ನಾನು ಬಹಳ ಭಕ್ತಿಯಿಂದ ಸಮುದ್ರಕ್ಕೆ ಹೋಗಿದ್ದೆ, ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣನ ಆಶೀರ್ವಾದ ಪಡೆಯಲು ನಾನು ಅಲ್ಲಿಗೆ ಹೋಗಿದ್ದೆ ಆದರೆ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ 'ಶೆಹಜಾದಾ' ಅದನ್ನು ಗೇಲಿ ಮಾಡಿದರು ಎಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ಹೇಳಿದ್ದಾರೆ.
ಅಯೋನ್ಲಾದಲ್ಲಿ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ರ್ಯಾಲಿಯನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡಿದ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ, ಈ ಚುನಾವಣೆಯು ದೇಶವನ್ನು 1000 ವರ್ಷಗಳ ಗುಲಾಮಗಿರಿಯ ಮನಸ್ಥಿತಿಯಿಂದ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಮುಕ್ತಗೊಳಿಸುವ ಚುನಾವಣೆಯಾಗಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದರು.

बदायूं और बरेली वालों को राम-राम!

सबसे पहले तो मुझे यहां पहुंचने में विलंब हुआ, इतनी गर्मी में आप सबको इंतजार करना पड़ा। आपको जो तकलीफ हुई, उसके लिए मैं आप सबकी क्षमा चाहता हूं। यह जो स्नेह, यह जो प्यार आप मुझ पर, मेरे इन साथियों पर बरसाते हैं यही मेरी पूंजी है। यह आपका प्यार ही मेरे जीवन की ऊर्जा है। विशेष रूप से माताएं-बहनें इतनी विशाल संख्या में यहां आई हैं। मोदी आपकी सेवा में जीवन के पल-पल और शरीर का कण-कण आपकी सेवा के लिए खपाने के लिए निकला हुआ है। मैं कश्मीर से कन्याकुमारी, हिंदुस्तान के अनेक राज्यों में चुनाव भ्रमण के लिए गया। जनसभाओं का संबोधन करने का अवसर मिला और हिंदुस्तान के हर कोने से एक ही आवाज आ रही है- फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार!

भाइयों और बहनों,

मैं एक प्रार्थना करूं आप मेरी बात ध्यान से सुनोगे। मुझे जवाब दीजिए। मैं एक प्रार्थना करूं, आप मेरी बात ध्यान से सुनोगे। देखिए, इस जगह बहुत छोटी पड़ गई और इसलिए आप में से कुछ लोग आगे आने की कोशिश कर रहे हैं। कृपा करके आप जहां है, वहीं खड़े रहिए। अब जगह नहीं है। अब जगह नहीं है, आप आगे नहीं आ पाएंगे और आपको असुविधा के लिए फिर से क्षमा मांगता हूं। पर आप वही शांति से, मेरे पास जितना समय है। मेरी बात मुझे कहने का मौका दीजिए। आपका प्यार मेरे सर आंखों पर। आपका आशीर्वाद यह मेरे लिए ऊर्जा है। मेरी बात मानोगे। बोलिए भारत माता की जय!

भाइयों और बहनों,

कहा जाता है जितनी मजबूत नींव उतना ही मजबूत घर। इसी सोच के साथ आज भाजपा विकसित भारत के लिए गरीब, किसान, युवा और नारीशक्ति को सशक्त कर रही है। यह भाजपा है, जिसने बहनों को बिजली, नल से जल, शौचालय, सस्ते गैस कनेक्शन ऐसे अनेक रोजमर्रा की आवश्यकताएं यह दिया है। यह भाजपा है, जिसने मुफ्त राशन की योजना चलाई, ताकि किसी मां के बच्चे को भूखे सोने की नौबत ना आए। हमने मुफ्त इलाज की योजना चलाई, ताकि बहनों को अपनी बीमारी न छुपानी पड़े। अब तो मोदी ने देश के हर परिवार के बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज की गारंटी दी है और मेरी आपसे विनती है। आप जब लोगों को मिलने जाए ना, तो हर परिवार में 70 साल से ज्यादा आयु के बुजुर्ग है, उनको बताइए अगर बीमारी में जो खर्चा आपके बेटे को करना पड़ता था, वह खर्चा अब दिल्ली में जो आपका बेटा बैठा है ना, वो करेगा। यह बता देंगे। हर बुजुर्ग को बता देंगे। 70 साल से ऊपर की उम्र का कोई भी बुजुर्ग अब उनके इलाज का खर्चा, उनके परिवार के लोगों के सिर पर नहीं पड़ेगा, यह जिम्मेवारी मोदी की रहेगी। जब से पीएम-आवास के ज्यादातर घर देश की करोड़ों बहनों के नाम हुए हैं, तब से उनकी आर्थिक शक्ति कई गुना बढ़ गई है।

