In the past 4 years the Congress Government has made sure that the affairs of the state of Rajasthan are utterly neglected: PM Modi
The Congress is so confident of its defeat in the state of Rajasthan that it has entered the Bye-Bye Mode: PM Modi
Congress Rule means the intentions of loot and the box of lies: PM Modi
The Congress Party resonates with corruption, crime and appeasement and this has been their consistent policy record in any state: PM Modi


भारत माता की… भारत माता की..

बीकानेर वो जगह है, जिसका नाम देश में कहीं भी सुनें, मुंह में पानी आ जाता है। और फिर मुझे तो यहाँ की धरती पर सावन के महीने में आने का सौभाग्य मिला है। इंद्रदेव का आशीर्वाद हम पर बना हुआ है। और अभी हमारी सीपी जोशी जी बता रहे थे कि…


सियाळो खाटू भलो, ऊनाळो अजमेर।


मारवाड़ नित रो भलो, सावण बीकानेर।


यहां के रसगुल्लों की मिठास, यहां की नमकीन और भुजिया का स्वाद पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मेरे लिए ये शहर इसलिए भी खास है क्योंकि बीकानेर को छोटी काशी के रूप में भी जाना जाता है। यहां काशी की ही तरह गौरवशाली अतीत भी है, अध्यात्म भी है। ये पावन धरा मां करणी की धरती है, सांख्यदर्शन के प्रणेता भगवान कपिल की तपोभूमि है। ये रुणिचा धाम रामदेवरा के बाबा रामदेव जी, सिद्ध समाज के गुरु जसनाथ जी और वीर तेजाजी के भक्तों की धरती है। ये पर्यावरण संरक्षण के प्रणेता गुरु जम्भेश्वर की तपस्थली रही है। ये तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य तुलसी की कर्मभूमि रही है। और यहां, पुनरासर बालाजी का आशीर्वाद तो प्रत्यक्ष ही मिलता है। इन सभी देवों और संतों को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। आप सब इतनी बड़ी संख्या में यहाँ आए, अभी यहां बताया कि चार-चार पांच-पांच घंटों से कड़ी धूप में आप आशीर्वाद देने के लिए मौजूद हुए। मैं जितना आपका आभार व्यक्त करूं उसके लिए मेरे शब्द कम पड़ रहे हैं, मैं फिर एक बार आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं धन्यवाद व्यक्त करता हूं। साथियों ये उत्साह बताता है। मैं ऊपर देख रहा हूं वहां तक लोग ही लोग है। ये उत्साह बताता है कि राजस्थान में मौसम का पारा ही नहीं चढ़ा है, बल्कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का पारा भी चढ़ चुका है। और जब जनता का पारा चढ़ता है, तो सत्ता की गर्मी उतरते और सत्ता बदलते भी वक़्त नहीं लगता।

साथियों,


अभी कुछ ही देर पहले मुझे राजस्थान के विकास के लिए 24 हजार करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास का अवसर मिला। अमृतसर जामनगर एक्स्प्रेस-वे को राजस्थान में पड़ने वाला 500 किमी से लंबा सेक्शन अब शुरू हो गया है। इसके पहले दिल्ली-मुंबई एक्स्प्रेसवे के दिल्ली-दौसा-लालसोट सेक्शन का भी शुभारंभ हुआ था। राजस्थान की कनेक्टिविटी के लिए जितना काम भाजपा सरकार ने किया है, उतना पहले कभी नहीं हुआ है। पिछले 9 वर्षों में केंद्र सरकार जितनी भी योजनाएं लाई है, हमारी कोशिश यही रही है उनका ज्यादा से ज्यादा लाभ राजस्थान को मिले। हमने देशभर के गरीबों के लिए 4 करोड़ पक्के मकान बनाए। इसमें से करीब 20 लाख घर, राजस्थान के मेरे गरीब भाइयों-बहनों को मिले हैं। बीस लाख घर। हमने देशभर में करीब 50 करोड़ गरीबों के बैंक खाते खोले। इस वजह से राजस्थान के 3 करोड़ गरीबों को पहली बार बैंक की सुविधा मिली। कोरोना के मुश्किल समय में यही बैंक खाते गरीबों की सबसे बड़ी ताकत बने।

