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मेरे प्‍यारे देशवासियो,

दुनिया भर के वैज्ञानिक जगत की fraternity आज MOM का मंगल से मिलन हो गया। आज मंगल को MOM मिल गई है। जिस समय इस मिशन का नाम, उसका Short form जब MOM बन गया तो मुझे पूरा विश्‍वास था कि MOM कभी निराश नहीं करती है। India has successfully reached Mars. आप सबको बधाई, देशवासियों को बधाई। और विश्‍व में भारत देश, और ये हमारे भारत के वैज्ञानिक वो पहले प्रयास में सफल होने वाला हिंदुस्‍तान, हिंदुस्‍तान के वैज्ञानिक, ये सफलता प्राप्‍त कर रहे हैं।

History has been created today. We have dared to reach out into the unknown. And have achieved the near impossible. I congratulate all ISRO scientists, as well as all my fellow Indians, on this historic occasion.

और मैंने पहले ही कहा कि साधन बहुत कम, अनेक मर्यादाएं और उसके बावजूद भी इतनी बड़ी सिद्धि प्राप्‍त होती है, वो वैज्ञानिकों के विश्‍वास के कारण उनके पुरूषार्थ के कारण, उनकी प्रतिबद्धता के कारण और इसलिए, हमारे देश के वैज्ञानिक अनके-अनेक अभिनंदन के अधिकारी हैं। और आज मुझे इनके बीच आ करके अभिनंदन देने का अवसर मिला है और अब देखिए इसकी, क्‍या कमाल है?

Travelling a mind-boggling distance of more than 650 million, or 65 crore kilometres.

यानी कि करीब-करीब 65 करोड़ किलोमीटर की यात्रा।

we have gone beyond the boundaries of human enterprise and imagination. We have, accurately navigated our spacecraft, through a route known to very few.

And, we have done so, from a distance so large; that it took even a command signal from Earth, more time to reach it, than it takes sunlight to reach us.

यानी कि सूरज की किरण को हमारे पास पहुंचने में जितना समय लगता है, उससे भी ज्‍यादा समय, यहां से हमारे वैज्ञानिक, उसे कुछ कहते हैं कि करो, उससे भी ज्‍यादा समय लग जाता है। यानी कि कितनी धीरज के साथ कमांड देने के 12-15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है कि गया, कि ठीक, नहीं गया है। कुछ हुआ कि नहीं हुआ। ये बड़ा कठिन होता है। अरे हम, भोजन की थाली पर बैठते हैं, खाना परोसने में देरी होती है, तो भी इधर उधर हो जाते हैं। तो इतने आप में इतना distance, उसके बावजूद भी, जिस धैर्य के साथ

The odds were stacked against us. Of the 51 missions attempted across the world so far, a mere 21 had succeeded.

But we have prevailed!

दुनिया में सबको सफलता नहीं मिली। बहुत कम मिली। और पहली बार में तो किसी देश को नहीं मिली। भारत के वैज्ञानिकों को, भारत को ये पहली बार सफलता मिली है।

With today’s spectacular success, ISRO joins an elite group of only three other agencies worldwide, to have successfully reached the red planet.

India, in fact, is the only country to have succeeded in its very first attempt. We put together the spacecraft in record time, within a mere 3 years of first studying its feasibility.

सिर्फ तीन साल में,यह छोटी बात नहीं है। हर हिंदुस्‍तानी आप लोगों के लिए गर्व करता है। नाज होता है। वैज्ञानिक के लिए नाज होता है।

Built it indigenously, in a pan-Indian effort stretching from Bangalore to Bhubhaneshwar, and Faridabad to Rajkot.

