Our Government is devoted to serve the poor: PM Modi in Pithoragarh

Published By : Admin | February 12, 2017 | 23:18 IST
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Dev Bhoomi can attract tourists from all over the country. It has much potential for tourism sector to flourish: PM
Our Govt has allotted Rs.12,000 crore for Char Dham: PM Modi
Congress made mockery of One Rank, One Pension scheme. It was only after we assumed office, the scheme was implemented: PM
We initiated strong steps against corruption & a few people are feeling its heat, says PM Modi

भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय। दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से भारत माता की जय बोलिये। भारत माता की जय। भारत माता की जय। सभी भाइयों बहनों। ... मां पूर्णागिरि, गोल्ज्यू, हाटकालिका, बागनाथ, मां कोटगाडी की पावन धरती में आपको प्रणाम कर रहा हूं। ये उत्तराखंड का कश्मीर।

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्री परिषद् के मेरे साथी और आप ही के प्रतिनिधि श्रीमान अजय टंका जी, पिथौरागढ़ ज़िला के अध्यक्ष श्री विरेंदर बल्दिया जी, संसद में मेरे साथी, यहां के पूर्व मुख्यमंत्री, सेवाभाव यही उनका जीवन है, ऐसे श्रीमान भगत सिंह कोश्यारी जी, श्री केदार जोशी जी, श्री राजेंद्र भंडारी जी, श्री धनसिंह धामी जी, पिथौरागढ़ से भाजपा के उम्मीदवार श्री प्रकाश पन्त जी, टीडीआरजे-भाजपा उम्मीदवार श्री बिशन सिंह जुखाल जी, गंगोली हाट से भाजपा उम्मीदवार बहन मीना गंगोला जी, धारजुला से उम्मीदवार श्री वीरेंदर सिंह पाल जी। मेरे साथ बोलिये।  भारत माता की जय। भारत माता की जय।

पिथौरागढ़ के मेरे प्यारे भाइयों बहनों।

सभाएं तो मैंने बहुत देखी है। कई सभाओं में संबोधन करने का सौभाग्य भी मिला है। लेकिन यह 6 मंजिल सभा मैं पहली बार देख रहा हूं। शायद ये मीडिया वाले भी देखेंगे। छह मंजिल लोग खड़े हैं। भाई ये आप इतना दूर दूर खड़े हैं, मुझे देख तो पाते होंगे। लेकिन सुनाई भी देता है क्या ...? आज पिथौरागढ़ ने कमाल कर दिया है। और मैं हेलिपैड से यहां तक आ रहा था, पूरा रास्ता भी खचाखच लोगों से भरा हुआ था। इतनी बड़ी तादाद में आप मुझे आशीर्वाद देने आये हैंहमारे उम्मीदवारों को आशीर्वाद देने आये हैंहमारी पार्टी को आशीर्वाद देने आये हैंइसके लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं।

भाइयों बहनों

उत्तराखंड के चुनाव प्रचार की ये मेरी आखिरी सभा है।  आज 12 फरवरी है। आज 12 फरवरी को पूरा उत्तराखंड संकल्प कर रहा है। देवभूमि को दाग लगाने वाले लोगों को उखाड़ फेंकने का संकल्प कर रहा है। और 12 मार्च को, एक महीने के बाद ये सरकार भूतपूर्व बन जाएगी, भूतपूर्व। और 11 मार्च को दोपहर ढाई तीन बजे तक नतीजे भी आ जायेंगे, और भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तराखंड में बन जाएगी। भाइयों बहनोंये उत्तराखंड की धरती वीरों की धरती है। वीर माताओं की धरती है, त्याग और बलिदान की भूमि है। ये पिथौरागढ़, शायद ही कोई घर ऐसा होगा, जहां का कोई बेटा मां भारती की रक्षा के लिए फौज में जा करके सीमा पर तैनात न हुआ हो, ऐसा शायद ही कोई परिवार हो। ये वीरों की भूमि है।

भाइयों और बहनों

क्या कारण है कि उत्तराखंड का विकास नहीं हुआ? अटल बिहारी वाजपेयी जी ने तीन राज्य बनाये, मध्य प्रदेश से निकला हुआ छत्तीसगढ़, बिहार से निकला हुआ झारखंड और उत्तर प्रदेश से निकल हुआ उत्तराखंड।  लेकिन भाइयों बहनों, क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ आज विकास की ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, आज झारखंड विकास की ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, लेकिन मेरा उत्तराखंड नीचे ही चला जा रहा है, नीचे ही चला जा रहा है।  इसके लिए कौन जिम्मेवार है? आप सब मुझे जवाब दीजियेये उत्तराखंड को  बेहाल किसने किया ...? उत्तराखंड को बेहाल किसने किया ...? उत्तराखंड को  बर्बाद किसने किया ...? चारों ओर से आवाज़ आनी चाहिए। देवभूमि को लूटा  किसने ...?

भाइयों और बहनों

15 तारीख को मौका आपके पास है। आपकी अंगुली में वो ताकत है कि आप उत्तराखंड के लूटने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दे सकते हैं। 15 तारीख को मतदान करके, कमल के बटन को दबा करके, उत्तराखंड को तबाह करने वालों को ऐसी सजा दो, ऐसी सजा दो, ताकि उत्तराखंड में भविष्य में भी कोई सरकार उत्तराखंड को बर्बाद करने का गलती से भी पाप न करे, ऐसी सजा दो।

भाइयों, बहनों

उत्तराखंड में से पलायन बहुत होता है। नौजवान चला जाता है। उत्तराखंड की जवानी और उत्तराखंड का पानी, उत्तराखंड के काम नहीं आ रहा है। यहां की जवानी, यहां का पानी, उत्तराखंड के काम आये, ये सपना ले करके हम काम करना चाहते हैं। भाइयों और बहनों। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि पिथौरागढ़ के नागरिकों की ऐसी कैसी नाराजगी है, ऐसा कैसा गुस्सा कि मुख्यमंत्री यहां से पलायन कर गए। यहां के नौजवान तो रोजी रोटी के लिए पलायन करते देखे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को पलायन करना पड़ा, क्या कारण है? आप उनको बराबर पहचान गए हों न? आप मुख्यमंत्री को भलीभांति पहचान गए हो न? और वो भी आपका गुस्सा पहचान गए है। इसलिए यहां से नौ दो ग्यारह कर गए हैं। भाइयों बहनोंआप ही लोगों के आशीर्वाद से वे मुख्यमंत्री बन पाए थे, लेकिन इतने कम समय में आपके साथ ऐसा धोखा किया कि आपके पास दोबारा आने की हिम्मत नहीं है, पलायन कर गए।

भाइयों और बहनों।  

हमारा देश का दुर्भाग्य है की कुछ राजनीतिक दल, कुछ राजनेता देश के लिए बलिदान करने वाले हमारी फौज पर भी शक करते हैं। सवालिया निशान उठाते हैं।  आजादी के 70 साल में अनेक बार हमारे सेना के जवानों ने जान की बाजी लगा दी, शहादत मोल ली, लेकिन इस देश के किसी नागरिक ने फौज पर सवालिया निशान कभी खड़ा नहीं किया। लेकिन ये कांग्रेस पार्टी जब मेरी देश की फौज ने सर्जिकल स्ट्राइक किया। सीमा पार जाकर के दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिये। उनके सारे इरादे चकनाचूर कर दिये। और मेरे फौज के सारे बहादुर, पराक्रमी जवान, एक का भी नुकसान हुये बिना जिंदा लौट आये। मिलेट्री के इतिहास के बहुत बड़ी घटना है। दुनिया के सुरक्षा एजेंसियां, इसका अध्ययन कर रही है कि भारत की पराक्रमी सेना ने सीमा पार जा कर के अदभुत काम कैसे किया? लेकिन मेरे देश में सवाल कर रहे हैं मोदी जी बताओ? मोदी जी बताओ? ये सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था कि नहीं हुआ था। किस इलाके में गये थे। कितने लोग गये थे। कितने दूर गये थे। कितने गोलियां ले के गये थे। कितने लोगों को मार के आये थे। वहां तक गये थे तो हमारा एक भी मरा क्यों नहीं। ये कांग्रेस के लोगों को शोभा देता है क्या भाइयों। आप मुझे बताइये शोभा देता है क्या। देश की फौजी का अपमान है कि नहीं ...। देश की वीरों के पराक्रम का अपमान है कि नही हैं ...। देश की सेना का अपमान है कि नही हैं ...। अरे सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति का अपमान है कि नही हैं। अरे राजनीति अपने जगह पर होती है, करो राजनीति, मोदी पर जितने वार करने हैं करो, अरे जितना दम है निकाल दो, लेकिन मेरे फौज पर कभी शक मत करो। उनके पराक्रम पर शक मत करो।

भाइयों और बहनों

जब मैंने 2014 के लोकसभा के चुनाव में उत्तराखंड के भ्रमण पर आया था। उस समय पिथौरागढ़ आने का मौका नहीं मिला। दूसरे स्थान पर गया था। उस जनसभा में मैंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली में सरकार बनेगी तो हम वन रैंक, वन पेंशन लागू करेंगे। भाइयों और बहनों। 40 साल से लटका हुआ सवाल, 40 साल और दिल्ली में बैठी हुई केन्द्र सरकार वो सिर्फ सर्जिकल स्ट्राइक का ही मजाक उड़ाती है, ऐसा नहीं है। उन्होंने मेरे फौजियों का जिंदगी का भी मजाक उड़ाया था। कोई काम हो, ना हो वो तो बाद का विषय है लेकिन जब कोई मांग कर रहा है तो सरकार को कम से कम उसका अध्ययन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए ...। जरा मुझे बताइयेबारीकी से जांच करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए ...। जवान क्या मुद्दा उठा रहे हैं, उसको समझने का प्रयास करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए ...। अगर ये समस्या है तो समस्या का मूल ढूंढ़ना चाहिए कि नहीं चाहिए ...। और समस्या के समाधान के लिए क्या-क्या करना पड़ेगा, उसके लिए सोचना चाहिए कि नहीं चाहिए ...। आपको जानकर के हैरानी होगी और यहां बहुत सारे फौजी परिवार बैठे हैं। आपको जानकर के हैरानी होगी, जब आकर के मैंने जांच की। 40 साल हो गये, एक भी कांग्रेस की सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन है क्या? इसके लाभार्थी कौन हैं? उनकी संख्या कितनी है, आर्थिक कितना बढ़ेगा? एक भी विषय की जांच नहीं की थी। फाइल में कोई चीज उपलब्ध नहीं है। 40 साल तक जो लोग फौजियों की समस्या को समझने के लिए तैयार नहीं, कागज पर जांच करने को तैयार नहीं। इससे बड़ा मेरे फौज के लोगों का अपमान क्या हो सकता है। हम आये। मैनें घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी तो हम वन रैंक, वन पेंशन लागू करेगें। जैसे ही मैंने घोषणा की कांग्रेस को पसीना आ गया। उनको लगा मर गए और जब बजट आया तो बजट में 500 करोड़ डाल दिया। वन रैंक, वन पेंशन के लिए 500 करोड़ और उनके नेता जगह-जगह पर जा के फौजियों के सम्मेलन करने लगे। देखो कांग्रेस ने वन रैंक, वन पेंशन लागू कर दिया - वन रैंक, वन पेंशन लागू कर दिया। मै आया सरकार में, बैठा, मैने जांच-पड़ताल शुरू कीमैंने कहा, देखो भाई क्या है मैंने वादा कर के आया हूं। मेरे फौज के परिवारों आपको जान के आश्चर्य होगा। ये ऐसा मजाक इन लोगों ने उड़ाया था फौज कामेरे निवृत सैनियों का ऐसा मजाक उड़ाया था। 500 करोड़, जब मैंने देखा तो कितना खर्च होगा। तब वन रैंक, वन पेंशन लागू पड़ेगा। OROP लागू करना है तो 500 करोड़ से कुछ नहीं होना था। जब हिसाब निकाला तो करीब-करीब साढे बारह हजार करोड़ रुपया। कितना ...? साढ़े बारह हजार करोड़ रुपया। कितना ...। कितना ...। जरा जोर से बोलिए। साढ़े बारह हजार करोड़ रुपया जब खर्च करेंगे तब OROP लागू होता है। आप मुझे बताइये। 500 करोड़ लिख कर के फौज की मजाक उड़ाई थी कि नहीं। फौज को अपमानित किया था कि नहीं किया था। हमने तय किया हम लागू करेंगे। लेकिन सरकार के खजाने में इतनी बड़ी रकम एकमुश्त देना मुश्किल होता है तो मैंने फौज के लोगों को बुलाया, निवृत्त सैनिकों को बुलाया। मैंने उनसे बात कि मैने कहा भाईमुझे OROP देना है, लेकिन मुझे आपकी मदद चाहिए। एक मिनट नहीं लगा। मेरे फौजियों ने एक मिनट नहीं लगायाउन्होंने कहा साहब हम तो जिंदगी से खेलने वाले लोग हैं और भारत का प्रधानमंत्री हमसे मदद मागें। बोले आप जो कहें, मदद करने के लिए तैयार हैं। मैंने उनसे कहा देखो भाई एक साथ इतनी बड़ी रकम नहीं दे पाउंगा। मुझे देना है लेकिन तीन या चार किस्त में देना चाहूंगा आपकी मुझे सहमति चाहिए।   

