PM Modi's Interview to Rubika Liyaquat of News 18 India

Published By : Admin | May 14, 2024 | 17:40 IST

During his visit to Varanasi, Uttar Pradesh, PM Modi in an interview with News18 spoke on various topics. During the interview PM Modi also got emotional while expressing his thoughts on serving the nation irrespective of any situation. He said that he wants to serve the nation as 140 crore people are his family members. Earlier during the day, PM Modi filed his nomination for his candidature from Varanasi for the ongoing Lok Sabha Elections.

रुबिका लियाकत- हमारे साथ काशी का लाड़ला, हीराबा का लाडला, देश के बड़ा प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी, बहुत-बहुत स्वागत है आपका।

पीएम मोदी- जय मां गंगे।

 

रुबिका लियाकत- जय महाकाल, कैसे हैं आप।

पीएम मोदी- मैं वैसा ही हूं जैसा चुनाव प्रारंभ हुआ उसके पहले था।

 

रुबिका लियाकत- ये चुनाव आपके लिए इतने महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?

पीएम मोदी- कोई भी चुनाव महत्त्वपूर्ण होना ही चाहिए और हर व्यक्ति के जीवन में हर दिन महत्त्वपूर्ण होना चाहिए हर पल महत्त्वपूर्ण होना चाहिए हर किसी के लिए। मैं हर एक को कहूंगा कि ऐसा ही होना चाहिए।

 

रुबिका लियाकत- अच्छा ये बताइए, फर्ज कीजिए कि अगर आप प्रधानमंत्री बन जाते हैं तीसरे टर्म में तो वो पहली चीज क्या होगी जो आप देश को देंगे।

पीएम मोदी- आप इतना बड़ा क्वेश्चन मार्क क्यों लगा रही हो। मां गंगा के किनारे पर खड़ी हो। पूरा देश आप घूम कर के आई हो। देश में आप लोगों से मिली हो। आपने देखा है ये चुनाव मोदी नहीं लड़ रहा है जी, ये चुनाव 140 करोड़ देशवासी लड़ रहे हैं। और जो मनोभाव लोगों के देखे हैं, मेरा बहुत लंबा अनुभव है चुनावों का, जनता के मिजाज का अनुभव है, उनका तजुर्बा मैं समझ सकता हूं। तो ये चुनाव से भी काफी ऊपर की अवस्था है ये वोट देकर के छूटने वाली अवस्था नहीं है। वोट दिया और कांट्रैक्ट दे दिया ऐसा नहीं है वो मोदी से जुड़ चुके हैं और अधिक जुड़ना चाहते हैं। उनको लगता है कि देश ने कई सरकारों के मॉडल देखे, लेकिन भाजपा ने ऐसा मॉडल दिया है जिसमें आधुनिक भारत का संकल्प भी है, सपने भी हैं। और जिसमें साफ-साफ देश के सामान्य मानवी जो 70 साल से इंतजार कर रहा था, जिसको लगता था कि आजाद होने के बाद सब उसे मिल जाएगा, उसको मिला नहीं, वो देने का काम आज मोदी कर रहा है। और इसलिए मुझे जो जमीनी सच्चाई है वो मेरे साथ जुड़ चुकी है। और जो खास करके युवा जनरेशन जिसने बुरे दिन देखे नहीं थे। 2014 के पहले जो पांच साल-दस साल आयु का था उसको लगता है यार इसमें रिफॉर्म हो रहा है, चंद्रयान हो रहा है, डिजिटल इंडिया हो रहा है, स्टार्ट अप हो रहा है ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनने वाला है, फार्मा का हब बनने वाला है, ये उसको लगता है ये तो बिल्कुल दुनिया के लिए हमारा सब कुछ खुल जाएगा। जब वो देखता है हम मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे और जब वो सोचता है कि यार दुनिया में हम सेकेंड नंबर पर हैं मोबाइल एक्सपोर्टर के रूप में, तो मेरा नौजवान अपने सपनों को मेरी सफलताओं के साथ बुन रहा है और बुन कर के वो ऐसा धागा बना रहा है जिस धागे के कारण उसको अपने भविष्य की गारंटी दिखती है।

 

रुबिका लियाकत- इतना कॉन्फिडेंस, आप लबरेज है कॉन्फिडेंस से, मतलब आपको नर्वसनेस जरा भी नहीं है।

पीएम मोदी- पहली बात है शायद वो मेरी डिक्शनरी में शब्द नहीं है। दूसरा मैंने जीवन में तपस्या की है जी। मेरा पल-पल मैंने खपाया है, देशवासियों के लिए खपाया है, अपने लिए नहीं खपाया है। और मैंने उनके इसलिए खपाया कि मुझे मालूम है बहुत ही डिजर्विंग लोग हैं। इनके साथ 70 साल तक अन्याय हुआ है। और जब उनके आंसू कोई पोंछता है, उनके टॉयलेट की कोई चिंता करता है, वो भूल नहीं सकता है, कोरोना का कठिन काल चूल्हा बुझने नहीं दिया था, बच्चे को भूखा सोने नहीं दिया। क्यों एक सरकार थी जिसने कहा था अनाज के भंडार पड़े हैं लेकिन हम दे नहीं सकते। एक यह सरकार है जिसका संकल्प है किसी का घर का चूल्हा बुझने नहीं दूंगा।

 

रुबिका लियाकत- ये जो इमोशनल साइड है आपका, 15 साल से ज्यादा वक्त गुजरात में, 10 साल यहां केंद्र में, एक बहुत ही कड़े प्रशासक के तौर पर आपकी इमेज जो है निकल कर आई है। लेकिन हाल के दिनों में ये दिख रहा है कि आपका एक कोमल मन है जो रह रह कर बाहर आ जाता है। आप बहुत इमोशनल आदमी है लेकिन उसे दुनिया से छुपाते हैं।

पीएम मोदी- ऐसा है कि अब टीवी का जमाना है तो लोगों को पता चल जाता है। ये कोई बाद में आई हुई चीज नहीं होती है जन्मजात होती है। और वो शायद मेरी स्ट्रेंथ भी है, दुनिया की नजरों में वो वीकनेस भी है और विरोधियों के लिए ताना मारने का एक अवसर भी है। लेकिन मैं इन सब से परे हूं। मोदी आपका बच्चा है, आपने उसको बनाया है, आपने उसको पाल करके बड़ा बनाया है। कुछ कमी रह गई, मैं ठीक करूंगा, अच्छा होगा तो आगे बढ़ाऊंगा।

 

रुबिका लियाकत- मैंने दो पर्सनालिटी आपकी बताई एक बेहद इमोशनल एक कड़ा प्रशासक लेकिन आपके विरोधी इन दोनों के इतर एक ऐसी इमेज आपकी उकेरते हैं जिसमें आप ऑटोक्रेट हैं, तानाशाह हैं, जहां आपके कोई राजनीतिक साथी साथ नहीं होते हैं। आप किसी का साथ पसंद नहीं करते वो कहते हैं यह आदमी क्या समझेगा परिवार, इसका तो परिवार ही नहीं है।

पीएम मोदी- सचमुच में सवाल उनको पूछना चाहिए। आप देश के लिए निकले हो, परिवार के बाहर कब निकलोगे, यह सवाल उनको पूछना चाहिए। अब कांग्रेस पार्टी का पूरा कैंपेन फैमिली कैंपेन बन गया है। बाकी सारे दल इंडिया अलायंस के हैं। आप तमिलनाडु देखिए परिवार कैंपेन कर रहा था। आप कर्नाटका देखिए परिवार कैंपेन कर रहा था। आप आंध्र देखिए परिवार कैंपेन कर रहा था। आप तेलुगु तेलंगना देखिए परिवार कैंपेन कर रहा था। आप उत्तर प्रदेश देखिए दो परिवार कैंपेन कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर देखिए दो परिवार कैंपेन कर रहे हैं। सवाल मीडिया के उनको होने चाहिए कि क्या हुआ इतने साल के बाद भी आप परिवार से बाहर निकल क्यों नहीं पाते हो। मैं परिवार से जुड़ा नहीं हूं ये गुनाह नहीं होना चाहिए गर्व होना चाहिए। लोकतंत्र की सबसे ऊंची अमानत है कि जो इंसान अपने परिवार के लिए नहीं जीता है, जो इंसान देश को अपना परिवार मानता है मेरा भारत मेरा परिवार, उसके लिए जीता है। अब यह क्वेश्चन मार्क लग जाए तब मुझे होता है कि क्या इरादे होंगे।

 

रुबिका लियाकत- आपको तकलीफ होती है इस बात को लेकर के ये आईडियोलॉजिकल वॉर कम है, वैचारिक जो लड़ाई है वो कम है आपसे नफरत ज्यादा है, मतलब अगर यह मोदी ने किया है तो पक्का कुछ गड़बड़ है,इसमें कुछ खराब है।

पीएम मोदी- कठिनाई ये है कि जब इंसान तर्क के आधार पर, तथ्य के आधार पर और जमीनी हकीकत के आधार पर पूरी प्रकार से निराश हो चुका होता है। कुछ हाथ नहीं लगता है तब वो टेबल पछाड़ता रहता है, चिल्लाता रहता है, अनाप-शनाप बोलता रहता है। अब मेरे सामने दो रास्ते हैं कि जो हो हल्ला हो रहा है, मैं अपना ध्यान उसमें केंद्रित करूं कि मैं जिस संकल्प को लेकर के चला हूं, मैं अपने आप को वहां समर्पित करूं। तो मैंने अपने आप को अपने संकल्पों के लिए समर्पित कर दिया है। और मैं योगा का इंसान हूं। मैं ध्यान को जीता हूं। मैं ध्यान करता हूं ऐसा नहीं, मैं ध्यान को जीता हूं और इसलिए कितनी ही कोलाहल के बीच में मैं अपने आप को निर्विकल्प निराकार संकल्प के साथ जुड़ा हुआ है चला जा रहा हूं।

 

रुबिका लियाकत- आपको यह एहसास नहीं, मतलब आपको सच में तकलीफ नहीं होती, आप वाहिद ऐसे शख्स हैं पॉलिटिकली जिसको इतना कोसा गया है, और यह अतिशयोक्ति नहीं है जब मैं आपसे कह रही हूं। मतलब आप किसी भी पर्सनालिटी को सोचिए तो उसको विपक्ष की तरफ से ऐसे नहीं कोसा गया जैसे आपको कोसा गया।

पीएम मोदी- हमारे शास्त्रों में कहा है निंदक नियरे राखिए और मैं यह साफ मानता हूं, अगर इतने आलोचक ना होते। टीवी मीडिया का उस जमाने में थोड़ा कम था, लेकिन जो भी बैठे थे वो एक विचारधारा से पीड़ित लोग थे, वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप से जुड़े हुए थे तो उन्होंने सोचा कि आदमी को गालियां दे-दे करके हम इस पूरे इंस्टिट्यूट को और पूरे विचार प्रवाह को ही तबाह कर देंगे। ये भूल गए कि उन्होंने ऐसा करके मुझे बहुत बड़ा बना दिया। वरना मुझे कौन जानता था जी। गालियां देने के कारण न और इसलिए मैं, आपको आश्चर्य होगा कि मैं गुजरात में पब्लिक मीटिंग करता था ना तो मैं पूछता था कोई काले झंडे वाला आया है कि नहीं आया है। तो फिर वो मेरे सामने, मैंने कहा- दो चार काले झंडे वाले लाइए, तभी तो कल अखबार में आएगा कि मोदी जी ने इतना बड़ा कार्यक्रम किया। मैंने कहा एक लाइन नहीं छपेगी दो चार काले झंडे वाले रखो भाई। क्योंकि मेरा पॉजिटिव प्रचार संभव ही नहीं है। मैंने कहा कि कोई नेगेटिव वाला आ जाएगा तो कम से ये खबर आएगी कि मोदी उस गांव में वो कार्यक्रम कर रहा था, क्या कर रहा था वो भी नहीं आएगा। तो फिर वो सोचेगा। एक बार मेरे यहां कुछ लोग आए गुजरात में। वो मिठाई लेकर के आए और 40-50 गांव के प्रधान आ गए। बोले हमारे गांव में 24 घंटे बिजली हो गई तो हम आपको सम्मान करने आए। मैंने कहा- झूठ बोल रहे हो, 24 घंटे बिजली हो ही नहीं सकती। बोले - हो गई है। मैंने कहा बताओ किस अखबार में छपा है, किसी टीवी में आया क्या। बोले- अखबार में तो नहीं आएगा। मैंने आपकी बात मान लूं, बोले-मान लो। तो मैंने कहा चलो मिठाई खिलाओ। तो मैं इन चीजों से निकला हूं। मैंने इसका आनंद लिया है।

 

रुबिका लियाकत- हम एक कार्यक्रम कर रहे मोदी जी। न्यूज18 इंडिया का वो कार्यक्रम है मोदी वतन मुसलमान। हम ज्यादातर उन जगहों पर जाते हैं जहां पर मुस्लिम मतदाता भारी संख्या में हैं। पहले आलम अलग था और आज की तारीख में मैं आपको पूरी गंभीरता से और संजीदगी से कह सकती हूं कि ऐसे- ऐसे मुसलमान आगे आते हैं जो आपके लिए जान दे सकते हैं। और एक उनका वाक्य है ना दूरी है ना खाई है मोदी हमारा भाई है। बड़ा जोर शोर से ऐसे करते हुए नजर आते हैं। बावजूद उसके आप उस धारणा को तोड़ने में क्या नाकामयाब रहे हैं कि मोदी मुसलमानों का नहीं है।

पीएम मोदी- पहली बात ये है कि यह मुद्दा मुसलमान का नहीं है। इंडिविजुअल मुसलमान कितना ही मोदी के साथ होगा लेकिन एक निश्चित विचार प्रवाह है जो उनको आदेश करता है आप ये करो आप वो करो उसके आधार पर निर्णय करते हैं। जहां तक मोदी का सवाल है, तो मेरा जो घर है ना मेरे अगल बगल में सारे मुस्लिम परिवार हैं। तो हमारे घर में ईद भी मनती थी, हमारे घर में और भी त्यौहार होते थे। मेरे घर में ईद के दिन खुद का खाना नहीं पकता था। सारे मुस्लिम परिवारों से मेरे यहां खाना आ जाता था। मेरे घर से पांच कदम के बाद मुस्लिम परिवार है। जब मोहर्रम में ताजिया निकलता था, तो हमारा कंपलसरी होता था उससे नीचे से निकलो, जैसे परिक्रमा करते हैं मंदिर में। ताजिये के नीचे से निकलो, हमें सिखाया जाता था। तो मैं उस दुनिया से पला बढ़ा हूं। आज भी मेरे बहुत सारे दोस्त हैं। दूसरा 2002 के बाद मेरी छवि बहुत खराब कर दी गई गोधरा के बाद। मैंने सोचा भई जरा रियलिटी जाननी चाहिए। तो मैंने हमारे 30 कार्यकर्ताओं का, युवाओ का एक ट्रेनिंग कैंप किया उनको सर्वे करना सिखाया, सर्वे मतलब वो आंकड़ों वाला सर्वे नहीं, बातचीत कैसे करनी बात कैसे निकालनी। अहमदाबाद में एक माणिक चौक करके जगह है। वो माणिक चौक में शाम को लोग खाना खाने जाते हैं। वहां दिन में जो बिजनेस है, सारे व्यापारी हैं और खरीदार सारे हिंदू हैं बड़ा यूनिक मार्केट है। मतलब सारे व्यापारी मुसलमान हैं,सारे खरीदार हिंदू हैं। और वो इतनी भीड़ होती है जी पैदल नहीं चल सकते। साइकिल को तो लेकर जाना इंपॉसिबल है। अब दीवाली में आप अंदर गए तो दो घंटे में निकल नहीं सकते। और हर प्रकार की चीजें बिकती है वहां। मैंने कहा मुझे उसी मार्केट में सर्वे करना है। वहां सर्वे करो तो मैंने लड़कों को भेजा और मैं डेली रिपोर्ट लेता था। वो पूछते थे कि आप बताइए दिवाली कैसी है। नहीं जी, दिवाली बहुत अच्छी है। ये मैं 2002 की बात कर रहा हूं। फिर वो कहता था उसको जरा चुभने के लिए। फिर वो कहता था मोदी बड़ा यार दिवाली है। हे, मोदी का नाम मत लो। बच्चा होता था उनका, बोले इसकी मां सुनेगी ना तो मुझे रात को खाना नहीं देगी। बोले क्यों, अरे बोली मोदी नहीं आया ना तब तक ये स्कूल नहीं जाता था। बोले मोदी आया तो स्कूल जा रहा है। ये दिवाली की छुट्टी है तो दुकान पर मेरी मदद कर रहा है। बोले पहले कभी दुकान पर नहीं आता था, मेरा सर फूट जाता था। बोले उसकी मां इतनी खुश है कि मेरे बच्चे सब उनका जीवन बन रहा है। तो बोले मोदी के खिलाफ मेरे पास मत बोलो। और करीब-करीब 90 परसेंट दुकान वालों का तर्क अलग-अलग होंगे, यही जवाब था। दूसरा मुझे कुछ मुस्लिम महिलाएं एक बार मिलने आई। तो बड़ी बधाई दे रही थी, कुछ अपेक्षा लेकर के आई थी। मैंने क्या बधाई, वो जोहापुरा की थी और जोहापुरा वो है जहां करीब तीन-चार लाख मुसलमान का गेटोज है। तो बोले हम वहां से आए है। मैंने कहा, कुछ तकलीफ है क्या, कोई पुलिस वाला कोई सरकार कुछ परेशान करती आपको क्या। नहीं नहीं बोले साब, हम तो आपका अभिनंदन करने आए हैं और कुछ काम लेके आए हैं। मैंने कहा बताइए, बोले आपने बिजली का काम किया न बहुत अच्छा किया। मैंने कहा- कहां वो को मैंने बहुत बुरा किया है। मैंने कहा मैंने 35 किलोमीटर केबल उस इलाके का 35 किलोमीटर केबल उखाड़ के फेंक दिया है और वहां कोई सरकारी आदमी नहीं जा पाता था। बोले साब, वही अच्छा काम किया है। मैंने कहा कैसे, मैंने तो बिजली काट दी, मैंने तो केबल काट दिए। बोले नहीं साहब आपका तो एक बिजली मंत्री है। हमारे यहां हर मोहल्ले में बिजली मंत्री है और बोले बिजली देकर के वो हमसे पेमेंट लेते थे। केबल उनके थे बोले सरकार की बिजली चोरी करके हमको बेचते थे और हमारे पैसे बहुत जाते थे। बोले अभी रेगुलर बिजली मिल रही है कोई हमें दादागिरी नहीं करता है, बोले इसलिए हम आए हैं। उस समय पहले मेरे पर अखबार में क्या आया, मोदी ने वहां पर जुल्म कर दिया, सारे केबल काट दिए, एक्चुअली मैंने उनका भला किया तो ऐसा मेरे जीवन में सैकड़ों घटना है लेकिन मैं इसका मार्केटिंग नहीं करता हूं। क्यों, मेरा पहले से मंत्र रहा है सबका साथ सबका विकास। मैं वोट बैंक के लिए काम नहीं करता हूं। और जो गलत है वो मैं गलत कह के रहूंगा।

 

रुबिका लियाकत- स्टेज पर आपने मुसलमानों का जब जिक्र किया तो घुसपैठिया, ज्यादा बच्चा पैदा करने वाला, इसकी क्या जरूरत आन पड़ी थी?

पीएम मोदी- मैं हैरान हूं जी, किसने आपको कहा कि जब ज्यादा बच्चे की बात होती तो सिर्फ मुसलमान का नाम जोड़ देते हैं। क्यों मुसलमान के साथ अन्याय करते हैं आप। हमारे यहां गरीब परिवारों में भी ये हाल है जी। उनके बच्चों को पढ़ा नहीं पा रहे हैं। किसी भी समाज के हों, गरीबी जहां है वहां बच्चे भी ज्यादा हैं।

 

रुबिका लियाकत- तो आप कह रहे मुसलमान अलग था, ज्यादा बच्चा पैदा करने वाला...

पीएम मोदी- मैंने ना हिंदू कहा है ना मुसलमान कहा है। मैंने कहा कि भाई आप, उतने बच्चे हो जिसका लालन पालन कर सको। सरकार को करना पड़े ऐसी स्थिति मत करो।

 

रुबिका लियाकत- इस बार मुसलमान आपको वोट देगा? आपको उनके वोट की चाहत है।

पीएम मोदी- मैं ये मानता हूं मेरे देश के लोग मुझे वोट देंगे। मैं जिस दिन हिंदू मुसलमान करूंगा ना उस दिन मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा। और मैं हिंदू मुसलमान नहीं करूंगा ये मेरा संकल्प है। अगर मैं घर देता हूं सैचुरेशन की बात करता हूं 100% डिलीवरी। इसका मतलब हुआ गांव में मानो 200 घर है कौन समाज है कौन जाति है कौन धर्म है NO, उन 200 घर में अगर 60 लाभार्थी हैं, तो उन 60 लोगों को लाभ मिलना चाहिए। और जब मैं 100 परसेंट सैचुरेशन का मतलब होता है वो सच्चा सामाजिक न्याय है। वो सच्चा सेकुलरिज्म है। जब उसमें करप्शन की संभावना नहीं रहती। लोगों को मालूम है भले उसको मंडे को मिला है ना अगले मंडे को मेरा नंबर लग जाएगा।

 

रुबिका लियाकत- नहीं इस बात की गवाह तो मैं भी हूं। मुसलमान ये बात कहते हैं और ये मानते हैं कि उनके घर पे सड़क आई है, बिजली आई है, उनके घर पे सिलेंडर आया है, शकीला और शकुंतला में किसी तरह का कोई अंतर नहीं है। और ये रहा आपका नमो घाट। जब आप ये बदलाव देखते हैं तो कैसा लगता है?

पीएम मोदी- पहली बात है, मैं मानता हूं कि काशी में घाट काशी की पहचान है। लेकिन उसमें आधुनिकता होनी चाहिए, व्यवस्था होनी चाहिए। और उसमें से मुझे नमो घाट बनाने का विचार आया। और इन दिनों शाम को बहुत बड़ी मात्रा में लोग यहां आते हैं तो वो पुराना और इसको जोड़ कर के देखते हैं। और मैंने उस पुरानी परंपरा को भी बचा के रखा है और मैंने इसको आधुनिक रूप भी दिया है। और लगातार गंगा को नमन। यहां क्यों आते हैं नमो गंगा, ये नमो गंगा है।

 

रुबिका लियाकत- बहुत खूब। अच्छा ये बताइए, मेरे दो आखरी सवाल है। पहला तो यह कि ये कहा जाता है कि 400 पार अगर मोदी ले आएगा तो फिर विपक्ष क्या करेगा विपक्ष एक मजबूत स्थिति में होगा तभी तो लोकतंत्र चल पाएगा। आप क्यों चाहते हैं कि सब आप ही के पास आ जाए।