हमारे यहां के गवर्नर Vajubhai vala राजकोट के हैं। और इस Mars का एक instrument राजकोट में बना था और मैं अहमदाबाद इसरों में बार-बार जाता था। बड़ा मन करता था, क्‍या कर रहे हैं वैज्ञानिक बेचारे, एक लैब से बाहर नहीं निकलते हैं, तो कोई तो जाए मिलने के लिए। तो मैं जाता था और तब मुझे पता चला कि मिथेन गैस का sensor वहां बन रहा था और दूसरा, वहां कैमरा बन रहा था और शायद वह दोनों काम, उस समय मुझे बताया गया था, और शायद दुनिया में मिथेन गैस की जानकारी देने का पहला काम ये आपके प्रयत्‍नों से होगा। तो मैं जब ये, अहमदाबाद के इसरो में देखने के लिए जाता था, तो मुझे वहां के वैज्ञानिक हमारे गोस्‍वामी जी यहां है, मुझे सब समझते थे। क्‍या हो रहा है, कैसे हो रहा है।

Used a smaller rocket and payload to reduce the cost, even while increasing the complexity of an already challenging mission. मैंने पिछली बार जब गया था, श्रीहरिकोटा में, तब मैंने कहा था कि अमेरिका के हालीवुड में, जो फिल्‍में बनती हैं, मूवी, उससे भी कम खर्चे में हमारे वैज्ञानिकों ने काम किया है। यानी कि इससे ज्‍यादा खर्चा तो हालीवुड की मूवी बनाने में होता है। यानी कि कितनी बारीकि से Indigenes चीजों जोड़कर के छोटे-छोटे लोगों की मदद ले करके इतना बड़ा मिशन पार किया गया।

And launched it on our very own PSLV launch vehicle. These are all accomplishments that will go down as landmarks in history. Uncertainty is a part of the journey of every explorer who seeks to push boundaries.

The hunger of exploration and the thrill of discovery are not for the faint-hearted.

मेरे सामने दो प्रस्‍ताव थे। मैं आज ये रहस्‍य खोल दूं। जब ये आज सुबह मैं कहां रहूं? तो मुझे बताया गया, सब साइंटिस्‍टों ने कहा कि साहब, दुनिया में ये बहुत कठिन काम है। सफल होंगे, नहीं होंगे। आपको बुलाना, नहीं बुलाना, हमें दुविधा है। मैंने कहा, चिंता मत कीजिए। अगर विफलता आती है तो मेरी पहली जिम्‍मेवारी बनती है, इन वैज्ञानिकों के बीच आने की। और यश तो लेने के लिए सब आते हैं। लेकिन काम भी तो मंगल था। और जब काम मंगल होता है, इरादे मंगल होते हैं, तो मंगल की यात्रा भी तो मंगल होती है।

मुझे पहले कविताएं लिखने का शौक भी था, और समय भी मिलता था। तो मैंने एक बार लिखा था। वैसे लिखा तो गुजराती में है। लेकिन थोड़ा बहुत हिन्‍दी में बता देता हूं । मैंने लिखा था – कि अगर विफल होते हैं, तो आलोचना के शिकार होते हैं। और सफल होते हैं तो ईष्‍या के शिकार होते हैं।

आज हम सफल हुए हैं और इसलिए सफलता के साथ नई challenges भी आती है और वितवाद में, भारत के वैज्ञानिक में, भारत के यूथ में, भारत के talent में, कि हर चुनौतियों को चुनौती देने की ताकत, इन हमारी फौज में है। इन वैज्ञानिकों में है।

Innovation, after all, by its very nature involves risk; as you are trying to do something which has not been done before. It`s a leap into the dark. Humanity would not have progressed, if we had not taken such leaps into the unknown. And space is indeed the biggest unknown out there.

कभी कभी लोग सोचते हैं, risk क्‍यों लें, पानी में गए बिना तैरना सीखते हैं क्‍या, risk तो लेना ही पड़ता है। और सफलता बड़ी ताकत होती है, Risk लेने के निर्णय की moment क्‍योंकि एक अंधेरे में पैर रखना होता है और वो निर्णय करने का सामर्थ्‍य और मुझे तो अटल जी ने जब कहा था, हमें चन्‍द्र पर जाना है, ये हिम्‍मत होती है और तब जाकर लोग लग जाते हैं।

No one represents this zeal for exploring the unknown more, than our space scientists here at ISRO.

Through your brilliance and hard work, you have made it a habit of achieving the impossible.

अब मेरे इसरो के वैज्ञानिकों को impossible को possible करने की जैसे आदत ही लग गई है।

You have developed self-reliance across critical domains, often in the face of hostile circumstances.

