नमस्ते। चलिए आज छुट्टी का दिन है। आप लोगों ने सोचा होगा कि परिवार के साथ कुछ समय बिताएंगे। शायद आपलोगों ने छोटी-मोटी कार्यक्रमों की रचना भी कर दी होंगी। मैं सोच रहा था कि आप लोगों से थोड़ी गप्पे गोष्ठी कर लूं। और मेरे लिए खुशी है। और मैं विशेषकरके पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई शाह का और पार्टी के पदाधिकारियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं कि मुझे आज सभी विधायक और सभी एमपीज के साथ बातचीत करने का मौका मिला है।
एक जनप्रतिनिधि के नाते भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। हम विपक्ष में रहे तो एक सजग प्रहरी के रूप में काम किया और रिस्पांसिबल अपोजिशन के रूप में हम सबको काम करने का अवसर मिला। जब हम आज देश की जनता ने हमें सत्ता के माध्यम से सेवा का अवसर दिया है तो उसमें हमारी विपक्ष में जो तपस्या है उसकी बहुत बड़ी भूमिका है। क्योंकि हम आज इसलिए नहीं जुटे हैं कि कांग्रेस ने गलतियां की और उसका हमें फायदा मिल गया है।
आज हम इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि हम लगातार जनता से जुड़े रहे हैं। हमारा पंचायत प्रधान हो, पंचायत का सदस्य हो, नगर पालिका का प्रधान हो, नगर पालिका का सदस्य हो, एमएलए हो, एमपी हो, हम लोगों की आदत रही है जनता के साथ जुड़े रहने की। आपने देखा होगा कि हमारे जो विधायक पांच-पांच, सात-सात, नौ-नौ बार एक ही सीट पर से जीतकर आते हैं।
उस पर बारीकी से नजर देखेंगे तो वो अपने क्षेत्र में कोई भी सुख-दुख की घटना ऐसी नहीं होगी कि जहां वो पहुंचते नहीं होंगे, पारिवारिक नाता बना लेते हैं। कार्यकर्ताओं के साथ, वैचारिक परिवार के साथ, सहमना लोगों के साथ बहुत ही निकट संबंध होता है। मैंने कई विधायकों को देखे हैं जो कभी पत्रकार वार्ता नहीं करते हैं, प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते हैं लेकिन मीडिया के लोगों के साथ बहुत गहरा संबंध रहता है। उनके सुख-दुख के साथी रहते हैं वो। ये एक सफल विधायक के लिए सरकारी कामों को नीचे तक पहुंचाना और जन सामान्य की समस्याओं को ऊपर तक ले जाना, ये हमलोगों का दायित्व रहता है। और आज हम हिन्दुस्तान में किसी एक दल को सबसे ज्यादा विधायक हो तो भारतीय जनता पार्टी के हैं। और पुराने सारे मिथ खत्म हो चुके हैं।
पहले माना जाता था भारतीय जनता पार्टी याने बनिया ब्राह्मण की पार्टी, भारतीय जनता पार्टी याने शहरी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी याने एक उत्तर भारतीय पार्टी। लेकिन आज हम कह सकते हैं कि इस देश के सबसे ज्यादा दलित एमएलए-एमपी किसी के पास हैं तो भारतीय जनता पार्टी के पास हैं। सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के लोग चुनकर आए हैं तो भारतीय जनता पार्टी के चुनकर आए हैं।
ओबीसी, सबसे बड़ा ओबीसी चंक के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के हैं। भारतीय जनता पार्टी के पास सीनियरटी के हिसाब से भी, उमर के हिसाब से भी, एजुकेशन के हिसाब से भी, भारतीय जनता पार्टी ने एक बहुत बड़ा देश के जो एस्पेरेशन है, उसका प्रतिनिधित्व किया। ये हमारे लिए बहुत बड़ी पूंजी है। और हमारा काम है गरीब से भी गरीब से भी जुड़े, अमीर से अमीर लोगों से भी जुड़े, रोजगार तलाश रहे वालों से भी जुड़े, रोजगार देने वालों से भी जुड़े। जितना व्यापक जनसंपर्क होता है उतना लाभ होता है।
दूसरा जब हम सरकार में होते हैं तो जो शासन व्यवस्था होती है। तो उसका सर्वाधिक उपयोग लाजर इंटेरेस्ट में कैसे हो। कभी-कभी एकाध इंडिव्यूजल व्यक्ति कितना ही सच क्यों न हो, लेकिन अगर उसका मुद्दा लेकरके चल पड़ते हैं तो कभी-कभी शासन व्यवस्था के साथ टकराव आ जाता है। लेकिन सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय अगर कामों को हाथ में लेते हैं तो आपने देखा होगा कि सरकारी मशीनरी भी बड़े उत्साह के साथ हमारे साथ दौड़ती है। लेकिन किसी इंडिव्यूजुल का मुद्दा लेकरके अड़ गए तो फिर दोनों तरफ से टकराव पैदा होता है। और मैं मानता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को काफी एक मेच्योरिटी आई है। कुछ बातें ऐसी है कि कड़वी लगती है लेकिन बोलना जरूरी होता है।
कभी-कभी हमारे कार्यकर्ता मीडिया ऐसा करता है, मीडिया वैसा करता है। मीडिया हमारे साथ ...इस प्रकार की बातें ज्यादा करते हैं। क्या कभी हमने सोचा है कि हमहीं कुछ गलतियां करके मीडिया के लोगों को कुछ मसाला दे देते हैं। हम जैसे बहुत बड़े समाजशास्त्री हों, बहुत बड़ा विद्वान हों, हर समस्या का बहुत बड़ा एनालसिस करने के लिए जैसे ही कोई कैमरा वाले मिल गया तो हम निकल पड़ते हैं बोलने के लिए। फिर वो आधा-अधूरा वाक्य काम का है तो उपयोग करेगा। तो मीडिया का दोष नहीं है। हमें अपने आपको संयम रखना पड़ेगा। हर चीज पर जिसको बोलने की जिम्मेदारी है, उसी को बोलना चाहिए। अगर हर कोई बयानबाजी करता रहेगा तो इश्यू बदल जाते हैं। देश का भी नुकसान होता है, दल का भी नुकसान होता है और हमारे व्यक्तिगत के छवि का भी नुकसान होता है।
तो मैं जरूर जब हमारे साथी एमपीए और एमएलए से बात कर रहा हूं। और मैंने देखा है कि जब नए-नए हमारे लोकसभा बनी तो आठ-दस एमपी थे बहुत उनको बोलने की आदत थी। लेकिन जब उनसे मैंने बात की तो मैंने देखा कि पिछले तीन सालों में उन्होंने ऐसी कोई बयानबाजी नहीं की। और उसके कारण पार्टी को कोई नीचा देखने की नौबत नहीं आई। इसलिए आप मीडिया को दोष मत दीजिए। मीडिया अपना काम करता है। हमारा काम है कि हम हर चीज में उलझे नहीं। राष्ट्र को मार्गदर्शन करने के लिए टीवी के सामने खड़े न हो जाए। जिसकी जिम्मेदारी होगी, वो जरूर बताएंगे, वो बोलेंगे।
साथियों।
आपको पता होगा कि अभी झारखंड में चुनाव के नतीजे आए। मैं झारखंड के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं। लोकल सेल गर्वमेंट के चुनाव थे। स्थानीय निकाय के चुनाव थे। मेरी जानकारी है कि 80 प्रतिशत गांवों में भारतीय जनता पार्टी को गांवों में जीत मिली है। छोटे-छोटे नगर में जीत मिली है। और झारखंड में इतने वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद सामान्य मानवी का विश्वास जीतना बहुत ही संतोष की बात है। झारखंड के कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से बधाई देता हूं। और साथियों। मैं आपको बधाई देने के साथ-साथ झारखंड की जनता को भी बधाई देता हूं। क्योंकि उन्होंने विकास में विश्वास रखा है। तत्कालीन लाभ के बजाय स्थायी समाधान के रास्ते को चुना है। जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी को अवसर मिला है, वहां लगातार जनसमर्थन बढ़ता जा रहा है। लेकिन हमारा काम जनसमर्थन मिल गया, बस, चलो बहुत गया। जी नहीं। हम सिर्फ सत्ता पर पहुंच जाने के लिए जनसंपर्क है, हम वो लोग नहीं है। हम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए हमारे पद का उपयोग, व्यवस्था का उपयोग, इसको करना चाहते हैं। और इसलिए मैं आपको आग्रह करूंगा कि हम इन कामों को करें।
मुझे खुशी है कि मैंने टेक्नोलॉजी के उपयोग करते हुए पिछले दिनों कई लोगों से बात करने का अवसर मिला। आज मैं एमएलए-एमपी से कर रहा हूं। लेकिन ये मैं इसलिए नहीं कर रहा हूं कि मुझे आपको कुछ कहना है सचमुच में तो बहुत-सी बातें आपसे सीखता हूं। क्योंकि आप धरती से ज्यादा जुड़े रहते हैं। मेरा उतना नीचे जाने का अवसर मुझे कम मिलता है। आपके माध्यम से मुझे जनता की आवाज का पता चलता है। और इसलिए मैं टेक्नोलॉजी से जुड़ता हूं। लेकिन आप सोचिए जिस टेक्नोलॉजी से मैं आप तक पहुंचा हूं। वो टेक्नोलॉजी आपके मोबाइल में भी है। क्या आपके विधानसभा क्षेत्र के दो हजार तीन हजार ऐसे मजबूत कार्यकर्ता हैं जिनको आप इसी टेक्नोलॉजी से जैसे मैं बात करता हूं, वैसे ही आप भी बात कर सकते हैं। ये कोई बहुत बड़ा आसमान का साइंस नहीं है। ये आप भी कर सकते हैं। और इसलिए अब आदत डालिए, हर मनडे, सनडे या शटर डे को आप कभी एक सप्ताह महिला कार्यकर्ताओं से, कभी एक सप्ताह युवा कार्यकर्ताओं से, कभी एक सप्ताह किसान कार्यकर्ताओं से, कभी एक सप्ताह अनुसूचित जाति के कार्यकर्ताओं से, अनुसूचित जनजाति के कार्यकर्ताओं से, ऐसे संवाद की आदत डालिए। आप देखिए आपको इतना लाभ होगा। और आपके काम को भी वो सराहेंगे।
मैं तो चाहूंगा। मैंने तो एमपी से कहा है कि जो भी मेंबर ऑफ पार्लियामेंट उसके ट्वीटर फोलोअवर्स 3 लाख से ज्यादा होंगे। और अगर वो चाहता है कि मैं उसके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए 10-15 मिनट निकालूं। तो मैंने वादा किया है तो निकालूंगा। रात को 12 बजे भी बैठूंगा, सुबह 10 बजे भी बैठूंगा। जब भी मौका मिला। मैं उनसे बात करूंगा। क्योंकि मेरे लिए तो सौभाग्य है मेरे अपने कार्यकर्ताओं से बात करने का। लेकिन ये तो शर्त रहेगी कि आपको अपने फोलोअवर्स बढ़ाने होंगे।
और मैं मानता हूं कि आप अपने फोलोअवर्स को बढ़ाएंगे तो बहुत लाभ होगा। आप देखिए आपके परिवार के लोग भी अभी इस फोन पर बैठे होंगे। आपके परिवार को भी लगता होगा कि चलो भाई आज तो मोदी जी घर पर आकरके टेलिफोन पर बात कर रहे हैं। कितना आनंद आता है। क्योंकि हम एक परिवार है। हम सब सुख-दुख के साथी हैं। हमें इन बातों को आगे बढ़ाना है। मैं तो चाहूंगा कि आपलोग इसको जरूर करें।
पिछले दिनों आपने देखा होगा कि हमने एक फीडबैक मैकेनिज्म डवलप किया है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से मैंने पूछा था कि बताओ भाई कि 14 अप्रैल को बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती का कार्यक्रम कैसा रहा। मुझे इतना आनंद हुआ। मुझे इतने सारे एमपी, एमएलएज ने, कार्यकर्ताओं ने फीडबैक दिया है। मुझे इतनी सारी जानकारियां मिली। सामान्य रूप से नहीं मुझे मिल सकती है। मुझे इतनी जानकारियां मिली है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप भी ये जो मैं आपको कभी-कभी फीडबैक के लिए सवाल भेजता हूं। उन सवालों के जवाब जरूर दीजिए। आप आदत डालिए। ये बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी नहीं है। कोई बहुत बड़ी चीज नहीं है। बहुत सिम्पल चीज है। आप आराम से कर सकते हैं।
मेरा आपसे आग्रह है कि इन चीजों को दीजिए। इन फीडबैक के कारण, मुझे भी समझ में आता है कि कहीं कोई कमी रह गई तो इतनी बड़ी सरकार है, तुरंत ठीक कर सकते हैं। ये आपकी मदद से देश को कितना बड़ा लाभ हो सकता है।
आप देखिए। जीएसटी में लगातार हम सुधार क्यों कर पाए। सुधार इसलिए कर पाए क्योंकि हमारे कार्यकर्ताओं ने व्यापारी आलम के साथ बैठकरके जानकारियां दी।
हम देखिए भीम ऐप की बात करते हैं। डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात करते हैं। ये देशभक्ति का ही एक काम है, देश सेवा का काम है।
हम जितना इन टेक्नोलॉजी के माध्यम से कैश से मुक्त कराने का अभियान चलाते हैं। जिस पार्टी के पास इतना बड़ा संगठन हो, वह नहीं कर सकता है क्या। कर सकता है। आप मन में ठान लीजिए। आप कर सकते हैं। एक पोलिंग बूथ में अगर आपके पास पांच कार्यकर्ता हों जो भीम ऐप से बिजनस करते हैं। आपको कल्पना हैं, देखते ही देखते कितनी बड़ी ताकत बन जाएगी। यह देश की कितनी बड़ी सेवा होगी। आप इसको करिए। मैं आपसे आग्रह करता हूं।
आप देखिए। मेरा ग्राम स्वराज अभियान चल रहा है। मुझे खुशी है कि जहां पर दलित और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के हमारे परिवार रहते हैं। और और एक हजार से ऊपर की जनसंख्या है। ऐसे करीब 20 हजार गांवों में हमारे एमएलए रात को रूकने जा रहे हैं, हमारे एमपी रात को रूकने जा रहे हैं, हमारे राज्यों के मंत्री रात को रूकने के लिए जा रहे हैं। ये जो मुझे जानकारी दे रहे हैं, इतनी आनंददायक जानकारियां दे रहे हैं, कभी-कभी मन को इतनी प्रसन्नता देने वाली जानकारी देते हैं। बस सचमुच में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 14 अप्रैल से 5 मई तक का जो कार्यक्रम सर पर उठाया है। बहुत बड़ी सेवा होगी और बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। समाज को लाभ होने वाला है।
अच्छा। एक बड़ा बीड़ा उठाया है। सरकार की एक, आपने देखा होगा कि सरकार को एक आदत क्या है, खासकरके भारत सरकार की। एक योजना घोषित कर देना, एक नीति बना देना, एक कानून बना देना, एक नियम बना देना। उनको बस इसी में आनंद आता है। कभी सरकार इसको देखती है कि नीचे जाता है कि नहीं जाता है। इस बार हमने 20 हजार गांव छांटे हैं। जो एक हजार से ऊपर की बस्ती है। उसमें पचास प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज में रहने वाले लोग हैं। इनके विकास को इसलिए करना है क्योंकि देश को आगे बढ़ाना है तो समाज के जो आखिरी छोर में हैं, उनको ही आगे बढ़ाना होता है। और इन 20 हजार गांवों में 5-7 समस्याएं हाथ में ली है। क्या एक बार पूरी सरकार इसको हाथ में ...। आपको जानकर खुशी होगी कि मैं सिर्फ आपको दौड़ा रहा हूं ऐसा नहीं है। भारत सरकार से एक हजार अफसर आईएएस कैडर के अफसर, इन दिनों हर जिले में दो-दो अफसर गए हैं। 500 जिलों में एक हजार अफसर जाकरके बैठे हैं।
और वे इन 20 हजार गांवों में हर घर को सौभाग्य योजना का फायदा मिले, हर घर को उज्जवला योजना का लाभ मिले, इंद्रधनुष कार्यक्रम के द्वारा टीकाकरण का काम शत-प्रतिशत हो जाए, जन-धन एकाउंट में अभी भी कोई परिवार बचा है तो उस परिवार का जन धन एकाउंट हो जाए। हमारे इंश्योरेंस का लाभ और मैंने देखा है कि कुछ परिवारों ने 12 रुपए का इंश्योरेंस लिया। और परमात्मा की मेहरबानी नहीं रही उस परिवार पर। महीने दो महीने में कोई घटना घटी, तुरंत दो लाख रुपए मिल गए। आप कल्पना कर सकते हैं कि गरीब परिवार में, आपत्ति के समय दो लाख रुपए पहुंच जाना, कितनी बड़ी बात होती है। ये सारे काम इस 14 अप्रैल से 5 मई तक करने वाले हैं।
मुझे छत्तीसगढ़ में जाने का मौका मिला। नक्सलियों का जो बहुत बड़ा केंद्रबिंदु माना जाता था। वहां पर लोगों को विकास में रूचि देखकरके हमारे विधायक, हमारे सांसद और हमारे मुख्यमंत्री इतनी मेहनत करके कार्यक्रम को सफल बनाया। मैंने देखा कि सरकारी मशीनरी को भी एक ऐसा आत्मविश्वास आ गया कि हम भी ये जो इतने दिनों से बम बंदूक पिस्तौल की दुनिया से निकल करके पेड़ लगाना, मोबाइल टावर लगाना, सड़के बनाना, टॉयलेट बनाना, अब उसका हिसाब-किताब करने लगे हैं। आप देखिए किस प्रकार से समाज के आखिरी छोर को मदद मिलती है।
आप देखिए 14 अप्रैल से 5 मई के कार्यक्रम की शुरुआत करने से पहले अभी एलपीजी पंचायत किया था। तय किया था कि मैक्सिकम एलपीजी गैस कनेक्शन कैसे मिले। मुझे जो जानकारी मिली है, 15,909 गांवों में यानि करीब 16 हजार गांवों में एलपीजी पंचायत हुई। और मुझे मोटी-मोटी जानकारी है कि 45-50 लाख की तादात में एलपीजी पंचायत में खासकर लाभार्थी महिलाएं, उनके परिवार के लोग उसमें जुड़े। ये बहुत बड़ी संख्या होती है। उसमें हमारे विधायक पहुंचे, हमारे सांसद पहुंचे। और मुझे बताया गया कि एक दिन में करीब-करीब 11 लाख नए एलपीजी कनेक्शन मुफ्त में दे दिये गए। अब मुझे बताइए। इनकी जिंदगी में बदलाव आएगा कि नहीं आएगा ...।
एक गांव में 4 या 5 काम शत-प्रतिशत पूरे हो जाए। उस गांव को कितना बड़ा विश्वास बढ़ जाएगा। अभी भी समय है। आप शक्ति लगाइए। समय दीजिए। 14 अप्रैल से 5 मई तक का ये जो ग्राम स्वराज अभियान है। अब अभी आपके पास और 15 दिन बचे हैं। आप बैठेंगे नहीं, आप दौड़ेंगे।
और आपको जानकारी है। 1955 में ये गैस कनेक्शन देना शुरू हुआ। तब तो मेरी उम्र 5 साल की रही होगी। और मैंने तो कभी घर में गैस कनेक्शन देखा नहीं। हमारी मां वो लकड़ी का चूल्हा जला-जलाकरके धुआं इतना हो जाता था। अच्छा मेरा घर ऐसा था कि उसमें खिड़की भी नहीं थी। छोटा सा घर था। मैंने तो उस मुसीबतों को, अपनी मां को उस पीड़ा को देखा हुआ है। और उस समय तब से लेकरके 2014 तक इस देश में सिर्फ 13 करोड़ लोगों को। 1955 से 2014 तक करीब-करीब 65-70 सालों में, केवल 13 करोड़ परिवारों को, अब ये परिवार तो बड़े अच्छे घराने के, अच्छे परिवार, राजनीतिक परिवार, बाबूओं के परिवार, पहुंच वाले परिवार इन्हीं के घर में पहुंचा है। सामान्य वालों को तो पहुंचा नहीं। और 2014 में आने के बाद इसको बड़ा अहम मुद्दा बनाया। मुझे खुशी है कि हमने करीब-करीब 10 करोड़ गैस कनेक्शन दे दिए हैं। और आपने देखा होगा कि हमारे धर्मेन्द्र प्रधान जी ने एक वीडियो सर्कुलेट किया। आप भी उसको देखिए, मोबाइल फोन पर निकालिए। और वो भी करिए ...। कैसे हिन्दुस्तान में एलपीजी कनेक्शन का पूरा नेटवर्क बदल गया।
अभी एक दिन स्वच्छता का कार्यक्रम था। देखिए देश को स्वच्छता पसंद है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आने वाली है। मैं आपसे आग्रह करूंगा। आप सब विधायक हैं। आपको लगता है कि गांधी की 150वीं जयंती पर ये काम देश में होना चाहिए। आप सुझाव मुझे जरूर भेजिए। मुझे खुशी होगी। और गांव से जुड़े हुए मेरे विधायक जब सुझाव देते हैं ना ...। उसकी ताकत बहुत होती है। जनप्रतिनिधि कोई बात बताता है, किसी भी दल का हो। मैं राजनीति करने के लिए काम नहीं करता हूं। जमीन से जुड़ी हुई कोई सुझाव आते हैं तो उसकी एक ताकत होती है। हम स्वच्छता के अभियान को जिस प्रकार से आगे बढ़ा रहे हैं। जिस प्रकार से उसका लाभ मिल रहा है। मैं समझता हूं कि हमारी पंचायत शक्तिशाली होगी। हमारे गांव शक्तिशाली होंगी। गांव में विश्वास बैठेगा। हम मिल बैठकरके गांव को समस्याओं को बाहर निकालते हैं। गांव तय करे कि इस तीन महीने में इस समस्या से बाहर आना है। अगले तीन महीने में दूसरी समस्या से बाहर आना है। आप देखिए सरकार भी आपको मदद करने लग जाएगी।
आपने देखा होगा कि 115 हमने एस्पेरेशनल जिले निकाले हैं। आपमें से कई लोग उस इलाके के विधायक होंगे। आपमें से कई लोग उस इलाके के सांसद होंगे। ये 115 जिले ऐसे हैं, जहां आपके राज्य की जो एवरेज है, उससे भी आपका जिला पीछे है। कम से कम उस राज्य की औसत में तो आ जाए। माता मृत्यु दर हो, शिशु मृत्यु दर हो, कुपोषण की समस्या हो, पानी समस्या हो, ड्रॉप आउट की समस्या हो, बिजली की समस्या हो, जितने ... कम से कम आप अपने राज्य की औसत एवरेज में तो ले आएं। क्या ये आपका जिम्मा नहीं है। क्या ये आपका काम नहीं है।
मैं चाहूंगा कि मुझे इन 115 जिले को उस राज्य की जो एवरेज है, उसकी बराबरी में हो सके, उतनी जल्दी लाना है। फिर उस राज्य की जो बेस्ट पोजिशन है, उसमें इन 115 जिले को लेकर आना है। मैंने देखा है कि राज्य सरकारों ने होनहार नौजवानों अफसरों को अब उन 115 जिलों में एप्वाइंट करना शुरू किया है। भारत सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी लेबल के अधिकारी इन डिस्ट्रिक्ट के गार्जियन के रूप में जाकरके काम करना शुरू किया है। कितना बड़ा बदलाव का अभियान चला है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप जुड़िए।
