ಶೇರ್
 
Comments
Only a strong government can ensure a nation’s security, which in turn is essential for its long-term development: PM Modi
The BJP-led NDA governments have always demonstrated their paramount commitments to strengthening national security: PM Modi in U.P.
The entire nation suffered greatly under ‘Mahamilawati’ governments of Congress-SP-BSP but still they say ‘Hua Toh Hua’: Prime Minister Modi

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेतागण और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, 2014 में पूर्वांचल ने जिस प्रकार इस सेवक को देश की सेवा के लिए दिल्ली भेजा, उसका परिणाम आज पूरा देश गौरव के साथ अनुभव कर रहा है। पांच वर्ष में आपके प्यार और समर्थन से मैं राष्ट्रहित में बड़े और कड़े फैसले ले पाया हूं। चाहे भ्रष्टाचार से लड़ने का मामला हो, या फिर आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने का। साथियो, बीते पांच वर्षों में हमने देश के विकास की एक ठोस नींव बनाई है। सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने का सफर अब तेज गति से आगे बढ़ाना है। भाइयो-बहनो, मुझे कुछ महीने पहले ही यहां महाराजा सुहेलदेव जी की स्मृति में एक डाक टिकट जारी करने का सौभाग्य मिला था। इससे पहले हमारे अध्यक्ष श्रीमान अमित शाह जी ने यहां सुहेलदेव जी की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया था।

भाइयो-बहनो, ऐसी विभूतियां जिन्होंने हमारे समाज, हमारे देश के लिए हमारी परंपरा और संस्कृति के प्रचार के लिए जीवन समर्पित किया है। उन्हीं की प्रेरणा से मैंने दिन-रात मेहनत की है। देश को आगे बढ़ाया है। अब बोलना शुरू करूं? आप सबका चेहरा कैमरा में आ गया है, मुझे परेशान मत कीजिए?  भाइयो-बहनो, आज कल जो भी गाजीपुर को देखकर जाता है वो कहता है, काम तो बहुत भइल बा, कमवा दिखाई पड़ता, कमवा चाहि कि जातिवा चाहि, सम्मान चाहि कि माफिया के धोंस चाहि। भाइयो-बहनो, आज गाजीपुर पूर्वांचल सहित समूचा पूर्वी भारत विकास की मुख्य धारा से जुड़ रहा है। गांव में सड़कें बन रही हैं। हाइवे के काम चल रहे हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बन रहा है। रेलवे का अभूतपूर्व काम हुआ है। इसके अलावा कार्गो सेंटर, अस्पताल, मेडिकल कॉलेज जैसी जरूरी सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है। भाइयो-बहनो, कांग्रेस ने कैसे पीढ़ियों तक गरीबों को ठगा है, गरीबों के नाम पर वोट बटोरे हैं। उसका साक्षी ये हमारा गाजीपुर है। हमारे गहमरी बाबू ने नेहरु जी को इस क्षेत्र में गरीब की जमीनी सच्चाई दिखाई थी। गहमरी बाबू के कहने पर ही ताड़ीघाट से गाजीपुर के बीच पुल की अनुशंसा तब सरकार ने की थी। लेकिन दशकों बीत गए ये पुल कभी नहीं बना। इस पुल को बनाने के लिए, इस क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाई पहुंचाने के लिए आप सबने ईश्वर ने मुझे सौभाग्य दिया।

