This is a decisive moment for West Bengal’s young generation. You hold the key to transforming the future of Bengal: PM in Alipurduar
From the land of Sindoor Khela, India showcased its strength through Operation Sindoor: PM Modi in West Bengal
TMC deliberately deny these benefits to Bengal’s poor, SC/ST/OBC communities, and tribal populations: PM’s strike against the TMC governance
The voice of Bengal is loud and clear: Banglar chitkar, lagbe na nirmam shorkar! (Bengal’s cry: We reject a ruthless government!): PM Modi
A BJP-NDA government would bring development, security, and justice to every citizen: PM Modi’s reassurance in Bengal
TMC’s brutal governance has led to violence, unemployment, and corruption: PM while addressing Alipurduar

भारत माता की जय! जय जोहार
नॉमोश्कार।
बोरोरा आमार प्रोणाम नेबेन, छोटोरा भालोबाशा !
आप इतनी विशाल संख्या में यहां हमें आशीर्वाद देने आए हैं…मैं हृदय से बंगाल की जनता का अभिनंदन करता हूं। आज एवरेस्ट डे भी है। आज के दिन तेनजिंग नॉर्गे जी ने एवरेस्ट पर अपना परचम लहराया था। उनके सम्मान में हम भी अपना तिरंगा फहराएंगे। और आज ही महान स्वतंत्रता सेनानी रामानंद चटर्जी की जयंती भी है। ये महान संतानें, हमें प्रेरित करती हैं…बड़े संकल्पों की सिद्धि के लिए हौसला देती हैं।

साथियों,
21वीं सदी में भारत नए सामर्थ्य के साथ समृद्धि की नई गाथा लिख रहा है। आज देश का हर नागरिक…भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जुटा है दिन रात जुटा हुआ है। और विकसित भारत बनाने के लिए पश्चिम बंगाल का विकसित होना बहुत ज़रूरी है। इसलिए... पश्चिम बंगाल को भी नई ऊर्जा के साथ जुटना है। बंगाल को फिर उसी भूमिका में आना होगा, जो कभी यहां की पहचान थी। इसके लिए ज़रूरी है कि पश्चिम बंगाल फिर से नॉलेज का...ज्ञान-विज्ञान का केंद्र बने। बंगाल- मेक इन इंडिया का एक बहुत बड़ा सेंटर बने। बंगाल, देश में पोर्ट लेड डवलपमेंट को गति दे। बंगाल अपनी विरासत पर गर्व करते हुए..उसे संरक्षित करते हुए तेज गति से आगे बढ़े।

साथियों,
केंद्र की भाजपा सरकार...इसी संकल्प के साथ काम कर रही है। भाजपा, पूर्वोदय की नीति पर चल रही है। बीते दशक में बीजेपी सरकार ने यहां के विकास के लिए हजारों करोड़ का निवेश किया है। अब से कुछ देर पहले यहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का शुभारंभ भी हुआ है। केंद्र सरकार के प्रयासों से ही..कल्याणी एम्स बना है। न्यू अलीपुरद्वार और न्यू जलपाईगुड़ी जैसे रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। बंगाल की व्यापारिक गतिविधियों को उत्तर भारत से जोड़ने के लिए.....डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहा है। कोलकाता मेट्रो का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है। ऐेसे अनेक प्रोजेक्ट हैं जो भारत सरकार यहां पूरे करवाने का प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार ईमानदारी से सबका साथ सबका विकास के मंत्र को लेकर बंगाल की प्रगति के लिए समर्पित है।
क्योंकि-
बांग्लार उदय तबेई,
विकशित भारोतेर जॉय!

साथियों,
ये समय पश्चिम बंगाल के लिए बहुत अहम है। ऐसे में, पश्चिम बंगाल के हर नौजवान पर आप सब पर बहुत बड़ा दायित्व है। आप सबने मिलकर के बंगाल का भविष्य तय करना है। आज पश्चिम बंगाल एक साथ कई संकटों से घिरा हुआ है। एक संकट समाज में फैली हिंसा और अराजकता का है। दूसरा संकट- माताओं-बहनों की असुरक्षा का है, उन पर हो रहे जघन्य अपराधों का है। तीसरा संकट- नौजवानों में फैल रही घोर निराशा का है, बेतहाशा बेरोजगारी का है। चौथा संकट, घनघोर करप्शन का है, यहां के सिस्टम पर लगातार कम होते जन विश्वास का है। और पांचवां संकट, गरीबों का हक छीनने वाली सत्ताधारी पार्टी की स्वार्थी राजनीति का है।

