Our country is full of talent in every village and town: PM Modi

Published By : Admin | December 25, 2025 | 11:10 IST

संचालक: मैं आपकी अनुमति से अपना विचार साझा करने के लिए ऑपरच्यूनिटी दूंगा। माननीय प्रधानमंत्री जी, हमारे बीच में हमारे असम के सांसद दिलीप साकिया जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र में सांसद खेल महोत्सव आयोजित करा। उसमें शांति कुमारी, हमारी एक एथलीट इस उत्सव में जुड़ी हैं और उन्होंने मुझे आग्रह करा है कि मैं प्रधानमंत्री जी से बात करन चाहती हूं। संवाद करना चाहती हैं। तो मैं सुश्री शांति कुमारी को कहता हूं कि आइए, आप प्रधानमंत्री जी के साथ अपना विचार साझा करिए। माननीय प्रधानमंत्री जी।

शांति कुमारी: नमस्ते सर।

प्रधानमंत्री: शांति जी नमस्ते।

शांति कुमारी: नमस्ते सर।

प्रधानमंत्री: बैठिए, बैठिए बेटा। जरा अपने विषय में बताइए शांति जी। और आपने कबड्डी को क्यों चुना?

शांति कुमारी: हेलो सर।

प्रधानमंत्री: हां शांति जी, मुझे सुनाई दे रहा है बेटा, बोलो बेटा।

शांति कुमारी: सर क्वेश्चन फिर से बोलिए

प्रधानमंत्री: आप अपने बारे में बताइए और दूसरा मैं पूछना चाहता था आपने कबड्डी को ही क्यों चुना?

शांति कुमारी: नमस्ते सर। मेरा नाम शांति कुमारी बोरो। मैं आसाम के दोरांग जिले के भोटरा गांव, टेटली भंगुरी में रहती हूं। सर, मेरे पिता का नाम है नारायण बोरो। मेरा पिता एक किसान है और मां का नाम प्रतिमा बोरो। मेरा मां घर वाली है। घर पे काम-काज करती है और मेरा, मुझे लेकर मेरे घर पे तीन बहनें हैं। मैं सबसे छोटी हूं। मैं कबड्डी को पहले हमारे भोटरा में स्पोर्ट्स क्लब में देखा था। मुझे नहीं पता था कि कबड्डी इतना बड़ा गेम है। पहले मैंने वहां पे प्रैक्टिस किया और मैं इंडिया टीम में भी सलेक्शन मिला था। तो ट्राइल में भी गया था। स्टेट लेबल मैंने चार बार खेला है सर। और फिर मैं कबड्डी को इतना बड़ा गेम नहीं पता था। कबड्डी को मैंने 2022 में खेला था। कबड्डी में इतना...

प्रधानमंत्री: अच्छा शांति, इस बार ये इतनी छोटी उम्र में ही कबड्डी खेलने की प्रेरणा ये कहाँ से आपको हासिल हुई? और क्या घर में आपके जन्म के बाद बहुत शांति हो गई तो ये आपका नाम शांति रख लिया गया।

शांति कुमारी: सर, मैंने छोटी उम्र से ही गेम खेला और गेम खेल के, मुझे कबड्डी खेल कर जैसा नाम शांति है, वैसा ही बहुत शांति मिला है सर।

प्रधानमंत्री: अच्छा आप 10th क्लास में पढ़ती भी हैं और प्रैक्टिस भी कर रही हैं। और घर में 10th की क्लास मतलब एक ऐसा वातावरण बन जाता है जैसे कर्फ्यू लग जाता है। माता-पिता, टीचर सब लग जाते हैं कि टेंथ है, टेंथ है, टेंथ है। तो आप ये दोनों चीजें कैसे मैनेज करती हो?

शांति कुमारी: मैं, यहां हमारा असम का बेस्ट प्लेयर भी हूं और हमारा यहां का एमपी सर, दिलीप सर ने बहुत अच्छा परफार्मेंस दिया था। और दिलीप सर ने, पहले हम कबड्डी को मिट्टी में गेम खेलते थे, कट बनाके। हमारा दिलीप सर ने हमारे गेम खेलने के लिए, खेलो इंडिया में हमारा भर्ती हो गया। और इसके बाद हमें गेम खेलने के लिए मैट में, मैट दिलवाया। हम लोग यहां खेलो इंडिया सेंटर में प्रेक्टिस कर रहा है। और मेरी घर की सपोर्ट से, मेरी कोच की सपोर्ट से, मेरी सभी की सपोर्ट से मैंने खेलकर यहां तक पहुंचा है। इसलिए उन लोगों को, सभी को मैं धन्यवाद बोलना चाहती हूं सर। सर, आपको भी धन्यवाद देती हूं।

प्रधानमंत्री: वाह-वाह, शांति आपने बताया कि आपने खेल, पढ़ाई, ट्रेनिंग सब, बहुत अच्छे से मेहनत कर रही हैं। सांसद खेल प्रतियोगिता के माध्यम से आपको खेलने का इतना अच्छा प्लेटफार्म मिला। ये जानकर भी मुझे अच्छा लगा। हमारी सरकार देश में हर तरह से खिलाड़ियों की मदद कर रही है। हमारी कोशिश है कि हमारे खिलाड़ियों का पूरा जोश, पूरी ताकत, ट्रेनिंग के समय भी और खेलते समय भी और उनका प्रदर्शन लगातार सुधरता रहे। आप लगातार मेहनत कीजिए, सफल होते रहिए...आपको 10th की परीक्षा के लिए भी मेरी बहुत शुभकामनाएं हैं। और कबड्डी के मैदान में भी आप देश का नाम रोशन करें। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत आशीर्वाद बेटा।

संचालक: प्रधानमंत्री जी, बंगाल के दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के हमारे गुणवंश छेत्री भी हमारे साथ जुड़े हैं। वो भी आपके बातचीत करना चाहते हैं। मैं गुणवंश छेत्री जी दार्जिलिंग से कहूंगा कि आप प्रधानमंत्री जी से बात कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री: गुणवंश छेत्री जी नमस्ते।

गुणवंश: आदरणीय प्रधानमंत्री जी नमस्कार।

प्रधानमंत्री: गुणवंश, आपको तो हॉकी विरासत में मिली है। क्या पिताजी आपको हॉकी की बारीकी बताते हैं?

गुणवंश: हां सर, मेरे पिताजी मुझे बहुत सारे टिप्स देते हैं। कभी भी ओवरकॉन्फिडेंट नहीं होना, कभी भी प्रेशर में नहीं आना है। हमेशा इजी खेलना है।

प्रधानमंत्री: अच्छा, जब आप खेलते हैं, तो क्या आप चाहते हैं कि पिताजी आपका खेल देखें। या फिर आपको लगता है कि अगर पिताजी मैदान में रहे, तो डांट-पड़ताल पड़ जाएगी। तो उसके बजाए अच्छा है कि वो घर में ही रहें।

गुणवंश: नहीं सर, मैं चाहता हूं कि मेरे पिताजी हमेशा मेरे साथ ग्राउंड में रहें और मुझे मेरे खेल को देखें। और मैंने मिस्टेक्स की हैं। और मैं चाहता हूं कि वो मुझे मिस्टेक्स ठीक करने के लिए मदद करें।

प्रधानमंत्री: अच्छा गुणवंश, आप दिन में कितना समय प्रैक्टिस के लिए निकालते हो?

गुणवंश: सर, सुबह पांच बजे उठकर प्रैक्टिस करने जाता हूं, सर।

प्रधानमंत्री: अब आप पांच बजे उठते हो और जो बच्चे अभी सुन रहे हैं ना वो तो कभी सूर्योदय भी नहीं देखते हैं। और आप पांच बजे उठकर मेहनत कर रहे हो।

गुणवंश: जी सर,

प्रधानमंत्री: तो आपके सारे दोस्तों को भी लगता होगा कि इतनी मेहनत क्यों कर रहे हो।

गुणवंश : हां जी सर।

प्रधानमंत्री: अच्छा गुणवंश जी, ये बताइए कि आपकी हॉकी की यात्रा में ये जो सांसद खेल महोत्सव चल रहा है और सांसद महोदय आपके बगल में भी बैठे हैं, तो इसके कारण आपको कितनी मदद मिल रही है?

गुणवंश: सर, मुझे सांसद खेल महोत्सव में मुझे कॉन्फिडेंस मिला। मैं और अच्छे से खेलने के लिए और मुझे इसमें बेस्ट गोल कीपर भी मिला था।

प्रधानमंत्री: गुणवंश, आपको घर और बाहर दोनों जगहों पर शानदार कोच मिले हैं। आपने अपनी सफलता की यात्रा शुरू कर दी है। आप लगातार मेहनत कीजिए और हां पिताजी की बातों पर हमेशा ध्यान दीजिएगा। उनका अनुभव आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। आपको बस मेहनत करनी है। और मुझे अच्छा लगा, पांच बजे उठ करके आप मैदान में पहुंच जाते हैं, ये अपनेआप में इसके प्रति आपका कितना कमिटमेंट है। ये दिखाई दे रहा है। और मैं विश्वास से कहता हूं कि आप जिस प्रकार से मेहनत कर रहे हैं। आपकी मेहनत जरूर रंग लाएगी। मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद हैं आपको।

गुणवंश: थैंक्यू सर।

संचालक: प्रधानमंत्री जी, हमारे तमिलनाडु के राज्यसभा के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन जी ने भी नीलगिरी तमिलनाडु में सांसद खेल महोत्सव का आयोजन करा है। उसमें एक 14 वर्षीय साइकिल, पोलो और कबड्डी तीनों गेम्स खेलने वाली नेशिका के.पी. भी आपसे बात करना चाहती है। नेशिका जी आप प्रधानमंत्री जी से बात कर सकती हैं।

नेशिका: नमस्ते सर।

प्रधानमंत्री: नेशिका जी वणक्कम।

नेशिका: वणक्कम सर।

प्रधानमंत्री: अच्छा जरा नेशिका जी, आप अपने बारे में कुछ बताइए। आप क्या करती हैं, कौनसा खेल खेलती हैं।

नेशिका: मैं एसएसवीएम की छात्रा हूं। नेशनल लेवल साइकिल पोलो और स्टेट लेवल कबड्डी प्लेयर हूं।

प्रधानमंत्री: वाह, अच्छा आपने बताया कि आप दो-दो खेलों में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। आप ये कैसे मैनेज करती हैं। दो खेलों में एक साथ, पूरा फोकस दे पाना जरा कठिन काम होता है।

नेशिका: सर, खेल मेरी पढ़ाई को कभी डिस्टर्ब नहीं करता। मैं रोज स्कूल के बाद एक घंटा प्रैक्टिस करती हूं। मेरे पैरेंट्स और स्कूल दोनों सपोर्ट करते हैं।

प्रधानमंत्री: अच्छा, अगर आपको एक स्पोर्ट्स को चुनना हो तो आप कौनसा खेल चुनोगी?

नेशिका: सर मैं कबड्डी चुनूंगी। क्योंकि बचपन से खेल रही हूं और यह हमारे राज्य का खेल है और मुझे कबड्डी प्लेयर होने पर गर्व है।

प्रधानमंत्री: आपके बगल में पीटी उषा जी बैठी हैं। वो बचपन से इसी में लगी हैं। आप उनसे कुछ बातें की क्या आज?

नेशिका: हां सर, उनसे सीखना मेरे लिए गर्व की बात है।

प्रधानमंत्री: आपको सांसद खेल महोत्सव का जो ये कार्यक्रम मैं पीछे लगा हुआ हूं, देशभर के एमपीज को कहता हूं कि हर साल एक बार खेल महोत्सव का आयोजन करना चाहिए। और धीरे-धीरे मैंने देखा कि सभी एमपी बराबर काम कर रहे हैं। आपके यहां भी भले हमारे राज्यसभा के सांसद हैं, लेकिन वो भी कर रहे हैं। ये सांसद खेल महोत्सव से आपको कितनी मदद मिली?
नेशिका: सर, सबसे पहले तो आपको धन्यवाद। इसके बाद एल मुरुगन जी को धन्यवाद, जिन्होंने यहां इसका आयोजन किया और इसमें हमें टैलेंट दिखाने का मौका मिला और स्किल डेवलप करने में मदद मिली। धन्यवाद सर।

प्रधानमंत्री: नेशिका, हमारे देश के हर शहर में, हर गांव में टैलेंट का भंडार भरा हुआ है। आप एक नहीं, दो-दो खेल और सिर्फ खेल ही नहीं आप उसमें शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। आप दोनों खेलों की जो अच्छाई है, उसे अपनी ताकत बनाइए। और जब कोई स्थिति आए कि आपको एक खेल चुनना है तो खूब सोच-समझकर फैसला लीजिएगा। मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत आशीर्वाद है। वणक्कम।
नेशिका: थैंक्यू सर।

संचालक: प्रधानमंत्री जी, स्वाभाविक है कि और लोग चाहते हैं कि हम आपके संवाद करें। लेकिन सभी को तो हम ऑपरच्यूनिटी नहीं दे सकते हैं। लेकिन अंत में हमारे सिरसा में सुभाष बारला जी ने भी हरियाणा में बहुत अच्छा सांसद खेल महोत्सव करा। और बॉक्सिंग और कुश्ती हमारी हरियाणा की ताकत रही है स्पोर्ट्स में। ऐसे ही हमारे एक युवा खिलाड़ी नीरज कुमार वे आपसे बात करना चाहते हैं। नीरज आप प्रधानमंत्री जी से बात कर सकते हो।

नीरज: सर जी, राम राम हम सभी की तरफ से।

प्रधानमंत्री: नीरज राम राम

नीरज: और कैसे हो

प्रधानमंत्री: मैं तेरे जैसा ही हूं। अच्छा नीरज, ये नीरज नाम सुनकर ही तुम्हें लगा होगा कि मेरा नाम नीरज है मैं भी नीरज चोपड़ा बन जाऊं।

नीरज: हां जी।

प्रधानमंत्री: अच्छा नीरज, अपने बारे में कुछ बताइए?

नीरज: मेरा नाम नीरज है जी। मेरे पिताजी का नाम श्री बलवान सिंह है और वे कोआपरेटिव सोसाइटी में अपनी जॉब करते हैं और मम्मी अपना घर का काम करती है। मैं हरियाणा के टोहाना के गांव डांगरा से रहने वाला हूं। और मैं बॉक्सिंग फील्ड का खिलाड़ी हूं, जिसमें मैं नेशनल मेडलिस्ट भी हूं।

प्रधानमंत्री: अच्छा, आपने क्या अब खेलों में आगे करियर बनाने के बारे में सोचा है।

नीरज: हां जी। मेरा ये ही सोच राख्या है कि भई अब बॉक्सिंग से ही करना है जी। जो भी करना है। मैं चाहता हूं कि मैं भारत देश के लिए ओलंपिक और गोल्ड मेडल लाकर देऊं जी।

प्रधानमंत्री: आप क्या दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बाक्सर्स के मैच कभी इंटरनेट पर देखते हैं क्या?

नीरज: हां जी। विश्व के और अपने देश के भी घणे बॉक्सर हैं जी अच्छे अच्छे। जिनकी मैं फाइट देखूं जी और उन्होंने मोटिवेट होउं जी और उन्हें सीखूं जी कि किस तरह मारण लाग रहे हैं और मारकर गेरण लाग रहे है।

प्रधानमंत्री: तो ये मोबाइल फोन पर बैठे रहते होंगे तो पिताजी कहते होंगे कि जाओ खेलो, ये क्या कर रहे हो तुम, ऐसा तो नहीं होता है ना।

नीरज: हां ये तो है जी, कई बार आ जाए सामणे तो फिर इंटरेस्ट बणे ही रहे जी बॉक्सिंग में। हम भी देख लया जी किस तरह मारण लाग रया है। आपां भी गेर दियां तगड़े मार के।

प्रधानमंत्री: सांसद खेल महोत्सव इसमें आप कब से खेल रहे हैं। क्योंकि सांसद खेल महोत्सव लगातार पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है। और सांसद खेल महोत्सव में खेलने का जो मौका मिला है, ये जो एक्सपोजर और प्रतिस्पर्धा आपको एक खेल में सुधार करने के लिए बहुत काम आती है। खेलते रहना एक तरीका है लेकिन स्पर्धा से निकलते रहना ये भी उतना ही महत्व है। तो वो आपको कैसे मदद कर रहा है।

नीरज: ये जी हमारे सांसद खेल महोत्सव, हमारे आदरणीय श्री सुभाष बराला जी ने करवाए हैं। इनके नेतृत्व में हुए, इतने बढ़िया गेम हुए जी, जबर्दस्त कि कभी देक्खे ही नहीं कि इस तरह के गेम भी होओगे कदे। और हमारे इसमें सुविधा इतनी बढ़िया थी जी कि आणा, जाणा, रहणा, खाणा-पीणा, घर से लेकर जाणा और छोड़ के आणा। जमां तगड़ा कर राक्खा था जी। जिमें सारे बालकां ने स्वाद आ गया।

प्रधानमंत्री: क्या नीरज, आज मैं ये मानकर जाऊं कि आने वाले समय में हमारा एक और हरियाणवी बॉक्सर देश को गोल्ड मेडल जिताएगा?

नीरज: हां जी।

प्रधानमंत्री: देखिए, सब लोग तालियां बजा रहे हैं अभी से।

नीरज: जरूर जी, आप ये मान के चालो जी। आणे वाले ओलंपिक में या फिर उसके अगले में जरूर जी आपसे मिलूं जी और वो मेडल आपके हाथ लेकर देऊं जी कि ये अपने देश का मेडल है जी। अपने देश का झंडा सबसे ऊपर हो गया। और ईब अपणै ठाठ से रहो।

प्रधानमंत्री: देखिए नीरज, मैं तो हंसी-मजाक कर रहा हूं। मेरी कोई बात को आप प्रेशर की तरह मत लीजिएगा। मस्ती से खेलते रहिए। मेडल तो अब अपने आप आएगा। आप अपनी मस्ती में रहिए। मैं अपने सभी खिलाड़ियों से कहता हूं कि जीत-हार से ज्यादा महत्वपूर्ण है सीखना। आप या तो जीतते हैं या फिर सीखते हैं। खेल के मैदान में कोई हारता ही नहीं है। एक जीतता है, दूसरा सीखता है। आप लोग लगातार प्रयास करते रहें और अपनी ट्रेनिंग, एक्सपोजर, डाइट इस तरह की चिंताओं से मुक्त रहें। आपकी इस तरह की चिंता करने के लिए सरकार है। मैं सभी खिलाड़ियों को और सभी प्रतिभागियों को पूरा मन लगाकर प्रयास करने का आग्रह करूंगा। मुझे विश्वास है कि परिणाम जरूर आएंगे। मेरी तरफ से आप सबसे बात करने का मौका मिला। मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

नीरज: थैंक्यू सर।

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।