PM’s address at BRICS Plenary Session

Published By : Admin | July 9, 2015 | 18:07 IST
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PM Modi speaks at the BRICS Plenary Session
PM Modi complements BRICS Nations for their active support and participation during International Day of Yoga on 21st June
We must speak in one voice, without any distinction and discrimination between groups and countries, sponsors and targets: PM
Together we can mitigate any challenge better if we focus on reforms of the UN and the UN Security Council. This must be done soon: PM
Climate change is one of our foremost global challenges. We need to focus on renewable energy & energy efficiency: PM Modi
BRICS is an important pillar of hope in the World filled with political security and economic challenges: PM Modi

Thank You Chairman,

• मैं एक बार फिर राष्ट्रपति Vladimir Putin जी को उनके आतिथ्य सत्कार और उत्तम व्यवस्था के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूं। हमें इस नए क्षेत्र में आने का और उसे देखने का उन्होंiने हमें अवसर दिया है।

• गत वर्ष के दौरान राष्ट्रपति Rousseff के उत्तम नेतृत्व के लिए हृदय से सराहना करता हूं। पिछले साल BRICS ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

• मैं अपने BRICS साथियों को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को एक वैश्विक सफलता बनाने में योगदान के लिए हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ। ये दिवस 193 देशों में और सैकडों शहरो में मानया गया।

• BRICS इस राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों से भरे विश्व में उम्मीद का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है।

• क्योंकि BRICS का कार्य केवल BRICS के देशों के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के कल्याण के लिए भी है, विशेषकर विकासशील देशों के लिए।

• हम लोगों की चर्चाएं काफी सार्थक रहीं और हमने पहले session और lunch के दौरान कई विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया है।

• विश्व के सामने जो चुनौतियाँ हैं वह सभी देशों के लिए हैं। इस लिए सभी बड़े देशों के बीच consensus, collaboration और cooperation अवाश्यक है। और सबको international rules और norms का पालन करना चाहिए।



• हम United Nations के 70वें साल में मिल रहे हैं । इस साल विकास और क्लाईमेट चेंज पर विश्व को मुख्य या ठोस निर्णय लेने हैं ।

• किसी प्रकार की भी चुनौती हो, आर्थिक सामाजिक या राजनैतिक हम इन्हे सुलझाने में और अधिक सफल होंगे । जब हम यूनाईटेड नेशन्स और उसके Security Council में निर्धारित समय पर रिर्फोमस पूरा करें । इस वैश्विक संस्थान को 21वीं सदी के लिए अगर उपयोगी होना है तो इसकी रिफोर्मस अनिवार्य है और इसकी जल्द से जल्द करने की आवश्यकता है।

• शांति और स्थिरता सामाजिक और आर्थिक विकास की नीव है। हमारा स्वयं का, और विश्व के प्रति यह दायित्व है कि हम अपने समय की मुख्य सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद और उग्रवाद, पर प्रभावकारी ढंग से कार्रवाई करें।

• हमे एक हो कर इसके विरूद्ध लड़ना चाहिए, बिना समूहों और देशों, sponsors तथा targeted countries के बीच बिना विभिन्नता किए हुए। यह हमे BRICS में, United Nations और उसकी Security Council तथा अन्य Committees में भी करना चाहिए।

• हमें United Nations के समक्ष 2015 के बाद के Development Agenda में गरीबी निवारण मुख्य एजेंडा होना चाहिए।

• आर्थिक क्षेत्र में BRICS की सफलताएं सराहनीय हैं। इसमें New Development Bank, the Contingency Reserve Fund, Export Credit Insurance, Financing for Innovation और नये प्रस्ताव Customs Cooperation और Reinsurance Pool शामिल हैं।

• BRICS Economic Cooperation Strategy BRICS की प्रगति में एक milestone है। इसमें कई सामाजिक पहल भी शामिल हैं। मुझे खुशी है कि Fortalza में दिए गए भारत के प्रस्तावों को इसमें शामिल किया गया है। आर्थिक सहयोग पर हमारे Restricted Session में मैंने Annual BRICS Trade fair, BRICS Railways Research Center और Supreme Audit Institutions के बीच BRICS सहयोग हेतु सुझाव दिया था।

• Climate Change हमारे सामने आ रही बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक है। BRICS देशों को Renewable Energy को सस्ती और सभी के लिए उपलब्ध हो सकने के लायक बनाने के लिए और Energy Efficiency Technologies पर एक बड़े कार्यक्रम की शुरूआत करना चाहिए। यही Clean Energy को अपनाने का रास्ता है। मैं चाहूंगा कि New Development Bank द्वारा Funded पहला बड़ा project Clean Energy में हो और यह बहुत अच्छा होगाए यदि हमारे पांचों देशों के लिए एक साथ किया जाये।

• इस वर्ष के अंत तक, BRICS देशों को अधिक समन्वय स्थापित करने की जरूरत है; ताकि पैरिस में सार्थक और महत्वाकांक्षी समझौता सुनिश्चित किया जा सके।

• हम BRICS Digital Initiative पर भी विचार कर सकते हैं, जिसमें विकासशील देशों के लिए एक नए विकास के विकल्प के लिए हमारी क्षमताओं का उपयोग किया जा सके। हम विकास के क्षेत्र में Digital Technology का प्रयोग करते हुए Delivery of Services को अधिक प्रभावकारी बना सकते हैं और Financial Inclusion तथा Empowerment को बढ़ा सकते हैं।

• पिछले साल, मैंने युवाओं के प्रति ध्यान देने की बात कही थी। BRICS देशों को अपने देशों तथा विकासशील विश्व में महिला के सशक्तिकरण हेतु पहल करने पर भी ध्यान करना होगा।

Excellencies,

• हमने migration के मुद्दे पर बातचीत की थी। एक तरफ migrations, विश्व में हो रहे Demographic Trends को देखते हुए, वैश्विक अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने का और उसमें संतुलन लाने का स्त्रोत बन सकता है।

• दूसरी ओर संघर्षों और अभाव के कारण पैदा हुए migration के कुछ humanitarian मुददे भी हैं। United Nations को इस पर गहराई से विचार करना चाहिए।



• हम BRICS Standing Working Group on Migration स्थापित करने के लिए BRICS Heads of Migration Services की पहली बैठक के आयोजन की पहल के लिए रूस का स्वागत करते हैं।

• कृषि क्षेत्र में हम सभी समान रूप से मजबूत हैं और कई क्षेत्रों में तो विश्व में प्रथम स्थान पर भी हैं। मेरा यह सुझाव है कि BRICS Agriculture Research Centre की स्थापना की जाए, जो संपूर्ण विश्व के लिए एक बड़ा उपहार होगा।

• इसी प्रकार से हम एक व्यवस्था बनाने पर विचार कर सकते हैं जिसमें हम कृषि या Land rich देशों में उत्पादन तथा इफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर अतिरिक्त उत्पादित खाद्यान के हिस्से को खाद्यान की कमी वाले देशों में भेज सकते हैं। यह दूसरा महत्वपूर्ण कदम होगा।

• जल की कमी भविष्य की एक महत्वपूर्ण चुनौती है। विकासशील देशों में जल की उपलब्धता, उसका बेहतर प्रयोग, पीने के पानी की व्यवस्था मुख्य चुनौतियां हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम सभी देशों का अच्छा अनुभव तथा expertise है जिससे हम अपने देशों तथा अन्य देशों में बदलाव ला सकते हैं।

• मेरा यह भी सुझाव है कि एक Forum बनाया जाए जो हमारे प्रांतों या राज्यों और हमारे local governments को आपस में जोड़े। वे एक-दूसरे से काफी कुछ सीख सकते हैं। शहरीकरण एक बड़ी चुनौती है, परन्तु आने वाले दशकों में यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। हम शहरों के बीच conversation and cooperation की प्रक्रिया शुरू कर एक-दूसरे से काफी कुछ सीख सकते हैं।

• कुछ BRICS सदस्य Sports Powerhouses हैं। हमें BRICS Sports Council की स्थापना कर किसी एक खेल में वार्षिक तौर पर BRICS Sports Meet का आयोजन करना चाहिए। इसकी शुरूआत के रूप में हम अगले वर्ष भारत में Football Meet का आयोजन कर सकते हैं। यह ऐसा खेल है जो सभी BRICS देशों में लोकप्रिय है।

• अंत में, फिर से President Putin को एक सफल शिखर सम्मेलन के लिए बधाई देता हूं मुझे विश्वास है कि मैं जो प्रतिबद्धता और संकल्प BRICS सदस्यों के बीच देख रहा हूं, इससे BRICS एक नई ऊंचाईयों को छूता रहेगा और हम विश्व कल्याण के लिए बहुत कुछ कर सकेंगे।

अगले साल मुझे भारत में आपका स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त होगा । भारत में अगले BRICS के लिए मैं आपको आमंत्रित करता हूं।

• मैं अपनी बात पूर्ण करने से पहले, आज अगले सत्र के लिए एक अच्छा विषय आया था कि हम BRICS Film Festival को develop करें। मेंरा एक और सुझाव है कि BRICS के लिए हम Film Award भी अगर कर सकते हैं तो एक प्रकार से मैं समझता हूँ कि उसे काफी हम Promote कर सकते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में Film making Cultural activity का हिस्सा भी बन सकता है जो एक दूसरे को जानने पहचानने का कारण भी बन सकता है। तो उस पर भी हम विचार कर सकते हैं, मैं फिर एक बार President Putin का और आप सब का आभार व्यक्त करता हूँ, धन्यवाद।

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Text of PM’s address at the Krishnaguru Eknaam Akhand Kirtan for World Peace
February 03, 2023
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“Krishnaguru ji propagated ancient Indian traditions of knowledge, service and humanity”
“Eknaam Akhanda Kirtan is making the world familiar with the heritage and spiritual consciousness of the Northeast”
“There has been an ancient tradition of organizing such events on a period of 12 years”
“Priority for the deprived is key guiding force for us today”
“50 tourist destination will be developed through special campaign”
“Gamosa’s attraction and demand have increased in the country in last 8-9 years”
“In order to make the income of women a means of their empowerment, ‘Mahila Samman Saving Certificate’ scheme has also been started”
“The life force of the country's welfare schemes are social energy and public participation”
“Coarse grains have now been given a new identity - Shri Anna”

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय कृष्णगुरु !

जय जयते परम कृष्णगुरु ईश्वर !.

कृष्णगुरू सेवाश्रम में जुटे आप सभी संतों-मनीषियों और भक्तों को मेरा सादर प्रणाम। कृष्णगुरू एकनाम अखंड कीर्तन का ये आयोजन पिछले एक महीने से चल रहा है। मुझे खुशी है कि ज्ञान, सेवा और मानवता की जिस प्राचीन भारतीय परंपरा को कृष्णगुरु जी ने आगे बढ़ाया, वो आज भी निरंतर गतिमान है। गुरूकृष्ण प्रेमानंद प्रभु जी और उनके सहयोग के आशीर्वाद से और कृष्णगुरू के भक्तों के प्रयास से इस आयोजन में वो दिव्यता साफ दिखाई दे रही है। मेरी इच्छा थी कि मैं इस अवसर पर असम आकर आप सबके साथ इस कार्यक्रम में शामिल होऊं! मैंने कृष्णगुरु जी की पावन तपोस्थली पर आने का पहले भी कई बार प्रयास किया है। लेकिन शायद मेरे प्रयासों में कोई कमी रह गई कि चाहकर के भी मैं अब तक वहां नहीं आ पाया। मेरी कामना है कि कृष्णगुरु का आशीर्वाद मुझे ये अवसर दे कि मैं आने वाले समय में वहाँ आकर आप सभी को नमन करूँ, आपके दर्शन करूं।

साथियों,

कृष्णगुरु जी ने विश्व शांति के लिए हर 12 वर्ष में 1 मास के अखंड नामजप और कीर्तन का अनुष्ठान शुरू किया था। हमारे देश में तो 12 वर्ष की अवधि पर इस तरह के आयोजनों की प्राचीन परंपरा रही है। और इन आयोजनों का मुख्य भाव रहा है- कर्तव्य I ये समारोह, व्यक्ति में, समाज में, कर्तव्य बोध को पुनर्जीवित करते थे। इन आयोजनों में पूरे देश के लोग एक साथ एकत्रित होते थे। पिछले 12 वर्षों में जो कुछ भी बीते समय में हुआ है, उसकी समीक्षा होती थी, वर्तमान का मूल्यांकन होता था, और भविष्य की रूपरेखा तय की जाती थी। हर 12 वर्ष पर कुम्भ की परंपरा भी इसका एक सशक्त उदाहरण रहा है। 2019 में ही असम के लोगों ने ब्रह्मपुत्र नदी में पुष्करम समारोह का सफल आयोजन किया था। अब फिर से ब्रह्मपुत्र नदी पर ये आयोजन 12वें साल में ही होगा। तमिलनाडु के कुंभकोणम में महामाहम पर्व भी 12 वर्ष में मनाया जाता है। भगवान बाहुबली का महा-मस्तकाभिषेक ये भी 12 साल पर ही होता है। ये भी संयोग है कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर खिलने वाला नील कुरुंजी पुष्प भी हर 12 साल में ही उगता है। 12 वर्ष पर हो रहा कृष्णगुरु एकनाम अखंड कीर्तन भी ऐसी ही सशक्त परंपरा का सृजन कर रहा है। ये कीर्तन, पूर्वोत्तर की विरासत से, यहाँ की आध्यात्मिक चेतना से विश्व को परिचित करा रहा है। मैं आप सभी को इस आयोजन के लिए अनेकों-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ।

साथियों,

कृष्णगुरु जी की विलक्षण प्रतिभा, उनका आध्यात्मिक बोध, उनसे जुड़ी हैरान कर देने वाली घटनाएं, हम सभी को निरंतर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हमें सिखाया है कि कोई भी काम, कोई भी व्यक्ति ना छोटा होता है ना बड़ा होता है। बीते 8-9 वर्षों में देश ने इसी भावना से, सबके साथ से सबके विकास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया है। आज विकास की दौड़ में जो जितना पीछे है, देश के लिए वो उतनी ही पहली प्राथमिकता है। यानि जो वंचित है, उसे देश आज वरीयता दे रहा है, वंचितों को वरीयता। असम हो, हमारा नॉर्थ ईस्ट हो, वो भी दशकों तक विकास के कनेक्टिविटी से वंचित रहा था। आज देश असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को वरीयता दे रहा है, प्राथमिकता दे रहा है।

इस बार के बजट में भी देश के इन प्रयासों की, और हमारे भविष्य की मजबूत झलक दिखाई दी है। पूर्वोत्तर की इकॉनमी और प्रगति में पर्यटन की एक बड़ी भूमिका है। इस बार के बजट में पर्यटन से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को विशेष अभियान चलाकर विकसित किया जाएगा। इनके लिए आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा, वर्चुअल connectivity को बेहतर किया जाएगा, टूरिस्ट सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। पूर्वोत्तर और असम को इन विकास कार्यों का बड़ा लाभ मिलेगा। वैसे आज इस आयोजन में जुटे आप सभी संतों-विद्वानों को मैं एक और जानकारी देना चाहता हूं। आप सबने भी गंगा विलास क्रूज़ के बारे में सुना होगा। गंगा विलास क्रूज़ दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज़ है। इस पर बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी सफर कर रहे हैं। बनारस से बिहार में पटना, बक्सर, मुंगेर होते हुये ये क्रूज़ बंगाल में कोलकाता से आगे तक की यात्रा करते हुए बांग्लादेश पहुंच चुका है। कुछ समय बाद ये क्रूज असम पहुँचने वाला है। इसमें सवार पर्यटक इन जगहों को नदियों के जरिए विस्तार से जान रहे हैं, वहाँ की संस्कृति को जी रहे हैं। और हम तो जानते है भारत की सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी अहमियत, सबसे बड़ा मूल्यवान खजाना हमारे नदी, तटों पर ही है क्योंकि हमारी पूरी संस्कृति की विकास यात्रा नदी, तटों से जुड़ी हुई है। मुझे विश्वास है, असमिया संस्कृति और खूबसूरती भी गंगा विलास के जरिए दुनिया तक एक नए तरीके से पहुंचेगी।

साथियों,

कृष्णगुरु सेवाश्रम, विभिन्न संस्थाओं के जरिए पारंपरिक शिल्प और कौशल से जुड़े लोगों के कल्याण के लिए भी काम करता है। बीते वर्षों में पूर्वोत्तर के पारंपरिक कौशल को नई पहचान देकर ग्लोबल मार्केट में जोड़ने की दिशा में देश ने ऐतिहासिक काम किए हैं। आज असम की आर्ट, असम के लोगों के स्किल, यहाँ के बैम्बू प्रॉडक्ट्स के बारे में पूरे देश और दुनिया में लोग जान रहे हैं, उन्हें पसंद कर रहे हैं। आपको ये भी याद होगा कि पहले बैम्बू को पेड़ों की कैटेगरी में रखकर इसके काटने पर कानूनी रोक लग गई थी। हमने इस कानून को बदला, गुलामी के कालखंड का कानून था। बैम्बू को घास की कैटेगरी में रखकर पारंपरिक रोजगार के लिए सभी रास्ते खोल दिये। अब इस तरह के पारंपरिक कौशल विकास के लिए, इन प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी और पहुँच बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। इस तरह के उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए बजट में हर राज्य में यूनिटी मॉल-एकता मॉल बनाने की भी घोषणा इस बजट में की गई है। यानी, असम के किसान, असम के कारीगर, असम के युवा जो प्रॉडक्ट्स बनाएँगे, यूनिटी मॉल-एकता मॉल में उनका विशेष डिस्प्ले होगा ताकि उसकी ज्यादा बिक्री हो सके। यही नहीं, दूसरे राज्यों की राजधानी या बड़े पर्यटन स्थलों में भी जो यूनिटी मॉल बनेंगे, उसमें भी असम के प्रॉडक्ट्स रखे जाएंगे। पर्यटक जब यूनिटी मॉल जाएंगे, तो असम के उत्पादों को भी नया बाजार मिलेगा।

साथियों,

जब असम के शिल्प की बात होती है तो यहाँ के ये 'गोमोशा' का भी ये ‘गोमोशा’ इसका भी ज़िक्र अपने आप हो जाता है। मुझे खुद 'गोमोशा' पहनना बहुत अच्छा लगता है। हर खूबसूरत गोमोशा के पीछे असम की महिलाओं, हमारी माताओं-बहनों की मेहनत होती है। बीते 8-9 वर्षों में देश में गोमोशा को लेकर आकर्षण बढ़ा है, तो उसकी मांग भी बढ़ी है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामने आए हैं। इन ग्रुप्स में हजारों-लाखों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। अब ये ग्रुप्स और आगे बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बनेंगे। इसके लिए इस साल के बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं की आय उनके सशक्तिकरण का माध्यम बने, इसके लिए 'महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट' योजना भी शुरू की गई है। महिलाओं को सेविंग पर विशेष रूप से ज्यादा ब्याज का फायदा मिलेगा। साथ ही, पीएम आवास योजना का बजट भी बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, ताकि हर परिवार को जो गरीब है, जिसके पास पक्का घर नहीं है, उसका पक्का घर मिल सके। ये घर भी अधिकांश महिलाओं के ही नाम पर बनाए जाते हैं। उसका मालिकी हक महिलाओं का होता है। इस बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं, जिनसे असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को व्यापक लाभ होगा, उनके लिए नए अवसर बनेंगे।

साथियों,

कृष्णगुरू कहा करते थे- नित्य भक्ति के कार्यों में विश्वास के साथ अपनी आत्मा की सेवा करें। अपनी आत्मा की सेवा में, समाज की सेवा, समाज के विकास के इस मंत्र में बड़ी शक्ति समाई हुई है। मुझे खुशी है कि कृष्णगुरु सेवाश्रम समाज से जुड़े लगभग हर आयाम में इस मंत्र के साथ काम कर रहा है। आपके द्वारा चलाये जा रहे ये सेवायज्ञ देश की बड़ी ताकत बन रहे हैं। देश के विकास के लिए सरकार अनेकों योजनाएं चलाती है। लेकिन देश की कल्याणकारी योजनाओं की प्राणवायु, समाज की शक्ति और जन भागीदारी ही है। हमने देखा है कि कैसे देश ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और फिर जनभागीदारी ने उसे सफल बना दिया। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता के पीछे भी सबसे बड़ी वजह जनभागीदारी ही है। देश को सशक्त करने वाली इस तरह की अनेकों योजनाओं को आगे बढ़ाने में कृष्णगुरु सेवाश्रम की भूमिका बहुत अहम है। जैसे कि सेवाश्रम महिलाओं और युवाओं के लिए कई सामाजिक कार्य करता है। आप बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ और पोषण जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की भी ज़िम्मेदारी ले सकते हैं। 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने से सेवाश्रम की प्रेरणा बहुत अहम है। योग हो, आयुर्वेद हो, इनके प्रचार-प्रसार में आपकी और ज्यादा सहभागिता, समाज शक्ति को मजबूत करेगी।

साथियों,

आप जानते हैं कि हमारे यहां पारंपरिक तौर पर हाथ से, किसी औजार की मदद से काम करने वाले कारीगरों को, हुनरमंदों को विश्वकर्मा कहा जाता है। देश ने अब पहली बार इन पारंपरिक कारीगरों के कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इनके लिए पीएम-विश्वकर्मा कौशल सम्मान यानि पीएम विकास योजना शुरू की जा रही है और इस बजट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। कृष्णगुरु सेवाश्रम, विश्वकर्मा साथियों में इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाकर भी उनका हित कर सकता है।

साथियों,

2023 में भारत की पहल पर पूरा विश्व मिलेट ईयर भी मना रहा है। मिलेट यानी, मोटे अनाजों को, जिसको हम आमतौर पर मोटा अनाज कहते है नाम अलग-अलग होते है लेकिन मोटा अनाज कहते हैं। मोटे अनाजों को अब एक नई पहचान दी गई है। ये पहचान है- श्री अन्न। यानि अन्न में जो सर्वश्रेष्ठ है, वो हुआ श्री अन्न। कृष्णगुरु सेवाश्रम और सभी धार्मिक संस्थाएं श्री-अन्न के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। आश्रम में जो प्रसाद बँटता है, मेरा आग्रह है कि वो प्रसाद श्री अन्न से बनाया जाए। ऐसे ही, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारे स्वाधीनता सेनानियों के इतिहास को युवापीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अभियान चल रहा है। इस दिशा में सेवाश्रम प्रकाशन द्वारा, असम और पूर्वोत्तर के क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। मुझे विश्वास है, 12 वर्षों बाद जब ये अखंड कीर्तन होगा, तो आपके और देश के इन साझा प्रयासों से हम और अधिक सशक्त भारत के दर्शन कर रहे होंगे। और इसी कामना के साथ सभी संतों को प्रणाम करता हूं, सभी पुण्य आत्माओं को प्रणाम करता हूं और आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!