भाइयो-बहनो, कांग्रेस, सपा-बसपा ने हमेशा सिर्फ अपने परिवार के विकास के बारे में ही सोचा है। राष्ट्र का विकास पिछड़े हुए क्षेत्रों का विकास इस पर ध्यान देने की इन लोगों ने जरूरत ही नहीं समझी। कांग्रेस और उसके महामिलावटी साथियों ने तीन शब्दों के आधार पर देश चलया है। आपको मालूम है तीन कौन से शब्द हैं? आपको मालूम है तीन कौन शब्द हैं? उनका तो ये मंत्र ही है हुआ तो हुआ? कोई परवाह नहीं, अहंकार, हुआ तो हुआ। देश में गरीबों की रसोई का खर्च बढ़ता रहा, महंगाई बढ़ती रही, ये महामिलावटी कहते रहे कि हुआ तो हुआ। देश का गरीब इलाज के लिए परेशान होता रहा और ये महामिलावटी लोग कहते रहे हुआ तो हुआ। देश का किसान अधूरी सिंचाई परियोजनाओं की वजह से पानी के लिए परेशान होता रहा, ये मिलावटी कहते रहे हुआ तो हुआ। देश के हजारों गांव, करोड़ों परिवार बिजली के बिना अंधेरे में परेशान होते रहे। ये लोग कहते रहे, क्या कहते रहे? क्या कहते रहे? क्या कहते रहे? हुआ तो हुआ। साथियो, ये अहंकार खुद को राजा समझने और देश के लोगों को अपना गुलाम समझने की प्रवृत्ति कांग्रेस और उसके साथियों में चाहे सपा हो या बसपा हो। कूट-कूट कर के भरी हुई है। गाजीपुर सहित पूरे पूर्वी भारत में गरीबी और बदहाली के लिए भी इनका यही स्वार्थ जिम्मेदार है। साथियो, इन महामिलावटी लोगों की सच्चाई देखने के बाद आपने 2014 में इस सेवक को सम्मान दिया। अपनी सेवा का अवसर दिया। बिना भेदभाव भी विकास हो सकता है। सबका साथ सबका विकास हो सकता है, ये हमने कर के दिखाया है। आज गरीब से गरीब परिवार को भी अच्छे से अच्छे अस्पताल में पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था हुई है।

गरीब से गरीब को भी अपना पक्का घर मिल रहा है। गरीब से गरीब को भी बैंक में खाता खुला है। बैंक से बिना गारंटी का मुद्रा लोन मिल रहा है। अब तो गांव गांव में डाक घर भी बैंक सेवा देना शुरू कर रहे हैं। अब छोटे से छोटे किसान के बैंक खाते में सीधा पैसा आ रहा है। खाद्य के लिए उन्हें कम परेशान होना पड़ रहा है। साथियो, इसे पूरे चुनाव के दौरान पहले चरण से सपा, बसपा वाले मेरी जाति को लेकर हमले करते रहे हैं। भाइयो-बहनो, मैं पिछड़ी जाति में पैदा जरूर हुआ, लेकिन हर पिछड़े को हर गरीब को इस देश को अगड़ा बनाने के लिए दिन रात एक कर रहा हूं। मैं गरीब जरूर पैदा हुआ, लेकिन देश से गरीबी हटाने के लिए जी जान से जुटा हूं। मुझसे जो लोग मेरी जाति का सर्टिफिकेट मांगते हैं, उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि मेरी एक ही जाति है और मेरी जाति है गरीबी। ये मेरी जाति है। आप लोग तमाम तमाम तरीकों से गरीबों के नाम पर जातिवाद के नाम पर। जातियों का गरीबों का शोषण कर के अरबों -खरबों रुपयों के मालिक हो गए हो, तो इसका मतलब ये नहीं है कि मेरी गरीब जाति का आप मजाक उड़ाते रहे। भाइयो-बहनो, इन लोगों को तो कभी पांच साल कभी दो साल कभी सात साल मुख्यमंत्री रहने का मौका मिला है। मैं गुजरात का सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रह के आया हूं। पांच साल से प्रधानमंत्री हूं जरा मेरा बैंक खाता देख लीजिए कहीं मोदी के नाम का बांगला हो तो खोजकर के निकाल दीजिए। गरीबों के लिए जीने के लिए, गरीबों के पति संवेदना चाहिए मैं गरीबी से निकलकर के आया हूं दोस्तों। गरीबों के दर्द को जानता हूं मैं। मैंने न मेरे लिए पैसे जमा किए हैं। न अपने परिवार को कुछ दिया है। जो कुछ भी कर रहा हूं, जो कुछ भी कर रहा हूं मेरे 130 करोड़ देशवासियों के लिए कर रहा हूं। ये लोग जितनी भी गालियां मुझे देते रहे, मेरा ध्यान देश के विकास पर रहेगा। साथियो, आजादी के बाद हमारी पहली ऐसी सरकार है, जिसने महिलाओं के लिए इतने काम किए हैं, और सिर्फ शहर की महिला नहीं, गांव की महिला के लिए भी हम दिन रात चिंता करते रहते हैं। जीवन के हर पड़ाव में महिलाओं की आवश्यकताओं को देखते हुए हमारी सरकार ने अनेक योजनाएं लागू की है। मेरी गरीब से गरीब दलित, वंचित, आदिवासी, पिछड़े समाज की बहनों को गैस का कनेक्शन धुएं से मुक्ति के लिए गैस का चूल्हा पहुंचाया है। गरीब माताओं, बहनों को इज्जत घर मिले इस सोच के लिए अंधेरे का इंतजार करने का कष्ट और अपमान से मुक्ति मिली है। शौचालय बनाए है। ये हमारी ही सरकार है जिसने बलात्कार, रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए फांसी तक की सजा का प्रावधान किया है। महिला हितों और महिला सुरक्षा के प्रति हम पूरी तरह संवेदनशील है। लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर कांग्रेस किस तरह का काम कर रही है। वो देश फिर देख रहा है।

साथियो, बीते तीन दिन से राजस्थान के अलवर की एक खबर धीरे-धीरे बाहर आने लगी है। वहां एक दलित बेटी के साथ दो हफ्ते पहले कुछ दरिदों ने सामूहिक बलात्कार किया। लेकिन उन दरिंदों को राजस्थान की कांग्रेस की सरकार ने पकड़ने के बजाय, वहां की पुलिस, वहां की कांग्रेस सरकार इस केस को ही छिपाने में दबाने में जुट गई। साथियो, राजस्थान में भी चुनाव थे इसलिए वहां की कांग्रेस सरकार ये नहीं चाहती थी कि चुनाव से पहले ये खबर बाहर आए। ये खबर को दबाना चाहते थे। गुनहगारों को बचाना चाहते थे। वोट बैंक बटोरना चाहते थे। भाइयो-बहनो, आप मुझे बताइए जिस बेटी पर सामूहिक बलात्कार हुआ, उस बिटिया को न्याय दिलाने की बजाय चुनाव बचाने का काम ये कांग्रेस की सरकार करती रही। भाइयो-बहनो, यही, यही कांग्रेस के न्याय की सच्चाई है। कांग्रेस को डर था कि दलित बेटी से बलात्कार की बात खुलने से उसके वोट पर असर पड़ेगा, इसलिए उसने इस पीड़ित की बात को भी अनसुना कर दिया। जो चुनाव के समय बलात्कार जैसी जघन्य वारदात को भी छिपाने की कोशिश करे और इनके राग दरबारी भी इतने भयंकर कांड को दबाते रहे। और ये मोमबत्तियां लेकर के निकल पड़ने वाले लोग उनकी मोमबत्तियों से धुआं निकल रहा है, बेइमानी का धुआं निकल रहा है। ये जो बारी बारी से अवॉर्ड वापसी की गैंग थी, जरा उस अवॉर्ड वापसी को पूछना चाहता हूं कि अलवर की बेटी पर बलात्कर होना आपकी अवॉर्ड वापसी गैंग क्यों सो गई है। क्यों चुप बैठ गई है? साथियो, कांग्रेस न बेटी के साथ न्याय कर सकती है, न बेटे के साथ। न्याय के नाम पर कांग्रेस और उसके साथियों ने हमेशा देश के साथ अन्याय किया है।

साथियो, मां भारती की रक्षा के लिए यहां के सपूत देश के हर कोने में तैनात हैं। सीमा पर जाइए को न कोई गाजीपुर का नौजवान मिल जाएगा। और हमारा गहमर गांव, हमारे गहमर गांव की तो हिंदुस्तान के हर कोने में चर्चा होती है। हर माता, मां भारती की सेवा में अपने सपूतों को खुशी खुशी सेना में भेजती है। लेकिन देश की रक्षा के लिए, अपने जान की बाजी लगाने वालों के लिए। इन लोगों की सोच क्या है? इन लोगों की सोच क्या है? ये भी आपको जानना जरूरी है। भाइयो-बहनो, जो बात मैं बताने वाला हूं गाजीपुर के लोगों के लिए चौंकाने वाली है। हर वीर माता के लिए चौंकाने वाली है। पूरे हिंदुस्तान के आंख में आंसू ला देने वाली घटना है। कर्नाटक में कांग्रेस ने जिनको मुख्यमंत्री बनाया है, उस मुख्यमंत्री के पिता प्रधानमंत्री भी रहे हैं। भले ही टेम्परेरी रहे हो। कुछ समय रहे हो लेकिन प्रधानमंत्री पद पर थे। और उनका बेटा कांग्रेस ने उनको मुख्यमंत्री बनाया है। ये कांग्रेस ने जिनको मुख्यमंत्री बनाया।

जो कर्नाटक में सरकार चला रहे हैं। उन्होंने क्या बयान दिया है, ये बयान एक बयान ऐसा है जिस बयान को लेकर ये सपा हो बसपा हो कांग्रेस हो। उनके जितने महामिलावटी साथी हो उनको जीवन भर बहिष्कार करना चाहिए। ऐसी बात उन्होंने बोली है। उन्होंने कहा, देखिए ये अपमान कैसा किया है। उन्होंने कहा सेना में तो वहीं लोग जाते हैं जिनके पास खाने के लिए नहीं होता है। भूखे मरते हैं। दो टाइम की रोटी नहीं है। इसलिए सेना में जाते हैं। क्या गाजीपुर, क्या हमारा पूर्वांचल इसलिए अपने बच्चों को फौज में भेजता है क्योंकि वो भूखे मरते हैं। इनके पास पेट भरने के लिए कुछ नहीं है। आप इनकी बातों से सहमत है? ये सेना का अपमान है कि नहीं है? वीर माताओं का अपमान है कि नहीं? आपकी वीर संतानों का अपमान है कि नहीं है? ये देश के लिए मर मिटने वालों का अपमान है कि नहीं है? इन अपमान का बदला लोगे कि नहीं लोगे? पूरी ताकत से लोगे की नहीं लोगे? भाइयो-बहनो, ऐसे लोगों को माफ नहीं किया जा सकता है। वो रोटी खाने के लिए नहीं गोली खाने के लिए जाता है। देश के लिए मरने के लिए जाता है। साथियो, आज तक आपने सुना कि कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी अपने इस साथी के बयान और मुख्यमंत्री का बयान सामान्य नहीं होता है। अभी तक इस बयान को गलत बयान इन्होंने नहीं कहा है। उनकी चुप्पी बताती है कि वो आपके इस अपमान का समर्थन करते हैं। वीरों का अपमान करते हैं। वीर माताओं का अपमान करते हैं। आप मुझे बताइए और पूरी ताकत से बताना, पूरी ताकत से बताएंगे? हाथ ऊपर कर के बताएंगे? क्योंकि गाजीपुर से सपा, बसपा, कांग्रेस को पूरे देश में संदेश जाना चाहिए। आप मुझे बताइए जो लोग वीर माताओं का अपमान करें, वीर पुत्रों का अपमान करें सेना में जाने वाले का अपमान करें। क्या ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए? मिलनी चाहिए? मिलनी चाहिए? भाइयो-बहनो, जम्मू-कश्मीर में जहां शांति की स्थापना के लिए हमारे सपूत डटे हुए हैं।

पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे हैं। वहां तैनात उन सपूतों के जीवन को संकट में डालने का काम ये सपा, बसपा और कांग्रेस वाले कह रहे हैं। वो कह रहे हैं कि अलगाववादियों से बातचीत होनी चाहिए। सैनिकों को मिला विशेष अधिकार खत्म होना चाहिए। देशद्रोह का कानून खत्म कर देना चाहिए। भाइयो-बहनो, बुआ-बबुआ हो या कांग्रेस इन महामिलावटियों की ये कैसी सोच हैं वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि मोदी को हटाना है। मोदी को क्यों हटाना है क्योंकि उसने आतंकवादियों, नक्सलवादियों, अलगाववादियों को सबक सिखाने की ठानी है। आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले, आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले पाकिस्तान के घर में घुसकर मारने की नीति ये मोदी ने बनाई है। क्या इसलिए मोदी को हटाना है। देश के शहरों को बम धमाके से बचाया। क्या देश के सामान्य नागरिक को बम धमाको से बचाना चाहिए कि नहीं चाहिए? क्या इसलिए मोदी को हटाना चाहते हो? आतंक को निर्यात करने वाले पाकिस्तान के हाथ मे मोदी ने कटोरा पकड़ा दिया है। क्या इसके लिए मोदी को हटाना है? भाइयो-बहनो, देश के एक बड़े हिस्से ने इन स्वार्थियों को पहचान लिया है। इनके पास सिर्फ पीएम बनने के सपने हैं। देश के लिए विजन नहीं है। ये लोग 20वीं सदी वाली समाज को बांटने वाली अफवाहों को बाहुबली राजनीति ही कर सकते हैं। इनको ये अहसास ही नहीं है कि 21वीं सदी के युवा के सपने अलग है, वो एक नया हिंदुस्तान चाहता है। यहां उसकी आकांक्षाओं को उड़ान मिले, यही कारण है कि आज पूरा देश कह रहा है, जी भर कर के कह रहा है। फिर एक बार मोदी सरकार। फिर एक बार मोदी सरकार। फिर एक बार मोदी सरकार। विकास और राष्ट्र को लेकर हमारी भावना मजबूत रहे, इसके लिए दिल्ली में मजबूत सरकार फिर से बनानी है। हर बूथ पर आपको कमल खिलाना है। भाइयो-बहनो, आप चाहते हैं देश मजबूत बने? देश को मजबूत बनाना है? देश को मजबूत बनाना है? तो अपने बूथ को मजबूत बनाओगे? बूथ को मजबूत बनाओगे ?घर-घर जाओगे ? मतदाताओं से मिलोगे ? मतदान करने के लिए समझाओगे? कमल पर बटन दबाने के लिए कहोगे? चुनाव के दिन घर से लेकर जाओगे? जलपान के पहले मतदान कराओगे? 10 बजे से पहले ज्यादा से ज्यादा मतदान हो जाएगा? गर्मी कितनी ही हो मतदान ज्यादा होगा? माताएं-बहनें मेहनत करेंगी? बहनों का मतदान ज्यादा होगा? पहली बार जो मतदाता है उनका मत आएगा? नए मतदाता मत करेंगे? आप लोग पूरी ताकत लगाएंगे? भाइयो-बहनो, आप इतनी ताकत लगाओगे तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि कमल के निशान पर पड़ा आपका हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, आप सबके आशीर्वाद के लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। मेरे साथ बोलिए,

भारता मात की जय भारत माता की जय, भारत माता की जय

बहुत बहुत धन्यावाद       

ನಿಮ್ಮ ಸಲಹೆ ಸೂಚನೆಗಳನ್ನು ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರೊಂದಿಗೆ ಮನ್ ಕೀ ಬಾತ್ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಿ.
20 ವರ್ಷಗಳ ಸೇವಾ ಮತ್ತು ಸಮರ್ಪಣದ 20 ಚಿತ್ರಗಳು
Explore More
ಚಾಲ್ತಾ ಹೈ' ವರ್ತನೆಯನ್ನು ಬಿಟ್ಟು  ಮತ್ತು ' ಬದಲ್ ಸಕ್ತ ಹೈ'  ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುವ ಸಮಯವಿದು : ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

ಚಾಲ್ತಾ ಹೈ' ವರ್ತನೆಯನ್ನು ಬಿಟ್ಟು ಮತ್ತು ' ಬದಲ್ ಸಕ್ತ ಹೈ' ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುವ ಸಮಯವಿದು : ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
Modi’s Human Touch in Work, Personal Interactions Makes Him The Successful Man He is Today

Media Coverage

Modi’s Human Touch in Work, Personal Interactions Makes Him The Successful Man He is Today
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s address in Abhidhamma Day at Mahaparinirvana Temple in Kushinagar, UP
October 20, 2021
ಶೇರ್
 
Comments
“Buddha's message is for the whole world, Buddha's Dhamma is for humanity”
“Buddha is universal because Buddha said to start from within. Buddha's Buddhatva is a sense of ultimate responsibility”
“Buddha, even today, is the inspiration of the Constitution of India, Buddha's Dhamma Chakra is sitting on the tricolour of India and giving us momentum.”
“Lord Buddha’s message ‘Appa Deepo Bhava’ is the motivation for India to become self-reliant”

नमो बुद्धाय!

इस पवित्र मंगल कार्यक्रम में उपस्थित उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, कैबिनेट में मेरे सहयोगी श्री जी किशन रेड्डी जी, श्री किरण रिजिजू जी, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, श्रीलंका से कुशीनगर पधारे, श्रीलंका सरकार में कैबिनेट मंत्री श्रीमान नमल राजपक्षा जी, श्रीलंका से आए अति पूजनीय, हमारे अन्य अतिथिगण, म्यांमार, वियतनाम, कंबोडिया, थाइलैंड, लाओ PDR, भूटान और दक्षिण कोरिया के भारत में एक्सीलेंसी एंबेसेडर्स, श्रीलंका, मंगोलिया, जापान, सिंगापुर, नेपाल और अन्य देशों के वरिष्ठ राजनयिक, सभी सम्मानित भिक्षुगण, और भगवान बुद्ध के सभी अनुयायी साथियों!

आश्विन महीने की पूर्णिमा का ये पवित्र दिन, कुशीनगर की पवित्र भूमि, और अपने शरीर- अंशों- रेलिक्स, के रूप में भगवान बुद्ध की साक्षात् उपस्थिति! भगवान बुद्ध की कृपा से आज के दिन कई अलौकिक संगत, कई अलौकिक संयोग एक साथ प्रकट हो रहे हैं। अभी यहाँ आने से पहले मुझे कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोकार्पण का सौभाग्य मिला है। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जरिए पूरी दुनिया से करोड़ों बुद्ध अनुयायियों को यहाँ आने का अवसर मिलेगा, उनकी यात्रा आसान होगी। इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर श्रीलंका से पहुंची पहली फ्लाइट से अति-पूजनीय महासंघ, सम्मानित भिक्षुओं, हमारे साथियों ने, कुशीनगर में पदार्पण किया है। आप सभी की उपस्थिति भारत और श्रीलंका की हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है।

साथियों,

हम सभी जानते हैं कि श्रीलंका में बौद्ध धर्म का संदेश, सबसे पहले भारत से सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा ले कर गए थे। माना जाता है कि आज के ही दिन ‘अर्हत महिंदा’ ने वापस आकर अपने पिता को बताया था कि श्रीलंका ने बुद्ध का संदेश कितनी ऊर्जा से अंगीकार किया है। इस समाचार ने ये विश्वास बढ़ाया था, कि बुद्ध का संदेश पूरे विश्व के लिए है, बुद्ध का धम्म मानवता के लिए है। इसलिए, आज का ये दिन हम सभी देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने का भी दिन है। मैं आप सभी को बधाई देता हूँ कि आप आज भगवान बुद्ध के महा-परिनिर्वाण स्थल पर उनके सामने उपस्थित हैं। मैं श्रीलंका और दूसरे सभी देशों से आए हमारे सम्मानित अतिथिगणों का भी हार्दिक स्वागत करता हूँ। हमारे जो अतिपूजनीय महासंघ, हमें आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हैं, मैं उन्हें भी आदरपूर्वक नमन करता हूँ। आपने हम सबको भगवान बुद्ध के अवशेष स्वरूप- रेलिक्स के दर्शन का सौभाग्य दिया है। यहां कुशीनगर के इस कार्यक्रम के बाद आप मेरे संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी जा रहे हैं। आपकी पवित्र चरण रज, वहां भी पड़ेगी, वहां भी सौभाग्य लेकर आएगी।

साथियों,

मैं आज International Buddhist Confederation के सभी सदस्यों को भी बधाई देता हूँ। आप जिस तरह आधुनिक विश्व में भगवान बुद्ध के सन्देश को विस्तार दे रहे हैं, वह वाकई बहुत सराहनीय है। आज इस अवसर पर मैं अपने पुराने सहयोगी श्री शक्ति सिन्हा जी को भी याद कर रहा हूं। International Buddhist confederation के डीजी के तौर पर कार्य कर रहे शक्ति सिन्हा जी का कुछ दिन पहले स्वर्गवास हुआ है। भगवान बुद्ध में उनकी आस्था, उनका समर्पण हम सबके लिए एक प्रेरणा है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, आज एक और महत्वपूर्ण अवसर है- भगवान बुद्ध के तुषिता से वापस धरती पर आने का! इसीलिए, आश्विन पूर्णिमा को आज हमारे भिक्षुगण अपने तीन महीने का ‘वर्षावास’ भी पूरा करते हैं। आज मुझे भी वर्षावास के उपरांत संघ भिक्षुओं को ‘चीवर दान’ का सौभाग्य मिला है। भगवान बुद्ध का ये बोध अद्भुत है, जिसने ऐसी परम्पराओं को जन्म दिया ! बरसात के महीनों में हमारी प्रकृति, हमारे आस पास के पेड़-पौधे, नया जीवन ले रहे होते हैं। जीव-मात्र के प्रति अहिंसा का संकल्प और पौधों में भी परमात्मा देखने का भाव, बुद्ध का ये संदेश इतना जीवंत है कि आज भी हमारे भिक्षु उसे वैसे ही जी रहे हैं। जो साधक हमेशा क्रियाशील रहते हैं, सदैव गतिशील रहते हैं, वो इन तीन महीनों में ठहर जाते हैं, ताकि कहीं कोई अंकुरित होता हुआ कोई बीज कुचल न जाए, निखरती हुई प्रकृति में अवरोध न आ जाए! ये वर्षावास न केवल बाहर की प्रकृति को प्रस्फुटित करता है, बल्कि हमारे अंदर की प्रकृति को भी संशोधित करने का अवसर देता है।

साथियों,

धम्म का निर्देश है- यथापि रुचिरं पुप्फं, वण्णवन्तं सुगन्धकं। एवं सुभासिता वाचा, सफलाहोति कुब्बतो॥

अर्थात्, अच्छी वाणी और अच्छे विचारों का अगर उतनी ही निष्ठा से आचरण भी किया जाए, तो उसका परिणाम वैसा ही होता है जैसा सुगंध के साथ फूल ! क्योंकि बिना आचरण के अच्छी से अच्छी बात, बिना सुगंध के फूल की तरह ही होती है। दुनिया में जहां जहां भी बुद्ध के विचारों को सही मायने में आत्मसात किया गया है, वहाँ कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी प्रगति के रास्ते बने हैं। बुद्ध इसीलिए ही वैश्विक हैं, क्योंकि बुद्ध अपने भीतर से शुरुआत करने के लिए कहते हैं। भगवान बुद्ध का बुद्धत्व है- sense of ultimate responsibility. अर्थात्, हमारे आसपास, हमारे ब्रह्मांड में जो कुछ भी हो रहा है, हम उसे खुद से जोड़कर देखते हैं, उसकी ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं। जो घटित हो रहा है उसमें अगर हम अपना सकारात्मक प्रयास जोड़ेंगे, तो हम सृजन को गति देंगे। आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, क्लाइमेट चेंज की चिंता जाहिर करती है, तो उसके साथ अनेक सवाल उठ खड़े होते हैं। लेकिन, अगर हम बुद्ध के सन्देश को अपना लेते हैं तो ‘किसको करना है’, इसकी जगह ‘क्या करना है’, इसका मार्ग अपने आप दिखने लगता है।

साथियों,

हजारों साल पहले भगवान बुद्ध जब इस धरती पर थे तो आज जैसी व्यवस्थाएं नहीं थीं लेकिन फिर भी बुद्ध विश्व के करोड़ों करोड़ लोगों तक पहुँच गए, उनके अन्तर्मन से जुड़ गए। मैंने अलग-अलग देशों में, बौद्ध धर्म से जुड़े मंदिरों, विहारों में ये साक्षात अनुभव किया है। मैंने देखा है, कैंडी से क्योटो तक, हनोई से हंबनटोटा तक, भगवान बुद्ध अपने विचारों के जरिए, मठों, अवशेषों और संस्कृति के जरिए, हर जगह हैं। ये मेरा सौभाग्य है कि मैं कैंडी में श्री डलाडा मैलागोवा वहां दर्शन करने पहुंचा था गया हूँ, सिंगापुर में उनके दंत-अवशेष के मैंने दर्शन किए हैं, और क्योटो में किन्का-कुजी जाने का अवसर भी मुझे मिला है। इसी तरह, साउथ ईस्ट कंट्रीज़ के भिक्षुओं का आशीर्वाद भी मुझे मिलता रहा है। अलग अलग देश, अलग अलग परिवेश, लेकिन मानवता की आत्मा में बसे बुद्ध सबको जोड़ रहे हैं। भारत ने भगवान बुद्ध की इस सीख को अपनी विकास यात्रा का हिस्सा बनाया है, उसे अंगीकार किया है। हमने ज्ञान को, महान संदेशों को, महान आत्माओं के विचारों को बांधने में कभी भरोसा नहीं किया। उसको बांध कर रखना यह हमारी सोच नहीं है, हमने जो कुछ भी हमारा था, उसे मानवता के लिए ‘ममभाव’ से अर्पित किया है। इसीलिए, अहिंसा, दया, करुणा जैसे मानवीय मूल्य आज भी उतनी ही सहजता से भारत के अन्तर्मन में रचे बसे हैं। इसीलिए, बुद्ध आज भी भारत के संविधान की प्रेरणा हैं, बुद्ध का धम्म-चक्र भारत के तिरंगे पर विराजमान होकर हमें गति दे रहा है। आज भी भारत की संसद में कोई जाता है तो इस मंत्र पर नजर जरूर पड़ती है- ‘धर्म चक्र प्रवर्तनाय’!

साथियों,

आम तौर पर ये भी धारणा रहती है, कि बौद्ध धर्म का प्रभाव, भारत में मुख्य रूप से पूरब में ही ज्यादा रहा। लेकिन इतिहास को बारीकी से देखें तो हम पाते हैं कि बुद्ध ने जितना पूरब को प्रभावित किया है, उतना ही पश्चिम और दक्षिण पर भी उनका प्रभाव है। गुजरात का वडनगर, जो मेरा जन्मस्थान भी है, वो अतीत में बौद्ध धर्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। अभी तक हम ह्वेन सांग के उद्धरणों के जरिए ही इस इतिहास को जानते थे, लेकिन अब तो वडनगर में पुरातात्विक मठ और स्तूप भी excavation में मिल चुके हैं मिल चुके हैं। गुजरात का ये अतीत इस बात का प्रमाण है कि बुद्ध दिशाओं और सीमाओं से परे थे। गुजरात की धरती पर जन्मे महात्मा गांधी तो बुद्ध के सत्य और अहिंसा के संदेशों के आधुनिक संवाहक रहे हैं।

साथियों,

आज भारत अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इस अमृत महोत्सव में हम अपने भविष्य के लिए, मानवता के भविष्य के लिए संकल्प ले रहे हैं। हमारे इन अमृत संकल्पों के केंद्र में भगवान बुद्ध का वो सन्देश है जो कहता है-

अप्पमादो अमतपदं,

पमादो मच्चुनो पदं।

अप्पमत्ता न मीयन्ति,

ये पमत्ता यथा मता।

यानी, प्रमाद न करना अमृत पद है, और प्रमाद ही मृत्यु है। इसलिए, आज भारत नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है, पूरे विश्व को साथ लेकर आगे चल रहा है। भगवान बुद्ध ने कहा था-

“अप्प दीपो भव”।

यानी, अपने दीपक स्वयं बनो। जब व्यक्ति स्वयं प्रकाशित होता है तभी वह संसार को भी प्रकाश देता है। यही भारत के लिए आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा है। यही वो प्रेरणा है जो हमें दुनिया के हर देश की प्रगति में सहभागी बनने की ताकत देती है। अपने इसी विचार को आज भारत ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ा रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि भगवान बुद्ध के इन विचारों पर चलते हुये हम सब एक साथ मिलकर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

इसी कामना के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

भवतु सब्ब मंगलं।

नमो बुद्धाय॥