूध का अपना बर्तन नीचे रखकर के जब हम लोग गए और उसकी उद्धघाटन की विधि कर रहे थे तो मोबाइल से फोटो ले रही थीं। मैं हैरान था इतने दूर-दराज के क्षेत्र में मोबाइल से फोटो ले रही है तो मैं उनके पास गया। मैंने कहा ये फोटो लेकर क्या करोगी? तो बोली डाउनलोड करेंगे। ये शब्द सुनकर के मैं सचमुच में surprise हुआ था। कि ये ताकत है हमारे देश के गांव में। आदिवासी क्षेत्र की गरीब माताएं-बहनें जो दूध भरने आई थीं वो मोबाइल फोन से अपनी फोटो ले रही थीं और उनको ये मालुम था कि इसमें तो नहीं अब डाउनलोड करवा देंगे और डाउनलोड शब्द उनके मुह से निकलना ये उनकी समझ शक्ति और नई चीजों को स्वीकारने के स्वभाव का परिचय देती है। मैं कल गुजरात में था तो मैं अम्बा जी तीर्थ क्षेत्र पर जा रहा था तो रास्ते में छोटे-छोटे गांव थे। आधे से अधिक लोग ऐसे होंगे जो मोबाइल से वीडियो उतार रहे थे। आधे से अधिक, यानि हमारे देश की जो ये ताकत है इस ताकत को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते और सिर्फ देश के इलीट क्लास के कुछ लोगों को ही हमारे गरीब भाई-बहनों पर यकीन नहीं था। आखिरकार हम ‘digital first’ के अप्रोच के साथ आगे बढ़ने में कामयाब हुए।

सरकार ने खुद आगे बढ़कर digital payments का रास्ता आसान बनाया। सरकार ने खुद ऐप के जरिए citizen-centric delivery service को बढ़ावा दिया हैं। बात चाहे किसानों की हो, या छोटे दुकानदारों की, हमने उन्हें ऐप के जरिए रोज की जरूरतें पूरी करने का रास्ता दिया। इसका नतीजा आज आप देख सकते हैं। आज टेक्नॉलजी सही मायने में democratic हो गई है, लोकतांत्रिक हो गई है। आपने भी देखा है कि ‘digital first’ की हमारी अप्रोच ने कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में देश के लोगों की कितनी मदद की। दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश जब अपने नागरिकों की मदद करने में संघर्ष कर रहे थे। खजाने में रुपये पड़े थे, डॉलर थे, पाउंड थे, सब था, यूरो था और देने का तय भी किया था। लेकिन पहुंचाने का रास्ता नहीं था। भारत एक क्लिक पर हजारों करोड़ रुपए मेरे देश के नागरिकों के खाते में ट्रांसफर कर रहा था। ये डिजिटल इंडिया की ही ताकत थी कि जब दुनिया थमी हुई थी, तो भी हमारे बच्चे ऑनलाइन क्लासेस ले रहे थे, पढ़ाई कर रहे थे। अस्पतालों के सामने असाधारण चुनौती थी, लेकिन डॉक्टर्स अपने मरीजों का इलाज टेली-मेडिसिन के जरिए भी कर रहे थे। ऑफिसेस बंद थे, लेकिन ‘work from home’ चल रहा था। आज हमारे छोटे व्यापारी हों, छोटे उद्यमी हों, लोकल कलाकार हों, कारीगर हों, डिजिटल इंडिया ने सबको मंच दिया है, बाजार दिया है। आज आप किसी लोकल मार्केट में आप सब्जी मंडी में जाकर देखिए, रेहड़ी-पटरी वाला छोटा दुकानदार भी आपसे कहेगा, कैश नहीं है ‘UPI’ कर दीजिए। मैंने तो बीच में एक वीडियो देखा कोई भिक्षुक भी digitally payment लेता है। Transparency देखिए, ये बदलाव बताता है कि जब सुविधा सुलभ होती है तो सोच किस तरह सशक्त हो जाती है।