भाइयों और बहनों

आज मैं गर्व से कहता हूं। 40 साल से सवाल लटका था। लेकिन मेरे फौजियों को जब मैंने कहा तो सिर्फ एक मिनट लगा। एक मिनट में उन्होंने कह दिया। साहब आपने कह दिया, हमारा आप पर भरोसा है। आप आगे बढ़ो। देखिए मेरे फौज के लोगों को मिजाज देखिए और हमने लागू किया। अब तक करीब-करीब साढ़े छह हजार करोड़ रुपया हमने दे दिया। और बाकी जो है आने वाले इस बजट के दरम्यान आपको मिल जायेगा। ये काम ऐसे होता है भाई। इतना ही नहीं, जब सातवां पे कमीशन का रिपोर्ट आया। पे कमीशन में लिखा हुआ नहीं था। हमारी सरकार ने निर्णय किया कि सातवां पे कमीशन हमारे फौजियों को पुराने नियमों से लागू नहीं करेंगे। वन रैंक, वन पेंशन के बाद उसका जो तनख्वाह है, उसके हिसाब से उनका सातवां पे कमीशन भी लागू करेंगे। मेरे निवृत्त फौजियों को डबल फायदा हो गया। एक OROP का और दूसरा सातवें पे कमीशन का अधिक बढ़ोतरी का फायदा। भाइयों और बहनोंजब सेना के प्रति प्यार हो देश के लिए मर मिटने वालो के प्रति सम्मान का भाव हो, तब सरकार ऐसे फैसले करती है और हमने किया।

भाइयों और बहनों

हमारे देश में जो लोग मेरे भाषण सुनते होंगे। यहां तो लोगों को पता होगा क्योंकि फौज की परिवार है यहां, लेकिन जो टीवी पर सुनता होंगे, उनको आश्चर्य होगा। जो बात मै बताने जा रहा हूं। फौजी सेना में लड़ाई लड़ता है, घायल हो जाता है, शरीर का कोई अंग बेकार हो जाता है, निवृत के लिए घर आ जाता है। बाद में डॉक्टर तय करते हैं, उसकी इनजरी 20%, 30%, 40% है, 50% है, 60% है, 70% है, 80% है, 90% है, 100% है और उसके हिसाब से उसको आर्थिक मदद दी जाती है और ज्यादातर फौजियों के कोर्ट-कचहरी में केस चल रहे हैं। वो कहता है मेरा नुकसान 50% का है तो डॉक्टर 10 प्रतिशत लिखता है। मुझे जो मदद मिलने चाहिए मिलते नहीं है। सरकार के साथ उसका झगड़ा चलता रहता है निवृत होने के बाद भी चिठ्ठी-चपाठी चलते रहता है। हमने आकर के एक बड़ा फैसला कर लियाहमने कहा कि ये 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70 ये चक्करबाजी बंद करिए। अब वो अगर घायल है तो उसको 50% तुंरत मान लिया जायेगा। दूसरा 50 से 75 और तीसरा 75 से 100।

भाइयों और बहनों

इसके कारण फौजियों की सारी समस्यों का सालो से लटकी पड़ी है, उसका समाधान कर दिया। इस प्रकार से काम करते है भाइयों और बहनों। हमारे फौजी घायल होते हैं। उनके परिवार के आरोग्य की सुविधा दूर-दूर जाना पड़ता है और फिर भी सुविधा मिलती नहींहमने आकर के देश के अलग-अलग कोने में 500 नये अस्पताल पैनल पर ले लिया ताकि हमारा फौजी उस अस्पतालों में जाकर के भी अगर बिमार है तो सार-वार ले सकता है। निवृत फौजी का परिवार सार-वार ले सकता है कैसलैस सार-वार ले सकता है ये काम हमने कर के दिखाया आते ही निर्णय कर लिया।  

