ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಶ್ರೀ ಗುರು ಗ್ರಂಥ ಸಾಹೀಬ್ ಜೀ ಅವರ ಪ್ರಥಮ ಪ್ರಕಾಶ ಪರ್ವದ ಪವಿತ್ರ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಜನತೆಗೆ ಶುಭ ಕೋರಿದ್ದಾರೆ.

“ಶ್ರೀ ಗುರು ಗ್ರಂಥ ಸಾಹೀಬ್ ಜೀ ಅವರು ನಮಗೆ ಸೇವೆ, ಸಹಾನುಭೂತಿ ಮತ್ತು ಸಾಮರಸ್ಯ ಕಲಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಇದು ನ್ಯಾಯ ಮತ್ತು ಸಮ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಹಾದಿ ಮಾಡಿಕೊಟ್ಟಿದೆ. ಇದು ಎಂದಿಗೂ ಅನ್ಯಾಯಕ್ಕೆ ತಲೆ ಬಾಗಬೇಡ ಎಂಬುದನ್ನೂ ಕಲಿಸಿದೆ. ಶ್ರೀ ಗುರು ಗ್ರಂಥ ಸಾಹೀಬ್ ಜೀ ಅವರ ಪ್ರಥಮ ಪ್ರಕಾಶ ಪರ್ವದ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಶುಭಾಶಯಗಳು’.

ಶ್ರೀ ಗುರು ಗ್ರಂಥ ಸಾಹೀಬ್ ಜೀ ಅವರು ತಮ್ಮ ಪರಿಶುದ್ಧ ಬೋಧನೆಯೊಂದಿಗೆ ಇಡೀ ವಿಶ್ವಕ್ಕೇ ಬೆಳಕು ತೋರಿದ್ದಾರೆ. ಇದರಿಂದ ಪ್ರೇರಿತರಾಗಿ ಸಿಖ್ಖರು ಜಾಗತಿಕವಾಗಿ ಹಲವು ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರಗತಿಗಾಮಿ ಸೇವೆ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಧೈರ್ಯ ಮತ್ತು ಕರುಣೆ ಗಣನೀಯ.

ಶ್ರೀ ಗುರು ಗ್ರಂಥ ಸಾಹೀಬ್ ಜೀ ಸದಾ ನಮಗೆ ಮಾನವತೆಯ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಮಾಡಲಿ” ಎಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ತಿಳಿಸಿದ್ದಾರೆ.

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AI Impact Summit: PM Modi showcases India's culture to world leaders

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Text of PM’s remarks in Leaders’ Plenary Session during the India AI Impact Summit
February 19, 2026
AI Impact Summit will shape a human‑centric, sensitive global ecosystem: PM
AI must be accessible to all, with Global South priorities at the center of governance: PM
Ethics in AI must be unlimited; profit must align with purpose: PM
PM outlines three key suggestions for ethical use of AI: Trusted global data framework, transparent ‘glass box’ safety rules, and embedding human values in AI
AI is a shared resource for the welfare of humanity: PM

एआई इम्पैक्ट समिट में भारत में पुनः आप सबका स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मुझे विश्वास है कि यह समिट एक ह्यूमन सेंट्रिक, सेंसिटिव ग्लोबल एआई इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

Friends,

हम इतिहास पर नजर डालें, तो पता चलता है कि इंसान ने हर disruption को एक नए अवसर में बदला है। आज हमारे सामने फिर ऐसा ही अवसर आया है। हमें मिलकर इस disruption को मानवता के सबसे बड़े अवसर के रूप में बदल देना है।

Friends,

भारत बुद्ध की धरती है और भगवान बुद्ध ने कहा था- Right Action Comes from Right Understanding. इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि हम साथ मिलकर ऐसा रोडमैप बनाएं, जिससे एआई का सही इंपैक्ट दिखे, और सही इंपैक्ट तभी आता है, जब हम सही समय पर, सही नियत से, सही निर्णय लेते हैं।

Friends,

कोविड ग्लोबल पेंडेमिक के समय दुनिया ने देखा है कि जब हम एक दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। वैक्सीन विकास से लेकर सप्लाई चैन तक, data साझा करने से लेकर जीवन बचाने तक, सहयोग ने ही समाधान दिया। टेक्नोलॉजी कैसे मानवता की सेवा का माध्यम बन सकता है, ये हमने भारत में कोविड काल में देखा है। हमारा जो डिजिटल वैक्सीनेशन प्लेटफार्म था, उसने करोड़ों लोगों को समय पर वैक्सीनेट कराने में बहुत मदद की। हमारे UPI ने उन मुश्किल परिस्थितियों में भी यह सुनिश्चित किया कि लोग आसानी से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते रहें। UPI ने भारत में डिजिटल डिवाइड को दूर करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। बीते वर्षों में भारत ने एक वाइब्रेंट डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है, हम इसे दुनिया के साथ भी शेयर कर रहे हैं। क्योंकि हमारे लिए टेक्नोलॉजी पावर का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है, पावर नहीं एंपावर करना। एआई की दिशा भी ऐसी होनी चाहिए, जिससे पूरी मानवता का कल्याण हो।

