Ahead of Prime Minister Narendra Modi`s visit to Australia from 14-19 November 2014, Australian Prime Minister Tony Abbott called Prime Minister on telephone this morning to discuss the agenda for the G 20 Summit in Brisbane. Prime Minister Abbott also conveyed that he and the Australian people were keenly awaiting Prime Minister Modi`s four-city bilateral visit to Australia.

Prime Minister Abbott invited Prime Minister Modi to share, in particular, his vision for accelerating global economic growth and employment generation, based on his personal experiences of reforms and growth at the state level and his plans for India. Prime Minister Abbott also sought PM`s support for Australia`s infrastructure initiatives in the G20.

Prime Minister Modi deeply appreciated Prime Minister Abbott`s personal attention to his visit to Australia. He especially thanked Prime Minister Abbott for his special gesture of hosting a reception for him at the Melbourne Cricket Ground. Prime Minister Modi emphasised the importance he attached to his visit to Australia, as a step towards qualitatively transforming a relationship that he greatly values.

Prime Minister Modi thanked Prime Minister Abbott for his leadership in developing a meaningful agenda for the G 20 Summit and expressed confidence that the Brisbane Summit would be one of the most memorable G 20 Summits, which will impart new momentum in the global economy. Describing G 20 as the key forum for global economic coordination, Prime Minister Modi looked forward to attending his first G20 Summit. Prime Minister offered full support for Prime Minister Abbott`s priorities for the G20 Summit.

Prime Minister Modi shared his concerns on `jobless growth" prospects and felt that focusing on transforming the quality of life of people, not just on issues like the health of the financial markets, is necessary for creating employment-generating economic growth.

He also suggested that, in addition to facilitating financial flows for infrastructure financing, there was a need to look at innovative mechanisms for infrastructure development, including research on transforming waste into infrastructure inputs and creating a virtual centre for information exchange, guidance, identifying opportunities and facilitating flows, which would be beneficial to the poor countries as well

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No ifs and buts in anybody's mind about India’s capabilities: PM Modi on 77th Independence Day at Red Fort

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"India of 21st century does not think small...": PM Modi
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India is the Future: PM Modi
February 27, 2024
“If today the world thinks India is ready to take a big leap, it has a powerful launchpad of 10 years behind it”
“Today 21st century India has stopped thinking small. What we do today is the best and biggest”
“Trust in government and system is increasing in India”
“Government offices are no longer a problem but are becoming allies of the countrymen”
“Our government created infrastructure keeping the villages in mind”
“By curbing corruption, we have ensured that the benefits of development are distributed equally to every region of India”
“We believe in Governance of Saturation, not Politics of Scarcity”
“Our government is moving ahead keeping the principle of Nation First paramount”
“We have to prepare 21st century India for its coming decades today itself”
“India is the Future”

मेरे यहां पुराने जमाने में युद्ध में जाने से पहले बहुत जोरो की डुगडुगी बजाई जाती थी, बड़े बिगुल बजाए जाते थे ताकि जाने वाला जरा जोश में जाए, थैंक्यू दास! TV Nine के सभी दर्शकों को मेरा नमस्कार और यहां उपस्थित आप सबको भी… मैं अक्सर भारत की डायवर्सिटी की चर्चा करता रहता हूं। इस डाइवर्सिटी को TV Nine का न्यूजरूम, आपकी रिपोर्टिंग टीम में बखूबी वो नजर आता है, ये रिप्रेजेंट करता है। TV Nine के अनेक भारतीय भाषाओं में मीडिया प्लेटफॉर्म्स हैं। आप भारत की वाइब्रेंट डेमोक्रेसी, उसके प्रतिनिधि भी हैं। मैं अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग भाषाओं में, TV Nine में काम करने वाले सभी पत्रकार साथियों का, आपकी टेक्निकल टीम का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज TV Nine की टीम ने इस समिट के लिए बड़ा Interesting Topic चुना है। India: Poised For The Next Big लीप. और Big लीप तो हम तभी ले सकते हैं, जब हम जोश में हों, ऊर्जा से भरे हुए हों। कोई हताश-निराश देश हो या व्यक्ति Big लीप के बारे में सोच ही नहीं सकता है। ये थीम ही अपने आप में ये बताने के लिए काफी है कि आज के भारत का आत्मविश्वास किस ऊंचाई पर है, आकांक्षा क्या है? अगर आज दुनिया को लगता है कि भारत एक बड़ा लीप लेने के लिए तैयार है, तो उसके पीछे 10 साल का एक पावरफुल लॉन्चपैड है। तो 10 वर्ष में ऐसा क्या बदला, कि आज हम यहां पहुंचे हैं? ये बदलाव Mindset का है। ये बदलाव Self-Confidence और Trust का है। ये बदलाव Good Governance का, सुशासन का।

