उपस्थित भाइयों और बहनों,

कंडला एक प्रकार से लघु भारत है, Mini-India और आज Airport से कंडला Port तक आने के रास्ते भर आप सबने जिस प्रकार से स्वागत सम्मान किया, एक प्रकार से आपने सड़क के दोनों किनारों पर आबे-हू भारत खड़ा कर दिया था। मैं आपके इस प्यार के इस स्वागत सम्मान के लिये आपका बहुत बहुत आभारी हूं।

ये शब्दों में कहने की जरूरत नहीं है कि कच्छ के साथ एक मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दरमियान मेरा लगाव कैसा था, बार-बार आपके बीच आना होता था। कच्छ की धरती में एक ताकत है। 200 साल पहले भी अगर कोई कच्छी दुनिया के किसी छोर पर गया होगा परिवार, चौथी पांचवी पीड़ी होगी, लेकिन अगर बीमान हो जाए तो उसका मन करता है की कच्छ चले जाएं, तबियत ठीक हो जाएगी। हम कच्छ के लोग पानीदार तो हैं, पर बिना पानी के जीवन गुजारते रहे। पानी का महात्मय क्या होता है। ये कच्छ के लोग भालि-भांती समझते हैं। विराट समंदर, मरुभूमि, पहाड़, गौरवपूर्ण इतिहास, 5000 साल पुरानी मावन संस्कृति के सबूत, कच्छ के पास क्या कुछ नहीं है! न सिर्फ हिन्दुस्तान को दुनिया को देने की ताकत इस धरती में है और दुनिया को magnet की तरह आकर्षित करने का सामर्थ इस धरती में है।

अभी नितिन जी बता रहे थे कि आज जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का रूप है, विश्व बाजार का महात्मय जिस प्रकार से बढ़ रहा है उस Competition अगर भारत को हमें आगे बढ़ाना है, तो इस वैश्विक अर्थव्यवस्था का लाभ उठाना है। विश्व व्यापार में भारत को अपनी जगह पक्की करनी है तो भारत के पास उत्तम से उत्तम व्यवस्था वाले बंदरों (बंदरगाहों) का होना बहुत जरूरी है। ये कंडला Port और आज जो चीजें वहां निर्माण हो रही हैं, एक प्रकार से कोई सोच सकता है क्या इतने कम समय में आज कंडला Port पूरे एशिया में प्रमुख बंदरों (बंदरगाहों) में उसने अपनी जगह बना ली।

पिछले एक दो साल में चाहे Liquid Cargo हो, चाहे Dry Cargo हो, Port Sector में काम करने वाले हर कोई समझते हैं कि इसका जो Growth है वो Port Sector के अर्थनीति के जानने वाले लोगों के लिये बड़ा ही Surprise कर रहा है। ये Achievement किया है। और धीरे – धीरे Port पर काम करने वाले लोगों को भी लगने लगा है। Union चलते हैं चलते रहेंगे। लेकिन मिलजुल कर के अगर हम इस Port की ताकत को बढ़ाते हैं। एक ताकत है Infrastructure की दूसरी ताकत है Efficiency की, Transparency की और उससे इतना बड़ा परिणाम देश को मिल सकता है, जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते।


अभी नितिन जी बता रहे थे कि ईरान के साथ चाहबहार Port उसका एक निर्णय हम लोगों ने किया है। उस पोर्ट का सीधा संबंध कंडला के Port के साथ आने वाला है। चाहबहार Port और कंडला Port इन दोनों का जुड़ना, इसका मतलब ये होता है कि विश्व व्यापार में अंगद की तरह कंडला अपना पैर जमाएगा, इतना बड़ा परिवर्तन आने वाला है। आज कंडला Port को Mechanise करने की दिशा में कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। Capacity Building के लिये 14 और 16 वर्ग के विस्तार और विकास के लिये योजना बन रही है। और बदलते हुए युग में Port City का Concept, Development का एक Economic Activity का एक व्यवस्था उस दिशा में भी योजना बन रही है। Transportation को बल मिले और इसलिये उस प्रकार के मार्ग की रचना जो Traffic को Smooth करे हिन्दुस्तान के कोने कोने में हमारा सामान तेजी से पहुंचे। जिस प्रकार से समंदर में Turn Around Time कोई जहाज आए खाली हो या भरे और कितने दिन में आ के चला जाए उसमे जितना समय कम लगता है उतनी Efficiency की गणना वैश्विक स्तर पर होती है। आज भारत में उस Turn Around Time कम करने के लिये हमारे नितिन जी के नेतृत्व में अनेक Initiatives लिये गए। इस Turn Around Time को कम करने में एक वर्गता होती है- पोर्ट से बाहर निकलने के बाद आपके सारे ट्रक्स कितनी तेजी से आगे बढ़ जाते हैं। अगर आगे बोटल लेट होगा तो Turn Around Time के लिये पोर्ट में कितनी ही टैक्नॉलॉजी हम लाएं रुकावट बनी रहेगी। और इसलिये आपने देखा होगा कि आज कंडला पूरे गुजरात के हिसाब से देखें तो भी एक कोने में एक छोटा सा नगर। देश के हिसाब से तो ध्यान भी नहीं जाए। लेकिन आज कंडला में करीब करीब 1000 करोड़ रुपयों के Investment के Project आ रहे हैं। 1000 करोड़ कोई सामान्य रकम नहीं है। हम कल्पना कर सकते हैं कि कितनी तेजी से आगे बढ़े हैं।

अभी वो बता रहे थे कि रोड का काम है हम दो साल में टारगेट किया है। मैं नितिन जी को बता रहा था कि हिन्दुस्तान में रोड के सैक्टर में नितिन जी ने जो गति लाई है, कई वर्षों तक हिन्दुस्तान ने देखी नहीं। मैंने उनको कहा कि आपकी जो विशेषता है, आपकी जो क्षमता है उसका लाभ गुजरात को भी तो मिलना चाहिए। उन्होंने मुझे कहा कि भाई क्या करना है? ये रोड बनाने का काम 24 महीने नहीं 18 महीने में पूरा करके दिखाओ। और मुझे विश्वास है कि नितिन जी को इशारों इशारों में कह दे तो उस काम को पूरा कर देंगे। मुझे विश्वास है हो जाएगा।

आज यहां बाबा साहब आम्बेडकर के नाम से एक Convention Centre भी बन रहा है। विशाल भू भाग में बन रहा है। यहां के लोगों की आवश्यकता के अनुसार बन रहा है। लेकिन मैंने उसका जो plan देखा तो मुझे लगता है शायद रवि भाई ने डरते – डरते बनाया है। उनको लगता है पता नहीं इतने पैसे कहां से आएंगे। कैसे होगा। तो मैंने नितिन जी को कहा है कि अच्छा छोटा मत करो, उसे कुछ नये सिरे से सोचो उन्होंने कहा कि मुझे थोड़ा समय दीजिये मैं सोचकर के बताता हूं। ये Convention Centre भी क्योंकि जिस प्रकार से कच्छ का Development हो रहा है, आज हिन्दुस्तान में कोई एक district तेज गति से आगे बढ़ रहा है तो उस district का नाम कच्छ है। और कोई कल्पना कर सकता है 1998 में भंयकर Cyclone ने हमको तबाह कर दिया था। 2001 भूकम्प ने हमें जमीनदोज़ कर दिया था। लेकिन ये district की ताकत देखिए, यहां के लोगों की खुमारी देखिए आज कच्छ फिर से चल पड़ा। और कांडला ये न सिर्फ गुजरात की अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दू बन सकता है, यातायात की दुनिया में कंडला पोर्ट हिन्दुस्तान की अर्थव्यवस्था में भी एक अहम भूमिका निभा सके, इस परिस्थिति में काम कर सकता है। और हम भी उस दिशा में उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। भारत की सामुद्रिक व्यापार विरासत हजारों साल पूरानी है। लोथल में 5000 साल पहले सामुद्रिक व्यापार का इतना बड़ा केन्द्र था। उसके बगल में बल्लभी University थी। उस बल्लभी University में 80 से ज्यादा देशों के बच्चे पढ़ते थे। और लोथल का जो पोर्ट था, बंदर था कहते हैं कि 84 देशों के झंडे वहां हमेशा दिखाई देते थे। हजारों साल पहले! इस देश में दरियाई जहाज बनाने का काम कच्छ में हमारी पूर्वजों की विरासत रही है, हम दुनिया को जहाज देते थे यहाँ से। ये ताकत रही थी हमारी। इस सामर्थय को फिर से जीवित किया जा सकता है।

आज कंडला पोर्ट में इमारती लकड़ी बहुत बड़ी मात्रा में आती है। और हमारे कच्छी लोग हिन्दुस्तान के कोने कोने में लकड़ी के व्यापार में लगे हुए हैं। ये इमारती लकड़ी का Value addition कच्छ की धरती पर हो सकता है। दुनिया से लकड़ी आ जाये उसमें Art Work हो Man Made कला उसपर लगे फिर दुनिया में वापस जाये घर बने, बिल्डिंग बने, मकान बने, मंदिर बने, पूजा घर बने दुनिया को बहुत बड़ी भेंट सौगात यहां से Develop की जा सकती है। नमक का व्यापार समुद्री मार्ग से जितना ज्यादा हम कर सके उतना खर्च कम आएगा। तटीय जल परिवहन साढ़े सात हजार किलोमीटर समुद्री तट हो, तो फिर हमें रोड और रेल से हमारा सामान क्यूं लेजाना चाहिए। क्यों न समुद्री तट से एक जहाज से हिन्दुस्तान में ही कलकत्ता सामान भेजना होगा। तो यहीं से समुद्र के मार्ग से कलकत्ता क्यों न जाए। पूरे हिन्दुस्तान को चीर कर के जाने की जरूरत क्या है। ये पूरा बदलाव, व्यवस्था में परिवर्तन लाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। जिसका लाभ आने वाले दिनों में मिलने वाला है।

हमारे नितिन जी का एक Dream है, लोथल में भारत की जो महान ताकत है उसका विश्व को परिचय हो। इस प्रकार का एक Museum कैसे बने। विश्व व्यापार के दृष्टि से American University का काम महत्वपूर्ण है Human Resource Development का काम महत्वपूर्ण है। और अभी मुख्यमंत्री जी बता रहे थे, उन्होंने Maritime University का अभी वहां एसेम्बली के अंदर बिल भी पास कर लिया है। मेरी उनको शुभकामनाएं हैं। Human Resource Development का ये काम और न सिर्फ गुजरात को समुद्री तट का लाभ होगा और हिन्दुस्तान के व्यापार के लिये भी एक ताकत के रूप में उभरेगा ऐसा मेरा विश्वास है।


भाइयों बहनों, 2022 भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। मैं आज जब कांडला की धरती पर आया हूं, कंडला के लोगों को कच्छ के लोगों को गुजरात के लोगों देश के लोगों को बार बार यह कहना चाहूंगा के 2022 आजादी के 75 साल हो रहे हैं, हम देश के उन वीर सपूतों को याद करें उन महापुरुषों को याद करें जिन्होंने आजादी के लिये अपनी जिन्दगी खपा दी। कई महापुरुषों ने जेलों में खपा दी कई महापुरुषों ने फांसी के तख्त पर चढ़ गए। कई महापुरुषों ने चार चार पीढ़ी तबाह कर दी, ये देश आजाद हो इसलिये। उस आजादी के 75 साल 2022 में हम कैसे मनाएंगे? एक नागरिक के नाते हम भी तो संकल्प करें कि हमें आजादी के जंग में लड़ने का मौका नहीं मिला था लेकिन भारत को दुनिया में सिरमौर बनाने में इस विकास कि यात्रा में शरीक होने का हमें सौभाग्य मिला है, हम भी कुछ सकारात्मक करेंगे। हम कुछ न कुछ ऐसा करेंगे नागरिक के नाते 2022 में देश को नई ऊंचाई पर लेजाने में मेरा योगदान माना जाए, मेरा संतोष हो। संस्था हो तो वो भी करे, केन्द्र हो तो वो भी करे, नगरपालिका हो तो वो भी करे, पंचायत हो वो भी करे, राज्य सरकार है तो वो भी करे, हर कोई अपने आप को संकल्पबद्ध करे। और अभी पांच साल हमारे पास है, पांच साल में कुछ कर के दिखाए। और तब जा कर के 2022 को मनाएं इस संकल्प के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं जैसा हमने सोचा है।