Friends,

अतीत में टेक्नोलॉजी ने डिवीजन क्रिएट किए, लेकिन वर्तमान में एआई टेक्नोलॉजी सबके लिए सुलभ हो, सबकी पहुंच में हो, ये हमारा लक्ष्य होना चाहिए। इसलिए आज जब हम एआई के फ्यूचर पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को भी एआई गवर्नेंस के केंद्र में रखना होगा।

Excellencies,

युग चाहे कोई भी रहा हो, एथिक्स हमेशा ही चर्चा के केंद्र में रहा है, अंतर बस इतना आया है कि पहले अन-एथिकल बिहेवियर का दायरा बहुत छोटा होता था, लेकिन एआई में इसका दायरा असीमित है, अनलिमिटेड है। इसलिए, एआई के लिए हमें एथिकल बिहेवियर और नॉर्म्स का दायरा भी असीमित बनाना होगा। एआई कंपनियों के सामने बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, प्रॉफिट के साथ-साथ purpose पर भी फोकस हो, ऐसे एथिकल कमिटमेंट की बहुत आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्तर पर एआई हमारी लर्निंग, इंटेलिजेंस और इमोशंस को प्रभावित कर रही है।

Excellencies,

एआई के एथिकल उपयोग के लिए मेरे तीन सुझाव हैं। फर्स्ट- Data Sovereignty को रिस्पेक्ट करते हुए एआई ट्रेनिंग के लिए एक डेटा फ्रेमवर्क बने। जैसे एआई में कहा जाता है- गार्बेज इन, गार्बेज आउट। अगर डेटा सुरक्षित, संतुलित, विश्वसनीय नहीं होगा, तो आउटपुट भी भरोसेमंद नहीं होगा। इसलिए, ग्लोबल ट्रस्टेड डेटा फ्रेमवर्क जरूरी है। सेकंड- एआई प्लेटफार्म अपने सेफ्टी रूल्स बहुत क्लियर और ट्रांसपेरेंट रखें, हमें ब्लैक बॉक्स के बदले ग्लास बॉक्स अप्रोच चाहिए, जहां सेफ्टी रूल्स देखें, और वेरीफाई किए जा सके, तब अकाउंटेबिलिटी भी क्लियर होगी और बिजनेस में एथिकल बिहेवियर को भी बूस्ट मिलेगा। थर्ड- एआई रिसर्च में पेपर क्लिप प्रॉब्लम का उदाहरण दिया जाता है। अगर किसी मशीन को सिर्फ पेपर क्लिप बनाने का लक्ष्य दे दिया जाए, तो वह उसका एक काम के लिए दुनिया के सारे रिसोर्सेज को दांव पर लगाकर भी वही काम करती रहेगी। इसलिए, एआई को क्लियर ह्यूमन वैल्यूस और गाइडेंस की जरूरत है। टेक्नोलॉजी पावरफुल है लेकिन डायरेक्शन हमेशा मानव ही तय करेगा।

Friends,

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई की ग्लोबल जर्नी में एस्पिरेशनल इंडिया एआई की बड़ी भूमिका है, और अपने इस दायित्व को समझते हुए भारत आज बड़े कदम उठा रहा है। अपने एआई मिशन के माध्यम से आज भारत में 38,000 GPUs मौजूद हैं, और अगले 6 महीनों में हम 24,000 GPUs और लगाने जा रहे हैं। हम अपने स्टार्टअप्स को बहुत ही अफोर्डेबल रेट्स पर वर्ल्ड क्लास कंप्यूटिंग पावर उपलब्ध करा रहे हैं। हमने एक एआई कोस्ट भी बनाया है, इसके माध्यम से seventy five hundred से अधिक डेटा सेट्स और 270 एआई मॉडल्स को नेशनल रिसोर्स के रूप में शेयर किया गया है।

Friends,

एआई को लेकर भारत की दिशा स्पष्ट है, भारत का विचार स्पष्ट है। एआई पूरी मानवता की भलाई के लिए एक शेयर्ड रिसोर्स है। हमें मिलकर ऐसा एआई फ्यूचर बनाना होगा, जो इनोवेशन को आगे बढ़ाएं, इंक्लूजन को मजबूत करें और ह्यूमन वैल्यूज का समावेश करके आगे बढ़े। जब टेक्नोलॉजी और ह्यूमन ट्रस्ट साथ-साथ चलेंगे, तो एआई का सही इंपैक्ट दुनिया पर दिखेगा।