साथियों। मुझे काफी मन करता है, काफी बातें मैं अभी तो यूके में गया था। बड़ा अच्छा अनुभव रहा। बड़ा यूनिक सा कार्यक्रम हमारे कार्यकर्ताओं ने किया। और टेक्नोलॉजी का उपयोग कर करके, मैं वहां भी दो-ढाई घंटे तक जीभरके बातें करता रहा। मुझे बहुत अच्छा लगा। इतने लोगों से मिलने का मौका मिला। आज मुझे फिर से एक बार एमएलए, एमएलए के परिवारजन, सांसद और सांसद के परिवारजन, आप सबसे बात करने का मौका मिला है।
26 तारीख को, ये कर्नाटक में नामांकन वैगरह का पूरा हो जाने के बाद मेरे मन में है कि 26 तारीख को सुबह 9 बजे मैं कर्नाटक में जो बीजेपी के कार्यकर्ता चुनाव के जंग में हैं, 26 तारीख को सुबह 9 बजे सोच रहा हूं। पार्टी जैसे तय करेगी। 26 तारीख को सुबह 9 बजे अगर पार्टी ऑर्गेनाइज कर लेती है तो मैं सिर्फ कर्नाटक के कार्यकर्ताओं के साथ कर्नाटक के चुनाव के संदर्भ में जरूर बात करना पसंद करूंगा।
मेरे पास बार-बार सिग्नलिंग आ रहा है। शायद आप कुछ सवाल पूछना चाहते हैं। जरूर पूछिए। ये एमएलए, एमपी का एक प्रकार से दिवस है। मुझे भी खुशी होगी कि हमारे एमएलए, एमपी के मन में क्या बात चल रही है मैं जरूर सुनना चाहूंगा आपलोगों को।
पीएम मोदी – बताइए आलोक जी।
भोपाल से सांसद आलोक जी – नमस्कार। मैं भोपाल और मध्य प्रदेश की जनता की ओर से प्रणाम करता हूं।
मोदी – मेरी तरफ से जनता-जनार्धन को प्रणाम करता हूं।
आलोक जी - आज का देश का सबसे बड़ा विषय जो है आजीविका एक विषय है। और स्वराज अभियान के तहत आपने इसको लिया है तो मैं आपको सच में बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं, आभार व्यक्त करता हूं। अभी-अभी आजीविका के विषय पर लोगों की समझ अपर्याप्त है। मेरा मानना है कि क्या कौशल विकास के माध्यम से इसको ठीक किया जा सकता है।
मोदी – देखिए आलोक जी आपने सही बताई। जैसे-जैसे वक्त बदलता है, काम करने का तौर-तरीके भी बदल जाता है। मुझे बराबर याद है कि जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तो मैं भाव नगर डिस्ट्रिक में एक छोटे से गांव में पानी के एक कार्यक्रम के लिए गया था। तो जब उस गांव के गलियों से गुजर करके जब कार्यक्रम में रहा था तो मैं हैरान था। छोटा सा गांव शायद उसकी जनसंख्या 800-1000 हजार होगी। मैंने बड़ा बोर्ड देखा ब्यूटी पार्लर। मैं हैरान था कि 800 हजार की आबादी वाले गांव में ब्यूटी पार्लर है और वहां से दो बच्चियां रोजी-रोटी कमा रही थी। हमें मालूम है कि कहीं कोई लौहार का भट्टी चल रही है, अपना वो बेचारा फावड़ा, कुदाली वैगरह पिटाई करके बना रहा होता था। आज गांव में जाते हैं तो मोबाइल रिपेयरिंग वाली दुकान दिखाई देती है। याने रोजगार के रूप रंग बदल गए हैं। साइकिल पंचर बनाने के लिए कहीं जाना पड़ता था, आज गांव में ट्रैक्टर रिपेयरिंग बनाने वाला गांव में नजर आने लगा है। हमारे देश की विशेषता है कि लोगों में कौशल्य होता है। हमें हमारी मातृ शक्ति को आर्थिक व्यवस्थाओं के साथ विशेष रूप से जोड़ने की आवश्यकता है। उनके छोटे-छोटे समूह सरकारों के द्वारा भी उनको मदद मिलती है। और मैंने अनुभव किया है कि यो जो हमारी जो वूमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप हैं। वो ऐसे नए-नए व्यवसाय को खोज लेती है। और उसको आगे बढ़ाती है। एक बार मैंने देखा है। यहां तक कि मैं एक गांव में गया था। वो कूड़ा-कचरा इकट्ठा करती हैं। अच्छे घर की महिलाएं हैं, और उसमें से वो फर्टिलाइजर बनाती हैं। उसे पूरे गांव में फर्टिलाइजर बेचती हैं और उससे कमाई करती हैं।
एक गांव में मैंने देखा है कि उन्होंने सरकारी जमीन पर घास का काम करना शुरू किया। और वो इसकी होम डिलेवरी करना शुरू किया। जिसके घर में पशु है, उनको ग्रीन ग्रास, वो बहुत ही अच्छा हेल्दी होता है। वो होम डिलेवरी देते हैं और उसमें से महिलाओं की कमाई होती है। मैं समझता हूं कि कौशल विकास। छोटे-छोटे गांव में संगठन। अब तो बैंक भी पैसे देती है। अनुभव ये है कि बड़े-बड़े लोग तो रुपए मारकर कोशिश करते हैं ...। गरीब आदमी अगर उसको बुधवार को पैसा देना है बैंक को तो सोमवार को ही पहुंच जाता है पैसे दे देता है। इसलिए मेरी पूरी कोशिश है। आपने देखा होगा मुद्रा योजना से 11 करोड़ लोगों को लाभ मिला है। और 5 लाख करोड़ से ज्यादा रकम इन लोगों के पास रकम इन लोगों के पास गई है। हर कोई एक को रोजगार दे रहा है, कोई दो को रोजगार दे रहा है कोई तीन को रोजगार दे रहा है। ...और समय पर जाकर पैसा बैंक में जमा कर रहा है। पूरी तरह आज इन दिनों बदलाव आया है। मैं समझता हूं कि हमने कौशल विकास पर बल देना चाहिए। बदलते समय के साथ, कुछ कौशल विकास का काम तीन हफ्ते के होते हैं, चार हफ्ते के होते हैं, दो हफ्ते के होते हैं।
आप हैरान होंगे। अब आप देखिए कि हमारे यहां समूह भोजन करते हैं। इतना वेस्टेज होता है। बैठकरके खाना खाते हैं तो भी थाली में वेस्टेज करते हैं। और हम भी खड़े होकरके संगत भोजन करते हैं, पंगत भोजन नहीं करते हैं तो। भीड़ होगी तो ऐसा भर लेते हैं थाली में कि फिर 20 प्रतिशत – 30 प्रतिशत खाते हैं, बाकी फेंक देते हैं।
मैंने देखा है कि इन महिलाओं ने एक संगठन बनाया। वो सिर्फ परोसने के लिए जाती हैं। परोसने का ही काम करने से 50 प्रतिशत से ज्यादा वेस्टेज था, वो अपने आप बच गया। जो लोग मेहमान आते हैं, उनको बहुत अच्छी तरह खाना परोसा जाता है। और इतना ही नहीं, जब गरीब महिलाएं शाम को जाती है तो जिसके घर में अवसर होता है, उनको भी टिफिन भरके दे देते हैं। चीजें छोटी-छोटी होती है लेकिन ये छोटी-छोटी चीजें बहुत बदलाव लाती है। मुझे अच्छा लगा कि भोपाल से आपने आजीविका के विषय को लेकर पूछा है। मै आपसे आग्रह करूंगा कि इन चीजों को आगे बढ़ाइए। छोटे-छोटे संगठन बनाकर इनको आगे बढ़ाइए। इससे बहुत लाभ होगा, बहुत फायदा होगा। और मैंने देखा है कोई भी व्यक्ति मुफ्त में नहीं चाहता। हर आदमी काम चाहता है, उन्हें अवसर देना चाहिए। और ये जो है, आंकड़ों का खेल चलते हैं, वो चलते रहेंगे। उनको राजनीति करनी है, उन्हें राजनीति करने दीजिए। हमें तो सामान्य मानवी को इंपावर करना है। और कोई सवाल के लिए नॉकिंग कर रहा है।
.......दूसरा सवाल..........
मोदी जी – जी बताइए भैया।
उदयपुर से सांसद अर्जुन लाल मीणा – माननीय प्रधानमंत्री जी, मैं अर्जुन लाल मीणा आपको तमाम राजस्थान वासियों की तरफ से आपको प्रणाम करता हूं। धन्यवाद करता हूं।
मोदी जी – अर्जुन लाल जी नमस्ते। कैसे हैं। उदयपुर ठीक है।
मीणा – पूरे तमाम राजस्थान की जनता आपके साथ है।
मोदी – मेरा वर्षों से केसरियानाथ श्रीनाथ आने का मन है, लेकिन समय बन नहीं रहा है।
मीणा – जी साहब।
मोदी - आपके मुख्यमंत्री ने बहुत आग्रह किया लेकिन मैं आ नहीं पाया हूं। पहले मैं बांसवाड़ा बहुत आता था। लेकिन मैं सोच रहा हूं कि अगर मौका मिल जाए तो आपके मुख्यमंत्री ने बहुत आग्रह किया है। समय मिला तो जरूर आऊंगा।
मीणा – स्वागत है साहब। केसरीया जरूर आइए। मेरा सवाल है कि किसान कल्याण कार्यशाला अभियान का हिस्सा है। इस कार्यशाला में एक भाजपा कार्यकर्ता की क्या भूमिका होनी चाहिए।
मोदी – वैसे हर काम में भाजपा के कार्यकर्ता की भूमिका होनी ही चाहिए। समाज में जो भी अच्छी चीजें होती है, उसमें बीजेपी का कार्यकर्ता जरूरत पड़े तो पहली पंक्ति में, जरूरत पड़ तो आखिरी पंक्ति में उसे वहां होना ही चाहिए। ये राजनीतिक जीवन पहले जैसा नहीं है। अब हमें जनता के बीच में ही रहना चाहिए।
दूसरी बात, हमारे देश का जो किसान है। वो आज भी अपने दादा-परदादा जिस प्रकार से खेती करते थे, वही कर रहे हैं। वक्त बदल चुका है। टेक्नोलॉजी बदल चुकी है। हम उसको भाषण देकरके किसान को बदल नहीं सकते। किसान जो देखता है, उसी को मानता है। किसान का क्या नेचर है। अगर पड़ोस वाले ने लाल डिब्बे दवाई डाल दी तो वह भी बिना समझे लाल डिब्बा वाली दवा ले आएगा और डाल देगा। बगल वाले ने पीला पाउडर डाल दिया तो वो भी पीला पाउडर ले आएगा और डाल देगा।
हमारा सबसे बड़ा काम है कि हम किसानों को ये जो स्वॉयल हेल्थ कार्ड है, उसका उपयोग कैसे करें। अभी तो उसको मालूम नहीं है कि चने के काम की है कि गेहूं के काम की। वह बेचारा सालों से चना बो रहा है जबकि उसकी जमीन गेहूं के लिए ज्यादा उपयोगी है। ये स्वायल हेल्थ कार्ड से संभव है।
दूसरा हमारे किसान का पैसा बर्बाद हो रहा है। एक तो पानी इतना पानी डाल देता है। उसको समझ ही नहीं है कि हर फसल के लिए इतने पानी की जरूरत नहीं है। और कभी-कभी उसको लगता है कि पूरी फसल लबालब पानी से डूब जाए तभी उसको लगता है कि उसकी फसल अच्छी होगी। और उसके कारण बिजली खर्चा लगता है, पानी डाल देता है। इसके कारण जितना फायदा मिलना चाहिए उतना मिलता नहीं है।
आज स्प्रिंगर है, आज ड्रिप एरिगेशन है, पौधे के मूल को पानी चाहिए। पत्तियों पर झाड़ने की जरूरत नहीं है। ये चीजें कैसे आएगी। हमें लगातार कार्यशालाएं करनी चाहिए। हो सके तो खेत में ही करनी चाहिए। और जिन प्रोग्रेसिव किसानों ने काम किया है। वहां उन किसानों को ले जाना चाहिए। देखिए किसान देखने के लिए खर्चा करने के लिए तैयार है। समझने के लिए दिमाग खपाने के लिए भी तैयार है। एक बार उसको विश्वास हो गया तो वो करते रहेंगे। हमें हमारे किसान पर जो बोझ है, उसको कम करने के तरीके हैं। जैसे मान लीजिए वो अपने खेत के किनारे पर अगर वो जो फर्नीचर के लिए जो काम आता है, इमारती लकड़ी बोलते हैं उसको, टिंबर बोलते हैं, अगर उसकी खेती करता है। और सरकार उसको परमिशन देती है। अभी जैसे बांस के लिए कानून बना दिया। आपके यहां तो बांसवाड़ा के जंगल है। अगर अपने खेत के कोने पर बांस की खेती शुरू करे तो बांस का बहुत बड़ा व्यापार शुरू हो जाता है। अगर मान लीजिए। उसको हमने सीखा दिया शहद का काम, मधुमक्खी पालन का काम। अगर अपने यहां 50 पेटी भी रख लेता है तो साल का डेढ़ दो लाख रुपए का अच्छा शहद वो पैदा कर सकता है। मान लीजिए बाजार में कम दाम मिलता है, तो परिवार में खाना भी शुरू करेगा तो भी फायदा होगा। कुछ लोग फिसरीज का काम साथ में काम करते हैं। कुछ लोग पोल्ट्री का काम करते हैं।
तीसरी सबसे बड़ी बात है। हमारा किसान खेत में फसल काटने के बाद जो वेस्ट बचता है, उसको जला देते हैं। उसको समझाना पड़ेगा। ये बहुत उत्तम खाद है। जमीन की सारी ताकत वो जो वेस्ट पड़ा है, उसमें पड़ी है। उसको फिर से जमीन में कैसे डाल दिया जाए। तो वो उसकी जमीन बहुत अच्छी हो जाएगी। छोटी-छोटी चीजें हैं, वो भाषण से नहीं होगी। बार-बार किसानों से मिलकरके कार्यशाला करने से होगा। इसलिए मैं चाहूंगा कि हर विधायक अपने यहां प्रोग्रेसिव किसान और छोटे किसानों को साथ मिलाकरके कार्यशाला करे, बैठे, बातचीत करे। आप देखिए कि सुधार कैसे होता है। ये काम हम आसानी से कर सकते हैं।
हमारे गांव के बच्चे जो एग्रीकल्चर कॉलेज में पढ़ते हैं, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। हमारे पास उनकी सूची है। और जब छुट्टियों में वो आएं तो उन बच्चों को इकट्ठा करिए और उनको गांवों में ले जाना चाहिए ताकि पढ़कर आए हैं तो बच्चे बहुत अच्छी तरह से समझाएंगे। तो मैं आपसे आग्रह करूंगा कि अर्जुन लाल जी आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा।
एमएसपी का विषय। एमएसपी स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट आ जाए तो दुनियाभर में बयानबाजी चलती है। अब कर दिया तो इस पर बोलते ही नहीं हैं। ये भी एक प्रोब्लम है। काम नहीं होता है तो हमारा विरोधी हजार बार बोलते हैं। काम हो जाता है तो हमारी जिम्मेदारी कि हम उसे 10 हजार बार बोलें।
अब एमएसपी का इतना बड़ा निर्णय इतने सालों तक कांग्रेस सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को कूड़े-कचरे में फेंक दिया। कभी किया नहीं उन्होंने। हम आए तो मांग करते रहे, चिल्लाते रहे। जब हमने कर दिया तो ना हम बोलते हैं और ना वो लोग बोलना पसंद करेंगे। इसलिए मैं आपसे आग्रह करूंगा कि जो हो रहा है। उसको बार-बार बोलते रहना चाहिए ताकि किसान उसका फायदा उठाए। ये राजनीतिक लाभ का विषय नहीं है। किसान उसका लाभ उठाए इसलिए जागरूकता करना है।
......तीसरा सवाल ......4000...........
बताइए कोई मुझे नॉकिंग कर रहा है।
अहमदाबाद से सांसद किरीट सोलंकी - माननीय प्रधानमंत्री जी नमस्ते।
मोदी जी - नमस्ते। किरीट भाई कैसे हैं।
किरीट - पूरे अहमदाबाद और गुजरात की ओर से आपको प्रणाम करता हूं। प्रधानमंत्री जी जो भारत है वह गांवों में बसता है। और आज तक 70 साल तक, आजादी के बाद भी गांवों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है। मैं गौरव के साथ कहता हूं कि आपके नेतृत्व में आप प्रधानमंत्री बने तब से हमारी सरकार ने गांवों के लिए बहुत ही ठोस कदम उठाए हैं। और मैं आपसे मार्गदर्शन चाहता हूं कि ग्राम शक्ति की आजकल अक्सर चर्चा होती है। मगर सामान्य ग्रामीण उसको किस मायने में समझे। उसके बारे में आप हमें मार्गदर्शन कीजिए। क्योंकि ग्राम शक्ति पंचायत शक्ति से जुड़ी हुई है या कोई एक आम ग्रामीण आदमी का भी उसमें कोई सहयोग है। आप हमें मार्गदर्शन कीजिए।
मोदी – देखिए किरीट जी, सबसे बड़ी बात है। आप जानते हैं गुजरात में जब मुख्यमंत्री था तो एक मैंने प्रयोग किया था समरस गांव का। और यूनानीमस इलेक्शन का मूड बनाया था। ये विचार कहां से आया। मैं जब छोटा था तब मेरे गांव में डॉ. द्वारकादास जोशी हुआ करते थे। और डॉ द्वारका दास जोशी आचार्य बिनोवा भावे के बहुत प्रिय शिष्य थे। और आचार्य जी की जो भूदान प्रवृत्ति थी।उसके लिए डॉ. द्वारका दास जी ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। तो जब हम बालक थे। तो कभी हमारे स्कूल में उनको व्याख्यान के लिए बुलाते थे। मुझे क्यूरोसिटी रहती थी, मैं सुनने के लिए जाता था। उनके प्रति बहुत श्रद्धा थी मेरी। बचपन में मैंने उनको देखा था। उनके प्रति मेरी श्रद्धा है। डॉ. होने के बाद भी पूरा जीवन उन्होंने डॉक्टरी के बजाय समाजसेवा में लगाया। वो एक बात बताते थे कि देखो भाई लोकसभा का चुनाव होता है तो गांव टूटता नहीं है, विधायक का चुनाव होता है तो गांव टूटता नहीं है। लेकिन जब ग्राम पंचायत का चुनाव होता है तो बेटी भी ससुराल से वापस आ जाती है। झगड़ा हो जाता है, फिर वो खाई भरती नहीं। वो हमेशा भाषण करते थे कि भाई बिनोवा भावे जी का आग्रह है कि गांव में सब मिलजुलके अपने प्रतिनिधि चुनें। कोई झगड़ा-फसाद न हो, जिसको हक है, उसको मिलता रहे। तो उस बचपन में जो मैंने विचार सुने थे, उसी को मैंने समरस गांव की योजना गुजरात में बनाई थी। और मेरा अनुभव है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा गांव मिलकर बैठकरके अपने प्रतिनिधि चुनते थे और उनको सरकार विकास के लिए उसको पैसे देती थी। समाज में जब तनाव कम हो जाता है तो विकास की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
तो गांव शक्ति में सबसे बड़ी ताकत है गांव की संगठित शक्ति। गांव जाति में बंटना नहीं चाहिए। गांव ऊंच-नीच में बंटना नहीं चाहिए। गांव का गरीब से गरीब व्यक्ति वो गांव का ही अपना होना चाहिए। गांव में पहले के जमाने में बारात आती थी तो पूरा गांव क्या क्या कहता था कि भई ये हमारे मेहमान हैं। कोई ये नहीं कहता था कि जिसके घर में बारात आई है, उसके मेहमान हैं। और हर घर हर लोग अपने घर के अंदर एक-एक दो-दो मेहमान ठहराते थे। गांव के ही लोग उसको चाय के लिए बुलाते थे। देखो कैसा अच्छा माहौल था। ये गांव की शक्ति थी। ये सदियों से अर्जित की है। इस शक्ति को फिर से एक बार जगाना है और उस शक्ति को विकास के लिए जोड़ना है। और विकास का ...। अब गांव वाले तय करें कि भई हमारे गांव में बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। गांव पूरा तय करे कि अब हमारा एक भी बच्चा स्कूल नहीं छोड़ेगा। गांव के अंदर सफाई होनी चाहिए, गांव तय करे। कोई बीमारी आएगी क्या ...। गांव के अंदर टीकाकरण का काम है। गांव में उत्सव बन जाए। भई चलो आज टीकाकरण है, कोई बच्चा रहना नहीं चाहिए, कोई माता रह नहीं जाए, कोई प्रसूता माता नहीं रहनी चाहिए। गांव अपने आप में एक शक्ति है। अगर हम हमारे देश में ...। ये काम बजट से नहीं होते। ये काम गांव में संगठित शक्ति से होते हैं। टीचर तो आता है लेकिन बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो क्या ...। डॉक्टर आता है टीकाकरण को लेकर के, सारी चीजें के लिए, टीकाकरण नहीं कराएंगे तो क्या होगा। और इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि हम गांव की शक्ति पर भरोसा करें। गांव की शक्ति को संजोने का प्रयास करें। और आप देखिए। गांव मैरिकल करके देता है।
बहुत अच्छा परिणाम देते हैं। आज जिन गांवों ...। आप देखिए। गांधी नगर के पास पिछुड़ी गांव है। सारे देश के लोग देखने जाते हैं। इतना छोटा सा गांव। सारा सीसीटीवी कैमरा है। स्कूल के अंदर बच्चा आया है या नहीं आया है। उसका कम्प्यूटर पर टेक्नोलॉजी से करके देखते हैं। ऐसे कई गांव हैं, जिन गांवों में ...।
आपने सुना होगा अन्ना हजारे का गांव। उन्होंने सफाई पर बल दिया। धीरे-धीरे करके अन्ना हजारे ने गांव को इतना उत्तम कर दिया। कि देशभर के लिए मॉडल बन गया। तो जिन्होंने थोड़ा सा भी काम किया है। बहुत बड़ा बदलाव आया है। और मैं राजनेताओं से हमेशा आग्रह करता हूं कि हम कुछ भी काम करें लेकिन एक गांव पकड़के उसमें बदलाव करें। अब देखिए इतना संतोष मिलेगा।
मैं अपने बनारस पार्लियामेंटरी क्षेत्र में, मेरे संसदीय क्षेत्र में जो पार्लियामेंट मेंबर का गांव, आदर्श ग्राम योजना है। मैं बड़े मन से उस काम को देखता हूं। उसकी प्रगति देखता हूं। गांव वाले भी बड़े उत्साह से जुड़ जाते हैं। मैं समझता हूं कि आपने सही सवाल पूछा है। वैसे जरूर इसका लाभ देश के सारे विधायक और सांसद उठाएंगे।
.........46.........
मोदी – जी बताइए भई। मोमिन जी नमस्ते।
असम के बोकाजन से विधायक डॉ. नुमल मोमिन – नमस्कार। प्रधानमंत्री जी प्रणाम।
मोदी – आपको प्रणाम। मैंने सुना है कि ब्रह्मपुत्र में पानी बढ़ रहा है। क्या बात है।
मोमिन – थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा है। अभी बाढ़ आने वाला है। ये सीजन है।
मोदी – मैं कल जब विदेश से आया तो तुरंत मैंने जानकारी पाई थी। तो मुझे पता चला कि ब्रह्मपुत्र में पानी बढ़ रहा है तो मुझे जो भी इंस्ट्रक्शन देना है, वो देना शुरू कर दिया है। विदेश से आते ही मैं टेलिफोन लेकर बैठ गया था।
मोमिन - बहुत-बहुत धन्यवाद। प्राइम मिनिस्टर जी। असम के सारे लोगों की ओर से आपको असम के नए साल और रंगोली बिहू की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
मोदी - आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। उस दिन तो मैंने शुभकामनाएं दे दी थी। रूबरू होकर शुभकामना देने का मौका मिला था। पहले तो मैं बिहू के समय खुद आता था। चावल की इतनी वैरायटी लोग खिलाते थे तो मुझे बड़ा आलस आता था।
मोमिन - पीठा बहुत बढ़िया होता है असम में। प्राइम मिनिस्टर जी आपसे मेरा सवाल है कि मोदी केयर के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है। कैसे हम मोदी केयर के बारे में ज्यादा से ज्यादा से लोगों को जानकारी दें और कैसे लोगों को ज्यादा लाभ मिले। इसका मार्गदर्शन करें।
मोदी – मैं मानता हूं कि हमारे एमएलए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। मुझे याद है। जब मैं गुजरात में था। मैं तो राजनीति में तब नहीं था। लेकिन हमारे यहां तीन-चार लोग ऐसे थे। एक श्रीमान अशोक भट्ट थे, दूसरे एक हरीन पाठक थे। अब ये अहमदाबाद म्युनिसिपल काउंसलर थे। और अहमदाबाद में एक बीएस अस्पताल था जो म्युनिसिपल का अस्पताल था। मैंने देखा था कि ये दोनों रोज वो दो घंटे वो अस्पताल में बैठ जाते थे। तो अहमदाबाद शहर का कोई बीमार व्यक्ति आता था तो उसकी खबर लेना, डॉक्टर से मिलवा देना, किसी को ब्लड की जरूरत हुई तो उपलब्ध करवाना। ये उनका रोज का काम था। इस एक सेवा के कारण बहुत बड़े लीडर बन गए। हमारे अशोक भाई लंबे समय तक हेल्थ मिनिस्टर रहे। हमारे हरीन भाई तो पांच-सात बार लंबे समय तक सांसद रहे। जस्ट। हर नियम से डेली एक-दो घंटे अस्पताल में बैठते थे। लोग भी जानते थे कि ये इस कोने में बैठते हैं। चलो भई। कोई मुसीबत है तो उनसे मिलते हैं। पहले तो हमारे विधायकों ने, हमारे एमपी ने कोई न कोई ऐसी अस्पताल के साथ सेवा के साथ जोड़ देना चाहिए। पहला काम ये करना चाहिए। बाकी काम अपने आप शुरू हो जाएंगे। क्योंकि वहां सबलोग आते हैं। स्वभाविक है आपका मिलना हो जाता है। लोग भी जानते हैं कि आप सेवाभावी हैं।
दूसरा प्रधानमंत्री जन औषधी योजना। जो दवाई सौ रुपए में मिलती है, प्रधानमंत्री जन औषधी योजना में वो दवाई 18, 20, 22, 25 रुपए में मिल जाती है। आप मुझे बताइए। गरीब आदमी का 70 प्रतिशत तक पैसा बच जाएगा तो वो व्यक्ति आपको आशीर्वाद देगा कि नहीं देगा। अब ये मोदी केयर नहीं है तो क्या है। हम देखें हमारे यहां 3000 जन औषधि केंद्र पहले से ही चल रहे हैं। उसको और भी बढ़ाने का अभियान चला रहे हैं। देखिए मेरा तो मत है कि और हम जितना कर सके, जरूर करें।
लेकिन बच्चों की पढ़ाई। कोई नए बजट की जरूरत नहीं है। इतने ही बजट से अच्छी तरह पढ़ाई कर सकते हैं। थोड़ा हम विधायक होने के नाते, एमपी के नाते टीचर से संपर्क रखें, स्कूल जाने की आदत डालें। कभी बच्चों से बात करने की आदत डालें।
दूसरा नौजवान की कमाई। कौशल विकास, मुद्रा योजना, सेल्फ हेल्प ग्रुप। अपने पैरों पर इंटरपेन्योर बनने का इरादा।
तीसरा बुजुर्गों को कमाई। युवा को कमाई, बच्चों को पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई। ये दवाई का काम। इसमें हम जुड़ेंगे तो पूरे परिवार का आशीर्वाद मिलेगा।
हमारा मध्यम वर्ग का परिवार, वो बेचारा किसी के आगे हाथ तो फैला नहीं सकता है। अगर उसको हेल्थ में मदद मिल जाती है तो उसकी जिंदगी बन जाती है। अब देखिए हार्ट के लिए, जिसके लिए पहले एक लाख लगता था, अब 20-25 हजार रुपए में काम हो जाता है। घुटना प्रत्यारोपण करना है। पहले जितना पैसा लगता था, अब 20 प्रतिशत में काम हो रहा है। एक तो ये काम हुआ।
दूसरा है वेलनेस सेंटर। एक वेलनेस सेंटर। हम चाहते हैं कि आठ-दस गांवों के बीच में एक अच्छा वेलनेस सेंटर डवलप हो, टेक्नोलॉजी के द्वारा उसका उपयोग हो, बड़े डॉक्टरों का संपर्क रहे। अभी मैं छत्तीसगढ़ गया था। बिल्कुल माओवादियों के प्रभावित क्षेत्र में मैंने एक वेलनेस सेंटर का उद्घाटन किया था। 2022 तक हम देश में डेढ़ लाख से ज्यादा पंचायत में वेलनेस सेंटर बनाने का बड़ा अभियान चला रहे हैं। जिसके कारण हर प्रकार की सेवाएं लोगों को गांवों में मिलेगी।
तीसरा सबसे बड़ा काम है - मोदी केयर का कहो, आयुष्मान भारत का कहो। वो है हमारे 10 करोड़ परिवार याने करीब-करीब 50 करोड़ लोग, उनको इंश्योरेंस का एक कवर मिले। और एक परिवार में 5 लाख रुपए तक अगर बीमारी का कोई खर्चा होता है तो वो खर्चा उस परिवार को नहीं देना पड़ेगा, सरकार और इंश्योरेंस कंपनी मिलकरके ये देंगे। अब ये नामों को आईडेंटिफाई करने का काम शुरू हुआ है। अभी जो 14 अप्रैल से 5 मई तक अपना काम चल रहा है। सूची बना रहे हैं। गलत नाम न आए। कभी-कभी राजनीति के मोह में आकर गलत नाम डलवा देते हैं। इससे गरीब के साथ अन्याय होता है, उसके साथ अहित होता है। जो सच्चा गरीब है, जो सच्चा निडी है। ये हम राजनेताओं का काम है कि हम उसकी मदद करें। अगर ये आने वाले दिनों में ये योजना चलेगी तो बड़ा लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से हमारा निम्न मध्यम वर्ग है, मध्यम वर्ग है, निम्न वर्ग है, उसके सर से बहुत बड़ा बोझ कम होने वाला है।
तीसरा, जब इतनी बड़ी मात्रा में सरकार पैसे देने वाली है। तो छोटे-छोटे शहरों में नए अस्पताल बनने वाले हैं। भारत में आने वाले 5 साल में 800-1000 नए अस्पताल बनने की संभावनाएं मैं देखता हूं। प्राइवेट पार्टियां आएंगी, खर्च करेंगी। राज्य सरकारें जमीन अस्पताल को देने के लिए अच्छी नीतियां बना दें, प्रोत्साहित करे। आप देखिए देखते ही देखते भारत में आरोग्य का क्षेत्र बहुत ताकतवर बन जाएगा। अब कोई इसे मोदी केयर कहे, कोई आयुष्मान भारत कहें। मेरी यही कामना है कि मेरे देश के मध्यम वर्ग को, गरीब को, सामान्य परिवार को ज्यादा लाभ हो।
--------5344 ............
उत्तर प्रदेश के सीतापुर से विधायक सुरेश राही - सादर प्रणाम।
मोदी जी – का भाई सुरेश जी कैसे हैं।
सुरेश – आशीर्वाद आपका।
मोदी – बताइए।
सुरेश – प्रधानमंत्री जी। ग्राम स्वराज अभियान मना रहे हैं। अनेक योजनाओं की जानकारी इन अभियानों से होती है लेकिन अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता जो है पर्याप्त रूप से नहीं हैं। हमें आदेश दें, हमलोग क्या करें इसमें।
मोदी - सुरेश जी। जब मैं छोटा था, तब ज्यादा तो मालू नहीं था हिन्दुस्तान के राज्यों के नाम भी पता नहीं था। लेकिन उस जमाने में मैंने सीतापुर का नाम सुना था। सीतापुर का नाम इसलिए सुना था। और मैं मानता हूं कि सही होगी मेरी जानकारी। हमारे यहां के इलाके में किसी को मोतियाबिंद का ऑपरेशन करना होता था, सभी सीतापुर जाते थे। आजकल वो काम चल रहा है कि बंद हो गया।
सुरेश – बहुत अच्छा चल रहा है।
मोदी – अभी आते हैं लोग बाहर से।
सुरेश – बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं।
मोदी – हां, जब हम बालक थे तो हम सुनते थे कि आंख का आपरेशन करवाएं तो सीतापुर चले जाएं। शायद कोई बड़े डेडिकेटेड परिवार था डॉक्टर का।
सुरेश – डॉक्टर मेहरे साहब।
मोदी – हां, बहुत उन्होंने सेवा भाव से काम किया है। चलिए सुरेश जी। आप सीतापुर से बात कर रहे हैं तो आज मुझे भी बचपन की याद आ गई। आपकी बात सही है जी कि हमलोगों को गांव से जुड़ना चाहिए। गांव के लोग बहुत पवित्र जीवन होता है, बहुत प्रमाणिक जीवन होता है। और हमारा देश गांवों का देश है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। हम सब एमएलए ने तय करना चाहिए कि मैं गांव के लिए कम से कम एक काम, मेरे क्षेत्र में अगर 100 गांव है तो 100, 200 गांव है तो 200 गांव। एक काम गांधी की 150वीं के निमित्त में करके रहूंगा। चाहे स्वच्छता का करूं, चाहे बच्चा स्कूल न छोड़े, चाहे स्कूल की सफाई लेकिन मैं एक काम तो करूंगा जी। आप देखिए। गांव में नया विश्वास पैदा होगा। सरकार की इतनी योजना है आजकल गांव के विकास के लिए। रुपए इतने आते हैं जी। आज गांव का चुनाव इतना कठिन क्यों हो गया है। क्योंकि हरएक को मालूम है कि बहुत बड़ी मात्रा में धन आता है। अगर हम एकाउंटेबलिटी बनाएं। काम का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर दें। भई इस काम के लिए इतना पैसा, इस काम का इतना पैसा। कुएं का पैसा लिखा है, तो कुआं बना है कि नहीं बना है। रोड का पैसा लिखा है, रोड बना कि नहीं बना। जागरूकता आएगी। दूसरा ग्राम सभी रेग्युलर हो। रेग्युलर ग्राम सभा करनी चाहिए।
आप देखिए। जब चुनाव होता है। चुनाव पार्टी जो आती है। क्या कभी उनको भूखा देखा है। गांव वाले दौड़ पड़ते हैं। अरे भाई ये तो हमारे मेहमान हैं। चलो भाई इनको खाना खिलाओ। इनके रहने के लिए व्यवस्था करो।
सरकारी अधिकारी भी आ गया गांव में तो तुरंत गांव उनको प्यार से सेवा करते हैं। ये हमारे गांव की बहुत बड़ी ताकत है। हम उन लोगों से जुड़े।
आप मुझे बताइए। एलईडी बल्ब। क्या मैं गांव के अंदर हर घर में एलईडी बल्ब लगवा दूं। मेरे गांव के हर परिवार के अंदर दो सौ ढाई सौ रुपया बच जाए तो वो हमें आशीर्वाद देगा कि नहीं देगा। उसी प्रकार से किसान को सौलर पंप लगाएं। उसका बिजली बिल चला जाए। आप मुझे बताइए। हमारा किसान अगर उसका पैसा बच गया तो वो हमसे वो खुश होगा कि नहीं होगा। गांव के लोगों को, गांव का किसान एक एक करके जब यूरिया खरीदने जाएगा और उसे घर आएगा उसको बेचारे को टेम्पो का खर्चा होगा, बैलगाड़ी का खर्चा होगा। अगर गांव के अंदर सभी किसान मिलकर के तय करें कि पूरे गांव में 50 बोरी यूरिया की जरूरत है। और एक साथ जाकरके यूरिया लेकरके आएगा तो ट्रांसपोर्टर का खर्चा कम होगा कि नहीं होगा। पैसा बचेगा कि नहीं बचेगा। छोटी-छोटी चीजें हैं। हम एक नेता हैं तो मतलब है हम गांव के जीवन में बदलाव।
इंश्योरेंस। 90 पैसे में इंश्योरेंस। क्या हम अपने क्षेत्र के सभी लोगों को इंश्योरेंस के लिए प्रेरित करें। और किसी भी गांव के किसी भी घर में कोई मुसीबत आई और उस घर में दो लाख रुपए आ गया। तो पूरा गांव उसके लिए आपका जय-जयकार करेगा कि नहीं करेगा। सब परिवार को दो लाख रुपए मिले, हम नहीं चाहते। हम नहीं चाहते कि किसी परिवार को मुसीबत आए। लेकिन किसी भी परिवार को मुसीबत आई और अगर दो लाख रुपया पहुंच गया तो पूरा गांव जय-जयकार करेगा।
ये काम है कि सरकार की योजनाओं को केवल लागू कराना है। अगर इतना भी काम कर लिया तो सुरेश जी मुझे विश्वास है। कि गांव के जीवन में बदलाव बहुत तरीके से ला सकते हैं। गांव में अपनापन है। गांव में सब सुख-दुख के साथी होते हैं। अगर इसके साथ जुड़ गए तो आप जो चाहें वो परिणाम पा सकते हैं। सुरेश जी। सीतापुर की पुरानी यादें ताजा हो गई।
आज मुझे बहुत अच्छा लगा। सभी विधायकों से खुलकरके बातें करने का मौका मिल गया। सभी सांसदों से बातें करने का मौका मिल गया। और मैं बार-बार कहता हूं कि अगर सांसद के 3 लाख ट्वीटर फोलोअवर्स है और वह अपने ही पार्लियामेंट्री के कार्यकर्ताओं के साथ मेरी बातचीत का कार्यक्रम बनाना चाहता है तो मैं इस टेक्नोलॉजी के जरिए उसके साथ बातचीत करने के लिए समय देने के लिए तैयार हूं। उसी प्रकार से हमारे विधायक वे भी अपने क्षेत्र में एक लाख, दो लाख, 3 लाख ट्वीटर फोलोअवर्स तैयार कर लेते हैं तो मैं उनको भी समय देने को तैयार हूं। हां समय देर से दूंगा, कभी समय जल्दी दे दूंगा। मुझे अपने सारे करोड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बात करने में बहुत आनंद आएगा। मुझे खुशी हुई कि आज बिल्कुल आराम से बात करने का मौका मिला। कभी कभी तो कार्यक्रम में आता हूं तो हड़बड़ी में मंच पर चला जाता हूं और भाषण करके निकल जाना पड़ता है। मुझे आज बहुत अपनापन लग रहा है।
मुझे एक नई ऊर्जा मिली है। नया आनंद आया है। मैं बहुत प्यार से, दिल से मैं आप सबका आभार व्यक्त करता हूं। आपने जो मन से जो हमसे बातें की। बहुत अच्छा लगा। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।


