Cabinet approves the Clean Plant Programme under Mission for Integrated Development of Horticulture
Ambitious Clean Plant Programme to revolutionize horticulture sector in the country
ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರ ಅಧ್ಯಕ್ಷತೆಯಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಕೇಂದ್ರ ಸಚಿವ ಸಂಪುಟ ಸಭೆಯು ಇಂದು ಕೃಷಿ ಮತ್ತು ರೈತರ ಕಲ್ಯಾಣ ಸಚಿವಾಲಯವು ಪ್ರಸ್ತಾಪಿಸಿದ ಕ್ಲೀನ್ ಪ್ಲಾಂಟ್ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಕ್ಕೆ (ಸಿಪಿಪಿ) ಅನುಮೋದನೆ ನೀಡಿದೆ.
1,765.67 ಕೋಟಿ ರೂ.ಗಳ ಗಣನೀಯ ಹೂಡಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ, ಈ ಪ್ರವರ್ತಕ ಉಪಕ್ರಮವು ಭಾರತದಲ್ಲಿನ ತೋಟಗಾರಿಕೆ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಕ್ರಾಂತಿಯನ್ನುಂಟುಮಾಡಲು ಸಿದ್ಧವಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಉತ್ಕೃಷ್ಟತೆ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರತೆಗೆ ಹೊಸ ಮಾನದಂಡಗಳನ್ನು ನಿಗದಿಪಡಿಸುವ ನಿರೀಕ್ಷೆಯಿದೆ. ಫೆಬ್ರವರಿ 2023 ರಲ್ಲಿ ಹಣಕಾಸು ಸಚಿವರು ಬಜೆಟ್ ಭಾಷಣದಲ್ಲಿ ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವನ್ನು ಘೋಷಿಸಿದ್ದರು. ಸಿಪಿಪಿ ರಾಷ್ಟ್ರದಾದ್ಯಂತ ಹಣ್ಣಿನ ಬೆಳೆಗಳ ಗುಣಮಟ್ಟ ಮತ್ತು ಉತ್ಪಾದಕತೆಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಲಿದೆ.
ಕ್ಲೀನ್ ಪ್ಲಾಂಟ್ ಪ್ರೋಗ್ರಾಂ (ಸಿಪಿಪಿ) ನ ಪ್ರಮುಖ ಪ್ರಯೋಜನಗಳು:
ರೈತರು: ಕ್ಲೀನ್ ಪ್ಲಾಂಟ್ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವು ವೈರಸ್-ಮುಕ್ತ, ಉತ್ತಮ ಗುಣಮಟ್ಟದ ನಾಟಿ ಮಾಡುವ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳಿಗೆ ಪ್ರವೇಶವನ್ನು ಒದಗಿಸುತ್ತದೆ, ಇದು ಹೆಚ್ಚಿನ ಬೆಳೆ ಇಳುವರಿ ಮತ್ತು ಸುಧಾರಿತ ಆದಾಯದ ಅವಕಾಶಗಳಿಗೆ ಕಾರಣವಾಗುತ್ತದೆ.
ನರ್ಸರಿಗಳು: ಸುವ್ಯವಸ್ಥಿತ ಪ್ರಮಾಣೀಕರಣ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆಗಳು ಮತ್ತು ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಬೆಂಬಲವು ನರ್ಸರಿಗಳನ್ನು ಶುದ್ಧ ನಾಟಿ ಮಾಡುವ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳನ್ನು ಸಮರ್ಥವಾಗಿ ಪ್ರಚಾರ ಮಾಡಲು, ಬೆಳವಣಿಗೆ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರತೆಯನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸಲು ಅನುವು ಮಾಡಿಕೊಡುತ್ತದೆ.
ಗ್ರಾಹಕರು: ಈ ಉಪಕ್ರಮವು ವೈರಸ್ ಗಳಿಂದ ಮುಕ್ತವಾದ ಉತ್ತಮ ಉತ್ಪನ್ನಗಳಿಂದ ಗ್ರಾಹಕರು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸುತ್ತದೆ, ಹಣ್ಣುಗಳ ರುಚಿ, ನೋಟ ಮತ್ತು ಪೌಷ್ಟಿಕಾಂಶದ ಮೌಲ್ಯವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತದೆ.
ರಫ್ತುಗಳು: ಉತ್ತಮ ಗುಣಮಟ್ಟದ, ರೋಗ-ಮುಕ್ತ ಹಣ್ಣುಗಳನ್ನು ಉತ್ಪಾದಿಸುವ ಮೂಲಕ, ಭಾರತವು ಪ್ರಮುಖ ಜಾಗತಿಕ ರಫ್ತುದಾರನಾಗಿ ತನ್ನ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಬಲಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತದೆ, ಮಾರುಕಟ್ಟೆ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಅಂತರರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಹಣ್ಣಿನ ವ್ಯಾಪಾರದಲ್ಲಿ ತನ್ನ ಪಾಲನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತದೆ.
ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವು ಎಲ್ಲಾ ರೈತರಿಗೆ ಅವರ ಭೂಮಿ ಹಿಡುವಳಿಯ ಗಾತ್ರ ಅಥವಾ ಸಾಮಾಜಿಕ -ಆರ್ಥಿಕ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಲೆಕ್ಕಿಸದೆ ಶುದ್ಧ ನೆಡುವ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳಿಗೆ ಸುಲಭ ಪ್ರವೇಶಕ್ಕೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತದೆ.
ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವು ಮಹಿಳಾ ರೈತರನ್ನು ಅದರ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಅನುಷ್ಠಾನದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯವಾಗಿ ತೊಡಗಿಸುತ್ತದೆ, ಸಂಪನ್ಮೂಲಗಳಿಗೆ ಅವರ ಪ್ರವೇಶವನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸುತ್ತದೆ, ತರಬೇತಿ ಮತ್ತು ನಿರ್ಧಾರ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ.
ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವು ಪ್ರದೇಶ-ನಿರ್ದಿಷ್ಟ ಶುದ್ಧ ಸಸ್ಯ ಪ್ರಭೇದಗಳು ಮತ್ತು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳನ್ನು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸುವ ಮೂಲಕ ಭಾರತದಾದ್ಯಂತ ವೈವಿಧ್ಯಮಯ ಕೃಷಿ-ಹವಾಮಾನ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಗಳನ್ನು ಪರಿಹರಿಸುತ್ತದೆ.
ಸಿಪಿಪಿಯ ಮುಖ್ಯ ಅಂಶಗಳು:
ಶುದ್ಧ ಸಸ್ಯ ಪ್ಲಾಂಟ್ ಕೇಂದ್ರಗಳು (ಸಿಪಿಪಿಗಳು): ಸುಧಾರಿತ ರೋಗನಿರ್ಣಯದ ಚಿಕಿತ್ಸಕಗಳು ಮತ್ತು ಅಂಗಾಂಶ ಕೃಷಿ ಪ್ರಯೋಗಾಲಯಗಳೊಂದಿಗೆ ಸುಸಜ್ಜಿತವಾದ ಒಂಬತ್ತು ವಿಶ್ವದರ್ಜೆಯ ಅತ್ಯಾಧುನಿಕ ಸಿಪಿಪಿಗಳನ್ನು ಭಾರತದಾದ್ಯಂತ ಸ್ಥಾಪಿಸಲಾಗುವುದು. ಇವುಗಳಲ್ಲಿ ದ್ರಾಕ್ಷಿ (ಎನ್ ಆರ್ ಸಿ, ಪುಣೆ), ಸಮಶೀತೋಷ್ಣ ಹಣ್ಣುಗಳು - ಸೇಬು, ಬಾದಾಮಿ, ವಾಲ್ ನಟ್ಸ್ ಇತ್ಯಾದಿ. (ಸಿಐಟಿಎಚ್, ಶ್ರೀನಗರ & ಮುಕ್ತೇಶ್ವರ), ಸಿಟ್ರಸ್ ಹಣ್ಣುಗಳು (ಸಿ ಸಿ ಆರ್ ಐ, ನಾಗಪುರ ಮತ್ತು ಸಿ ಐ ಎ ಎಚ್, ಬಿಕಾನೆರ್), ಮಾವು/ಸೀಬೆ/ಅವಕಾಡೊ (ಐ ಐ ಎಚ್ ಆರ್, ಬೆಂಗಳೂರು), ಮಾವು / ಸೀಬೆ/ಲಿಚ್ಚಿ (ಸಿ ಐ ಎಸ್ ಎಚ್, ಲಕ್ನೋ), ದಾಳಿಂಬೆ (ಎನ್ ಆರ್ ಸಿ, ಶೋಲಾಪುರ) ಮತ್ತು ಪೂರ್ವ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಉಷ್ಣವಲಯದ/ಉಪ-ಉಷ್ಣವಲಯದ ಹಣ್ಣುಗಳು ಸೇರಿವೆ. ಈ ಕೇಂದ್ರಗಳು ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಸರಣಕ್ಕೆ ಉದ್ದೇಶಿಸಿರುವ ವೈರಸ್-ಮುಕ್ತ ಸಸ್ಯ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳನ್ನು ಉತ್ಪಾದಿಸುವಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ನಿರ್ವಹಿಸುವಲ್ಲಿ ನಿರ್ಣಾಯಕ ಪಾತ್ರವನ್ನು ವಹಿಸುತ್ತವೆ.
