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"In 2003 Goldman Sachs led by Mr. Jim O’Neill predicted that BRIC Nations would overtake G-6 by 2050. World was taken aback and we were pleasantly surprised: Shri Modi"
"Unfortunately India has not been able to grow upto its full potential. In the last decade, nation has been stuck in uncertain and uneven growth: CM"
"We insisted on transparency, openness and people’s participation from the very beginning: Shri Modi"
"Overall idea was to move from Government to Governance, from rules and acts to responsible action: Shri Modi"
"Our innovations in the social sector and progress on HDI parameters have been appreciated far and wide: Shri Modi"
"We are working with the motto of Gujarat’s growth for India’s growth. We know that India cannot develop unless the States develop: Shri Modi"

On the evening of Monday 17th June 2013 Shri Narendra Modi attended an interactive session on ‘Achieving India’s Full Economic Potential’ with Mr. Jim O’Neill, a world-renowned economist with an expertise on emerging markets. Mr. O’Neill also headed Goldman Sachs. The interactive session was a part of Vibrant Gujarat Lecture Series.

Shri Modi recalled that it was back in 2003 when Goldman Sachs, led by Mr. O’Neill predicted that BRIC nations would overtake G-6 nations by 2050. “The world was taken aback and we were pleasantly surprised,” Shri Modi affirmed. However the Chief Minister pointed out that India has not been able to grow to its full potential during the last decade due to uncertain and uneven growth, which is further compounded by policy paralysis and mis-governance. “We have lost a historic opportunity in the process,” said Shri Modi.

During his speech, the Chief Minister complemented Mr. O’Neill for his 2008 paper, ’10 Things for India to Achieve its 2050 Potential’ and stated that he had read his paper with keen interest.

He recalled how Gujarat bounced back from the destruction of the 2001 quake to scaling new heights of progress in the last twelve years. Shri Modi affirmed that transparency, openness and people’s participation remained key aspects of the Government from the very beginning. He avowed, “The overall idea was to move from Government to Governance, from rules and acts to responsible action.” The Chief Minister expressed satisfaction in the fact that the seeds sown by the Gujarat Government a decade ago are now giving the desired fruits of development for the people. He shared that the Gujarat Government’s innovations in social sector and progress on HDI parameters have been appreciated far and wide and that initiatives of the Gujarat Government have won laurels at the national and international level.

Shri Modi listed the various qualitative and quantitative changes in Gujarat that have greatly benefitted the people. He even spoke on Fiscal Responsibility Act, which has heavily reduced non-development expenditure. He said that Gujarat has grown both in agriculture and industry. He gave the example of the Vibrant Gujarat Summit and Gujarat’s consistent double digit growth in agriculture as compared to the national average of 2-3% to illustrate his point. Shri Modi attributed Gujarat’s growth in agriculture to the farmers and the steps taken for better irrigation practices and in ensuring greater use of latest advances in science and technology. The Chief Minister mentioned Gujarat advances in solar energy.

Shri Modi said the Gujarat Government believed in the motto of ‘Gujarat’s Growth for India’s Growth’ and added that the development journey of Gujarat can be taken even higher if the Centre’s policies are aligned towards a greater vision of a developed India.

Read Text speech of Shri Modi at interactive session on 'Achieving India's Full Economic Potential'

In his speech, Mr. Jim O’Neill spoke about the ten challenges for India to achieve its 2050 potential. The challenges included improving governance, raising basic educational achievements, increasing quality & quantity of users, controlling inflation, introducing a credible fiscal policy with a medium term strategy, liberalizing the financial market, increasing trade with neighbours, increasing agriculture production, improving infrastructure and improving the environment quality.

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July 06, 2022
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“Well-informed, better-informed society should be the goal for all of us, let us all work together for this”
“Agradoot has always kept the national interest paramount”
“Central and state governments are working together to reduce the difficulties of people of Assam during floods”
“Indian language journalism has played a key role in Indian tradition, culture, freedom struggle and the development journey”
“People's movements protected the cultural heritage and Assamese pride, now Assam is writing a new development story with the help of public participation”
“How can intellectual space remain limited among a few people who know a particular language”

असम के ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा शर्मा जी, मंत्री श्री अतुल बोरा जी, केशब महंता जी, पिजूष हजारिका जी, गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन कमिटी के अध्यक्ष डॉ दयानंद पाठक जी, अग्रदूत के चीफ एडिटर और कलम के साथ इतने लंबे समय तक जिन्‍होंने तपस्‍या की है, साधना की है, ऐसे कनकसेन डेका जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

असमिया भाषा में नॉर्थ ईस्ट की सशक्त आवाज़, दैनिक अग्रदूत, से जुड़े सभी साथियों, पत्रकारों, कर्मचारियों और पाठकों को 50 वर्ष - पांच दशक की इस स्‍वर्णिम यात्रा के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले समय में अग्रदूत नई ऊँचाइयो को छुये, भाई प्रांजल और युवा टीम को मैं इसके लिए शुभकामनाएं देता हूँ।

इस समारोह के लिए श्रीमंत शंकरदेव का कला क्षेत्र का चुनाव भी अपने आप में अद्भुत संयोग है। श्रीमंत शंकरदेव जी ने असमिया काव्य और रचनाओं के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त किया था। उन्हीं मूल्यों को दैनिक अग्रदूत ने भी अपनी पत्रकारिता से समृद्ध किया है। देश में सद्भाव की, एकता की, अलख को जलाए रखने में आपके अखबार ने पत्रकारिता के माध्यम से बड़ी भूमिका निभाई है।

डेका जी के मार्गदर्शन में दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। इमरजेंसी के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ, तब भी दैनिक अग्रदूत और डेका जी ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने न सिर्फ असम में भारतीयता से ओत-प्रोत पत्रकारिता को सशक्त किया, बल्कि मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिए एक नयी पीढ़ी भी तैयार की।

आज़ादी के 75वें वर्ष में दैनिक अग्रदूत का स्वर्ण जयंती समारोह सिर्फ एक पड़ाव पर पहुंचना नहीं है, बल्कि ये आज़ादी के अमृतकाल में पत्रकारिता के लिए, राष्ट्रीय कर्तव्यों के लिए प्रेरणा भी है।


बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंता जी और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिनरात मेहनत कर रही है। मेरी भी समय-समय पर इसको लेकर वहां अनेक लोगों से बातचीत होती रहती है। मुख्‍यमंत्री जी से बातचीत होती रहती है। मैं आज असम के लोगों को, अग्रदूत के पाठकों को ये भरोसा दिलाता हूं केंद्र और राज्य सरकार मिलकर, उनकी मुश्किलें कम करने में जुटी हुई हैं।


भारत की परंपरा, संस्कृति, आज़ादी की लड़ाई और विकास यात्रा में भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता की भूमिका अग्रणी रही है। असम तो पत्रकारिता के मामले में बहुत जागृत क्षेत्र रहा है। आज से करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले ही असमिया में पत्रकारिता शुरू हो चुकी थी और जो समय के साथ समृद्ध होती रही। असम ने ऐसे अनेक पत्रकार, ऐसे अनेक संपादक देश को दिए हैं, जिन्होंने भाषाई पत्रकारिता को नए आयाम दिए हैं। आज भी ये पत्रकारिता सामान्य जन को सरकार और सरोकार से जोड़ने में बहुत बड़ी सेवा कर रही है।


दैनिक अग्रदूत के पिछले 50 वर्षों की यात्रा असम में हुए बदलाव की कहानी सुनाती है। जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की। और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।


भारत के इस समाज में डेम्रोक्रेसी इसलिए निहित है क्योंकि इसमें विमर्श से, विचार से, हर मतभेद को दूर करने का रास्ता है। जब संवाद होता है, तब समाधान निकलता है। संवाद से ही संभावनाओं का विस्तार होता है| इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ज्ञान के प्रवाह के साथ ही सूचना का प्रवाह भी अविरल बहा और निरंतर बह रहा है। अग्रदूत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।


आज की दुनिया में हम कहीं भी रहें, हमारी मातृभाषा में निकलने वाला अखबार हमें घर से जुड़े होने का एहसास कराता है। आप भी जानते हैं कि असमिया भाषा में छपने वाला दैनिक अग्रदूत सप्ताह में दो बार छपता था। वहां से शुरू हुआ इसका सफर पहले दैनिक अखबार बनने तक पहुंचा और अब ये ई-पेपर के रूप में ऑनलाइन भी मौजूद है। दुनिया के किसी भी कोने में रहकर भी आप असम की ख़बरों से जुड़े रह सकते हैं, असम से जुड़े रह सकते हैं।

इस अखबार की विकास यात्रा में हमारे देश के बदलाव और डिजिटल विकास की झलक दिखती है। डिजिटल इंडिया आज लोकल कनेक्ट का मजबूत माध्यम बन चुका है। आज जो व्यक्ति ऑनलाइन अख़बार पढ़ता है, वो ऑनलाइन पेमेंट भी करना जानता है। दैनिक अग्रदूत और हमारा मीडिया असम और देश के इस बदलाव का साक्षी रहे हैं।


आज़ादी के 75 वर्ष जब हम पूरा कर रहे हैं, तब एक प्रश्न हमें ज़रूर पूछना चाहिए। Intellectual space किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि scientific logic का भी है। आप ज़रा सोचिए, बीती 3 औद्योगिक क्रांतियों में भारत रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पीछे क्यों रहा? जबकि भारत के पास knowledge की, जानने-समझने की, नया सोचने नया करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

इसका एक बड़ा कारण ये है कि हमारी ये संपदा भारतीय भाषाओं में थी। गुलामी के लंबे कालखंड में भारतीय भाषाओं के विस्तार को रोका गया, और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रिसर्च को इक्का-दुक्का भाषाओं तक सीमित कर दिया गया। भारत के बहुत बड़े वर्ग का उन भाषाओं तक, उस ज्ञान तक access ही नहीं था। यानि Intellect का, expertise का दायरा निरंतर सिकुड़ता गया। जिससे invention और innovation का pool भी limited हो गया।

21वीं सदी में जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रही है, तब भारत के पास दुनिया को lead करने का बहुत बड़ा अवसर है। ये अवसर हमारी डेटा पॉवर के कारण है, digital inclusion के कारण है। कोई भी भारतीय best information, best knowledge, best skill और best opportunity से सिर्फ भाषा के कारण वंचित ना रहे, ये हमारा प्रयास है।

इसलिए हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्रोत्साहन दिया। मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले ये छात्र कल चाहे जिस प्रोफेशन में जाएं, उन्हें अपने क्षेत्र की जरूरतों और अपने लोगों की आकांक्षाओं की समझ रहेगी। इसके साथ ही अब हमारा प्रयास है कि भारतीय भाषाओं में दुनिया का बेहतरीन कंटेंट उपलब्ध हो। इसके लिए national language translation mission पर हम काम कर रहे हैं।

प्रयास ये है कि इंटरनेट, जो कि knowledge का, information का बहुत बड़ा भंडार है, उसे हर भारतीय अपनी भाषा में प्रयोग कर सके। दो दिन पहले ही इसके लिए भाषीनी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। ये भारतीय भाषाओं का Unified Language Interface है, हर भारतीय को इंटरनेट से आसानी से कनेक्ट करने का प्रयास है। ताकि वो जानकारी के, ज्ञान के इस आधुनिक स्रोत से, सरकार से, सरकारी सुविधाओं से आसानी से अपनी भाषा से जुड़ सके, संवाद कर सके।

इंटरनेट को करोड़ों-करोड़ भारतीयों को अपनी भाषा में उपलब्ध कराना सामाजिक और आर्थिक, हर पहलू से महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी बात ये एक भारत, श्रेष्ठ भारत को मज़बूत करने, देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ने, घूमने-फिरने और कल्चर को समझने में ये बहुत बड़ी मदद करेगा।


असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट तो टूरिस्ट, कल्चर और बायोडायवर्सिटी के लिहाज़ से बहुत समृद्ध है। फिर भी अभी तक ये पूरा क्षेत्र उतना explore नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए। असम के पास भाषा, गीत-संगीत के रूप में जो समृद्ध विरासत है, उसे देश और दुनिया तक पहुंचना चाहिए। पिछले 8 वर्षों से असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट को आधुनिक कनेक्टिविटी के हिसाब से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है। इससे असम की, नॉर्थ ईस्ट की, भारत की ग्रोथ में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब भाषाओं के लिहाज़ से भी ये क्षेत्र डिजिटली कनेक्ट होगा तो असम की संस्कृति, जनजातीय परंपरा और टूरिज्म को बहुत लाभ होगा।


इसलिए मेरा अग्रदूत जैसे देश के हर भाषाई पत्रकारिता करने वाले संस्थानों से विशेष निवेदन रहेगा कि डिजिटल इंडिया के ऐसे हर प्रयास से अपने पाठकों को जागरूक करें। भारत के tech future को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए सबका प्रयास चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह, अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बनके इसको एक दिशा दीजिए, नई ऊर्जा दीजिए।

असम में जल-संरक्षण और इसके महत्व से आप भलीभांति परिचित हैं। इसी दिशा में देश इस समय अमृत सरोवर अभियान को आगे बढ़ा रहा है। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवरों के लिए काम कर रहा है। इसमें पूरा विश्‍वास है कि अग्रदूत के माध्‍यम से असम का कोई नागरिक ऐसा नहीं होगा जो इससे जुड़ा नहीं होगा, सबका प्रयास नई गति दे सकता है।

इसी तरह, आज़ादी की लड़ाई में असम के स्थानीय लोगों का, हमारे आदिवासी समाज का इतना बड़ा योगदान रहा है। एक मीडिया संस्थान के रूप में इस गौरवशाली अतीत को जन जन तक पहुंचाने में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मुझे यकीन है, अग्रदूत समाज के इन सकारात्मक प्रयासों को ऊर्जा देने का अपना कर्तव्‍य जो पिछले 50 साल से निभा रहा है, आने वाले भी अनेक दशकों तक निभाएगा, ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है। असम के लोगों और असम की संस्कृति के विकास में वो लीडर के तौर पर काम करता रहेगा।

Well informed, better informed society ही हम सभी का ध्येय हो, हम सभी मिलकर इसके लिए काम करें, इसी सदिच्छा के साथ एक बार फिर आपको स्वर्णिम सफर की बधाई और बेहतर भविष्य की अनेक-अनेक शुभकामनाएं!