लोकतंत्र की जननी के रूप में, भारत हर स्तर पर लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के मूलभूत अधिकार को सुनिश्चित करने की अपनी महान परंपरा को बनाए हुए है। चाहे राज्य हों या केंद्र शासित प्रदेश, भले ही उनकी प्रशासनिक व्यवस्था में विविधता हो, सभी को विकास और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अपने सबसे उपयुक्त मॉडल खोजने और उन पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। एक अनूठे दृष्टिकोण में, प्रधानमंत्री मोदी ने नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए आदर्श मंच के रूप में केंद्र शासित प्रदेशों के इस्तेमाल की वकालत और समर्थन किया है। व्यापक क्षेत्रों और राज्यों में अपनाने से पहले केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ही इन नई पहलों का व्यापक परीक्षण किया जाता है।

केंद्र शासित प्रदेश अपने छोटे आकार और कुशल प्रशासनिक ढांचे के लिए जाने जाते हैं। इस वजह से, केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, सड़क नेटवर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और पर्यटन के सुधार पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम रही है। इस दृष्टिकोण के कारण, चंडीगढ़, पुदुचेरी, दादरा और नगर हवेली और दमन जैसे केंद्र शासित प्रदेश अब फल-फूल रहे हैं। इनकी आर्थिक सफलता विभिन्न स्तरों पर है और मानव विकास के संकेतक औसत भारतीय राज्य से अधिक या उससे बेहतर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के विकास को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न पहलों और विकास परियोजनाओं का नेतृत्व किया है। दक्षता बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए, इन क्षेत्रों को जनवरी 2020 में मिला दिया गया था।

इस तरह के एकीकरण ने इन चारों केंद्र शासित प्रदेशों को "विकसित भारत" के हमारे साझा लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान करने की क्षमता को सुव्यवस्थित किया है। प्रस्तावों की योग्यता को देखते हुए, स्थानीय स्वशासन संगठन अब एक जमीनी स्तर की रणनीति का समर्थन करते हैं जो समुदायों को सशक्त बनाती है, खासकर इन क्षेत्रों में निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की समान भागीदारी की गारंटी देकर। पिछले 3 वर्षों में चंडीगढ़ और पुदुचेरी दोनों ने प्रति व्यक्ति आय के मामले में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है।

पिछले दशक में, देश में अनुकूल माहौल बनने के कारण, केंद्र शासित प्रदेश पूरे भारत में अपनी धरोहर के बारे में जागरूकता और जानकारी फैलाने का गर्व से प्रचार कर रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व ने स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स को इस तरह से लागू किया है कि एक दशक के भीतर ही, भारत "कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं" (Fragile Five economies) के समूह से बाहर निकलकर शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं के समूह में शामिल हो गया है। लक्ष्य की स्पष्टता ने केंद्र शासित प्रदेशों को देश की सेवा प्रभावी ढंग से करने का यह अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

केंद्र शासित प्रदेशों में पर्यटन की अपार संभावनाओं का विकास हो रहा है। लक्ष्य है "जनभागीदारी" पहलों के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास और सतत विकास को बढ़ावा देना। प्रधानमंत्री ने स्वदेश दर्शन और PRASHAD योजना के तहत 1400 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 52 पर्यटन क्षेत्र परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ किया है और केंद्र शासित प्रदेश इसके लाभार्थी हैं। इतना ही नहीं, आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी पहलों, जो स्वतंत्रता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देती हैं, का उपयोग आर्थिक विकास को गति देने के लिए किया गया है।

लाखों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने और "सहकार से समृद्धि" के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, सहकारी समिति रजिस्ट्रार (RCS) और कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDB) के कम्प्यूटरीकरण का बड़ा प्रयास किया गया है ताकि केंद्र शासित प्रदेशों में RCS कार्यालयों की कार्यकुशलता, जवाबदेही, पारदर्शिता और राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ एकीकरण में सुधार हो सके। स्वास्थ्य बीमा कवरेज देने के लिए ‘आयुष्मान भारत योजना’ का विस्तार किया गया है, और इन केंद्र शासित प्रदेशों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच और सामर्थ्य में सुधार के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) जैसी पहल की स्थापना की गई है।

सामाजिक जुड़ाव पर जोर देने, फिजिकल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और टेक्नोलॉजी को हर किसी के लिए सुलभ बनाने से ये सुनिश्चित हुआ है कि इन केंद्र शासित प्रदेशों में अवसरों की कमी न महसूस हो और वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें। सभी गांवों में ऑप्टिकल फाइबर और किफायती डेटा ने इंफॉर्मेशन तक पहुंच को आसान बना दिया है। गांवों में डिजिटल आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने पर एक नया ज़ोर दिया जा रहा है और UPI ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के छोटे बिजनेस और फुटपाथ वेंडर्स को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने में मदद की है।

विकास का एक और मुख्य क्षेत्र रहा है इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें इन केंद्र शासित प्रदेशों के कई इलाकों में सड़कों और परिवहन प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए बड़ी राशि का निवेश किया गया है। ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा, भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 51 से अधिक रूटों पर वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। ये सभी इनिशिएटिव, केंद्र शासित प्रदेशों को काफी फायदे पहुंचा रहे हैं। जैसे यात्रा अब ज्यादा सुविधाजनक हो गई है और नए रोजगार के अवसर खुल गए हैं। उदाहरण के तौर पर, सागरमाला योजना के तहत फंडेड पुदुचेरी पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एक बहुचर्चित पहल है। इसी तरह, खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत, पुदुचेरी के युवाओं को अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शानदार खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया है, जिसका लक्ष्य टेक्नोलॉजी का उपयोग करके महानगरीय क्षेत्रों में जीवन स्तर को बढ़ाना और सुविधाओं में सुधार करना है। 200 किलोमीटर से भी लंबाई वाले बाइक लेन और पैदल मार्ग, इस क्षेत्र में हुई शानदार प्रगति का प्रमाण हैं। शहर, पब्लिक बाइक-शेयरिंग (PBS) नेटवर्क लगाकर लास्ट माइल कनेक्टिविटी में सुधार करने में सक्षम रहा है। यह PBS प्रयास, जिसमें 5000 साइकिलें और 617 स्टेशन शामिल हैं, भारत में सबसे घनी स्टेशन प्रणाली है और यह पहली पैन-सिटी PBS प्रणाली है। चंडीगढ़ में पहले इंडियन एयरफोर्स हेरिटेज सेंटर के उद्घाटन की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।

गवर्नेंस में नए बेंचमार्क स्थापित करते हुए, मार्च 2024 में, 'NITI for States' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था। यह एक बुनियादी पहल है जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक ‘विकसित भारत’ के साझा विजन में महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए सशक्त बनाती है। इसे सहयोगी शासन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। इन इनोवेशन से फ्रंटलाइन फंक्शनरीज का सशक्तिकरण होता है, सफल पहलों को अपनाने और स्थानीय चुनौतियों के प्रभावी समाधान में मदद मिलती है। इससे नॉलेज शेयर करने और पारस्परिक सीखने के माध्यम से चारों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कोऑपरेटिव फेडरलिज्म मजबूत होता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पीएम मोदी के मजबूत फॉलो-अप और इन क्षेत्रों के लगातार दौरों से आवागमन सुगमता, जीवन सुगमता, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिला है और इससे यहां की जनता के जीवन स्तर में वृद्धि हुई है।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिल्ली का विकास
April 12, 2024

दिल्ली को राष्ट्रों के सम्मानित ध्वजों को फहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है: G20 समिट की मेजबानी के लिए दिल्ली की तैयारियों पर पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के पिछले दस वर्षों ने एक नए भारत के निर्माण की दिशा में काम शुरू किया है; गांव से शहर तक, पानी से बिजली तक, घर से स्वास्थ्य तक, शिक्षा से रोजगार तक, जाति से वर्ग तक - एक व्यापक योजना, जो हर दरवाजे तक विकास और समृद्धि ला रही है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, इस बदलावकारी दशक में, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संचालित इस डेवलपमेंटल मोमेंटम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है।

यह शहर, उस इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के केंद्र में रहा है जिसने पूरे देश को एक नया रूप दिया है। आज अटल सेतु, चिनाब ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और जोजिला टनल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के चमत्कार भारत के निरंतर विकसित होते परिदृश्य को दर्शाते हैं।

ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नया रूप देने, शहरी सुविधाओं को उन्नत करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मोदी सरकार ने कई बदलावकारी पहल शुरू की हैं। रेलवे, हाईवेज से लेकर एयरपोर्ट्स तक, ये इनिशिएटिव, देश भर में इंक्लूजिव और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को गति देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।

मेट्रो रेल नेटवर्क के प्रभावशाली विस्तार ने भारत में शहरी आवागमन में क्रांति ला दी है। 2014 में मात्र 5 शहरों से, मेट्रो रेल नेटवर्क अब देश भर के 21 शहरों में सेवा प्रदान करता है - 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 2024 तक यह 945 किलोमीटर हो जाएगा, साथ ही 26 अतिरिक्त शहरों में 919 किलोमीटर लाइनें निर्माणाधीन हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में दिल्ली मेट्रो फेज-4 के दो नए कॉरिडोर; लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक और इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ को मंजूरी दी है। दोनों लाइनों की संयुक्त लंबाई 20 किलोमीटर से अधिक है और परियोजना की लागत 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है (केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से फंडेड)। इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ लाइन हरियाणा के बहादुरगढ़ क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर पर चलने वाली भारत की पहली नमो भारत ट्रेन; रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने और इसके ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को और रेखांकित करती है।

इसके अलावा, भारतमाला परियोजना में लगभग 35,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों के विकास के माध्यम से बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता और कनेक्टिविटी की परिकल्पना की गई है। इस योजना के तहत 25 ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजना बनाई गई है, जिनमें से चार दिल्ली की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता से जुड़ेंगे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे और शहरी विस्तार सड़क-II। दिल्ली के लिए स्वीकृत कुल परियोजना लंबाई 203 किलोमीटर है, जिसके लिए 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है।

पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने एयरपोर्ट्स की क्षमता बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। IGI एयरपोर्ट दिल्ली देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन गया है, जिसमें चार रनवे और एक एलिवेटेड टैक्सीवे है। हाल ही में विस्तारित अत्याधुनिक टर्मिनल 1 का भी उद्घाटन किया गया है। इसके अलावा, आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) दिल्ली एयरपोर्ट की भीड़भाड़ कम करने में और योगदान देगा, जो सालाना लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान करेगा।

इसके अलावा, नए संसद भवन के उद्घाटन ने शहर के स्वरूप में सभ्यतागत और आधुनिक दोनों तरह के अर्थ जोड़ दिए हैं। यशोभूमि (India International Convention & Expo Centre) के उद्घाटन ने दिल्ली को भारत का सबसे बड़ा सम्मेलन और प्रदर्शनी केंद्र दिया है, जो मिश्रित उद्देश्य वाला पर्यटन अनुभव प्रदान करता है। यशोभूमि के साथ, विश्व स्तरीय सम्मेलन और प्रदर्शनी केंद्र ‘भरत मंडपम’, दुनिया को भारत का दर्शन कराता है।

वेलफेयर की बात करें तो, मोदी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका लाभ अब तक विकास और प्रगति के हाशिये पर पड़े लोगों को मिला है। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय रही है। इसी को हल करने के लिए, मोदी सरकार ने बलात्कार के लिए सजा की मात्रा बढ़ाकर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 को मजबूत किया, जिसमें 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार के लिए मृत्युदंड भी शामिल है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2018 में एक अलग महिला सुरक्षा प्रभाग की स्थापना की। वन-स्टॉप सेंटर, सखी निवास, सेफ सिटी प्रोजेक्ट, निर्भया फंड, शी-बॉक्स, यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग सिस्टम और Cri-MAC (Crime Multi-Agency Center) आदि महिला सुरक्षा के प्रति सरकार के अभियान में महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम-उज्ज्वला योजना, पीएम-मातृ वंदना योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ने भारत में नारी शक्ति को और सशक्त बनाया है।

जैसे-जैसे भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है, दिल्ली भी इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। आज दिल्ली में 13,000 से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप काम कर रहे हैं, साथ ही सरकार PM MUDRA योजना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2023-24 (26.01.2024 तक) के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 2.3 लाख से अधिक लोन स्वीकृत किए गए हैं।

पीएम-स्वनिधि, जो स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के लोन मुहैया कराता है, दिल्ली में 1.67 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को मदद कर रहा है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान नए रोजगार के सृजन और रोजगार के नुकसान की भरपाई के लिए एंप्लॉयर्स को प्रोत्साहित करने के लिए 2020 में शुरू की गई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत, दिल्ली में 2.2 लाख से ज़्यादा एंप्लॉयी लाभान्वित हुए।

इसके अलावा, पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत दिल्ली में लगभग 30,000 घरों को मंजूरी दी गई है और उनका निर्माण पूरा हो चुका है।

दिल्ली के लोगों के लिए वायु प्रदूषण एक सतत समस्या रही है। इस वास्तविकता को समझते हुए, केंद्र सरकार ने देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया है।

पिछले एक दशक में मोदी सरकार के कार्यकाल ने दिल्ली में विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय बदलाव लाए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से लेकर गवर्नेंस रिफॉर्म्स तक, शिक्षा से लेकर रोजगार तक, सरकार की पहलों ने राजधानी शहर पर एक अमिट छाप छोड़ी है। जैसे-जैसे दिल्ली प्रोग्रेस और डेवलपमेंट के अपने सफर पर आगे बढ़ रही है, मोदी सरकार का योगदान आने वाले वर्षों में इसके भविष्य की दिशा को आकार देने के लिए तैयार है।