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आदरणीय सभापति जी,

आदरणीय राष्‍ट्रपति जी के उद्बोधन पर, धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर यहाँ विस्‍तार से चर्चा हुई है। मैं भी आदरणीय राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रकट करने के लिए उपस्थित हुआ हूं और इस सदन को भी प्रार्थना करने के लिए उपस्थित हुआ हूं, कि हम सब सर्वसम्‍मति से आदरणीय राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण को इस धन्‍यवाद प्रस्‍ताव को पारित करें।

चर्चा में सभी आदरणीय सदस्‍यों ने विस्‍तार से मार्गदर्शन किया है। मैं सबका आभारी हूं। एक बात सही है कि यह सदन Council of States है। हम में से कई सदस्‍य ऐसे होंगे, जब इस राज्‍य का प्रतिनिधित्‍व किया होगा, तब उस राज्‍य की जनता का mood एक होगा और आज उस राज्‍य की जनता का mood दूसरा है। वहां राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। जनता ने निर्णय बदले हैं। और उस अर्थ में Council of States के हिसाब से उन राज्‍य की जो भावनाएं हैं, वहां की जो सरकार है उसकी भावनाएं हैं जो कि वहां की जनता ने चुनकर बिठाई हैं, उसका प्रतिनिधित्‍व यहां होना बहुत आवश्‍यक भी है, स्‍वाभाविक भी है। हम किस दल के प्रतिनिधि है, उससे ज्‍यादा हम जिस राज्‍य का प्रतिनिधित्‍व करते हैं, उस राज्‍य में आज व्‍यवस्‍था जो है, उसका प्रतिनिधित्‍व उतनी ही हमारी जिम्‍मेवारी बनती है। और उस अर्थ में यह सदन जनमत का भी आदर करेगा। यह सदन, जनता ने जो अपनी आशाओं-अपेक्षाओं को लेकर के देश को सरकार दी है, उस सरकार का उसके निर्णयों का आलोचना-विवेचना के साथ भी देश को आगे बढ़ाने के लिए साथ सहयोग करना और साथ सहयोग लेना यह हम सबकी मिली-जुली जिम्‍मेवारी है। और मुझे विश्‍वास है कि उस मिली-जुली जिम्‍मेवारी निभाने में हम पीछे नहीं हटेंगे।

दूसरा, लोकतंत्र में न धमकियां किसी की चली हैं, न चल सकती हैं। मुझे 14 साल तक गुजरात में हर दिन जेल भेजने की चिट्ठियां आई करती थी, मैं खड़ा हूं आज आपके सामने। क्‍या खेल होते थे, मुझे मालूम हैं, वो मैं कहना नहीं चाहता। इतिहास के पन्‍नों पर यह चीजें आकर रहने वाली है। और इसलिए ध‍मकियों का चरित्र किसका है, भाषा किसकी है, यह सब जानते हैं। लोकतंत्र में, आपातकाल में क्‍या-क्‍या ज़ुल्म नहीं हुए थे? इससे बड़ी धमकियां क्‍या होती है, लेकिन यह देश झुका नहीं था। और इसलिए जो बातें कही नहीं गई हैं, कृपा करके ऐसी बातों को किसी के मुंह में न डाला जाए, न डाला जाए। कानून के तरीके से ही देश चलना चाहिए, कानून के दायरे में चलना चाहिए।

और इसलिए यहां पर यह भी बात होती है कि कुछ नया नहीं है, योजनाएं पुरानी हैं। सवाल मैंने उस सदन में भी कहा था, मैंने इस सदन में भी मुझे दोहरना पड़ रहा है, योजनाएं नई है, पुरानी है यह विवाद हमें दूर तक ले जाएगा। मुद्दा, समस्‍याएं पुरानी हैं। चिंता समस्‍याओं की है। समस्‍याओं के समाधान के रास्‍ते खोजने की है। और हम इस बात के विचार वाले नहीं हैं कि हम यहां बैठे हैं, इसलिए ईश्‍वर ने सारा ज्ञान हमको दिया है, यह सोच हमारी नहीं है। हम में भी पचासों कमियां हैं। लेकिन हम मिल-बैठकर कमियों को पूरा कर सकते हैं। और लोकतंत्र की यही तो ताकत है। कोई पूर्ण होने का दावा नहीं कर सकता। सब मिलकर के पूर्ण होने की संभावना दिखती हैं। और फिर शायद ईश्‍वर की इच्‍छा न हो, तो कुछ कम भी रह जा सकता है और इसलिए यह सोच हमारी नहीं है।

इस सदन ने यह कभी नहीं सुना होगा, और मैं शायद सच निकलूंगा कि इस सदन ने कभी यह नहीं सुना होगा, कि Treasury Bank पर बैठ करके, जो आज वहां बैठे हैं, उन्‍होंने कभी यह कहा हो कि इस देश को आगे बढ़ाने में किसी औरों का भी योगदान था। जो आजादी के आंदोलन की credit किसी को देने को तैयार नहीं हैं, वो विकास की यात्रा में औरों की भागीदारी को कैसे स्‍वीकार करेंगे? लेकिन मैं हूं, जिसने... मैंने लालकिले पर से कहा था कि देश आगे ले जाने में अब तक की सभी सरकारों का योगदान है, अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों का योगदान है, सभी राज्‍य सरकारों का योगदान है। इसी सदन में मेरे पिछले भाषण को देख लीजिए, इन्‍हीं शब्‍दों को मैंने जिम्‍मेवारी और गर्व के साथ कहा हुआ है। हम यह नहीं मानते हैं और हम तो यह भी सोच नहीं रखते हैं कि देश का जन्‍म 15 अगस्‍त, 1947 को हुआ था। यह हमारी सोच नहीं है। यह देश सदियों से सहस्त्रों वर्षों से बना हुआ है। ऋषियों ने, मुनियों ने, आचार्यों ने, भगवंतों ने, शिक्षकों ने, मजदूरों ने, किसानों ने, खेत और खलिहानों में पसीना बहाने वाले लोगों ने, यह देश बनाया है, सरकारों ने देश नहीं बनाया है। हम तो आते हैं, व्‍यवस्‍थाओं को चलाते हैं और फिर चले जाते हैं।

और इसलिए कृपा करके हम जो है ही नहीं, या जो आपके भीतर पड़ी हुई चीजें हैं, जिसको आपने जीया ऐसे ही है, कम-से-कम आप जिस नजरिये से जिये हो, उस नजरिये से हमें जीने के लिए मजबूर मत करो। और न ही आप हमें उस प्रकार के आभूषणों से नवाजित करने की कोशिश करें। आपने कहा योजनाओं का नजारा सुनाता हूं। मैं बहुत लम्‍बा जा सकता हूं, 84-86 तक जा सकता हूं, लेकिन मैं उतना समय नहीं लूंगा।

जब NDA सरकार थी, तब एक योजना थी “Multipurpose National Identity Card Project”. आप आए, वो बन गई “आधार, UIDAI” - वही योजना नया रंग-रूप।

“संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना” वाजपेयी जी के समय थी। “Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act” आपके समय आई।

अटल जी के समय योजना थी “Freedom of Information Act”, आप लाए “Right to Information Act”.

अटल जी के समय था “अंतोदय अन्‍न योजना”, आप लाए “National Food Security Act”.

अटल जी के समय था, “सर्वशिक्षा अभियान”, post 86th Constitutional Amendment. आप लाये “Right of Children to Free and Compulsory Education Act”.

अटल जी के समय था “स्वर्णिम जयंती ग्राम स्वराज योजना” आप लाये “National Rural Livelihoods Mission”. अटल जी के समय था “Total Sanitation Campaign”, आप लाये “निर्मल भारत अभियान”।

अटल जी समय था “Insurance Regulatory and Development Authority” आप लाये “Pension Fund Regulatory and Development Authority Act”.

आदरणीय सभापति जी, यहां पर कुछ राजनीतिक बातें भी हुई हैं। ये भी कहा गया “ये कौन है, वो कौन है, कितने है”, काफी कुछ कहा गया। मैं ज़रा सदन का ध्यान इस बात की ओर आकर्शित आकर्षित करना चाहता हूं। हमें भी राजनीतिक जीवन में perception के आधार पर निर्णय करने पर कैसी गड़बड़े होती हैं, वो आप जानते हैं कि आप कहां से कहां पहुंच गए हैं। औऱ इसलिए सच्चाई के धरातल को राजनीतिक जीवन में समझना बहुत आवश्यक होता है। हमारे लिए भी आवश्यक होता है, आपके लिए भी आवश्यक होता है। सिर्फ perception के आधार पर नहीं चल सकते। मैं अभी वेंकैया जी का भाषण सुन रहा था। वो कह रहे थे कि सबसे ज्यादा किसान हमारे हैं, सबसे ज्यादा दलित हमारे हैं, वगैरह-वगैरह वो बता रहे थे।

आप देखिए, आज लद्दाख को बीजेपी represent करती है, तो कन्याकुमारी को भी बीजेपी represent करती है। कच्छ को अगर बीजेपी represent करती है, तो अरुणाचल प्रदेश भी बीजेपी represent करती है। और इसलिए आप कच्छ से लेकर कन्याकुमारी तक जाइए। कभी आप सोचते थे कि ये तो Hindi Belt के लोग हैं। आप देखते हैं कि हम South में भी सरकार बनाने में कभी सफल रहे हैं। ये भी जानते हैं कि कभी-कभी ये भी हम पर आरोप लगाया जाता है कि उच्च वर्ण के लोग ही इस पार्टी में हैं। मुझे देखने के बाद अब शायद अपना विचार बदलना पड़ा होगा।

जहां पर ज्यादा आदिवासी जनसंख्या है, ऐसे जो कुछ राज्य हैं। उसमें से महाराष्ट्र हो, मध्य प्रदेश हो, छत्तीसगढ़ हो, झारखंड हो, राजस्थान हो, गुजरात हो, जहाँ maximum आदिवासी राज्य है, उनमें से ये राज्य हैं। और वहां पर आदिवासी समाज ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता दी है। आपको ये भी मालूम है कि गोवा - जहां निर्णायक वोट ईसाई समाज के हैं - वहां भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से राज कर रही है। नागालैंड - जहां पर अधिकतम वोट ईसाई समाज के हैं - वहां भारतीय जनता पार्टी सरकार में है। जम्मू-कश्मीर जहां पर मुस्लिम वोट निर्णायक है, वहां आज हम सत्ता में भागीदार हैं। पंजाब, जहां सिख समाज निर्णायक है, वहां हम कई वर्षों से सत्ता में हैं।

ये सारे क्षेत्र वो हैं, और इसलिए हम भी कभी धरातल पर रहकर सोचें कि भारतीय जनता पार्टी की व्याप्त पहुंच, उसका क्षेत्र विकास कहां-कहां हुआ है, और इसलिए जिस perception को लेकर के आप बातें करते रहते हैं, वो बहुत पुरानी बातें हैं। कभी-कभार ये कहने को बड़ा सरल होता है। पुराने जमाने में हमारे सीताराम जी के जो पूर्वज थे, वो यही बताते थे लोगों को कि देखो वो गाड़ी चल रही है न, उसमें पेट्रोल नहीं जल रहा है, तुम्हारा खून जल रहा है। ये dialogue सुने हैं हम लोगों ने, बहुत सालों से सुने हैं। और उन्हीं dialogue पर आज भी हम चले? वक्त बदल चुका है, वक्त बदल चुका है। और इसलिए मैं जरा पूछना चाहता हूं।

श्री शरद यादव का प्रश्न

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी: शरद जी ने मेरे दिल की बात बता दी है। और मैं उनका आभारी हूं। और कभी आपको मौका पड़े तो मेरी एक किताब है “सामाजिक समरसता” उसको आप जरूर पढि़ए। आपके जो भाव हैं उनकी विस्तार से मैंने व्याख्या की है, आपको आनंद होगा। वो आनंद आपका होगा, ऐसा नहीं कह रहा हूं। जो शरद जी ने बात कही है, जिसको मैं स्वीकार करता हूं - ये स्वच्छता अभियान, क्या ये Corporate के लिए कार्यक्रम है क्या? अमीरों के लिए हैं क्या? Quality of life के लिए हमारा हिंदूस्तान का गरीब तरस रहा है, झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाला तरस रहा है। क्या हम स्वच्छता नहीं दे सकते हैं? और उस अभियान को जब मैं चलाता हूं तो मैं उस गरीब की आवाज सुनता हूं। माता और बहनों के सम्मान की बात करता हूं।

जन-धन योजना: इस देश के गरीब के Bank में accounts खुले। क्या ये Corporate का कार्यक्रम है क्या? जन-धन योजना, ये गरीबों के बैंक के खाते खुले हैं। ये न अमीरों का कार्यक्रम हैं, और न Corporate World का कार्यक्रम है। स्कूल में Toilet, ये कौन से स्कूल हैं? जहां गरीब के बच्चे जाते हैं। सरकारी स्कूल जहां गरीब के बच्चे जाते हैं, झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले बच्चे जाते हैं, ड्राइवर का बेटा जाता है, जिसको अब aspiration है कि बच्चों को पढ़ाना है। Toilet नहीं है, Toilet की मैं बात कर रहा हूं। उसके लिए मैं लगा हुआ हूं। क्या ये ये अमीरों, Corporate World का कार्यक्रम है क्या? मैं Soil Health Card की बात कर रहा हूं, किस किसान के लिए? गरीब किसान के पास कम जमीन है। Per Drop, More Crop की बात कर रहा हूं, क्यों? वो छोटा किसान है, जमीन कम है। उसकी उपज ज्यादा कैसे पैदा हो? उसके लिए मशक्कत कर रहा हूं। क्या ये Corporate World का कार्यक्रम है क्या? क्या है अमीरों के खजाने में जाने वाला काम है क्या?

हम Coal Auction करते हैं। Coal Auction से पैसा आता है, हिंदुस्तान का पूर्वी बैल्ट, जिसके पास इतनी प्राकृतिक संपदा है। बिहार हो, झारखंड हो, पश्चिम बंगाल हो, असम हो, पूर्वांचल हो - इतनी प्राकृतिक संपदा, उड़ीसा - इतनी प्राकृति संपदा के बावजूद भी गरीबी उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। क्या उन राज्यों को गरीबी से बाहर लाना है कि नहीं लाना है? क्या हिंदुस्तान के पश्चिमी छोर का ही विकास होता रहेगा? मेरे मन में दर्द है कि जब तक हिंदुस्तान का संतुलित विकास नहीं करेंगे देश आगे नहीं बढ़ेगा।

और इसलिए Coal Auction से जो पैसा जाएगा तो इन्‍हीं राज्‍यों के पास जाएगा क्‍योंकि coal उनके पास है, और गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, राज्‍यों को आगे बढ़ाने के लिए उनको एक बहुत बड़ी ताकत मिलेगी, क्‍या ये अमीरों के लिए हो रहा है क्‍या? ये क्‍या Corporate World के लिए हो रहा है क्‍या?

