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Didi, people say you play a lot of football. You've already scored an own goal in football of politics, says PM Modi in Cooch Behar
Didi, the day you did 'khela' at the polling booth in Nandigram, the same day the country knew that you have lost the elections: PM Modi
I want to tell the people that I'll return your love with interest in the form of development, says PM Modi

भारत माता की... जय !
भारत माता की... जय !
मेरी एक प्रार्थना है। आप सुनेंगे? मेरी एक रिक्वेस्ट है- सुनेंगे? देखिए, आपलोगों का प्यार इतना है, आपलोगों के आशीर्वाद इतने हैं कि इतना बड़ा यह मैदान भी छोटा पड़ गया है। यह मैदान छोटा पड़ गया। आप जहां हैं, वहीं खड़े रहिए। आगे आने की कोशिश मत कीजिए। तो मेरी बात मानेंगे आपलोग…? पक्का मानेंगे...?
भारत माता की... जय!
भारत माता की... जय!
नमोष्कार !
सकल कूचबिहार वासीदेर आमार सादर प्रणाम।
दंडबल सोगाके !

आज से ठीक दो वर्ष पूर्व भी, आज 6 अप्रैल के दिन मैं कूच बिहार में ही था। और इसी मैदान में था। और उस समय यहां बीच में, यहां एक बड़ा मंच लगा दिया था टीएमसी वालों ने, ताकि मोदी की सभा छोटी हो। लोगों को आने नहीं दिया था। और उस दिन मैंने इसी मंच पर से कहा था- ये जो मंच बना है, वह टीएमसी के पतन का स्मारक है। कहा था कि नहीं कहा था- याद है आपलोगों को? आज मंच कहीं नजर आ रहा है? टीएमसी कहीं नजर आ रही है? ये आपकी ताकत, ये आपका प्यार और ये आपके आशीर्वाद के कारण हुआ है?

भाइयो-बहनो,
बाणेश्वर शिव मंदिर, कामतेश्वरी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, आस्था के ऐसे अनेक स्थानों की इस धरती पर आकर हर किसी के मन को बहुत शांति मिलती है। महाराजा नर नारायण, बीर चिल्ला रॉय के शौर्य, ठाकुर मदन मोहन जी और ठाकुर पंचानन बर्मा जैसी महान सपूतों के योगदान से ये भूमि समृद्ध हुई है। आज तो ऐसे अवसर पर कूच बिहार आया हूं, जब बीजेपी अपना स्थापना दिवस मना रही है। बंगाल की इस धरती ने बीजेपी को विचार दिए हैं, संस्कार दिए हैं, बीजेपी को निरंतर ऊर्जा दी है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्होंने हमारे लिए राजनीतिक रास्ता तय किया, जिन्होंने हम जैसे करोड़ों कार्यकर्ताओं को आदर्शों को लेकर राजनीतिक में जीने का, जनता के लिए जूझने का, और शरीर का कण-कण, समय का पल-पल जनता की सेवा में लगाए रखने की हमें प्रेरणा दी, ऐसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही थी। इसी बंगाल के सपूत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने कहा था- भारत का यश, भारत की आध्यात्मिक महानता, भारत का सत्य और आत्मा के विचार, भारत में पनपी मानवता की सेवा की भावना, और भारत के जन-जन का सर्वोच्च शक्ति की विराटता में विश्वास से आगे बढ़ने का, चार बहुत महत्वपूर्ण बातें जो देश को बहुत आगे ले जाएगी। आज इसी प्रेरणा से देश की कोटि-कोटि जनता देश का यश बढ़ा रही है, देश को आत्मनिर्भर बना रही है। देश के इस संकल्प की सिद्धि में भाजपा भी दिन-रात जुटी हुई है। एक-एक कार्यकर्ता लगा हुआ है।

भाइयो-बहनो,
मुझे आने में देरी हुई, देरी इसलिए नहीं हुई कि मेरा हेलिकॉप्टर लेट हुआ था। हेलिकॉप्टर से यहां आने तक रास्ते के दोनों तरफ ह्यूमन चेन नहीं, ह्यूमन वॉल था। जितने लोग यहां हैं, उससे ज्यादा लोग पूरे रास्ते भर में हैं, उसमें भी माताएं-बहनें इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद दे रही थीं।