Every generation of your scientists, has groomed the next home-grown lot

मुझे सबसे बड़ी खुशी इस बात की होती है, मैं जितनी बार आप लोगों के बीच आया हूं, हर पीढ़ी एक नई पीढ़ी को तैयार करती है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है।

मैं देख रहा हूं, कितने यंग साइंटिस्‍ट मेरे सामने खड़े हैं। पुरानी पीढ़ी ने इनको तैयार किया है और ये नई पीढ़ी को तैयार करेंगे। यही परंपरा, गुरू शिष्‍य परंपरा एक प्रकार से हमारे देश की विशेषता रही है, जो मुझे आज ISRO में महसूस होती है। इन सीनियर मोस्‍ट वैज्ञानिकों ने जो परंपरा बनाई है, 50-60 साल में, वो आज भी आगे बढ़ रही है। इस कल्‍चर के लिए भी, इस परंपरा के लिए भी, आप सभी वैज्ञानिक बहुत-बहुत, इस उत्‍तम परंपरा को निर्मित करने के लिए अभिनंदन के अधिकारी हैं।

Through your achievements, you have honoured our fore-fathers, and inspired our future generations! You truly deserve all the love and respect you get from a grateful nation!

We Indians are a proud people!

Despite our many limitations, we aspire for the best.

The success of our space program is a shining example of what we are capable of as a nation.

Our space program has been an example of achievement, which inspires the rest of us to strive for excellence ourselves.

Moreover, space exploration requires cutting-edge expertise across diverse disciplines. A successful space program thus generates applications across multiple domains.

Our efforts in particular, have historically focussed on the ultimate objective of nation-building. Of translating space technology into space applications.

मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, मेरा अनुभव है। आप वैज्ञानिकों ने जो काम किया है, उसको अगर हम रोजमर्रा की जिंदगी में application करें, उसको apply करें, तो हम जीवन बदल सकते हैं। पूरा गवर्नेंस बदल सकते हैं। पूरी व्‍यवस्‍था बदल सकते हैं। पूरी व्‍यवस्‍था बदल सकते हैं। हमारी गति बदल सकते हैं। इतना बड़ा contribution स्‍पेस टेक्‍नोलोजी के द्वारा हो रहा है। space science के द्वारा हो रहा है और इसलिए मैं मानता हूं कि हमारे प्रयास, हमारे देश की क्‍वालिटी आफ गवर्नेंस, क्‍वालिटी ऑफ लाइफ, स्‍पीड ऑफ अचीवमेंट्स इन सबमें एक बहुत बड़ा बदलाव लाने का सामर्थ्‍य रखते हैं।

Delivering the fruits of this farthest frontier to the remotest corners of the country. Deepening our governance, strengthening our economy, and improving our lives.

We also have a great legacy and responsibility to live up to. Our ancestors had helped the world understand the mysteries of the heavens.

Grasp the idea of Shunya or nothingness.

Map spatial knowledge; such as the rotation of the Earth, motion of planets and occurrence of eclipses.

सदियों पहले आर्यभट्ट जैसे अनेक महापुरूषों ने हमें शास्‍त्र का ज्ञान दिया। हमें शून्‍य दिया। सारे जगत को आज, यही तो शून्‍य है, जो गति देने का कारण बन गया है। विज्ञान की खोज का अवसर, आधार बन गया है। यानी कोई ऐसा विषय नहीं, जिसे हमारे पूर्वजों ने रास्ता बनाकर न रखा हो।

एक प्रकार से ये प्रयास हमारे उन महान ऋषियों को, जो एक वैज्ञानिक थे, उनको एक बहुत बड़ी, उनके सम्मान में दी गई ये भेंट-सौगात है। और ये काम हजारों साल के बाद इस पीढ़ी ने दी है। इसलिए इस परंपरा को निभाने के लिए हम स्वंय अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। ये महान काम लैब में बैठे हुए दिन-रात अपने सुख छोड़कर के, कुछ कर दिखाने की तमन्ना वाले वैज्ञानिकों के द्वारा होता है।

Modern India must continue playing this leading role of ‘Jagad-guru Bharat’.

स्वामी विवेकानंद ने कहा था – मैं देख रहां हूं, मेरी भारत माता फिर एक बार विश्व-गुरू का स्थान प्राप्त करेगी। ये कैसे करेगी, आप ही के लोगों के पुरुषार्थ से तो यह होने वाला है। हमारे देश की युवा पीढ़ी के पुरुषार्थ से होने वाला है। चाहे खेत में काम करने वाला किसान हो, चाहे मजदूरी करने वाला गरीब व्यक्ति हो या वैज्ञानिक इतना लैब में बैठकर के तपस्या करने वाला ऋषितुल्य जीवन हो, यही तो है जो भारत माता को जगत गुरू के स्थान पर विराजमान करेगी।

My dear friends!

Let me conclude by saying that in contrast with the linear nature of Western philosophy; there is no absolute ‘beginning’ or ‘end’ in our Eastern understanding of the cosmos.

There is only a continuous, unending cycle of dispassionate, detached perseverance.

Atal ji’s vision had inspired us to reach for the moon.

The successful Chandrayan mission, in turn led to the Mars Orbiter Mission.

This too, must become but a base for challenging the next frontier - of an inter-planetary mission.

Let today’s success, only drive us with even greater vigour and conviction. Let’s set ourselves even more challenging goals. And strive even harder to achieve them.

Let us push our boundaries. And then, push some more!

यही मिजाज, इसी उमंग के साथ हम आगे बढ़ें। गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने जो कहा था-

“Where the mind is led forward by thee into ever-widening thought and action ... Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake.”

मैं फिर एक बार रविंद्र टैगोर की इस वाणी को श्रद्धा करते हुए, भारत जगेगा, भारत जगाएगा और हम सब इस जागरुक भारत को अपनी आंखों से देख पाएंगे। इसी विश्वास के साथ आप सब वैज्ञानिकों को आपके पुरुषार्थ और परिश्रम के लिए, आपकी प्रतिबद्धता के लिए, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मेरे प्यारे देशवासियों, हम सब गर्व करें, हमारे इन वैज्ञानिकों की सिद्धी के लिए, हमारी क्रिकेट टीम अगर एक टूर्नामेंट जीत कर आती है, पूरा देश नाच उठता है।

ये वैज्ञानिकों की सिद्धि उससे भी हजारों गुणा बहुत बड़ी है। सालों की तपस्या के बाद पाई हुई सिद्धि है। सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद से जुड़ी हुई, ये सिद्धि है। आइए, मेरे देशवासी, कल से नवरात्री का प्रारंभ हो रहा है, शुभ शुरूआत हो रही है। मंगल, मंगल, मंगल होना तय है और जब मंगल, मंगल, मंगल होना तय है, तो इस मंगल की यात्रा हमें और मंगल करने की प्रेरणा देती रहेगी। आज पूरा हिंदुस्तान उन वैज्ञानिकों के सम्मान में आनंद उत्सव मनाएं। हर स्कूल, कॉलेज के अंदर पांच मिनट भी इकट्ठे होकर, तालियों के नाद के साथ, हमारे इन वैज्ञानिकों को याद करें, उनका गौरव करें। सवा सौ करोड़ देशवासी इस सिद्धि को अपनी बनाएं, आनंद उत्सव मनाएं। मंगलमय वातावरण बनाएं। यही एक अपेक्षा के साथ फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामना। बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद

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Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM Modi
June 18, 2021
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One lakh youth will be trained under the initiative in 2-3 months: PM
6 customized courses launched from 111 centres in 26 states
Virus is present and possibility of mutation is there, we need to stay prepared: PM
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM
The pandemic has tested the strength of every country, institution, society, family and person of the world: PM
People below 45 years of age will get the same treatment for vaccination as for people above 45 years of age from June 21st: PM
PM Lauds ASHA workers, ANM, Anganwadi and health workers deployed in the dispensaries in the villages

नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र नाथ पांडे जी, आर के सिंह जी, अन्य सभी वरिष्ठ मंत्रीगण, इस कार्यक्रम में जुड़े सभी युवा साथी, प्रोफेशनल्स, अन्य महानुभाव और भाइयों और बहनों,

