Gujarat Chief Minister speaks with 1.23-lakh beneficiaries on 3rd Garib Kalyan Mela

Narendra Modi announces ‘Mukhya Mantri Amritam Yojna’ assistance of up to Rs.2-lakh for treatment of serious diseases of BPL persons

Ahmedabad, Saturday: Gujarat Chief Minister Narendra Modi today announced ‘Mukhya Mantri Amritam Yojna’ for the treatment of BPL persons suffering from serious diseases free-of-cost up to Rs.2-lakh. A budgetary provision of Rs.200-crore has been made under this scheme.

Speaking on the third day of Garib Kalyan Mela from Gandhinagar with 1.32-lakh beneficiaries for Rs.175-crore assistance in 23 talukas through video conferencing, he said that Gujaratis the state which bears the cost of major surgery of school children and lakhs of poor families, providing them a new lease of life.

As the occasion coincided with Dr. Ambedkar’s 121st birth anniversary, he said the Garib Kalyan Melas are to let the poor, dalit, oppressed and have-nots realize their dream and to infuse energy in them with strength to fight poverty.

Mr. Modi said education is best medicine to fight poverty. Giving details of innovative methods to spread among the deprived, he said that Gujarat has topped all the states in the country in implementation of 20-Point Programme continuously for the last ten years.

He said that 8.50 lakh pucca house have been built for the homeless in the category of 0-16 points of BPL families in the state. These Garib Kalyan Melas are the platform for fighting poverty.

The Chief Minister appealed to the people to resolve on Dr. Ambedkar’s birthday to shun addiction.

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PM Modi's interview to Amar Ujala
May 20, 2024

प्रश्न 1- चुनाव पांचवें चरण में पहुंच गया है। आज की स्थिति में आप भाजपा को अकेले और एनडीए को कहां खड़ा पाते हैं?

उत्तर-2024 का चुनाव शुरू होने से पहले एक बात की चर्चा विशेष तौर पर की जा रही थी, कि दुनिया में पहली बार किसी सरकार की तीसरी पारी को लेकर लोगों में अभूतपूर्व उत्साह दिख रहा है। चार चरणों के चुनाव के बाद मैं ये विश्वास के साथ कह सकता हूं, कि जिस ऊर्जा और जिस उत्साह के साथ भारत के लोगों ने इस चुनावी मिशन को शुरू किया था, वो कहीं से भी कम नहीं हुआ है। हर चरण के चुनाव के साथ लोगों का ये संकल्प और मजबूत हुआ है कि भाजपा को 370 और एनडीए को 400 सीटें देनी है।

सीटों की ये गिनती लोगों के बीच से ही आई है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि इनके साथ लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हैं। केंद्र की भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म किया, इससे लोगों ने मन बनाया कि भाजपा को 370 सीटों पर जीत दिलानी है। यहीं से एनडीए के लिए 400 सीटों का नारा बुलंद हुआ।

आज जब मैं देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियों के लिए जाता हूं, तो ये देखता हूं कि लोगों ने 4 जून, 400 पार के नारे को आत्मसात कर लिया है। ये नारा, अपनी भावना प्रकट करने का माध्यम बन गया है। इसीलिए, मैं विश्वास के साथ कह पा रहा हूं कि देश में तीसरी बार 400 से ज्यादा सीटों के साथ एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

प्रश्न 2- आपने एक हालिया साक्षात्कार में एनडीए प्लस में बीजद और वाईएसआरसीपी को शामिल किया है। जबकि स्थिति यह है कि भाजपा का ओडिशा में बीजद से चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हो पाया। आंध्रप्रदेश में आप जिस टीडीपी के साथ गठबंधन में हैं, वाईएसआरसीपी उसकी प्रतिद्वंद्वी है। क्या आपके कहने का आशय है कि भविष्य में भी ये दोनों दल पहले की तरह संसद में आपका सहयोग करते रहेंगे?

उत्तर- इनमें से अधिकतर पार्टियों के खिलाफ हम पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। हां, आपकी ये बात सही है कि इन पार्टियों ने देशहित के मुद्दों पर हमें सपोर्ट किया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हमें राज्य के विकास की चिंता है। हम वहां के लोगों को भ्रष्टाचार और अराजकता से बाहर लाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि आंध्र और ओडिशा के लोगों को भी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। हम चाहते हैं कि दोनों राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज गति से विस्तार हो, युवाओं को रोजगार के अवसर मिले, महिलाओं को सुरक्षा का एहसास हो।भाजपा का संकल्प है कि इन राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां की संस्कृति और परंपराओं को और समृद्ध किया जाएगा। मैंने ओडिशा के लोगों को गारंटी दी है कि 10 जून को ओडिशा की मिट्टी से निकला व्यक्ति सीएम पद की शपथ लेगा। भाजपा उड़िया संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रश्न 3- कांग्रेस समेत विपक्ष का कहना है कि मोदी तीसरी बार आए तो संविधान बदल देंगे? आपने कहा भी कि ऐसा कुछ नहीं होना है? इसके बावजूद इस मुद्दे को विपक्ष छोड़ नहीं रहा है?

उत्तर- भाजपा विकास के नारे को लेकर जनता के बीच जा रही है। जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, तो जनता का हम पर विश्वास और मजबूत होता है। क्योंकि लोगों ने हमारे 10 साल में विकास को धरातल पर उतरते देखा है। लेकिन जब लोग कांग्रेस के 60 साल को देखते हैं तो निराशा से भर जाते हैं। लोगों में इस बात का आक्रोश है कि कांग्रेस ने देश के 60 साल खराब कर दिए।

आप देखेंगे कि इंडी अलायंस के आखिरी 10 साल को अब भी लोग घोटालों के लिए याद करते हैं। इनके पास ना तो देश के लिए कोई विजन है, ना बेहतर भविष्य के लिए कोई योजना। ये लोग उस सोच के व्यक्ति हैं कि जब अपनी लकीर बड़ा ना कर पाओ तो दूसरे की छोटी करने में जुट जाओ। इंडी गठबंधन पूरी ताकत लगाकर यही कर रहा है। वो झूठ और प्रपंच की राजनीति करके चुनाव जीतना चाहता है। इंडी गठबंधन ने झूठ की पूरी फैक्ट्री ही खोल दी है। वहीं से संविधान पर भी इनका झूठ बाहर आया है।

कांग्रेस अपना पाप छिपाने के लिए झूठ का सहारा ले रही है। संविधान के साथ सबसे ज्यादा छेड़छाड़ कांग्रेस के कार्यकाल में ही हुआ है। 6 दशकों में संविधान की आत्मा को बार-बार चोट पहुंचाने का काम कांग्रेस ने किया है। और ये काम कांग्रेस ने संविधान बनने के साथ ही शुरू कर दिया था। कांग्रेस ने सबसे पहले संविधान की मूल प्रति पर प्रहार किया, उसमें बदलाव कर दिया। फिर संविधान की आत्मा पर प्रहार किया और अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा लगाने की कोशिश की। फिर संविधान की भावना पर बार-बार प्रहार किया और राज्यों की चुनी हुई सरकारों को हटा दिया। कांग्रेस के सिर पर इमरजेंसी लगाकर संविधान को खत्म कर देने का सबसे बड़ा पाप है। कांग्रेस किसी तरह इस पाप को धोना चाहती है, लेकिन देश की जनता इस सत्य को नहीं भूल सकती। अब पूरा इंडी गठबंधन हम पर ये आरोप चिपकाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही।

प्रश्न 4- विपक्ष तीन मुद्दे पूरे जोर से उठा रहा है। आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा, कभी चुनाव नहीं होंगे और संघ के लोगों ने संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है?

उत्तर- इस चुनाव में विपक्ष का कोई मुद्दा चल नहीं रहा। इसलिए आप देख रहे होंगे कि चार चरणों के चुनाव के बाद अब विपक्ष के मुद्दे बदलने लगे हैं। उनके सामने विश्वसनीयता का संकट है। शहजादे के बोले गए शब्दों को जनता गंभीरता से नहीं लेती। कांग्रेस का इकोसिस्टम जिन बातों को लोगों के बीच फैलाने में जुटा है, उसका जमीन पर कोई प्रभाव नहीं है। उल्टे हमें उनकी साजिशों को बेनकाब करने का अवसर मिल गया।

अब देखिए, कांग्रेस का इतिहास ही आरक्षण विरोध का रहा है। एससी, एसटी आरक्षण के खिलाफ नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। जब ओबीसी आयोग के गठन की बात आई तो राजीव जी ने सक्रियता नहीं दिखाई। बाद में भाजपा के सहयोग से सरकार बनी तो ओबीसी आयोग का गठन हुआ। कांग्रेस ने कई मौकों पर SC/ST/OBC के आरक्षण में सेंध लगाने की कोशिश की। संयुक्त आंध्र प्रदेश में इनकी कोशिश कोर्ट की वजह से कामयाब नहीं हुई। कर्नाटका में ये अपने मंसूबों में कामयाब हो गए। वहां मुसलमानों को पिछड़ी जाति में शामिल करके आरक्षण में सेंधमारी कर दी। धर्म आधारित ये आरक्षण देकर कांग्रेस किसका नुकसान कर रही है? हमारे दलित, पिछड़े और वंचित भाई-बहनों का। अब तो इंडी गठबंधन के नेता खुलकर SC/ST/OBC का हक छीनकर पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिम समाज को देने की बात कर रहे हैं। संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने पर रोक है, इसके बावजूद इंडी गठबंधन तुष्टीकरण के लिए आरक्षण में सेंध लगा रहा है।

विपक्ष संविधान, चुनाव, संस्थानों की स्वतंत्रता को लेकर झूठी बातें फैला रहा है, और उम्मीद कर रहा है कि जनता उसकी बात सुन लेगी। लेकिन उनका ये दांव काम नहीं कर रहा। अब उनमें हड़बड़ाहट दिख रही है, तभी तो वो हमारे जिन कार्यों का मजाक उड़ाते थे, अब चार चरण के चुनाव के बाद वही काम करने का वादा करने लगे हैं। चुनाव के बाद जिनका भविष्य जेल में कटने वाला है, वो भाजपा के भविष्य पर अनुमान बांट रहे हैं। ऐसी खोखली बातों का जनता पर कोई असर नहीं होता।

"हमारी योजनाओं के लाभार्थियों में बड़ी संख्या मुस्लिम समाज की है। उन्हें भी लगता है कि भाजपा सरकार है, तो उन्हें सारी सुविधाएं मिल रही हैं। यह सरकार नहीं होती तो उन्हें इन मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता। पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार सृजित हुए...बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3% रह गई। विपक्ष बेरोजगारी और महंगाई को मुद्दा बना रहा है।"

इस चुनाव के बाद विपक्ष स्थायी रूप से बेरोजगार होने जा रहा है। जहां तक देश के युवाओं की बात है, तो उनके लिए पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। हमने रोजगार मेले के माध्यम से लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अर्थव्यवस्था मजबूत होने से प्राइवेट सेक्टर आगे बढ़ रहा है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। हमने युवाओं के लिए कई ऐसे नए सेक्टर खोले हैं, जिनमें पहले मौका नहीं मिलता था। जैसे स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर में नए अवसर बने हैं। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। मुद्रा लोन ने करोड़ों उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और अब वे लोग जॉब क्रिएटर्स की भूमिका में हैं। देश में क्रिएटर इकनॉमी बड़ी हो रही है। युवाओं को गेमिंग के फील्ड में नए अवसर मिल रहे हैं।

हाल ही में स्कॉच ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि माइक्रो फाइनेंस के कारण स्वरोजगार के अनेक अवसर बने हैं। आज इन्फ्रास्ट्रक्चर के जो इतने काम हो रहे हैं, उनका संबंध भी रोजगार से है। इतने निर्माण, इतने उत्पादन, इतनी सेवाओं के लिए कितना श्रम चाहिए, आप अंदाजा लगा सकते हैं। ये श्रम रोजगार के माध्यम से ही तो मिल रहा है। स्कॉच की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए है।

ईपीएफओ के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का डाटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वह अब 3% रह गई है। इससे यह भी पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटी है।

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार महंगाई पर काबू रख पाने में सफल रही। यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट में हुआ करती थी। लेकिन आज हम छोटी-छोटी चीजों की कीमतों को काबू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आज दुनिया युद्ध की परिस्थितियों से घिरी है, इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ना तय था। लेकिन हमारी सरकार ने अपने लोगों के हितों को प्राथमिकता दी और उन पर महंगे पेट्रोल-डीजल का बोझ नहीं पड़ने दिया।

कोविड के बाद पूरी दुनिया महंगाई से जूझ रही है, बहुत से देशों में महंगाई दर दहाई अंकों में है। भारत उन देशों में शामिल है, जहां महंगाई दर कम है। हमारी कोशिश रही है कि गरीब और मध्यवर्ग के लिए महंगाई दर हमेशा सीमा में रहे। आज जन औषधि केंद्र की वजह से दवाइयों का खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। देश में हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलने की गारंटी है।

आपने हाल ही में मुस्लिमों से आत्ममंथन के आग्रह के साथ सत्ता में बैठाने-उतारने की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान किया था। यह कैसे संभव होगा, क्या आप कहना चाहते हैं कि मुसलमान बिरादरी में सामाजिक स्तर पर सुधार की जरूरत है?
मेरे लिए, देश का हर नागरिक समान है। हमें उसकी बेहतरी की चिंता है, उसके दुख व दर्द से सरोकार है। मैं उन्हें धर्म, जाति व वर्ग में बांटकर नहीं देखता। मेरी सरकार का मूल मंत्र भी यही है। आज देश की किसी भी योजना में यह नहीं पूछा जाता कि लाभार्थी का नाम, जाति या पंथ क्या है। जो योजना है, सबके लिए हैं। इसीलिए माताएं-बहनें, गरीब, युवा और किसान, चट्टान की तरह मेरे पीछे खड़े दिखते हैं। यही मेरी असली ताकत हैं, इन्हीं से मुझे प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

प्रश्न 5- विपक्ष बेरोजगारी और मंहगाई को मुद्दा बना रहा है।

उत्तर- इस चुनाव के बाद विपक्ष स्थायी रूप से बेरोजगार होने जा रहा है। जहां तक देश के युवाओं की बात है तो उनके लिए पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। हमने रोजगार मेले के माध्यम से लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अर्थव्यवस्था मजबूत होने से प्राइवेट सेक्टर आगे बढ़ रहा है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। हमने कई ऐसे नए सेक्टर युवाओं के लिए खोले हैं, जिनमें पहले मौका नहीं मिलता था। जैसे स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर में नए अवसर बने हैं। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। मुद्रा लोन ने करोड़ों उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और अब वे लोग जॉब क्रिएटर्स की भूमिका में हैं। देश में क्रिएटर इकॉनॉमी बड़ी हो रही है। युवाओं को गेमिंग के फील्ड में नए अवसर मिल रहे हैं।

हाल ही में SKOCH ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि माइक्रो फाइनेंस के कारण स्वरोजगार के अनेक अवसर बने हैं। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के जो इतने काम हो रहे हैं, उनका संबंध भी रोजगार से है। इतने निर्माण, इतने उत्पादन, इतनी सेवाओं के लिए कितना श्रम चाहिए, आप अंदाजा लगा सकते हैं। ये श्रम रोजगार के माध्यम से ही तो मिल रहा है। SKOCH की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए है।EPFO के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं। PLFS का डेटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वो अब 3% रह गई है। इससे ये भी पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटी है।

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार महंगाई को काबू रख पाने में सफल रही। यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट में हुआ करती थी। लेकिन आज हम छोटी-छोटी चीजों की कीमतों को काबू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आज दुनिया युद्ध की परिस्थितियों से घिरी है, इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ना तय था। लेकिन हमारी सरकार ने अपने लोगों के हितों को प्राथमिकता दी और उन पर महंगे पेट्रोल-डीजल का बोझ नहीं पड़ने दिया।

कोविड के बाद पूरी दुनिया मंहगाई से जूझ रही है, बहुत से देशों में महंगाई दर दहाई अंकों में है। भारत उन देशों में शामिल है, जहां महंगाई दर कम है। हमारी कोशिश रही है कि गरीब और मध्यमवर्ग के लिए महंगाई हमेशा सीमा में रहे। आज जन औषधि केंद्र की वजह से दवाइयों का खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। देश में हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपए तक इलाज मुफ्त मिलने की गारंटी है।

प्रश्न 6- आपने 2014 के चुनाव में कहा था मुझे मां गंगा ने बुलाया है। इस बार कहा मुझे मां गंगा ने गोद ले लिया है। क्या इसका यह अर्थ लगाया जाए कि काशी अब प्रधानमंत्रीजी की स्थायी कर्मभूमि है?

उत्तर- देखिए, वाराणसी मैं बहुत समय से आता रहा हूं। जब पार्टी के संगठन के लिए काम करता था तो बहुत बार यहां आना होता था। मैं जब भी गंगा मां को देखता हूं तो मुझे एक आत्मीय अनुभूति होती है। मुझे मां गंगा का हमेशा सानिध्य मिला है, और जबसे मेरी मां गई हैं, तब से तो मेरे लिए गंगा ही मां रह गई हैं। 2014 में जब मैं यहां आया था, तो मैंने कहा था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है। 10 वर्षों में मेरे अंदर ये भावना प्रबल हुई है कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है। इसलिए काशी के प्रति मैं अलग तरह की जिम्मेदारी महसूस करता हूं।

हर सनातनी के मन में एक बार काशी दर्शन की इच्छा रहती है, और ये मेरा सौभाग्य है कि मैं महादेव की नगरी और मां गंगा की सेवा कर पा रहा हूं। यहां के देवतुल्य लोग, उनका स्नेह मेरे लिए सत्ता, संसदीय सीट, एमपी, पीएम से कहीं बड़ा है। मैं काशीवासियों के प्रेम का कर्जदार हूं और ये कर्ज मैं अंतिम सांस तक उतारना नहीं चाहता। इसके बदले मैं लगातार उनकी सेवा करना चाहता हूं।

प्रश्न 7- वाराणसी में बीते 10 वर्षों में इतने सारे नए प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं। बनारस जैसे इतने प्राचीन शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर काम करना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा है।

उत्तर- वाराणसी आज दुनिया में अर्बन डेवलपमेंट की मॉडल सिटी कही जा सकती है। 2014 में जब मैं बनारस आया था, तो यहां का विकास एक बड़ी जिम्मेदारी थी। गलियां संकरी थीं, सड़कों पर काम नहीं हुआ था, रेलवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी ऐसे ही थे। हमने फेज वाइज चीजें बदलीं। एक नया मॉडल बनाकर काम किया।

दुनिया भर में बनारस की पहचान उसकी गलियां हैं। हमने गलियों में बिजली के लटके हुए तार हटवाना शुरू किया। गलियों की सफाई के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से काम शुरू कराए। सीवेज सिस्टम में ऐसी पाइप थीं, जो अंग्रेजों के जमाने से लगी थीं। इसलिए सीवर ओवरफ्लो से गलियों में, सड़कों पर पानी जमा होता था। उनको बदलवाना शुरू किया। आपको याद होगा, मैंने वाराणसी के अस्सी घाट पर स्वच्छता नवरत्नों की घोषणा की थी। ऐसे ही घाटों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर फोकस किया।

इसके बाद काम शुरू हुआ, इंफ्रास्ट्रक्चर पर। वाराणसी में बाहरी गाड़ियों से जाम ना लगे, इसके लिए रिंग रोड बनी। शहर में जो बाहर से आने वाले लोग हैं, उनके लिए नैशनल हाइवे के नेटवर्क को बेहतर किया। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, बंगाल और एमपी से जो लोग इलाज के लिए बनारस आते हैं, उनके लिए कैंसर हॉस्पिटल और ट्रॉमा सेंटर बना। शहर में ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधारने के लिए कमांड सेंटर बना। रेलवे स्टेशन सुधारे गए, एयरपोर्ट पर काम हुआ। अब रोप वे बन रहा है, अर्बन ई बस चल रही है, वंदे भारत जैसी ट्रेन है।

घाटों पर नई सुविधाएं बनीं। बाबा विश्वनाथ का कॉरिडोर बना। क्रूज सर्विस शुरू कराई गई। दशाश्वमेध घाट पर नया बिजनेस प्लाजा बनाया गया। तो इन सब से बनारस की इकॉनमी को बहुत बल मिला। आज जो टूरिस्ट आते हैं, उनको सभी तरह की सुविधाएं मिलती हैं। बनारस शहर में जाम का संकट एक बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि शहर का घनत्व बहुत ज्यादा है। लोगों को सहूलियत और स्पीड दोनों कैसे दे सकें, उसके लिए काम कर रहे हैं।

जबसे मेरी मां गई हैं, तबसे गंगा ही मेरे लिए मां रह गई हैं...इसलिए काशी के प्रति मैं अलग तरह की जिम्मेदारी महसूस करता हूं और यहां के विकास के लिए प्रितबद्ध हूं। इसी भावना से यहां की पंरपरा व संस्कृति को ध्यान में रखकर विकास के सभी कार्य किए जा रहे हैं। इस नगरी को दुनिया के अतिथियों के लिए भी तैयार किया गया है।

प्रश्न 8- काशी की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए 10 वर्षों में बहुत सारे प्रयास हुए हैं। काशी की संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास करने का काम कैसे किया गया है?

उत्तर-10 साल में बनारस ने मुझे बनारसी बना दिया है, इसलिए मैं बनारसी होने के नाते ये समझता हूं कि मेरी नगरी में संस्कृति और परंपरा का महत्व क्या है।

हमने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को भव्य रूप दिया, लेकिन उसकी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का ध्यान रखा। कॉरिडोर में माता अहिल्या की प्रतिमा लगाई गई, मंदिर के गर्भगृह स्वर्ण मंडित हुए, गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ का धाम जोड़ा गया। काल भैरव मंदिर से काशी विश्वनाथ और फिर काशी विश्वनाथ से दशाश्वमेध घाट के बीच की जो सड़क थी, उसका सुंदरीकरण किया गया। यानि जो व्यक्ति महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, असम जैसे राज्यों से काशी आए तो, उसे वही काशी दिखाई दे जिसे उसने पुराणों और कथाओं में सुना है।

काशी का दुर्गाकुंड धाम विकसित किया गया। रविदास मंदिर जिस स्थान पर है, उसका विकास किया गया। सारनाथ का स्तूप जहां है, उस इलाके को हेरिटेज सिटी के मॉडल पर विकसित किया गया। अब हम काशी के मणिकर्णिका घाट को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित कर रहे हैं। लेकिन इन सब में हमने उस पौराणिकता, उस भावना का ध्यान रखा है जिसे मन में लेकर लोग यहां आते हैं।

काशी बहुसंस्कृति की नगरी है। यहां अनेक वर्गों, भाषाओं और प्रांतों के लोग रहते हैं। इसी काशी में हमने काशी तमिल संगमम, काशी तेलुगु संगमम जैसे ऐतिहासिक आयोजन किए। इसी काशी में जी-20 की बैठक हुई। इसी काशी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हुआ। ये अतिथि जब काशी आए तो उन्होंने देखा कि दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी कितनी अलग है। काशी में हमने विकास किया, साथ ही परंपराएं भी संरक्षित की। काशी को दुनिया के सामने रखा, साथ ही काशी को दुनिया के अतिथियों के लिए तैयार भी किया।

प्रश्न 9- चुनाव प्रचार में आपने पहली बार अदाणी—अंबानी का नाम लिया। आपने कहा कि चुनाव घोषित होने के बाद राहुल ने इन्हें गाली देना बंद कर दिया है? आपके ऐसा कहने का वास्तविक अभिप्राय क्या था?

उत्तर- इसका जवाब आपको मुझसे नहीं कांग्रेस से पूछना चाहिए। वैसे भी इस बात का जवाब अधीर रंजन जी पहले ही दे चुके हैं। राजनीतिक फिरौती वसूलने के लिए कांग्रेस ऐसे आरोप लगाती रहती है। कांग्रेस के पास अपना कुछ बचा नहीं है, इन दिनों उन पर माओवादी सोच हावी है।

आजादी के बाद लेफ्ट पार्टियां कांग्रेस को टाटा-बिड़ला की सरकार कहते थे। ये वामदलों का ही आइडिया है, जिसे शहजादे हम पर चिपकाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ये आइडिया काम नहीं कर रहा, क्योंकि लोग जानते हैं कि भाजपा की सरकार आने के बाद उनको घर मिला। भाजपा सरकार में ही मुफ्त राशन, शौचालय, बिजली-पानी, गैस कनेक्शन की सुविधा मिली। भाजपा की सरकार में ही गरीब को मुफ्त इलाज का भरोसा मिला। हमने जनधन खाते खुलवाए, हमने गरीब के हक का पैसा सीधे उसके खाते में भेजना शुरू किया। इससे कांग्रेस का कमीशन तंत्र फेल हो गया, इसी वजह से वो हमारे बारे में अनाप-शनाप बोलते रहते हैं।


प्रश्न 10- आपने हाल ही में मुस्लिमों से आत्ममंथन के आग्रह के साथ सत्ता में बैठाने-उतारने की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान किया है। यह कैसे होगा, क्या आप कहना चाहते हैं कि मुसलमान बिरादरी में सामाजिक स्तर पर सुधार की जरूरत है?

उत्तर- मेरे लिए, देश का हर नागरिक समान है। हमें उसकी बेहतरी की चिंता है, उसके दुख दर्द से सरोकार है। मैं उन्हें धर्म, जाति, वर्ग में बांटकर नहीं देखता। मेरी सरकार का मूल मंत्र भी यही है। आज देश की किसी भी योजना में ये नहीं पूछा जाता कि लाभार्थी का नाम, जाति या पंथ क्या है। जो योजना है सबके लिए हैं। इसीलिए माताएं-बहनें, गरीब, युवा और किसान, चट्टान की तरह मेरे पीछे खड़े दिखते हैं। यही मेरी असली ताकत हैं, इन्हीं से मुझे प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

मुस्लिम समाज को सोचना चाहिए कि उन्हें कांग्रेस के 6 दशक में क्या मिला और पिछले 10 साल में उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मिलीं। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने उन्हें वोटबैंक समझकर उनका इस्तेमाल किया है। ये लोग मुस्लिम समाज को गरीब रखना चाहते हैं। अपनी रोज की जिंदगी में इतना उलझा कर रखना चाहते हैं कि वो अपना भला-बुरा ना समझ पाए। तुष्टीकरण की नीति से मुस्लिम समाज का भला नहीं हो सकता।

प्रश्न 11- 2014 में जब आप सत्ता में आए, तब यह धारणा बनाई गई कि अब भारत के मुस्लिम देशों से रिश्ते प्रभावित होंगे। इसके उलट अरब-खाड़ी देशों से हमारे संबंध बेहतर हुए हैं। सभी प्रमुख मुस्लिम देशों ने आपको अपने यहां का सर्वोच्च सम्मान दिया है। अबुधाबी में पहली बार मंदिर का निर्माण हुआ है। बावजूद इसके देश के मुसलमानों में आपके और आपकी पार्टी के प्रति बेरुखी का भाव क्यों है?

उत्तर- मैं आपकी इस बात से बिलकुल सहमत नहीं हूं कि देश के मुस्लिम समाज के मन में भाजपा के प्रति बेरुखी का भाव है। तीन तलाक की दहशत से जिन बेटियों को मुक्ति मिली है उनसे पूछिए। सिर्फ बेटियां ही नहीं, उनके परिवार ने भी राहत की सांस ली है। अब किसी पिता को ये डर नहीं है कि बेटी अगर लौट आई तो उसके भविष्य का क्या होगा। किसी भाई को ये चिंता नहीं है कि अगर बहन को उसके पति ने तीन तलाक दे दिया, तो उस पर अपना और उसके परिवार को पालने का बोझ आ जाएगा।

हमने बिना मेहरम के हज यात्रा की व्यवस्था शुरू की। हमने हज यात्रा के लिए वीआईपी कोटा खत्म किया। इससे सामान्य मुस्लिम परिवारों को बहुत सुविधा हुई है। हमारी योजनाओं के लाभार्थियों में बड़ी संख्या मुस्लिम समाज की है। उन्हें भी लगता है कि ये सरकार है तो उन्हें सारी सुविधाएं मिल रही हैं। ये सरकार नहीं होती तो उन्हें इन मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता।

देश का मुस्लिम समाज ये भी देख रहा है कि अरब देशों के भारत से संबंध बेहतर हुए हैं। जो मुस्लिम युवा उन देशों में काम करते हैं, वो भी अपने परिवार को बताते हैं कि पिछले 10 वर्षों में वहां उनका सम्मान कितना बढ़ गया है। मैंने हमेशा कहा है कि विदेशों में जो सम्मान मुझे मिलता है, वो मेरा नहीं 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। इस सम्मान का हकदार देश का हर नागरिक है।

प्रश्न 12- चुनाव में अमित शाह जी सहित कई फेक वीडियो आए। चरित्रहनन व दोषारोपण का यह तरीका बड़ी चिंता का विषय बने हैं। क्या कहना है?

उत्तर- मैं तथ्यों के साथ पिछली सरकार के घोटाले, नेताओं के बयान और कांग्रेस की नाकामियां सामने रखता हूं, तो उसे काउंटर करने के लिए फेक नरैटिव गढ़ते हैं। इन पर बोफोर्स का दाग है, जिसे धोने के लिए राफेल का झूठ लेकर आए इन पर हेलीकॉप्टर घोटाले का दाग है, जिसे हटाने के लिए HAL का झूठ लेकर आए। इन पर इमरजेंसी का दाग है, जिसे मिटाने के लिए मुझे तानाशाह कहते रहते हैं।

कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम हमेशा से ही झूठ को हथियार बनाकर चुनाव लड़ता आया है। टेक्नॉलॉजी के दौर में उन्होंने अपने झूठे प्रचार को भी हाईटेक बना लिया है। लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि आज टेक्नॉलॉजी सबके लिए है। हर किसी के पास इंटरनेट पर जाकर सच जानने की सुविधा है। इसलिए इनका झूठ भी कुछ भी मिनटों में बेनकाब हो जाता है।

प्रश्न 13- तीसरी बार सत्ता में आने पर आप बहुत बड़े-बड़े निर्णय की बात करते हैं? यह आपका आत्मविश्वास ही है कि आपने सत्ता में आने पर 100 दिन के काम का एजेंडा भी तैयार करने को कह दिया है। लोगों में बड़ी उत्सुकता है कि आखिर चुनाव बाद पहले सौ दिनों में क्या होने वाला है?

उत्तर– ये लोगों के विश्वास का सम्मान है। देश ने मन बना लिया है कि तीसरी बार एनडीए की सरकार बनानी है। जब देश ने मन बना लिया है तो काम करने लिए समय की बर्बादी क्यों करना। हमारे पास 100 दिनों का एक्शन प्लान पहले से है, जिस पर काम जारी है। इसमें मैंने 25 दिन और जोड़ दिए हैं। मुझे देशभर के युवाओं के संदेश मिल रहे हैं। जिसमें वो अगले 5 वर्ष और अगले 25 वर्षों के रोडमैप पर अपने सुझाव दे रहे हैं। मैंने तय किया है कि 100 दिनों के अलावा 25 दिन युवाओं के सुझाव पर अमल के होंगे।

हमारा एक्शन प्लान एक लंबी एक्सससाइज के बाद तैयार हुआ है। इसमें हमने मंत्रियों, विशेषज्ञों और लाखों लोगों की राय ली है। हमारा लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। इसके लिए एक-एक पल कीमती है। मैं अभी ये कह सकता हूं कि 10 साल में विकास के जो काम हुए हैं, उसके स्केल और स्पीड में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होने वाली है।

प्रश्न 14- नई सरकार के सामने बड़े काम होंगे। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर सहमति बनाना, नारी वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण पर अमल और 2026 में होने वाला परिसीमन। इन प्राथमिकताओं पर क्या कहेंगे?

उत्तर-आप जिन कार्यों की बात कर रहे हैं वो हमारा दायित्व है। हमारी सरकार इन सभी विषयों को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार कानूनों को पास करा कर ठंडे बस्ते में नहीं डालती है। कांग्रेस सरकार सिर्फ नाम करने के लिए कानून बनाती थी, उन्हें नोटीफाइ करने में दशकों लग जाते थे।

हमने जो कानून बनाए हैं, उनके परिणाम अगले 5 वर्षों में आपको दिखने लगेंगे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। ये अधिकार पाने के लिए आधी आबादी को लंबा इंतजार करना पड़ा। सामाजिक न्याय की बात करने वालों ने इसे रोककर रखा था। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे संभव कर दिखाया। हम हर वो काम करने वाले हैं, जिससे देशवासियों का जीवन सुगम हो और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को शक्ति मिले।

प्रश्न 15- पंजाब में इस बार आप अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। किसान आंदोलन अभी भी चुनौती बना हुआ है। भाजपा के लिए वहां कितनी संभावनाएं आप देख रहे हैं?

उत्तर- पंजाब के लोगों में राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि है। पंजाब के सिख भाई-बहन, पंजाब के किसान, व्यवसायी, युवा जानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार देश से जुड़े फैसले लेती है। हमारी सरकार सिख गुरुओं के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर काम करती है। पिछले 10 वर्षों में हमने सिख गुरुओं की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हमने गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया है। हमारे कार्यकाल में करतारपुर कॉरिडोर खोला गया। हमें अफगानिस्तान से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को भारत लाने का सौभाग्य मिला।

किसानों के लिए हमारी सरकार ने बीज से बाजार तक की सुविधा बनाई है। खाद और फर्टिलाइजर की बोरी जो दुनिया मे 3000 रुपए से ज्यादा की मिल रही है, वो हमारे किसानों को 300 रुपए से भी कम में मिल रही है। सिंचाई के लिए व्यवस्था की जा रही है। हम किसानों की छोटी से छोटी जरुरत का ध्यान रख रहे हैं।

पंजाब जांबाज योद्धाओं और बहादुर सैनिकों की धरती है। पंजाब के जो युवा देश की सेना में शामिल हैं, वो जानते हैं कि पिछले 10 वर्षों में कैसे सेना का मनोबल ऊंचा हुआ है। आज देश में एक मजबूत सरकार है, जो दुश्मनों को जवाब देना जानती है। आज देश में एक ऐसी सरकार है, जो अपने एक सैनिक के लिए भी दुश्मन से टकराने का हौसला रखती है। केंद्र की भाजपा सरकार अपने सैनिकों की हर सुविधा का ख्याल रख रही है।
भाजपा जहां भी चुनाव लड़ रही है, वहां अपने रिपोर्ट कार्ड पर वोट मांग रही है। मुझे विश्वास है कि पंजाब में हमें लोगों का समर्थन मिलेगा।

किसानों के लिए हमारी सरकार ने बीज से बाजार तक की सुविधा बनाई है। खाद और फर्टिलाइजर की बोरी, जो दुनिया में 3000 रुपये से ज्यादा की मिल रही है, वह हमारे किसानों को 300 रुपये से भी कम में मिल रही है।

प्रश्न 16- भाजपा के एजेंडे में राम मंदिर, अनुच्छेद-370 और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे थे। दो वादे आपने पूरे कर दिए। अब समान नागरिक संहिता पर कब तक?

उत्तर- देश के कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू है। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने अपने यहां समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया है। इससे वहां किसी को कोई परेशानी नहीं है। विपक्ष भी इसके खिलाफ नहीं बोल पा रहा। यूसीसी संविधान की भावना के अनुरूप है। हमारे संविधान निर्माता भी चाहते थे कि देश में एक तरह की नागरिक संहिता हो। समान नागरिक संहिता हमारे संकल्प पत्र का हिस्सा है, और इसे लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। मुझे आशा है कि जब हम सदन में इसे लेकर आएंगे तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा।

प्रश्न 17- काशी-तमिल संगमम, संसद में सेंगोल की स्थापना, राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से ठीक पहले आपका भगवान राम से जुड़े दक्षिण भारत के स्थलों का दौरा। इसे किस रूप में देखा जाए। क्या आप देश की सांस्कृतिक पहचान की भी लड़ाई लड़ रहे हैं? या फिर जैसा विपक्ष कहता है कि यह बस दक्षिण में पार्टी का आधार बढ़ाने की राजनीति मात्र है?

उत्तर-आजादी के बाद कांग्रेस ने विदेशी शासकों से सिर्फ सत्ता नहीं ली, बल्कि उनके शासन के मंत्र को भी अपना लिया। बांटो और राज करो की नीति पर चलकर ही कांग्रेस ने दशकों तक राज किया। कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति को धर्म, जाति, भाषा, संप्रदाय, क्षेत्र का बंटवारा शक्ति देता है।

पिछले 10 वर्षों में मेरी सरकार ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से काम किया है। मैंने तमिल संस्कृति और आजादी के पहले पल के प्रतीक के तौर पर सेंगोल की स्थापना नई संसद में की। लेकिन इसका महत्व एक प्रतीक से कहीं ज्यादा है। ये आज के भारत को अपनी प्राचीन परंपराओं से जोड़ता है। ये भारत के हर नागरिक को गर्व का एहसास कराता है। संसद में सेंगोल की स्थापना उस साजिश पर चोट है, जिसके तहत आजादी के बाद कई पीढ़ियों में देश की संस्कृति को लेकर हीन भावना भर दी गई। आज मैं बड़े गर्व से दक्षिण भारत का पोशाक धारण करता हूं। जब नॉर्थ ईस्ट जाता हूं तो गर्व से वहां के कपड़े पहनता हूं। मैं यूएन जाकर तमिल बोलता हूं।

मेरे लिए वो भी बहुत गौरव का क्षण था, जब नौसेना के एपोलेट्स और ध्वज पर शिवाजी की विरासत के चिह्नों को जगह दी गई। मुझे बहुत खुशी हुई जब असम के महान योद्धा लसित बोरफुकन की भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित हुई। भाजपा सरकार के प्रयासों से लसित बोरफुकन की 400वीं जयंती पूरे देश ने मनाई। हमारी सरकार आदिवासी गौरव से जन-जन को जोड़ने के लिए जनजातीय संग्रहालय बनवा रही है।

प्राण प्रतिष्ठा से पहले जब मैंने दक्षिण के राज्यों में अनुष्ठान किया तो मैंने पाया कि पूरा देश रामभक्ति के एक ही सूत्र से बंधा है। उनमें भाषा का भेद है, लेकिन भावना एक है। उनके तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन उसमें मूल तत्व एक ही है। मेरे इन कार्यों के पीछे अगर कोई राजनीतिक उद्देश्य देख रहा है, तो उसे याद दिलाना चाहूंगा कि पुदुचेरी में हमारी सरकार है। कर्नाटका में हम सरकार में रह चुके हैं। भाजपा दक्षिण भारत में सबसे बड़ी पार्टी है। हमने दक्षिण में भी वैसे ही प्रचार किया, जैसे देश के दूसरे हिस्सों में किया। और वहां हमें जिस तरह का समर्थन मिल रहा है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि दक्षिण भारत के नतीजे लोगों को चौंकाएंगे।

काशी बहुसंस्कृति की नगरी है। यहां अनेक वर्गों, भाषाओं और प्रांतों के लोग रहते हैं। इसी काशी में हमने काशी तमिल संगमम, काशी तेलुगु संगमम जैसे ऐतिहासिक आयोजन किए। इसी काशी में जी-20 की बैठक हुई। इसी काशी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हुआ। ये अतिथि जब काशी आए तो उन्होंने देखा कि दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी कितनी अलग है।

Following is the clipping of the interview: