Gujarat Chief Minister reaches out to farmers at Krishi Mahotsav through videoconferencing

Narendra Modi asks farmers to build farm ponds and lay drip-irrigation pipelines, funded by NREGA and GOG schemes

Ahmedabad, Wednesday: Gujarat Chief Minister Narendra Modi today asked the farmers to build farm ponds (locally called ‘khet talavdi’) and lay pipelines for drip-irrigation before the monsoon sets in.

Talking to about three lakh farmers through videoconferencing on the occasion of Krishi Mahotsav-2012, he said that while farm ponds scheme is Centrally funded by NREGA, Government of Gujarat offers 95 per cent assistance for drip-irrigation.

He said that area under drip irrigation in the state has increased from 10,000 ha to 5,00,000 ha over the last ten years – mainly for water-intensive crops like paddy, sugarcane and banana.

The Chief Minister said that it is in the state’s interest that every drop of water is conserved and it does not go back to the days of dry zones. It is in the same context he gave the slogans like ‘Per Drop More Crop’ and ‘Tons of Crop from Tips of Water’.

He said that nearly 6-lakh check dams, bori bunds and farm ponds build during the last ten years, besides Narmada and Sujalam Sufalam Canal Netwroks, have helped underground water table rise by three to thirteen metres as per the topography of the river basin. He said that terrace farming is also fast catching up in ravines of hilly regions in the state. Embankments are built in the driver deltas to check saline ingress in the coastal regions.

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!