गंगा सफाई: इस देश की चालीस प्रतिशत जनसंख्‍या direct और indirect रूप से गंगा के साथ जुड़ी हुई है आर्थिक दृष्टि से। गंगा सफाई किसी के लिए श्रद्धा का विषय हो सकता है। गंगा सफाई किसी के लिए environment का विषय हो सकता है, लेकिन गंगा सफाई एक बहुत बड़ा economic programme भी है। एक आर्थिक चेतना जगाने वाली ताकत रखता है। यह वहां के गरीब से गरीब लोगों के आर्थिक जीवन में बदलाव लाने का एक बहुत बड़ा साधन बन सकता है। ये सरकार आखिरी छोर पर बैठे हुए दरिद्र नारायण की सेवा करने के लिए अपने संकल्‍प को लेकर के चल रही है।

Skill India: आनंद जी बता रहे थे, मैं बताना नहीं चाहता हूं, कि कितनी कमेटियां बने, कितने mission बने, कितने लोग आए और कितने लोग गए, मैं उसकी चर्चा नहीं करना चाहता हूं, लेकिन सारी दुनिया समृद्ध से समृद्ध देश भी एक विषय पर focus करके काम कर रहा है - Skill Development. हम सब की जिम्‍मेवारी है कि हम अच्‍छे ढंग से, हमारे पास Demographic Dividend है। अगर Demographic Dividend है, उसके पास भुजाएं हैं, तो उसके हाथ में हुनर भी चाहिए। सिर्फ भुजाओं से बात बनने वाली नहीं है, भुजाओं में हुनर भी चाहिए। अगर हुनर होगा तो मैं समझता हूं कि इस देश को नई ऊंचाईयों में ले जाने में हमारे देश का एक नौजवान एक बहुत बड़ी ताकत बनकर के उभरेगा। और इसलिए Skill Development हिंदुस्‍तान के सामान्‍य से सामान्‍य गरीब, जो पांचवी कक्षा पढ़ा छोड़ दिया, तीसरी कक्षा पढ़ा छोड़ दिया, उन बच्‍चों के लिए ये एक focus करने वाला कार्यक्रम है, उसको लेकर हम चल रहे हैं।

Housing for All: ये कौन लोग है जिसके पास घर नहीं है? ये Corporates है क्‍या? ये गरीब लोग हैं। गरीब को घर देने की कोशिश है, तीन करोड़ घर गांव में बनाने हैं, दो करोड़ घर शहर में बनाने हैं और 2022, भारत की आजादी का अमृत महोत्‍सव। हम इस सपने को आगे बढ़ने के लिए बढ़ सकते हैं, नहीं बढ़ सकते? और इसमें कोई राजकीय एजेंडा नहीं हो सकता है जी, जहां पर कांग्रेस rule की सरकारें होगी, हम उनको भी कहेंगे लिजिए, आइये, मिलिए, हम गरीबों को घर दें। यह इस सरकार, उस सरकार का कार्यक्रम नहीं है, ये देश के गरीबों का कार्यक्रम है। और इसलिए हम उस चीजों को लेकर चल रहे हैं।

मैं मानता हूं कि हम गरीबों को लेकर जिन बातों को कर रहे हैं, उसको आगे बढ़ाने में आपका पूरा सहयोग रहेगा। आप देखते हैं, बड़े बुद्धिमान लोग तो अलग-अलग analysis करते है, लेकिन इस पूरे बजट में 42% devolution राज्‍यों को जाना हमारे हिन्‍दुस्‍तान की economy को अलग तरीके से देखने के लिए, अब हमें भी सोचना होगा। अब हम देश के विकास की बात करेंगे तो राज्‍य की संपदा और राष्‍ट्र की संपदा - इसे मिलाकर के हमको योजनाओं को एक परिपेक्ष्‍य में देखने का समय आ चुका है। और इतना बता devolution. और आप तो राज्‍यों के प्रतिनिधित्‍व है। यह Council of States है। इतना बड़ा devolution हुआ है। जो पैसे infrastructure में जाएं, विकास में लगें, आप देखिए वहां कि economy generate होना शुरू हो जाएगा। और मैं आग्रह करूंगा आप माननीय राज्‍य सदस्‍यों को represent करते हैं। इतनी बड़ी amount जब राज्‍यों के पास गई है तो उस amount का उपयोग सच्‍चे अर्थ में विकास में हो। अगर सच्‍चे अर्थ में विकास में होगा, तो राज्‍य बहुत तेजी से कठिनाइयों से बाहर आएगा, और उस दिशा में हम सबका ध्‍यान होना चाहिए, मेरा आग्रह रहेगा।

इस बजट के अंदर एक ‘MUDRA योजना’ की बात कही गई है, Micro Units Development and Refinancing Agency. हम देखते हैं कि हमारे देश में सचमुच में देश की economy कौन चलाता है? इस पर अध्‍ययन नहीं हुआ है। इस देश के जो सामान्‍य लोग हैं, वे रोजगार भी देतें हैं, स्‍व-रोजगार भी करते हैं और देश की economy को भी चलाते हैं। ऑटो रिक्‍शा repair करने वाला होगा, ऑटो रिक्‍शा चलाने वाला अलग है, ऑटो रिक्‍शा रखने वाला होगा, scooter repairing करने वाला होगा, साइकिल repairing करने वाला, जूता polish करने वाला होगा, फल बेचने वाला होगा, bread बेचने वाला होगा - सामान्‍य व्‍यक्ति - इस देश में गरीब साढ़े पांच करोड़ से ज्‍यादा ऐसी इकाईयां हैं जो 11-12 करोड़ लोगों को रोजगार देती हैं। ये कम amount नहीं है! उनकी क्षमता हैं एक को रोजी देते हैं या दो को रोजी देते हैं, रोजगार देने की उनकी क्षमता है। लेकिन ये sector ऐसा है कि उसको अगर पैसा चाहिए तो कोई व्‍यवस्‍था नहीं है, जहां से उसको पैसा मिले।

120% ब्‍याज से वो साहूकार के घर जाता है, पैसे वापस लेता है। और आधी जिंदगी उसकी ब्‍याज देने में चली जाती है। पहली बार यह सरकार इस योजना को लेकर के आई है MUDRA की, जिसके तहत इसी वर्ग को धन मिलेगा, उसकी Institutional Arrangement होगी और उसके कारण वो अपने आर्थिक विकास को आगे बढ़ाएगा। और मैं मानता हूं देश को आर्थिक प्रगति पर ले जाने वाली जितने और पहलू है, ये बराबरी के साथ खड़ा रहेगा और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, एक ऐसा नया क्षेत्र है जिस पर हमने focus किया है और मुझे विश्‍वास है कि एक नई ऊंचाईयों पर ले जाने में वो फायदा करेगा।

ये लोग कौन है? करीब 54% लोग ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्‍यवसाय करते हैं, छोटा-मोटा अपना कारोबार चलाते हैं। 46% शहरों में हैं। और इसमें ये जो काम करने वाले लोग हैं उसमें 60%, more than 60% या तो वो Scheduled Caste के हैं, या Scheduled Tribes के हैं, या OBC के हैं। यानी इस समाज का इतना पिछड़ा वर्ग है जिसकी ओर हम अगर ध्‍यान देंगे, मैं समझता हूं कि वह बहुत बड़ी मात्रा में अपना काम उसको आगे बढ़ा सकता है। हम इसको रोजगार देने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। अब तक इनको जो Institutional Finance होता था…