साथियों,
यहां मुर्शीदाबाद में जो कुछ हुआ...मालदा में जो कुछ हुआ… वो यहां की सरकार की निर्ममता का उदाहरण हैं। दंगों में गरीब माताओं-बहनों की जीवनभर की पूंजी राख कर दी गई। तुष्टीकरण के नाम पर गुंडागर्दी को खुली छूट दे दी गई है। जब सरकार चलाने वाले एक पार्टी के लोग, विधायक, कॉर्पोरेटर ही लोगों के घरों को चिन्हित करके जलाते हैं… और पुलिस तमाशा देखती है… तो उस भयावह स्थिति की कल्पना की जा सकती है। मैं बंगाल की भद्र जनता से पूछता हूं...क्या सरकारें ऐसे चलती हैं? ऐई भाबे शोरकार चले की ?

साथियों,
बंगाल की जनता पर हो रहे इन अत्याचारों से यहां की निर्मम सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां बात-बात पर कोर्ट को दखल देना पड़ता है। बिना कोर्ट के बीच में आए, कोई भी मामला सुलझता ही नहीं है। बंगाल की जनता को अब टीएमसी सरकार के सिस्टम पर भरोसा नहीं है। यहां की जनता के पास अब सिर्फ कोर्ट का आसरा ही है। इसलिए पूरा बंगाल कह रहा है---
बंगाल में मची चीख-पुकार...
नहीं चाहिए निर्मम सरकार
बांग्लार चीत्कार
लागबे ना निर्मम शोरकार

साथियों,
भ्रष्टाचार का सबसे बुरा असर नौजवानों पर पड़ता है, गरीब और मिडिल क्लास परिवारों पर होता है। भ्रष्टाचार कैसे चारों तरफ बर्बादी लाता है, ये हमने टीचर भर्ती घोटाले में देखा है। टीएमसी सरकार ने अपने शासनकाल में हज़ारों टीचर्स का फ्यूचर बर्बाद कर दिया है। उनके परिवारों को तबाह कर दिया, उनके बच्चों को असहाय छोड़ दिया। टीएमसी के घोटालेबाज़ों ने सैकड़ों गरीब परिवार के बेटे-बेटियों को अंधकार में धकेल दिया है। ये सिर्फ कुछ हज़ार टीचर्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है… बल्कि पश्चिम बंगाल के पूरे एजुकेशन सिस्टम को बर्बाद किया जा रहा है। टीचर्स के अभाव में लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर है। इतना बड़ा पाप टीएमसी के नेताओं ने किया है। हद तो ये है कि ये लोग आज भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। उलटा देश की अदालत को न्यायपालिका को, कोर्ट को दोषी ठहराते हैं।

साथियों,
टीएमसी ने चाय बगान में काम करने वाले साथियों को भी नहीं छोड़ा है। यहां सरकार की कुनीतियों के कारण, टी गार्डन लगातार बंद होते जा रहे हैं...मजदूरों के हाथ से काम निकलता जा रहा है। यहां PF को लेकर जो कुछ भी हुआ है, वो बहुत शर्मनाक है। ये गरीब मेहनतकश लोगों की कमाई पर डाका डाला जा रहा है। TMC सरकार इसके दोषी लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। और मैं बंगाल के भाई-बहन आपको विश्वास दिलाने आया हूं कि भाजपा ये नहीं होने देगी।

साथियों,
राजनीति अपनी जगह पर है...लेकिन गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और महिलाओं से TMC क्यों दुश्मनी निकाल रही है? पश्चिम बंगाल के गरीब, SC/ST/OBC के लिए जो भी योजनाएं देश में चल रही हैं... उनमें से बहुत सारी योजनाएं यहां लागू ही नहीं होने दी जा रही है। पूरे देश में करोड़ों लोगों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल चुका है। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इसका फायदा पश्चिम बंगाल के मेरे भाइयो-बहनों को नहीं मिल रहा है। पश्चिम बंगााल का कोई साथी अगर दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई गया है...उसको वहां मुफ्त इलाज नहीं मिल पाता है। क्योंकि निर्मम सरकार ने बंगाल के अपने लोगों को आयुष्मान कार्ड देने ही नही दिया। आज देशभर में 70 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। मैं तो चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल में भी 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिले। लेकिन टीएमसी सरकार ये नहीं करने दे रही है। केंद्र की बीजेपी सरकार, देशभर में गरीब परिवारों को पक्के घर बनाकर दे रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल में लाखों परिवारों का घर नहीं बन पा रहा है। क्योंकि टीएमसी के लोग इसमें कट-कमीशन की मांग कर रहे हैं। आखिर TMC सरकार आप लोगों को लेकर इतनी निर्मम क्यों हैं?