साथियों,

आने वाले 5 साल देश की नारीशक्ति का जीवन और अधिक शक्तिशाली बनाने वाला होगा। हम खेत में ड्रोन से लेकर इसरो में, जहां से चंद्रयान चलते हैं, नारीशक्ति का विस्तार देखेंगे। आने वाले समय में 3 करोड़ ग्रामीण बहनों को हम लखपति दीदी बनते देखेंगे और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

हमारे योगी जी और उनकी पूरी टीम उत्तर प्रदेश में जो मेहनत कर रही है, उस मेहनत से आज यूपी की पहचान नए अवसरों की धरती के तौर पर बन रही है। योगी जी के नेतृत्व में यूपी का भाग्य बदल रहा है और यूपी के सांसद के नाते मेरे लिए भी ये गर्व का विषय है। यहां तो नैनो यूरिया की इतनी बड़ी फैक्ट्री है। ऐसे अनेक कारखाने यहां लग रहे हैं। पहले आपका हक का पैसा भ्रष्टाचारी लूट लेते थे। आज देखिए, बरेली और बदायूं के किसानों को ही पीएम किसान सम्मान निधि से 600 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। ऐसे काम तब होता है, जब विकास सबसे ऊपर होता है। सर्वोपरि होता है।

भाइयों और बहनों,

चौबीस का ये चुनाव 1000 वर्ष की गुलामी की मानसिकता से देश को पूरी तरह से मुक्त करने का चुनाव है। यह चुनाव भारत के स्वाभिमान को नई बुलंदी देने वाला चुनाव है। आप जरा याद कीजिए, 10 साल पहले तक सपा और कांग्रेस यह दोनों लोग क्या कहते थे। हमें चिड़ाने के लिए आए दिन कहते थे। ये भाजपा वाले बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और कहते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे। फिर वो मजाक उड़ाते थे, मंदिर वहीं बताएंगे, तारीख नहीं बताएंगे। ऐसी गाली देते थे कि नहीं देते थे। ऐसी गाली देते थे कि नहीं देते थे और मैं चुपचाप सब गाली सहता था। चुपचाप सहता था। आपके आशीर्वाद से हमने मंदिर भी बनवाया। प्रभु रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा भी हो गई। हुई कि नहीं हुई। हमने तारीख भी बताई। टाइम भी बताया। जगह भी बताई और जाकर के निमंत्रण भी दिया। लो भाई, यह जगह है, तारीख है, समय है। आओ प्रभु राम के प्राण-प्रतिष्ठा का इतना बड़ा अवसर, लेकिन उनका अहंकार इतना था। ये अपनेआप को प्रभु राम से भी बड़े मानते हैं और इन लोगों ने सपा और कांग्रेस दोनों ने इतना बड़ा पवित्र काम, राम मंदिर का निमंत्रण उनको घर जा कर के दिया गया था। उस निमंत्रण को उन्होंने ठुकरा दिया। क्यों? एक ही गणित था कि अगर मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को स्वीकार किया तो उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा। राम ही नहीं, बल्कि इन्होंने हमारे श्याम को भी नहीं छोड़ा। आप जानते हैं कि हमारे भगवान श्री कृष्ण, उन्होंने प्राचीन द्वारका नगरी समुंदर के पास गुजरात में बनाई थी और वो वहीं आकर रहे थे। और पुरातत्वविदों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण वाली द्वारिका है वो उस किसी जमाने में पानी में डूब गई। वो पानी के नीचे है तो मैं बड़ी श्रद्धा के साथ समंदर में गया। बहुत नीचे गया। प्रभु श्री राम की, प्रभु श्री कृष्ण के उस द्वारिका के उन पत्थरों को स्पर्श करके आशीर्वाद लेने के लिए मैं वहां गया। लेकिन कांग्रेस के शहजादे ने उसका भी मजाक उड़ाया और मैं तो हैरान हूं यह उत्तर प्रदेश में सपा के ठेकेदार जो खुद को यदुवंशी बताते हैं, जो यदुवंशी कहते हैं, ऐसे सपा के परिवारवादी वो भी ये श्री कृष्ण की मजाक उड़ाने वालों की, बेइज्जती करने वालों की आरती उतार रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।


