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PM Modi launches e-NAM - the e-trading platform for the National Agriculture Market
e-NAM initiative to be benefit farmers, usher in transparency in agriculture sector
e-NAM initiative a turning point in the history of agriculture sector, says Prime Minister Modi
Agriculture sector has to be seen holistically and that's when maximum benefit for the farmer can be ensured: PM

मैं देश के किसानों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बधाई देता हूं कि इस प्रयास से किसानों की अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा परिवर्तन आने वाला है। आज डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की 125वीं जयंती है और मैंने करीब 1 महीने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि ई NAM का प्रारंभ हम डॉ. बाबा साहेब की जयंती पर करेंगे और मुझे खुशी है कि आज समय सीमा में काम प्रारंभ हो रहा है। राधामोहन सिंह जी कह रहे थे इसको हम औऱ जल्दी भी कर सकते हैं लेकिन ये काम राज्यों के सहयोग के साथ जुड़ा हुआ है। अभी भी देश के कुछ राज्य ऐसे हैं कि जहां मंडी का कोई क़ानून ही नहीं है।

अब किसानों के लिए सुनते तो बहुत हैं लेकिन ऐसे भी राज्य हैं आज भी इस देश में जहां किसानों के लिए मंडी के लिए कोई नीति निर्धारण कानून नहीं है। उन राज्यों में किसानों का exploitation कितना हो सकता है, इसका आप अंदाज कर सकते हैं। मैं नाम नहीं देना चाहता हूं राज्यों का क्योंकि आजकल ऐसे विषय 24 घंटे विवादों में फंस जाते हैं तो मैं उससे बचना चाहता हूं लेकिन ऐसे सभी राज्यों से मेरा आग्रह होगा कि वे अपने यहां किसान मंडी कानून बनाएं। उसी प्रकार से जिन राज्यों में कानून है। उसमें भी अब नई Technology आई है, काफी व्यवस्थाएं पलटी हैं तो उसके अनुरूप कानून में सुधार करना आवश्यक है। मैं आशा करता हूं कि वे राज्य भी अपने-अपने यहां जो existing कानून हैं उसमें भारत सरकार ने जो सुझाव दिए हैं उसके अनुसार अगर amendment कर देंगे तो उन राज्यों में भी ई NAM का लाभ किसान को प्राप्त होगा और इसलिए मैं इन सभी राज्यों से आग्रह करता हूं कि इसको प्राथमिकता दें।

वैसे मुझे लगता है कि शायद आग्रह मुझे अब नहीं करना पड़ेगा क्योंकि जैसे ही ये 21 मंडियों की खबर आना शुरू हो जाएगा तो नीचे से ही pressure इतना पैदा होगा कि हर राज्य को लगेगा कि भई मेरा किसान तो रह गया चलो मैं भी इसमें आ जाऊं ताकि मेरे राज्य के किसान को लाभ मिले। हमारे देश में वर्षों से किसी न किसी कारण से कुछ नियम न रहें। एक राज्य में जो कृषि उत्पादन होता था वो दूसरे राज्य में ले नहीं जा सकते थे, ये भी बंधन रहते थे। कभी कानूनी तौर पर रहते थे, कभी गैर कानूनी तौर पर रहते थे क्योंकि लगता था कि भई अगर ये चला गया तो राज्य की economy को क्या होगा, राज्य की आवश्यकताओं का क्या होगा तो ये चलता रहता था और उसके कारण मैं नहीं मानता हूं, मैं इसको कोई बहुत बड़ा गुनाह के रूप में नहीं देखता हूं।

वहां की सरकारों को practical problem रहता था कि भई ये चीज मेरे यहां उत्पादन होती है। मेरे यहां से बाहर चली गई तो मेरे यहां तो लोगों को कुछ मिलेगा ही नहीं तो ये उसकी चिंता बड़ी स्वाभाविक थी लेकिन उसका परिणाम ये होता था कि किसान को protection नहीं मिलता था। किसान के लिए मजबूरी हो जाती थी कि अपने 12-15-20-25 किलोमीटर के area में जो market है, वो जो दाम तय करता था। उसको उसी दाम पर बेचना पड़ता था और उसी से अपनी रोजी-रोटी कमानी पड़ती थी। किसान की समस्या ये भी रहती थी कि उसको कोई choice नहीं रहता था। एक बार घर से बैलगाड़ी में माल लेकर गया मंडी में और मंडी वालों को लगा कि आज दाम गिरा दो। अब वो बेचारा सोचता है कि भई अब मैं वापस इसको कहां ले जाऊंगा, 25 किलोमीटर कहां उठाकर ले जाऊंगा तो वो मजबूरन उनके हाथ-पैर जोड़कर कहता था चलिए जी ले लीजिए, 5 रुपए कम दे दीजिए, ले लीजिए मैं कहाँ ले जाऊँगा । ये हाल किसान का हमारे यहां market में रहा।

ये योजना ऐसी है कि जिस योजना से किसान का तो भरपूर फायदा है लेकिन ये ऐसी योजना नहीं है जो सिर्फ किसान का फायदा करती है। ऐसी व्यवस्था है, जिस व्यवस्था की तरफ जो थोक व्यापारी है, उनकी भी सुविधा बढ़ने वाली है। इतना ही नहीं ये ऐसी योजना है, जिससे उपभोक्ता को भी उतना ही फायदा होने वाला है। यानि ऐसी market व्यवस्था बहुत rare होती है कि जिसमें उपभोक्ता को भी फायदा हो, consumer को भी फायदा हो, बिचौलिए जो बाजार व्यापार लेकर के बैठे हैं, माल लेते हैं और बेचते हैं, उनको भी फायदा हो और किसान को भी फायदा हो। होता क्या है आज दुर्भाग्य से हमारे देश में कृषि उत्पादन का real time data अभी भी नहीं होता है। कभी हमें लगे कि फलां राज्य में गेंहू की जरूरत है तो सरकार सोचती है अच्छा भई क्या करेंगे, इनको गेंहू की जरूरत है लेकिन उसे पता नहीं होता कि दूसरे राज्य में गेहूं surplus पड़े हैं।

कभी गेंहू surplus हैं और वहां पहुंचाने हैं लेकिन उस समय ट्रेन की व्यवस्था नहीं मिलती माल ले जाने के लिए और वहां consumer परेशान रहता है, यहां किसान परेशान होता है, माल बेचना है। ये क्यों... वो जो structure ऐसा बना हुआ था कि जिस structure में वो बंध गया था, उसके बाहर नहीं जा पाता था। आज ई NAM के कारण। अभी तो प्रारंभ में 25 कृषि उत्पादन चीजें इस ई NAM पर बिकेंगी, सौदा होगा और 21 मंडी में होगी लेकिन बहुत ही निकट भविष्य में शायद 250 तक तो पहुंच जाएगी क्योंकि कुछ राज्यों ने कानून में जो सुधार करना चाहिए, वो कर दिया है। Technology के लिए ये कोई बड़ा मुश्किल काम नहीं है। वहां एक लैब बनेगी, उस लैब के कारण quality of agro product ये तय होगा। अब व्यापारी हाथ में पकड़कर के तय करेगा, नहीं यार तेरा माल तो ठीक नहीं है और किसान कहेगा नहीं-नहीं साहब बहुत ठीक है पहले जैसा ही है और आखिरकार उस बेचारे को लगता था कि चलो बेच दो। आज laboratory कहेगी कि तुम्हारा जो product है A grade का है, B grade का है, C grade का है औऱ वो नेशनली certified मान्यता होगी उसको।

अगर मान लीजिए बंगाल से चावल खरीदना है और केरल को चावल की जरूरत है तो बंगाल का किसान online जाएगा और देखेगा कि केरल की कौन सी मंडी है जहां पर चावल इस quality का चाहिए, इतना दाम मिलने की संभावना है तो वो online ही कहेगा कि भई मेरे पास इतना माल है और मेरे पास ये certificate और मेरे ये माल ऐसा है, बताइए आपको चाहिए और अगर केरल के व्यापारी को लगेगा कि भई 6 लोगों में ये ठीक है तो उससे सौदा करेगा और अपना माल मंगवा देगा। कुछ व्यापारी क्या करेंगे बंगाल से माल खरीदेंगे, खरीदने वाला केरल से होगा लेकिन उसको बंगाल में market मिल जाए तो वहीं पर उसको बेच देगा। मेरा कहना का तात्पर्य ये है कि इतनी transparency होगी इस व्यवस्था के कारण कि जिसके कारण हमारा किसान ये तय कर पाएगा और माल, अपना product बैलगाड़ी में चढ़ाने से पहले या ट्रैक्टर में चढ़ाने से पहले तय कर पाएगा कि मेरे product का क्या होगा।

