PM Modi's Interview to DD News

Published By : Admin | May 20, 2024 | 10:03 IST

रिपोर्टर: चुनाव से पहले ही जिनके तीसरे टर्म की बात हो रही है लोगों को इंतजार है ऐसे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हमारे साथ हैं प्रधानमंत्री जी बेहद ही स्वागत है..

पीएम मोदी: जय जगन्नाथ

 

रिपोर्टर: जय जगन्नाथ प्रधानमंत्री जी, सुबह के 8 बजे हैं इतिहास में कभी ऐसा देखने को नहीं मिला कि कोई प्रधानमंत्री सुबह होते ही जनता के बीच पहुंच जाए, पुरी में हम हैं..

पीएम मोदी: मैं जब सुबह 7:00 बजे यहां जगन्नाथ जी के दर्शन करने के लिए जा रहा था तब से मैं हैरान था कि सुबह 6:30- 7:00 बजे से हजारों की तादाद में लोग यहां खड़े थे, मैं देश की जनता का बहुत ही ऋणी हूं, मैं उड़ीसा की जनता का बहुत- बहुत आभारी हूं और खास करके पुरी ने पूरा मन भर दिया आज, मैं पुरी को सिर झुकाकर के नमन करता हूं।

 

रिपोर्टर: प्रधानमंत्री जी पुरी में हम खड़े हुए हैं उड़ीसा में 25 साल का यहां का शासन जिनको आप सीधे चुनौती दे रहे हैं, दूसरी तरफ बंगाल भी है और साथ में बिहार भी लगता है, इस बार पांच चरण के चुनाव के बीच क्या मूड लग रहा है जनता का?

पीएम मोदी: चार चरण के चुनाव इंडी अलायंस पूरी तरह अस्त हो चुका है, अब जो चरण शुरू हुए हैं वो हमें 400 पार जाने की मजबूती दे रहे हैं। आज भी मैं मतदाताओं से कहूंगा भारी मतदान करें, जी-भर करके मतदान करें, देश के लिए मतदान करें।

 

रिपोर्टर: प्रधानमंत्री जी हम देख रहे लगातार लोग आपको कैमरों में कैद करना चाह रहे हैं आपकी एक झलक के लिए, नारी शक्ति जिसकी आप सबसे ज्यादा बात कर रहे हैं वाराणसी में हमने देखा एक बूढ़ी दादी अपने चार साल के पोते को कंधे पर लेकर आईं और कहा कि मोदी इनके दादू हैं और जब मैंने उनसे पूछा उन्होंने कहा मोदी तो भगवान हैं, ये आपको लगता है कि काफी ज्यादा भार आपके ऊपर डालता है ऐसी भावनाएं?

पीएम मोदी: जब मुझे इस प्रकार की घटनाओं का पता चलता है या मैं भी जब कभी रास्ते में चलता हूं तो ये अनुभव करता हूं, जैसे बच्ची देखिए हाथ जोड़ करके बैठी है, ये चीजें किसी भी व्यक्ति को भावुक करने वाली हैं और पॉलिटिशियन के जीवन में शायद ऐसा रेयर हो सकता है कि इतना प्यार, इतना आशीर्वाद और मैं देख रहा हूं कि भारत की नारी शक्ति आने वाले 25 साल में भारत की गति के लिए दो मैं बड़े निर्णायक फैक्टर देखता हूं, एक हिंदुस्तान का पूर्वी हिस्सा यानी उड़ीसा, हमारा झारखंड, हमारा बिहार, हमारा बंगाल ये हिंदुस्तान का पूर्वी इलाका है या पूर्वी उत्तर प्रदेश ये एक बहुत बड़ा फैक्टर बनेगा जो ग्रोथ इंजन बनेगा। दूसरा, मेरे देश की नारी शक्ति, 50 प्रतिशत नारी शक्ति उनका जिस प्रकार से सामर्थ्य निकल करके आ रहा है जब मैं कहता हूं मैं तीन करोड़ लखपति दीदी बनाऊंगा तो मुझे लगता है कि मुझे कुछ नहीं करना पड़ेगा सिर्फ अवसर देने हैं और मेरे गांव की बहनें लखपति दीदी बनके रहेगी ये मेरा विश्वास है जिस देश में इतनी सामर्थ्यवान मातृ शक्ति हो मैं गुजरात से आया हूं हमारा पूरा जो डेयरी उद्योग है आज अमूल जो दुनिया में इतना मशहूर है उसकी पूरी ताकत महिलाएं हैं, पूरा उद्योग महिलाएं चलाती हैं, आप लिज्जत पापड़ देख लीजिए दुनिया में ब्रांड है लिज्जत पापड़ पूरी तरह महिलाओं के द्वारा ड्रिवन है, इसका मतलब ये हुआ कि हमारे देश की महिलाओं में एक अभूतपूर्व सामर्थ्य है और अगर हम हमारी मातृ शक्ति को, हमारी बहनों को अवसर दें तो देश की इकोनॉमी को एक नई ऊर्जा मिलेगी, नया नेतृत्व मिलेगा और इसलिए मैंने जी-20 में आग्रह रखा है वूमेन लेड डेवलपमेंट।

 

रिपोर्टर: मोदी जी ढाई दशक के अपने करियर में मैंने कभी नहीं देखा कि किसी प्रधानमंत्री के चुनाव से पहले ही 3.0 की बात होने लगे, तीसरे टर्म की बात होने लगे अब सस्पेंस है कि जब आप वापस आएंगे तो क्या आप एक रिवोल्यूशनरी, क्रांति लेकर आने वाले हैं?

पीएम मोदी: ज्यादातर राजनेता सत्ता, पद, प्रतिष्ठा उसी के इर्द-गिर्द खोए रहते हैं, मैं उससे कोसों दूर हूं मैं मानता हूं कि पद एक कार्यभार है, पद ये प्रतिष्ठा के लिए नहीं होता है जीवन खपाना होता है और ये चीजें लास्ट मोमेंट नहीं करनी होती है, बहुत पहले से तैयारी करनी चाहिए इतना बड़ा देश है, उसकी आवश्यकताओं को समझना चाहिए उसके आधार पर नीतियां बनानी चाहिए, रणनीति बनानी चाहिए, निर्णय करने चाहिए और तब जाकर के फैसले होते हैं, परिणाम मिलते हैं और जब नियत साफ होती है ना तो नतीजे भी शानदार मिलते हैं।

 

रिपोर्टर: अंतिम सवाल है मेरा प्रधानमंत्री जी आपसे जब- जब हमने देखा 2014 में भी 2019 में भी आपके खिलाफ जब भी कोई ऐसी भाषा का इस्तेमाल हुआ निचले स्तर पर जाकर जनता ने और ज्यादा भरपूर प्यार और आशीर्वाद दिया, इस बार भी कोई आपको तानाशाह कह रहा है, कोई कह रहा है कि संविधान खत्म कर देंगे, कोई कह रहा है लोकतंत्र और यहां तक कि कांग्रेस कह रही है एक चाय वाला प्रधानमंत्री इसलिए बना क्योंकि हमने देश में ऐसा लोकतंत्र बनाया।

पीएम मोदी: मैं डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का, मैं संविधान सभा का, उस समय सभी महापुरुषों का सिर झुका कर के प्रणाम करता हूं कि उन्होंने देश को ऐसा संविधान दिया कि एक चाय वाले का बेटा, एक गरीब मां का बेटा और मेरे देश के लोकतंत्र की ताकत देखिए कि उसने उसे प्रधानमंत्री बना दिया। मेरे लिए तो संविधान, शासन चलाने का सबसे बड़ा धर्म ग्रंथ है, मेरे लिए एक राजनेता के रूप में, एक पॉलिटिकल लीडर के रूप में, एक जनप्रतिनिधि के रूप में, संविधान मेरा मार्गदर्शक है और मैं उसका पुजारी हूं और ये पूजा मैं आज से नहीं कर रहा हूं जब संविधान के 60 साल हुए थे तो मैं पहला व्यक्ति था देश में जिसने हाथी पर संविधान रखा और संविधान की यात्रा निकाली और मोदी सीएम था पैदल चल रहा था, संविधान को अगर किसी ने बर्बाद किया है इस परिवार ने किया है, खुद के उपयोग के लिए किया है, सबसे पहले जब पंडित नेहरू जी प्रधानमंत्री बने कुछ ही वर्षों में उन्होंने संविधान में परिवर्तन करके फ्रीडम ऑफ स्पीच को रिस्ट्रिक्ट करने का काम किया, उसके बाद उनकी बेटी, उनकी बेटी ने उनको जब न्यायालय ने एमपी के रूप में घोषित कर दिया कि आप योग्यता नहीं रखती हो तो उन्होंने संविधान बदल दिया, देश की जनता ने मांग की आपको छोड़ देना चाहिए तो उन्होंने इमरजेंसी लगा करके संविधान के लीरे- लीरे उड़ा दिए और वो बैठी रहीं, उसके बाद उनके पोते बेटे आए उन्होंने शाह बानो का सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट उसको संविधान में इधर- उधर कर- करके उलट दिया, लाखों माताओं- बहनों के अधिकार को छीन लिया, उसके बाद उन्होंने मीडिया को कंट्रोल करने के लिए एक बिल ले आए, उसके बाद उनके शहजादे जिनके पास कोई सत्ता नहीं कि एमपी के सिवाय कुछ है नहीं, उन्होंने संविधान के द्वारा बनी हुई कैबिनेट उस कैबिनेट के निर्णय को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर के लीरे- लीरे उड़ा दिए और कैबिनेट को अपना निर्णय रिवर्स करना पड़ा, संविधान का इससे बड़ा अपमान शायद हिंदुस्तान में किसी ने नहीं किया होगा जिसमें इन परिवार के चारों पीढ़ी ने किया है और इसलिए दूसरा ये कांग्रेस पार्टी के संविधान को नहीं मानते हैं, सीताराम केसरी को बाथरूम में बंद कर दिया था कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष ने, उठाकर के फुटपाथ पर रात को फेंक दिया था और पूरी पार्टी को कब्जा कर लिया था और इसलिए मैं समझता हूं कि कांग्रेस के मुंह में संविधान शब्द शोभा नहीं देता है।

 

रिपोर्टर: अंत में प्रधानमंत्री जी आप अभी- अभी भगवान महाप्रभु जगन्नाथ जी के दर्शन करके आए हैं आशीर्वाद आपने उनका लिया है आप जिन शहजादे की बात कर रहे हैं वो कह रहे हैं कि धर्म पर अगर आप उनसे बहस करेंगे तो आप जीत नहीं पाएंगे वो चुनौती दे रहे हैं।

पीएम मोदी: मैं उनके धर्म के ज्ञान के विषय में जानता नहीं हूं कुछ और मैं अपने आप को कभी ज्ञानी कहता नहीं हूं मुझे तो धर्म से बहुत कुछ सीखना है एक अगाध समंदर है शायद मैं सात जन्म उसमें डुबकी लगाता रहूं तो भी मैं पूरा ज्ञान प्राप्त नहीं करूंगा ये उसका सामर्थ्य, उसका विस्तार, उसकी विरासत इतनी बड़ी है कि मैं नहीं कह सकता हूं कि वे इतना जानते होंगे कि नहीं जानते होंगे उनका मेरा व्यक्तिगत कभी चर्चा हुई नहीं है और मीडिया में भी कभी धर्म पर उनका साक्षात्कार मैंने सुना नहीं है तो मैं ये तो नहीं कह सकता हूं मैं मानता हूं मैं एक विद्यार्थी हूं मुझे बहुत कुछ सीखना है।

 

रिपोर्टर: तो अब 400 पार..

पीएम मोदी: 400 पार देश की जनता का संकल्प है, आबालवृद्ध का संपूर्ण संकल्प है, देश के गांव- गांव का संकल्प है, देश के गरीब का, देश के युवा का, देश के किसान का, देश की नारी का, इन सब का संकल्प है कि इस बार देश 400 पार के साथ नई सरकार के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

 

रिपोर्टर: बहुत-बहुत धन्यवाद

पीएम मोदी: बहुत-बहुत धन्यवाद, दूरदर्शन के दर्शकों को मेरा जय जगन्नाथ, भगवान जगन्नाथ की धरती से जय जगन्नाथ और सबको मेरी बहुत शुभकामनाएं।

 

रिपोर्टर: बहुत- बहुत शुक्रिया आपने अपने व्यस्त कार्यक्रम और इतनी गर्मी से समय निकाला। बहुत- बहुत शुक्रिया, बहुत-बहुत शुक्रिया।

पीएम मोदी: थैंक्यू..थैंक्यू

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Today, the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust: PM Modi at G7 Summit in Evian, France
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।