भाइयों और बहनों,

सपा कांग्रेस का इंडी गठबंधन तुष्टिकरण लिए किसी भी हद तक जा सकता है। आप देखिए, आजकल समाजवादी पार्टी के साथ दोस्ती की कसम खाई कांग्रेस के खतरनाक इरादों से पूरे देश में हंगामा मचा है। कांग्रेस का ये खतरनाक पंजा फिर देश के लोगों का हक छीनने वाला है। आपका हक छीनने वाला है। कांग्रेस का इरादा है, ओबीसी जातियों को मिलने वाला आरक्षण छीनकर उनका हिस्सा उनके जो खास पसंद की वोट बैंक है, वो खास पसंद की वोट बैंक को दिया जाएगा। आपका हक छीन लिया जाएगा। वोट बैंक की राजनीति मजबूत करने के लिए किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी के इन इरादों पर समाजवादी पार्टी के शहजादे ने चुप्पी साध रखी। इन सारी बातों को समाजवादी पार्टी का पूरा-पूरा समर्थन है। आपको याद होगा, यहां यूपी में ही 2012 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यूपीए सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रयास किया था। उस समय उनकी कोशिशें सफल नहीं हुईं, लेकिन अब यह लोग मिलकर फिर से धर्म के आधार पर आरक्षण देने में जुट गए हैं।

साथियों,

कल से देश में एक नया नारा चर्चा में आया है और नया नारा मैं बताऊं, बताऊं, बताऊं। आप याद रखोगे। और यह बहुत, हम सबके लिए चिंता वाला नारा है। क्या चर्चा चल रही है, कांग्रेस की लूट, कांग्रेस की लूट, जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी। इसका मतलब है कांग्रेस चाहती है कि आपकी संपत्ति की जांच कराई जाए। आपकी संपत्ति का सर्वे कराया जाए। एक्सरे निकाला जाए, एक्सरे। आपके पास कितना सोना है। कितने गहने हैं। कितने रुपए हैं। कितने वाहन है। गाड़ी कितनी। ट्रैक्टर कितना। साइकिल है कि नहीं है। सारा सर्वे किया जाए और फिर इसके बाद कांग्रेस का इरादा है आपकी संपत्ति को भी छीनकर वो अपने चहेती वोट बैंक को मजबूत करने के लिए वहां दे देंगे।

इतना ही नहीं कांग्रेस चाहती है, आपने जो संपत्ति अपने बच्चों के लिए जुटाई है और आप चाहते हैं कि मरने के बाद अपने संतानों को कुछ देकर के जाएं और इसलिए आप बचत करते हैं अब कांग्रेस वालों ने घोषणा की है कि मृत्यु के बाद ये जो आपकी संपत्ति है, उसमें से सब आपके संतानों को नहीं मिलेगी। आधे से ज्यादा संपत्ति ये सपा-कांग्रेस की सरकारें जप्त कर लेंगी। टैक्स ऐसा लगाएंगे कि वह संपत्ति जप्त हो जाएगी। यानी आपने चार कमरों का घर बनाया हो तो उसमें से दो कमरे कांग्रेस-सपा सरकार दबोच लेगी। आपके पास 10 बीघा का खेत है तो उसमें से पांच बीघा आपके बेटे-बेटियों को मिलेगा। पांच बीघा ये दबोच लेगी, कांग्रेस और एसपी की सरकार। और यह किसको बांटेंगे। यह सब लूट करके अपनी वोट बैंक को बांटेंगे। बताइए, यहां भी जितनी माताएं-बहनें हैं, आप भी अपने बेटी-बेटे के लिए, पोते पोती के लिए, नाती-नातिन के लिए कुछ ना कुछ जुटा रहीं होंगी। इकट्ठा करती होगी। पोता बड़ा होगा तो उसको दूंगी। पोती बड़ी होगी तो उसको दूंगी। हमारे यहां हर परिवार में हर पीढ़ी के लोग अपनी दूसरी पीढ़ी को कुछ न कुछ देने के लिए बचाते रहते हैं। लेकिन, अब आपकी इस बचत पर कांग्रेस की बुरी नजर पड़ गई है। कांग्रेस और सपा वालों ने तय किया है कि विदेश में ऐसा होता है, तो यहां भी करेंगे। विदेश में तो महिलाएं मंगलसूत्र क्या होता है वो भी उनको पता नहीं है, भाई। ये मंगलसूत्र छीनने की बात करते हैं। क्या कोई मां-बहन इस देश में मंगलसूत्र छीनने देगी क्या। मंगल सूत्र छीनने देगी क्या। आप विदेशों का हवाला देते हैं। उनकी अपनी दुनिया अपने परिवार हैं। दरअसल, इन लोगों की नीयत ठीक नहीं है। दो शहजादों की जोड़ी भी देखिए कैसी है। सपा के शहजादे की जब सकार थी, तब यहां कर्फ्यू लगते थे। माताएं-बहनें गहने पहनकर, मंगलसूत्र पहन करके खुलेआम नहीं निकलती थीं। मंगलसूत्र छिपा के रखना पड़ता था और कांग्रेस के शहजादे अब एक्सरे मशीन लगाकर, यह जो स्त्री धन है। उसको भी, मंगलसूत्र को भी छीनने की घोषणा कर रहें हैं।

और साथियों

सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि कांग्रेस का इरादा संस्थाओं का दफ्तरों का भी सर्वे कराने का है। यानी अगर किसी पिछड़े दलित परिवार में दो लोग नौकरी में है तो एक नौकरी छीनकर यह लोग उनको देंगे, जिनका कांग्रेस के मुताबिक देश के संसाधनों पर पहला हक है और इसलिए भाइयों बहनों यह चुनाव भले है, लेकिन उससे भी गंभीर मुद्दा है जिस पर सतर्क रहने की जरूरत है। हम किसी भी हालत में आपके हक को छीनने नहीं देंगे।

भाइयों और बहनों,

इंडी गठबंधन के नेता इसलिए वोट मांग रहे हैं, ताकि धर्म आधारित आरक्षण देने के लिए संविधान बदल सकें। और मैं 400 सीटें इसलिए मांग रहा हूं, ताकि प्रदेशों में जो उन्होंने खेल शुरू किया है यह धर्म के आधार पर आरक्षण देकर के SC-ST-OBC आरक्षण लूटने का उन्होंने मन में मंसूबा रखा है, उसको हमेशा-हमेशा ताला लगाने के लिए मुझे 400 सीट की जरूरत है भाइयों। आपकी रक्षा के लिए मुझे 400 सीट चाहिए। आपके हक को कोई छीन ना ले, इसलिए मुझे 400 सीट की जरूरत है। मैं यूपी के OBC समाज अपने सभी कुर्मी भाई-बहन, यादव भाई-बहन, मोर्या-कुशवाहा भाई बहन, जाट-गुर्जर भाई-बहन, राजभर तेली पाल समाज, ये सबको गारंटी दे रहा हूं। मैं आरक्षण का आपका अधिकार कभी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को छीनने नहीं दूंगा। और ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी यह सिर्फ अपने परिवार का ही सोच सकती है। इन लोगों के लिए अपना परिवार ही सब कुछ है। आप इनके लिए कोई मायने नहीं रखते। आप खुद देख रहे हैं, यहां यूपी में सपा को अपने परिवार के बाहर का एक भी यादव ऐसा नहीं मिला, जिसे वो टिकट दे सके। यहां बदायूं हो, मैनपुरी हो, कन्नौज हो, आजमगढ़ हो, फिरोजाबाद हो सब जगह एक ही परिवार के सदस्यों को टिकट मिला है। ऐसे लोग हमेशा सिर्फ अपने परिवार का ही भला करेंगे। परिवार के बाहर का कोई भी व्यक्ति हो, इनके लिए कोई मायना नहीं रखता।

भाइयों और बहनों,

मजबूत भारत के लिए SC-ST-OBC और महिलाओं के हक की सुरक्षा के लिए आपको हर बूथ पर कमल खिलाना है। खिलाएंगे। घर-घर जाएंगे। मतदाताओं को जगाएंगे। मेरी बात पहुंचाएंगे। ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाएंगे। देखिए, आंवला से मेरे पुराने साथी धर्मेंद्र कश्यप जी और बदायूं से हमारे साथी दुर्विजय शाक्य जी को दिया हुआ आपका एक-एक वोट मोदी को जाएगा। आपका वोट आप कमल पर बटन दबाएंगे ना, तो सीधा-सीधा मोदी को जाएगा और इसलिए 7 मई को कितनी ही गर्मी क्यों ना हो, पहले मतदान फिर जलपान। यह घर-घर जाकर आग्रह करना है। मेरी तरफ से हाथ जोड़कर बताएगा कि मोदी जी ने आपको राम-राम कहा है। मेरे साथ बोलिए

भारत माता की जय!
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बहुत-बहुत धन्यवाद!