भाइयों और बहनों।

हमारे यहां हवलदार तक के जो फौजी होते हैं, यहां हवालदार तक के, निवृत्त होने का बाद भी, अगर उसकी बेटी की शादी हो तो उसको 16 हजार दिया जाता है ताकि देश के लिए जीकर के आया है, निवृत्त हुआ है, हवलदार ही रहा है। आई-पी बहुत कम रहा है। बिटिया की शादी कैसे करेगा। भारत सरकार 16 हजार रुपया देती थी। हमने आकर के तय किया। वक्त बदल चुका है। अब 16 हजार से कुछ काम नहीं होगा। हमने आते ही बिटिया की शादी अगर फौजी की बेटी की है, तो 16 हजार से तीन गुना कर दी, तीन गुना कर दी। तीन गुना कर दी भाइयों और बहनों। ताकि मेरे फौजी, मेरा निवृत फौजी उसको परिवार की चिंता उसमें बोझ हल्का करने में सरकार भी सक्रियता से काम करे।  

भाइयों और बहनों।

हमारे फौजियों के कल्याण के लिए योजनायें चलती है और योजनाओं के तहत हमारे फौजियों को अलग-अलग मदद मिलती है भाइयों और बहनों। रक्षा मंत्री के विवेकाधीन जो फंड रहता है, उससे जो पहले जो मदद दी जाती है। हमने आकर के देखा निवृत्त फौजियों की संख्या इतनी है, इतनी रकम में निवृत्त फौजियों का भला नहीं हो सकता। हमने आकर के रक्षामंत्री के विवेकाधीन जो रकम थी। उसको भी चार गुना कर दिया, चार गुना। ताकि मेरे फौजियों के परिवार को मदद मिले। एक बड़ा काम किया है, जो आने वाले युगों तक देश में फौज से जुड़े हुये लोग याद रखेंगे। फौजी जब रिटायर्ड होता है। छोटी आयु में रिटायर्ड होता है, फिर नौकरी तलाशता है, काम तलाशता है लेकिन उसको जल्दी काम नहीं मिलता है। हमने एक ऐसा रास्ता खोजा है यहां हर नौजवान ये सुनकर कर के उसको खुशी होगी, हमने एक ऐसी योजना बनाई है, जब फौजी को निवृत्त होना है, उसका एक साल जब बाकी होगा। तब उसका, उसके रूचि के अनुसार स्किल डेवलपमेंट किया जायेगा। स्पेशल ट्रेनिंग की जायेगी और फौज के बाहर नौकरी के लिए जिस प्रकार स्किल चाहिए। वो उसको स्किल सिखाई जायेगी। उसको ऑफिसियल सर्टिफिकेट दिया जायेगा और ताकि वो निवृत्त हो कर के जैसे ही निकलेगा वो सर्टिफिकेट, वो अनुभव उसको जिंदगी को आगे जीने के लिए, काम आ जायेगाकहीं भी उसको काम मिल जायेगा, भारत सरकार के स्किल डेवलपमेंट के साथ मेरे फौजियों के लिए काम किया।  

भाइयों और बहनों।

अकेले छोटा सा मेरा उत्तराखंड, अकेले उत्तराखंड में एक लाख निवृत फौजियों को ये सारे लाभ मिल रहे हैं। एक लाख परिवारों को फायदा जा रहा है। आप कल्पना कर सकते हैं। इतने कम समय में कोई सरकार इतने बड़े फैसले एक फौज के लोगों के लिए कर ले, उस सरकार के दिल में फौज के लिए कितना आदर होगा। उस भारतीय जनता पार्टी के दिल में फौज के लिए कितना आदर होगा। वो प्रधानमंत्री के मन में फौज लिए कितनी श्रद्धा होगी तब जा के ऐसे निर्णय होते हैं।

भाइयों और बहनों।

हमारे जवान तो फौज में होते हैं लेकिन जिन वीर माताओं ने मेरे फौजियों को जन्म दिया। वीरों को जन्म दिया। उन माताओं की भी सेवा मैं करना चाहता हूं। दिया। उन माताओं की सेवा करना मेरे जीवन की सदभाग्य मानता हूं। ऐसी मां की सेवा, जिसने अपने संतानों को मातृभूमि के लिए दे दिया है, उन माताओं की मै जितनी सेवा करूं, उतनी कम है।  

भाइयों और बहनों।

हमारे देश में पहाड़ों में खाना पकाना होना हो। चाय भी बनानी हो। इतनी लकड़ी जलानी पड़ती है और जंगलों से लकड़ी आती है वो भी सूखी लकड़ी मिलती नहीं है। खाना पकाने में देर, चाय बनाने में देर और लकड़ी जला के चुल्हा जलाते हैं तो इतना धुआं होता है, उतना धुआं होता है कि एक मां जब लकड़ी के चुल्हे से खाना पकाती है। एक दिन में उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुआं जाता है,  400 सिगरेट का धुआंआप मुझे बताइये। अगर मेरी माताओं के शरीर में हर दिन खाना पकाने के कारण 400 सिगरेट का धुआं अगर जाता है तो उस मां की तबीयत का हाल क्या होता होगा। उस परिवार में बच्चों का तबीयत का हाल क्या होता होगा। जंगल कटते होंगे, पर्यावरण का कितना नुकसान होता होगा। हमने निर्णय किया इन माताओं को गैस का कनेक्शन दिया जाएगा। गैस का सिलेंडर दिया जाएगा। मुफ्त में दिया जाएगा। और उनको ये 400 सिगरेट उससे बचाया जाएगा। आज मुझे खुशी है, पूरे देश में एक करोड़ 80 लाख परिवारों को हम दे चुके हैं और उत्तराखंड जैसा छोटे राज्य में एक लाख परिवारों में पिछले 4 महीने के अंदर-अंदर राज्य एक लाख परिवारों में गैस का चुल्हा, गैस का कनेक्शन पहुंचा दिया है। एक रुपया के भ्रष्टाचार किये बिना पहुंचा दिया है।

भाइयों और बहनों।

ये सरकार नौजवानों की सेवा करना चाहती है। आप मुझे बताइये। आज नौकरी बिना रिश्वत दिए बिना मिलती है क्या? जरा जोर से बताइये। रिश्वत के बिना नौकरी मिलती है क्या ...? कितना ही होनहार लड़का क्यों न हो, कितनी ही होनहार बेटी क्यों न हो, परीक्षा में उत्तम से उत्तम मार्क आये हों, रिटन एक्जाम में बहुत अच्छा किया हो, फिर इंटरव्यू आता है। इंटरव्यू आता है तो मां कहती है बेटा इंटरव्यू तो आ गया लेकिन पहचान होनी चाहिए। सिफारिश होनी चाहिए, देखो कोई है, जो मदद करे, तो पूरा परिवार लग जाता हैबेटे का इंटरव्यू आया है, बेटी की इंटरव्यू आया है। कहीं कोई पहचान वाला मिल जाये। कोई बिचौलिया मिल जाता है, कहता है नौकरी दिलवा दूंगा। 2 लाख दे दो।  नौकरी दिलवा दूंगा, 5 लाख दे दो। ये होता है कि नहीं होता है ...। और गरीब मां, गरीब मां अपने गहने बेच कर के, अपना मंगलसूत्र गिरवी रख कर के, गरीब बाप अपने जमीन गिरवी रख कर के 2 लाख, 5 लाख रुपया रिश्वत में देता है। और तब जा कर के वो इंटरव्यू से निकल कर के नौकरी पाता है। आप मुझे बताइये। क्या दुनिया में कोई विज्ञान है क्या? तीन लोग बैठे हैं, एक उम्मीदवार अंदर आता है, 30 सेकेंड खड़ा रहता है कमरे में, 30 सेकेंड कोई एकाध चीज पूछ लेता है, कहां से आये, क्या नाम है। वो दूसरे दरवाजे से निकल जाता है। ये हो गया इंटरव्यू, क्या दुनिया में ऐसा कोई विज्ञान है क्या?  30 सेकेंड में आपको पूरी तरह जान लेजान सकते हैं क्या ...? 30 सेकेंड में कोई जान सकता है क्या? ये इंटरव्यू फरेब है कि नहीं है ...? फरेब है कि नहीं है ...? देखने का मात्र काम करते हैं लेकिन जो पैसे मिले हैं उनको आर्डर कर दिया जाता है।

भाइयों और बहनों।

दिल्ली में आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया। मैने एक ऐसा काम कर दिया। ऐसा काम कर दिया। मैंने कहा वर्ग 3, वर्ग 4 जो सरकार में सबसे ज्यादा नौकरी उसी में होती है, वर्ग 3 और वर्ग 4 अब उसके इंटरव्यू नहीं होगा। लिखित परीक्षा में जो पास होगा कंप्यूटर में जायेगा, कंप्यूटर जो सबसे ज्यादा मार्क वाले लड़के-लड़कियां हैं, उनको नौकरी का आर्डर दे देगी। कोई इंटरव्यू नहीं, कोई भ्रष्टाचार नहीं, कोई बिचौलिया नहीं, कोई मां-बाप को घर बेचने की बारी नहीं। ये काम हो सकता है कि नहीं ...। ये काम कर के दिखाया।

मेरे नौजवान भाइयों और बहनों।

ये लुट करने वालों के खिलाफ मेरा लड़ाई का हिस्सा है। हमने उत्तराखंड सरकार को कहा आप ये इंटरव्यू बंद करो। ये बिचौलिया बंद करो, ये रुपया खाने वालों की दुकान बंद करो। उत्तराखंड की सरकार ने हमारी बात नहीं मानी। इसीलिए भाइयों और बहनों। देश को भ्रष्टाचार ने तबाह कर के रखा है कालेधन ने बर्बाद कर के रखा है। बड़े-बड़े लोगों के घर में नोटों के बंडल के बंडल भरे पड़े थे। लुट के पैसे, चोरी के पैसे, बेईमानी के पैसे।

भाइयों और बहनों।

आठ नवंबर को रात के आठ बजे टीवी पर मैंने आ कर के,  मैंने कह दिया लुटने वालों का खेल खत्म। भाइयों और बहनों। 70 साल तक जिन्होंने लुटा है, उनका सारा खेल खत्म हो चुका है। पाई-पाई का हिसाब जमा करना पड़ रहा है। और मेरे प्यारे देशवासियों आपको वादा करता हूं, जिन्होंने देश को लुटा है। उनको सब कुछ लौटाना पड़ेगा। और जब तक मैं काम पूरा नहीं कर लेता हूं ना मैं चैन से बैठूंगा, ना मै लुटेरों को चैन से बैठने दूंगा।

भाइयों और बहनों।

ये गरीब का पैसा है, ये गरीब के हक को लुटा गया है, ये मध्यम वर्ग का शोषण कर के पैसे मारा गया है और इसलिए मैंने इतना बड़ा अहम कदम उठाया है और मैं रुकने वाला नहीं हूं। मेरे प्यारे भाइयों और बहनों। सवा सौ करोड़ देशवासी हिम्मत के साथ खड़े रहे, तकलीफ झेल कर भी खड़े रहे। और इसलिए लड़ाई लड़ने की मेरी ताकत बहुत बढ़ गई है। अब एक-एक का हिसाब होने वाला है, कोई बचने वाला नहीं है। और इसलिए भाइयों और बहनों। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।

मैं हैरान हूं। उत्तराखंड में हरदा टैक्स चलता है, हरदा टैक्स, ना भारत सरकार में हरदा टैक्स था, ना उत्तर प्रदेश में था। एक ऐसे महाशय आ गये, हरदा टैक्स चालू हो गया। मैं हैरान हूं। एक मुख्यमंत्री इस प्रकार की भाषा बोले, वो जिस प्रकार से भारत सरकार के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। मै आपको बताना चाहता हूं। तपोवन, विष्णुगढ़, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट चार हजार करोड़ रुपया के लागत वाला प्रोजेक्ट, मै जब से केन्द्र मे बैठा हूं। चार हजार करोड़ रुपया के इस प्रोजेक्ट को लागू कराने के लिए, जी-जान से जुटा हूं। चार हजार करोड़ रुपया रेडी पड़ा है। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना है कि उत्तराखंड सरकार ने इको सेंसिटिव जोन का डिलीमिटेशन इतनी ढीली कर दी है। वो प्रोजेक्ट आज भी लटका पड़ा है और चार हजार करोड़ रुपया जो  उत्तराखंड के लिए लगने वाले थे। वो सड़ रहे हैं भाइयों, बताइये। ऐसी निकम्मी सरकार आपका भाग्य बदल सकती है।