पहले तो क्या होता था सारी मेहनत करके 25 किलोमीटर दूर मंडी में गए उसके बाद तय होता था भविष्य क्या है। आज अपने घर में, अपने मोबइल फोन पर वो तय कर सकता है कि मैं कहां जाऊं, थोड़ा मैं मानता हूं हमारे देश का सामान्य से सामान्य व्यक्ति शायद वो साक्षर न हो लेकिन बुद्धिमान होता है। जैसे ही उसको पता चलेगा, वो monitor करेगा कि मंडी का trend क्या है, तीन दिन देखेगा बराबर और फिर trend के अनुसार तय करेगा कि हां अब लगता है कि market पक गया है तो तुरंत अंदर enter कर जाएगा और अपने माल बेचेगा। आज किसान निर्णायक होगा, किसान निर्णायक होगा। जो मंडी में बैठे हुए व्यापारी हैं, उन व्यापारियों के लिए भी ये सुविधाजनक होगा क्योंकि उसको लगता है कि भई जो जहां से पहले मैं खरीदता था तो वहां तो इस बार ये चावल पैदा ही नहीं हुई है तो सालभर क्या करूंगा, मैं तो चावल की व्यापारी हूं लेकिन अब उसको बैठे रहना नहीं पड़ेगा, वो हिंदुस्तान के किसी भी कोने से अपनी आवश्यकता के अनुसार चावल का ऑर्डर देकर के दूसरे व्यापारी से वो ले सकता है, दूसरे किसान से भी वो ले सकता है, अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है।

Consumer भी देख सकता है कि किस मंडी में किस रूप से बाजार चल रहा है और इसलिए अपने यहां कोई locally ही exploit करने जाता है तो कहता है, झूठ बोल रहे हो मैंने देखा है ई NAM पर तुमने तो माल लिया है थोडा बहुत तो ले सकतो हो लेकिन इतना क्यों ले रहे हो। यानि उत्पादन का balance use इसके लिए भी ई NAM portal एक बहुत बड़ी सुविधा बनने वाला है और मैं मानता हूं किसान का जैसे स्वाभाव है। एक बार उसको विश्वास पड़ गया तो वो उस भरोसे पर आगे बढ़ने चालू कर जाएगा। बहुत तेज गति से ई NAM पर लोग आएंगे, transparency आएगी। इस market में आने के कारण भारत सरकार बड़ी आसानी से, राज्य सरकारें भी monitor कर सकती हैं कि कहां पर क्या उत्पादन है, कितना ज्यादा मात्रा में है। इससे ये भी पता चलेगा transportation system कैसी होनी चाहिए, godown का उपयोग कैसे होना चाहिए, इस godown में माल shift करना है या उस godown में, यानि हर चीज एक portal के माध्यम से हम वैज्ञानिक तरीके से कर सकते हैं और इसलिए मैं मानता हूं कि कृषि जगत का एक बहुत बड़ा आर्थिक दृष्टि से आज की घटना एक turning point है।

एक मोड़ पर ले जा रही है हमें, जो पहले से कभी हम इंतजार कर रहे थे या हमारे सामने संभावना नजर नहीं आ रही थी। एक सप्ताह के भीतर-भीतर ये भी पता चलेगा कि जब इतनी बड़ी मात्रा में बाजार खुल जाता है तो competition बहुत बड़ा जाती है। खरीदने वाला ज्यादा दाम देकर के अच्छी quality खऱीदने की कोशिश करेगा। बेचने वाला कम पैसे में किस जगह से माल मिलता है, वो खोजेगा तो दूर-सुदूर भी जिसको market नहीं मिलता था, उसके लिए market सामने से invitation भेजेगा कि भई देखो तुम वहां बैठे हो सिलीगुड़ी में लेकिन तुम्हारी चीज कोई लेता नहीं, मैं यहां बैठा हूं अहमदाबाद में, मैं लेने के लिए तैयार हूं। ये इतनी बड़ी संभावना, हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारे किसान को पहली बार ये तय करने का अवसर मिला है कि मेरे माल कैसे बिकेगा, कहां बिकेगा, कब बिकेगा, किस दाम से बिकेगा, ये फैसला अब हिंदुस्तान में किसान खुद करेगा।

अब वो किसी से आश्रित नहीं रहेगा, वो मोहताज नहीं रहेगा और जब ये पता औरों को चलेगा इतनी बड़ी competition शुरू हो गई है तो स्वाभाविक है कि बाकी राज्य जो अभी पीछे हैं, मुझे विश्वास है कि नीचे से ऐसा pressure पैदा होगा कि अब वो जल्दी कानून में भी सुधार करेंगे और ई NAM portal पर सारी मंडियां आएंगी और ये मेरा पूरा विश्वास है। मेरा आग्रह है और मैं मानता हूं कि कृषि को टुकड़ों में नहीं देखना चाहिए और इसलिए हमने हमारे मंत्रालय का नाम भी, इसके साथ किसान कल्याण जोड़ा है। हम उसको जब तक holistic approach नहीं होगा, हम किसानों की स्थिति में सुधार नहीं ला सकते हैं और holistic approach लेना है तो मान लीजिए जैसे आज solar revolution हो रहा है। किसान को तो लगता होगा कि ये तो कोई industry का काम चल रहा है, कोई उद्योगकारों का काम चल रहा है। कोई तो उसको समझाए ये solar revolution भी तेरे लिए है भाई।

अगर उसको पानी के लिए solar pump मिल गया, वो अपने ही खेत में solar panel लगा दिया तो उसको जो आज डीजल का खर्चा करना पड़ता है, नहीं करना पड़ेगा। आज solar revolution हो रहा है। जो बड़ा किसान हैं वो उच्च technology का उपयोग करता हैं। cutter लाते हैं, बाकी चीजें लाते हैं, वो बिजली से चलती हैं। जिस दिन उसको पता चलेगा, अब ये सारे जो साधन हैं, वो भी solar से चलने वाले आ गए हैं, उसका खर्चा कम हो जाएगा और साधन उसका सूर्य प्रकाश से चलने लग जाएगा। यानि जो technology का development हो रहा है। उसके साथ हमारे किसान की उपयोगी चीजों को कैसे जोड़ा जाए। अगर हमें ज्यादा उत्पादन करना है तो flood irrigation का जमाना चला गया है और अब ये विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि flood irrigation से कोई अच्छी खेती होती नहीं लेकिन किसान का स्वभाव है कि जब-जब खेत, जब तक खेत पानी से लबालब भरा न हो, सारे पौधे डूबे हुए नजर न आए तो उसको लगता है, पौधा भूखा मर रहा है, वो खुद बेचारा परेशान हो जाता है क्योंकि उसकी भावना जुड़ी हुई है, वो अपने आप को रात को सो नहीं सकता है कि यार जितना पानी चाहिए था, उतना नहीं है, वो परेशान हो जाता है लेकिन अगर उसको विज्ञान का पता हो per drop, more crop.

हमारे उत्पादनों को पानी में डुबोए रखने की जरूरत नहीं है। हम सालों से मानकर के आए कि गन्ने की खेती करनी हो तो भरपूर पानी चाहिए। अब धीरे-धीरे अनुभव आ गया कि sprinkler से गन्ने की खेती बहुत अच्छी हो सकती है और sprinkler से गन्ने की खेती करें तो सामान्य गन्ने में जो sugar contain होता है, उससे sprinkler या drip से किए हुए गन्ने में sugar contain ज्यादा होता है, उसमें से ज्यादा चीनी निकलती है तो किसान को दाम भी ज्यादा मिलता है और आपने देखा होगा flood irrigation से गन्ने का जो डंडा होता है उसकी size और sprinkler से हुआ उसकी size देखते ही पता चलता है कि कितना बड़ा फर्क आया है। अब किसान को समझना होगा और मैं मानता हूं कि ये बात उन तक पहुंचाई जा सकती है और इसलिए मेरा मिशन है per drop, more crop एक-एक बूंद पानी से हम समृद्धि पैदा कर सकते हैं, हम भविष्य पैदा कर सकते हैं।

कभी-कभी मैं किसानों के साथ बैठना का स्वभाव रखता था तो काफी बातें करता था, जब गुजरात में था। मैं उनको कहता था और मैं आज उसको दुबारा कहना चाहूंगा, मैं उनको कहता था, मान लीजिए आपका बच्चा बीमार है और 3 साल की आय़ु हो गई, 5 साल की आयु हो गई, 7 साल की आय़ु हो गई लेकिन न वजन बढ़ रहा है, न चेहरे पर मुस्कान आ रही है, ऐसे ही दुबला-पतला, ऐसे ही पड़ा रहता है। अब आप सोचिए कि आपके बच्चे का ये हाल है और आप सोचें कि एक बाल्टी भर दूध लेंगे, उसमें केसर, बादाम, पिस्ता सब डालेंगे और रोज बच्चे को इस दूध से नहलाएंगे, उसकी तबीयत पर कोई फर्क पड़ेगा क्या, पड़ेगा क्या, मेरे किसान भाई पड़ेगा क्या लेकिन एक चम्मच में थोड़ा-थोड़ा दूध लेकर के 100 ग्राम, 100 ग्राम उसको शाम तक पिला दो, फर्क पड़ेगा कि नहीं पड़ेगा। जो बच्चा का है, वो ही पौधे का है। जो स्वभाव बच्चे का है, वो ही स्वभाव पौधे का है।

पौधे को भी अगर पानी से नहला दोगे तो पौधा मजबूत होगा, ऐसा नहीं है। एक-एक चम्मच से एक-एक बूंद पानी पिलाओगे तो आप देखते ही देखते देखोगे कि पौधा कितना ताकतवर बन जाता है और इसलिए हमने... बातें छोटी होती हैं लेकिन उनकी ताकत बड़ी होती है। हमने देखा है कि हमारे किसान का सबसे बड़ा नुकसान किससे हो रहा है। वो जो देखता है उसमें विश्वास करता है, जो सुनता है उस पर किसान कभी विश्वास नहीं करता। एक प्रकार से अच्छी चीज भी है। वो जब तक खुद अपनी आंखों से नहीं देखता है, भरोसा नहीं करता है लेकिन उसके कारण उसका misguide ऐसा हो जाता है कि अगर वाले खेत में किसी किसान ने लाल डिब्बे वाली दवा डाली तो वो भी सोचता है कि लाल डिब्बे वाली होती है तो वो भी जाकर के लाल डिब्बे वाली ले आता है। अगर उसने देखा बगल वाला दो बोरी fertilizer डालता है तो वो भी दो बोरी डाल देता है और उसको तो ज्यादा वो रंग से ही जानता है लाल डिब्बे वाली दवा, काले डिब्बे वाली दवा, लंबे डिब्बे वाली दवा या छोटे डिब्बे वाली उसी से वो उसका कारोबार चलता है जी, उसना अपना ये विज्ञान develop किया है।

ये गलती क्यों होती है। उसे पता नहीं है कि वो जिस जमीन पर काम कर रहा है, उसकी प्रकृति कैसी है। ये धरा हमारी मां है, ये भूमि हमारी मां है, कहीं बीमार तो नहीं हो गई है, हमने ज्यादा तो इसका शोषण नहीं किया है, उसका भी कोई ख्याल रखा है कि नहीं रखा है, ज्यादा अनुभव आता है कि हम धरा के साथ क्या करते हैं, फसल के संदर्भ में धरा के साथ जो करना होता है, करते हैं। धरा की तबीयत, चिंतन करनी चाहिए, इस भूमि की चिंता करनी चाहिए, इस पर हमारा ध्यान नहीं होता है और अगर बीमार धरा हो, कितना ही अच्छा बीज बोएं, इच्छित परिणाम नहीं मिलता है और इसलिए हमारे कृषि जगत को बदलना है तो हमारी धरा की तबीयत और उसके लिए अब सरल उपाय है Soil health card, laboratory में धऱा की test करवानी चाहिए और उसमें जो guidelines दें, उस प्रकार का पालन करना चाहिए। वरना कुछ लोग होते हैं कि डॉक्टर के पास जाएं, तबीयत दिखाएं। डॉक्टर कहे डायबीटीज है लेकिन घर में आकर के बताते ही नहीं हैं कि डायबीटीज है क्योंकि मिठाई खाने का शौक होता है तो फिर वो laboratory काम नहीं आती है।

अगर laboratory ने कहा कि डायबीटीज है तो फिर मिठाई छोड़नी पड़ती है। उसी प्रकार से धरा को check करने के बाद पता चला कि ये बीमारियां हैं, उस फसल के लिए आपकी धरा ठीक नहीं है, वो fertilizer आपकी धरा के लिए ठीक नहीं है, वो दवाई आपकी धरा को बर्बाद कर देगी तो मेरा किसानों से प्रार्थना होगी कि उसमें जो सुझाव देते हैं, उन सुझाव को religiously follow करना चाहिए। देखिए विज्ञान की बड़ी ताकत होती है, विज्ञान की बड़ी ताकत होती है। इन चीजों को अगर हमने ढंग से कर लिया तो आप देखना... कभी-कभार मैंने देखा है, हमारे पंजाब, हरियाणा में, इधर पश्चिम उत्तर प्रदेश में वो पुरानी पद्धति फसल निकालने के बाद बाद में जो रह जाता है उसको मुझे हिंदी शब्द तो मालूम नहीं है, उसको जला देते हैं। अब हमें मालूम नहीं है ये मूल्यवान fertilizer है, उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उसी जमीन में दबा दीजिए, वो आपकी जमीन के लिए, वो खुराक बन जाएगा लेकिन जल्दबाजी होती है, दुबारा फसल के लिए काम करना है, कौन करेगा इसलिए डालते नहीं हैं।

मैं समझता हूं जिस चीज के लिए जो नियम हैं, प्रकृति ने बनाए हैं, उसका अगर हम थोड़ा सा पालन करें तो पर्यावरण का जो नुकसान हो रहा है और दिल्ली वाले चिल्लाते हैं कि धुँआ बहुत हो गया है, वो बंद भी हो जाएगा और मेरे किसान को ये फायदा  होगा। मुझे स्मरण है जो केले की खेती करते हैं। केला पकने के बाद, वो केले का जो पेड़ रह जाता है, उसको निकालने के लिए वो पैसे देते हैं लोगों को कि भाई उसको जरा आप साफ करके दे दो और पहले ये एक-एक एकड़ पर 15-20 हजार रुपए खेत खाली करने पर ये उनका खर्च होता था। बाद में उनके ध्यान में आय़ा कि ये तो most valuable है और आपको हैरानी होगी केला पकने के बाद वो जो खड़ा रह गया, बाकी बचा हुआ पुर्जा है, उसको आप कहीं गाड़ दें और वहां पर कोई पौधा लगा दें 90 दिन तक पानी की जरूरत नहीं पड़ती, उसी से पानी मिल जाता है, इतनी ताकत होती है उसमें। जब ये पता चला तो उन्होंने फिर से उसे फिर जमीन में गाड़ दिया और उनकी जमीन इतनी गीली होने लगी कि बीच में वो एक extra फसल करने लगे जो 60-70 दिन में पैदा होने वाली होगी, उस फसल का उपयोग करने लगे, उनकी income में पहले से डेढ़ गुना-ढ़ाई गुना तक फर्क होने लगा क्यों, उनको समझ आय़ा कि भई इसका उपयोग है।

हम अगर उन छोटे-छोटे प्रयाग हैं। हमारे किसान इसको समझ भी सकता है, उसको कैसे पहुंचाए, हम उसके उत्पादन की ओर बढ़ें। हमारे देश का एक बहुत बड़ा दुर्भाग्य है किसी न किसी कारण से टोडर मल ने जमीनों को नापने का बहुत बड़ा काम किया था। उसके बाद उसके प्रति बड़ी उदासीनता रखी गई। सरकारों में नियम था कि 30 साल में एक बार जमीन नापने का काम regular होना चाहिए लेकिन शायद पिछले 100-150 साल में ये परंपरा dilute हो गई और उसके कारण exact पता नहीं है जमीन की स्थिति का। किसान conscious है कोई जमीन ले न जाए इसलिए वो क्या है बाड़ करता है। नाप का ठिकाना नहीं, कागज पर exact नाप नहीं है तो बाड़ लगाता है, वो बाड़ लगाने में एक मीटर जमीन इसकी खराब होती है, एक मीटर जमीन दूसरी वाली खराब होती है। हर खेत के border पर दो मीटर जमीन खराब होना यानि पूरे देश में देखें हम तो लाखों square meter जमीन इसी में बर्बाद होती होगी।