साथियों,
यहां की निर्मम सरकार के जितने उदाहरण दूं...वो कम हैं। पश्चिम बंगाल में बहुत बड़ी संख्या में हमारे विश्वकर्मा भाई-बहन है। ये लोग हाथ के हुनर से अनेक प्रकार के काम करते हैं। इनके लिए पहली बार भाजपा सरकार विश्वकर्मा योजना लाई है। इसके तहत देश के लाखों लोगों को ट्रेनिंग मिली है, पैसा मिला है, नए टूल मिले हैं, आसान ऋण मिला है। लेकिन पश्चिम बंगाल में 8 लाख एप्लीकेशन अभी लटकी पडी है। निर्मम सरकार उसपर बैठ गई है क्योंकि टीएममसी सरकार इस योजना को भी लागू नहीं कर रही है।

साथियों,
टीएमसी सरकार की मेरे आदिवासी भाई-बहनों से भी दुश्मनी कुछ कम नहीं है। देश में पहली बार जनजातियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना बनाई गई है। पश्चिम बंगाल में बहुत बड़ा आदिवासी समाज है। TMC सरकार, गरीब आदिवासियों का विकास भी नहीं होने दे रही है। उसने पीएम जनमन योजना को यहां लागू नहीं किया। टीएमसी हमारे आदिवासी समाज को भी वंचित ही रखना चाहती है।

साथियों,
TMC को आदिवासी समाज के सम्मान की परवाह नहीं है। 2022 में जब NDA ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया,
तो सबसे पहले विरोध करने वाली पार्टी TMC थी। बंगाल के आदिवासी इलाकों की उपेक्षा भी यही दिखाती है... कि इन्हें आदिवासी समाज से टीएमसी वालों कोई लगाव नहीं है, कोई लेनादेना नहीं है।

साथियों,
कुछ दिन पहले दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बहुत महत्वपूर्ण बैठक हुई। ये एक अहम मंच होता है, जहां देशभर के मुख्यमंत्री मिलकर विकास पर चर्चा करते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि इस बार बंगाल सरकार इस बैठक में मौजूद ही नहीं रही। दूसरे गैर-भाजपा शासित राज्य आए, सभी दल के नेता आए। हमने साथ बैठकर चर्चा की। लेकिन TMC को तो सिर्फ और सिर्फ 24 घंटा पॉलिटिक्स करना है और कुछ करना ही नहीं है। पश्चिम बंगाल का विकास, देश की प्रगति...उनकी प्राथमिकता में है ही नहीं।

साथियों,
केंद्र सरकार की जिन योजनाओं को यहां लागू किया भी है, उनको पूरा नहीं किया जा रहा। पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत पश्चिम बंगाल के गांवों के लिए 4 हजार किलोमीटर की सड़कें स्वीकृत की गई हैं। इनको पिछले साल तक पूरा हो जाना था। चार हज़ार किलोमीटर तो छोड़िए...यहां चार सौ किलोमीटर सड़कें भी नहीं बन पाई हैं।

साथियों,
इंफ्रास्ट्रक्चर के काम से सुविधाएं भी बनती हैं, और रोजगार भी बनते हैं। लेकिन हालत ये है कि पश्चिम बंगाल में 16 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट यहां की सरकार ने अटकाए हुए हैं। ये 90 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट हैं। कहीं रेल लाइन आनी थी, रुकी पड़ी है कहीं मेट्रो बननी थी रुकी पड़ी है, कहीं हाईवे बनना था, बंद पड़ा है , कहीं अस्पताल बनना था..कोई पूछने वाला नहीं। ऐसे प्रोजेक्ट्स को ये टीएमसी ने लटका कर रखा है। ये पश्चिम बंगाल के आप लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा है।

साथियों,
आज जब सिंदूर खेला की इस धरती पर आया हूं...तो आतंकवाद को लेकर भारत के नए संकल्प की चर्चा स्वभाविक है। 22 अप्रैल को पहलगाम में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने जो बर्बरता की, उसके बाद पश्चिम बंगाल में भी बहुत गुस्सा था। आपके भीतर जो आक्रोश था...आपका जो गुस्सा था...उसको मैं भलीभांति समझता था। आतंकवादियों ने हमारी बहनों का सिंदूर मिटाने का दुस्साहस किया...हमारी सेना ने उनको सिंदूर की शक्ति का अहसास करा दिया... हमने आतंक के उन ठिकानों को तबाह किया...जिनकी पाकिस्तान ने कल्पना तक नहीं की थी।

