भारत का दिल गांवों में धड़कता है और ग्रामीण समृद्धि के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है। इसी दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले एक दशक में किसानों को केंद्र में रखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व पहल की है। हाल ही में घोषित बजट कृषि और ग्रामीण विकास के प्रति इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बजट 2025 में सरकार ने किसानों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं।

धन-धान्य कृषि योजना का लक्ष्य कम उत्पादकता, मध्यम फसल सघनता और सीमित ऋण पहुंच वाले 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को लाभान्वित करना है। इस बीच, दालों में आत्मनिर्भरता के लिए छह वर्षीय मिशन दालों के उत्पादन को बढ़ावा देगा और यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को लाभकारी मूल्य मिले, विशेष रूप से तुअर, उड़द और मसूर जैसी फसलों को लाभ होगा।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने ‘उच्च उपज वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन’ की घोषणा की है, जो किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के माध्यम से एक बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है, जिसके तहत ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इससे मछुआरों और डेयरी किसानों सहित 7.7 करोड़ किसानों को किफायती ऋण उपलब्ध कराकर लाभ मिलेगा।

भारत सब्जी उत्पादन में भी अग्रणी बनकर उभर रहा है। प्रोसेसिंग को बढ़ाने, किसान-उत्पादक संगठनों को मजबूत करने और सहकारी समितियों को विकसित करने के लिए, बजट में कृषि क्षमता को अधिकतम करने के लिए ‘फलों और सब्जियों के लिए व्यापक कार्यक्रम’ पेश किया गया है।

भारत के सुपरफूड उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बिहार में ‘मखाना बोर्ड’ की स्थापना की घोषणा की है, जो मखाना किसानों को प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और वैश्विक पहचान प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, बिहार में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना को वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे 50,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को लाभ होगा।

बजट में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,703.67 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं - जो अब तक का सबसे अधिक वार्षिक आवंटन है - जो पिछले वित्त वर्ष से 3.3% की वृद्धि दर्शाता है। इस कदम से अंडमान, निकोबार और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों को ब्लू इकोनॉमी के अगुआ के रूप में आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए पांच वर्षीय ‘कपास उत्पादकता मिशन’ भी शुरू किया गया है, जिससे भारत के कपड़ा उद्योग को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़े कदम के तहत सरकार ने असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाले यूरिया संयंत्र की स्थापना को मंजूरी दी है, जबकि पूर्वी क्षेत्र में पहले से बंद पड़े तीन यूरिया संयंत्रों को पुनर्जीवित किया जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डाक नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, मोदी सरकार 1.5 लाख ग्रामीण डाकघरों को आर्थिक केंद्रों में बदलने की योजना बना रही है। लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से कृषि उपज के भंडारण और परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जिससे न्यूनतम बर्बादी सुनिश्चित होगी और सप्लाई चेन में सुधार होगा।

इस बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा ‘ग्रामीण क्रेडिट स्कोर’ की शुरुआत है, जो स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क तैयार करेगा। ‘ग्रामीण समृद्धि और सुदृढ़ता’ पहल के तहत, सरकार कौशल विकास को बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने और कृषि में उन्नत टेक्नोलॉजी को एकीकृत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी के सुधारों ने समृद्ध कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत नींव रखी है। आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां कर देते हैं: 2013-14 में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का बजट ₹21,933.50 करोड़ था; 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,22,528.77 करोड़ हो गया है। इसी तरह, धान और गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आवंटन 2013-14 में ₹4.40 लाख करोड़ और ₹2.27 लाख करोड़ से बढ़कर आज ₹12.51 लाख करोड़ और ₹5.44 लाख करोड़ हो गया है।

प्रधानमंत्री मोदी का विजन सिर्फ़ किसानों पर केंद्रित नहीं है- यह ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी पहलों ने न सिर्फ़ कृषि को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि रोज़गार, उद्योग और ग्रामीण आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया है। जो कभी दूर का सपना था, वह अब हकीकत बन रहा है।

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पीएम मोदी ने 52वीं PRAGATI मीटिंग की अध्यक्षता की
June 24, 2026
प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाले चार प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो चार राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने कुशल योजना निर्माण के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग तथा पोर्टल पर परियोजनाओं, उपयोगिताओं और अवसंरचना संबंधी आंकड़ों को समय पर अपडेट करने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों से लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने और उनकी कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा
प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की तथा समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रतिक्रिया और ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण व्यवस्था पर जोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेवा तीर्थ में 'प्रगति' की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित यह बहु-माध्यम मंच केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को निर्बाध रूप से एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरीडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से संबंधित चार महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाली ये परियोजनाएं चार राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक प्रगति और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, समस्याओं के समाधान और समय पर पूरा होने पर विशेष ध्यान देते हुए की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि लोगों और उद्योगों को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने तथा उच्चतम स्तर पर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रभावी योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने परियोजनाओं के विवरण, उपयोगिताओं, अवसंरचना परतों, स्वीकृतियों और अन्य क्षेत्रीय सूचनाओं को पोर्टल पर नियमित एवं समय पर अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच पर जमीनी स्तर की नवीनतम स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि रूकावटों के बारे में पहले से पता चल सके और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर हो तथा विश्वसनीय एवं वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों की एक टीम गठित करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल मंचों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों का सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित, संवेदनशील और समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए एक विभाग या एजेंसी से दूसरी एजेंसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय तथा जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय नुकसान को रोकने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी हितधारकों से रोकथाम, रिपोर्टिंग, जांच और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।