इस देश के गरीबों की जिन्दगी में बदलाव लाना। चाहे गैस के चूल्हे का कनेक्शन हो, चाहे गरीब की झोपड़ी में बिजली पहुंचाने का प्रयास हो। 2022 तक हमारा सपना है, हिन्दुस्तान के गरीब से गरीब परिवार को भी रहने के लिये अपना खुद का घर हो। और घर में बिजली भी हो, घर में पानी भी हो और घर में शौचालय भी हो, ऐसा घर उसको मिले ये बहुत बड़ा सपना लेकर के काम चलाना है।

ये वर्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की शताब्दि का वर्ष है। भारत के गरीब से गरीब व्यक्ति अंतिम छोर पर बैठे हुए व्यक्ति का कल्याण कैसे हो। इस विचार को केन्द्र में रखते हुए। उन्होंने देश को एक चिंतन दिया था। आज देश पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती बना रहा है। तो मैं कंडला पोर्ट ट्रस्ट को, नितिन जी को, उनके विभाग को एक सुझाव देना चाहता हूं कि क्यों न हम ये कंडला पोर्ट है, उसको पंडित दीनदयाल ट्रस्ट पोर्ट कंडला, विधिवत रूप से उसकी प्रक्रिया करें, निर्णय करें और पंडित दीनदयाल ट्रस्ट पोर्ट कंडला के रूप में, क्योंकि गरीबों के लिये काम करना है, दीनदयाल गरीबों के पहचान करता है मेरे देश में। जो दीन-दयालु हैं, वो भाव हमारे सामने रहेगा, तो हमारे अंदर समाज के दबे कुचले, शोषित, पीड़ित वंचित, उनकी जिंदगी में बदलाव लाने के लिये काम कर सकते हैं।

मैं फिर एक बार कच्छ की धरती में फिर एक बार मुझे आपके सामने आने का अवसर मिला। आप सब इतनी बड़ी मात्रा में आकर के आशीर्वाद दिये। इसके लिये आभारी हूं। नितिन जी का आभारी हूं। इस कार्यक्रम में मुझे शरीक होने का सौभाग्य मिला। बहुत बहुत धन्यवाद।

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Cabinet approves increase in the Judge strength of the Supreme Court of India by Four to 37 from 33
May 05, 2026

The Union Cabinet chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi today has approved the proposal for introducing The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 in Parliament to amend The Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956 for increasing the number of Judges of the Supreme Court of India by 4 from the present 33 to 37 (excluding the Chief Justice of India).

Point-wise details:

Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 provides for increasing the number of Judges of the Supreme Court by 04 i.e. from 33 to 37 (excluding the Chief Justice of India).

Major Impact:

The increase in the number of Judges will allow Supreme Court to function more efficiently and effectively ensuring speedy justice.

Expenditure:

The expenditure on salary of Judges and supporting staff and other facilities will be met from the Consolidated Fund of India.

Background:

Article 124 (1) in Constitution of India inter-alia provided “There shall be a Supreme Court of India consisting of a Chief Justice of India and, until Parliament by law prescribes a larger number, of not more than seven other Judges…”.

An act to increase the Judge strength of the Supreme Court of India was enacted in 1956 vide The Supreme Court (Number of Judges) Act 1956. Section 2 of the Act provided for the maximum number of Judges (excluding the Chief Justice of India) to be 10.

The Judge strength of the Supreme Court of India was increased to 13 by The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 1960, and to 17 by The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 1977. The working strength of the Supreme Court of India was, however, restricted to 15 Judges by the Cabinet, excluding the Chief Justice of India, till the end of 1979, when the restriction was withdrawn at the request of the Chief Justice of India.

The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 1986 further augmented the Judge strength of the Supreme Court of India, excluding the Chief Justice of India, from 17 to 25. Subsequently, The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2008 further augmented the Judge strength of the Supreme Court of India from 25 to 30.

The Judge strength of the Supreme Court of India was last increased from 30 to 33 (excluding the Chief Justice of India) by further amending the original act vide The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act, 2019.