साथियों,
आतंक को पालने वाले पाकिस्तान के पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी पॉजिटिव नहीं है। जबसे वो अस्तित्व में आया है...तबसे ही उसने सिर्फ आतंक को पाला है। 1947 में बंटवारे के बाद से ही उसने भारत पर आतंकी हमला किया। कुछ सालों के बाद, उसने यहां पड़ोस में...आज के बांग्लादेश में जो आतंक फैलाया...पाकिस्तान की सेनाओं ने जिस प्रकार बांग्लादेश में रेप किए, मर्डर किए....वो कोई भूल नहीं सकता। आतंक और नरसंहार...ये पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी expertise है। जब सीधा युद्ध लड़ा जाता है, तो उसकी हार तय होती है। उसका पराजय निश्चित होता है, उसको मुंह की खानी पड़ती है। यही कारण है कि – पाकिस्तान की सेना आतंकियों का सहारा लेती है। लेकिन पहलगाम हमले के बाद अब भारत ने दुनिया को बता दिया है...भारत पर अब आतंकी हमला हुआ...तो दुश्मन को उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। और पाकिस्तान समझ ले, तीन बार घर में घुसकर मारा है तुमको। हम शक्ति को पूजने वाले लोग हैं...हम महिषासुरमर्दिनी को पूजते हैं... बंगाल टाइगर की इस धरती से ये 140 करोड़ भारतीयों का ऐलान है...ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है।

साथियों,
पश्चिम बंगाल को, अब हिंसा की, तुष्टिकरण की, दंगों की, महिला अत्याचार की, घोटालों की राजनीति से मुक्ति चाहिए। अब पश्चिम बंगाल के सामने भाजपा का विकास मॉडल है। आज भाजपा, देश के कई राज्यों में सरकारें चला रही है। देश के लोग बार-बार भाजपा को अवसर दे रहे हैं। पड़ोस में असम हो..त्रिपुरा हो या फिर ओडिशा...यहां भाजपा सरकारें, तेजी से विकास कार्यों में जुटी हैं। मैं बंगाल के सभी भाजपा कार्यकर्ता साथियों से कहूंगा...हमें कमर कसकर तैयार रहना है। हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है...कि लोकतंत्र पर पश्चिम बंगाल की जनता के विश्वास को फिर से कैसे बहाल करें। हमें पश्चिम बंगाल के हर परिवार को सुरक्षा की, सुशासन की और समृद्धि की गारंटी देनी है। इसके लिए आने वाले दिनों में अपने प्रयासों को हमें और तेज़ करना होगा।

साथियों,
विकसित भारत बनाने के लिए, पश्चिम बंगाल का तेज़ विकास बहुत ज़रूरी है। हमें पश्चिम बंगाल को उसका पुराना गौरव लौटाना है। ये हम सभी मिलकर करेंगे...और करके रहेंगे।
एक बार फिर आप सभी को इतनी बड़ी संख्या में यहां आने के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं!
मेरे साथ तिरंगा ऊंचा कर के बोलिए...
भारत माता की...

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भारत माता की...

भारत माता की...

बहुत-बहुत धन्यवाद

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Prime Minister condoles the demise of former Suriname President
March 31, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, condoled the sudden demise of former President of Suriname, Mr Chandrikapersad Santokhi ji. The Prime Minister stated that this is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora. Recalling his many meetings with the late leader, Shri Modi noted that Santokhi Ji’s tireless service for Suriname and his efforts in strengthening India-Suriname relations were clearly reflected in their interactions. He also highlighted Santokhi Ji’s special fondness for Indian culture, noting that he won several hearts when he took oath in Sanskrit.

The Prime Minister posted on X:

“Deeply shocked and saddened by the sudden demise of my friend and the former President of Suriname, Mr. Chandrikapersad Santokhi Ji. This is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora.

I fondly recall my many meetings with him. His tireless service for Suriname and his efforts in strengthening India-Suriname relations were clearly reflected in our interactions. He had a special fondness for Indian culture. He won several hearts when he took oath in Sanskrit.

I extend my heartfelt condolences to his family and the people of Suriname in this hour of grief. Om Shanti.

Sharing some glimpses from our various interactions…”