साथियों,

एक बहुत पुरानी कहावत है- मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। अभी दास का मैं quote सुन रहा था लेकिन मैं उसमें थोड़ा differ करता हूं। उन्होंने कहा कि इतिहास एक प्रकार से बडे महानुभावों की बायोग्राफी होती है। ये हो सकता है पश्चिम की सोच हो, हिन्‍दुस्‍तान में सामान्य मानवीय की बायोग्राफी, वही इतिहास होती है। वही देश का सच्चा सामर्थ्य होता है और इसलिए बड़े लोग आए, चले गए… देश अजर-अमर रहता है।

साथियों,

हारे हुए मन से विजय मिलनी बहुत मुश्किल होती है। इसलिए पिछले 10 साल में Mindset में जो बदलाव आया है, जो लीप हमने लिया है, वो वाकई अद्भुत है। आज के बाद दशकों तक जिन्होंने सरकार चलाई, उनका भारतीयता के सामर्थ्य पर ही विश्वास नहीं था। उन्होंने भारतीयों को Underestimate किया, उनके सामर्थ्य को कम करके आंका। तब लाल किले से कहा जाता था कि हम भारतीय निराशावादी हैं, पराजय भावना को अपनाने वाले हैं। लाल किले से ही भारतीयों को आलसी कहा गया, मेहनत से जी चुराने वाला कहा गया। जब देश का नेतृत्व ही निराशा से भरा हुआ हो, तो फिर देश में आशा का संचार कैसे होता? इसलिए देश के अधिकांश लोगों ने भी ये मान लिया था कि देश तो अब ऐसे ही चलेगा! ऊपर से करप्शन, हजारों करोड़ के घोटाले, पॉलिसी पैरालिसिस, परिवारवाद, इन सबने देश की नींव को तबाह करके रख दिया था।

पिछले 10 वर्षों में हम उस भयावह स्थिति से देश को निकालकर यहां लाए हैं। सिर्फ 10 साल में भारत, दुनिया की टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में आ गया है। आज देश में जरूरी नीतियां भी तेजी से बनती हैं और निर्णय भी उतनी ही तेजी से लिए जाते हैं। Mindset में बदलाव ने कमाल करके दिखा दिया है। 21वीं सदी के भारत ने छोटा सोचना छोड़ दिया है। आज हम जो करते हैं, वो Best और Biggest करते हैं। आज भारत की उपलब्धियां देखकर दुनिया हैरान है। दुनिया, भारत के साथ चलने में अपना फायदा देख रही है। अरे, भारत ने ये भी कर लिया- ये रिएक्शन, अच्छा भारत ने ये कर लिया? भारत में ये हो गया? ये रिएक्‍शन, आज की दुनिया का न्यू नॉर्मल है। बढ़ती विश्वसनीयता, आज भारत की सबसे बड़ी पहचान है। आप 10 साल पहले के और आज के FDI के आंकड़े देखिए। पिछली सरकार के 10 साल में 300 बिलियन डॉलर की FDI भारत में आई। हमारी सरकार के 10 साल में 640 बिलियन डॉलर की FDI भारत में आई। 10 साल में जो डिजिटल क्रांति आई है, कोरोना के समय में वैक्सीन पर जो भरोसा बैठा है, आज टैक्स देने वालों की बढ़ती हुई संख्या हो, ये चीजें बता रही हैं, कि भारत के लोगों का सरकार और व्यवस्था पर भरोसा बढ़ रहा है।

मैं आपको एक और आकंड़ा देता हूं। यहां इस हॉल में ज्यादातर लोग ऐसे होंगे जो म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते होंगे। साल 2014 में देश में लोगों ने करीब 9 लाख करोड़ रुपए म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर के रखे थे। अगर मैं साल 2024 की बात करूं तो आज देश के लोगों ने 52 लाख करोड़ रुपए उससे भी ज्यादा म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर रखा है। ये इसलिए हुआ है क्योंकि हर भारतीय को ये विश्वास है कि देश मजबूती से आगे बढ़ रहा है। और जितना विश्वास उसे देश पर है, उतना ही खुद पर भी है। हर भारतीय ये सोच रहा है– मैं कुछ भी कर सकता हूं, मेरे लिए कुछ भी असंभव नहीं है। और ये बात TV Nine के दर्शक भी नोट करते होंगे कि अनेक लोगों का प्रिडिक्शन जहां अटक जाता है, उससे भी कहीं ज्यादा बेहतर परफॉर्म करके हमने दिखाया है।

साथियों,

आज इस Mindset और Trust में परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण, हमारी सरकार का Work-Culture है, गवर्नेंस है। वही अफसर हैं, वही ऑफिस हैं, वही व्यवस्थाएं हैं, वही फाइलें हैं, लेकिन नतीजे कुछ और आ रहे हैं। सरकार के दफ्तर आज समस्या नहीं, देशवासियों के सहयोगी बन रहे हैं। ये व्यवस्था आने वाले समय के लिए गवर्नेंस के नए आदर्श स्थापित कर रही है।

साथियों,

भारत के विकास को गति देने के लिए, Big लीप लेने के लिए ये बहुत जरूरी था कि जिस गीयर पर पहले भारत चल रहा था, उस गीयर को बदला जाए। पहले की सरकारों में भारत किस तरह रिवर्स गीयर में था, मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूं। यूपी में 80 के दशक में सरयू नहर परियोजना का शिलान्यास हुआ था। ये परियोजना चार दशक तक अटकी रही। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने इस परियोजना को तेजी से पूरा किया। सरदार सरोवर परियोजना, उस परियोजना का शिलान्यास तो पंडित नेहरू ने 60 के दशक में किया था। 60 साल तक सरदार सरोवर डैम का काम ऐसे ही लटका रहा। सरकार बनने के बाद 2017 में हमने इस डैम का काम पूरा करके इसका लोकार्पण किया। महाराष्ट्र की कृष्णा कोयना परियोजना भी 80 के दशक में प्रारंभ हुई थी। साल 2014 तक ये भी ऐसे ही लटकी हुई थी। इस डैम का काम भी हमारी ही सरकार ने पूरा करवाया।

साथियों,

बीते कुछ दिनों में आपने अटल टनल के आसपास बर्फबारी की बहुत शानदार तस्वीरें देखी हैं। अटल टनल का शिलान्यास हुआ था 2002 में। 2014 तक ये टनल भी अधूरी लटकी हुई रही। इसका काम भी पूरा कराया हमारी सरकार ने और इसका 2020 में लोकार्पण किया गया। असम का बोगीबील ब्रिज भी आपको याद होगा। ये ब्रिज भी 1998 में स्वीकृत हुआ। सरकार में आने के बाद हमने इसे तेजी से पूरा कराया और 20 साल बाद साल 2018 में इसका लोकार्पण किया। Eastern Dedicated Fright Corridor, साल 2008 में स्वीकृत किया गया। ये प्रोजेक्ट भी लटकता रहा और 15 साल बाद, 2023 में हमने इसे पूरा कराया। मैं आपको ऐसे कम से कम 500 प्रोजेक्ट गिना सकता हूं। ऐसे सैकड़ों प्रोजेक्ट्स को 2014 में हमारी सरकार आने के बाद तेजी से पूरा कराया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय में टेक्नोलॉजी की मदद से हमने एक आधुनिक व्यवस्था विकसित की है- प्रगति के नाम से। हर महीने मैं खुद एक-एक प्रोजेक्ट की फाइल लेकर बैठता हूं, सारा डेटा लेकर बैठता हूं, दशकों से अटके हुए प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करता हूं और मेरे सामने ऑनलाइन, सभी राज्‍यों के मुख्‍य सचिव और भारत सरकार के सभी सचिव पूरा समय मेरे सामने होते हैं। एक-एक चीज का वहां analysis होता है। मैं पिछले 10 साल में... 17 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर चुका हूं। 17 लाख करोड़ रुपया… तब जाकर ये प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं।

आप मुझे बताइए, जिस देश में पहले की सरकारें, उस स्पीड से काम करती रही हों, तो देश Big लीप कैसे लगा पाता? आज हमारी सरकार ने लटकाने-भटकाने वाली उस पुरानी अप्रोच को पीछे छोड़ दिया है। मैं आपको हमारी सरकार के कुछ उदाहरण दूंगा। मुंबई का अटल सेतु, देश का सबसे बड़ा ब्रिज, सी ब्रिज। इसका शिलान्यास साल 2016 में हुआ। हमने कुछ सप्ताह पहले इसका लोकार्पण भी कर दिया। संसद की नई बिल्डिंग। इसका शिलान्यास साल 2020 में किया। पिछले ही साल इसका लोकार्पण हो गया। जम्मू एम्स का शिलान्यास साल 2019 में हुआ था। पिछले सप्ताह 20 फरवरी को इसका लोकार्पण भी हो गया है। राजकोट एम्स का शिलान्यास साल 2020 में हुआ था। अभी कल ही इसका भी लोकार्पण हो गया है। इसी तरह, IIM संभलपुर का शिलान्यास साल 2021 में हुआ...और... साल 2024 में लोकार्पण हो गया। त्रिचि एयरपोर्ट के नये टर्मिनल का शिलान्यास 2019 में हुआ और कुछ सप्ताह पहले इसका लोकार्पण भी हो गया। IIT भिलाई का शिलान्यास साल 2018 में हुआ और कुछ दिन पहले हमने इसका भी लोकार्पण कर दिया है। गोवा के नए एयरपोर्ट का शिलान्यास 2016 में हुआ और 2022 में इसका लोकार्पण भी हो गया। लक्षद्वीप तक समुद्र के नीचे ऑप्टिकल फाइबर बिछाना बहुत चैलेंजिंग माना जाता था। इस काम को हमने साल 2020 में शुरू करवाया और कुछ सप्ताह पहले इसे पूरा भी कर दिया।

बनारस की बनास डेयरी का शिलान्यास साल 2021 में हुआ और कुछ दिन पहले इसका लोकार्पण हुआ। कल ही आपने द्वारका में सुदर्शन ब्रिज की शानदार तस्वीरें देखी हैं। हिंदुस्तान का सबसे लंबा केबल ब्रिज, देश की शान बढ़ा रहा है। इसका भी शिलान्यास हमारी सरकार ने साल 2017 में किया था। मैं जो मोदी की गारंटी की बात करता हूं ना, उसका एक पहलू ये भी है। जब ये स्पीड होती है, तेजी से काम करने की इच्छा शक्ति होती है... जब टैक्सपेयर्स के पैसे का सम्मान होता है... तब देश आगे बढ़ता है, तब देश Big लीप के लिए तैयार होता है।

साथियों,

भारत आज जिस स्केल पर काम कर रहा है, वो अप्रत्याशित, कल्पना से परे है। मैं आपको सिर्फ बीते एक सप्ताह के कुछ उदाहरण और देना चाहता हूं… एक week के… 20 फरवरी को मैंने जम्मू से एक साथ देश के दर्जनों IIT-IIM, ट्रिपल IT जैसे Higher Education Institutes का लोकार्पण किया। 24 फरवरी को मैंने राजकोट से देश के 5 एम्स का एक साथ लोकार्पण किया। आज सुबह मैंने देश के 27 राज्यों के 500 से ज्यादा रेलवे स्टेशन्स के री-डेवलपमेंट का शिलान्यास किया। आज के उसी कार्यक्रम में देश में डेढ़ हजार से ज्यादा ओवरब्रिज और अंडरपास पर एक साथ काम शुरू हुआ। अभी मैंने इस कार्यक्रम में आने से पहले ही सोशल मीडिया साइट- एक्स पर एक थ्रेड शेयर किया है। इसमें मैंने अपने आने वाले 2 दिनों के कार्यक्रमों के बारे में बताया है। मैं कल सुबह केरला, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जाने वाला हूं। वहां स्पेस के कार्यक्रम हैं... MSME के कार्यक्रम हैं, पोर्ट से जुड़े कार्यक्रम हैं, ग्रीन हाईड्रोजन से जुड़े कार्यक्रम हैं... किसानों से जुड़े कार्यक्रम हैं... भारत ऐसी स्केल पर काम करके ही Big लीप लगा सकता है। हम पहली, दूसरी, तीसरी औद्योगिक क्रांति में पीछे रह गए। अब हमें चौथी औद्योगिक क्रांति में दुनिया का नेतृत्व करना है। और इसके लिए भारत में हर रोज हो रहे विकास कार्यों से, देश की रफ्तार को ऊर्जा मिल रही है।

