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PM Modi Birthday Special: 17 सितंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन है, नरेंद्र मोदी भले ही 72वें साल में प्रवेश कर रहे हो, लेकिन युवाओं के दिलों और सोच पर वे राज करते हैं. कड़े और साहसिक निर्णय लेना और असंभव व कठिन कार्यों को हाथ में लेना और उससे भी आगे दिन में खुली आँखो से सपने देखना और उन सपनों को पूरा करना उन्हें चिर युवा बनाता है. कई बार तो वे युवाओं को चुनौती देते नज़र आते हैं. उनकी यही विशेषता उन्हें बच्चों, किशोर और युवाओं में लोकप्रिय बनाती है. प्रधानमंत्री की एक विशेषता है, जितनी जल्दी नई तकनीक को स्वीकार करना उतनी ही जल्दी उससे घुल-मिल जाना. एक उपभोक्ता के तौर पर जब वे तकनीक को तुरंत स्वीकार करते हैं तो इसका फ़ायदा भी वे उठाते हैं, वो भी देश के लिए उसका भरपूर उपयोग करके.


नई तकनीक से खास लगाव


कैसे प्रधानमंत्री तकनीक को आम लोगों के लिए उपयोगी बनाते हैं, इसकी कुछ अनसुनी कहानी आपको सुनाते हैं, साल 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, बहुत कम लोग जानते हैं कि "लीडर मोदी" के "टेक्नोक्रेट मोदी" बनने के सफर की शुरुआत गांधी नगर से ही हुई. हम "टेक्नोक्रेट मोदी" इसलिए कह रहे हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी आज तकनीक के अभिनव प्रयोगों के पर्याय बन गए हैं.


गुजरात के मुख्यमंत्री बनते ही, उन्होंने सरकार में तकनीक और विज्ञान के प्रथम प्रयोग की शुरुआत गांधीनगर से ही की. विज्ञान और तकनीक उनके जीवन में ऑक्सीजन की तरह घुले हुए है. आमतौर पर उनके जनरेशन के नेता नई तकनीक से संघर्ष करते ही नज़र आते हैं, जबकि नरेंद्र मोदी, सरकारी कामकाज और तकनीक का समन्वय कर सरकार चलाने में माहिर है.


सीएम रहते सैटेलाइट से करवाई स्कूलों की मैपिंग


साल 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने गुजरात में हर विभाग का आकलन करना शुरू किया, किस विभाग में कितना पोटेंशियल है, किस विभाग में कहां कमी हैं. इसी दौरान उन्हें विधायकों के माध्यम से कई इलाकों में विद्यालयों की कमी की जानकारी मिली. नरेंद्र मोदी ने इसका सही-सही आकलन करने के लिए अंतरिक्ष विज्ञान का सहारा लिया. सेटेलाइट के ज़रिए पूरे गुजरात के विद्यालयों की मैपिंग करवाई. ये पहला प्रयोग था जब किसी सरकार ने विद्यालयों की स्थापना और उनके घनत्व की जानकारी के लिए सेटेलाइट का सहारा लिया था. नतीजे भी मुख्यमंत्री मोदी के लिए चौंकाने वाले थे. गुजरात के आदिवासी इलाकों खासतौर पर अम्बाजी (बनासकाठा) से लेकर उमरगांव (बलसाड़) की पट्टी में 30-30 किलोमीटर तक 12वीं तक के विद्यालय नहीं थे. इसके बाद मोदी ने सैटेलाइट की मदद से विद्यालयों के लिए स्पॉट तय किये और 12वीं तक के 25 नए विद्यालय खोले गए.


"टेक्नोक्रेट मोदी" ने अंतरिक्ष विज्ञान या स्पेस टेक्नोलॉजी का दूसरा प्रयोग मछुआरों के लिए किया. समंदर में फिश कैचमेंट एरिया, मछलियों के मूवमेंट के कारण बदलता रहता है. कैचमेंट एरिया 40-50 किलोमीटर तक शिफ्ट हो जाता है, मछुआरों को सिर्फ भाग्य पर निर्भर रहना पड़ता है. सैटेलाइट के ज़रिए मछलियों के कैचमेंट एरिया की अचूक सूचनाएं मछुआरों तक पहुंचाने का काम भी नरेंद्र मोदी ने शुरू किया. मोदी से सीखकर कई राज्य सरकारें सैटेलाइट की मदद मछुआरों के लिए लेने लगी.