अगर हम उसका रास्ता निकालें। आज देश को टिम्बर import करना पड़ता है। अगर हम हमारे border पर बाड़ करने के बजाए टिम्बर के पेड़ लगा दें। बेटी पैदा हो, उस दिन अगर पेड़ लगाया तो शादी करने का पूरा खर्चा एक पेड़ दे देगा। वो पेड़, बेटी बड़ी होगी उसके साथ-साथ बड़ा होगा और जब वो टिम्बर बेचोगे। आज हिंदुस्तान फर्नीचर के लिए टिम्बर दुनिया से import करता है, मेरा किसान अपने border पर, बाड़ पर ये काम कर सकता है आराम से कमा सकता है। उसके कारण जो waste of land है, वो हमारा बचा जाएगा। solar हम खेती के साथ solar बिजली पैदा कर-करके बेच सकते हैं। मैंने ऐसे किसान देखें हैं जो अपनी cooperative society बना रहे हैं और पड़ोस के किसान मिलकर के कोने पर बिजली पैदा कर रहे हैं और राज्य सराकारों को बेच रहे हैं, ये सब संभव है। मैं हैरान हूं दुनिया भर में honey का बहुत बड़ा market है, बहुत बड़ा market है और honey एक ऐसी चीज है शहद, जो सालों तक घर में रहे, जितना पुराना हो तो ज्यादा पैसा मिलता है और किसान अगर अपने खेत में साथ-साथ शहद का भी काम करें तो जो मधुमक्खी है वो भी फसल को ताकत देती है, वो एक जगह से दूसरी जगह पर बैठती हैं तो फसल को नई ताकत देती हैं। simple चीजें हैं, जब मैं कहता हूं double income संभव है, मेरे दिमाग में बहुत साफ है क्या-क्या प्रयोग करने से income double हो सकती है।

चाहे Fisheries का काम हो, milk production का काम हो, पशु का रखरखाव हो, इन सारी चीजों में से income बढ़ सकती है और हम आधुनिक वैज्ञानिक तरीक से खेती करना शुरू करें तो हम देश की economy को भी बहुत बड़ा बल दे सकते हैं। मेरे देश के किसानों ने एक बार तय किया कि अब देश का पेट भरने के लिए बाहर से अन्न नहीं आएगा, हिंदुस्तान के किसानों ने कर दिया है। आज Pulses हमें बाहर से लाना पड़ता है दलहन, क्यों न हमारे किसानों को संदेश जाए कि जहां पर पानी बहुत कम है, वहां और प्रयोग मत करिए, आप दलहन पर चले जाइए ताकि आपकी भी गारंटी होगी और भारत सरकार उसमें आपकी मदद करेगी और भारत को अब दलहन बाहर से नहीं लाना चाहिए दाल क्यों बाहर से लानी पड़े, मूंग क्यों बाहर से लानी पड़े, चना क्यों बाहर से लाना पड़े, उड़द क्यों बाहर से लाना पड़े। हम ये अपने संकल्प कर लें तो मैं नहीं मानता हूं इस देश को... और अभी गया था सऊदी अरबिया, उसके पहले मैं गया था यूएई, वहां के लोगों ने जो बात कही, मैं समझता हूं कि मेरे देश के किसान इसको भलीभांति समझें, वो कह रहे हैं कि हमारे पास तो बारिश ही नहीं है, हमारे पास खेती योग्य जमीन नहीं है, हमारी जनसंख्या बढ़ रही है, पूरे गल्फ की countries में, हम भविष्य में हमारा पेट भरने के लिए अनाज पर भारत पर ही depend करेंगे, हमें वहीं से import करना पड़ेगा।

आज भी हमारा सबसे ज्याजा अच्छा चावल उन्हीं देशों में जाता है। इसका मतलब ये हुआ अगर हम quality product की तरफ जाएंगे तो गल्फ का एक बहुत बड़ा market, agriculture product के लिए हमारा इंतजार करके बैठा है। वे ware house के लिए cold storage के लिए तैयार है, वो गारंटी के साथ माल खऱीदने के लिए तैयार है यानि भारत की कृषि भी एक global requirement के संदर्भ में उसे हम एक नया मोड़ दे सकते हैं, हम उसमें बदलाव ला सकते हैं और उस बदलाव लाने की दिशा में हमें प्रयास करना चाहिए। अभी इस बजट में एक बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय किया, उस निर्णय की चर्चा बहुत कम आई है क्योंकि कुछ चीजें ऐसी हैं, जिसे लोगों को समझते-समझते दो साल चले जाते हैं इसलिए वो बात शायद पब्लिक में आई ही नहीं।

भारत सरकार ने एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय़ किया कि Agro processing में हम 100 percent foreign direct investment को हम स्वागत करते हैं। अब कुछ लोगों का दिमाग शायद ऐसा है कि FDI का नाम आते ही उनको लगता है ये कुछ उद्योग वाला हो गया।

ये food processing की सारी process किसान को बहुत बड़ी ताकत देती है। अगर वो कोई ऐसी पैदावार करता है और उसका  technology solution से valuable addition होता है तो income बहुत बढ़ जाती है और उसके लिए पूंजी निवेश के लिए दुनिया से पैसे आते हैं तो किसान की ताकत बढ़ने वाली है। आप कच्चे आम बेचो तो कम पैसा आता है, पके हुए बेचो तो थोड़ा ज्यादा आता है। कच्चे आम बेचो लेकिन आचार बनाकर बेचो और पैसा आता है। आचार भी बढ़िया सी बोतल में pack करके बेचो तो और ज्यादा पैसा आता है और बोतल की advertisement कोई नट या नटी करती हो तो औऱ ज्यादा पैसा मिल जाता है। value addition कैसे होता है, food processing का value addition कैसे होता है और इसलिए अभी हमने कोका कोला कंपनी के साथ महाराष्ट्र government का एक agreement करवाया। मैंने इन सारी कंपनियों कहा है कि आप जो पेप्सी, कोका कोला ये सब पानी बेचते हो colorful होता है, tasty होता है लोगों को आदत हो गई है अरबों-खरबों का बाजार है। मैंने कहा मेरे देश के किसानों के लिए आप एक नियम बनाइए कि कम से कम 5 percent, कम से कम 5 percent natural fruit juice आप इस aerated water में mix करोगे।

आप देखिए एक तो जो पीता है उसको फायदा होगा, कम से कम 5 percent तो माल अच्छा जाएगा शरीर में लेकिन उसके कारण किसान जो फल पैदा करता है, उसको तुरंत market मिल जाएगा,  वरना संतरा कोई पैदा करेगा, एकाध दिन में तो संतरा खराब हो जाएगा लेकिन संतरे का जूस अगर उसमें मिलना शुरू हुआ तो संतरे को market मिलना शुरू हो जाएगा, Apple को market मिल जाएगा, केले को market मिल जाएगा और इसलिए वो चीजें जो हमारे किसान को ताकत दें, ऐसे कई initiative लिए हैं और उस initiative के परिणाम मैं कहता हूं कि आने वाले दिनों में किसानों का भविष्य उज्जवल बनाया जा सकता है, सोची-समझी व्यवस्था के तहत बनाया जाता है और अब ये मंडी के माध्यम से, ई NAM के माध्यम से जो प्रयास किया है इस ई NAM के माध्यम से, मैं विश्वास से कहता हूं कि मेरा किसान अब तय करेगा कि उसका माल कहां बिकेगा, कब बिकेगा, कितने दाम से बिकेगा इसका फैसला अब मेरा किसान करेगा और consumer को कभी कोई बोझ नहीं होगा, ये मेरा भरोसा है। consumer को कभी कोई मुसीबत नहीं होगी, ये मेरा पूरा भरोसा है। मैं देश के किसानों को आज 14 अप्रैल बाबा साहेब अंबेडकर की जन्म जयंती पर जिनका empowerment of poor people वाला हमेशा रहा था, मेरा किसान empower हो इसलिए एक महत्वपूर्ण project आज प्रारंभ हो रहा है, मैं कृषि मंत्रालय को मंत्री के विभाग के सभी साथियों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, मेरे देश के किसानों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। असम का आज नया वर्ष है, असम का नववर्ष है, उस बिहू के मौके पर भी मैं शुभकामनाएं देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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BJP govt has resolved that every poor's house should made food on the LPG in Jharkhand, 2 free cylinders are given to them: PM Modi #UjjwalaYojana
This is the BJP government, due to which the water schemes hanging for years in Jharkhand have been resumed: PM Mod in Barhi
PM Modi thanks the people of Karnataka for reposing faith in the BJP for stability and development #KarnatakaBypollsResult

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, सबको नमस्कार, मां छिन्नमस्तिके और मां भद्रकाली का मैं शीष झुका के वंदन करता हूं।

भाइयो-बहनो, इस धरती ने भगवान बिरसा मुंडा से लेकर जय प्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी तक अनेक राष्ट्रनायकों की तपस्या को बल दिया है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल तक यहां की धरती ने इन महानायकों को करीब से देखा है, इसी धरती ने देश को बाबू राम नारायण सिंह जैसा सेनानी भी दिया, जिन्होंने संविधान निर्माण में तो अपना योगदान दिया ही, एक देश एक विधान के लिए समर्पण भाव से काम किया। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर उन्होंने जम्मू कश्मीर में अलग प्रधान, अलग संविधान को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। मुझे खुशी है उनकी भावना के अनुरूप आज जम्मू कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू हो चुका है।

साथियो, हजारीबाग के ही बाबू राम नारायण सिंह उन गिने-चुने लोगों में से थे जिनको कांग्रेस का छल-कपट आजादी के समय ही उनको भलीभांति अंदाज लग गया था कि अब कांग्रेस किस दिशा में जा रही है, कैसा बर्बादी का रास्ता उसने चुन लिया है, वो उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने कांग्रेस की वोट बैंक की पॉलिटिक्स पर राजनीति के लिए राष्ट्रनीति को दांव पर लगाने के उनके तौर-तरीकों को चुनौती दी थी, सवाल उठाए थे, ललकारा था। छह-सात दशक पहले ही हजारीबाग के इस सपूत ने साफ कह दिया था कि कांग्रेस भारत में भ्रष्टाचार के दल-दल को जन्म देने वाली है, 70 साल पहले कहा था। उन जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व की हर बात आज हम सही होती हुई हमारी आंखों के सामने देख रहे हैं। भाइयो-बहनो, मैं देख रहा हूं जितने लोग सभा में हैं पूरे रास्ते में उतने ही लोग चल कर आ रहे हैं। इतना बड़ा विशाल जनसागर झारखंड की जनता का मिजाज क्या है इसके भलीभांति दर्शन कराता है। यहां के लोगों के दिल में विकास के प्रति कितना विश्वास है ये आज मैं इस जनसागर में देख रहा हूं और मुझे झारखंड में जहां-जहां जाना पड़ा, जहां-जहां जाने का मौका मिला, हर सभा पहले की सारी सभाओं के रिकॉर्ड तोड़ रही है, आज आपने पुरानी सभी सभाओं के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और आप सबने खड़े हो कर जो मुझे आशीर्वाद दिए, जो सम्मान दिया इसके लिए मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभारी हूं। साथियो, देश राजनीतिक स्थिरता को लेकर क्या सोच रहा है और इसके लिए भाजपा पर कितना विश्वास आज देश को है उसका उदाहरण आज ही देश के सामने आया है। साउथ में, दक्षिण भारत में कुछ लोग कहते हैं जहां भाजपा कमजोर है

आज ही कर्नाटक में उपचुनाव के परिणाम आ रहे हैं और इस चुनाव में कर्नाटक में वहां की जनता का द्रोह करने वालों का जनता ने जो मैंडेट दिया था उसको पिछले दरवाजे से छीन लेने वालों को कर्नाटक की जनता ने ऐसा करारा प्रहार किया, ऐसा करारा प्रहार किया है कि देश में इस प्रकार की राजनीति करने वालों को आज कर्नाटक के मतदाताओं ने लोकतांत्रिक तरीके से उनके मंसूबों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। आज जो उपचुनाव थे उसके नतीजों से ये तय होने वाला था कि भाजपा की सरकार बचेगी या जाएगी। जनता ने चुनाव में भाजपा को सरकार बनाने के लिए मैंडेट दिया था लेकिन कांग्रेस अपनी पुरानी आदतों के अनुसार पर्दे के पीछे खेल कर के भाजपा को सरकार बनाने नहीं दी थी, पिछले दरवाजे से चढ़ बैठे थे लेकिन आज जब उपचुनावों के नतीजे आ रहे हैं तो जनता ने जमकर के उनको सजा दी है, ज्यादातर सीटों पर भाजपा जीत हासिल कर रही है, बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। स्थिरता और विकास के लिए भारतीय जनता पार्टी पर एक बार फिर विश्वास जताने के लिए मैं कर्नाटक की जनता का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। और ये पंद्रह सीटें जिसका उपचुनाव चल रहा है, कई सीटें तो ऐसी हैं जहां पिछले 70 साल में भाजपा पहले कभी जीती नहीं थी, भाजपा के वेव में भी भाजपा नहीं जीती थी लेकिन जनता को गद्दारी करने वालों पर इतना गुस्सा आया, इतना गुस्सा आया कि जहां हम 70 साल में कहीं जीतते नहीं थे वहां भी जनता ने हमको जिता दिया, कमल खिला दिया। एक-दो सीटें तो ऐसी हैं जहां पर बीजेपी के सामान्य कार्यकर्ता, बिल्कुल बूथ का काम करने वाले छोटे कार्यकर्ता, उनको चुनाव में उतारा था और उन्होंने कांग्रेस के, जेडीएस के बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटा दी, पराजित कर दिया। ये जनता ने किया है, विश्वासघात पर जनता का गुस्सा खुद निकला है। ये तब हुआ है कांग्रेस ने वहां पूरा अपप्रचार किया लेकिन कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को सबक सिखाया है। साथियो, कर्नाटक में जो हुआ वो जनमत की भी जीत है, लोकतंत्र की भी जीत है।

कर्नाटक के चुनाव के दौरान वहां की जनता ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए अपना मत दिया था कर्नाटक के लोगों ने कांग्रेस और उसके साथियों की सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और विकास योजनाओं के साथ लापरवाही, भ्रष्टाचार, बेईमानी जनता ने पिछली सरकार के कारोबार में देखा था और इसलिए उन्होंने भाजपा को वोट देकर के पसंद किया था लेकिन कांग्रेस और उनके साथियों ने मिलकर इस जनमत को धोखा दे दिया, जनता की पीठ पर छुरा भोंक दिया, पर्दे के पीछे सांठ-गांठ करके रातों-रात कुर्सी पर चढ़ बैठे थे। जिस तरह से कांग्रेस ने पहले वहां धोखे से सरकार बनाई और फिर एक साल तक वो पूरा समय झगड़ा ही करते रहे, बैठ तो गए कोई और ना आ जाए इसके लिए तो जागृत रहे लेकिन जनता का भला कैसे हो ये उनके एजेंडे में ही नहीं आया। भाजपा को रोकने के लिए जिसको मुख्यमंत्री बनाया उसको भी सुबह-शाम बंदूक दिखाई जाती थी बहुमत की और दिल्ली के लिए ये करो, दिल्ली के लिए वो करो और वो बेचारे मुख्यमंत्री जनता जनार्दन के बीच आ कर के रोते थे आंसू बहाते थे, गिड़गिड़ाते थे। किसी को कोई किडनैप कर ले तो भी शायद जिसको किडनैप करते उसका इतना बुरा हाल नहीं करते जो उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री का कर दिया था। आज कांग्रेस के उन कारनामों का जवाब जनता जनार्दन ने कमल के बटन पर दबाकर के दे दिया है, अब आज कर्नाटक के लोगों ने ये सुनिश्चित कर दिया है कि अब कांग्रेस या जेडीएस वहां के लोगों के साथ विश्वासघात नहीं कर पाएंगे। ये पूरे देश के तमाम राज्यों के लिए संदेश है कि अगर कोई जनादेश के खिलाफ जाएगा, जनता से विश्वासघात करेगा, जनता के पीठ पर छुरा भोंकेगा तो पहला मौका मिलते ही जनता उसे पूरी सजा देगी। अब कर्नाटक में जोड़-तोड़ वाली नहीं, वहां की जनता ने आज मोहर लगाकर के एक स्थिर और मजबूत सरकार को नई ताकत दे दी है।