भारत में हर दिन, आप एक के बाद एक दिमाग जरा अलर्ट रखिए… भारत में हर दिन दो नए कॉलेज खुले हैं, हर हफ्ते एक यूनिवर्सिटी खुली है। भारत में हर दिन 55 पेटेंट्स और 600 ट्रेडमार्क रजिस्टर किए गए हैं। भारत में हर दिन करीब डेढ़ लाख मुद्रा लोन बांटे गए हैं। भारत में हर दिन सैंतीस नए स्टार्टअप बने हैं। भारत में हर दिन सोलह हजार करोड़ रुपए के यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए हैं। भारत में हर दिन 3 नए जन औषधि केंद्रों की शुरुआत हुई है। भारत में हर दिन चौदह किलोमीटर रेलवे ट्रैक का निर्माण हुआ है। भारत में हर दिन 50 हजार से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। भारत में हर सेकंड, हर सेकंड… एक नल से जल का कनेक्शन दिया गया है। भारत में हर दिन 75 हजार लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। हमने तो हमेशा से ही गरीबी हटाओ के सिर्फ नारे सुने थे। किसने सोचा था कि 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल आएंगे। लेकिन ये हुआ है और हमारी ही सरकार में हुआ है।

साथियों,

भारत में consumption को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट आई है, जिससे नए ट्रेंड का पता चलता है। भारत में गरीबी अब तक के सबसे कम स्तर... यानि single digit में पहुंच गई है। इस डेटा के मुताबिक, पिछले एक दशक की तुलना में Consumption ढाई गुना बढ़ गया है। यानी भारत के लोगों की विभिन्न सेवाओं और सुविधाओं पर खर्च करने की क्षमता और बढ़ गई है। ये भी सामने आया है कि पिछले 10 साल में, गांवों में consumption शहरों की तुलना में कहीं ज्यादा तेज गति से बढ़ा है। यानी गांव के लोगों का आर्थिक सामर्थ्य बढ़ रहा है, उनके पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे हो रहे हैं। ये ऐसे ही नहीं हुआ, ये हमारे उन प्रयासों का परिणाम है, जिनका फोकस गांव, गरीब और किसान है। 2014 के बाद से हमारी सरकार ने गांवों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। गांव और शहर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई, रोजगार के नए अवसर तैयार किए गए, महिलाओं की आय बढ़ाने के साधन विकसित किए गए। विकास के इस मॉडल से ग्रामीण भारत सशक्त हुआ है। मैं आपको एक और आंकड़ा दूंगा। भारत में पहली बार, कुल खर्च में भोजन पर होने वाला खर्च 50 परसेंट से भी कम हो गया है। यानी, पहले जिस परिवार की सारी शक्ति भोजन जुटाने में खर्च हो जाती थी, आज उसके सदस्य सारी चीजों पर पैसे खर्च कर पा रहे हैं।

साथियों,

पहले की सरकारों की एक और सोच ये थी कि वो देश की जनता को अभाव में रखना पसंद करती थीं। अभाव में रह रही जनता को ये लोग चुनाव के समय थोड़ा-बहुत देकर, अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेते थे। इसके चलते ही देश में एक वोट बैंक पॉलिटिक्स का जन्म हुआ। यानी सरकार केवल उसके लिए काम करती थी जो उन्हें वोट देता था।

लेकिन साथियों,

बीते 10 वर्षों में, भारत इस Scarcity Mindset को पीछे छोड़कर आगे बढ़ चला है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाकर हमने ये सुनिश्चित किया है कि विकास का लाभ भारत के हर क्षेत्र को समान रूप से दिया जाए। हम Politics of Scarcity नहीं, Governance of Saturation पर विश्वास करते हैं। हमने तुष्टिकरण ना करके, देशवासियों के संतुष्टिकरण का रास्ता चुना है। बीते 10 वर्षों में यही हमारा एकमात्र मंत्र है, यही हमारी सोच है। यही सबका साथ-सबका विकास है। हमने वोटबैंक पॉलिटिक्स को पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस में बदला है। जब अभाव होता है तो करप्शन होता है, भेदभाव होता है। जब सैचुरेशन होता है तो संतुष्टि होती है, सद्भाव होता है।