भाइयो-बहनो,
2 मई को, जब चुनाव के नतीजे आएंगे, 2 मई को बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद, यहां भी विकास का, प्रगति का अभियान और तेज किया जाएगा। बीते 2 चरणों के मतदान में दीदी का जाना तय हो चुका है। पिछले 2 चरणों में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकले हैं, लंबी-लंबी लाइनें लगाकर बीजेपी के पक्ष में वोट दिया है। आज भी बहुत अच्छी वोटिंग की खबरें आ रही हैं। बंगाल में बीजेपी की ऐसी लहर चल रही है, जिसने दीदी के गुंडों, दीदी के भय को किनारे लगा दिया है।

साथियो,
मैंने सुना कि दीदी इन दिनों एक सवाल पूछ रही हैं, आपने भी सुना होगा, दीदी एक सवाल पूछ रही हैं कि क्या बीजेपी भगवान है, जो उसे पता चल गया है कि पहले दो चरणों में बीजेपी को बड़ी जीत मिल रही है।

आदरणीय दीदी, ओ दीदी,
हम तो मामूली इंसान हैं, और ईश्वर की आज्ञा से, ईश्वर के आशीर्वाद से देशसेवा में लगे हैं।

दोस्तो, आपका प्यार मेरे सिर-आंखों पर। मैं आपके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाऊंगा दोस्तो, आपके आशीर्वाद मेरे लिए बहुत बड़ी ताकत हैं। ये जो आप प्यार दे रहे हैं न, 2 मई के बाद बीजेपी सरकार बनने के बाद, मैं ये प्यार ब्याज समेत इस इलाके का विकास करके लौटाऊंगा। ये आपका प्यार कभी बेकार नहीं जाने दूंगा।

भारत माता की….जय

देखिए, दीदी पूछ रही हैं, हम भगवान हैं क्या, हमें विजय का कैसे पता चल गया। लेकिन दीदी, ओ दीदी… चुनाव में कौन हार रहा है, कौन जीत रहा है, ये पता करने के लिए भगवान को कष्ट देने की जरूरत नहीं है। ये जो जनता-जनार्दन हैं न, वही भगवान का रूप होती है। अरे, जनता-जनार्दन का चेहरा देख करके पता चलता है कि हवा का रुख क्या है, यही तो ईश्वर का अवतार हैं। और दूसरा दीदी, आदरणीय दीदी, दूसरी बात जो है कि चुनाव नतीजों का पता कैसे चलता है, अनुमान कैसे लगता है! एक तो, आपका गुस्सा, आपकी नाराजगी, आपका व्यवहार, आपकी वाणी इन सबको देखकर, एक बच्चा भी बता सकता है कि दीदी, टीएमसी…. आप चुनाव हार चुकी हैं, दीदी, आप मैदान छोड़ चुकी हैं। रोज, आप सुनिए… रोज आपको कहना पड़ रहा है कि आप नंदीग्राम जीत रही हैं।

आदरणीय दीदी, ओ दीदी,
जिस दिन, आपने चुनाव के दिन, पोलिंग चल रहा था, नंदीग्राम में पोलिंग बूथ में जो खेला किया, जो बातें कहीं, उसी दिन पूरे देश ने मान लिया था कि आप हार गई हैं। इसके लिए, भगवान से पूछने की जरूरत नहीं है दीदी। जब आपकी पार्टी ये घोषणा कर देती है कि दीदी अब बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी, तो कोई भी समझदार व्यक्ति बड़ी आसानी से समझ सकता है कि टीएमसी का सूपड़ा साफ होने जा रहा है। बंगाल में अब टीएमसी नहीं बच सकती है। दीदी को राजनीति करनी होगी तो बंगाल के बाहर जाना पड़ेगा। ये आपकी पार्टी बोल रही है। क्या ये सुनने के बाद भगवान को तकलीफ देने की जरूरत है क्या? भगवान को पूछने की जरूरत है क्या। आपको भी समझ आता है कि नहीं आता है? आपको भी पता चलता है कि नहीं चलता है कि दीदी हार रही है? आप बताइए, आपको लगता है कि नहीं लगता है।