ಪ್ರಮಾಣೀಕರಣ ಮತ್ತು ಕಾನೂನು ಚೌಕಟ್ಟು: ಬೀಜಗಳ ಕಾಯಿದೆ 1966 ರ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ನಿಯಂತ್ರಕ ಚೌಕಟ್ಟಿನಿಂದ ಬೆಂಬಲಿತವಾದ ದೃಢವಾದ ಪ್ರಮಾಣೀಕರಣ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನು ಅಳವಡಿಸಲಾಗುವುದು, ಇದು ನಾಟಿ ಮಾಡುವ ವಸ್ತುಗಳ ಉತ್ಪಾದನೆ ಮತ್ತು ಮಾರಾಟದಲ್ಲಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಹೊಣೆಗಾರಿಕೆ ಮತ್ತು ಪತ್ತೆಹಚ್ಚುವಿಕೆಯನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸುತ್ತದೆ.
ವರ್ಧಿತ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ: ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಮಾಣದ ನರ್ಸರಿಗಳಿಗೆ ಬೆಂಬಲವನ್ನು ಒದಗಿಸಲಾಗುವುದು, ಶುದ್ಧ ನಾಟಿ ಮಾಡುವ ವಸ್ತುಗಳ ಸಮರ್ಥ ಗುಣಕವನ್ನು ಸುಗಮಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ.
ಮಿಷನ್ ಲೈಫ್ ಮತ್ತು ಒನ್ ಹೆಲ್ತ್ ಉಪಕ್ರಮಗಳೊಂದಿಗೆ ಅನುಗುಣವಾಗಿ ಕ್ಲೀನ್ ಪ್ಲಾಂಟ್ ಪ್ರೋಗ್ರಾಂ ಭಾರತದ ತೋಟಗಾರಿಕಾ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಗಮನಾರ್ಹ ಪ್ರಗತಿ ಸಾಧಿಸಲು ರೂಪಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇದು ಸುಸ್ಥಿರ ಮತ್ತು ಪರಿಸರ ಸ್ನೇಹಿ ಕೃಷಿ ಪದ್ಧತಿಗಳನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಆಮದು ಮಾಡಿಕೊಂಡ ನಾಟಿ ಮಾಡುವ ವಸ್ತುಗಳ ಮೇಲಿನ ಅವಲಂಬನೆಯನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವು ಭಾರತವನ್ನು ಪ್ರಮುಖ ಜಾಗತಿಕ ಹಣ್ಣುಗಳ ರಫ್ತುದಾರನಾಗುವ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ನಿರ್ಣಾಯಕ ಹೆಜ್ಜೆಯಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಪರಿವರ್ತಕ ಬದಲಾವಣೆಗೆ ಚಾಲನೆ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮವನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ತೋಟಗಾರಿಕೆ ಮಂಡಳಿಯು ಭಾರತೀಯ ಕೃಷಿ ಸಂಶೋಧನಾ ಮಂಡಳಿಯ (ಐಸಿಎಆರ್) ಸಹಯೋಗದೊಂದಿಗೆ ಅನುಷ್ಠಾನಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ.
माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।
हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।
साथियों,
आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।
साथियों,
ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।
साथियों,
आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।
साथियों,
मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।
साथियों,
ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।
साथियों,
केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।
साथियों,
ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।
साथियों,
डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।
साथियों,
यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।
साथियों,
स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।
साथियों,
मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।
साथियों,
आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।
साथियों,
दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।
साथियों,
आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।
साथियों,
कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।