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"Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations"
"Swami Vivekananda was a true visionary. He dreamt of a Jagat Guru Bharat: Narendra Modi"
"Several initiatives were taken in Gujarat as a part of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations: Narendra Modi"
"I am sure the youth is deeply inspired by Swami Vivekananda and will carry forward his ideals for India’s growth: Narendra Modi"
"We want our daughters to be equal partners in this journey towards Rashtra Nirman: Narendra Modi"

Shri Narendra Modi addressed the closing ceremony of the state-wide 150th birth anniversary celebrations of Swami Vivekananda. The ceremony was held at Mahatma Mandir in Gandhinagar and was attended by top ministers, seers and several youngsters. Shri Modi paid rich tributes to Swami Vivekananda and described the two year long celebrations as an endeavour to contribute towards society and the nation and at the same time enable the youth to understand Swami Vivekananda.

Speaking about Swami Vivekananda, Shri Modi said, “Swami Vivekananda’s aim was to serve Bharat Mata and to serve the Daridra Narayan. He did not do things for himself. When he went to USA, he showcased the true strength and identity of India in front of the world. It was Swami ji’s words ‘Sister and Brothers’ that demonstrated India’s values to the world.”

Shri Modi described Swami Vivekananda as a true visionary who leaves behind a monumental contribution to society and the nation despite the fact that he left us at the age of 49. Shri Modi recalled that Swami ji knew he would leave the Earth at the age of 49. Swami ji also said that leave aside all deities for 50 years and only devote yourself to Bharat Mata and exactly 50 years later India attained freedom. Likewise, Shri Modi said that the great Swami Vivekananda dreamt that India would once again become the Jagat Guru (leader of the world) and that the youth of India would be the drivers of this change. He added that Swami Vivekananda was always opposed to bad ritualism and bad practices in society.

During his speech, Shri Modi talked about how Gujarat celebrated the 150th birth anniversary of Swami Vivekananda including Shri Modi’s Yatra, in which he covered the entire state and spread Swami Vivekananda’s message among the youth.

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

On the youth of India, Shri Modi avowed that India is one of the most youthful countries in the world and that our youth can give a lot to the world. But, for that it is essential to consider our youth as our strength, Shri Modi added. In this regard, Shri Modi talked about the importance given by the Gujarat Government towards skill development initiatives for the youth. Shri Modi affirmed that the future does not lie in the number of degrees one holds but on the skill one has. He shared that the Gujarat Government’s Kaushalya Vardhan Kendras were awarded by the Prime Minister of India. He also said that he envisioned the India where the daughters are also equal participants in the journey towards Rashtra Nirman.

Shri Narendra Modi also released 2 books on the occasion. Shri Modi also presented prizes to several youngsters.

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

Narendra Modi addresses closing ceremony of Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary celebrations

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July 06, 2022
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“Well-informed, better-informed society should be the goal for all of us, let us all work together for this”
“Agradoot has always kept the national interest paramount”
“Central and state governments are working together to reduce the difficulties of people of Assam during floods”
“Indian language journalism has played a key role in Indian tradition, culture, freedom struggle and the development journey”
“People's movements protected the cultural heritage and Assamese pride, now Assam is writing a new development story with the help of public participation”
“How can intellectual space remain limited among a few people who know a particular language”

असम के ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा शर्मा जी, मंत्री श्री अतुल बोरा जी, केशब महंता जी, पिजूष हजारिका जी, गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन कमिटी के अध्यक्ष डॉ दयानंद पाठक जी, अग्रदूत के चीफ एडिटर और कलम के साथ इतने लंबे समय तक जिन्‍होंने तपस्‍या की है, साधना की है, ऐसे कनकसेन डेका जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

असमिया भाषा में नॉर्थ ईस्ट की सशक्त आवाज़, दैनिक अग्रदूत, से जुड़े सभी साथियों, पत्रकारों, कर्मचारियों और पाठकों को 50 वर्ष - पांच दशक की इस स्‍वर्णिम यात्रा के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले समय में अग्रदूत नई ऊँचाइयो को छुये, भाई प्रांजल और युवा टीम को मैं इसके लिए शुभकामनाएं देता हूँ।

इस समारोह के लिए श्रीमंत शंकरदेव का कला क्षेत्र का चुनाव भी अपने आप में अद्भुत संयोग है। श्रीमंत शंकरदेव जी ने असमिया काव्य और रचनाओं के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त किया था। उन्हीं मूल्यों को दैनिक अग्रदूत ने भी अपनी पत्रकारिता से समृद्ध किया है। देश में सद्भाव की, एकता की, अलख को जलाए रखने में आपके अखबार ने पत्रकारिता के माध्यम से बड़ी भूमिका निभाई है।

डेका जी के मार्गदर्शन में दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। इमरजेंसी के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ, तब भी दैनिक अग्रदूत और डेका जी ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने न सिर्फ असम में भारतीयता से ओत-प्रोत पत्रकारिता को सशक्त किया, बल्कि मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिए एक नयी पीढ़ी भी तैयार की।

आज़ादी के 75वें वर्ष में दैनिक अग्रदूत का स्वर्ण जयंती समारोह सिर्फ एक पड़ाव पर पहुंचना नहीं है, बल्कि ये आज़ादी के अमृतकाल में पत्रकारिता के लिए, राष्ट्रीय कर्तव्यों के लिए प्रेरणा भी है।

साथियों,

बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंता जी और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिनरात मेहनत कर रही है। मेरी भी समय-समय पर इसको लेकर वहां अनेक लोगों से बातचीत होती रहती है। मुख्‍यमंत्री जी से बातचीत होती रहती है। मैं आज असम के लोगों को, अग्रदूत के पाठकों को ये भरोसा दिलाता हूं केंद्र और राज्य सरकार मिलकर, उनकी मुश्किलें कम करने में जुटी हुई हैं।

साथियों,

भारत की परंपरा, संस्कृति, आज़ादी की लड़ाई और विकास यात्रा में भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता की भूमिका अग्रणी रही है। असम तो पत्रकारिता के मामले में बहुत जागृत क्षेत्र रहा है। आज से करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले ही असमिया में पत्रकारिता शुरू हो चुकी थी और जो समय के साथ समृद्ध होती रही। असम ने ऐसे अनेक पत्रकार, ऐसे अनेक संपादक देश को दिए हैं, जिन्होंने भाषाई पत्रकारिता को नए आयाम दिए हैं। आज भी ये पत्रकारिता सामान्य जन को सरकार और सरोकार से जोड़ने में बहुत बड़ी सेवा कर रही है।

साथियों,

दैनिक अग्रदूत के पिछले 50 वर्षों की यात्रा असम में हुए बदलाव की कहानी सुनाती है। जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की। और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।

साथियों,

भारत के इस समाज में डेम्रोक्रेसी इसलिए निहित है क्योंकि इसमें विमर्श से, विचार से, हर मतभेद को दूर करने का रास्ता है। जब संवाद होता है, तब समाधान निकलता है। संवाद से ही संभावनाओं का विस्तार होता है| इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ज्ञान के प्रवाह के साथ ही सूचना का प्रवाह भी अविरल बहा और निरंतर बह रहा है। अग्रदूत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

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आज की दुनिया में हम कहीं भी रहें, हमारी मातृभाषा में निकलने वाला अखबार हमें घर से जुड़े होने का एहसास कराता है। आप भी जानते हैं कि असमिया भाषा में छपने वाला दैनिक अग्रदूत सप्ताह में दो बार छपता था। वहां से शुरू हुआ इसका सफर पहले दैनिक अखबार बनने तक पहुंचा और अब ये ई-पेपर के रूप में ऑनलाइन भी मौजूद है। दुनिया के किसी भी कोने में रहकर भी आप असम की ख़बरों से जुड़े रह सकते हैं, असम से जुड़े रह सकते हैं।

इस अखबार की विकास यात्रा में हमारे देश के बदलाव और डिजिटल विकास की झलक दिखती है। डिजिटल इंडिया आज लोकल कनेक्ट का मजबूत माध्यम बन चुका है। आज जो व्यक्ति ऑनलाइन अख़बार पढ़ता है, वो ऑनलाइन पेमेंट भी करना जानता है। दैनिक अग्रदूत और हमारा मीडिया असम और देश के इस बदलाव का साक्षी रहे हैं।

साथियों,

आज़ादी के 75 वर्ष जब हम पूरा कर रहे हैं, तब एक प्रश्न हमें ज़रूर पूछना चाहिए। Intellectual space किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि scientific logic का भी है। आप ज़रा सोचिए, बीती 3 औद्योगिक क्रांतियों में भारत रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पीछे क्यों रहा? जबकि भारत के पास knowledge की, जानने-समझने की, नया सोचने नया करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

इसका एक बड़ा कारण ये है कि हमारी ये संपदा भारतीय भाषाओं में थी। गुलामी के लंबे कालखंड में भारतीय भाषाओं के विस्तार को रोका गया, और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रिसर्च को इक्का-दुक्का भाषाओं तक सीमित कर दिया गया। भारत के बहुत बड़े वर्ग का उन भाषाओं तक, उस ज्ञान तक access ही नहीं था। यानि Intellect का, expertise का दायरा निरंतर सिकुड़ता गया। जिससे invention और innovation का pool भी limited हो गया।

21वीं सदी में जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रही है, तब भारत के पास दुनिया को lead करने का बहुत बड़ा अवसर है। ये अवसर हमारी डेटा पॉवर के कारण है, digital inclusion के कारण है। कोई भी भारतीय best information, best knowledge, best skill और best opportunity से सिर्फ भाषा के कारण वंचित ना रहे, ये हमारा प्रयास है।

इसलिए हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्रोत्साहन दिया। मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले ये छात्र कल चाहे जिस प्रोफेशन में जाएं, उन्हें अपने क्षेत्र की जरूरतों और अपने लोगों की आकांक्षाओं की समझ रहेगी। इसके साथ ही अब हमारा प्रयास है कि भारतीय भाषाओं में दुनिया का बेहतरीन कंटेंट उपलब्ध हो। इसके लिए national language translation mission पर हम काम कर रहे हैं।

प्रयास ये है कि इंटरनेट, जो कि knowledge का, information का बहुत बड़ा भंडार है, उसे हर भारतीय अपनी भाषा में प्रयोग कर सके। दो दिन पहले ही इसके लिए भाषीनी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। ये भारतीय भाषाओं का Unified Language Interface है, हर भारतीय को इंटरनेट से आसानी से कनेक्ट करने का प्रयास है। ताकि वो जानकारी के, ज्ञान के इस आधुनिक स्रोत से, सरकार से, सरकारी सुविधाओं से आसानी से अपनी भाषा से जुड़ सके, संवाद कर सके।

इंटरनेट को करोड़ों-करोड़ भारतीयों को अपनी भाषा में उपलब्ध कराना सामाजिक और आर्थिक, हर पहलू से महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी बात ये एक भारत, श्रेष्ठ भारत को मज़बूत करने, देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ने, घूमने-फिरने और कल्चर को समझने में ये बहुत बड़ी मदद करेगा।

साथियों,

असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट तो टूरिस्ट, कल्चर और बायोडायवर्सिटी के लिहाज़ से बहुत समृद्ध है। फिर भी अभी तक ये पूरा क्षेत्र उतना explore नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए। असम के पास भाषा, गीत-संगीत के रूप में जो समृद्ध विरासत है, उसे देश और दुनिया तक पहुंचना चाहिए। पिछले 8 वर्षों से असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट को आधुनिक कनेक्टिविटी के हिसाब से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है। इससे असम की, नॉर्थ ईस्ट की, भारत की ग्रोथ में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब भाषाओं के लिहाज़ से भी ये क्षेत्र डिजिटली कनेक्ट होगा तो असम की संस्कृति, जनजातीय परंपरा और टूरिज्म को बहुत लाभ होगा।

साथियों,

इसलिए मेरा अग्रदूत जैसे देश के हर भाषाई पत्रकारिता करने वाले संस्थानों से विशेष निवेदन रहेगा कि डिजिटल इंडिया के ऐसे हर प्रयास से अपने पाठकों को जागरूक करें। भारत के tech future को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए सबका प्रयास चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह, अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बनके इसको एक दिशा दीजिए, नई ऊर्जा दीजिए।

असम में जल-संरक्षण और इसके महत्व से आप भलीभांति परिचित हैं। इसी दिशा में देश इस समय अमृत सरोवर अभियान को आगे बढ़ा रहा है। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवरों के लिए काम कर रहा है। इसमें पूरा विश्‍वास है कि अग्रदूत के माध्‍यम से असम का कोई नागरिक ऐसा नहीं होगा जो इससे जुड़ा नहीं होगा, सबका प्रयास नई गति दे सकता है।

इसी तरह, आज़ादी की लड़ाई में असम के स्थानीय लोगों का, हमारे आदिवासी समाज का इतना बड़ा योगदान रहा है। एक मीडिया संस्थान के रूप में इस गौरवशाली अतीत को जन जन तक पहुंचाने में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मुझे यकीन है, अग्रदूत समाज के इन सकारात्मक प्रयासों को ऊर्जा देने का अपना कर्तव्‍य जो पिछले 50 साल से निभा रहा है, आने वाले भी अनेक दशकों तक निभाएगा, ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है। असम के लोगों और असम की संस्कृति के विकास में वो लीडर के तौर पर काम करता रहेगा।

Well informed, better informed society ही हम सभी का ध्येय हो, हम सभी मिलकर इसके लिए काम करें, इसी सदिच्छा के साथ एक बार फिर आपको स्वर्णिम सफर की बधाई और बेहतर भविष्य की अनेक-अनेक शुभकामनाएं!