पीएम मोदी- मैं चाहता हूं कि विपक्ष मजबूत बने। मैं इसी के लिए मेहनत कर रहा हूं लेकिन मजबूती का मतलब ये नहीं हाउस ना चलने दें। हुरदंग करें, अनडेमोक्रेटिक वे में काम करें। भारत का दुर्भाग्य है कि पिछले 10 साल ये लोग पूरी तरह विपक्ष के रूप में भी फेल हो गए। उनके खाते में विपक्ष के नाते एक काम नहीं है। जो लोग विपक्ष में फेल हो गए वो शासन में कैसे सफल हो सकते हैं। और भारत में मजबूत लोकतंत्र की बहुत आवश्यकता है, मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है और इसलिए शरद पवार ने अच्छा सुझाव दिया है और मैं उसका स्वागत करता हूं। उन्होंने सुझाव दिया है कि सभी छोटी पार्टियों ने कांग्रेस में मर्ज कर देना चाहिए। कांग्रेस में मर्ज करना, नहीं करना, कहां करना वो मेरा विषय नहीं है, इसका अर्थ मैं ये निकालता हूं अगर ये मर्ज हो जाते हैं क्योंकि उनको चिंता ये है कि इस चुनाव में मान्य विपक्ष संभव नहीं होगा। इतनी सीटें भी नहीं आएगी कोई रिकॉग्नाइज अपोजिशन बने। और इसलिए अगर मर्जर कर देंगे तो नंबर थोड़ा हो जाएगा, हम मान्य विपक्ष बनेंगे। दूसरा आपको आश्चर्य होगा, मैंने कानून में परिवर्तन किया। हमारे यहां बहुत सी योजनाएं ऐसी हैं बहुत सी कमेट ऐसी है जिसमें लीडर ऑफ अपोजिशन बैठ सकता है। और बड़े महत्त्वपूर्ण निर्णय होते हैं। तो मैंने कानूनी परिवर्तन किया कि लीडर ऑफ अपोजिशन है नहीं। क्योंकि 2014 से 19 उनके पास सीट नहीं थी। मैंने कहा लार्जेस्ट पार्टी का लीडर उसको बिठाओ। मैं इतना डेमोक्रेट हूं वरना मैं नहीं बिठाता, मुझे कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन फिर भी मैंने किया है।

 

रुबिका लियाकत- मुझे पता है वक्त की कमी है लेकिन पिछली बार जब मैंने आपका इंटरव्यू लिया था और बहुत से लोग हैं जिन्होंने इस सवाल पर बहुत खिल्लियां उड़ाई थी। लेकिन वो सवाल मैंने इसलिए पूछा था कि खेत में गन्ना काट रही एक औरत ने मुझसे ये कहा था और आज फिर मैं वो सवाल आपसे पूछूंगी 5 साल पहले मैंने आपसे कहा था आप थकते क्यों नहीं हैं। आज 5 साल बीत जाने के बाद आप ज्यादा एनर्जेटिक मुझे लग रहे हैं, ज्यादा आपने रैलियां की है, ज्यादा आप काम कर रहे हैं, आप वाकई थकते क्यों नहीं हैं?

पीएम मोदी- पहले जब तक मां जिंदा थी मुझे लगता था कि शायद बायोलॉजिकली मुझे जन्म दिया गया है। मां के जाने के बाद इन सारे अनुभवों को मैं जोड़ कर के देखता हूं तो मैं कन्विंस हो चुका हूं, गलत हो सकता हूं, आलोचक, लेफ्टिस्ट लोग तो मेरी धज्जियां उड़ा देंगे, मेरे बाल नोच लेंगे। मैं कन्विंस हो चुका हूं कि परमात्मा ने मुझे भेजा है। ये ऊर्जा बायोलॉजिकल शरीर से नहीं मिली है, ये ऊर्जा ईश्वर मुझसे कुछ काम लेना है, इसलिए मुझे विधा भी दी है इसलिए मुझे सामर्थ्य भी दिया है इसलिए मुझे नेक दिली भी दिए है, और प्रेरणा भी वही दे रहा है, पुरुषार्थ करने का सामर्थ्य भी दे रहा है और मैं कुछ नहीं हूं, एक इंस्ट्रूमेंट हूं जो ईश्वर ने मेरे रूप में मुझे मुझसे लेना तय किया है और इसलिए मैं जब भी कुछ करता हूं तो मैं मानता हूं शायद ईश्वर मुझसे करवाना चाहता है क्या परिणाम होगा चिंता छोड़ो। मैं सिर्फ ईश्वर को समर्पित हूं दूसरा लेकिन उस ईश्वर को मैं देख नहीं सकता। तो मैं भी एक पुजारी हूं, मैं भी एक भक्त हूं तो मैं 140 करोड़ देशवासियों को ईश्वर का रूप मान कर के चलता हूं। वही मेरे भगवान हैं।

 

रुबिका लियाकत- आप भगवान के बीच में है और भगवान आपके साथ हैं, मां आप में समाई हुई है, आपको खूब सारी शुभकामनाएं 4 जून को फिर हो सकता है आपसे मुलाकात हो, ख्याल रखिएगा।

पीएम मोदी- बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

Popular Speeches

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
India's high-flying ambitions: How policy overhaul doubled nation's MRO footprint from 96 to 166

Media Coverage

India's high-flying ambitions: How policy overhaul doubled nation's MRO footprint from 96 to 166
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Just as the Netherlands is known for tulips, India is known for the lotus: PM Modi in The Hague
May 16, 2026

भारत माता की जय !!!!

इतना प्यार। इतना उत्साह। सच कहूँ, कुछ देर के लिए मैं भूल ही गया था कि मैं नेदरलैंड्स में हूँ। ऐसे लग रहा है जैसे भारत में ही कहीं कोई festival चल रहा है!

वैसे तो The Hague को दुनिया "City of Peace and Justice” के रूप में जानती है। लेकिन आज यहाँ जो माहौल है उसे देखकर लग रहा है कि The Hague, Living Symbol of Indian Friendship बन गया है!

ये दिखाता है कि पासपोर्ट का रंग बदल सकता है, Address भी बदल सकता है, Time Zone भी बदल सकता है लेकिन मां भारती की संतानें कहीं भी रहें ये गर्मजोशी, ये वाइब्रेंसी लाइफ को सेलिब्रेट करने का जज्बा ये हमेशा हमारे साथ रहता है। मैं आप सभी का, इस वॉर्म वेलकम के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। और जब मैं यहाँ प्रवेश कर रहा था तो पूरा महाराष्ट्र, और छत्रपति शिवाजी महाराज, और मेरो प्यारों राजस्थान, और ए फॉर असम ...

साथियों,

आप सभी से मुलाकात के बाद आज मुझे His Majesty The King और Her Majesty The Queen से मिलने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री रॉब येत्तेन से भी विस्तार से कहीं विषयों पर चर्चा होगी।

बीते वर्षों में जब भी मेरी नेदरलैंड्स के leaders से बात हुई है वे हमेशा भारतीय डायस्पोरा की बहुत प्रशंसा करते आए हैं। मतलब की आप सब की प्रशंसा करते हैं। आप नेदरलैंड्स के समाज और यहां की इकॉनॉमी में जो कंट्रीब्यूट कर रहे हैं उस पर हर भारतवासी को गर्व है।

मैं आज इस अवसर पर नेदरलैंड्स की जनता का यहां की सरकार का आभार व्यक्त करता हूं। मैं यहां की जनता को 140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

मैं पहले भी नेदरलैंड्स आता रहा हूँ। मेरे पुराने साथी यहाँ बैठें हैं। और यहां रहने वाले भारतीय समुदाय से भी काफी परिचय रहा है। यहाँ बैठे अनेक परिवारों की कहानी, केवल Migration की कहानी नहीं है। यह एक संस्कृति की आस्था की तमाम संघर्षों के बीच प्रगति की कहानी है।

उस दौर में तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि दो महासागर पार करने के बाद भी भारतीयों की पहचान इतनी जीवंत रहेगी। आपके पूर्वज बहुत कुछ पीछे छोड़कर आए थे लेकिन कुछ चीजें हमेशा उनके साथ रहीं अपनी मिट्टी की खुशबू, अपने त्योहारों की स्मृतियाँ, भजन की धुनें, और अपने पूर्वजों के संस्कार।

साथियों,

मानवता का इतिहास साक्षी है कि समय के साथ अनेक संस्कृतियां मिट गईं। लेकिन भारत का डायवर्स कल्चर, आज भी अपने लोगों के दिलों में धड़कता है। पीढ़ियाँ बदल गईं देश बदल गए परिवेश बदल गए लेकिन परिवार के संस्कार नहीं बदले। अपनापन नहीं बदला। आपने डच भाषा को अपनाया लेकिन अपने पुरखों की भाषा को भी छोड़ा नहीं।

हमारे कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन्स यहां बहुत पॉपुलर है। और इन स्टेशन्स के माध्यम से भारत का संगीत और संस्कृति भी डच फैमिलीज तक पहुंच रहे हैं। द गांधी सेंटर हो या फिर अलग-अलग शहरों के स्कूल आप अपनी संस्कृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचा रहे हैं। ये बहुत सराहनीय है। आप सब अभिनन्दन के अधिकारी हैं।

साथियों,

आज 16 मई है और ये दिन एक और वजह से बहुत विशेष है। आज से 12 वर्ष पहले 16 मई 2014 में कुछ खास हुआ था। 2014 में आज के ही दिन लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे। दशकों बाद भारत में स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार का बनना पक्का हुआ था। एक वो दिन था और एक आज का दिन है कोटि-कोटि भारतवासियों का विश्वास मुझे न रुकने देता है और न थकने देता है। ये नॉन स्टॉप चले ही जा रहा है।

साथियों,

बहुत छोटी आयु से ही मैं देशभक्ति के रंग में रंग गया। आप ही मेरा परिवार बन गया। स्वर्ग सच समष्टि की और चल पड़ा। अहम् से वयं का रास्ता चुन लिया।

और फिर तो आप का सुख ही मेरा सुख बन गया। आपका कल्याण ही मेरा कर्तव्य बन गया। और समर्पित भाव से आप सब की आशीर्वाद से कुछ न कुछ करता रहा। लेकिन जनता जनार्दन का इतना प्यार मिलेगा...ये तो कल्पना में भी नहीं था।

जब पीछे मुड़के देखता हूँ तो 13 वर्ष मुख्यमंत्री के रूप में, 12 वर्ष प्रधानमंत्री का सेवाकाल, डेमोक्रेटिक वर्ल्ड में 25 वर्षों तक करोड़ों-करोड़ वोटर्स का लगातार समर्थन ये मेरे लिए बहुत ही बड़े सौभाग्य की बात है।

मेरे लिए ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है ये आपका आशीर्वाद ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी है। देश का ये प्यार, ये आशीर्वाद मुझे अपने जीवन का पल-पल देशवासियों के सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।

साथियों,

दुनिया का कोई भी देश हो अगर उसे आगे बढ़ना है तो उसे बड़े सपने देखने ही होंगे। आज हमारा भारत भी बहुत बड़े सपने देख रहा है। आज देश कह रहा है - हमें सिर्फ ट्रांसफॉर्मेशन नहीं चाहिए हमें best चाहिए। और हमें बेस्ट ही नहीं हमें fastest चाहिए। और इसलिए जब भारत में Aspirations Unlimited हैं, तो Efforts भी Limitless हो रहे हैं।

जैसे भारत के युवाओं का उदाहरण है। आज भारत का युवा आसमान छूना चाहता है। वो startup शुरू करना चाहता है, वो quality products बनाना चाहता है, वो drone मैन्यूफैक्चर करना चाहता है, वो AI और semiconductor की दुनिया में भारत को आगे ले जाना चाहता है।

इसीलिए ही भारत का Startup ecosystem लगातार मजबूत हो रहा है अब हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्ट अप इकोसिस्टम वाले देश हैं।

और साथियों,

आज भारत की aspiration सिर्फ अपनी सीमाओं तक नहीं है। भारत चाहता है वो Olympics host करे, global manufacturing hub बने,green energy leader बने, और दुनिया का growth engine बने।

बात वही है, Aspirations Unlimited हैं, और हमारे efforts की स्केल भी उतनी ही बड़ी है। record highways कंस्ट्रक्शन, record rail electrification, वंदे भारत जैसी सेमी-हाइस्पीड ट्रेनें, और दुनिया का इतना बड़ा renewable expansion, बड़े से बड़ा लक्ष्य हो, आज का भारत कहता है हम ये लक्ष्य पाकर ही रहेंगे। और हम ये करके दिखा रहे हैं।

साथियों,

आज का भारत, एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है। आपने हाल में देखा होगा कि दुनिया की सबसे बड़ी और सफल AI समिट भारत ने आयोजित की। उससे पहले G-20 की सफल समिट भी भारत ने आयोजित की थी। ये कोई वन टाइम इवेंट नहीं था ये आज के भारत का मिज़ाज बन गया है।

दुनिया का सबसे बड़ा यूनीक आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम भारत ने चलाया। दुनिया के सबसे बड़े फाइनेंशियल इंक्लूजन प्रोग्राम में से एक भारत ने चलाया। जिस स्केल पर भारत डिजिटलाइजेशन कर रहा है, वो अभूतपूर्व है। दुनिया की सबसे बड़ी govt funded हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम् भारत चला रहा है।

और हां, चांद पर भी भारत वहां पहुंचा, जहां पहले कोई नहीं पहुंच पाया था। और नूक्लीयर एनर्जी में दुनिया के सबसे एडवांस्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पर भी आज सफलता के साथ भारत काम कर रहा है।

साथियों,

भारत की जो ये स्केल है, ये हम इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में भी देख रहे हैं। आज भारत में जो सोलर पार्क बन रहे हैं वो विश्व के सबसे बड़े पार्क्स में से एक हैं।

सबसे ऊंची और लंबी टनल्स हों, सबसे ऊंचे और लंबे bridges हों, सबसे लंबे एक्सप्रेसवे हों, सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क हो, सबसे बड़े सिविल एविएशन नेटवर्क हों, सबसे बड़े इलेक्ट्रिफाइड रेल नेटवर्क हों, इनमें से अनेक आज भारत में बन रहे हैं।

बीते सालों में भारत ने धरती से चंद्रमा की दूरी जितनी है, उससे भी 11 गुणा अधिक ऑप्टिकल फाइबर बिछाया है। एक दशक पहले हम मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे आज भारत, दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफेक्चरर है।

साथियों,

ये जो स्पीड और स्केल है इसके अलावा आज के भारत की एक और पहचान है। आज का भारत Innovation powered है। हमारे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है। ये भारतीयों के इनोवेशन का बहुत बड़ा प्रमाण है।

आज पैसा रखना हो- तो डिजिटल वॉलेट है, डॉक्यूमेंट्स रखने हों- तो डिजी लॉकर है। ट्रैवल करना हो- तो डिजी यात्रा है। हेल्थकेयर का लाभ लेना हो- तो डिजिटल हेल्थ आईडी है।

साथियों,

आज भारत में हर महीने twenty Billion से ज्यादा UPI ट्रांजेक्शन होते हैं। यानि, पूरी दुनिया में हो रहे डिजिटल ट्रांजेक्शन में, आधे से ज्यादा, केवल भारत में हो रहें हैं।

और स्टार्ट अप तो, आज भारत के युवाओं का मिज़ाज बन चुका है। बारह साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्ट-अप्स थे, आज ये संख्या बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गई है। और स्टार्टअप के दुनिया में भी, 2014 में भारत में सिर्फ चार यूनिकॉर्न थे। आज भारत में करीब सवा सौ एक्टिव यूनिकॉर्न हैं। 2025 में ही, करीब 44 हजार और नए startups रजिस्टर हुए हैं। आज AI, डिफेंस और स्पेस सेक्टर में हमारे स्टार्ट अप्स बहुत ही शानदार काम कर रहे हैं।

समय के साथ, रिसर्च और इनोवेशन का ये कल्चर और विराट होता जा रहा है। पिछले वर्ष ही भारत में सवा लाख से अधिक पेटेंट्स फाइल किए गए हैं।

साथियों,

भारत चिप मेकिंग में, सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी बड़े कदम उठा रहा है। अभी भारत में 12 सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर काम चल रहा है। इनमें से दो प्लांट्स में प्रोडक्शन भी शुरु हो चुका है। यानि अब चिप भी, डिजाडन्ड इन इंडिया, मेड इन इंडिया होगी।

साथियों,

भारत की ये aspiration driven जर्नी, हमारी डेमोक्रेसी को भी सशक्त कर रही है। जब लोगों के सपने सच होते हैं तो लोकतंत्र पर उनका भरोसा भी मजबूत होता है।

साथियों,

मैं आपको हाल के विधानसभा चुनावों का उदाहरण देता हूं। असम, बंगाल, केरलम्, तमिलनाडु और पुडुचेरी में इस बार Eighty से Ninety Percent तक वोटिंग हुई। इसमें भी वीमेन पार्टिसिपेशन बहुत ज्यादा बढ़ी है। ये हर राज्य का ट्रेंड है।

आज भारत में वोटर उत्साहित हैं, आप भी उत्साहित हैं। साथियों, हमें गर्व होता है की हर साल वोटिंग के रिकॉर्ड टूट रहे हैं।

साथियों,

भारत में 90 करोड़ से अधिक वोटर रजिस्टर्ड हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में sixty four करोड़ लोगों ने वोट डाला। यानि यूरोपियन यूनियन की टोटल पॉपुलेशन से भी ज्यादा भारतीयों ने वोटिंग की। भारत अपने हर सिटिजन की डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन को वैल्यू करता है। और मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में, ये हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है।

साथियों,

भारत जब सफल होता है तो पूरी मानवता को उसका फायदा होता है। लेकिन आज मानवता के सामने अनेक बड़ी चुनौतियां भी हैं। आज की दुनिया, किस तरह नई-नई चुनौतियों से जूझ रही है।

पहले कोरोना आया फिर युद्ध होने शुरू हुए और अब आज की एनर्जी क्राइसिस है। ये दशक, दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बन रहा है।

हम सभी देख रहे हैं। अगर, ये स्थितियां तेजी से नहीं बदली गईं तो बीते अनेक दशकों की उपलब्धियों पर पानी फिर जाएगा। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी फिर से गरीबी के दलदल में चली जाएगी।

साथियों,

ऐसी वैश्विक परिस्थितियों में आज दुनिया resilient supply chain की बात कर रही है। और तब भारत और नेदरलैंड्स मिलकर, एक trusted, transparent और future-ready supply chain बनाने में जुटे हैं।

एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर वॉटर सिक्योरिटी तक नेदरलैंड्स और भारत, मिलकर काम कर रहे हैं। ग्रीन हाईड्रोजन को लेकर हमारा को-ऑपरेशन बहुत महत्वपूर्ण है। और भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच जो ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है इससे भारत और नेदरलैंड्स की साझेदारी और मजबूत होगी।

और इसका लाभ आप सभी को होगा। भारतीय businesses के लिए Europe में प्रवेश का natural gateway Netherlands बनेगा। और इस journey में हमारा diaspora trusted bridge बन सकता है। और में इसलिए कहता हूँ की diaspora India की ambition को भी समझता है और Europe के standards को भी जानता हैं। इससे यहां बसे भारतीयों को भी भारत के high-quality products के अधिक अवसर मिलेंगे।

साथियों,

नेदरलैंड्स ट्यूलिप की धरती है, और यहां के खूबसूरत ट्यूलिप्स को देखने के लिए दुनिया भर के लोग यहां आते हैं। भारत में भी, दुनिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन्स में से एक हमारे जम्मू-कश्मीर में है, श्रीनगर में है।

और जिस तरह नेदरलैंड्स को ट्यूलिप्स के लिए जाना जाता है, वैसे ही भारत, लोटस यानि कमल के लिए जाना जाता है।

साथियों,

ट्यूलिप और कमल दोनों फूल हमें बताते हैं कि जड़ें चाहे पानी में हों या धरती पर अगर सही पोषण मिले तो सुंदरता भी मिलती है और स्ट्रेंथ भी आ जाती है। यही भारत और नेदरलैंड्स के बीच Partnership का भी आधार है।

साथियों,

हमारे बीच दोस्ती की एक और कड़ी है जिसकी उतनी चर्चा नहीं होती और वो है स्पोर्ट्स। हम दोनों देश, स्पोर्ट्स के क्षेत्र में बहुत कुछ मिलकर कर रहे हैं।

अब जैसे क्रिकेट है । नेदरलैंड्स की क्रिकेट में भारतीय समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है। अभी भारत में टी-20 वर्ल्ड कप हुआ उसमें नेदरलैंड्स की टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया। भारत वर्ल्ड कप चैंपियन है लेकिन भारत की टीम को भी, नेदरलैंड्स की टीम ने बहुत कड़ी टक्कर दी थी।

जब हम तेजा निदामनुरु और विक्रमजीत सिंह को नेदरलैंड्स की जर्सी में देखते हैं, या फिर, जब आर्यन दत्त जैसे युवा खिलाड़ी, डच क्रिकेट के फ्यूचर में कंट्रीब्यूट करते हैं तो हम सभी को बहुत अच्छा लगता है।

साथियों,

जैसे क्रिकेट में भारतीयों का योगदान है वैसे ही भारत की हॉकी में नेदरलैंड्स का भी बड़ा कंट्रीब्यूशन है। भारत की हॉकी को और अधिक निखारने में डच coaches की भी मेहनत रही है। हमारी वीमेन हॉकी टीम, बीते कुछ समय से शानदार परफॉर्मेंस कर रही है। इसमें, कोच मरीन का अहम रोल है।

और इस वर्ष तो हॉकी वर्ल्ड कप का होस्ट, नेदरलैंड्स भी है। और आप सभी को भारत के मैच देखने तो जाना ही जाना है। ये बात पक्की है, कि वर्ल्ड कप जो भी जीते, इतना पक्का है कि भारत और नेदरलैंड्स की दोस्ती ज़रूर जीतेगी।

साथियों,

भारत और नेदरलैंड्स के बीच के रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप, इस पार्टनरशिप के जीवंत सेतु हैं, जीवंत भी हैं। इसलिए, भारत सरकार ने सूरीनामी हिंदुस्तानी समाज के लिए, OCI Card की Eligibility चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी है।

साथियों,

21वीं सदी का भारत अवसरों की भूमि है। भारत technology-driven भी है और humanity-driven भी। भारत जितना ancient है उतना ही modern बन रहा है।

इसलिए ये समय भारत में आपके पुरखों के गांव से जुड़ने का भी है, और विकसित भारत की जर्नी में भागीदारी का भी है। मैं नेदरलैंड्स में भारतीय समुदाय के सभी साथियों से कहूंगा आप भारत में ज्यादा से ज्यादा सहयोग बढ़ाएं इससे भारत का सामर्थ्य भी बढ़ेगा और आपके इन्वेस्टमेंट्स पर रिटर्न भी ज्यादा मिलेगा और ये, मोदी की गारंटी है।

इतनी बड़े तादाद में आप सब आये। आप सब के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मुझे बहुत ख़ुशी हुवी। इसी भाव के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

इतने गर्मजोशी भरे वेलकम के लिए, फिर से आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद !

भारत माता की जय !