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India is not just progressing, India is moving to the Next: PM Modi
March 12, 2026
We have One goal, one destination, ‘Viksit Bharat’: PM
Despite many global crises, the world's leaders and experts look to India with great hope: PM
If you want to be part of the future, you have to be in India : PM
India is not just progressing; India is moving to the Next level : PM
India will make every effort to ensure that its farmers and citizens are protected from the burden of global challenges : PM

आज 12 मार्च का दिन बहुत ऐतिहासिक है। 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की थी। ये भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक टर्निंट प्वाइंट था। क्योंकि इस यात्रा ने देश के कोने-कोने को एक लक्ष्य के साथ जोड़ दिया था और ये लक्ष्य था- भारत की आजादी। आज इस ऐतिहासिक यात्रा के करीब 100 वर्षों के आसपास हम भारतीय फिर एक नई यात्रा पर निकले हैं। ये यात्रा है- विकसित भारत की यात्रा। हमारा लक्ष्य एक है, हमारी मंजिल एक है - विकसित भारत। और इस लक्ष्य की प्राप्ति में ऐसी समिट्स में हुआ मंथन इनसे निकला अमृत बड़ी भूमिका निभाता है। मैं आप सभी का आभारी हूं आपने मुझे नेक्स्ट समिट के लिए आमंत्रित किया। यहां देश से दुनिया से बहुत सारे साथी आए हैं, कुछ पुराने परिचित भी हैं, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

21वीं सदी का ये कालखंड ना भूतो न भविष्यति जैसा है। एक तरफ युद्ध की विभिषिका है, सप्लाई चेन फिर से तहस-नहस हो रही है संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लग रहा है, और ऐसे कालखंड में हमारा भारत इन विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया इतिहास के जिस महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ी है, उस पड़ाव पर जिस देश के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है- वो है भारत। वर्तमान में इतने सारे संकटों के बीच दुनिया का हर गंभीर नेतृत्व हर जानकार भारत को लेकर बहुत उम्मीदों से भरा हुआ है। अभी हाल ही में फिनलैंड के प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर स्टब भारत आए थे। उन्होंने कहा कि अब दुनिया की दिशा, ग्लोबल साउथ तय करेगा और उस दिशा को निर्धारित करने वाली सबसे बड़ी शक्ति होगा - भारत। इससे पहले कनाडा के पीएम कार्नी ने भी कहा था कि अगले तीन दशकों में दुनिया की Economic Gravity जिस सेंटर की ओर शिफ्ट हो रही है, उसका नाम भारत है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी मानते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मुद्दों को सुलझाने वाला एक इनएविटेबल पार्टनर बन चुका है। आज टेक वर्ल्ड और अर्थ जगत के ग्लोबल लीडर्स के बयानों का निचोड़ निकालें तो एक ही भाव सामने आता है, अगर आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना ही होगा, भारत में होना ही होगा।

साथियों,

अभी-अभी भारत ने टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप जीता है। हर कोई खुश है और भारत में तो क्रिकेट का मामला ऐसा है कि अगर किसी ऑफिस में कोई करोड़ों की बात चलती हो, कोई बढ़िया प्रेज़ेंटेशन चल रहा होता है विदेश के मेहमान प्रेज़ेंटेशन कर रहे हों फिर भी वो जरा स्लाइड से नजर हटा कर के वो स्कोर क्या देखता है। और कोई न कोई तो पूछ ही लेता है- भाई स्कोर क्या हुआ ठीक ऐसी ही स्थिति, आज भारतीय अर्थव्यवस्था की है। आज हर कोई इकॉनॉमी की रनिंग कमेंट्री चाहता है। भारत की इकॉनॉमी का पिछले महीने क्या स्टेटस था आज क्या हाल है ये सब जानने के लिए देशवासी उत्सुक रहते हैं। मुझे याद नहीं पड़ता, इतनी उत्सुकता देश में पहले थी या नहीं थी ? और थी तो कब थी? ये दिखाता है कि आज भारतीयों की एस्पिरेशन्स और आत्मविश्वास किस स्तर पर हैं। यही, दुनिया के भारत पर भरोसे का सबसे बड़ा कारण भी है।

और साथियों,

निश्चित तौर पर जब इतनी सारी उम्मीदें जुड़ी हों, दुनिया की नजर हमारे देश पर हो तो हम सभी की जिम्मेदारी और ज्यादा जाती है।

साथियों,

आज का भारत सिर्फ आगे नहीं बढ़ रहा। भारत खुद को Next Level पर ले जा रहा है। आज देश में Next Generation फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, हम नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहे हैं UPI ने Digital Payments को Next Phase में पहुँचा दिया है। आज भारत दुनिया में सबसे तेज़ real-time digital payments करने वाला देश बना है।