आदरणीय दीदी, ओ दीदी,
अभी हाल ही में आपने कहा, देखिए महत्वपूर्ण बात है, आपने हाल ही में आपने कहा कि सभी मुसलमान एक हो जाओ, वोट बंटने मत दो। दीदी, आप ये कह रही हैं, इसका मतलब है कि आपको यकीन हो गया है कि मुस्लिम वोटबैंक की, आपकी जो ताकत आप मानती थीं, वो मुस्लिम वोटबैंक भी आपके हाथ से निकल गया है, मुस्लिम भी आपसे दूर हो गए हैं। आपको पब्लिकली ऐसा कहना पड़ रहा है, इसी से पता चलता है कि आप इलेक्शन हार गई हैं।

आदरणीय दीदी, ओ दीदी,
आप वैसे तो चुनाव आयोग को गालियां देती रहती हैं, सुबह-शाम एक ही बात करती रहती हैं, लेकिन जो बात आप बोल रही हैं... अगर हमने कहा होता कि सारे हिंदू एकजुट हो जाओ, बीजेपी को वोट दो, तो दीदी, हमें इलेक्शन कमीशन 8-10 नोटिस भेज देता, प्रधानमंत्री को भी नोटिस आती, अध्यक्ष को भी आती, उम्मीदवार को भी आती, अरे इतना ही नहीं सारे अखबार देश के पहले पेज भरे पड़े होते और दुनिया भर के एडिटोरियल लिखकर के हमारे बाल नोच लिए होते।

दीदी,
मुझे पता नहीं कि आपको चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है या नहीं, लेकिन आपकी ये बात साफ बताती है कि आप जिनके भरोसे चुनाव के मैदान में थीं, वे भी अब आप से (दूर) चले गए है। और आप पब्लिकली उनको कह रही हैं, मुसलमानों एक हो जाओ, मुसलमानों एक हो जाओ, मुसलमानों एक हो जाओ, मुझे बचाओ, मुझे बचाओ, मुझे बचाओ, ये दीदी बोल रही है। दीदी, इसका मतलब ही ये होता है कि आप चुनाव हार रही हैं।

दीदी,
जिस चुनाव आयोग ने 2 बार चुनाव करा के आपको मुख्यमंत्री बनाया, आज आपको उस चुनाव आयोग से ही दिक्कत होने लग गई। ये दिखाता है कि आप चुनाव हार चुकी हैं। जिस EVM ने वाम के शासन को उखाड़ फेंकने में आपकी मदद की, बंगाल के नागरिकों की इच्छा का आदर ईवीएम मशीन खुद करता है। एक-एक नागरिक की इच्छा ईवीएम में कैद होती है, आज आपको उस ईवीएम से भी समस्या होने लग गई। जब आप ईवीएम को गाली देती हो, आप इलेक्शन कमीशन को गाली देती हो, तब तो मामला पक्का है कि आपका खेला शेष है। ये दिखाता है कि आप चुनाव हार चुकी हैं। जिस केंद्रीय वाहनी की मांग आप खुद करती थीं, मांग करती थी कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के हाथ में ही चुनाव होना चााहिए। दीदी, आप आज उन पर भी गुस्सा कर रही हैं। उनको बदनाम करने की भाषा बोल रही हैं, षड़यंत्र कर रही हो, ये दिखाता है कि आप चुनाव हार चुकी हैं।

दीदी,
आप एक राज्य की सीएम हैं, दो फेज का मतदान हो चुका है, बहुत शांतिपूर्वक मतदान हुआ, करीब 80 पर्सेंट से ज्यादा वोट पड़े... मैं भी गुजरात में मुख्यमंत्री था, इतना अगर वोटिंग होता है, शांतिपूर्ण होता है, तो सीएम के नाते मैं गर्व से कहता हूं कि देखिए, मेरे राज्य में शांतिपूर्ण मतदान हुआ, मेरे राज्य में इतना ज्यादा मतदान हुआ। मैं गर्व करता था। दीदी यहां शांतिपूर्ण मतदान हो रहा है, 80 पर्सेंट से ज्यादा लोग मतदान करने जा रहे हैं और आप परेशान हैं, आप गर्व नहीं कर रही हैं। यही बताता है दीदी कि आप चुनाव हार रही हैं।

साथियो,
बीजेपी की रैली में भारी संख्या में लोग आ रहे हैं, दिखता है साफ, बहन-बेटियां आ रही हैं, लेकिन दीदी कहती हैं, ये जो लोग आए हैं न, वो पैसे लेकर यहां आते हैं। मुझे बताइए भाई, क्या आप पैसे लेकर यहां आए हैं क्या, जोर से बोलिए, पैसे लेकर आए हैं। क्या पैसे मिलने वाले हैं, इसलिए आए हैं क्या, ये दीदी आप पर झूठा आरोप लगाती हैं कि नहीं लगाती हैं, ये दीदी आपको बदनाम कर रही हैं कि नहीं कर रही हैं, दीदी ने आपका अपमान किया है कि नहीं किया है, दीदी को सजा दोगे कि नहीं दोगे, इस चुनाव में जबर्दस्त सजा दोगे के नहीं दोगे। कमल के निशान पर बटन दबाकर सजा दोगे कि नहीं दोगे। भाइयो-बहनो, बंगाल की ईमानदार जनता पर दीदी का ये संगीन आरोप इस बात की गवाही है कि आप चुनाव हार चुकी हैं। दीदी को तिलक लगाने वालों से दिक्कत है, भगवा वस्त्र धारण करने वालों से समस्या है। ये दिखाता है दीदी... जमीन खिसक चुकी है। आपका हारना तय है दीदी।

दीदी,
लोग कहते हैं कि आप फुटबॉल बहुत खेलती हैं। दीदी हमने सुना है, फुटबॉल में एक होता है Own Goal...आप चुनाव के मैदान में सेल्फ गोल कर चुकी हैं। आपने खुद ही अपनी सच्चाई स्वीकार कर ली है। भाइयो-बहनो, टीचरों की भर्ती हो या फिर लोगों के काम, आपने सिर्फ तुष्टिकरण किया। बंगाल के सामान्य लोगों को, बंगाल के नौजवानों, यहां के किसानों को आपने अपने हाल पर छोड़ दिया।

10 साल तक आपके तोलाबाज बंगाल को लूटते रहे, आदरणीय दीदी, आप देखती रहीं।
10 साल उत्तर बंगाल के साथ अन्याय हुआ, आदरणीय दीदी, आप देखती रहीं।
10 साल यहां जब भी रक्त बहा, मां-बहनों के आंसू बहे, आदरणीय दीदी आप देखती रहीं।
10 साल दलित, वंचित, पिछड़ों, आदिवासियों, टी गार्डन मजदूरों के साथ धोखा हुआ, दीदी देखती रहीं। आंखें बंद करके बैठी रहीं।
10 साल कृषक सिंचाई और भंडारण की सुविधाओं से वंचित रहे, ‘फोडे राज’ से परेशान रहा, दीदी, आप देखती रहीं।
TMC के कार्यकर्ता, नेता, मंत्री खेला करते रहे और दीदी देखती रहीं।
10 साल तस्करी और घुसपैठ होती रही, दीदी देखती रहीं।
(देखिए, मेरे साथ जो डॉक्टर हैं, देखिए माता जी को पानी दीजिए, उनकी चिंता कीजिए। पानी दीजिए उनको। मेरी टीम के डॉक्टर वहां पहुंचे तुरंत।)
10 साल अवैध खनन, तस्करी, ड्रग्स का सिंडिकेट फला-फूला और दीदी देखती रहीं।

साथियो,
अभी हाल ही में जो टेप आया है, उसमें कई बातचीत ऐसी उजागर हुई हैं, दीदी के 10 साल का पूरा रिपोर्ट कार्ड दे रही हैं। दीदी, आपने बंगाल में एक नया टैक्स शुरू कर दिया- भाइपो सर्विस टैक्स, भाइपो सर्विस टैक्स। गरीब मां-बहन ने मेहनत का एक-एक टका जोड़ा, वो भाइपो सर्विस टैक्स में चला गया! बंगाल का युवा एक-एक टका के लिए तरस रहा है और वहां 35-40 करोड़... 35-40 करोड़ एक महीने में आ रहा है! इसी वजह से आज बंगाल के कोने-कोने से आवाज आ रही है- चलो पलटाई, चलो पलटाई!

जोर से बोलिए, चलो पालटाई...चलो पालटाई...
हमारे साथ, जब भी मैं कहूंगा बोलते चलिए...
मित्थार खेला शेष कोरते, चलो पलटाई चलो पालटाई !
मित्थार खेला शेष कोरते... चलो पलटाई चलो पालटाई !
कटमनीर खैला के दाओ बिदाई... चलो पलटाई चलो पालटाई !
हिंसा राजनीति के दाओ बिदाई... चलो पलटाई चलो पालटाई !
मोहिला सुरोक्खा बारानोर जोन्नो...चलो पलटाई चलो पालटाई !
हारानो गौरब फेरानोर जोन्नो... चलो पलटाई चलो पालटाई !
सौबाई मिली भाई-भाई... चलो पलटाई चलो पालटाई !
तृणमूल के दाओ बिदाई... चलो पलटाई, चलो पालटाई !
तृणमूल के दाओ बिदाई... चलो पलटाई, चलो पालटाई !

भाइयो और बहनो,
पश्चिम बंगाल में डबल इंजन की सरकार के अभाव से कितनी परेशानी हो रही है, ये कूच बिहार से बेहतर कौन समझ सकता है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, लेकिन दीदी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दीदी तो केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं पर भी ब्रेक लगा देती हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में लगभग पौने 2 करोड़ से ज्यादा गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिल चुका है। लेकिन, दीदी की दुर्नीति के कारण इसका लाभ यहां के एक भी गरीब को नहीं मिला।

भाइयो और बहनो,
केंद्र सरकार हर घर, हर खेत को पर्याप्त पानी देने के लिए निरंतर कोशिश कर रही है। लेकिन, दीदी की सरकार ने केंद्र की कृषि सिंचाई योजना को यहां ठीक से लागू नहीं होने दिया। साथियो, हमारी बहनों का बहुत बड़ा समय पानी के इंतजाम में लग जाता है, गंदे पानी से बच्चे बीमार होते हैं। लेकिन दीदी ने क्या किया? केंद्र सरकार ने हर घर पाइप से जल पहुंचाने की एक बहुत बड़ी योजना पूरे देश में शुरू की। अभी तक देशभर में 4 करोड़ से ज्यादा परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। लेकिन, पश्चिम बंगाल में नल से पानी पहुंचाने के लिए जो करोड़ों रुपए भेजे थे, वो भी दीदी तिजोरी में रखकर बैठ गईं।

साथियो,

मैं आपको आश्वस्त करता हूं, कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही पानी की समस्या को दूर करने के लिए, हर घर पाइप से जल पहुंचाने के लिए, डबल ताकत से काम किया जाएगा। यहां के कृषक परिवारों के लिए, विशेष रूप से छोटे कृषकों को तो डबल इंजन की सरकार से बहुत लाभ होने वाला है। देशभर में भंडारण से जुड़ा, कोल्ड स्टोरेज से जुड़ा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का विशेष फंड केंद्र सरकार ने बनाया है। नए कृषि कानूनों से भी भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और कृषि आधारित शिल्प के लिए बहुत प्रोत्साहन मिलने वाला है। आलू सहित हर प्रकार के फल सब्जी से जुड़े कृषकों को जब कोल्ड स्टोरेज मिलेगा, प्रोसेसिंग उद्योग निकट ही मिलेंगे, तो इससे बहुत बड़ा लाभ मेरे कृषक भाइयों को होगा। जूट किसानों के लिए MSP में केंद्र सरकार पहले ही कई गुणा बढ़ोतरी कर चुकी है। यहां जूट की अलग-अलग पैकेजिंग से जुड़े उद्यम लगें, सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी बहनों को इससे जोड़ा जा सके, इसको प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के सभी कृषक परिवारों को पहली कैबिनेट बैठक में ही, और मैं आपसे कहूंगा हर किसान के घर तक मेरी ये बात पहुंचानी है, पहुंचाएंगे? गांव-गांव जाकर पहुंचाएंगे? हरेक किसान के घर जाकर बताएंगे? तो मैं बताता हूं, क्या बताना है। 2 मई के बाद बीजेपी की सरकार बनेगी और पहली कैबिनेट में जो काम हम करने वाले हैं, वो आप किसानों के घर-घर जाकर बताइए। पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ हर किसान को मिल जाएगा। बंगाल की बीजेपी सरकार की कोशिश होगी कि हर किसान के खाते में, ये बात पहुंचाइए, जल्द से जल्द 18 हजार रुपए सीधे किसान के बैंक खाते में जमा हो जाएंगे। ये किसानों को जाकर बताइए, दोस्तो। चाय बागान में काम करने वाले श्रमिको के लिए इस बजट में एक हजार करोड़ रुपए की विशेष योजना का भी ऐलान किया गया है। इसका लाभ इस क्षेत्र के भाइयों और बहनों को मिलेगा।
आप इतना प्यार कर रहे हैं, इतना प्यार कर रहे हैं कि यहां से जाने का मन ही नहीं करेगा...

साथियो,

मुझे कुछ लोगों ने बताया कि दीदी आजकल लोगों को धमकी दे रही हैं। और दीदी के यहां से धमकी आ रही है कि वो जीतकर नहीं आएंगी तो सारी सुविधाएं बंद हो जाएंगी! आपनारा कि एटा बिस्सास कोरेन? बिस्सास कोरेन? बिस्सास कोरेन?

एटी संपूर्ण मित्था!
असत्य कथा !
जनमानुष के विभ्रांत कोरार व्यर्थ चेष्टा आर सफल होबे ना !
बांग्लार मानुष भूल बुझानेर चेष्टा धोरे फेलेछे !
किछुई बंद होबे ना !
आप लिखके रखिए, किछुई बंद होबे ना !
भाजपा सरकार सबार जन्यो सामाजिक सुरक्षा, मासिक भाता, शिक्खा, स्वास्थ्य, खाद्य, मां बोनेदेर आर्थिक सूविधा, कृषकदेर सूविधा दिते थाकबे!
टाकार परिमाण एखोन थेके अनेक टाई बाड़बे !
हां, हां, थाकबे ना,
कट मनी
तोलाबाजी,
दुर्नीति
सिंडिकेट,
राजनैतिक वंचना!


भाइयो और बहनो,
ये पूरा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से, ऐतिहासिक रुप से बहुत समृद्ध है। यहां हमारी समृद्ध धरोहर है। भवइया गान जैसे अनेक पारंपरिक संगीत, नृत्य और साहित्य से ये क्षेत्र समृद्ध है। कूच बिहार पैलेस सहित, यहां अनेक मंदिरों की आस्था है, आकर्षण है। जो टूरिज्म, जो धरोहर यहां की असली ताकत है, उसी की दीदी की सरकार ने उपेक्षा की है। ठाकुर पंचानन जी के घर को सहेजने के बजाय टीएमसी सरकार ने जर्जर होने को छोड़ दिया। उनके म्यूजियम की क्या स्थिति है, ये आप भलीभांति, अच्छे से जानते हैं। जब दीदी की सरकार द्वारा हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स को रोका जाएगा, जब उनमें अड़ंगे लगाए जाएंगे, तो टूरिज्म कैसे बढ़ पाएगा? दीदी की सरकार की बेरुखी का सीधा नुकसान यहां के युवाओं को हुआ है, नौजवानों को हुआ है। जिनको यहां टूरिज्म के सेक्टर में बिजनेस मिल सकता था, चाकरी मिल सकती थी, वो पलायन के लिए मजबूर हैं। 2 मई के बाद, डबल इंजन सरकार यहां हर प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर के सामने की रुकावटों को दूर करेगी।

साथियो,
यहां स्थानीय गौरव को मजबूत करने के लिए बंगाल बीजेपी ने अनेक संकल्पों को पूरा करने का प्रण लिया है। आप लोगों की बरसों पुरानी मांगों पर बंगाल की बीजेपी सरकार तेजी से काम करेगी। जिस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दीदी की सरकार ने रोक रखा है, वो भी यहां लागू की जाएगी। इस नीति के बाद स्थानीय भाषा में पढ़ाई और आसान हो जाएगी। इसका बहुत बड़ा लाभ यहां के युवाओं को मिलेगा। नारायणी सेना बटालियन को लेकर जो भ्रम टीएमसी फैला रही है, वो भी 2 मई के बाद दूर हो जाएगी। अब बस कुछ ही दिनों की बात है। अब तुष्टिकरण और भेदभाव नहीं, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास मिलेगा।
आपको बस एक ही बात ध्यान रखनी है,
लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी- पोद्दे छाप, तृणमूल साफ!
पोद्दे छाप... तृणमूल साफ !
पोद्दे छाप... तृणमूल साफ !
आप घर-घर जाएंगे…? ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाएंगे...? पूरे राज्य में एक नंबर का मतदान आपका होगा... ? पूरी ताकत से होगा... ? लोगों को घर से ले जाएंगे... ? लोगों को समझाएंगे... ? दीदी के गुंडे आ जाएं, तो भी जाएंगे... ? पक्का जाएंगे... ?
मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए...
भारत माता की... जय !
भारत माता की... जय !
बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तो !

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Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
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“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!