भाइयों और बहनों।

टेरी पम्प स्टोरेज का प्रोजेक्ट, पावर प्लांट का 3 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन डेबरी उसको कहा डालना, इसका फैसला नहीं कर पा रहे हैं।  उसके कारण ये 3 हजार करोड़ रुपया का प्रोजेक्ट भी लटका पड़ा है। गंगा सफाई अभियान, नमामी गंगे योजना, मैने मुख्यमंत्रियों की मिटिंग बुलाई थी। उनको कहा था योजना बनाई, आप हैरान होंगे। वो प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी नहीं बना पाते हैं। अभी बड़ी मुश्किल से दिसंबर में टेंडर निकला

भाइयों और बहनों।

दिल्ली सरकार पैसे देने के लिए तैयार बैठी है। ये ऐसी निकम्मी सरकार है कि दिल्ली में ऐसी सरकार पैसे देने को तैयार है, इनके पास कागजी करवाई करने की हिम्मत नहीं है। योजना नहीं, समझ नहीं, इरादा नहीं और उसके कारण विकास अटका पड़ा है। भाइयों और बहनों। हमने नेपाल के साथ मिलकर के पंचेश्वर का काम, कांग्रेस के जमाने से 23 साल से अटका हुआ था, 23 साल से, ये पंचेश्वर पावर प्रोजेक्ट हो जायेगा। इस पिथौड़ागढ़ को कितना फायदा होगा। इसको आप अंदाज लगा सकते हैं। 6 हजार करोड़, 6 हजार मेगावाट का प्रोजेक्ट, करीब-करीब 35 हजार करोड़ रुपया का प्रोजेक्ट, आप कल्पना कर सकते हैं।  35 हजार करोड़ रुपया ये पंचेश्वर में जब लगेगा। इस इलाके के कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। आप कल्पना कर सकते हैं।  

भाइयों और बहनों।

हमें विकास के नये उच्चाईयों पर पहुंचाना है। ये मेरा उत्तराखंड, ये देवभूमि है, ये उत्तराखंड जहां पहाड़ है। ये उत्तराखंड जहां परमेश्वर का वास है। ये उत्तराखंड जहां भरपूर पानी है। ये उत्तराखंड जहां पर जड़ी-बूटी के काम आने वाले उत्तम से उत्तम पौधें हैं। ये उत्तराखंड जहां पर भरपूर उत्तम पर्यावरण है। जिसके पास पहाड़ हो, परमेश्वर हो, पानी हो, पौधा हो, पर्यावरण हो, उस राज्य को पैसे की कभी कमी नहीं हो सकती है। वो आवश्कयता है, अच्छी सरकार की, आवश्कयता है उत्तराखंड को समझ के आगे बढ़ाने वाली अच्छी सरकार की और इसलिए आपकी ये जो पांच शक्तियां है परमेश्वर का वास है, पहाड़ है, पानी है, पर्यावरण है, पौधे हैं। उसको लेकर के हम उत्तराखंड को आगे बढ़ाना चाहते हैं। जहां पैसे खींच कर के चले। मेरे उत्तराखंड का भाग्य बदल जायेगा। मेरे साथ पूरी ताकत के साथ बोलना है भाइयों और बहनों। चुनाव कब है, मतदान कब है, ऐसे नहीं पूरी ताकत से बताओ। मतदान कब है ...। कब है मतदान,15 तारीखकब है ...पक्का ...। मतदान करोगे ...। औरों से भी मतदान करवाओगे ...। कमल के निशान पर बटन दबाओगे ...। उत्तराखंड में उत्तराखंड का भाग्य बदलने वाली भाजपा की सरकार बनाओगे ...। भाइयों और बहनों। इतना आपका प्यार, इतना आपका आशीर्वाद। मैं आपका बहुत-बहुत अभारी हूं। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिएभारत माता की जय। पूरी ताकत से बोलिए। भारत माता की जय। भारत माता की जय।    भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Today's India is an aspirational society: PM Modi on Independence Day

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What is PM Modi's role in Union Budget? FM Nirmala Sitharaman reveals

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Text of PM’s address at Khel Mahakumbh in Jaipur
February 05, 2023
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“Victory is ensured when there is learning involved”
“The youth of Rajasthan always come ahead of the rest when it comes to the security of the nation”
“The successful organisation of Jaipur Mahakhel is the next important link towards India’s efforts”
“The country is forging new definitions and creating a new order in the Amrit Kaal”
“The Sports Budget of the country has increased almost three times since 2014”
“Sports universities are being set up in the country, and big events like Khel Mahakumbh are also being organised in a professional manner”
“Our government is attentive that no youth should be left behind due to lack of money”
“You will be fit, only then you will be superhit”
“Rajasthan's Shree Anna-Bajra and Shree Anna-Jwar are the identity of this place”
“Today's youth does not want to remain confined to just one field due to their multi-talented and multi-dimensional capabilities”
“Sports is not just a genre, but an industry”
“When efforts are made wholeheartedly, results are assured”
“The next gold and silver medalists for the country will emerge from among you”

जयपुर ग्रामीण के सांसद और हमारे सहयोगी भाई राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सभी खिलाड़ी, कोच गण और मेरे युवा साथियों!

सबसे पहले तो जयपुर महाखेल में मेडल जीतने वाले, इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रत्येक खिलाड़ी, कोच और उनके परिजनों को बहुत-बहुत बधाई। आप सब जयपुर के खेल मैदान में केवल खेलने के लिए नहीं उतरे। आप जीतने के लिए भी उतरे, और सीखने के लिए भी उतरे। और, जहां सीख होती है, वहाँ जीत अपने आप सुनिश्चित हो जाती है। खेल के मैदान से कभी कोई खिलाड़ी, खाली हाथ नहीं लौटता।

साथियों,

अभी हम सभी ने कबड्डी के खिलाड़ियों का शानदार खेल भी देखा। मैं देख रहा हूं, आज के इस समापन समारोह में कई ऐसे चेहरे मौजूद हैं जिन्होंने खेलों में अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। एशियन गेम्स के मेडलिस्ट राम सिंह दिख रहे हैं, ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित पैरा एथलीट भाई देवेंद्र झांझड़िया दिख रहे हैं, अर्जुन अवॉर्डी साक्षी कुमारी और अन्य सीनियर खिलाड़ी भी हैं। यहां आए खेल जगत के इन सितारों को जयपुर ग्रामीण के खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते देख मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है ।

साथियों,

आज देश में खेल प्रतिस्पर्धाओं और खेल महाकुंभों का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वो एक बड़े बदलाव का प्रतिबिंब है। राजस्थान की धरती तो अपने युवाओं के जोश और सामर्थ्य के लिए ही जानी जाती है। इतिहास गवाह है, इस वीर धरा की सन्तानें रणभूमि को भी अपने शौर्य से खेल का मैदान बना देती हैं। इसलिए, अतीत से लेकर आज तक, जब भी देश की रक्षा की बात आती है तो राजस्थान के युवा कभी किसी के पीछे नहीं होते हैं। यहाँ के युवाओं के इस शारीरिक और मानसिक सामर्थ्य को विकसित करने में राजस्थानी खेल परम्पराओं का बड़ा योगदान रहा है। सैकड़ों वर्षों से मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाला खेल 'दड़ा',‘दड़ा’ हो, या बचपन की यादों से जुड़े तोलिया, रूमाल झपट्टा, जैसे परंपरागत खेल हों, ये राजस्थान की रग-रग में रचे बसे हैं। इसीलिए, इस राज्य ने देश को कितनी ही खेल प्रतिभाएं दीं हैं, कितने ही मेडल्स देकर तिरंगे की शान को बढ़ाया है, और आप जयपुर वालों ने तो आपने तो सांसद भी ओलंपिक पदक विजेता चुना है। मुझे खुशी है कि, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जी उनको देश ने जो दिया है, उसे वो 'सांसद खेल स्पर्धा' के जरिए नई पीढ़ी को लौटाने का काम कर रहे हैं। हमें इन प्रयासों को और विस्तार देना है, ताकि इसका प्रभाव और भी व्यापक हो। 'जयपुर महाखेल' का सफल आयोजन हमारे ऐसे ही प्रयासों की अगली कड़ी है। इस वर्ष 600 से ज्यादा टीमों का, साढ़े 6 हजार युवाओं का इसमें भाग लेना, इसकी सफलता का प्रतिबिंब है। मुझे बताया गया है कि इस आयोजन में बेटियों की भी सवा सौ से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया हैं। बेटियों की ये बढ़ती हुई भागीदारी, एक सुखद संदेश दे रही है।

साथियों,

आजादी के इस अमृतकाल में, देश नई-नई परिभाषाएं गढ़ रहा है, नई व्यवस्थाओं का निर्माण कर रहा है। देश में आज पहली बार खेलों को भी सरकारी चश्मे से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की नज़र से देखा जा रहा है। मैं जानता हूं, युवा भारत की युवा पीढ़ी के लिए असंभव कुछ भी नहीं है। युवाओं को जब सामर्थ्य, स्वाभिमान, स्वावलंबन, सुविधा और संसाधन की शक्ति मिलती है, तो हर लक्ष्य आसान हो जाता है। देश की इस अप्रोच की झलक इस बार के बजट में भी दिखाई दे रही है। इस बार देश के बजट में खेल विभाग को करीब 2500 करोड़ रुपए का बजट मिला है। जबकि 2014 से पहले खेल विभाग का बजट आठ सौ, साढ़े आठ सौ करोड़ रुपए के आसपास ही रह जाता था। यानि 2014 के मुकाबले देश के खेल विभाग के बजट में लगभग तीन गुना बढोतरी हुई है। इस बार, अकेले 'खेलो इंडिया' अभियान के लिए ही 1 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बजट दिया गया है। ये पैसा खेल से जुड़े हर क्षेत्र में संसाधनों और सुविधाओं का निर्माण करने की दिशा में काम आएगा।

साथियों,

पहले देश के युवाओं में खेल का जज्बा तो होता था, प्रतिभा भी होती थी, लेकिन अक्सर संसाधन और सरकारी सहयोग की कमी हर बार आड़े आ जाती थी। अब हमारे खिलाड़ियों की इस चुनौती का भी समाधान किया जा रहा है। मैं आपको इस जयपुर महाखेल का ही उदाहरण दूंगा। जयपुर में ये आयोजन बीते 5-6 वर्षों से चल रहा है। ऐसे ही देश के कोने-कोने में भारतीय जनता पार्टी के सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में खेल महाकुंभों का आयोजन करवा रहे हैं। इन सैकड़ों खेल महाकुंभों में हजारों युवा, हजारों प्रतिभावान खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में भाग ले रहे हैं। सांसद खेल महाकुंभ की वजह से देश की हजारों नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आ रही हैं।

साथियों,

ये सब इसलिए मुमकिन हो पा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार अब जिला स्तर और स्थानीय स्तर तक स्पोर्ट्स फैसिलिटीज़ बना रही है। अब तक देश के सैकड़ों जिलों में लाखों युवाओं के लिए स्पोर्ट्स इनफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। राजस्थान में भी केंद्र सरकार द्वारा अनेक शहरों में स्पोर्ट्स इंफ्रा का निर्माण हो रहा है। आज देश में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज़ भी बन रहीं हैं, और खेल महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन भी प्रोफेशनल तरीके से हो रहे हैं।

इस बार नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी को भी अधिकतम बजट प्रदान किया गया है। हमारा प्रयास है कि स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर विद्या को सीखने का माहौल बने। जिससे युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने का अवसर मिलेगा।

साथियों,

पैसे की कमी के कारण कोई युवा पीछे न रह जाए, इस पर भी हमारी सरकार का ध्यान है। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को केंद्र सरकार अब सालाना 5 लाख रुपए तक की मदद करती है। प्रमुख खेल पुरस्कारों में दी जाने वाली राशि भी तीन गुना तक बढ़ा दी गई है। ओलंपिक जैसी बड़ी वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी अब सरकार पूरी शक्ति से अपने खिलाड़ियों के साथ खड़ी रहती है। टॉप्स TOPS टॉप्स जैसी स्कीम के जरिए वर्षों पहले से खिलाड़ी ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं।

साथियों,

खेल में आगे बढ़ने के लिए किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी होता है- अपनी फ़िटनेस को मेनटेन रखना। आप फिट होंगे, तभी सुपरहिट होंगे। और, फ़िटनेस तो जितनी खेल के ही मैदान में जरूरी होती है, उतनी ही ज़िंदगी के मैदान में भी जरूरी होती है। इसीलिए, आज खेलो इंडिया के साथ-साथ देश के लिए फिट इंडिया भी एक बड़ा मिशन है। हमारी फ़िटनेस में बहुत बड़ी भूमिका हमारे खान-पान की, हमारे पोषण की भी होती है। इसलिए, मैं आप सबसे एक ऐसे अभियान की चर्चा भी करना चाहता हूँ, जिसकी शुरुआत तो भारत ने की, लेकिन अब वो एक ग्लोबल कैम्पेन बन गया है। आपने सुना होगा, भारत के प्रस्ताव पर यूनाइटेड नेशंस UN वर्ष 2023 को इंटरनेशनल मिलेट ईयर के तौर पर मना रहा है। और राजस्थान तो मिलेट्स यानी, मोटे अनाजों की एक बेहद समृद्ध परंपरा का घर है। और अब देशव्यापी उसकी पहचान बने इसलिए ये मोटे अनाज को श्री अन्न इस नाम से लोग जाने यह बहुत आवश्यक है। इस बार बजट में भी इस बात का उल्लेख किया गया है। ये सुपर फुड है, ये श्री अन्न है। और इसलिए राजस्थान का श्री अन्न- बाजरा, श्री अन्न- ज्वार, ऐसे अनेक मोटे अनाज ये श्री अन्न के नाम के साथ अब जुड़ गए हैं, उसकी पहचान है। और ये कौन नहीं जानता जो राजस्थान को जानता है। ये हमारे राजस्थान का बाजरे का खीचड़ा और चूरमा क्या कोई भूल सकता हैं क्या? मेरा आप सभी युवाओं से विशेष आवाहन होगा, आप अपने खाने में श्री अन्न, श्री अन्न यानी कि मोटे अनाजों को तो शामिल करें। इतना ही नहीं स्कूल, कॉलेज युवा पीढ़ी में खुद ही उसके ब्रांड एंबेसडर बन करके लग पड़िए ।

साथियों,

आज का युवा केवल एक क्षेत्र में सिमटकर नहीं रहना चाहिए। वो multi-talented भी है, और multi-dimensional भी है। देश भी इसीलिए युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रहा है। एक ओर युवाओं के लिए आधुनिक स्पोर्ट्स इनफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, तो साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी का भी प्रस्ताव इस बजट में किया गया है। नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए विज्ञान, इतिहास, समाजशास्त्र, संस्कृत जैसी भाषाएं हर विषय की किताबें शहर से गाँव तक, हर स्तर पर डिजिटली उपलब्ध होंगी। ये आप सबके लर्निंग एक्सपिरियन्स को नई ऊंचाई देगा, सारे resources आपके कम्प्युटर और मोबाइल पर उपलब्ध करवाएंगे।

साथियों,

स्पोर्ट्स केवल एक विद्या ही नहीं है, स्पोर्ट्स एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री भी है। स्पोर्ट्स से जुड़ी चीजें और संसाधान बनाने से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलता है। ये काम ज़्यादातर हमारे देश में लघुउद्योग MSMEs करती हैं। इस बार बजट में स्पोर्ट्स सेक्टर से जुड़ी MSMEs को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ हुईं हैं। मैं आपको एक और योजना के बारे में बताना चाहता हूं। ये योजना है- पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना। ऐसे लोग जो अपने हाथ के कौशल से, हाथ द्वारा चलाए जाने वाले औजारों से स्वरोजगार करते हैं, सृजन करते हैं, निर्माण करते हैं उन्हें ये योजना बहुत मदद करेगी। उन्हें आर्थिक सहयोग से लेकर उनके लिए नए बाजार बनाने तक, हर तरह की मदद, पीएम विश्वकर्मा योजना द्वारा दी जाएगी। हमारे युवाओं के लिए ये भी रोजगार के, स्वरोजगार के बड़े अवसर बनाएगी।

साथियों,

जहां प्रयास पूरे मन से होते हैं, वहाँ परिणाम भी सुनिश्चित होते हैं। देश ने प्रयास किए, परिणाम हमने टोक्यो ओलंपिक्स में देखा, कॉमनवेल्थ खेलों में देखा। जयपुर महाखेल में भी आप सबके प्रयास भविष्य में ऐसे ही शानदार परिणाम देंगे। आपसे ही देश के लिए अगले गोल्ड और सिल्वर मेडलिस्ट निकलने वाले हैं। आप अगर ठान लेंगे, तो ओलंपिक्स तक में तिरंगे की शान बढ़ाएँगे। आप जिस क्षेत्र में जाएंगे, वहाँ देश का नाम रोशन करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे युवा देश की कामयाबी को बहुत आगे तक लेकर के जाएंगे। इसी भावना के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।