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This year marks 125th birth anniversary of Dr. Babasaheb Ambedkar. He was a ‘Mahapurush’ who gave us our Constitution: PM Modi
There were many hurdles in Dr. Ambedkar’s life but there was no feeling of revenge or ill-will within him: PM Modi
It is our tricolour, the aspirations of 125 crore Indians & the Constitution that bind us together: PM Modi
Forums like the NCC connect people from across India & create a feeling of oneness: PM

देश के कोने-कोने से आए हुए एनसीसी के सभी कैडेट्स और वि‍शाल संख्‍या में आए हुए अति‍थि‍गण,

26 जनवरी को प्रजासत्‍ता पर्व का उत्‍साह और उमंग से हम लोगों ने उसे मनाया और लोकतंत्र के प्रति‍ हमारी श्रद्धा और नि‍ष्‍ठा को भारत के संवि‍धान के प्रति‍ हमारी आस्‍था को हमने फि‍र एक बार संकल्‍पबद्ध कि‍या है।

यह वर्ष बाबा साहेब अम्‍बेडकर की 125वीं जयंती का भी वर्ष है। जि‍स महापुरुष ने देश को ऐसा उत्‍तम सं‍वि‍धान दि‍या। जो महापुरुष जीवन भर संकटों से जूझते रहे, यातनाएं झेलते रहे, उपेक्षा का शि‍कार हुए, उसके बावजूद भी उन्‍होंने अपने आपको कभी भी मार्ग से वि‍चलि‍त नहीं होने दि‍या। बाधाएं आई, संकट आए और कभी-कभार सामाजि‍क उपेक्षा, वो इतना गहरा घाव करती है कि‍ जीवन भर सामान्‍य मानवि‍की उसको भुला नहीं सकता। लेकि‍न बाबा साहेब अम्‍बेडकर हम जैसे सामान्‍य जीवन नहीं थे। जीवन भर उपेक्षाओं को झेलने के बाद भी जब देश के लि‍ए संवि‍धान देने का अवसर आया, उस संवि‍धान के कि‍सी कोने में भी कि‍सी के प्रति‍ दुर्भाव नहीं है, बदले का भाव नहीं है। ऊपर से जीवन भर जो झेला था, उसके कारण जो मंथन हुआ था। उस मंथन में से संवि‍धान रूपी अमृत नि‍काला था जो आज हमें प्रजासत्‍ता पर्व के इतने सालों के बाद भी, आजादी के इतने वर्ष के बाद भी हमें बांधने में, कंधे से कंधा मि‍लाकर चलने में, देश के लि‍ए अपनी-अपनी जि‍म्‍मेवारि‍यां नि‍भाने के लि‍ए हमें प्रेरि‍त करता है, हमारा मार्गदर्शक है।

आप हि‍न्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हो, वो कौन-सी बात है जो हमें खींचकर के लाती है, वो कौन-सी बात है जो हमें भाषा की कठि‍नाई हो तो भी, वेशभूषा अलग हो, रहन-सहन अलग हो, उसके बावजूद भी एकजुट रहने की ताकत देती है, वो है हमारी भारत माता, हमारा ति‍रंगा झंडा, यह हमारा संवि‍धान। और सवा सौ करोड़ देशवासि‍यों के सपने, उनकी आशा-आकांक्षा, इच्‍छा हमें कुछ करने की प्रेरणा देती है।

एनसीसी कैडेट के रूप में परेड में शामि‍ल होने का अवसर मि‍ले। अपने स्‍थान पर एनसीसी में यूनि‍फॉर्म पहन करके, सीना तानकर के, साथ-साथ चलने का मौका मि‍ले। कभी camp life जीने का अवसर मि‍ले, कभी शस्‍त्रार्थों को नि‍कट से देखने का अवसर मि‍ले। ये उम्र ऐसी होती है कि‍ इन सारी बातों में thrill होता है, कुछ adventure का भाव भी होता है और रगों में देशभक्‍ति‍ लगातार ऊर्जा बनकर के हमें नए सपनों के लि‍ए, जीने के लि‍ए संकल्‍पबद्ध करती रहती है।

जब आप 26 जनवरी की इस परेड के लि‍ए एक महीने से एक समूह जीवन का अनुभव कर रहे थे। ये तो कठि‍नाई रहती होगी कि‍ सुबह तीन-साढ़े तीन बजे उठना, मन करता है इतनी बड़ी ठंड में थोड़ा-सा लंबा सो ले, लेकि‍न बि‍गुल बजता है, whistle बजती है, चल पड़ना होता है। शुरू के पांच-दस मि‍नट तो ऐसे ही चले जाते हैं, कि‍ अरे क्‍या दि‍न नि‍कलेगा? लेकि‍न जैसे ही rhythm में आ जाते हैं फि‍र मन करता है इस रास्‍ते को छोड़ना नहीं है और यही, यही जि‍न्‍दगी की ताकत होती है। कुछ पल भले ही उलझन रहे, लेकि‍न पल भर में जो अपने आप को संभाल लेता है, मकसद के लि‍ए, मंजि‍ल के लि‍ए अपने आप को आहुत कर देता है उसे जि‍न्‍दगी जीने का एक अलग आनन्‍द आता है।

आप सभी कैडेट ने एक समूह जीवन की अनुभूति‍ की है। मैदान में जो सीखा है वो पाया है। आदेश के अनुसार हाथ-पैर चलते होंगे। वो discipline की दुनि‍या एक है, लेकि‍न उसके बाद अपने नए-नए मि‍त्रों के साथ, नए-नए साथि‍यों के साथ महीना बि‍ताया होगा। जब आप उनसे छोटे-छोटे वि‍षयों की जानकारी लेते होंगे। खान-पान के लि‍ए पूछते होंगे, रहन-सहन के लि‍ए पूछते होंगे। तब आप अपने भीतर धीरे-धीरे मां भारती को आत्‍मसात करते हैं। कश्‍मीर का बालक जब केरल के बालक के साथ बातें करता है तो मन से कश्‍मीर और केरल को जोड़ता है। अपनेपन का अहसास करता है। अपना वि‍स्‍तार होता है। सामूहि‍क जीवन अहम् को व्‍यम् की ओर ले जाता है। स्‍व को समस्‍ति‍ से जोड़ने का अवसर पैदा करता है। सामूहि‍क जीवन एक नई ऊर्जा को जन्‍म देता है। अकेले-अकेले जो अनुभव करते हैं, सामूहि‍क जीवन में एक नई अनुभूति‍ होती है और ऐसे ही कार्यक्रमों के माध्‍यम से एक सामूहि‍क जीवन जीने का अवसर मि‍लता है। मैदान में जो सि‍खते हैं, उससे ज्‍यादा अन्‍य समय में सामूहि‍क जीवन से सि‍खते हैं और मैं जानता हूं जब आप यहां से वि‍दाई लेंगे, वो पल कैसा होगा। कि‍तने होंगे जि‍नकी आंख में आंसू होंगे, हर कि‍सी को लगता होगा अब फि‍र कब मि‍लेंगे, ये अपनापन आया कहां से? जब आप अपने गांव से यहां आने के लि‍ए चले थे, महीने भर के लि‍ए। तब न कोई छोड़ने आया होगा, न ही कि‍सी ने आंसू बहाए होंगे और न ही आपके दि‍ल मे चोट पहुंची होगी कि‍ मैं अपने गांव से दि‍ल्‍ली जा रहा हूं, लेकि‍न आज दि‍ल्‍ली से अपने गांव जा रहे हो, अपनों के बीच जा रहे हो, लेकि‍न कुछ खोया-खोया महसूस कर रहे हो। ये जो अपनापन, यही देश की बहुत बड़ी ताकत होती है। इसी ताकत को एक संस्‍कार के रूप में जीवि‍त रखे, देश के लि‍ए मरने का मौका हर कि‍सी के नसीब में नहीं होता, लेकि‍न देश के लि‍ए जीने का अवसर हर इंसान की जि‍न्‍दगी में होता है।

अगर हम जागृत प्रयास करे, हम जि‍एंगे तो भी देश के लि‍ए। कुछ कर गुजरेंगे तो भी देशवासि‍यों के लि‍ए, जीवन को संकल्‍पों से परि‍श्रम की पराकाष्‍ठा करके, ऐसे जीवन को हासि‍ल करेंगे जो जीवन देश को काम आएगा। और तब जाकर के जीवन का संतोष कुछ और होगा। और इसलि‍ए आज सारे कैडेट जब देश के कोने-कोने मे वापि‍स जाने वाले हैं, मैं उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और जो यहां माहौल देखा है, इसी माहौल को अपने यहां कैसे पनपाएं। अगर यहां हमने स्‍वच्‍छता देखी है तो स्‍वच्‍छता का भाव अपने गांव में कैसे पहुंचाए। अगर यहां हमने देशभक्‍ति‍ का माहौल देखा है तो अपने गांव में देशभक्‍ति‍ का माहौल कैसे बनाए। यहां हमने जो अनुभव कि‍या है, उसका वि‍स्‍तार हम कैसे करे, इन संकल्‍पों को लेकर के चले। मैं फि‍र एक बार सभी कैडेट्स को, एनसीसी को, एनसीसी की परंपरा को हृदय से बहुत-बहुत अभि‍नंदन करता हूं और आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

भारत माता की जय, भारत माता की जय। भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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We need be vocal for local toys: PM Modi
June 24, 2021
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Calls for better standing in ‘Toyoconomy’
Underlines the importance of toy sector in taking development and growth to the neediest segments
We need be vocal for local toys: PM
The world wants to learn about India’s capabilities, art and culture and society, toys can play a big role in that: PM
India has ample content and competence for digital gaming: PM
75th anniversary of India’s Independence is a huge opportunity for the innovators and creators of the toy industry: PM

मुझे आप लोगों की बातें सुनकर के बहुत अच्छा लगा और मुझे खुशी है आज हमारे साथी मंत्री पियूष जी, संजय जी, ये सारे लोग भी हमारे साथ हैं और साथि‍यों 'टॉय-केथॉनमें जो देशभर से प्रतिभागी हैं, अन्य जो महानुभव हैं और भी आज इस कार्यक्रम को जो देख रहे हैं।

देखि‍ए हमारे यहां कहा जाता है-'साहसे खलु श्री: वसति'यानि साहस में ही श्री रहती है, समृद्धि रहती है। इस चुनौतीपूर्ण समय में देश के पहले टॉय-केथॉन का आयोजन इसी भावना को मजबूत करता है। इस'टॉय-केथॉनमें हमारे बाल मित्रों से लेकर, युवा साथियों, टीचर्स, स्टार्ट अप्स और उद्यमियों ने भी बहुत उत्साह से हिस्सा लिया है। पहली बार ही डेढ़ हजार से ज्यादा टीमों का ग्रैंड फिनाले में शामिल होना, ये अपने आप में उज्जवल भविष्य के संकेत देता है।ये Toys और games के मामले में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देता है। इसमें कुछ साथियों के बहुत अच्छे आइडियाज भी उभर कर के आगे आए हैं। अभी कुछ साथियों के साथ मुझे बातचीत करने का अवसर भी मिला। मैं इसके लिए फिर  से एक  बार बधाई देता हूँ।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हैकाथॉन को देश की समस्याओं के समाधान का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसके पीछे की सोच है- देश के सामर्थ्य को संगठित करना, उसे एक माध्यम देना। कोशिश ये है कि देश की चुनौतियों और समाधान से हमारे नौजवान का सीधा कनेक्ट हो। जब ये कनेक्ट मजबूत होता है तो हमारी युवा शक्ति की प्रतिभा भी सामने आती है और देश को बेहतर समाधान भी मिलते हैं। देश के पहले 'टॉय-केथॉन' का मकसद भी यही है। मुझे याद है, मैंने खिलौनों और डिजिटल गेमिंग की दुनिया में आत्मनिर्भरता और लोकल सोल्यूशंस के लिए युवा साथियों से अपील की थी। उसका एक पॉजिटिव रिस्पॉन्स देश में देखने को मिल रहा है। हालांकि चंद लोगों को ये भी लगता है कि खिलौने ही तो हैं, इनको लेकर इतनी गंभीर चर्चा की ज़रूरत क्यों है? असल में ये Toys, ये Games, हमारी मानसिक शक्ति, हमारी क्रिएटिविटी और हमारी अर्थव्यवस्था पर, ऐसे अनेक पहलुओं को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन विषयों कीबात भी उतनी ही आवश्यक है।हम सब जानते हैं किबच्चे की पहली पाठशाला अगर परिवार होता है तो, पहली किताब और पहला दोस्त, ये खिलौने ही होते हैं। समाज के साथ बच्चे का पहला संवाद इन्हीं खिलौनों के माध्यम से होता है।आपने देखा होगा, बच्चे खि‍लौनो से बाते करते रहते हैं, उनको instruction देते हैं, उनसे कुछ काम करवाते हैं। क्योंकि उसी से उसके सामाजिक जीवन की एक प्रकार से शुरुआत होती है।इसी तरह, ये Toys, ये बोर्ड गेम्स, धीरे-धीरे उसकी स्कूल लाइफ का भी एक अहम हिस्सा बन जाते हैं, सीखने और सिखाने का माध्यम बन जाते हैं। इसके अलावा खिलौनों से जुड़ा एक और बहुत बड़ा पक्ष है, जिसे हर एक को जानने की जरूरत है। ये है Toys और Gaming की दुनिया की अर्थव्यवस्था- Toyconomy आज हम जब बात कर रहे हैं तो Global Toy Market करीब करीब 100 बिलियन डॉलर का है। इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ डेढ़ बिलियन डॉलर के आस पास ही है, सिर्फ डेढ़ बिलियन। आज हम अपनी आवश्यकता के भी लगभग 80 प्रतिशत खिलौने विदेशों से आयात करते हैं। यानि इन पर देश का करोड़ों रुपए बाहर जा रहा है। इस स्थिति को बदलना बहुत ज़रूरी है। और ये सिर्फ आंकड़ों की ही बात नहीं है, बल्कि ये सेक्टर देश के उस वर्ग तक, उस हिस्से तक विकास पहुंचाने में सामर्थ्य रखता है, जहां इसकी अभी सबसे ज्यादा ज़रूरत है। खेल से जुड़ा जो हमारा कुटीर उद्योग है, जो हमारी कला है, जो हमारे कारीगर हैं, वो गांव, गरीब, दलित, आदिवासी समाज में बड़ी संख्या में हैं। हमारे ये साथी बहुत सीमित संसाधनों में हमारी परंपरा, हमारी संस्कृति को अपनी बेहतरीन कला से निखारकर अपने खिलौनों में ढालते रहे हैं। इसमें भी विशेष रूप से हमारी बहनें, हमारी बेटियां बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। खिलौनों से जुड़े सेक्टर के विकास से, ऐसी महिलाओं के साथ ही देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले हमारे आदिवासी और गरीब साथियों को भी बहुत लाभ होगा। लेकिन ये तभी संभव है जब, हम अपने लोकल खिलौनों के लिए वोकल होंगे, लोकल के लिए वोकल होना जरूरी है औरउनको बेहतर बनाने के लिए, ग्लोबल मार्केट में कंपिटेंट बनाने के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहन देंगे। इसके लिए इनोवेशन से लेकर फाइनेंसिंग तक नए मॉडल विकसित करना बहुत ज़रूरी है। हर नए आइडिया को Incubate करना ज़रूरी है। नए Start ups को कैसे प्रमोट करें और खिलौनों की पारंपरिक कला को, कलाकारों को, कैसे नई टेक्नॉलॉजी, नई मार्केट डिमांड के अनुसार तैयार करें, ये भी आवश्यक है। 'टॉय-केथॉन' जैसे आयोजनों के पीछे यही सोच है।