ऐसे रोकी चंडीगढ़ में केरोसीन की चोरी


प्रधानमंत्री हर महीने राज्य के अधिकारियो की बैठक लेते है, ये बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए होती है. इसमें केंद्र की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद करते हैं. एक बड़ी रोचक घटना है कि बैठक के दौरान पीएम के संज्ञान में आया कि चंडीगढ़ में हर महीने 30 लाख लीटर केरोसिन इस्तेमाल होता है. पीएम मोदी खुद चंडीगढ़ रहे हैं, उनके मन में सवाल उठा आखिर उच्च माध्यम वर्ग के शहर में कौन हैं जो केरोसिन का इस्तेमाल करते हैं.


ये केरोसिन, राशन की दुकानों से दिया जाता था, प्रधानमंत्री ने सबसे पहले वहां के राशन की दुकानों और उपभोक्ताओं को आधार से लिंक करवाया. 6 महीने के भीतर केरोसिन की खपत गिरकर कुछ हज़ार लीटर पर आ गयी. नरेंद्र मोदी यहीं चुप नहीं बैठे, उन्होंने अब उन लोगो की सूची बनवाई जो अभी भी केरोसिन इस्तेमाल कर रहे थे और उन्हें उज्ज्वला योजना में गैस दी गयी, इस तरह तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल सरकारी खजाना बचाया बल्कि प्रदूषण भी रोका, ये सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तकनीक की समझ और सूझ-बूझ से संभव हुआ.


इनोवेशन और इनोवेटिव सोच


गुजरात के गांधी नगर में देश की उत्कृष्ट फोरेंसिक इंस्टीट्यूट है. तेलगी घोटाले का खुलासा इसी लैब की रिपोर्ट के बाद हुआ था. नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस इंस्टीटूट को यूनिवर्सिटी बनाया, लेकिन क्यों? आजकल क्राइम टेक्नोलॉजी ड्रिवेन हो गए हैं, अपराधी तकनीक का इस्तेमाल के गंभीर अपराध को जन्म दे रहे हैं, ख़ासतौर पर साइबर क्राइम के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. ऐसे मामलों को सटीक सबूतों के साथ हल करने के लिए टेक्नोलॉजी की भी उतनी ही ज़रूरत है. ये पूरी दुनिया में अकेली फ़ॉरेंसिक यूनिवर्सिटी है, इसमें 60 देशों के छात्र और विशेषज्ञ पढ़ने आ रहे हैं. अब इंटरपोल भी भारत की तकीनीकी विशेषज्ञता की मदद ले रहा, ये नरेंद्र मोदी की टेक्नोलॉजी इनोवेशन और इनोवेटिव सोच का नतीजा है.


अब हम आपको थोड़ा पीछे भी ले चलते हैं. बात साल 1999 के आस-पास की है. तब नरेंद्र मोदी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री थे. वे दिल्ली में अशोक रोड के पार्टी कार्यालय में रहते थे. एक शाम पत्रकार संजय बरागटा उनसे मिलने पहुंचे. नरेंद्र मोदी ने बातचीत में उनकी कमीज़ की पॉकेट में रखे 'इलेक्ट्रॉनिक नोट पैड' को देखा, मोदी ने उत्सुकतावश पूछा, नया "ई-नोट पैड" लाये हैं क्या? उस समय देश में ई-नोट पैड नए-नए आये थे, इलेक्ट्रॉनिक नोट पैड हाथ में लेते ही बोले अच्छा अपग्रेडड वर्जन है, संजय बरागटा चौंक गए. लोग इलेक्ट्रॉनिक नोट पैड के बारे में कम जानते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी तब भी कम्प्यूटर और तकनीक की जानकारी में सबसे आगे रहते थे.


