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"Government means rules, governance means delivery: Shri Modi"
"Government implies authority, governance means accountability: Shri Modi"
"Government is all about power, governance about empowerment: Shri Modi"
"Government is all about F.I.L.E., governance is about L.I.F.E: Shri Modi"
"Government is about outlays, governance is about outcomes: Shri Modi"
"Sometimes when there is talk of a minimum government one of the topics brought up is the size of the government. I don't want people to be sacked from their jobs. I endorse having the right size of government: Shri Modi"
"Government systems work under political pressure, which affects governance: Shri Modi"
"Governance fails, when people lose faith in government services: Shri Modi"
"Government systems have evolved, they have not been imposed upon people. Systems continue to evolve. What we have right now is not the ultimate: Shri Modi"
"We think that we are givers and people are just receivers. It is a crime. When the country is ours and the people ours why should those in power be giving things: Shri Modi"
"If we want to implement good governance, we must look to P4 -- people private public partnership: Shri Modi"
"Mera kya (What is there in it for me) and Mujhe Kya (Why should I be bothered) attitudes are ruining the country: Shri Modi"
"Technology has made the people-government link smooth: Shri Modi"
"Socio-economic impact of govt schemes needs to be measured: Shri Modi"

ऐसी शासन व्यवस्था विकसित करें जिस पर आम आदमी भरोसा करे मुख्यमंत्री

गवर्नमेंट और गवर्नेंस की भूमिका के संबंध में सटीक भेदरेखा सुनिश्चित करनी चाहिए  

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नेटवर्क-१८ न्यूज चैनल के ‘थिंक इंडिया डायलॉग’ कार्यक्रम में मिनिमम गवर्नमेंट-मेक्सिमम गवर्नेंस विषयक चर्चा में स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार को शासन की ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिसमें आम आदमी का पूरा विश्वास हो। उन्होंने गवर्नमेंट और गवर्नेंस, दोनों को एक सिक्के के दो पहलू करार देते हुए कहा कि दोनों की भूमिका के संबंध में सटीक भेदरेखा सुनिश्चित करनी चाहिए। देश के विविध क्षेत्रों के गणमान्य महानुभावों की मौजूदगी में मुख्मयंत्री ने कहा कि मिनिमम गवर्नमेंट-मेक्सिमम गवर्नेंस पर सर्वग्राही चर्चा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिनिमम गवर्नमेंट से आशय साइज ऑफ गवर्नमेंट नहीं अपितु राइट साइज ऑफ गवर्नमेंट होना चाहिए। सरकार पर आम आदमी के अविश्वास के मुद्दे पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि यह परिस्थिति लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिसकी वजह से समाज जीवन पर अनेक संकट उभर कर सामने आते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि आज की गवर्नमेंट और गवर्नेंस सिस्टम कोई अंतिम सिस्टम नहीं है, इसमें भी निरंतर परिवर्तन की गुंजाइश है। सरकार द्वारा गवर्नेंस को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए ऐसी पहल करनी चाहिए जिन पर जनता का विश्वास बैठे। मुख्यमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमें ईश्वर की सत्ता पर भरोसा है लेकिन शासन पर नहीं। इसकी वजह है कि सूर्य के उदय और अस्त होने का समय सुनिश्चित है। यह सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी प्राकृतिक व्यवस्था ही गुड गवर्नेंस है। श्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार दाता है और जनता याचक, यह मानसिकता एक तरह का अपराध है।वस्तुतः सरकार को लेकर जनता के ह्रदय में अपनेपन का भाव पैदा होना चाहिए और समाज जीवन में इस संबंध में मानसिकता बननी चाहिए। इस सन्दर्भ में उन्होंने नागरिक कर्तव्य धर्म की मानसिकता उजागर करने की बात कही। आज समाज में चहूंओर ‘मेरा क्या’ और ‘मुझे इससे क्या’ जैसी मानसिकता दिखाई पड़ रही है, जो नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रति शासन व्यवस्था में अविश्वास समाजिक मूल्यों में ह्रास कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बगैर जनभागीदारी के गुड गवर्नेंस सफल नहीं हो सकती। इस सन्दर्भ में उन्होंने पीपीपी मॉडल के बजाय पी-४ मॉडल यानी कि पीपुल-पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को अपनाने का अनुरोध किया।शासन व्यवस्था में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार जनता को जानकारी दे, निर्णय लेने से पूर्व परामर्श करे, जनता की सहमति प्राप्त करे, जनता के निर्णय को योग्य मानते हुए जनता की भागीदारी विकसित करे। मौजूदा केन्द्र सरकार को नो-गवर्नमेंट नो-गवर्नेंस की स्थिति में बतलाते हुए श्री मोदी ने कहा कि फाइल और लाइफ के अक्षरों में बदलाव कर समग्र व्यवस्था को बदला जा सकता है। सरकार फाइल से चलती है लेकिन गवर्नेंस के जरिए उसमें लाइफ (प्राण) फूंकनी पड़ती है। जब तक गवर्नमेंट अपने कायदे-कानून और रूल्स-रेग्युलेशन द्वारा गवर्नेंस में परफेक्ट डिलीवरी के नतीजे नहीं देगी, तब तक जनता का भरोसा हासिल नहीं कर सकती।

मुख्यमंत्री ने गवर्नमेंट अर्थात आउट ले (बजट प्रावधान) और गवर्नेंस अर्थात आउटकम (परिणाम) की व्याख्या में एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि आउटकम का भी सोशयो इकोनॉमी सर्वेक्षण होना चाहिए।मुख्यमंत्री ने केन्द्र-राज्य संबंधों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि सरकारिया आयोग और पूंछी समिति ने इस सन्दर्भ में जो सिफारिशें की हैं उस पर केन्द्र सरकार को विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने श्रम सुधार, एफडीआई, पॉलिसी, भूमि अधिग्रहण नीति, कृषि क्षेत्र सहित सरकार के अभिगम और गवर्नेंस के विषय में अपने मौलिक विचार प्रस्तुत किये।

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