PM Modi felicitates the Amazing Indians, lauds efforts of the common man
Small people have a major contribution to society and it can't be forgotten: PM Modi
Journey of awardees has been like diamond; it passes through great travails before being recognized: PM Modi
Those whom society considers inferior have a major contribution to society & it can't be forgotten, says Prime Minister Modi
World over, most of the great achievers have been those, who overcame personal hardships: PM Modi

उपस्थित सभी महानुभाव

Amazing India and Amazing Indians ...मैं Times Now को अभिनंदन करता हूं कि समाज के उन हीरों की परख करने की उन्‍होंने कोशिश की है जो कभी खुद के लिए चमकते नहीं हैं। ये वो हीरे हैं, जैसा हीरे का स्‍वभाव रहता है, खदान से निकल कर किसी के शरीर पर धारण करने तक की उसकी यात्रा बहुत ही पीड़ादायक होती है, बहुत ही कष्‍टदायक होती है। अनेक मुसीबतों से उसे गुजरना पड़ता है और तब जा करके वो किसी के शरीर पर चमकता है। ये वो हीरे हैं जहां समाज, संसार चमक को प्राप्‍त करें उसके लिए वे इन्‍हें झेलते जाते हैं, जूझते जाते हैं और कुछ कर गुजर करके संतोष पाते हैं।

हमारे देश का दुर्भाग्‍य रहा है कि हमारे यहां जो कुछ भी लिखा जाता है पिछले दो सौ, ढाई सौ, तीन सौ साल में देखेंगे तो ज्‍यादातर राज परिवारों की बातें, राजकर्ताओं की बातें, राजघरानों की बातें, उनकी आदतें, उनकी दिनचर्या, यही बातें समाज के सामने आती रहती थीं। इस देश को गुलाम रखने के लिए ये सोची-समझी रणनीति का भी हिस्‍सा था और उसके कारण ध्‍यान इस चमक-दमक के आसपास ही रहता था। अंधेरे में ओझल भी एक दुनिया होती है, मुसीबतों के बीच भी मूल्‍यों के लिए जूझते रहने वाले लोगों की एक परम्‍परा होती है और उस तरफ बहुत कम ध्‍यान जाता है।

प्रेमचंद जैसे साहित्‍यकारों को पढ़ते हैं तो ध्‍यान में आता है कि किस-किस प्रकार से लोग जीवन को संवारते थे, सिर्फ जीवन को जीते थे ऐसा नहीं है, जीवन को संवारते थे। और इसलिए हमें अपने-आप की शक्ति को भी अगर महसूस करना है, हमें अपने-आप को भी अगर पहचानना है तो अंधेरे में ओझल जो लोग हैं उनको देखने से कभी हम अपनी स्थिति को पहचान पाते हैं। कुछ लोगों की सोच है कि अगर सुविधाएं हैं, व्‍यवस्‍थाएं हैं, सानुकूल माहौल है तभी कुछ किया जा सकता है। ऐसी सोच वाला बहुत बड़ा वर्ग है और मैं उनको हमेशा कहता हूं कि अगर आपको नींद नहीं आती है Five star hotel में आपके लिए बढि़या से बढि़या कमरा बुक कर दिया जाए, आप चाहें उतना temperature हो, आप चाहें ऐसा गद्दा हो, आपको पसंद आए ऐसा music हो, उसके बावजूद भी नींद की गारंटी नहीं है।

अवसर, सुविधाएं, व्‍यवस्‍थाएं हमेशा समाधान देती हैं ऐसा नहीं है। अगर आपके भीतर कोई आग है, भीतर कोई spark हो वो परिस्थितियों को परास्‍त करने की ताकत रखता है और दुनिया में जिन-जिन लोगों ने कुछ किया है अगर उनकी तरफ देखें तो ज्‍यादतर वो लोग हैं जिन्‍होंने जिंदगी में काफी शक्ति जीवन से जूझने के लिए खपाई है और उसके बाद भी कुछ दे करके गए हैं। और दुनिया के किसी भी इतिहास के किसी भी गाथा के क्रम को देखेंगे, हर बात में कहीं न कहीं समाज जिनको छोटे लोग मानता है, बड़े लोगों की नजर में जो छोटे लोग होते हैं, उनका कितना बड़ा योगदान होता है। पूरी रामायण हम देख लें, राम, लक्ष्‍मण, सीता सब कुछ पढ़ लें, लेकिन हम उस गिलहरी को कभी नहीं भूल सकते कि जिसके बिना, जिसके काम को राम को भी सराहना पड़ा था कि जो राम-सेतु बनाने के लिए अपनी कोशिश कर रही थी। पूरी रामायण को भूल जाएं लेकिन शबरी को नहीं भूल सकते। श्रीकृष्‍ण के कई रूप याद आते होंगे लेकिन सुदामा को नहीं भूल सकते। उन ग्‍वालों को नहीं भूल सकते। छत्रपति शिवाजी इतनी बड़ी दुनिया, लेकिन छोटे-छोटे वो मालवे जो कभी सिंहगढ़ जीतने के लिए जिंदगी खपा देते थे, इसको कभी भूल नहीं सकते। पंज-प्‍यारे, गुरू परम्‍परा को याद करें, वो पंज-प्‍यारे कौन थे, सामान्‍य लोग थे। एक महान परम्‍परा को उन्‍होंने जन्‍म दे दिया। छोटे-छोटे लोग इतिहास बदल देते हैं, समाज की सोच बदल देते हें।

हमारे देश का ये दुर्भाग्‍य रहा है कि आजादी के बाद भी हमारी नजरें राज-व्‍यवस्‍थाओं पर टिकी हुई हैं, राज-नेताओं पर टिकी हुई हैं और कभी-कभी लगता है कि आवश्‍यकता से अधिक उनको प्रधान्‍य दिया जाता है। जितना उनको देना चाहिए उतना देना तो समझ सकते हैं लेकिन हम देखते हैं आवयश्‍कता से अधिक दिया जाता है। एक टीचर जिसने अपने जीवनकाल में दो सौ अच्‍छे नागरिक दिए हों, जिसमें डॉक्‍टर हों, इंजीनियर हों, साहित्‍यकार हों, उस टीचर का किसी चौराहे पर नाम नहीं होता है, उसके नाम का कोई रास्‍ता नहीं होता है। लेकिन एक corporater बन जाए तो देखते ही देखते उसके नाम का रास्‍ता भी बन जाता है, उसकी सड़क बन जाती है, चौराहा बन जाता है, कभी-कभी पुतला भी लग जाता है।

समाज के लिए यह जीने वाले लोग जो राजनीतिक ताम-झाम से काफी दूर है, उनकी संख्‍या करोड़ों में है। हम पूरे हमारे कृषि जगत को देखे। कृषि जगत को ताकत जितनी laboratory से मिली है या वैज्ञानिकों से मिली है, उससे ज्‍यादा गांव के सामान्‍य किसान के नित्‍य निरंतर प्रयोगों से निकली हुई है। लेकिन उस तरफ हमारा ध्‍यान नहीं जाता है। समाज की शक्ति को पहचानना, समाज की शक्ति को जोड़ना समाज की शक्ति के आधार पर राष्‍ट्र शक्ति को उजागर करने का प्रयास यही अंतिम ताकत के रूप में उभरता है। और इसलिए जिन्‍होंने कुछ न कुछ किया है। विपरीत परिस्थितियों में जी करके दिखाया है या विपरीत परिस्थितियों के बाद भी औरों के लिए जीना सिखाया है। जिनका जीवन स्‍वयं में अपने आप में एक उदाहरण बन गया। एक दीप से जलते दीप हजार। यह जो ताकत खड़ी की है, ऐसे ही रत्‍नों का मुझे आज दर्शन करने का सौभाग्‍य मिला है। और ऐसे अनगिनत लोग हैं, हिंदुस्‍तान के हर कोने में अनगिनत लोग हैं। उनकी शक्ति को हम कैसे पहचानें?

भारत की जो मूल सोच है वो तेन त्यक्तेन भुंजीथा , यह उसकी मूल सोच है। त्‍याग उसकी मूलभूत चिंतन का हिस्‍सा है। और उसी में से इस प्रकार के जीवन निर्माण होते हैं। यह जीवन औरों को प्रेरणा देते हैं। इन सबकी अपनी-अपनी एक कथा है, अपनी-अपनी विशेषता है। और आज इस कार्यक्रम के बाद बहुतों का उन पर ध्‍यान जाएगा। कुछ और करने का हौसला उनका बुलंद होगा। एक कमी हमेशा महसूस होती है कि इस प्रकार का जीवन जीने वाले लोग अपने जीवन में तो वो बड़े संतुष्‍ट होते हैं, क्‍योंकि वो स्‍वांत: सुखाय करते हैं। किसी ने तुलसी दास जी को पूछा था के आप यह सब क्‍यों कर रहे? तुलसीदास का सीधा-सीधा जवाब था भाई मुझे इसमें आनंद आता है इसलिए मैं कर रहा हूं। यह करने के बाद भी शायद दुनिया उसको स्‍वीकार करेगी, देखेगी यह मेरा विषय नहीं है। मैं स्‍वांत: सुखाय करता हूं, अपने संतोष के लिए करता हूं। यह वो लोग है जो अपने सुख के लिए संतोष के लिए यह किए बिना वो रह नहीं सकते यह करेंगे तब उनके मन का दुख भी दूर होगा, इस ऊंचाई को प्राप्‍त करते हैं, तब जा करके करते हैं। और इसलिए इन महान मूल्‍यों को हम कितने उजागर करें, कैसे उजागर करें, इन मूल्‍यों का हम जतन कैसे करें? और सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति को उसकी प्रेरणा कैसे दें। ऐसे अवसरों से कोई ताकत उभरकर आती है। मैं फिर एक बार उन सभी रत्‍नों को वंदन करता हूं, अभिनंदन करता हूं और उन्‍होंने ऐसी मिसाल कायम की है जो सुनने, पढ़ने वाले को भी शायद प्रेरणा देने का कारण बनेगी। मैं Times Now का भी बहुत आभारी हूं कि मुझे ऐसे रत्‍नों के साथ उनके कार्यों को, उनके सपनों को, उनके जीवन को जानने का, उनके दर्शन का अवसर मिला। बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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Prime Minister condoles the passing of Father Amir of State of Qatar HH Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani
July 12, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, has expressed deep grief over the passing of the Father Amir of the State of Qatar, HH Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani.

The Prime Minister described him as a visionary leader who led Qatar to great levels of development and prosperity. Shri Modi also remembered him as a true friend whom he had the honour of meeting during his visit to Qatar in February 2024.

The Prime Minister conveyed his sincere condolences to the Amir of Qatar, HH Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani, the entire royal family and the people of Qatar.

The Prime Minister wrote on X;

“We deeply mourn the passing of Father Amir of State of Qatar, HH Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani. A visionary leader who led Qatar to great levels of development and prosperity, we remember him also as a true friend whom I had the honour of meeting during my last visit to Qatar in February 2024. I convey my sincere condolences to the Amir of Qatar, HH Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani and the entire royal family and people of Qatar. May the departed soul rest in eternal peace.

@TamimBinHamad”