प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने एडवांस तकनीक के प्रयोग की कक्षा भी लगवाई. सभी अधिकारी भी तकनीक का इस्तेमाल करें इसके लिए जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों से लेकर राज्य स्तर पर भी विभागीय ट्रेनिंग दी गयी.


योजनाओं को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद


केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को भष्टाचार से बचाने के लिए "टेक्नोक्रेट मोदी" ने सीधे तकनीक से जोड़ दिया है. मसलन स्वच्छ भारत योजना के "हर घर टॉयलेट" को 'जियोटेगिग' से जोड़ा गया है, इसमें जिस व्यक्ति के घर में टॉयलेट बनाया जाता है, उस जगह की फोटो खींचकर साइट पर अप लोड की जाती है. फ़ोटो अपनी जिओ लोकेशन के साथ अपलोड होती है, इससे टॉयलेट कहीं बना और फ़ोटो कहीं ओर की हो ऐसा कर पाना नामुमकिन हो गया.


सरकारी कामकाज के अतिरिक्त रोजमर्रा में भी नरेंद्र मोदी तकनीक का बखूबी प्रयोग करते हैं. बात उनके पीएम बनने से पहले की है वे 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. अहमदाबाद में अपना मत डालने के बाद उन्होंने मोबाइल से सेल्फी ली. तब देश में सेल्फी शब्द कम लोगों ने सुना था, लेकिन मोदी ने बताया कि नई तकनीक के इस्तेमाल में वे पीछे नहीं रहते हैं. आज देश का युवा सेल्फी का दीवाना है.


गुजरात में पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को आपने एम्फिबियस प्लेन यानी पानी से उड़ान भरने और उतरने में सक्षम विमान की शुरुआत करते देखा होगा. भारत में इस तकनीक के प्लेन के पहली बार प्रयोग की शुरुआत भी मोदी ने ही की है. बुलेट ट्रेन की तकनीक को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही देश में ला रहे हैं. इससे सफर और सुगम बनेगा.


स्पेस टेक्नोलॉजी या सेटेलाइट का इस्तेमाल सरकार के हर काम में दिखने लगा है. रेल लाइन बिछाना हो, नई सड़क का निर्माण हो, पाइप लाइन बिछानी हो, ऑप्टिकल फायबर की लाइन डालनी हो या मोबाइल टावर लगाना हो, सेटेलाइट तकनीक के ज़रिए मार्ग और जगह तय की जा रही है. अब जमाना तकनीक का है, "टेक्नोक्रेट मोदी" कहते हैं तकनीक सभी को बराबर आंकती है. इसकी नज़र में, न कोई अमीर है, ना कोई गरीब और न कोई वीआईपी है. इसलिए तकनीक का जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, समाज और राष्ट्र में समानता का भाव उतना और मजबूत होगा.

Author Name : Vikas Bhadauria

Disclaimer:

This article was first published in ABP News.

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.

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October 20, 2021
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ಈ ತಿಂಗಳ ಅಕ್ಟೋಬರ್ 7 ಕ್ಕೆ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ (Narendra Modi) ಸರ್ಕಾರದ ಮುಖ್ಯಸ್ಥರಾಗಿ ಅಧಿಕಾರಿಯಾಗಿ 20 ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸಿದ್ದಾರೆ. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗುವ ಮುನ್ನ ಗುಜರಾತ್ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ರಾಜ್ಯದ ಪಥವನ್ನು ಹೇಗೆ ಬದಲಾಯಿಸಿದರು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದೇವೆ. ಮೋದಿಯನ್ನು ಇತರೆ ನಾಯಕರಿಂದ ಬೇರ್ಪಡಿಸುವ ಒಂದು ವಿಷಯ ಯಾವುದು? ಎಂದು ಜನರು ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಕೇಳುತ್ತಿರುತ್ತಾರೆ. ಆದರೆ, ಜನರೊಂದಿಗಿನ ಅವರ ಮಾನವೀಯ ಸಂಪರ್ಕ ಮತ್ತು ವೈಯಕ್ತಿಕ ಸಂವಹನವೇ ಅವರನ್ನು ಇಷ್ಟು ಎತ್ತರಕ್ಕೆ ಏರಿಸಿದೆ ಎಂದರೆ ತಪ್ಪಾಗಲಾರದು.

1980ರ ದಶಕ ಗುಜರಾತ್ ರಾಜಕೀಯದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಕುತೂಹಲಕಾರಿ ಅವಧಿ. ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಆರಾಮವಾಗಿ ಅಧಿಕಾರದಲ್ಲಿತ್ತು. ನೀರಸ ಆಡಳಿತ, ಕಹಿ ಗುಂಪುಗಾರಿಕೆ ಮತ್ತು ತಪ್ಪಾದ ಆದ್ಯತೆಗಳ ಹೊರತಾಗಿಯೂ, ಯಾವುದೇ ರಾಜಕೀಯ ಪಕ್ಷವು ಅಧಿಕಾರಕ್ಕೆ ಬರುವುದು ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಿರಲಿಲ್ಲ. ಹಾರ್ಡ್‌ಕೋರ್ ಬಿಜೆಪಿ ಬೆಂಬಲಿಗರು ಮತ್ತು ಕಾರ್ಯಕರ್ತರಲ್ಲೂ ಸಹ ಈ ನಂಬಿಕೆ ಇರಲಿಲ್ಲ.

ಇಂತಹ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಆರ್‌ಎಸ್‌ಎಸ್‌ನಿಂದ ಬಿಜೆಪಿಯಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚು ರಾಜಕೀಯ ಜೀವನಕ್ಕೆ ಬದಲಾದರು. ಎಎಂಸಿ ಚುನಾವಣೆಗೆ ಪಕ್ಷವನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸುವ ಸವಾಲನ್ನು ಅವರು ಕೈಗೆತ್ತಿಕೊಂಡರು. ಅವರ ಆರಂಭಿಕ ಹೆಜ್ಜೆಗಳೆಂದರೆ ವೃತ್ತಿಪರರನ್ನು ಬಿಜೆಪಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸುವುದು. ಪಕ್ಷದ ಯಂತ್ರಗಳಾದ ಖ್ಯಾತ ವೈದ್ಯರು, ವಕೀಲರು, ಎಂಜಿನಿಯರ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಶಿಕ್ಷಕರನ್ನು ಚುನಾವಣಾ ಮತ್ತು ರಾಜಕೀಯ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆಗೆ ಸೇರಲು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿದರು. ಅಂತೆಯೇ, ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಕೇವಲ ರಾಜಕೀಯದ ಜೊತೆಗೆ ಆಡಳಿತದ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಮಾತನಾಡಲು ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯನ್ನು ನೀಡಿದರು. ಅವರು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಜನರನ್ನು ಮೇಲೆತ್ತುವ ಮತ್ತು ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸುವ ನವೀನ ಮಾರ್ಗಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಯೋಚಿಸುತ್ತಿದ್ದರು.

ಸಂವಹನಕಾರರಾಗಿ, ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಯಾವಾಗಲೂ ಮಹೋನ್ನತರಾಗಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಅವರು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸುತ್ತಿದ್ದರು. ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಧರ್ನಿಧರ್‌ನಲ್ಲಿ ನಿರ್ಮಲ್ ಪಾರ್ಟಿ ಪ್ಲಾಟ್‌ನಲ್ಲಿ ಮಧ್ಯಮ ಗಾತ್ರದ ಸಭೆಯಲ್ಲಿ ಈ ಒಂದು ನಿರ್ದಿಷ್ಟ ಭಾಷಣವನ್ನು ನಾನು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ. ಮೊದಲ ಕೆಲವು ನಿಮಿಷಗಳಲ್ಲಿ ಅವರು ತಮಗೆ ತಿಳಿದಿರುವ ಹಾಸ್ಯದ ಕಾಮೆಂಟ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಜನರನ್ನು ನಗುವಂತೆ ಮಾಡಿದರು. ನಂತರ ಅವರು ಗುಂಪನ್ನು ನೋಡಿ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳನ್ನು ಕೇಳಲು ಹೋದರು- ನಾವು ತಮಾಷೆ ಮಾಡುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕೇ ಅಥವಾ ನಾವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣವೇ ಎಂದು ಪ್ರಶ್ನಿಸಿದ್ದರು.

ನಾನು ಹೇಳುವುದನ್ನು ಕೇಳಿದ ನಂತರ ಅವನು ನನ್ನ ಕಡೆಗೆ ತಿರುಗಿ ಹೇಳಿದರು. ಇಲ್ಲ, ನಾವು ಎರಡನ್ನೂ ಮಾಡಲು ಸಾಧ್ಯವಿಲ್ಲ. ನಂತರ ಅವರು ಬಿಜೆಪಿಯ ಆಡಳಿತ ದೃಷ್ಟಿಕೋನ, ಆರ್ಟಿಕಲ್ 370, ಷಾ ಬಾನೋ ಪ್ರಕರಣ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚಿನವುಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಸುದೀರ್ಘವಾಗಿ

ಗುಜರಾತ್‌ನ ಹೊರಗಿನವರಿಗೆ ತಿಳಿದಿಲ್ಲ ಆದರೆ 1990 ರ ದಶಕದ ಆರಂಭದಲ್ಲಿ ಮೋದಿಯವರ ಭಾಷನದ ಕ್ಯಾಸೆಟ್‌ಗಳು ಗುಜರಾತ್‌ನಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಜನಪ್ರಿಯವಾಗಿತ್ತು. ಈ ಕ್ಯಾಸೆಟ್‌ಗಳು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ರಾಜ್ಯದ ಕೆಲವು ಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ನೀಡಿದ ಭಾಷಣದ ಭಾಗಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿತ್ತು.

ಲಾತೂರ್ ಭೂಕಂಪದ ನಂತರ 1994 ರಲ್ಲಿ ಅವರ ಮತ್ತೊಂದು ಭಾಷಣ ಸಾಕಷ್ಟು ಜನಪ್ರಿಯವಾಗಿತ್ತು. ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಆರ್‌ಎಸ್‌ಎಸ್ ಕಾರ್ಯಾಲಯದಿಂದ, ಪರಿಹಾರ ಸಾಮಗ್ರಿ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಸ್ವಯಂಸೇವಕರು ಲಾತೂರಿಗೆ ಹೊರಡಬೇಕಿತ್ತು. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಆಶು ಭಾಷಣ ಮಾಡಿದರು. ಭಾಷಣದ ನಂತರ, ಕನಿಷ್ಠ ಐವತ್ತು ಜನರು ತಾವು ಈಗಿನಿಂದಲೇ ಲಾತೂರಿಗೆ ಹೊರಡಲು ಬಯಸುತ್ತೇವೆ ಎಂದು ಎದ್ದು ನಿಂತರು. ಮೋದಿ ಆಜ್ಞಯಂತೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪರಿಹಾರ ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಜನರನ್ನು ತಲುಪಿದ್ದವು.

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ವಿವಿಧ ವಿಭಾಗಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದು, ಸಮಾಜದ ವಿವಿಧ ವಿಭಾಗಗಳನ್ನು ತಲುಪುವ ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಕ್ಕೂ ಸಂಬಂಧವಿದೆ. 2013-2014ರಲ್ಲಿ ಜಗತ್ತು ಅವರ ‘ಚಾಯ್ ಪೇ ಚರ್ಚಾ’ವನ್ನು ಕಂಡಿತು ಆದರೆ ಬೆಳಗಿನ ವಾಕಿಂಗ್ ಮಾಡುವವರೊಂದಿಗೆ ಸಂವಹನ ನಡೆಸುವ ಮೂಲಕ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ವಿವಿಧ ಜನರೊಂದಿಗೆ ಬಾಟಲಿಯ ಬಾಂಧವ್ಯವನ್ನು ಹೇಗೆ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ಮರೆಯಲು ಸಾಧ್ಯವಿಲ್ಲ. 1990 ರ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನಾನು ಅವರನ್ನು ಅಹಮದಾಬಾದ್‌ನ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ಪರಿಮಲ್ ಗಾರ್ಡನ್ ನಲ್ಲಿ ಭೇಟಿಯಾದೆ, ಅಲ್ಲಿ ಅವರು ಬೆಳಗಿನ ವಾಕರ್ಸ್ ಗುಂಪನ್ನು ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿದ್ದರು. ನನಗೆ ತಿಳಿದಿರುವ ವೈದ್ಯರೊಬ್ಬರು ನರೇಂದ್ರ ಭಾಯ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ಅಂತಹುದೇ ಸಂವಹನಗಳು ಪ್ರಚಲಿತ ವಿದ್ಯಮಾನಗಳನ್ನು ಅರ್ಥಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಹಳ ಸಹಾಯಕವಾಗಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದರು.

ಮಾನವೀಯತವಾದಿ ಮೋದಿ:

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರ ಮಾನವೀಯ ಭಾಗವನ್ನು ತೋರಿಸುವ ಎರಡು ಪ್ರಸಂಗಗಳಿವೆ. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದು 2000 ರ ದಶಕದ ಆರಂಭದಲ್ಲಿದೆ. ಇತಿಹಾಸಕಾರ ರಿಜ್ವಾನ್ ಕದ್ರಿ ಮತ್ತು ನಾನು ಗುಜರಾತಿ ಸಾಹಿತ್ಯದ ಡೋಯೆನ್ ಮತ್ತು ಸಂಘ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯ ಅನುಭವಿ ಕೆಕೆ ಶಾಸ್ತ್ರಿಯವರ ಕೆಲವು ಕೃತಿಗಳನ್ನು ದಾಖಲಿಸುತ್ತಿದ್ದೆವು. ನಾವು ಆತನನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗಲು ಹೋಗಿದ್ದೆವು ಮತ್ತು ಅವರ ಆರೋಗ್ಯದ ಕೊರತೆಯಿಂದಾಗಿ ಭೇಟಿ ಸಾಧ್ಯವಾಗಲಿಲ್ಲ. ನಾನು ಛಾಯಾಚಿತ್ರ ತೆಗೆದು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರ ಕಚೇರಿಗೆ ಕಳುಹಿಸಿದೆ.

ಇನ್ನೊಂದು ಲೇಖಕ ಪ್ರಿಯಕಾಂತ್ ಪರಿಖ್‌ಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದೆ. ತನ್ನ 100 ನೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಮಾತ್ರ ಪ್ರಾರಂಭಿಸಬೇಕೆಂಬ ಬಲವಾದ ಆಸೆಯನ್ನು ಅವರು ಹೊಂದಿದ್ದರು. ಆದರೆ ಒಂದೇ ಒಂದು ತೊಡಕು- ಅವರು ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ಅಪಘಾತದಿಂದಾಗಿ ನಿಶ್ಚಲವಾಗಿ ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಇರುವಂತಾಗಿತ್ತು. ಸಿಎಂ ಮೋದಿ ಅವರು ಆಶ್ರಮ ರಸ್ತೆಯಲ್ಲಿರುವ ಪ್ರಿಯಕಾಂತ್ ಪರಿಖ್ ಅವರ ಮನೆಗೆ ಹೋಗಿ ಅವರ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡಿದ ನೆನಪು. ಕುಳಿತಿದ್ದ ಸಿಎಂ ಅನಾರೋಗ್ಯದ ಲೇಖಕರ ಡ್ರಾಯಿಂಗ್ ರೂಮಿಗೆ ಹೋಗಿ ಅವರ ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುತ್ತಾರೆ ಎಂದು ಗುಜರಾತಿ ಸಾಹಿತ್ಯ ವಲಯಗಳು ಮಂತ್ರಮುಗ್ಧವಾಗಿದ್ದವು!

ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ರಾಜಕೀಯ ವ್ಯಕ್ತಿಗೂ ಉತ್ತಮವಾಗಿ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಎರಡು ಸದ್ಗುಣಗಳೆಂದರೆ - ಅವರ ತೀಕ್ಷ್ಣವಾದ ಆಲಿಸುವ ಕೌಶಲ್ಯ ಮತ್ತು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದ ಮೇಲಿನ ಪ್ರೀತಿ. ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದ ಬಗ್ಗೆ ಅವರ ಏಕೈಕ ವಿಷಾದ- ಫೋನ್ ಸಂಖ್ಯೆಗಳನ್ನು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುವ ಕಲೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು!

ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರಿಗೆ ಪಕ್ಷದ ಕಾರ್ಯತಂತ್ರವನ್ನು ಸಮನ್ವಯಗೊಳಿಸುವ ಕೆಲಸವನ್ನು ನೀಡಿದಾಗ, ಲೋಕಸಭೆ, ವಿಧಾನಸಭೆ ಅಥವಾ ಸ್ಥಳೀಯ ಸಂಸ್ಥೆಗಳಾಗಿರಲಿ, ಬಿಜೆಪಿ ಒಂದೇ ಒಂದು ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸೋತಿಲ್ಲ. 2000 ನೇ ಇಸವಿಯಲ್ಲಿ ಮಾತ್ರ ಬಿಜೆಪಿ ಚುನಾವಣಾ ಹಿನ್ನಡೆ ಕಂಡಿತು ಮತ್ತು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ರಾಜ್ಯದ ಹೊರಗಿದ್ದರು.
ಪತ್ರಕರ್ತರಾಗಿ, ನಾವು ಹಲವಾರು ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಬೇಕು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದೆವು.

ಪತ್ರಕರ್ತರಾಗಿ, ನಾವು ಹಲವಾರು ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಬೇಕು ಆದರೆ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ನಾನು ಯುವ ವರದಿಗಾರನಾಗಿದ್ದಾಗ ನನಗೆ ಹೇಳಿದ್ದು ಇವುಗಳು ವಹಿವಾಟಿನ ಸಂಬಂಧಗಳಾಗಿರಬಾರದು ಆದರೆ ಜೀವಮಾನವಿಡೀ ಇರುವ ಬಾಂಡ್‌ಗಳು ಎಂದು. 1998 ರಲ್ಲಿ ಹೋಳಿಯ ಸುತ್ತಲೂ ನಾನು ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿದ್ದೆ. ನಾನು ಎಂದಿಗೂ ಮರೆಯಲಾರದಂತಹದ್ದನ್ನು ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಹೇಳಿದರು. "ನಿಮ್ಮ ದೂರವಾಣಿ ಡೈರಿಯಲ್ಲಿ ನೀವು 5000 ಸಂಖ್ಯೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ನೀವು ಅವರನ್ನು ಒಮ್ಮೆಯಾದರೂ ಭೇಟಿಯಾಗಬೇಕು" ಎಂದು ಮೋದಿ ಹೇಳಿದ ಮಾತು ಇನ್ನೂ ನೆನಪಿದೆ.

ನೀವು ಅವರನ್ನು ಸುದ್ದಿ ಮೂಲವಾಗಿ ತಿಳಿಯದೆ ಪರಿಚಯಸ್ಥ ಅಥವಾ ಸ್ನೇಹಿತನಾಗಿ ತಿಳಿದಿರಬೇಕು ಎಂದು ಮೋದಿ ಹೇಳಿದ್ದರು. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಕೇಳಿದಂತೆ ನಾನು 5000 ಜನರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಮಾನವ ಸ್ಪರ್ಶದ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆಯನ್ನು ನಾನು ತಿಳಿದುಕೊಂಡೆ. ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರು ಅದನ್ನು ಸಾಕಷ್ಟು ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಅವರು ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದ್ದಾರೆ.

 

Author Name: Japan K Pathak

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