साथियों,

भारत आज नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स भी कर रहा है, वो Reform एक्सप्रेस पर सवार है। कभी भारत में कई काम, कई निर्णय Next to Impossible माने जाते थे, आज भारत वो निर्णय भी ले रहा है। कभी कहा जाता था कि Article 370 हटाना नामुमकिन है। लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में Article 370 की दीवार गिर चुकी है। कभी लगता था कि देश में सबका बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना असंभव है। लेकिन आज 50 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों ने ये संभव कर दिखाया है। कभी लगता था कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना असंभव है। लेकिन आज मुस्लिम बहनों को इस अन्याय से मुक्ति मिली है। कभी महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में तैंतीस परसेंट आरक्षण भी असंभव लगता था। लेकिन आज इसके लिए कानून बन चुका है। कभी अंतरिक्ष और advanced technology को लेकर भी भारत की लिमिट्स बताई जाती थीं। लेकिन आज मून मिशन, Semiconductor Mission, क्वांटम मिशन, ये सब भारत को Next फ्रंटियर of Technology की ओर ले जा रहे हैं।

साथियों,

आज का भारत केवल सपने नहीं देख रहा। भारत उन्हें सच कर रहा है। इसीलिए आज दुनिया कह रही है- India is not just progressing. India is moving to the Next.

साथियों,

देश के विकास का एक बहुत बड़ा आधार होता है कि हम चुनौतियों से कैसे मुकाबला कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि वैश्विक परिस्थितियाँ अचानक बदलती हैं। बीते वर्षों में हमने पहले कोरोना की आपदा देखी फिर रूस-यूक्रेन का संकट देखा और अब हमारे बहुत पास में ही एक और बड़ा युद्ध चल रहा है। इस युद्ध ने पूरे विश्व को बहुत बड़े ऊर्जा संकट में धकेल दिया है।

साथियों,

ऐसी विकट परिस्थितियों में बहुत अहम है कि एक देश के तौर पर हम इसका कैसे मुकाबला करते हैं। संकट काल एक प्रकार से, पूरे राष्ट्र की परीक्षा होती है। शांति के साथ धैर्य के साथ हमें परिस्थितियों से निपटना होता है जनविश्वास बढ़ाकर जनता को जागरूक करते हुए, हमें चलना होता है। और इसमें हर किसी की भूमिका होती है। हर राजनीतिक दल की, मीडिया की, सामाजिक संस्थाओं की, इंडस्ट्री की, युवाओ की गांव की शहर की हर किसी की भूमिका अहम होती है। और हमने कोरोना काल में देखा है जब सब मिलकर चलते हैं तो संकट से मुकाबले के लिए देश का सामर्थ्य कई गुणा बढ़ जाता है। आज देश के सामने एक और चुनौती है और इसलिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्य निभाने होंगे।

साथियों,

आजकल बहुत चर्चा LPG को लेकर हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं, अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के समक्ष खुद तो एक्सपोज़ हो ही रहे हैं और देश का भी बड़ा नुकसान कर रहे हैं।

साथियों,

आज युद्ध से जो ये वैश्विक संकट आया है उसके प्रभाव से कोई देश अछूता नहीं है। कम अधिक मात्रा में हर कोई शिकार है, भारत सरकार भी, इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। और हम अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बीते दिनों, दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से मेरी इसको लेकर बातचीत हुई है। सप्लाई चेन में जो बाधाएं आई हैं, उससे हम कैसे पार पाएं, इसके लिए भी निरंतर प्रयास चल रहे हैं।

साथियों,

भारत के तेज विकास के लिए अलग-अलग एनर्जी सोर्सेस को बढ़ावा देना निरंतर जरूरी रहा है। और इसको मजबूत करने के लिए हमने दो स्तरों पर एक साथ काम किया है। पहला देश में एनर्जी एक्सेस बढ़े हमने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया।

और दूसरा- Energy के लिए हमें सिर्फ विदेशों पर निर्भर ना रहना पड़े, इसके लिए Energy सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर बल दिया। अब मैं आपको Gas सेक्टर के ही कुछ आंकड़े देता हूं। साल 2014 तक देश में सिर्फ 14 करोड़ LPG कनेक्शन थे। यानि देश के करीब-करीब आधे परिवारों पास ही LPG कनेक्शन था। आज दोगुने से भी अधिक यानि करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं। बीते 11 वर्षों में हमने अपनी बॉटलिंग कैपेसिटी को दोगुना किया है। डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर भी 13 हज़ार से बढ़कर 25 हज़ार से अधिक हो गए हैं 2014 में देश में सिर्फ 4 LNG Terminals थे, आज इनकी संख्या भी बढ़कर दोगुनी हो गई है। गैस पाइपलाइन जो करीब साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर होती थी उसको 10 हज़ार किलोमीटर तक विस्तार दिया है। क्योंकि करीब 60 परसेंट LPG विदेशों से आती है इसलिए देश के बड़े पोर्ट्स पर इंपोर्ट टर्मिनल कैपैसिटी भी बहुत बढ़ाई गई है।