साथियों,

सस्ता डेटा और इंटरनेट में आई तेजी, आज गांव- गांव तक देश को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। ऐसे में फिजिकल खेल और खिलौनों के साथ-साथ वर्चुअल, डिजिटल, ऑनलाइन गेमिंग में भी भारत की संभावनाएं और सामर्थ्य, दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं। लेकिन जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स आज मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है, हमारी सोच से मेल नहीं खाता है। आप भी जानते हैं कि इसमें अनेक गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो Violence को प्रमोट करते हैं या फिर Mental Stress का कारणबनातेहैं। इसलिए हमारा दायित्व है कि ऐसे वैकल्पिक कॉन्सेप्ट डिजायन हों, जिसमें भारत का मूल चिंतन, जो सम्पूर्ण मानव कल्याण से जुड़ा हुआ हो, वो हो, तकनीकि रूप में Superior हों, Fun भी हो, Fitness भी हो, दोनों को बढ़ावा मिलता रहे।और मैं अभी ये स्पष्ट देख रहा हूं कि Digital Gaming के लिए ज़रूरी Content और Competence हमारे यहां भरपूर है। हम 'टॉय-केथॉन' में भी हम भारत की इस ताकत को साफ देख सकते हैं। इसमें भी जो आइडिया सलेक्ट हुए हैं, उनमें मैथ्स और कैमिस्ट्री को आसान बनाने वाले कॉन्सेप्ट हैं, और साथ ही Value Based Society को मजबूत करने वाले आइडियाज भी हैं। अब जैसे, ये जो आई कॉग्नीटो Gaming का कॉन्सेप्ट आपने दिया है, इसमें भारत की इसी ताकत का समावेश है। योगसे VR और AI टेक्नॉलॉजी से जोड़कर एक नया गेमिंग सोल्यूशन दुनिया को देना बहुत अच्छा प्रयास है। इसी तरह आयुर्वेद से जुड़ा बोर्ड गेम भी पुरातन और नूतन का अद्भुत संगम है। जैसा कि थोड़ी देर पहले बातचीत के दौरान नौजवानों ने बताया भीकिये कंपीटिटिव गेम, दुनिया में योग को दूर-सुदूर पहुंचाने में बहुत मदद कर सकता है।

साथियों,

भारत के वर्तमान सामर्थ्य को, भारत की कला-संस्कृति को, भारत के समाज को आज दुनिया ज्यादा बेहतर तरीके सेसमझने के लिए बहुत उत्सुक है, लोग समझना चाहते हैं। इसमें हमारी Toys और Gaming Industry बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है। मेरा हर युवा इनोवेटर से, हर स्टार्ट-अप से ये आग्रह है कि एक बात का बहुत ध्यान रखें। आप पर दुनिया में भारत के विचार और भारत का सामर्थ्य, दोनों की सही तस्वीर रखने की जिम्मेदारी भी है।एक भारतश्रेष्ठ भारत से लेकर वसुधैव कुटुंबकम की हमारी शाश्वत भावना को समृद्ध करने का दायित्व भी आप पर है। आज जब देश आज़ादी के 75 वर्ष का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो ये Toys और Gaming से जुड़े सभी Innovators और creators के लिए बहुत बड़ा अवसर है। आज़ादी के आंदोलन से जुड़ी अनेक ऐसी दास्तान हैं, जिनको सामने लाना ज़रूरी हैं। हमारे क्रांतिवीरों, हमारे सेनानियों के शौर्य की, लीडरशिप की कई घटनाओं को खिलौनों और गेम्स के कॉन्सेप्ट के रूप में तैयार किया जा सकता है। आप भारत के Folk को Future से कनेक्ट करने वाली भी एक मज़बूत कड़ी हैं। इसलिए ये ज़रूरी है कि हमारा फोकस ऐसे Toys, ऐसे गेम्स का निर्माण करने पर भी हो जो हमारी युवा पीढ़ी को भारतीयता के हर पहलू को Interesting और Interactive तरीके से बताए। हमारे Toys और Games, Engage भी करें, Entertain भी करें और Educate भी करें, ये हमें सुनिश्चित करना है। आप जैसे युवा इनोवेटर्स और क्रिएटर्स से देश को बहुत उम्मीदें हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने लक्ष्यों में जरूर सफल होंगे, अपने सपनों को जरूर साकार करेंगे। एक बार फिर इस 'टॉय-केथॉन' के सफल आयोजन के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ !

धन्यवाद !