साथियों,

आज टेलीकॉम सेक्टर में जो क्रांति देश देख रहा है, वो इस बात का सबूत है कि अगर सरकार सही नीयत से काम करे, तो नागरिकों की नियत बदलने में देर नहीं लगती है। 2जी की नीयत और 5जी की नियत में यही फर्क है। देर आए दुरुस्त आए। भारत आज दुनिया के उन देशों में है जहां डेटा इतना सस्ता है। पहले 1GB डेटा की कीमत जहां 300 रुपए के करीब होती थीं, वहीं आज 1GB डेटा का खर्च केवल 10 रुपए तक आ गया है। आज भारत में महीने भर में एक व्यक्ति मोबाइल पर करीब-करीब एवरेज 14 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है। 2014 में इस 14 GB डेटा की कीमत होती थी करीब–करीब 4200 रुपए प्रति महीना। आज इतना ही डेटा वो सौ रुपए, या ज्यादा से ज्यादा डेढ़ सौ रुपए, सवा सौ या डेढ़ सौ रुपये में मिल जाता है। यानि आज गरीब के, मध्यम वर्ग के मोबाइल डेटा के करीब करीब 4 हजार रुपए हर महीने बच रहा है उसकी जेब में। हमारी सरकार के इतने सारे प्रयासों से भारत में डेटा की कीमत बहुत कम बनी हुई है। ये बात अलग है 4000 रुपया बचना कोई छोटी बात नहीं है हर महीना लेकिन जब मैं बता रहा हूं तब आपको ध्यान में आया क्योंकि हमने इसका हो-हल्ला नहीं किया, विज्ञापन नहीं दिए, झूठे-झूठे बड़े गपगोले नहीं चलाए, हमने फोकस किया कि देश के लोगों की सहूलियत बढ़े, Ease of Living बढ़े।

साथियों,

अक्सर ये कहा जाता है कि भारत पहली तीन औद्योगिक क्रांतियों का लाभ नहीं उठा पाया। लेकिन मेरा विश्वास है कि भारत ना सिर्फ चौथी औद्योगिक क्रांति का पूरा लाभ उठाएगा बल्कि उसका नेतृत्व भी करेगा और विद्वान लोग तो कहने भी लगे हैं कि भारत का दशक नहीं ये भारति की शताब्दी है। ये decade नहीं century है। भारत ने किस तरह 4G आने के बाद टेक्नॉलजी की दुनिया में ऊंचाई छलांग लगाई है, इसके हम सभी साक्षी हैं। भारत के नागरिकों को जब टेक्नॉलजी के समान अवसर मिल जाते हैं, तो दुनिया में उन्हें कोई पछाड़ नहीं सकता। इसलिए आज जब भारत में 5जी का लॉन्च हो रहा है, तो मैं बहुत विश्वास से भरा हुआ हूं दोस्तों। मैं दूर का देख पा रहा हूं और जो सपने हमारे दिल दिमाग मे चल रहे हैं। उसको अपनी आंखों के सामने हम साकार होते देखेंगे। हमारे बाद वाली पीढ़ी ये देखेगी ऐसा काम होने वाला नहीं है हम ही हमारे आखों के सामने देखने वाले हैं। ये एक सुखद संयोग है कि कुछ सप्ताह पहले ही भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। और इसलिए, ये अवसर है हमारे युवाओं के लिए, जो 5 जी टेक्नॉलजी की मदद से दुनिया भर का ध्यान खींचने वाले Innovations कर सकते हैं। ये अवसर है हमारे entrepreneurs के लिए जो 5 जी टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हुए अपना विस्तार कर सकते हैं। ये अवसर है भारत के सामान्य मानवी के लिए जो इस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हुए अपनी skill को सुधार सकता है, up skill कर सकता है, Re-skill कर सकता है, अपने ideas को सच्चाई में बदल सकता है।

साथियों,

आज का ये ऐतिहासिक अवसर एक राष्ट्र के तौर पर, भारत के एक नागरिक के तौर पर हमारे लिए नई प्रेरणा लेकर आया है। क्यों ना हम इस 5जी टेक्नॉलजी का उपयोग करके भारत के विकास को अभूतपूर्व गति दें? क्यों ना हम इस 5 जी टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत तेजी से विस्तार दें? क्यों ना हम इस 5 जी टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करके अपनी Productivity में रिकॉर्ड वृद्धि करें?

साथियों,

इन सवालों में हर भारतीय के लिए एक अवसर है, एक चुनौती है, एक सपना है और एक संकल्प भी है। मुझे पता है कि आज 5G की इस launching को जो वर्ग सबसे ज्यादा उत्साह से देख रहा है, वो मेरा युवा साथी है, मेरे देश की युवा पीढ़ी है। हमारी टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए भी कितने ही बड़े अवसर इंतज़ार कर रहे हैं, रोजगार के कितने ही नए अवसर बनने जा रहे हैं। मुझे विश्वास है, हमारी इंडस्ट्री, हमारे इंस्टीट्यूट्स और हमारे युवा मिलकर इस दिशा में निरंतर काम करेंगे और अभी जब मैं काफी समय पूरा जो exhibition लगा है तो समझने का प्रयास करता था। मैं कोई टेक्नोलॉजी का विद्यार्थी तो नहीं हूं। लेकिन समझने की कोशिश कर रहा था। ये देखकर के मुझे लगा है कि मैं सरकार में तो सूचना करने वाला हूं। कि हमारी सरकार के सभी विभाग, उसके सारे अधिकारी जरा देखें कहां कहां इसका उपयोग हो सकता है। ताकि सरकार की नीतियों में भी इसका असर नजर आना चाहिए। मैं देश के स्टूडेंट्स को भी चाहुंगा कि पांच दिन तक ये exhibition चलने वाला है। मैं खासकर के टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टूडेंट्स से आग्रह करूंगा कि आप आइये, इसे देखिए, समझिए और कैसे दुनिया बदल रही है और आप एक बार देखेंगे तो अनेक चीजें नई आपके भी ध्यान में आएंगी। आप उसमे जोड़ सकते हैं और मैं इस टेलिकॉम सेक्टर के लोगों से भी कहना चाहुंगा मुझे खुशी होती थी, जिस-जिस स्टॉल में मैं गया हर कोई कहता था ये Indigenous है, आत्मनिर्भर है, ये हमने बनाया है।

सब बड़ गर्व से कहते थे। मुझे आनंद हुआ लेकिन मेरा दिमाग कुछ और चल रहा था मैं ये सोच रहा था जैसे कई प्रकार की कार आती हैं। हरेक की अपनी एक ब्रांड होती है। हरेक की अपनी विशेषता भी होती है। लेकिन उसमें जो स्पेयर पार्ट पहुंचाने वाले होते हैं। वो एमएसएमई सेक्टर के होते हैं और एक ही एमएसएमई के ये फैक्ट्री वाला छह प्रकार की गाड़ियों के स्पेयर पार्ट बनाता है, छोटे-मोटे जो भी सुधार करने करे वो देता है। मैं चाहता हूं कि आज हार्डवेयर भी आप लगा रहे ऐसा लगा मुझे आपकी बातों से। क्या एमएसएमई सेक्टर को इसके लिए जो हार्डवेयर की जरूरत है उसके छोटे-छोटे पूर्जे बनाने के लिए उनको काम दिया जाए। बहुत बड़ा इकोसिस्टम बनाया जाए। एक दम से मैं व्यापारी तो नहीं हूं। मुझे रुपयों पैसों से लेना देना नहीं है लेकिन मैं इतना समझता हूं कि कोस्ट एक दम कम हो जाएगी, एक दम कम हो जाएगी। हमारे एमएसएमई सेक्टर की ये ताकत है और वो सप्लाई आपको सिर्फ अपने यूनिकनेस के साथ उसमे सॉफ्टवेयर वगैरह जोड़कर के सर्विस देनी है और इसलिए मैं समझता हूं कि आप सब मिलकर के एक नया और मिलकर के करना पड़ेगा और तभी जाकर के इसकी कोस्ट हम नीचे ला सकते हैं। बहुत से काम हैं हम मिलकर के करते ही हैं।

तो मैं जरूर इस क्षेत्र के लोगों से भी कहुंगा। मैंने ये भी देखा है कि स्टार्टअप में जिन बच्चों ने काम किया है, जिन नौजवानों ने काम किया है। ज्यादातर इस क्षेत्र में उन्हीं स्टार्टप को ऑन कर करके उसको स्किलअप किया गया है। मैं स्टार्टअप वाले साथियों को भी कहता हूं। कि आपके लिए भी इस क्षेत्र में कितनी सेवाएं अधिकतम आप दे सकते हैं। कितनी user friendly व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं। आखिरकार इसका फायदा यही है। लेकिन एक और चीज मैं चाहुंगा। ये भी आपका जो एसोशिएसन है वो मिलकर के एक मूवमेंट चला सकता है क्या? Atleast हिन्दुस्तान के सभी district headquarter में ये 5जी जीवन में कैसे उपयोगी हो सकता है। उसके लोगों को एजुकेट करने वाले exhibition उसकी व्यवस्था हो सकती है क्या? मेरा अनुभव है छोटा सा उदाहरण बताता हूं। हमारे देश में 24 घंटे बिजली ये सपना था। मैं गुजरात में जब था तो मैंने एक योजना बनाई ज्योतिग्राम योजना और मेरा सपना था कि मैं गुजरात के हर घर में 24x7 बिजली दूंगा। अब मेरे सारे अफसर कहते थे शायद संभव ही नहीं है, ये तो हम कर ही नहीं सकते हैं। तो मैंने एक सिम्पल से सॉल्यूशन दिया था। मैंने कहा हम agriculture feeder अलग करते हैं, domestic feeder अलग करते हैं और फिर उस काम को किया और एक-एक जिले को पकड़कर के काम पूरा करता था। बाकि जगह पर चलता था लेकिन एक काम पूरा था।

फिर उस जिले का बड़ा समिट करता था। ढाई-तीन लाख लोग आते थे क्योंकि 24 घंटे बिजली मिलना एक बड़ा आनंद उत्सव का समय था वो 2003-04-05 का कालखंड था। लेकिन उसमें मैंने देखा, मैंने देशभर में बिजली से होने वाले काम, बिजली से चलने वाले यंत्र उनकी एक बहुत बड़ी प्रदर्शनी लगाई थी। जब लोगों ने, वरना लोगों को क्या लगता है। बिजली आई यानि रात को खाना खाने समय बिजली मिलेगी। बिजली आई मतलब टीवी देखने के लिए काम आ जायेगा। इसका कई प्रकार से उपयोग हो सकता है, उसका एजुकेशन भी जरूरी था। मैं ये 2003-04-05 की बात कर रहा हूं और जब वो सारा exhibition लगाया तो लोग टेलर भी सोचने लगा, मैं इलेक्ट्रिक मेरा equipment ,ऐसे लुंगा। कुम्हार भी सोचने लगा कि मैं ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल लुंगा।

माताएं-बहनें भी लगी किचन में हमारे इलेक्ट्रिक वाले इतनी इतनी चीजें आ सकती हैं। यानि एक बहुत बड़ा मार्केट खड़ा हुआ और बिजली का multiple utility जीवन के सामान्य जीवन में 5जी भी उतना जल्दी लोगों को लगेगा हां यार अब तो वीडियो बहुत जल्दी डाउनलोड हो जाता है। रील देखना है तो बहुत इंतजार नही करता है। फोन कट नहीं होता है। साफ-सुथरी वीडियों कांन्फ्रेंस हो सकती है। फोन कॉल हो सकता है। इतने से सीमित नहीं है। ये जीवन को बदलने वाली व्यवस्था के रूप में आ रहा है और इसलिए मैं इस उद्योग जगत के मित्रों के association को कहुंगा कि आप स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हिन्दुस्तान के हर डिस्ट्रिक में जाकर के इसके कितने पहलु हैं और आप देखिए कि वो लोग उसमें value addition करेंगे।

तो एक आपके लिए सेवा का काम भी हो जायेगा और मैं चाहुंगा कि इस टेक्नोलॉजी जीवन में सिर्फ बातचीत करने के लिए या कोई वीडियो देखने के लिए सीमित नहीं रहनी चाहिए। ये पूरी तरह एक क्रांति लाने के लिए उपयोग होना चाहिए और हमें 130 करोड़ दिशवासियों तक एक बार पहुंचना है बाद में तो वो पहुंचा देगा आप देख लीजिए, आपकों टाईम नहीं लगेगा। अभी मैंने ड्रोन पॉलिसी अभी-अभी लाया था। आज कई क्षेत्रों में मैं देख रहा हूं। वो ड्रोन से अपना दवाईयां छिड़काव का काम शुरू कर दिया उन्होंने। ड्रोन चलाना सिख लिया है और इसलिए मैं समझता हूं कि हमें इन व्यवस्थाओं की तरफ जाना चाहिए।

और साथियों,

आने वाले समय में देश निरंतर ऐसी technologies का नेतृत्व करेगा, जो भारत में जन्मेंगी, जो भारत को ग्लोबल लीडर बनाएँगी। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं! एक बार फिर सभी देशवासियों को शक्ति उपासना के पावन पर्व पर शक्ति का एक बहुत बड़ा माध्यम 5 जी लॉन्च होने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!