आज सरकार अपनी तरफ से, घर-घर जाकर लाभार्थियों को सुविधाएं दे रही है। आपने बीते समय में मोदी की गारंटी वाली गाड़ी के बारे में जरूर सुना होगा। देश में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि सरकार के अफसर गाड़ी लेकर गांव-गांव जाएं और पूछे कि सरकार की इन योजनाओं का लाभ आपको मिला या नहीं मिला? आज हमारी सरकार खुद लोगों के दरवाजे पर जाकर कह रही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाइए। इसलिए मैं कहता हूं, जब सैचुरेशन एक मिशन बन जाए, तो हर प्रकार के भेदभाव की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसलिए मैं कहता हूं कि हम राजनीति नहीं राष्ट्रनीति पर विश्वास करने वाले लोग हैं।

साथियों,

हमारी सरकार Nation First के सिद्धांत को सर्वोपरि रखते हुए आगे बढ़ रही है। पहले की सरकारों के लिए कोई काम नहीं करना… ये सबसे बड़ा आसान काम बन गया था। लेकिन इस वर्क-कल्चर से ना देश बन सकता है और ना देश आगे बढ़ सकता है। इसलिए हमने देशहित में निर्णय लिए, पुरानी चुनौतियों का समाधान किया। आर्टिकल 370 की समाप्ति से लेकर… मैं Movie के बात नहीं कर रहा हूं। आर्टिकल 370 की समाप्ति से लेकर राम मंदिर निर्माण तक, ट्रिपल तलाक के अंत से लेकर महिला आरक्षण तक, वन रैंक वन पेंशन से लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद तक, सरकार ने Nation First की सोच के साथ ऐसे हर अधूरे काम पूरे किए।

साथियों,

21वीं सदी के भारत को अपने आने वाले दशकों के लिए भी हमें आज ही तैयार करना होगा। इसलिए आज भारत भविष्य की योजनाओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्पेस से सेमीकंडक्टर तक डिजिटल से ड्रोन तक AI से क्लीन एनर्जी तक 5G से Fintech तक भारत आज दुनिया की अगली कतार में पहुंच गया है। भारत आज, ग्लोबल वर्ल्ड में डिजिटल पेमेंट्स की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। भारत आज, Fintech Adoption Rate में सबसे तेजी से बढ़ता देश है। भारत आज, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश है। भारत आज, Solar Installed Capacity में दुनिया के अग्रणी देशों में से है। भारत आज, 5 जी नेटवर्क के विस्तार में यूरोप को भी पीछे छोड़ चुका है। भारत आज, सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत आज, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे फ्यूचर के फ्यूल पर तेज़ी से काम कर रहा है।

आज भारत अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है। भारत Futuristic है। और इसलिए आज सब लोग कहने लगे हैं- India is the Future. आने वाला समय और महत्वपूर्ण है, आने वाले 5 साल बहुत महत्वपूर्ण हैं। और मैं ये सब जो audience यहां बैठा है और बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं- हमारे तीसरे कार्यकाल में… हमारे तीसरे कार्यकाल में हमें भारत के सामर्थ्य को नई ऊंचाई तक पहुंचाना है। विकसित भारत की संकल्प यात्रा में आने वाले पांच वर्ष हमारे देश की प्रगति और प्रशस्ति के वर्ष हैं। इसी कामना के साथ और पूरे विश्वास के साथ ये सेमिनार होता या न होता, Big लीप जरूर होता। इतना फायदा जरूर हुआ कि आपने Big लीप का कार्यक्रम रखा, तो मुझे भी अपने लिप खोलने का मौका मिल गया। इस कार्यक्रम के लिए आपको ढेर सारी शुभकामनाएं! आप लोग सुबह से बैठ करके Brainstorming करते होंगे तो कुछ हंसी-खुशी की शाम भी हो गई।

बहुत बहुत धन्यवाद!