साथियों,

साल 2014 से पहले तक देश में सिर्फ 25-26 लाख घरों में ही, पाइप से सस्ती गैस यानि PNG की सुविधा थी। आज ये संख्या भी सवा करोड़ से अधिक पहुंच गई है। 2014 में देश में CNG पर चलने वाली गाड़ियां भी 10 लाख से ज्यादा नहीं थी। आज ये संख्या 70 लाख से अधिक है। और ये तभी संभव हो पा रहा है क्योंकि बीते दशक में देश के 600 से अधिक जिलों में City Gas Distribution network स्थापित किए गए हैं।

साथियों,

इस वैश्विक संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना इतना अधिक जरूरी क्यों है। इसलिए ही बीते वर्षों में हमने भारत को एनर्जी सेक्टर्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए होलिस्टिक तरीके से काम किया है।

साथियों,

पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करने के लिए हमने इथेनॉल पर, बायोफ्यूल पर बल दिया। 2014 से पहले देश में सिर्फ एक-डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी ही थी। आज हम पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। अगर ये काम न किया होता तो हमें बीते 11 वर्षों में करीब 18 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल विदेशों से खरीदना पड़ता। आज की स्थिति देखें तो इथेनॉल के कारण हमें प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है। यानि करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की बचत तो देश को सिर्फ इसी से हुई है।

साथियों,

भारत में पेट्रोलियम का बहुत बड़ा कंज्यूमर हमारी रेलवे भी है। हमारे देश में रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम 60 साल पहले शुरू हुआ था। बावजूद इसके 2014 तक सिर्फ 20 परसेंट रेलवे रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन ही हो पाया था। बाकी रेलवे रूट्स पर हजारों डीजल इंजन चला करते थे। आज भारत में ब्रॉडगेज नेटवर्क का करीब-करीब 100 percent बिजलीकरण हो चुका है। इससे, साल 2024-25 में ही भारतीय रेलवे ने करीब 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत की है। अगर इलेक्ट्रिफिकेशन न हुआ होता तो हर वर्ष इतना डीज़ल बनाने के लिए एक्स्ट्रा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता। ऐसे ही, हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस किया।

ऐसे ही एक और बहुत बड़ा काम हमने रीन्युएबल एनर्जी को लेकर किया है। आज हमारी टोटल installed power generation capacity का आधा हिस्सा रीन्यूएबल सोर्स से आता है। हमारी कुल रिन्यूएबल क्षमता आज 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। आप सोचिए साल 2014 में भारत की सोलर पावर कैपेसिटी सिर्फ दो गीगावॉट थी, आज ये करीब चालीस गुणा बढ़कर hundred and thirty गीगावॉट हो चुकी है। घरेलू उपयोग में गैस के अलावा बिजली अधिक से अधिक काम आए इसके लिए पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना लागू की गई। अभी तक इस स्कीम के तहत करीब 30 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर लगाए हैं।

साथियों,

इसके अलावा हमने गोबरधन स्कीम पर भी काम किया। इसके तहत Compressed Biogas बनाने पर काम किया गया। अभी तक देश में 100 से अधिक प्लांट चालू हो चुके हैं और 600 से ज्यादा पर काम चल रहा है।

साथियों,

पेट्रोल-डीज़ल के क्षेत्र में हमने कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी व्यापक प्रयास किया है। 2014 से पहले भारत के पास strategic पेट्रोलियम रिज़र्व यानि संकट के समय के लिए कच्चा तेल स्टोर करने की कैपेसिटी ना के बराबर थी। आज हमारे पास, 50 लाख टन से अधिक का strategic पेट्रोलियम रिज़र्व है। और इससे भी अधिक कैपेसिटी पर काम चल रहा है। बीते दशक में अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी हमने सालाना 40 मिलियन टन से अधिक की वृद्धि की है। तभी भारत आज दुनिया के सबसे बड़े refining hubs में से एक बना है। यानि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कितने बड़े पैमाने पर और कितनी बड़ी दिशाओ में काम कर रहे हैं। ये युद्ध की वजह से जो संकट बना है, उसका मुकाबला भी हम जरूर कर पाएंगे। मेरा 140 करोड़ देशवासियों पर पूरा भरोसा है। जैसे एक साथ संगठित होकर कोविड के संकट से हमने देश को बाहर निकाला था उसी प्रकार हम इस वैश्विक संकट को भी पार कर लेंगे। और मैं फिर दोहराउंगा जहां तक सरकार का प्रश्न है, हम किसी भी प्रकार के प्रयत्न या प्रयास में कोई कमी नहीं आने देंगे। हमारे हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रहेगा।

साथियों,

यूक्रेन युद्ध से लेकर आज तक हमने ये देखा है कि कैसे इसका प्रभाव वैश्विक मार्केट से लेकर दुनिया के नागरिकों पर पड़ता रहा है। लेकिन भारत सरकार का हमेशा से हर संभव प्रयास रहा है कि युद्ध से बनी परिस्थितियों का बोझ भारत के नागरिकों पर ना पड़े। जैसे जब रूस-यूक्रेन का संकट बढ़ा था , तो उस कालखंड में फर्टिलाइजर की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। इसके बावजूद यूरिया की जो बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3000 रुपए में मिल रही थी वो हमने अपने किसानों को सिर्फ 300 रुपए में दी थी। दुनिया में 3000 रुपया चल रहा था हमारे यहाँ 300 में दिया जा रहा था , इस बार भी हमारा हर संभव प्रयास होगा कि देश के किसान देश के नागरिकों के जीवन पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े।

साथियों,

आज के इस अहम समय में... आज इस मंच से राज्य सरकारों से भी एक अनुरोध है। ये जरूरी है कि कालाबाज़ारी न हो, अफवाहें न फैलें इसलिए स्थिति की गंभीरता से मॉनीटरिंग आवश्यक है जो कालाबाजारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़े एक्शन भी जरूरी हैं।

साथियों,

बीता एक दशक, आत्मनिर्भरता के साथ-साथ संवेदनशील गवर्नेंस का भी रहा है। हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा, वहां रहने वाले लोग दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकारों की सोच से भी दूर रहे। लेकिन हमारी सरकार ने विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को गवर्नेंस की प्राथमिकताओं से जोड़ा। आज इन इलाकों में हाउसिंग हो, रोड्स हों, स्कूल-हॉस्पिटल हों ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए ही Aspirational District योजना, Aspirational ब्लाक योजना पीएम जनमन योजना जैसी स्पेशल अभियान चलाए जा रहे हैं।

साथियों,

कांग्रेस की सरकारों का एक बहुत बड़ा पाप ये भी रहा कि उन्होंने देश के एक बड़े हिस्से को माओवादी आतंक की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था। देश के करीब-करीब हर बड़े राज्य का बहुत बड़ा हिस्सा माओवादी आतंक की गिरफ्त में था। लेकिन साथियों,

बीते सालों में देश ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। हम बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़े। और इसका नतीजा आज देश देख रहा है। साल 2013 में 180 से अधिक जिले, 180 से ज्यादा डिस्ट्रिक्ट माओवादी आतंक से प्रभावित थे। आज माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या सिंगल डिजिट में पहुंच चुकी है।

साथियों,

बीते एक साल में ही 2100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है 900 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं, और जो हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, ऐसे 300 से अधिक कट्टर नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। इसका परिणाम ये हुआ कि जो इलाके कभी डर के साए में जीने को मजबूर थे वहां आज विकास की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

साथियों,

भारत आज जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसकी प्रगति की गति को रोकना असंभव है। 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षा आज next level पर है। मैं जानता हूं कि जब एक सपना पूरा होता है तो नए सपने, नई आकाक्षाएं जन्म लेती हैं। मैं इसे बोझ नहीं मानता, बल्कि जनता के विश्वास की पूंजी मानता हूं। हां...देश में मेरे कुछ ऐसे शुभचिंतक हैं जिनको लगता है कि उम्मीदों के बोझ तले मोदी कभी तो दबेगा, कभी तो कुचला जाएगा लेकिन उनकी नीयत इतनी खोटी है, कि उनकी उम्मीदें पूरी ही नहीं होती, और देशवासियों का आशीर्वाद जब तक है तब तक ये पूरी होंगी भी नहीं। अब सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों की आशाएं और आकांक्षाएं ही पूरी होंगी। भारत हर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत हर हाल में विकसित बनेगा।

इसी भावना के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं।

आप सभी का फिर से बहुत-बहुत आभार।

धन्यवाद