भाइयों और बहनों,


विकास पूरी तरह से जनता तक तब पहुंच पाता है, जब देश और प्रदेश की दोनों सरकारें साथ मिलकर ईमानदारी से काम करें। पिछले 4 वर्षों में राजस्थान में हालात इसके बिलकुल उलट रहे हैं। हम दिल्ली से योजनाएं यहां राजस्थान में भेजते हैं, लेकिन यहां जयपुर में कांग्रेस का पंजा, उस पर झपट्टा मार देता है। कांग्रेस को राजस्थान के लोगों की परेशानी से, आपकी दिक्कतों से कोई लेना-देना नहीं है। अब आप देखिए, घर-घर पीने का साफ पानी पहुंचाने की भाजपा सरकार की योजना से भी अब कांग्रेस सरकार को परेशानी है। जिस राजस्थान को जल जीवन मिशन में सबसे टॉप पर होना चाहिए था, वो सबसे धीमा करने वाले राज्यों की लिस्ट में शामिल है। आज देश के 130 से ज्यादा जिले ऐसे हैं, जहां शत प्रतिशत घरों में नल से जल पहुंचा है। इनमें से राजस्थान का एक भी जिला नहीं है। अब आप मुझे बताइए... क्या राजस्थान के लोगों ने कोई गुनाह किया है क्या? क्या राजस्थान के लोगों ने कोई गलती की है? साथियों, गलती राजस्थान के लोगों की नहीं, गलती यहां की कांग्रेस सरकार की है। कांग्रेस सरकार ने 4 सालों में राजस्थान का बहुत नुकसान किया है। और ये बात, कांग्रेस के नेता भी अच्छी तरह जानते हैं। राजस्थान में कांग्रेस की हार इतनी सुनिश्चित है, कि यहां की सरकार अभी से ‘बाय-बाय मोड’ में आ गई है। मुझे पता चला है कि कुछ मंत्री विधायक तो अभी से अपने सरकारी बंगले खाली करके अपने खुद के घरों में शिफ्ट होने लगे हैं। अपनी हार पर इतना भरोसा सिर्फ कांग्रेस के नेता ही कर सकते हैं। साथियों, पुरानी कहावत है कि दीया बुझने से पहले जोर से लपलपाता है। अपनी हार के डर से कांग्रेस भी ऐसा ही कर रही है। इसके लिए वो राजस्थान के लोगों को गुमराह करने पर उतर आई है।

भाइयों बहनों,


आपको याद रखना है, काँग्रेस का एक ही मतलब है, कांग्रेस मतलब.. (साथियों आपका प्यार सर आंखों पर। आप आगे आने की कोशिश मत कीजिए, आपका प्यार सर आंखों पर साथियों ) साथियों कांग्रेस का मतलब है - लूट की दुकान, झूठ का बाज़ार! जो ये इन दिनों बड़े-बड़े वायदे किए जा रहे हैं, उसमें लूट के इरादे और झूठ के पिटारे के सिवा और कुछ नहीं हैं। साथियों, कांग्रेस की झूठ और छलावे की राजनीति का शिकार सबसे ज्यादा राजस्थान का किसान हुआ है। आप मुझे बताइये, पिछले चुनाव में कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। इनके नेता ने दस दिन के भीतर कर्जमाफी की कसम खाई थी। किसानों का कर्ज माफ हुआ क्या? 10 दिन, 10 महीने, और अब 4 साल, कर्ज माफ हुआ क्या? यहाँ के किसान इतनी बड़ी मात्रा में बाजरा उत्पादन करते हैं। हमने मोटे अनाजों को श्रीअन्न के तौर पर प्रमोट किया। दुनिया में पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। बाजरा पड़ोस के हरियाणा में तैईस सौ पचास रुपए प्रति क्विंटल बिका। दो हजार तीन सौ पचास रुपये प्रति क्विंटल, बहुत ज्यादा दूर नहीं यहां हरियाणा में, यहाँ राजस्थान में वही बाजरा किसान 1300 रुपए में बेचने को मजबूर हुआ। हमने राजस्थान के किसानों के लिए नर्मदा का पानी पहुंचाया। इन्होंने उसे रोकने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। किसानों से यही नफरत, कांग्रेस की फितरत है, यही इनकी हकीकत है।

साथियों,


विकास के लिए ये जरूरी होता है कि सरकार ईमानदार भी हो, और सरकार स्थिर भी हो। आज दुनिया में हिंदुस्तान का सम्मान बढ़ा है, क्योंकि देश में आज एक स्थिर सरकार है। आपने स्थिर सरकार बनाकर के मुझे काम करने का मौका दिया है। जिन-जिन प्रदेशों ने लगातार स्थिर सरकारों को चुना है, डबल इंजन सरकार को चुना है, वो प्रदेश भी तेजी से विकास कर रहे हैं। लेकिन राजस्थान में जबसे काँग्रेस सरकार आई है, इन्होंने क्या किया? 4 साल से पूरी काँग्रेस पार्टी और सरकार बस आपस में लड़ रही है। हर कोई एक दूसरे की टांग खींच रहा है। अपने-अपने गुट को मजबूत बनाने के लिए खुलेआम सौदेबाजी हो रही है। एक खेमे के विधायकों को ट्रान्सफर-पोस्टिंग और लूट की खुली छूट मिली हुई है, ताकि वो दूसरे गुट में न भाग जाएँ। ये लड़ाई केवल खेमों तक की नहीं है! सारे मंत्री भी आपस में लड़ रहे हैं कि इस विभाग में लूट का काम मुझे मिले, वो मुझे लूटने दिया जाए। इस विभाग का काम उस विभाग को क्यों दिया गया, इस मंत्री का कमीशन उस मंत्री के पास कैसे चला गया, पूरी राजस्थान सरकार इसी खींचतान में लगी पड़ी है। और इस पूरी खींचतान के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने बेटे का भविष्य बचाने में जुटे हुए हैं। उन्हें राजस्थान के बेटे-बेटियों की कोई चिंता नहीं है। इस वजह से भी कई मंत्री-विधायक उनसे खार खाए हुए हैं। आप मुझे बताइए साथियों, क्या ऐसे लोग राजस्थान का भला कर सकते हैं? राजस्थान के युवकों का भला कर सकते हैं? राजस्थान के गांवों का भला कर सकते हैं? राजस्थान के किसानों का भला कर सकते हैं ? इन लोगों से राजस्थान के विकास की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है भाइयों? इन लोगों को मैं आज दो टूक कह देना चाहता हूं। अब ये भ्रष्टाचार की नूराकुश्ती बहुत हुई। अब लोकतन्त्र के अखाड़े में जनता-जनार्दन फैसला करेगी। अब राजस्थान को स्थिर सरकार चाहिए। अब राजस्थान को डबल इंजन की सरकार चाहिए। अब राजस्थान को परिवारवाद नहीं, अब राजस्थान को विकासवाद चाहिए।

साथियों,


राजस्थान में जबसे काँग्रेस आई है, इसने एक और पहचान बनाई है- भ्रष्टाचार, अपराध और तुष्टीकरण! हालत ये है कि जब भ्रष्टाचार की रैंकिंग होती है, तो राजस्थान उसमें नंबर-1 आता है। जो राजस्थान अपनी शांति और सौहार्द के लिए जाना जाता था, वहाँ आज आए दिन सांप्रदायिक तनाव की घटनाएँ हो रही हैं। पूरी काँग्रेस सरकार तुष्टीकरण में लगी हुई है। यहां सिस्टम इतना बेखौफ हो गया है कि पेपर लीक की एक अलग इंडस्ट्री खुल गई है। अब तक 17 बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। यानि यहां युवाओं के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।साथियों, हर जगह स्कूल कॉलेजों को राजनीति से बाहर रखा जाता है ताकि बच्चों का भविष्य खराब न हो! लेकिन, राजस्थान में काँग्रेस की लूट ने शिक्षण संस्थानों को भी नहीं बख्शा। यहां के शिक्षक, मुख्यमंत्री के सामने आकर कह रहे हैं कि तबादले के लिए खुली घूस चल रही है। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही।

भाइयों बहनों,


महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में, बलात्कार के मामले में राजस्थान सबसे आगे है। हालात ये है कि यहाँ रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं। और दुर्भाग्य ये कि बलात्कार और हत्या के आरोपियों को बचाने में पूरी सरकार जुटी नजर आती है। अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए हमारी बेटियों पर गलत नज़र डालने वालों को कांग्रेस संरक्षण दे रही है। राजस्थान के लोग ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये महिलाओं के सम्मान की, उनकी आन-बान की धरती है। ये राजस्थान की धरती है, ये माँ पन्ना धाय की धरती है। ये वो धरती है जहां हाड़ा रानी ने अपने पति को युद्ध में भेजने के साथ ही अपना बलिदान दे दिया था। आत्मसम्मान और धर्म की रक्षा राजस्थान की रगों में है।इस पर कीचड़ उछालने की हिम्मत करने वाली कांग्रेस को राजस्थान कभी माफ नहीं करेगा।

साथियों,


कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो अगर सत्ता में रहती है तो खा-खाकर देश को खोखला करती है। और जब ये सत्ता से बाहर जाते हैं, तो देश को गाली दे-देकर बदनाम करने लगते हैं। इनको भारत की प्रगति से इतनी तकलीफ है कि इनके नेता विदेश में जा-जाकर भारत को गाली देते हैं। आपको याद होगा, जब-जब देश की सेना ने शौर्य दिखाया है तब-तब इन्होंने सेना को भी नीचा दिखाने के लिए क्या कुछ नहीं बोला! सेना कहती है हमने पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डे तबाह किए, सर्जिकल स्ट्राइक की, तो कांग्रेस कहती है कि सबूत दिखाओ। हमारी वासुसेना पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करती है, तो ये कहते हैं कि कुछ हुआ ही नहीं! कांग्रेस को सेना और सैनिकों से हमेशा दिक्कत रही है। इसलिए वीरों की धरती राजस्थान, जहां से इतने युवा सेना में जाते हैं, उनसे कांग्रेस चिढ़ी रहती है। हमारी सेना के जवान कितने वर्षों से ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग कर रहे थे। वर्षों तक कांग्रेस की सरकारों ने उसकी उपेक्षा की। यही नहीं, सेना के काम में भी ये लोग झूठ और धोखेबाजी से बाज नहीं आए। वन रैंक, वन पेंशन के लिए हजारों करोड़ रुपये की जरूरत थी। लेकिन, कांग्रेस सरकार कागज पर केवल 500 करोड़ रुपए दिखाकर OROP का धोखा दे रही थी। हमारी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू किया। पूर्व सैनिकों को इसके तहत करीब 65 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। राजस्थान के भी हमारे करीब सवा लाख पूर्व सैनिकों को इसका लाभ मिला है। इससे पता चलता है कि भाजपा और काँग्रेस की सोच में क्या फर्क है! भाजपा और काँग्रेस की नियत में क्या फर्क है। कांग्रेस अपनी सियासत के लिए देश के नुकसान और अपमान से कभी भी नहीं चूकती! भाजपा के लोग देश के लिए पद, प्रतिष्ठा सब कुछ बलिदान करने से भी नहीं चूकते।

साथियों,


हमारा बीकानेर देश का सीमावर्ती जिला है। संकट के समय ये जिला सबसे पहले देश की रक्षा के लिए खड़ा होता है। लेकिन, काँग्रेस सरकार ने इस जिले की भी उतनी ही उपेक्षा की है। कांग्रेस ने दशकों तक सीमावर्ती इलाकों को जानबूझकर विकास से वंचित रखा। आज हम बार्डर पर हाइटेक सड़कें बना रहे हैं। सीमावर्ती गांवों के विकास को पहली प्राथमिकता बनाकर हमने वाइब्रेंट विलेज स्कीम शुरू की है। लेकिन, इन सभी प्रयासों का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब यहां डबल इंजन की सरकार होगी। इसके लिए हमें अभी से तैयारियों में जुट जाना है। जीत तय मानकर भाजपा के कार्यकर्ताओं को मेहनत में कमी नहीं करनी है। हमें दूसरे की कमजोरियों पर नहीं, अपने परिश्रम पर भरोसा करना है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में आए। मुझे भरोसा है कि आप राजस्थान में डबल इंजन सरकार बनाने के लिए भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!


मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए, दोनों हाथ ऊपर करके बोलिए


भारत माता की… भारत माता की… भारत माता की…


और जैसे अभी हमारे बीकानेर के सांसद मेघवाल जी नौ रंग की बात कर रहे थे ये नवरंग को चमकाने के लिए इस शुभ अवसर पर मैं आप सबसे आग्रह करता हूं, अपना मोबाइल फोन निकालिए और उसका प्लैश चालू करिए और इन नवरंग का प्रकाश लोगों को पहुंचाइए। हर किसी के मोबाइल फोन का फ्लैश चालू कीजिए, शाबाश, दूर-दूर तक... दूर-दूर तक... हर किसी का मोबाइल चालू कीजिए
भारत माता की… भारत माता की.. भारत माता की..


बहुत-बहुत धन्यवाद

 

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April 17, 2026
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आदरणीय सभापति जी,

सदन की ओर से, मेरी तरफ से, मैं श्रीमान हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और शुभकामनाएं भी देता हूं। राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, यह अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है और यह अपने आप में यह एक अनुभव का सम्मान है, एक सहज कार्य शैली का सम्मान है और एक सहज कार्य शैली की स्वीकृति भी है। हमने सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वह अपने जीवन के जो भूतकाल के अनुभव हैं, उसको भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग लाते हैं। उनका यह अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व को बनाता है। मुझे विश्वास है, उपसभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी का जन्म यूपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण उन्हें अपने गांव के विकास में विद्यार्थी काल से भी कुछ ना कुछ करते रहे। उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई और इन सारे विषयों पर मुझे भूतकाल में बोलने का अवसर मिला, तो मैं काफी कुछ कह चुका हूं। इसलिए मैं आज इसको दोहराता नहीं हूं। एक बात का उल्लेख आज जरूर मैं करूंगा, आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल 1927, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती भी है और विशेषता यह है कि आज 17 अप्रैल को आप जब तीसरी बार इस दायित्व को संभालने जा रहे हैं और वह भी चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर और चंद्रशेखर जी के साथ आपका जुड़ाव, उनके प्रति आपका लगाव और एक प्रकार से आप उनके सहयात्री रहे, उनके पूरे कार्यकाल में, तो यह एक अपने आप में एक बहुत ही बड़ा सुयोग है। अपने चंद्रशेखर जी के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और चंद्रशेखर जी के एक वृहद जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बहुत बड़ा काम भी आपने किया है और इसलिए आपके लिए एक बहुत बड़ा विशेष अवसर बन जाता है कि चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर आपके तीसरा कार्यकाल का प्रारंभ हो रहा है। हरिवंश जी का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है। पत्रकारिता के उच्च मानदंड, यह आज भी आदर्श के रूप में रेखांकित किए जाते हैं। लंबा जीवन पत्रकारिता का रहा है, लेकिन पत्रकारिता में भी उन्होंने उच्च मानदंड को हमेशा आधार माना। हम सब जानते हैं, उनके लेखनी में धार है, लेकिन उनकी वाणी में और व्यवहार में सौम्‍यता और शिष्‍टता भरी-भरी रहती है, यह अपने आप में और मैं जब गुजरात में था, तब भी मैं उनकी लेखों को पढ़ने की मेरी आदत रही थी और मैं देखता था कि वह अपना पक्ष बड़ी दृढ़ता के साथ रखते थे और मैं अनुभव करता था कि उसमें काफी अध्ययन के बाद उसका निचोड़ उसमें प्रकट होता था। पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का उनका निरंतर प्रयास रहा और एक सफल प्रयास भी रहा और हम देखते हैं, सदन में भी चाहे पॉलिसी हो या प्रोसेस हो, उन बातों का कहीं ना कहीं छाया हमें हमेशा नजर आती है और यह हम सबके लिए सुखद अनुभव है। वह समाज की वास्तविकताओं के साथ गहरे जुड़ाव के साथ काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। मैं तो कहूंगा, जो चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा हो, जो नए सांसद आते हैं, जो हरिवंश जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं, बहुत कुछ बातें करके उनसे जान सकते हैं, क्योंकि जब वह पत्रकारिता में थे, तो उनकी कॉलम चलती थी, हमारा सांसद कैसा हो, हमारा पार्लियामेंट मेंबर कैसा हो, तब उनको शायद पता नहीं होगा, कभी उनको ही बैठना पड़ेगा। लेकिन वह लिखते थे और वह बातों में बहुत व्यापकता रहती थी। सदन की गरिमा और बैठने वाले सदस्य का दायित्व, अब उसके आचार विचार को लेकर भी बहुत गहरा उनका अध्ययन रहता था और उन बातों का उपयोग आज हमारे सदन के साथी, उनके साथ बैठकर के बहुत कुछ जान सकते हैं, सीख सकते हैं। समय की पाबंदी एक डिसिप्लिन लाइफ में और अपने कर्तव्‍यों के प्रति गंभीरता, यह आपकी विशेषता रही है और शायद इसी के कारण आप सर्व स्वीकृत व्‍यक्‍तित्‍व आपका विकसित हुआ है। हमने देखा होगा जब से वह राज्यसभा के सदस्य बने हैं, मैं कह सकता हूं कि पूर्ण समय वह सदन में होते हैं। सभापति जी की अनुपस्थिति में सदन को संभालने का काम तो करते ही हैं, लेकिन बाकी समय भी यहां कमेटी का कोई भी व्यक्ति बैठा हो, तो भी वह सदन में हमेशा अपनी मौजूदगी रहती है। हर बात को सुनते हैं, उस समय सदन का जो संचालन करते हैं, उनके कार्य को भी देखते हैं और यह इसके पीछे उनको अपना जो दायित्व है, उसके प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता है, उसके कारण यह संभव होता है और यह हम सबके लिए सीखने जैसा है और मैंने देखा है कि वह पूरा समय इन चीजों के लिए वह खपा देते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

उपसभापति के तौर पर सदन को कैसे चलाया, सदन में सदस्य के तौर पर क्या योगदान दिया, इस बारे में हम स्वाभाविक रूप से एक सकारात्मक चर्चा करते रहते हैं। लेकिन सदन के बाहर, जनता के बीच वह कैसे अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक दायित्‍वों को निभाते हैं, यह भी हम सार्वजनिक जीवन में जो लोग हैं, उनके लिए सचमुच में ध्यान आकर्षित करने वाले विषय हैं और हमें उसको देखना चाहिए। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि काम सराहनीय तो है ही हैं, अनुकरणीय भी हैं। हमारा देश युवा देश है और मैंने देखा है कि हरिवंश जी ने अपने समय का उपयोग सबसे ज्यादा युवाओं के बीच में बिताना पसंद किया है। युवाओं में लगातार गंभीर विषयों पर जागरूकता बने, एक प्रकार से लोक शिक्षा का काम निरंतर चलता रहे, यह अपने आप में वह लगातार करते रहते हैं, तो देश भर में उनका भ्रमण रहता है। वह मीडिया की नजरों में बहुत ज्यादा रहने का उनका शौक नहीं है, लेकिन भ्रमण और कार्यक्रमों की संख्या उनकी लगातार चलती रहती है। 2018 में, जब उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद जो मेरी जानकारी है, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज में 350 कार्यक्रम किए हैं। यह एक बहुत बड़ा काम है। देश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस में 350 से अधिक कार्यक्रम, जाना-आना, उनके साथ बैठना, बातें करना, उसके लिए विषयों की तैयारी करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा, एक प्रकार से आपने बृहतस्य के रूप में इस काम को किया है और युवाओं से ही जुड़ने के लक्ष्य को आपने जरा भी ओझल नहीं होने दिया है। और विकसित भारत का सपना युवाओं के लिए भी क्यों होना चाहिए, इस मूल विषय को अलग-अलग तरीके से जिस प्रकार से विद्यार्थियों का मूड हों, वह बताते रहते हैं। विद्यार्थियों में, युवा पीढ़ी में एक आत्मविश्वास कैसे पैदा हो, निराशा से वह हमेशा-हमेशा बाहर रहें, इन सारे विषयों की चर्चा वह करते हैं। उनके कुछ ऐतिहासिक रेफरेंस के साथ बात करते हैं कि हम ऐसे क्या कारण हैं कि हम जितनी तेजी से जाना चाहिए था, आगे नहीं जा पाए, अब अवसर क्या आया है, सारी बातें हो और देश इतनी बड़ी छलांग लगा सकता है, उसका आत्मविश्वास भरने का काम उनके द्वारा होता है। आजकल देश में लिटरेचर फेस्टिवल, एक बड़ा सिलसिला चला है और अब तो वह टीयर-2, टीयर-3 सिटीज़ तक भी वह सिलसिला चला है। लिटरेचर फेस्टिवल्स में भी हरिवंश जी का अक्सर जाना होता है और उस समाज का, उस तबके को भी वह अपने विचारों से प्रभावित करते रहते हैं, प्रेरित करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

मैंने उनके जीवन का एक प्रसंग जो सुना है, शायद हो सकता है, सार्वजनिक तौर में मेरी जानकारी सटीक ना भी हो। मैंने सुना है कि 1994 में हरिवंश जी पहली बार विदेश यात्रा की और वह अमेरिका गए। जब अमेरिका गए, तो अपने सारे कार्यक्रमों के अलावा उनसे पूछा गया कि आप कहीं और जाना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं। तो उन्होंने आग्रह से कहा कि मैं जरूर यह विकसित देश है, तो मैं उसकी यूनिवर्सिटी को देखना-समझना चाहता हूं और वहाँ की ऐसी कौन सी शिक्षा और कल्चर है, जिसके कारण यह देश इतना आगे बढ़ रहा है और उन्होंने काफी समय अपने निर्धारित कार्यक्रमों के सिवाय वह पहली अमेरिका की यात्रा में सिर्फ और सिर्फ यूनिवर्सिटीज में बिताया, उसका अध्ययन करने का काम किया। यानी यह जो ललक थी उनके मन में, यह अगर यह विकसित देश की यूनिवर्सिटी से जो निकलता है, तो हिंदुस्तान की यूनिवर्सिटीज़ भी ऐसी हों, ताकि विकसित भारत का सपना वहीं से रेखांकित किया जा सके।

आदरणीय सभापति जी,

MPs को MPLAD फंड के संबंध में तो काफी चर्चा रहती है और एक बड़ा प्रसंगी का विषय भी रहता है MPs में और कभी-कभी तो यह भी संघर्ष रहता है कि MPLAD फंड इतना है और वहां उधर एमएलए फंड ज्यादा है, उसकी चर्चा रहती है। लेकिन एमपी फंड का उपयोग कैसे हो, MPLAD जो फंड की बातें हैं, उसमें हरिवंश जी के विचारों को तो मैंने स्वयं भी सुना है, मैं प्रभावित हूं इससे, लेकिन हमारी भी कुछ मजबूरी रही है। शायद हम उनकी अपेक्षा के अनुसार उसको कर नहीं पाए हैं, क्योंकि सबको ऐसे विषय में साथ लेना जरा कठिन होता है। लेकिन उन्होंने खुद की उस जिम्मेदारी को कैसे निभाया है, मैं समझता हूं वह भी हम लोगों ने, उन्होंने यह MPLAD फंड था, जो अपने जो विचार हैं, उसके विचार को भी नीचे धरातल पर उतारने के लिए उपयोग किया, शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी, यह उसके सारे केंद्र में रहा, MPLAD फंड उन्होंने इस्तेमाल करने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थानों में ऐसे अध्ययन केंद्र स्थापित किया और उसका प्रभाव लंबे अरसे तक रहने वाला है और उसमें भी उन्होंने प्रोजेक्ट ओरिएंटेड, समस्या के समाधान को केंद्र में रखा। जैसे लुप्त होती जा रही भारतीय भाषाओं, उनके संरक्षण के लिए उन्होंने आईआईटी पटना में एक अध्ययन केंद्र के लिए MPLAD फंड का उपयोग किया, तो उस काम को वह लगातार वहां हो रहा है। एक और उन्होंने काम किया, जो बिहार में कुछ क्षेत्र हैं, जहां भयावह भूकंप की घटनाएं रोज घटती रहती हैं, नेपाल में भी एक छोटा सा भूकंप आ जाए, तो भी उस क्षेत्र का प्रभावित करता है। इस काम को ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से सेंटर फॉर अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के रूप में एक स्टडी सेंटर रिसर्च के लिए खुलवाया है। यानी वह स्टडी का काम करना, रिसर्च करना, उस पर लगातार काम कर रहा है। हम जानते हैं कि जैसा मैंने कहा है, जय प्रकाश जी का गांव सिताब दियारा हरिवंश जी वहीं हैं और वहां गंगा और घाघरा दो नदी के बीच में एक गांव है, तो हमेशा ही जल के कारण जो कटाव की समस्या रहती है, वो गांव परेशान रहता है और नदी धारा भी बदलती रहती है, तो विनाश भी बहुत होता रहता है। उसको भी ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उन्होंने पटना की आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में एक नदी अध्ययन केंद्र खुलवाया है। पटना के ही चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्था में वो बिजनेस इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर बनवा रहे हैं। एआई के इस दौर में मगध विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बनाया है। यानी MPLAD फंड का एक निर्धारित दिशा में काम कैसे किया जा सकता है, इसका एक उदाहरण आपने प्रस्तुत किया है।

आदरणीय सभापति जी,

हम सभी ने अनुभव किया है कि लोग जब अपने गांव से स्थानांतरण करते हैं, एक दूसरे शहर में जाते हैं, तो जीवन में एक प्रकार से गांव से कट जाते हैं। हरिवंश जी का जीवन आज भी गांव से जुड़ा रहता है, अपने गांव से जुड़ा रहता है। वह लगातार वहां के सुख दुख के साथी बन करके वह अपना जो भी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं, वह करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

जिस संसद की नई इमारत में बैठे हैं, उसका जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब मुझे उनके साथ निकट से काम करने का अवसर आया। और मैं अनुभव कर रहा था कि जो विचार मेरे मन में आते थे, मैं हरिवंश जी से कहता था, हम ऐसा करें तो कैसा होगा, दो दिन में वो बराबर परफेक्ट उसको लेकर आते थे, कहीं नामकरण करना है, उसके पहचान इस सदन की कैसे बने, तो काफी कुछ कंट्रीब्यूशन सदन के निर्माण में, उसकी आर्ट गैलरी में, विभिन्न द्वार के नाम रखने हों, यानी हर प्रकार से मेरे एक साथी के रूप में हम दोनों को और मुझे बड़ा आनंददायक रहा वो अनुभव काम का।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी के सदन को चलाने की कुशलता को तो हम भली भांति देखे हैं, लेकिन साथ-साथ उन्होंने राज्यों की विधानसभाएं, विधान परिषदें और वहां जो प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स हैं, उनको भी कैसे मदद रूप होना, उनके लिए किस प्रकार से आवश्यक उनके ट्रेनिंग के लिए काम किया जाना, उसके लिए भी काफी समय दिया और उन्होंने लगातार उनके लिए समय दिखाया। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भी उन्होंने भारत की डेमोक्रेटिक व्यवस्था की छाप छोड़ने में बहुत बड़ी सक्रिय भूमिका निभाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि 21वीं सदी का यह दूसरा क्वार्टर यह सदन को बहुत कुछ कंट्रीब्यूट करना है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाने में, विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में, मुझे विश्वास है कि सदन के द्वारा बहुत कुछ होगा और उसके कारण पीठाधीश सबका दायित्व बहुत बड़ा होता है। हम सबका बड़े विश्वास से मैं कह सकता हूं कि सभी साथी आप जो चाहते होंगे, उसको पूरा करने के लिए सहयोग करते रहेंगे और आपके काम को कठिनाइयों में ना परिवर्तित करें इसके लिए ताकि आप ज्यादा आउटकम दे सकते हैं और मुझे विश्वास है सब लोग इसको करेंगे और मैंने पहले भी कहा था कि हरि कृपा पर है सब कुछ और हरि तो यहां के भी है, हरि वहां के भी है और हरि यही बैठेंगे। तो हरि कृपा बनी रहे। इसी एक अपेक्षा के साथ मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!