कोरोना के खिलाफ महायुद्ध में आज एक महत्वपूर्ण अभियान का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। कोरोना की पहली वेव के दौरान देश में हजारों प्रोफेशनल्स, स्किल डवलपमेंट अभियान से जुड़े। इस प्रयास ने देश को कोरोना से मुकाबला करने की बड़ी ताकत दी। अब कोरोना की दूसरी वेव के बाद जो अनुभव मिले हैं, वो अनुभव आज के इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बने हैं। कोरोना की दूसरी वेव में हम लोगों ने देखा कि कोरोना वायरस का बदलना और बार-बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और जब तक ये है, इसके म्यूटेट होने की संभावना भी बनी हुई है। इसलिए हर इलाज, हर सावधानी के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को और ज्यादा बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स तैयार करने का महाअभियान शुरु हो रहा है।

साथियों,

इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को, उनकी सीमाओं को बार-बार परखा है। वहीं, इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में भी हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है। पीपीई किट्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कोविड केयर और ट्रीटमेंट से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का जो बड़ा नेटवर्क आज भारत में बना है, वो काम अब भी चल रहा है और वो इसी का परिणाम है। आज देश के दूर-सुदूर में अस्पतालों तक भी वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पहुंचाने का भी तेज गति से प्रयास किया जा रहा है। डेढ़ हजार से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और हिन्दुस्तान के हर जिले में पहुंचने का एक भगीरथ प्रयास है। इन प्रयासों के बीच एक स्किल्ड मैनपावर का बड़ा पूल होना, उस पूल में नए लोग जुड़ते रहना, ये भी उतना ही जरूरी है। इसी को देखते हुए, कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए, देश में करीब 1 लाख युवाओं को ट्रेन करने का लक्ष्य रखा गया है। ये कोर्स दो-तीन महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे और एक ट्रेन्ड सहायक के रूप में वर्तमान व्यवस्था को काफी कुछ सहायकता देंगे, उनका बोझ हल्का करेंगे। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग के आधार पर, देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने क्रैश कोर्स डिजायन किया है। आज 6 नए कस्टमाइज़्ड कोर्स लॉन्च किए जा रहे हैं। नर्सिंग से जुड़ा सामान्य काम हो, होम केयर हो, क्रिटिकल केयर में मदद हो, सैंपल कलेक्शन हो, मेडिकल टेक्निशियन हों, नए-नए उपकरणों की ट्रेनिंग हो, इसके लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। इसमें नए युवाओं की स्किलिंग भी होगी और जो पहले से इस प्रकार के काम में ट्रेन्ड हो चुके हैं, उनकी अप-स्किलिंग भी होगी। इस अभियान से, कोविड से लड़ रही हमारी हेल्थ सेक्टर की फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा भी मिलेगी और हमारे युवाओं रोजगार के नए अवसर के लिए उनके लिए सुविधा भी बनेगी।

साथियों,

Skill, Re-skill और Up-Skill, ये मंत्र कितना महत्वपूर्ण है, ये कोरोना काल ने फिर सिद्ध किया है। हेल्थ सेक्टर के लोग Skilled तो थे ही, उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए बहुत कुछ नया सीखा भी। यानि एक तरह से उन्होंने खुद को Re-skill किया। इसके साथ ही, उनमें जो स्किल पहले से थी, उसका भी उन्होंने विस्तार किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्किल को अपग्रेड या वैल्यू एडिशन करना, ये Up-Skilling है, और समय की यही मांग है और जिस गति से टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तब लगातार dynamic व्यवस्था Up-Skilling की अनिवार्य हो गई है। Skill, Re-skill और Up-Skill, के इसी महत्व को समझते हुए ही देश में Skill India Mission शुरु किया गया था। पहली बार अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाना हो, देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोलना हो, ITI's की संख्या बढ़ाना हो, उनमें लाखों नई सीट्स जोड़ना हो, इस पर लगातार काम किया गया है। आज स्किल इंडिया मिशन हर साल लाखों युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देने में बहुत बड़ी मदद कर रहा है। इस बात की देश में बहुत चर्चा नहीं हो पाई, कि स्किल डवलपमेंट के इस अभियान ने, कोरोना के इस समय में देश को कितनी बड़ी ताकत दी। बीते साल जब से कोरोना की चुनौती हमारे सामने आई है, तब से ही कौशल विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों हेल्थ वर्कर्स को ट्रेन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Demand Driven Skill Sets तैयार करने की जिस भावना के साथ इस मंत्रालय को बनाया गया था, उस पर आज और तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

हमारी जनसंख्या को देखते हुए, हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स से जुड़ी जो विशेष सेवाएं हैं, उनका विस्तार करते रहना उतना ही आवश्यक है। इसे लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में एक फोकस्ड अप्रोच के साथ काम किया गया है। बीते 7 साल में नए AIIMS, नए मेडिकल कॉलेज और नए नर्सिंग कॉलेज के निर्माण पर बहुत ज्यादा बल दिया गया। इनमें से अधिकांश ने काम करना शुरू भी कर दिया है। इसी तरह, मेडिकल एजुकेशन और इससे जुड़े संस्थानों में रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज जिस गति से, जिस गंभीरता से हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने पर काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं हमारे हेल्थ सेक्टर के एक बहुत मजबूत स्तंभ की चर्चा भी जरूर करना चाहता हूं। अक्सर, हमारे इन साथियों की चर्चा छूट जाती है। ये साथी हैं- हमारे आशा-एनम-आंगनवाड़ी और गांव-गांव में डिस्पेंसरियों में तैनात हमारे स्वास्थ्य कर्मी। हमारे ये साथी संक्रमण को रोकने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तक में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम की स्थितियां, भौगौलिक परिस्थिति कितनी भी विपरीत हों, ये साथी एक-एक देशवासी की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। गांवों में संक्रमण के फैलाव को रोकने में, दूर-सुदूर के क्षेत्रों में, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को सफलता पूर्वक चलाने में हमारे इन साथियों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। 21 जून से जो देश में टीकाकरण अभियान का विस्तार हो रहा है, उसे भी हमारे ये सारे साथी बहुत ताकत दे रहे हैं, बहुत ऊर्जा दे रहे हैं। मैं आज सार्वजनिक रूप से इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, इन हमारी सभी साथियों की सराहना करता हूं।

साथियों,

21 जून से जो टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है, उससे जुड़ी अनेक गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब 18 साल से ऊपर के साथियों को वही सुविधा मिलेगी, जो अभी तक 45 साल से ऊपर के हमारे महानुभावों को मिल रही थी। केंद्र सरकार, हर देशवासी को टीका लगाने के लिए, 'मुफ्त' टीका लगाने के लिए, प्रतिबद्ध है। हमें कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना है। मास्क और दो गज़ की दूरी, ये बहुत ज़रूरी है। आखिर में, मैं ये क्रैश कोर्स करने वाले सभी युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, आपकी नई स्किल्स, देशवासियों का जीवन बचाने में लगातार काम आएगी और आपको भी अपने जीवन का एक नया प्रवेश एक बहुत ही संतोष देगा क्योंकि आप जब पहली बार रोजगार के लिए जीवन की शुरूआत कर रहे थे तब आप मानव जीवन की रक्षा में अपने आप को जोड़ रहे थे। लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए जुड़ रहे थे। पिछले डेढ़ साल से रात-दिन काम कर रहे हमारे डॉक्टर, हमारी नर्सिस इतना बोझ उन्होंने झेला है, आपके आने से उनको मदद मिलने वाली है। उनको एक नई ताकत मिलने वाली है। इसलिए ये कोर्स अपने आप में आपकी जिन्दगी में एक नया अवसर लेकर के आ रहा है। मानवता की सेवा का लोक कल्याण का एक विशेष अवसर आपको उपलब्ध हो रहा है। इस पवित्र कार्य के लिए, मानव सेवा के कार्य के लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। आप जल्द से जल्द इस कोर्स की हर बारीकी को सीखें। आपने आप को उत्तम व्यक्ति बनाने का प्रयास करें। आपके पास वो स्किल हो जो हर किसी की जिन्दगी बचाने के काम आए। इसके लिए मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !