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ଜଙ୍ଗଲ ରାଜ କେବଳ ସେମାନଙ୍କର ବେନାମୀ ସମ୍ପତ୍ତି ଲୁଚାଇବାକୁ ଚିନ୍ତା କରେ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ
ଜଙ୍ଗଲ ରାଜ ନିଶ୍ଚିତ କରିଛନ୍ତି ଯେ ବିହାରର ହଲମାର୍କ ଥିବା ସମସ୍ତ ଶିଳ୍ପ ଏବଂ ଚିନି ମିଲ୍ ବନ୍ଦ ହୋଇଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ
ମୁଁ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି ଯେ ଭୋଟ୍ ଦେବାର ଅଧିକାରକୁ ବ୍ୟବହାର କରନ୍ତୁ ଏବଂ ବିହାରରେ ଏନଡିଏକୁ ବିଜୟୀ କରନ୍ତୁ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

देश के आजादी आउर विकास में बहुत बड़ जोगदान के धरती चंपारन-मोतिहारी में राउर सभै भाई-बहिनन के परनाम..अभिनंदन!
हमार अहोभाग बा कि सीता मैया, अरेराज सोमेश्वर महादेव, भगवान बुद्ध, भक्त ध्रुव, महर्षि वाल्मीकि, रामायण के रचना स्थल, गज-ग्राह स्थल के उद्धार स्थल, अउर महात्मा गांधी के आंदोलन से जुड़ल रहल पवित्र माटी पर आप सभै के बीच फेर आइल के मौका मिलल बाटे !

हम पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी जी, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीमान राधामोहन सिंह जी, संसद में मेरे साथी भाई राजीव रंजन सिंह जी, संसद के अंदर मजबूत महिला नेता के रूप में जिन्होंने अपने सामर्थ्य का परिचय करवाया है, ऐसी संसद में मेरी साथी बहन रमादेवी जी, एनडीए के सभी प्रतिनिधिगण और मेरे प्रिय

भाइयो और बहनो, यहां रक्सौल सहित अन्य क्षेत्रों से भी साथी आए हैं और हजारों की संख्या में डिजिटल माध्यम से भी आज इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।
मैं सभी साथियों को मेरा प्रणाम करता हूं !
भाइयो और बहनो, चंपारण में, मोतिहारी में आना तो बहुत बार हुआ है, लेकिन अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरु होने के बाद आज पहली बार आपके बीच यहां आया हूं।
सदियों के लंबे इंतजार के बाद, तप और तपस्या के लंबे दौर के बाद, जो ये अवसर आया है, उसके लिए रामायण की रचनास्थली से जुड़े आप सभी साथियों को मैं बधाई देता हूं।
प्रभु राम ने एक राजा के रूप में जिन आदर्शों को हमारे सामने रखा है, आज उसी दिशा में काम करने का पूरी निष्ठा से काम चल रहा है। 
भाइयो और बहनो, NDA सरकार को जब से आपने अवसर दिया है, गांव, गरीब, महिलाओं-नौजवानों का सशक्तिकरण और सम्मान, हमने हमेशा सर्वोपरि रखा है। नीतीश जी की अगुवाई में बीते सालों में NDA ने बिहार में इसके लिए सार्थक कदम उठाए हैं। 
स्थिति चाहे कोरोना काल से पहले की हो या फिर आत्मनिर्भर भारत बनाने का अभियान सभी पर तेजी से काम किया जा रहा है।

भाइयो और बहनो, जब कोरोना का संकट देश में आया तो सबसे पहले गांव, गरीब और किसान के बारे में ही हमने प्राथमिकता देकर कदम उठाए।
ये कोरोना का संक्रमण गांव तक ना फैले, इसके लिए सही समय पर लॉकडाउन किया गया। गरीब परिवारों को भूखा ना सोना पड़े इसके लिए दीवाली और छठ पूजा तक मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई। गांव में फसल की कटाई और बुआई चलती रहे, इसके लिए भी हर जरूरी कदम उठाए गए।

भाइयो और बहनो, कटाई और खरीद के साथ-साथ लॉकडाउन के दौरान बुआई के लिए भी किसानों को हर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बिहार में भी आपने अनुभव किया होगा कि मुश्किलों के बावजूद बीज और खाद की उपलब्धता कभी भी कमी नहीं होने दी गई, सारी व्यवस्थाएं पर्याप्त रखी गई।

लॉकडाउन के दौरान बिहार के किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि के जो सैकड़ों करोड़ रुपए पहुंचे, उससे भी उनको बहुत लाभ हुआ है।

साथियो, बिहार के जो श्रमिक परिवार दूसरे राज्यों से लौटे हैं, उनके राशन से लेकर रोजगार के लिए इस दौरान गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया गया है।
इसके तहत एक गांवों में ही श्रमिक साथियों को रोजगार तो उपलब्ध कराया ही जा रहा है, जिनके पास राशनकार्ड नहीं है, उनके लिए भी मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई।
अब पूरे देश के लिए एक ही राशनकार्ड बनाया जा रहा है ताकि देश भर में कहीं भी हमारे श्रमिक साथी अपने हिस्से का राशन ले पाएं।

साथियो, श्रमिक साथी जब गांव से शहरों की ओर जाते हैं, तो गांव में अपने घर को लेकर उनके मन में आशंका रहती है, चिंता रहती है पता नहीं वापस जाएंगे तब घर हमारे पास होगा कि नहीं होगा। 
अब देश के अन्य राज्यों में एक बहुत बड़ी योजना शुरू की गई है इस योजना का नाम है- स्वामित्व योजना।
इस योजना के तहत गांव के घरों के, गांव की जमीन के कानूनी दस्तावेज दिए जा रहे हैं, मालिकाना हक दिया जा रहा है। जैसे ही बिहार में नीतीश जी फिर मुख्यमंत्री बनेंगे, एनडीए की सरकार बनेगी तो यहां भी चुनाव पूरा होने के बाद ये योजना तेज गति से आगे बढ़ाई जाएगी। इससे कब्जे की आशंका तो खत्म होगी ही, गांवों के घरों पर अगर घर का मालिक बैंकों से लोन लेना चाहता है, कर्ज लेना चाहता है तो उसको कर्ज भी उपलब्ध कराया जाएगा।

साथियो, बिहार के युवाओं को बिहार में ही अच्छा और सम्मानजनक रोजगार मिले, ये बहुत जरूरी है। सवाल ये है कि ये कौन दिला सकता है? 
वो लोग जिन्होंने बिहार को अंधेरे और अपराध की पहचान दी? वो लोग जिनके लिए रोजगार देना करोड़ों की कमाई का माध्यम है?
या फिर नीतीश जी के नेतृत्व में NDA, जिसने बिहार को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालने का अद्भुत काम किया है?
आप याद करिए, जंगलराज की हालत तो ये थी कि जो उद्योग, जो चीनी मिलें, दशकों से चंपारण और बिहार का अहम हिस्सा रही हैं, वो भी सारी की सारी बंद हो गईं।
अब तो इस चुनाव में जंगलराज वालों के साथ नक्सलवाद के समर्थक, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की चाहत रखने वालों के समर्थक, ये भी बढ़ चढ़ कर बारात में जुड़ गए हैं। 
अब अगर इनको जरा भी मौका मिल गया, तो बिहार वापस उस हिंसा-अराजकता-अपहरण के उस खतरनाक दौर में फिर से पहुंच जाएगा।
और इसलिए बिहार को सतर्क रहना है, बिहार को सावधान रहना है। जंगलराज के युवराज से अलर्ट रहना है।

साथियो, जंगलराज वालों ने अगर कभी आपकी चिंता की होती तो बिहार विकास की दौड़ में इतना पिछड़ता नहीं। सच्चाई ये है कि इन्हें न पहले आपकी चिंता थी और न ही आज ही है। इनकी चिंता कुछ और है।
जंगलराज वालों को चिंता है कि अपनी बेनामी संपत्ति कैसे छिपाएं। एनडीए का प्रयास है कि हम बिहार के अपने गरीब भाई-बहनों को ज्यादा से ज्यादा पक्के घर कैसे बना के दें। 
जंगलराज वालों को चिंता है कि अपनी तिजोरी कैसे भरें। जबकि हमारी प्राथमिकता है कि बिहार के किसानों को, श्रमिकों को, बुजुर्गों को पैसे सीधे उनके बैंक खाते में कैसे पहुंचाएं। 
जंगलराज वालों को चिंता है कि लालटेन कैसे जले। हमारा प्रयास है कि हर घर में दूधिया चमकदार एलईडी बल्ब कैसे पहुंचे।

साथियो, इन लोगों ने कभी बिहार की महिलाओं, बिहार की बहन-बेटियों को होने वाली परेशानी की कभी चिंता नहीं की। वो खुले में शौच में जाने के लिए मजबूर थीं, उनकी सुरक्षा पर खतरा रहता था, लेकिन जंगलराज वाले, जंगल जैसे हालात बनाए रखना चाहते थे।
ये एनडीए की सरकार है जिसने बिहार की माताओं-बहनों के लिए लाखों शौचालय बनाकर उनकी परेशानी कम करने का प्रयास किया है।

साथियो, मुझे याद है कि जब उनकी इस तकलीफ के बारे में मैंने लाल किले से बात की थी तो इन लोगों ने किस तरह मेरा मजाक उड़ाया गया था। पर मुझे खुशी है कि आज आप सभी ने मिलकर बिहार के 38 हजार से ज्यादा गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है। 
मैं पिछले साल चंपारण में सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह कार्यक्रम के समापन पर आया था। चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर स्वच्छता का ये प्रयास करके इस क्षेत्र के लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है और इसलिए मैं यहां के लोगों का जितना नमन करूं, जितना आदर करूं उतना कम है।

भाइयो और बहनो, आज बिहार प्रगति के जिस पथ पर है, वो बिहार का भविष्य और मजबूत करेगा, उसे और गौरवशाली भी बनाएगा, वैभवशाली भी बनाएगा। 
एनडीए के हम सभी साथी मिलकर इसी सोच को साकार करने में लगे हैं। जंगलराज का अंधेरा बिहार पीछे छोड़ चुका है, अब नई रोशनी में डबल इंजन की ताकत के साथ विकास का लाभ हमें बिहार के हर व्यक्ति तक पहुंचाना है। यही वजह है कि मां गंगा पर कहीं सबसे बड़े पुल बन रहे हैं तो कहीं पर नए एयरपोर्ट, नए हाई-वे बन रहे हैं।
जिस बिहार ने चाणक्य के अर्थशास्त्र को प्रेरणा दी आज वही बिहार गैस आधारित अर्थनीति की दिशा, देश को दिखा रहा है। एनडीए के सभी साथी, आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प के साथ, हर कदम पर बिहार के लोगों के साथ खड़े हैं।

साथियो, आत्मनिर्भर बिहार, यहां के हर युवा की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक पक्का रोडमैप है। आत्मनिर्भर बिहार, यहां के गांव-गांव के सामर्थ्य को पहचान दिलाने का मार्ग है। आत्मनिर्भर बिहार, गांवों में उद्यम के, रोजगार के अवसर तैयार करने का अभियान है। आत्मनिर्भर बिहार, बिहार के गौरव, बिहार के वैभव को फिर से लौटाने का मिशन है।

भाइयो और बहनो, आत्मनिर्भर बिहार अभियान से यहां को मोती बटन से जुड़े उद्योग को और प्रोत्साहन मिलना तय है। देश के हर जिले में जो इस प्रकार के उत्पाद हैं, उनके लिए उद्योगों के क्लस्टर की योजना पर काम चल रहा है।

खेती हो, पशुपालन हो, मछलीपालन हो, इससे जुड़े उद्योग और उद्यम आत्मनिर्भर चंपारण, आत्मनिर्भर बिहार का अहम हिस्सा हैं। पूर्वी चंपारण में ही कृषि अनुसंधान केंद्र बन चुका है। यहां डेयरी प्लांट भी लग चुका है, जिससे पशुपालकों को लाभ होता है।
ड्रिप और स्प्रिंकल इरिगेशन के लिए, टपक सिंचाई, फव्वारे की सिंचाई के लिए भी बहुत बड़ी मदद दी जाती है।

साथियो, मोतिहारी सहित बिहार का एक बड़ा हिस्सा मीठे पानी की मछलियों का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। हाल में देश में मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ी योजना बिहार की धरती से ही लॉन्च की गई है। 
मत्स्य संपदा योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए का निवेश मछली व्यवसाय से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसके तहत सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट बिहार में शुरु किए गए हैं।

भाइयो और बहनो, बिहार के इस क्षेत्र में गन्ना भी देश की आत्मनिर्भरता का और बिहार के युवाओं के रोजगार का एक बड़ा माध्यम बन सकता है।
आज पेट्रोल और हवाई ईंधन में गन्ने से बने इथेनॉल की ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहली बार इसके लिए व्यापक नीति भी बनाई गई है और बड़े पैमाने पर सरकारी कंपनियां इथेनॉल की खरीद कर रही हैं।
यहां भी सुगौली चीनी मिल में इथेनॉल बनाने का काम चल रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार की दूसरी मिलों के लिए भी अब नए अवसर बन रहे हैं।

साथियो, आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका हमारी बेटियों की है, हमारी माताओं की है, हमारी बहनों की है। इसलिए जीविका दीदियों की भूमिका का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। आने वाले समय में बिहार की लाखों बहनों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है।
2013-14 की तुलना में आज बहनों-बेटियों के ऐसे स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले ऋण में 30 गुना से ज्यादा वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत भी सबसे ज्यादा ऋण महिला उद्यमियों को ही मिल रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को, उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा बल मिल रहा है। बेटियों की पढ़ाई से लेकर कमाई के लिए बिहार में हो रहे प्रयासों के कारण ही NDA के साथ आज बिहार की हर मां, हर बहन, हर बेटी संकल्प के साथ जुड़ी हुई है। इन मातृशक्ति का आशीर्वाद आज एनडीए को विशेष रूप से ताकतवर बना रहा है।

साथियो, बिहार को बीमार होने से बचाने के लिए, बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, हर एक परिवार का, हर एक मतदाता का एक-एक वोट, हर वोट NDA, यानी भाजपा, जेडीयू, हम पार्टी और VIP पार्टी के उम्मीदवारों को ही पड़ना चाहिए।

भाइयो-बहनो, आज मेरी ये तीसरी सभा है और मैं आज तीसरी बार इस चुनाव के दरमियां आपके बीच में आया हूं। आप जिस प्रकार से हमें आशीर्वाद दे रहे हैं, जिस प्रकार से जहां मेरी नजर पहुंचे, मुझे लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। ये दिल्ली में जो पॉलीटिकल पंडित बैठे हैं थोड़ा सा नजारा देख लें पता चल जाएगा, दस नवंबर को क्या होने वाला है।

भाइयो-बहनो, मैं आज प्रथम चरण के मतदान के बाद आज आया हूं। प्रथम चरण के मतदान में सारे पॉलीटिकल पंडित उछल-उछल कर कह रहे थे। मतदान कम होगा, लोग वोट डालने आएंगे नहीं, अरे कोरोना के समय कौन निकलेगा लेकिन इन पंडितों को मालूम नहीं है ये बिहार की धरती है बिहार की। पूरी मानवजाति, पूरी दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र का पाठ इसी मिट्टी ने पढ़ाया था। लोकतंत्र का महत्व क्या होता है वो जितना बिहारी जानता है, शायद और कोई नहीं जानता और उसी का नतीजा है कि जी भर करके, सारे रिकॉर्ड तोड़कर के बिहार के लोगों ने सारी आशंकाओं को खत्म करते हुए पहले चरण में भारी मतदान किया। मैं सबको आदरपूर्वक नमन करता हूं, आपने लोकतंत्र को ताकत दी है, आपने लोकतंत्र का हौसला बुलंद किया है और बिहार ने देश को दिशा दिखाई है और दूसरी बात पहले चरण के मतदान के बाद कई लोगों के मुझे मैसेज मिले, सूचनाएं मिलीं, किसी ने फोन भी किया। कुछ पत्रकार मित्रों से भी चर्चा करने का मौका मिल गया। कुछ सर्वेक्षण वालों से बात करने का अवसर मिल गया, कुछ एग्जिट पोल की जिरह करते हैं ऐसे लोगों से भी पूछ लिया कि भाई बताओ तो जरा बताओ तो ये सारे पंडित गलत हो रहे हैं आगे क्या लग रहा है। मतदान तो अच्छा हो गया तो सबने मुझे कहा साहब, बिहार की जनता ने पहले चरण के मतदान से एनडीए को दोबारा सरकार बनाने के आशीर्वाद दे दिए हैं।

भाइय-बहनो, पहले चरण का ये उत्साह अगले चरण में उत्साह को बढ़ाने वाला बनना चाहिए। अब तो चलो मोदी जी का काम हो गया है चलो सो जाओ, नहीं। अब जरा और ज्यादा जोर लगाना है, एक-एक पोलिंग बूथ में जोर लगाना है। माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ना है और अभूतपूर्व विजय के साथ बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प करके चलना है।

भाइयो-बहनो, हम लोगों का जीवन का एक बहुत बड़ा अच्छा अनुभव है हम में से हर किसी को अनुभव है, हम में से हर किसी को अनुभव है। हममें से हर किसी ने कभी ना कभी उसमें से कुछ सीखा है। जरा मेरी बात को शांति से गौर से सुने फिर घर-घर जाकर जरूर सोचें, जीवन में कभी-कभार ऐसा हो जाता है कि सामने जब कोई खाने की चीज आ जाए, पहले कभी खाई ना हो, दिखने में बहुत बढ़िया लगती हो, जरा पैकेजिंग भी बहुत बढ़िया किया हो, जरा नाम भी बहुत बढ़िया रख दिया हो, दिखने में भी बहुत बढ़िया लगती हो और फिर मुंह में पानी छूट जाए और उसको खाएं लेकिन अगर कुछ कारण से कुछ ही घंटों में पेट में गड़बड़ शुरू हो जाए, दस्त लग जाए, बीपी ऊपर-नीचे शुरू हो जाए, वॉमेटिंग शुरू हो जाए, घर के लोगों का पसीना छूट जाए। डॉक्टर इधर-उधर से दौड़े-भागे, अस्पताल सब करें और बड़ी मुश्किल से कोई अच्छा डॉक्टर मिल जाए और बच जाएं लेकिन जीवन में कभी भी फिर से वो चीज सामने आ जाए, कितने ही नए रंग-रूप के साथ आ जाए। जिसको खाने से कभी एक बार इतनी मुसीबत झेलनी पड़ी, वो दोबारा उसको खाएगा क्या, कभी भी खाएगा क्या, दस साल के बाद आए तो खाएगा क्या, 15 साल के बाद भी आएगा तो खाएगा क्या, 40 साल के बाद भी आए तो खाएगा क्या, एक पीढ़ी-दूसरी पीढ़ी की आइटम आए तब भी खाएगा क्या, पहले बड़ा फल हो फिर छोटा फल हो खाएगा क्या? कोई नहीं खाएगा, क्योंकि उसको याद आएगा कि पहले जब खाया था तो मैं तो बड़ी मुश्किल से बचा था। दोबारा अगर चखने की भी कोशिश करूंगा तो मेरा बीमार होना तय है, कोई नहीं खाता है। 
भाइयो-बहनो, क्या बिहार को फिर से बीमार होने देना है, बिहार को फिर से बीमार होने देना है, 15 साल पहले जिस कारणों से पहले बिहार, बीमार हुआ, बर्बाद हुआ। क्या दोबार हम वो गलती कर सकते हैं क्या? नहीं करेंगे ना, पक्का नहीं करेंगे ना। वादा करते हैं? शाबाश मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

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President of the 77th Session of United Nations General Assembly H.E. Mr. Csaba Korosi calls on PM Narendra Modi
January 30, 2023
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Mr. Csaba Korosi lauds India’s transformational initiatives for communities, including in the area of water resource management and conservation
Mr. Csaba Korosi speaks about the importance of India being at the forefront of efforts to reform global institutions
PM appreciates PGA’s approach based on science and technology to find solutions to global problems
PM emphasises the importance of reforming the multilateral system, including the UN Security Council, so as to truly reflect contemporary geopolitical realities

The President of the 77th Session of the United Nations General Assembly (PGA), H.E. Mr. Csaba Korosi called on Prime Minister Shri Narendra Modi today.

During the meeting, Mr. Csaba Korosi lauded India’s transformational initiatives for communities, including in the area of water resource management and conservation. Acknowledging India’s efforts towards Reformed Multilateralism, Mr. Csaba Korosi underscored the importance of India being at the forefront of efforts to reform global institutions.

Prime Minister thanked Mr. Csaba Korosi for making India his first bilateral visit since assuming office. He appreciated Mr. Csaba Korosi’s approach based on science and technology to find solutions to global problems. He assured Mr. Csaba Korosi of India’s fullest support to his Presidency initiatives during the 77th UNGA including the UN 2023 Water Conference.

Prime Minister emphasised the importance of reforming the multilateral system, including the UN Security Council, so as to truly reflect contemporary geopolitical realities.