साथियो, क्रांग्रेस की सच्चाई को झारखंड के लोगों को भी याद रखना है, कांग्रेस कभी भी गठबंधन के भरोसे पर खरी नहीं उतरी है, ये अपने मतलब के लिए गठबंधन और जनादेश का उपयोग करती आई है फिर अपने हित के लिए अपने सहयोगियों को कठपुतली की तरह उपयोग करती है जिसका परिणाम ये होता है कि जनता को सही शासन नहीं मिलता है। अस्थिरता, अनिश्चितता, खरीद-बिक्री पूरा राज्य उसमें डूब जाता है, झारखंड में ऐसा ना हो, झारखंड में एक स्थिर और स्थाई सरकार बने ताकि पांच साल तक सिर्फ और सिर्फ विकास हो, गरीब का भला हो, माताओं-बहनों का कल्याण हो, नवजवानों का भविष्य बने यही काम हो। कर्नाटक के परिणामों को याद रखना बहुत जरूरी है और पूरे देश को और ये उठा-पटक की राजनीति करने वाले नेताओं को भी ये बहुत मजबूत संदेश है। कांग्रेस और उनके सहयोगियों के एक-एक उम्मीदवार को झारखंड में भी हराना जरूरी है। मैं फिर एक बार कर्नाटक की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।

भाइयो-बहनो, आप मुझे बताइए आज पूरी दुनिया में हिन्दुस्तान का डंका बज रहा है कि नहीं बज रहा है, पूरी ताकत से बज रहा है कि नहीं बज रहा है? देखिए इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं बड़ी ताकत से जवाब दे रही हैं, पुरुषों से ज्यादा उत्साह महिलाओं में नजर आ रहा है। बताइए आज पूरी दुनिया में हिंदुस्तान का डंका बज रहा है कि नहीं बज रहा है? अमेरिका में भारत-भारत हो रहा है कि नहीं हो रहा है, इंग्लैंड में होता है कि नहीं होता है, कैनेडा में होता है कि नहीं होता है, ऑस्ट्रेलिया में होता है कि नहीं होता है, दुबई में होता है कि नहीं होता है, चारों तरफ होता है कि नहीं होता है? क्या कारण है, क्या कारण है? ये पूरी दुनिया में हिंदुस्तान का जय जयकार है उसका कारण क्या है, क्या कारण है? गलत, झारखंड के मेरे भाइयो, आपका जवाब गलत है। ये मोदी के कारण नहीं है, ये मोदी के कारण नहीं है, ये आप के कारण है 130 करोड़ देशवासियों के कारण है क्योंकि आपने पूर्ण बहुमत वाली स्थिर और मजबूत सरकार बनाई है। हिंदुस्तान को आपने स्थिर और मजबूत सरकार दी वर्ना झारखंड में लोग लोकसभा के चुनाव में तो लोग कहते थे, कोई कहता था दो आएगी, कोई कहता था तीन आएगी, कोई कहता था पांच आएगी लेकिन जनता जनार्दन ने झारखंड पूरा का पूरा बीजेपी पर प्यार बरसा दिया और इसी के कारण दिल्ली में स्थिर और मजबूत सरकार बनी है और जब स्थिर व मजबूत सरकार बनती है तो दुनिया भी उस पर भरोसा करती है, दुनिया भी उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हो जाती है। आप मुझे बताइए जैसा दुनिया में हिंदुस्तान का जय जयकार हो रहा है, क्या वैसा ही जय जयकार झारखंड का पूरे हिंदुस्तान में होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? अगर झारखंड का जय जयकार करना है तो रांची में पूर्ण बहुमत वाली मजबूत भाजपा की सरकार बनाना बहुत जरूरी है अगर त्रिशंकु परिणाम आता है तो कर्नाटक की तरह तबाह करने वाले मैदान में उतर आते हैं। हम तय करें कि हम झारखंड को तबाह नहीं होने देंगे, हम झारखंड को बर्बाद नहीं होने देंगे और इसलिए कमल के फूल पर बटन दबाकर झारखंड को फिर एक बार मजबूती देंगे।

साथियो, ये कांग्रेस ही है जिसने भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर जो विवाद चल रहा था उसे अपनी वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए।  मैं आपके प्यार के लिए, आपके आशीर्वाद के लिए सर झुकाकर के आपको नमन करता हूं।

दशकों तक उन्होंने मामले को लटकाए रखा, विवाद चलने दिया ताकि उनकी वोट बैंक की खिचड़ी पकती रहे। भाइयो-बहनो, ये फैसला तब आया जब दिल्ली में भाजपा की मजबूत सरकार बनाई। भाइयो-बहनो, आजादी के समय से ही अलग झारखंड की मांग चल रही थी लेकिन कांग्रेस के राजनीतिक स्वार्थ के कारण दशकों तक ये मामला भी लटका रहा, ये भी झारखंड का जन्म भी तब हुआ जब दिल्ली में भाजपा की अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार आई। साथियो, दशकों तक देश में ये मांग उठती रही कि झारखंड और देश के करोड़ों ओबीसी परिवारों के हितों की सुरक्षा के लिए ओबीसी कमिशन को संवैधानिक दर्जा दिया जाए लेकिन कांग्रेस और उसके साथियों ने पिछड़ों के हितों को बचाने वाला ये काम ना किया ना होने दिया। ये काम भी तब हुआ जब दिल्ली में आपने मोदी की सरकार बनाई तब। सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को आरक्षण की मांग, नवजवान आंदोलन कर रहे थे, सवर्ण समाज में पैदा हुए थे लेकिन गरीबी के खिलाफ जूझते-जूझते थक चुके थे, निराशा की गर्त में सामान्य समाज का गरीब परिवार डूबता चला जा रहा था, इन गरीब परिवारों के बच्चे आरक्षण मांग रहे थे इनको राजनीति करने में ही मजा आता था उन्होंने सवर्ण समाज के गरीबों की कभी नहीं सुनी, उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, ये मोदी सरकार आई सामान्य जनता के गरीबों को दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी निर्णय कर लिया गया।

साथियो, जब भाजपा की सरकार होती है, चाहे वो दिल्ली में हो या झारखंड में आपकी सेवा के लिए ईमानदारी से काम करती है। देश के आदिवासियों की जिंदगी, पिछड़ों की जिंदगी और बेहतर हो, उनकी मुश्किलें कम हो, उनका मान-सम्मान और बढ़े इसके लिए हम दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन कांग्रेस हो, आरजेडी हो या फिर झारखंड मुक्तिमोर्चा, इनका इतिहास है आपसे विश्वासघात का, भ्रष्टाचार का, मैं आपको एक और उदाहरण देता हूं। साथियो, 2014 से पहले 8-9 सालों में आदिवासियों को जमीन के सिर्फ 19 हजार पट्टे ही मिल पाए थे जबकि भाजपा ने बीते पांच वर्ष में आदिवासियों को 60 हजार से अधिक जनजातीय परिवारों को जमीन के पट्टे दिला दिए। सोचिए आपसे जंगल और जमीन के नाम पर, अधिकार के नाम पर झूठ बोलने वाले इन लोगों की इस सच्चाई को इस चुनाव में आपने कमल पर बटन दबाकर के उजागर करना बहुत जरूरी है। भाइयो-बहनो, राजनीति के लिए कांग्रेस ने हमेशा से दो काम प्राथमिक रूप से किए, एक लुटाने का खेल, मौका मिले वहां लूटो, लूट सको उतना लूटो, खुद भी लूटो औरों को भी लूटने दो और उनको पता चले कि इसमें लूटना संभव नहीं है, इसमें लूट करने जाएंगे तो लोगों की नजर पड़ जाएगी तो उन्होंने ऐसी चीजों के लिए रास्ता खोजा लटकाने का, उनके दो ही रास्ते थे या तो लूटो नहीं लूट सकते तो लटकाओ। जब अहम कानून और परियोजनाओं की बात आती है तो ये उसे लटका देते हैं, क्यों, क्योंकि परियोजनाएं पूरी हो गईं, दशकों तक नहीं खींची तो इनकी दुकान कैसे चलेगी। साथियो, याद कीजिए मंगल डैम, कोडरमा-रांची रेल लाइन, टंडवा बिजली प्लांट अनगिनत ऐसी योजनाएं हैं जिसको लटका कर के ही वो माल खाने के रास्ते खोजते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज और राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र जैसे संस्थानों की मांग कब से हो रही थी लेकिन कांग्रेस ने इसके लिए क्या किया। एक तरफ इन्होंने आपके हित की परियोजनाओं को वोट के लिए विवादों में उलझाए रखा, दूसरी तरफ आपकी संपदा को लूटने के लिए षड्यंत्र रचे। झारखंड को इन्होंने अपनी पार्टी के लिए अपने नेताओं के खर्चे के लिए, अपने दोस्तों के लिए लुटवा दिया। आपके कोयले, आपके अभ्रक, आपकी संपदा पर इन लोगों ने अपने लिए महल खड़े कर दिए। इस लूट के लिए इन्होंने झारखंड में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दिया। स्वार्थ के लिए इन्होंने एक निर्दलीय तक को मुख्यमंत्री बना दिया ताकि हर किसी को अपनी मनमानी करने का मौका मिल जाए। उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है, आप भलीभांति जानते हैं।

साथियो, कांग्रेस और उसके साथियों को सिर्फ सत्ता का लोभ है इसलिए उनके पास ना तो कड़े और बड़े फैसले लेने का साहस है ना ही संवेदनशीलता है। जबकि भाजपा के लिए राष्ट्रहित सबसे ऊपर है, हमारे लिए सत्ता, ये सिर्फ और सिर्फ सेवा का माध्यम है। यही कारण है कि बीते पांच वर्ष में अभूतपूर्व काम हुए हैं। जिस झारखंड को कांग्रेस और उसके साथियों की उपेक्षा और गलत नीतियों ने नक्सलवाद की तरफ धकेला उसको भाजपा ने आज शांति और विकास की तरफ अग्रसर किया है। भाइयो और बहनो, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और वामपंथियों ने मिलकर कैसे देश के करोड़ों लोगों को धोखा दिया और कैसे भाजपा उन्हीं गरीबों की सेवा के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है, ये आप सब भली-भांति जानते हैं। मुझे कोई उदाहरण देने की जरूरत नहीं है लेकिन साथियो, देश के सौ से अधिक जिले ऐसे हैं जहां पर बिजली, पानी, घर, गैस, टीकाकरण जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन्हीं जिलों में गरीब माताओं की मृत्यु सबसे ज्यादा होती है, सबसे ज्यादा बच्चे बीमारी से मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। इन सौ में से झारखंड के कितने जिले थे शायद आपको पता भी नहीं होगा, बीस जिले। झारखंड के इन 20 जिलों को, गरीबों को, आदिवासियों को, पिछड़ों को कांग्रेस और उसके साथियों ने अपने नसीब पर छोड़ दिया था, अपने हाल पर छोड़ दिया था यानी एक प्रकार से पूरे झारखंड को उन्होंने विकास के लिए तड़पता हुआ छोड़ दिया था। एक तो पिछड़ा-पिछड़ा कहकर इन्होंने यहां के लोगों का, यहां पर काम करने वाले अफसरों का मनोबल तोड़ दिया, मानसिक रूप से उसको खत्म कर दिया। इन जिलों में चल रही योजनाओं पर कभी सही तरीके से ध्यान ही नहीं दिया गया, झारखंड के गरीब इनके लिए कभी मायने नहीं रखते थे, ऊपर से सरकार की तरफ से जो पैसा आता था उसमें भी ये लोग मिल-बांट कर अपने खेल कर लेते थे। जो राज्य प्राकृतिक संसाधनों के हिसाब से इतना संपन्न हो, जिसमें इतनी क्षमता हो उसे इन राजनीतिक दलों ने कभी ऊपर नहीं उठने दिया, यही इनकी राजनीति रही है लेकिन आपके इस सेवक की भाजपा की सोच अलग है। हम झारखंड के इन 20 जिलों में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं, हमने इन जिलों को पिछड़ा नहीं कहा हमने इसे आकांक्षी जिला कहा। आकांक्षी जिला कह कर पहले उनका तो मनोबल ठीक किया, आकांक्षी का सीधा-सीधा मतलब होता है जहां के लोगों में विकास की ललक हो, जहां के लोग चाहते हों कि वहां जल्द से जल्द मुसीबतों से मुक्ति मिले, विकास का रास्ता तय हो।

साथियो, हमने इन जिलों में बेहतरीन अफसर तैनात किए हैं अब आपकी छोटी-छोटी दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। अब इन क्षेत्रों में मुफ्त गैस कनेक्शन से लेकर पांच लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा तक, मुफ्त बिजली कनेक्शन से लेकर घर-घर सफेद रोशनी वाले एलईडी बल्ब लगाने तक, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण से लेकर शौचालय बनाने तक हर स्तर पर तेजी से काम किया जा रहा है। झारखंड की भाजपा सरकार की मेहनत के कारण हजारीबाग, चतरा और साहिबगंज देश के 112 आकांक्षी जिलों में सबसे टॉप कर रहे हैं। मैं यहां के मुलाजिमों को बधाई देता हूं जो इस सपने को पूरा करने के काम में लगे हैं, झारखंड के बाकी जिलों में भी सराहनीय सुधार आ रहा है ये होता है जब आप नेक नियत के साथ सामान्यजन की आकांक्षाओं के लिए काम करते हैं, उनके सामर्थ्य पर विश्वास करते हैं लेकिन जब आप सत्ता के लिए झूठ बोलते हैं छल गढ़ते हैं, सिर्फ आलोचनाएं करते हैं, झूठे आरोप लगाते हैं तब वही स्थिति होती है जो 2014 से पहले थी। साथियो, दिल्ली और रांची में भाजपा की सरकारों ने झारखंड के विकास के लिए एक ईमानदार प्रयास किया है, ये भाजपा ही है जिसने इस क्षेत्र को रेलवे के नक्शे पर मजबूत किया है। कोडरमा, हजारीबाग, बर्काना, सिद्धवार सेक्शन तैयार और रांची तक पूरी लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। भाइयो-बहनो, हम यहां सिर्फ रेल-लाइन ही नहीं बना रहे बल्कि ट्रेन तेजी से चले, माल ढुलाई भी तेजी से हो इसके लिए ईस्टर्न फ्रिट कॉरिडोर पर काम चल रहा है। इससे ट्रेनों की गति कई गुना ज्यादा तेज होगी ही, आप दूध, फल, सब्जी भी शहरों की मंडी तक तेजी से पहुंचा पाएंगे, किसानों को लाभ होगा। साथियो, रेल लाइनों के साथ ही यहां के गांव-गांव में सड़क और बिजली की सुविधा देने का काम जिस तरह भाजपा सरकार ने किया है वो कांग्रेस और उसके साथी कभी सोच भी नहीं सकते, कर भी नहीं सकते हैं।

साथियो, ऐसे अनेक काम जो आज भाजपा की सरकारें कर रही हैं ये पहले भी हो सकते थे, पहले होते तो आज यहां उद्योगों के लिए रोजगार के लिए और ज्यादा बेहतरीन माहौल मिलता लेकिन कांग्रेस आरजेडी और जेएमएम ऐसे दलों की नियत में खोट था इसलिए नीतियां भी खोखली बनाई गईं। ये लोगो सोचते हैं कि एक बार अगर यहां का गरीब सशक्त हो गया, यहां के पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों के पास पैसा आ गया, पढ़ाई और कमाई के संसाधन आ गए तो यहां के लोग उन्हें पूछना बंद कर देंगे। साथियो, अगर यहां की नदियों पर डैम बन गए, किसानों के खेतों तक नहरें पहुंच गईं तो किसान इनको क्यों पूछेगा इसलिए ये भाजपा के खिलाफ एकजुट होते हैं क्योंकि भाजपा लोगों की, इस क्षेत्र की सेवा करती है। हमारी राजनीति स्वार्थ की नहीं है, परिवार या व्यक्ति के हित के लिए नहीं है बल्कि झारखंड के हित के लिए है, झारखंड के गरीबों की भलाई के लिए है। भाइयो-बहनो, ये लोग आदिवासियों को, दलितों को, पिछड़ों को भाजपा के नाम पर दशकों से डराते रहे हैं, भय दिखाते रहे हैं लेकिन पांच वर्ष से दिल्ली और झारखंड में पूर्ण बहुमत की भाजपा की सरकार रही है। 2019 में एक बार फिर आप सभी ने पूरे देश ने कमल के फूल को पहले से भी अधिक ताकत दी है। आखिर क्यों? क्योंकि भाजपा सबका साथ सबका विकास चाहती है, भाजपा गांव की, गरीब की, किसान की, मजदूर की सबकी चिंता करती है। श्रमिकों को चाहे वो फैक्ट्रियों या खदानों में काम करते हैं या फिर घरों में, खेतों में या दूसरे असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं उनको पहली बार 3 हजार रुपए की पेंशन तय की गई है, उनको पहली बार बीमा की सुविधा मिल रही है, आज उन लोगों को भी अपना पक्का घर मिल पा रहा है जिनको दशकों तक झोपड़ियों में रहने के लिए छोड़ दिया गया था। गरीबों के लिए जो घर बन रहे हैं उसमें भी झारखंड देश के सबसे तेजी से काम कर ने वाले राज्यों में है। झारखंड के गांवों में गरीबों के लिए दस लाख से ज्यादा घर तैयार किए गए हैं। कितने घर बने? और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, जिनको अभी घर नहीं मिले हैं वो भी मेरे शब्द लिखकर के रखें 2022, आजादी के 75 साल होने पर जो बाकी रह गए हैं उनको भी अपना पक्का घर मिल जाएगा।

साथियो, विस्थापन का कष्ट सह रहे साथियों का भी पूरा ध्यान हमें है, भाजपा की सरकार किसी को भी अधर में नहीं छोड़ेगी। हर साथी की जिंदगी को आसान बनाने के लिए हर प्रयास जारी रखे जाएंगे। साथियो, भाजपा जो संकल्प लेती है उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देती है। आज हमें इसमें मदद इसलिए भी मिलती है क्योंकि दिल्ली और रांची में एक ही सोच, एक ही संकल्प वाली सरकार है। भाजपा सरकार का संकल्प है कि हर गरीब के घर खाना गैस पर बने इसलिए झारखंड में दो सिलेंडर मुफ्त में मिले हैं। ये भाजपा की सरकार ही है जिसके कारण झारखंड में सालों से लटकी पानी की योजनाएं फिर से शुरू हुई हैं। अब भाजपा सरकार का संकल्प है कि 2024 तक देश के हर घर तक, माताओ-बहनो, मैं आपके लिए बता रहा हूं। हम 2024 तक घर के अंदर जहां खाना पकाते हैं वहां तक पानी आ जाए ये व्यवस्था करना चाहते हैं और इसके लिए यहां भाजपा की सरकार का दोबारा चुना जाना जरूरी है।

साथियो, खेती-किसानी से जुड़े लोगों को किस तरह झारखंड में डबल इंजन का लाभ मिला है उसके भी आप साक्षी रहे हैं। बाकी देश में पीएम किसान सम्मान निधि के तहत ही किसानों के खाते में सीधी मदद जमा हो रही है जबकि झारखंड में छोटे किसान परिवारों के खाते में पांच हजार से 25 हजार रुपए तक हर वर्ष एक्स्ट्रा जमा हो रहे हैं और बरही के लोगों को हजारीबाग के लोगों को मैं ये भी याद दिलाना चाहता हूं कि जहां-जहां कांग्रेस की सरकारें हैं वहां के किसानों को इस योजना का लाभ दिलाने में दिक्कत हो रही है। वहां की सरकार को लगता है कि किसान के घर में मोदी-मोदी हो गया तो उनकी रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी, इसलिए किसान के घर में पैसे नहीं जाने देते हैं। अगर यहां भी गलती से ये लोग आ गए तो आप समझ लेना मैं दिल्ली से जो भेजूंगा वो भी आप तक आने नहीं देंगे, ये ऐसे लोग हैं। जिन राज्यों में किसानों से झूठ बोलकर कांग्रेस ने सत्ता हासिल की वहां किसानों की स्थिति और बिगड़ रही है। किसानों से किए गए वादों से वहां की कांग्रेस सरकारें मुकर गई हैं। भाइयो-बहनो, भाजपा सरकार गांव की, किसान की आय बढ़ाने के लिए, उनका खर्च कम करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है जब इंसान और पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी योजनाएं एक साथ चली हैं। एक तरफ आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब से गरीब परिवार को आज पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है वहीं दूसरी तरफ देश भर के 50 करोड़ से अधिक पशुओं के मुफ्त टीकाकरण का इलाज भी संभव हुआ है। बकरी हो, गाय हो या दूसरे पशु यहां आजीविका का एक अहम साधन हैं, जब इनको मुंहपका, खुरपका या दूसरे रोग लग जाते हैं तो क्या स्थिति होती है आप इससे भलीभांति परिचित हैं। जानवरों को सही समय पर टीका लगेगा तो इस तरह की बीमारियों से भी वो बचेंगे।

साथियो, झारखंड को एक और सेक्टर के लिए हम तैयार कर रहे हैं और वो है टूरिज्म, यहां झुमरी तलैया भी है, जंगल भी है, झरने भी हैं। अब यहां सड़कें भी बन रही हैं ऐसे में देश और दुनिया के पर्यटकों को झारखंड लाने के लिए भाजपा हर संभव प्रयास करने वाली है। इससे यहां के युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जब स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा तो लोगों को रोजगार की तलाश के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। साथियो, झारखंड के विकास को जारी रखने के लिए, यहां पर विकास का डबल इंजन बनाए रखने के लिए आपसे मेरी यही प्रार्थना है, एक ही काम करना है, करोगे? हाथ ऊपर करके बताइए करोगे? औरों को भी कतरने के लिए कहोगे? मतदान के लिए लोगों को घर से निकालोगे? एक ही काम करना है बताऊं कौन सा काम? कमल के फूल के सामने बटन दबाना है। आप इतना कीजिए, जितना कहा है मैं पूरा करूंगा। आपका अभी का वोट तय करेगा कि आज, आप सुनिए। आज जब झारखंड 19 साल का हो गया और 19 साल का बहुत महत्व होता है। घर में पांच साल के बच्चे के लिए कोई निर्णय करना है तो मुश्किल नहीं होता है, 8 साल के बच्चे का निर्णय करना है तो मुश्किल नहीं होता है। 10-1 साल के बच्चे का निर्णय करना है तो मुश्किल नहीं होता है लेकिन बच्चा जब 19-20 का होता है। बेटा हो या बेटी हो तो मां-बाप बराबर सोचते रहते हैं, लोगों को पूछते रहते हैं कि बच्चा बेटे-बेटी अब 19-20 के हो गए आगे उनको कहां-कहां भेजें, कौन सी पढ़ाई करवाएं, किस शहर में भेजें, कहां नौकरी करवाएं क्योंकि अब वो 19 का हो गया है, मेरे भाइयो-बहनो, अब झारखंड भी 19 का हो गया है। अब आपको सोचना है कि झारखंड जब 25 का होगा तब तक झारखंड को कितना ताकतवर बनाना है, झारखंड को कितना आगे बढ़ाना है इसके लिए ये मौका है अगर ये मौका खो दिया, घर में भी मां-बाप ने अगर 19 साल के बेटे-बेटी का मौका खो दिया तो फिर वो बेटे-बेटी का हाल क्या होता है वो आपको पता है। ऐसे ही 19 साल की उम्र के झारखंड का भी भविष्य आपको तय करना है और इसलिए झारखंड के विकास के लिए आप सब मेरे साथ बोलेंगे। मैं कहूंगा झारखंड पुकारा, आप कहेंगे भाजपा दोबारा। झारखंड पुकारा-भाजपा दोबारा, झारखंड पुकारा-भाजपा दोबारा, झारखंड पुकारा-भाजपा दोबारा। मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, बहुत-बहुत धन्यवाद।