Published By : Admin |
November 2, 2021 | 15:28 IST
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ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು, 2021ರ ನವೆಂಬರ್ 2ರಂದು ಯುನೈಟೆಡ್ ಕಿಂಗ್ ಡಮ್ ನ ಗ್ಲಾಸ್ಗೋದಲ್ಲಿ ಸಿಒಪಿ26 ಶೃಂಗಸಭೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಉಕ್ರೇನ್ ನ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಗೌರವಾನ್ವಿತ ವೊಲೊಡಿಮಿರ್ ಝೆಲೆನ್ಸ್ಕಿ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಿದರು.
ಉಭಯ ನಾಯಕರು ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ಸಂಬಂಧಗಳ ಸ್ಥಿತಿಗತಿಯನ್ನು ಅವಲೋಕಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಪ್ರದೇಶಗಳ ಬೆಳವಣಿಗೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಅಭಿಪ್ರಾಯ ವಿನಿಮಯ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು.
ಎರಡೂ ದೇಶಗಳಿಂದ ಕೋವಿಡ್ ಲಸಿಕೆ ಪ್ರಮಾಣಪತ್ರಗಳ ಪರಸ್ಪರ ಗುರುತಿಸುವಿಕೆ ಸೇರಿದಂತೆ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರದ ಬಗ್ಗೆ ಅವರು ತೃಪ್ತಿ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದರು.
ಈ ವರ್ಷದ ಆರಂಭದಲ್ಲಿ ಕೋವಿಡ್ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಎರಡನೇ ಹಂತದಲ್ಲಿ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಮಾನವೀಯ ನೆಲೆಯಲ್ಲಿ ಆಮ್ಲಜನಕದ ಸಾಂದ್ರಕಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸಿದ ನೆರವು ನೀಡಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಝೆಲೆನ್ಸ್ಕಿ ಅವರಿಗೆ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಧನ್ಯವಾದಗಳನ್ನು ಹೇಳಿದರು.
ಉಭಯ ದೇಶಗಳ ನಡುವೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿರುವ ಜನರಿಗೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಉಕ್ರೇನ್ ನ ನಾನಾ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದಲ್ಲಿ ದೊಡ್ಡ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಯನ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳ ಸ್ಥಿತಿಗತಿ ಕುರಿತು ಧನಾತ್ಮಕವಾಗಿ ಪರಾಮರ್ಶಿಸಲಾಯಿತು.
ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ಸಂಬಂಧಗಳನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸಲು ಒಟ್ಟಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸಲು ತಮ್ಮ ಬದ್ಧತೆಯನ್ನು ಉಭಯ ನಾಯಕರು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸಿದರು.
Провів чудову зустріч з Президентом Зеленським @ZelenskyyUa. Наші перемовини нададуть новий поштовх у розвитку дружби між Індією та Україною. pic.twitter.com/7dPQVyXXAn
Had a wonderful meeting with President @ZelenskyyUa. Our talks will give new vigour to the friendship between India and Ukraine. pic.twitter.com/toyT6ewEQA
In politics, there are no full stops; your experience and contribution will forever remain a part of the nation’s life: PM
There is much to learn from these senior leaders about staying entirely committed to the responsibilities given by society: PM
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM
Parliamentary system gains immense strength from the concept of a second opinion; This second opinion is a massive contribution to our democracy that we must cherish: PM
The six years spent here are invaluable for shaping one's contribution to the nation and for self-growth: PM
The invaluable contributions of the retiring members to nation-building would continue to be felt whether they serve within the formal system or through independent social work: PM
इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।
आदरणीय सभापति जी,
सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।
आदरणीय सभापति जी,
इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।
आदरणीय सभापति जी,
कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।
आदरणीय सभापति जी,
सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।
आदरणीय सभापति जी,
हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।
आदरणीय सभापति जी,
जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।
आदरणीय सभापति जी,
मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।