सुश्री मायावती का प्रश्न

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी: आदरणीय सभापति जी, यह वरिष्‍ठ सज्‍जनों का सदन है। यहाँ अनुभवी लोग हैं, तपस्‍वी लोग हैं, देश को बहुत कुछ दिया है, ऐसे लोग हैं। मैं बहुत नया हूं, आप हमारी रक्षा कीजिए जी।

आदरणीय सभापति जी, 125 करोड़ लोगों में से 29 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास Life Insurance है। और केवल 19 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास Accidental Death Cover Insurance का है। केवल छह करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास Organized Pension Scheme का cover है। इसके अलावा, BPL category में, तीन करोड़, विधवा हो या तो वरिष्‍ठ नागरिक हो, जिनको 300 रुपये से लेकर के 1500 रुपये तक आज pension की व्‍यवस्‍था है। अपने आप में इतने बड़े देश में यह व्‍यवस्‍था बहुत सामान्‍य है। हम एक बहुत बड़ी समस्‍या का समाधान करने के लिए एक बहुत बड़े कदम उठाने का प्रयास कर रहे हैं। और मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना के तहत, और अटल पेंशन योजना के तहत हम समाज के सभी वर्गों को स्‍पर्श करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। और बड़ी आसान सी व्‍यवस्‍थाएं हम करना चाहते हैं।

प्रति मास सिर्फ एक रुपया और 18 से 70 वर्ष आयु के लोगों के लिए, और उसके द्वारा हम दो लाख रुपये का Accidental Death Cover बीमा - मैं समझता हूं कि हमारे देश में जिस प्रकार की व्‍यवस्‍था है यह गरीब से गरीब व्‍यक्ति की चिंता करने का प्रयास है। प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना - सालभर के 330 रुपया यानि ज्‍यादा नहीं प्रतिदिन ज्‍यादा से ज्‍यादा एक रुपया, उसको और वो भी 18 से 50 साल की उम्र के लोगों के लिए जिसमें कोई medical test कराए बिना उसका insurance होगा, और यह स्‍वाभाविक क्रम में भी मृत्‍यु हो जाए, तो भी उसको 2 लाख रुपये का बीमा उपलब्‍ध होगा, उसके परिवार के लिए।

अटल पेंशन योजना - पेंशन राशि के विकल्‍प में किसी को अगर 60 साल के बाद एक हजार रुपये पेंशन चाहिए, दो हजार चाहिए, तीन हजार चाहिए, पाँच हजार चाहिए, जितना पेंशन चाहिए उसके हिसाब से यह योजना काम करेगी। अगर कोई 20 साल का युवक इससे जुड़ता है और यदि वह पाँच हजार रुपये का पेंशन चाहता है 60 साल के बाद, तो उसको 60 साल की आयु तक 248 रुपया contribute करना होगा, और वो 60 साल के बाद जीवनभर प्रतिमास पाँच हजार रुपये की पेंशन उसको मिलती रहेगी। और अगर पहले उसका स्‍वर्गवास हो गया, तो यह पेंशन उसकी पत्‍नी को continued रहेगी। इतना ही नहीं, दोनों नहीं रहेंगे तो बच्‍चों को साढ़े आठ लाख रुपया - जो उन्‍होंने जमा किया है - वो वापस मिलेगा। यानी हमारे देश में एक Social Security के विषय में जो एक awareness चाहिए, देश जहां पहुंचा है वहां हमारे समाज के इस तबके के आखिरी जिंदगी के लिए एक संतोष और सुरक्षा का भाव हो, उसकी दिशा में हमने काम करने का एक प्रयास शुरू किया है और एक प्रकार से सारे देश को... हमारा किसान यह मान लेता है कि “भई मैं इतनी मेहनत करता हूं, बूढ़ा जो जाता हूं, बच्‍चे अलग कर देते हैं। मेरे पास पेंशन होता तो...” इस व्‍यवस्‍था के कारण किसान को भी पैसे मिलेगा। गृहणी है... बुढ़ापे में अगर बच्‍चे ने छोड़ दिया या घर में बच्‍चे नहीं है, परेशानी है, तो पेंशन स्‍कीम से उसको लाभ मिलेगा।

एक नया प्रयास हमने किया है Gold Bond का, और उसमें भी हम देखते है कि देश आजाद हुआ लेकिन अभी भी हमारे Gold का Hallmark किसी न किसी विदेशी Hallmark से चलता है। यह मन को चुभता है कि क्या हमारे देश के Hallmark का Gold नहीं होना चाहिए? और इसलिए अब coin होगा, गिन्‍नी होगी, बिस्किट होगा, अशोक चक्र के emblem के साथ और जिसका दुनिया में भी पहुंच होनी चाहिए, उस दिशा में हम आगे बढ़ाना चाहते हैं। कभी-कभी कुछ चीजें होती है, जो स्‍वाभिमान से जुड़ जाती हैं, उसके कारण एक बहुत बड़ी ताकत खड़ी हो जाती हैं। हम Sovereign Gold bank की बात करते हैं। आज कहते हैं हमारे यहां 20 हजार टन सोने की बात होती है। अब हमारे आनंद शर्मा फिर खड़ें हो जाएंगे, तो कहेंगे मोदी ने 20 हजार टन कहा होगा, दिखायें - मैं कहता हूं, ऐसा कहा जाता है।

आज सोने का हम उपयोग नहीं कर सकते हैं, आज Gold Monetization, इतनी बड़ी मात्र में, एक प्रकार से वो dead money की अवस्‍था में पड़ा है। वो अगर circulation में आता है तो देश की economy को एक बहुत बड़ा driving force मिलता है। और इसलिए हम चाहते हैं, पहले नियम था कि आधी किलो से कम नहीं। अब कोई नियम नहीं रखना चाहते। थोड़ा-सा भी है रखो, पैसे लो, और अपना गाड़ी आगे बढ़ाओ। मैं समझता हूं इसके कारण बहुत बड़ी मात्रा में यह जो हमारा Dead Money एक प्रकार से Gold के रूप में पड़ा है, एक बहुत बड़े economy को boost में देगा। उसी प्रकार से हम Sovereign Gold Bond के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं। जरूरी नहीं कि आप metal प्रत्‍यक्ष लें। आप कागज के रूप में भी Gold ले सकते हैं। और जब कागज वापस देंगे। उस समय का जितना Gold होता होगा, वो आपको मिल जाएगा। एक प्रकार से import-export का जो हमारा imbalance रहता है, उसको भी balance करने के लिए उसके कारण प्रयास होगा। एक ऐसी योजना है जिसके कारण मैं समझता हूं कि काफी लाभ होगा।

एक बात निश्चित है देश में अच्‍छी स्थिति लाने के लिए अच्‍छी नीति की भी जरूरत है, और अच्‍छी रीति की भी जरूरत है। अकेली नीतियों से परिणाम नहीं आएगा। अकेली रीतियों से भी परिणाम नहीं आएगा। नीति और रीति का combination चाहिए, नीति और रीति की पटरी पर ही विकास की गाड़ी आगे बढ़ सकती है। और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम अपनी ऐसी कार्यशैली को विकसित करना चाहते हैं, जिस कार्यशैली के द्वारा हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

यहां पर श्रीमान गुलाम नबी जी ने भी, और श्रीमान आनंद जी ने भी अफसरों के तबादले को लेकर के बड़ी पीड़ा व्‍यक्‍त की है। और मैं देख रहा हूं जैसे पानी में चना सूखता है, ऐसे सूख रहे हैं ये लोग। इतना दर्द हो रहा है इनको, कि transfer हो गई। मैं जरा कहना चाहता हूं। उपदेश देने से पहले जरा हम भी आईने में देख लें अपने आप को।

2004 में आपकी सरकार बनी थी। 2004 में सरकार बनते ही आपने एक पल के विलंब बिना, Cabinet Secretary को हटा दिया था।

आपकी 2004 में सरकार बनी थी। आपने seniority को छोड़कर के Foreign Secretary की नियुक्ति की थी।

2004 में आपकी सरकार बनी थी। आपने पलभर में Home Secretary को निकाल दिया था।

2004 में आपकी सरकार बनी थी। आपने महत्‍वपूर्ण Defence Secretary को पलभर में निकाल दिया था।

इतना ही नहीं, आपने अपमानित करके गवर्नरों को अंधेरे में रखकर के निकाल दिया था। हमने यह काम नहीं किया। और गुनाम नबी जी आप तो Health minister थे, जब आप ही के विभाग का एक secretary, polio के लिए UN का सम्‍मान प्राप्‍त कर रहा था। एक हाथ में UN का सम्‍मान चल रहा था, और दुसरे हाथ में आपने निकाल दिया था उसको। और इसलिए, हम क्या क्या खोलना चाहते हैं, तय करें। मैं नया हूँ लेकिन खजाना बहुत बड़ा है।

और इसलिए हम उस दिशा में जाना चाहते हैं कि नहीं जाना चाहते वो हम तय करें और इसलिए हम कहते हैं कि भाई, हमारी कोशिश ये है, Good Governance हमारा प्रयास है। यहां पर ये भी बात आई कि भाई, कुछ हमारे समर्थकों के मुहं से भी आती है, कुछ हमारे प्रति अच्छा भाव रखने वाला का भी आता है, और कुछ विशेष प्रेम करने वालों का भी आता है। और मुझे तो विशेष करने वालों का बहुत प्रेम मिला है।

जमीन पर कुछ नजर नहीं आता है। मोदी जी की बात तो बहुत अच्छी है, मोदी जी सोचते अच्छा हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नजर नहीं आता है।“ मैं अपने साथियों को कहना चाहता हूं, आप लंबे अर्से तक सत्ता में रहे हैं। और सत्ता का एक नशा होता है। भगवान करे, हम बच जाएं। और जब सत्ता का नशा होता है तब सिर काफी ऊंचा रहता है और जब सिर ऊंचा रहता है, झुकने की आदत छूट जाती है और जब झुकने की आदत छूट जाती है तब जमीन दिखती नहीं है। और इसलिए जितना झुकोगे उतना ही जुड़ोगे और इसलिए मैं, जो जमीन की बात पूछना चाहते हैं, उनको मैं कहना चाहता हूं। काम कैसे होता है?

रेलवे सरकार की है, Highway सरकार के हैं। लेकिन दोनों के बीच इतना टकराव रहता था कि 350 से अधिक projects Highways के, रेलवे मंजूर नहीं करती थी, और रेलवे के projects, Highways मंजूर नहीं करता था। किसी को Road cross करके रेलवे ले जानी है, किसी को रेल cross करके OverBridge बनाना है। 350, और कई सालों से, हम आए और हमारे ध्यान में आया। हमनें दोनों Department को बिठाया और silo को खत्म किया, दोनों के बीच MoU किया और मुझे आज खुशी है इसका Online Portal बना है। Online Clearance दिया जाता है। 350 सालों से अटके हुए सारे projects clear हो गए दोनों departments में। और कोई भी proposal आएगी, 60 दिन में clear करना तय कर दिया गया। 60 दिन के भीतर जो काम अभी process में हैं, आज सिर्फ 22 projects हैं जो process में हैं। ये हैं Good Governance, ये है काम होना।

आप देखिए, मैं जरा आपको हिसाब देता हूं, जमीन पर क्या होता है। यूपीए के समय की मैं बात करता हूं। Per day 7.4 kilometer के Highway award होते थे, और 5.2 kilometer per day achieve होता था। हमारे नौ महीने का हिसाब दे रहा हूं जी, आनंद जी। हम per day 18 kilometer का award देते हैं, और अब तक का रिपोर्ट है, 10.1km per day हम achieve करते हैं। Double! काम कैसे चलता है, सरकार नीचे जमीन पर कैसे दौड़ती है।

रेलवे:

2013-14 - New line - UPA – 390km.

New line – 9 महीने - NDA2 410 kilometer.

2013-14 - Gauge Conversion - 585 kilometer.

9 महीने हमारे - 700 kilometer.

UPA - doubling - 675 kilometer.

हमारा - 810 kilometer.

कहने का तात्पर्य ये है कि अगर हम जमीन के साथ जुड़ें तो जमीन पर क्या चल रहा है, वो अपने आप पता चलने लग जाएगा ये मुझे पूरा विश्वास है।

आदर्श ग्राम योजना - मुझे खासकर के कुछ माननीय सांसदों का आभार भी व्यक्त करना हैं, उनका अभिनंदन भी करना है। करीब 660 सांसदों ने इस काम को आगे बढ़ाया है और बड़े मनोयोग से आगे बढ़ाया है। कुछ लोगों की जो मुझे जानकारी, ऐसे ही मुझे उल्लेख करना अच्छा लगता है, खासकर के मैं आदरणीय मोतीलाल जी की बात करना चाहूंगा, मोतीलाल जी वोरा। मोहाली - उन्होने इस गाँव में इतना बढ़िया-सा काम किया है, छत्तीसगढ़ में। उन्होंने सभी राशन कार्ड धारकों को जन-धन के account खुलवा दिए, और खुद ने interest लिया है, आधार कार्ड से जोड़ दिया, और सरकारी वितरण की दुकान की निगरानी और चौकसी कमेटियों का निर्माण किया है ताकि PDS System का लाभ गरीब से गरीब से मिले। ये आदरणीय मोतीलाल जी ने इस काम को लागू किया है।

यानि किस प्रकार से हमारे आदरणीय सांसद रूचि लें, तो एक नया model गांव के लिए विकसित हो रहा है। मेरे पास कईयों की जानकारी हैं। मैं देखता हूं हमारे Parliament के श्री कामख्या प्रसाद, जोरहाट से, उन्होंने ICDS और Mid-day meal उसकी निगरानी के लिए काफी perfect व्यवस्था बनाई है, ताकि बच्चों को अच्छा खाना मिले। हमारे श्रीमान अशोक जी, हमारे उड्डयन मंत्री। उन्होने भी आंध्रा के अंदर एक गांव जो उन्होने दत्तक लिया, लोग शराब पीते थे, और वातावरण ऐसा बनाया कि जिसके पास शराब की दूकान का license था, उसने सामने से होकर के कह दिया मैं surrender करता हूं लेकिन मैं इस गांव को शराब मुक्त करूंगा। अगर हम लोग चाहे आदर्श ग्राम योजना को किस प्रकार से हम आगे बढ़ा सकते हैं, मैं समझता हूं कि इसमें सबका सहयोग रहेगा तो ये काम आगे बढ़ेगा।

Labour के संबंध में आपको मालूम होगा कि कई वर्षों से हमारे मजदूर ने जो पसीना बहाया है, उसके करीब 27 हजार करोड़ Rupees, 27,000 करोड़ Rupees amount छोटी नहीं है, उसका कोई लेने वाला ही नहीं है। क्यों? क्योंकि किसी के 50 रु है, किसी के 100 रु है, किसी के 200 रु है, और वो बेचारा अब मजदूरी किसी एक जगह पर करता है। पहले किसी दूसरी जगह पर चला गया वापिस वो 50, 100 रुपए लेने के लिए जाना, उसके लिए ज्यादा जाने का खर्चा होता है। और इसी के कारण कुछ लोग बेचारे, उनका स्वर्गवास हो गया। कोई हिसाब-किताब नहीं है, सरकारी खजाने में 27,000 करोड़ रुपए मजदूरों के पैसे पड़े हैं।

हमने कोशिश की है योजना बनाने की, Universal Account Number – UAN. इस Universal Account Number के द्वारा Laborers को, वो कहीं पर भी जाएगा वो उसके इस Account Number के साथ जो भी उसका money होगा transfer हो जाएगा। इसके कारण इसमें 27 हजार करोड़ में उसका कोई हिस्सा पड़ा होगा, वो भी उसको चला जाएगा। गरीब के हक का पैसा है। सरकार कहीं और नहीं लगाना नहीं चाहती उन पैसों को हम वापिस करना चाहते हैं और ये काम, मैं समझता हूं, धरती पर एक अच्छा काम इसके द्वारा हुआ है और इसका लाभ मैं जरूर मानता हूं मिलेगा।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना की बहुत बात हुई है मैं उसके लिए आपका और अधिक समय नहीं लेना चाहता हूं।

यहां पर एक चर्चा आई Fertilizer के संबंध में। आप जानते हैं कि 112 lakh ton urea पिछली बार जो था इस बार 170 lakh ton urea की खाद बिक्री already हो चुकी है और इसलिए भी कोई उसमें भी पीछे रहने का कारण नहीं है।

हम बार-बार MNREGA की चर्चा करते हैं। मैंने उस सदन में जो कहा है उसको repeat नहीं करता हूं क्योंकि वो अब अच्छी तरह register हो गया है, बात पहुंच गई है। अब देखिए मैं एक थोड़ा, आधार कार्ड जिसकी चर्चा होती है वो, और मनरेगा। मुझे comparison आलोचना करने के लिए नहीं करनी है। लेकिन मेरे में हिम्मत है ये कहने की और मेरे संस्कार भी हैं कि पुरानी सब सरकारों का कोई न कोई योगदान भी है तभी तो देश यहां पहुंचा है। हो सकता है जहां पहुंचा है वहां पहुंचने मैं रुकावटें आईं होंगी, उसमें योगदान होगा। लेकिन ये आधार कार्ड जिसकी चर्चा होती है।

UPA के 45 महीने में, यानि करीब साढ़े तीन साल, 7 करोड़ आधार आधारित हस्तांतरण हुए।

NDA के 9 महीनों में 17 करोड़ हुए हैं।

कहां 45 months और कहां 9 months?

UPA के 45 महीनों में 5,000 AADHAR number, MNREGA के साथ link किए गए। NDA के 9 महीने में 8 लाख, उसके साथ जोड़ दिए थे। कहां पांच हजार, 45 महीने का और कहां 9 महीने का आठ लाख?

UPA के 45 महीनों में, 1.7 करोड़ AADHAR Job Cards के साथ जोड़े गए थे। हमने 9 महीने में ये काम 5 करोड़ लोगों तक पहुंचाया। कहां 1.7 और कहां पांच?

और इसलिए कभी-कभार धरती पर... मैंने कहा नीति और रीति दोनों के पटरी पर ही विकास होगा।

हम MNREGA की बात करते हैं। 100 दिन रोजगार हमने गारंटी की बात कही है, गरीब परिवार को कही है। गरीब परिवारों को 100 दिन रोजगार अधिकार देने के सामने, 2013-14 में average 42.5 दिन ही रोजगार मिला है। 42.5 यानी 50% भी नहीं पहुंचे हैं।

100 दिन की रोजगारी कितनों को मिली 2013-14 में? Only 6.35%. हमने... और सबसे बड़ी बात, UPA ने सुप्रीम कोर्ट में जब ये विषय आया, MNREGA का, तो यह स्वीकार किया है कि MNREGA में पांच साल में जो एक लाख करोड़ रूपया खर्च किया गया, हमारे पास उसका कोई Audit Report नहीं है। ये सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई आपकी affidavit है।

अब मुझे बताइए कि हम, योजनाओं, उसकी चर्चा, वाहवाही, नियम, क़ानून बड़े सख्त हैं, ठीक है! देश को आवश्‍यकता है जो भी अच्‍छा है, उसको हम धरती पर उतारें। गरीब के घर तक पहुंचायें। सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति के जीवन के बदलाव लाने का प्रयास करें और आप देखेंगे, 9 महीने में आप देखेंगे कि इस सरकार का प्रयास उस दिशा में है।

यहां पर आदरणीय मायावती जी ने बुंदेलखंड की चर्चा की थी। बुंदेलखंड के दो हिस्‍से हैं। मध्‍यप्रदेश में भी है, उत्‍तर प्रदेश में भी है। और मध्‍यप्रदेश के छह जिलों के लिए 3,760 crore रूपये दिए गए थे। उत्‍तर प्रदेश के सात जिलों के लिए 3,506 crore रूपये दिए गये थे। मध्‍यप्रदेश में 96% amount खर्च किया गया। उसका परिणाम क्‍या आया? बुंदेलखंड का, मध्‍यप्रदेश का हिस्‍सा - उसका परिणाम यह आया कि गेहूं के उत्‍पादन में 1,629 किलोग्राम प्रति हेक्‍टर से 2,323 तक वो गेंहू उत्पादन को ले गए। सिंचाई में इन पैसों से उन्‍होंने 1,42,000 हेक्‍टयेर जमीन को सिंचाई के अंदर जोड़ा। दूध उत्‍पादन वहां 9 लाख टन था वह 12 लाख टन तक ले गये। 561 Milk Co-operative Societies को उन्होंने आरंभ किया। पेयजल आपूर्ति में 40 लीटर प्रति व्यक्ति से वे 55 लीटर तक पहुंचा कर ले गए। अब आप उत्‍तर प्रदेश के हैं तो मैं कहना नहीं चाहता हूं, वहां क्‍या हुआ है, उसका रिपोर्ट में नहीं देता हूं। लेकिन आपने जो चिंता व्‍यक्‍त की है, हो सकता है उस में सच्‍चाई हो, और आपका दर्द सही हो। लेकिन मध्‍यप्रदेश जहां दूसरा part था उसकी जानकारी मैंने आपको दी है।

यहां पर बंगाल की भी चर्चा हुई। मैं जरा जो लोग एक बहुत बड़ा वैश्विक विचारधारा लेकर के imported ideas लेकर के देश चलाने की कोशिश करना चाहते हैं। 30 साल तक पश्चिम बंगाल में उनको राज करने का अवसर मिला। आज जो स्थिति है मैं इसके लिए, Derek, आपको दोष नहीं देता हूं। आप बाकी जो करना है, करें! बाकी जो करना हैं करे लेकिन CR आपका ठीक रहना चाहिए। 30 वर्षों में पश्चिम बंगाल, जो कि कभी हिंदुस्‍तान में औद्योगिक activity का capital हुआ करता था। कलकत्‍ता, देश की औद्योगिक राजधानी के रूप में उसकी पहचान थी, वो पूरा का पूरा नष्‍ट हो गया। कृषि विकास बहुत तेज गति से बढ़ने वालों में पश्चिम बंगाल था। 30 साल में, वो minus तक पहुंच गया। Industrial Output बंगाल का हिस्सा 1980 में 10% था, जो 4% आ गया। 1976-77 में कुल फैक्ट्रियों में से 7.6% बंगाल में थी, जो 2008-09 में सिर्फ 4% हो गई। Agricultural Growth 1966-76 में पश्चिम बंगाल 17.3% की वृद्धि हुई जी और 2001-07 में 7.8% रह गई। 2007 में NSS, National Sample Survey, में पाया गया कि starvation में स्थिति बंगाल में सबसे ज्‍यादा थी। 60% स्‍कूलों में बालिकाओं के लिए functional toilet हैं, जबकि National Average 75% है।

इसलिए कल सीताराम जी ने एक बात कही और उन्‍होंने कहा कि चेन्‍नई में Nokia का जो कारखाना है, वो बंद हो गया। हमारे देश में job creation हमारी आवश्‍यकता है, और job creation की दिशा में हम जितना आगे बढ़ सकें, और अगर job creation में हमें आगे बढ़ना है तो हमें ‘Make in India’ के मंत्र को आगे बढ़ाना पड़ेगा और infrastructure जितना तेज गति से आगे बढ़ेगा, रोजगार की संभावना बढ़ेगी, और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए हमें infrastructure को बल देना चाहिए।

कल श्रीमान सीताराम जी ने चेन्‍नई में Nokia की जो फैक्ट्री बंद हो गई, उसकी चिंता व्‍यक्‍त की थी। 25,000 लोगों का job चला गया, उसकी चिंता व्‍यक्‍त की थी और इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि Nokia की जो फैक्‍ट्ररी बंद हो गयी है, इस सरकार के कारण नहीं हुई है। पिछली सरकार के कामों के कारण उसका परिणाम हुआ है। आपकी चिंता सही है। 25,000 लोग वहां बेरोजगार हो गये हैं। लेकिन मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि हमने एक दिशा में प्रयास शुरू किया है, और उस प्रयास का परिणाम होगा कि आने वाले दिनों में Nokia फिर से शुरू हो और लोगों को रोजगार मिले। क्‍योंकि हम चाहते हैं कि रोजगारी के लिए infrastructure को बल देना होगा, रोजगार के लिए हमने इसको बल देना होगा। और उस दिशा में हम प्रयास करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

राष्‍ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में Digital India की बात कही है। आदरणीय सभापति जी, ये बात सही है कि किसी समय एक theory दुनिया में चलती थी - haves and have-nots की। मैं समझता हूं आने वाले दिनों में Digital Divide भी गरीबी और पिछड़ेपन का एक कारण बन सकता है। और इसलिए हमने कभी भी देश में Digital Divide की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। और Digital Divide पैदा न हो, सबको सामान्‍य रूप से आज जो नया World create हुआ है, उसमें गरीब से गरीब व्‍यक्ति का भी… भारत के पास आज करीब 90 करोड़ से ज्‍यादा मोबाइल फोन हैं, और देखते ही देखते 100 करोड़ तक पहुंच जाएंगे। हम Mobile Governance की ओर जाना चाहते हैं।

गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी Mobile पर इसकी व्‍यवस्‍था कैसे मिले?

और उसके लिए, उसी प्रकार से Digital India की जब बात करते हैं, तब North-East में जहां के नौजवानों अंग्रेजी अच्‍छी तरह बोल सकते हैं, अंग्रेजी भाषा में पढ़े-लिखे हैं। क्‍या हमारे BPO Centers हैदराबाद, बुंबई, बेंगलोर, चेन्‍नई, अहमदाबादी चलने चाहिए, या हमारे North-East के इन नौजवानों के पास भी जाने चाहिए? हमारी कोशिश यह है कि उस दिशा में हम जाए, ताकि हमारे नौजवान को भी हम रोजगार की व्‍यवस्‍था करें।

Black money के संबंध में सबने काफी चिंता जताई है। यही एक विषय है जो कुछ समय पहले कोई छूने का तैयार नहीं था, बोलने को तैयार नहीं था, हम ही बोलते रहते थे। और उस समय अनेक प्रकार के आंकड़े आते थे। और मैं मानता हूं कि जिस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा “SIT बनाओ”, 2011 में, अगर उसी समय SIT बना देते, उसी समय कार्रवाई शुरू करते तो जो सपना हम देख रहे हैं कि इतने रुपये आते, इतने रुपये जाते, यह संभव होता। लेकिन वो समय, वो समय इसलिए नहीं किया गया SIT कि किसी को बचाने का interest था। अगर उस समय SIT बन जाती, और उस समय प्रक्रियाएं हुई होती, तो यह रुपया आने-जाने का जो समय मिला है वो समय नहीं मिलता। और मैं मानता हूं, अभी भी देश में एक-एक पाई वापस लाई जानी चाहिए। हम काले धन के लिए आवश्‍यक जो भी कानूनी व्‍यवस्‍था करनी चाहिए करते हैं। इतना ही नहीं G-20 summit की बात हो, Switzerland के साथ dialogue की बात हो, अमेरिका के साथ MoU करने की बात हो, दुनिया के देशों के साथ information exchange के लिए हम MoU करते चलते जा रहे हैं। एक के बाद एक नये देश जुड़ रहे हैं, क्‍योंकि information के बिना लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे।

दूसरी तरफ, भारत के नागरिकों को विदेश में उनकी कोई भी संपत्ति हो, दर हो, उसकी जानकारी देने के लिए कानूनी बंधन अब शुरू हो जाएगा और इसलिए चीजें प्रकट होगी और उसी में से देश का कालाधन वापस लाने का हमारा संकल्‍प है, उस प्रक्रिया को हम पूरा करेंगे और हमें करना चाहिए।

यहां पर हमारे सभी आदरणीय सदस्‍यों ने भूमि अधिग्रहण की चिंता की है। यह वरिष्‍ठजनों का सदन है, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, इस प्रावधान में किसानों के खिलाफ कोई भी बात हो, मैंने Day One से कहा है, हम correct करने के लिए तैयार हैं। लेकिन जो हुआ है, उसमें कमियां है, क्‍योंकि करने वालों में हम भी थे, हम यह मना नहीं करते कि हमने नहीं किया है। अगर अच्‍छा है तो हमें credit मत दो, लेकिन पाप है तो कुछ पाप की भागीदारी हमारी भी है, लेकिन अब हमें उसमें से बाहर आना चाहिए। देशहित के लिए आना चाहिए, विकास के लिए आना चाहिए। और मैं इसको अंहकार का, और राजनीति का पहलू बनाना नहीं चाहता।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को सफल करना होगा, किसानों को पानी पहुंचाना होगा, तो irrigation के लिए हमें जमीन लगेगी। हमें ग्राम सड़क बनानी होगी तो हमें जमीन लगेगी। हमें Rural Housing करना है गरीबों के लिए घर बनाना है तो जमीन लगेगी। और जमीन मिलने का प्रावधान वर्तमान कानून में नहीं है। और इसलिए दूसरा, मेहरबानी करके एक अपप्रचार हम न फैलाएं, कि compensation कम होने वाला है। Compensation के विषय को जरा-सा भी हाथ किसी ने नहीं लगाया, नहीं लगने वाला है। जितना compensation तय हुआ है, वही होगा और इसलिए कृपा करके हम यह न करे, लेकिन कानून यहां बना 2013 में। हुआ क्‍या? 2014 की जनवरी में लागू हुआ। हरियाणा में जुलाई महीने में, जबकि वहां कांग्रेस की सरकार थी, उसने इसी कानून के तहत जो rules बनाए, वो rules के अनुसार यह compensation देने से तो उन्‍होंने मना कर दिया।

इतना ही नहीं महाराष्‍ट्र कांग्रेस की सरकार, कानून बनाया हमने। इसका मतलब यह हुआ कि राज्‍यों के लिए इस कानून के तहत काम करना मुश्किल, मैं कांग्रेस, बीजेपी की बात नहीं कर रहा हूं। मुश्किल है, उनको कठिनाई महसूस हो रही है। अगर हम... और सभी राज्‍यों ने अपनी व्यथा व्यक्त की, और यह तो Council of States है, राज्‍यों की रक्षा करना यह आपका भी दायित्‍व है। और इस सदन की पहली जिम्‍मेदारी है कि राज्‍यों ने जो भावनाएं व्‍यक्‍त की हैं कि हम पर यह कानून बोझ बन गया है, हमारी कठिनाईयां दूर करें, इस नहए कानून से राज्यों की आशा-आकान्शाओं के अनुसार परिवर्तन लाने का प्रयास हुआ है।

कानून रहेगा, कमियां दूर करनी हैं। उसमें भी कोई कमी है वो भी दूर करनी है। और मैं आपको निमंत्रण करता हूं। आप आईए सहयोग कीजिए और हम मिलकर के हमारे देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाएं। और हम कितने ही बुद्धिमान क्यों न हो, लेकिन जिस कानून ने 1894 से 2014 तक 120 साल तक इस देश का विकास भी किया, इस देश के किसान की सेवा भी की, अचानक रातों-रात वो बेकार हो जाता है ऐसा नहीं है। हमारे देश के किसानों की चिंता करनी है, उसको सुरक्षा करनी है, उसको सुरक्षा मिलनी चाहिए पूरी तरह, उसका पूरा protection होना चाहिए, लेकिन हम सबको मिलकर के उसको आगे बढ़ाना चाहिए ये मेरा आप सबसे आग्रह है।

एक दूसरा भ्रम फैलाया जाता है। कृपा करके आपकी गलत information के कारण हुआ हो, इरादा शायद गलत न भी हो, लेकिन कृपया ऐसा हम न करें। सरकार खाद्य सुरक्षा के संबंध में जो 67% coverage है गरीबों का, उसमें से कुछ भी कम करने का सरकार का निर्णय नहीं है। क़ृपा करके... कोई कहता है 67 का 40 होने वाला है। मैं मानता हूं कि ऐसा कुछ नहीं है, और कृपा करके इस प्रकार के भ्रम न फैलाए जाएं और हम लोगों को ये तकलीफ न करें। ये जो devolution हुआ है… उनको जो काम दिया गया था वो था Food Corporation of India का restructuring. देखिए reports तो सरकार में 50 प्रकार की आती हैं। आप भी देते हैं, report के आधार पर नहीं होता है, सरकार अपना निर्णय बताती है। सरकार का निर्णय मैं आपको बताता हूं। और मैं मानता हूं आप सरकार के निर्णय से जुड़े हुए लोग हैं। दूसरी बात है, इस नए devolution के कारण 42% devolution के कारण, पश्चिम बंगाल को, डेरेक जी, 22,000 करोड़ रुपया ज्यादा मिलेगा, आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपया ज्यादा मिलेगा, उड़ीसा को 8,000 करोड़ रुपया ज्यादा मिलेगा। उसके साथ-साथ... मैं सभी का बता सकता हूं, लेकिन अभी तो मैं सिर्फ तीन का ही लाया हूं। बजट में है सारा, तेलंगाना भी आ जाएगा... सबको मिल रहा है, सबको 42% मिल रहा है।

अब सबसे बड़ी बात खनिज की royalty डेढ़ गुना बढ़ा दी गई है। जो ज्यादातर इन पूर्व के राज्यों को मिलने वाली है। इतना ही नहीं जो Coal Auction हुआ है। उसके कारण जो पैसा आना वाला है वो भी States के पास जाना वाला है। अब तक 19 Coal mines का auction हुआ है और 1 लाख करोड़ से ज्यादा रकम उसमें निकली है। ये रुपया भी इन राज्यों के पास जाने वाला है। आज हिसाब बैठता है कि राज्यों के पास total जो amount है, उसका bulk 62% राज्यों के पास होगा, सिर्फ 38% केंद्र के पास होगा। एक पूरी स्तिथि बन रही है, और इसलिए... कुछ लोग कहते हैं... आप इसको verify कर लीजिए...

इतना ही नहीं यहां पर विदेश नीति की भी चर्चा हई है। विदेश नीति में दुनिया में... आज हम मानकर चलें, दुनिया की पहले की जो स्थिति थी... आज दुनिया अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है। पहले जिस प्रकार के खेमे थे दुनिया में, वो खेमे का रूप बदल गया है। भारत के हितों की supreme रक्षा, ये ही हमारी विदेश नीति के केंद्र में है। सभी सरकारों के लिए भी वो ही केंद्र बिंदू में होता है। और उसी को लेकर के आज दुनिया की सभी शक्तियां भारत के महात्म्य को समझें, और मैंने चुनाव के पहले भी कहा था और चुनाव के बाद भी कहा था, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कहा था। वैश्विक संबंधों के संबंध में हमारी सोच साफ है कि हम दुनिया के साथ अपने रिश्ते बनाना चाहते हैं। पड़ोसियों के साथ विशेष गहरे संबंध हम बनाना चाहते हैं। और हमने ये भी कहा था कि हम दुनिया के साथ अपने रिश्ते बनाएंगे, दुनिया के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ेंगे लेकिन हम आंख झुकाकर के जीना पसंद नहीं करते। और आंख दिखाकर के भी दुनिया के साथ संबंध नहीं बनते हैं इसलिए हमारा रास्ता है, आंख मिलाकर के दुनिया में भारत का स्थान बने।

उसी दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं और आप सबको खुशी होगी, अभी अफगानिस्तान से फादर प्रेम का वापिस आना, आतंकवादियों के कब्जे से, ये छोटी घटना नहीं है। और पिछले 9 महीनों में दुनिया के भिन्न-भिन्न देशों में फंसे हुए 12,000 से अधिक हिंदुस्तानियों को वापस लाया गया है। हमारे केरल की हमारी Nurses बहनें आतंकवादियों से वापस - क्या होगा सबके सांस अंदर हो गए थे - वो वापिस लाने में सफलता मिली है और इतना ही नहीं टिकट देकर के यहां तक लाना और उनके home State तक विमान के टिकट देने तक का प्रबंध इस सरकार ने किया है।

और इसलिए विश्व में भी रहने वाले... दूसरी एक व्यापक चर्चा जम्मू-कश्मीर को लेकर के हुई है। मैं इस सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं और मैं 125 करोड़ देशवासियों को भी विश्वास दिलाना चाहता हूं। जम्मू-कश्मीर में जो सरकार बनी है ये Common Minimum Programme के आधार पर बनी है और सरकार चलेगी Common Minimum Programme के आधार पर। किसी के बयान से हम उसका समर्थन कतई नहीं कर सकते। आतंकवाद के मामले में Zero Tolerance Policy के आधार पर यह सरकार आगे बढ़ेगी। और इसलिए, कहीं पर भी कोई बयान दे, हम यहां पर उसके जवाब देते रहेंगे, तो मैं समझता हूं कि हम सही दिशा में नहीं जाएंगे। हमारी नीतियां, हमारी योजनाएं क्या हैं? उसी योजनाओं को लेकर हम चल रहे हैं।

और इसलिए ऐसी बातें, मैं साफ बात कहूं कि कश्मीर के मतदाताओं ने न सिर्फ लोकतंत्र की आन-बान-शान को बढ़ाया है, लेकिन जो दुनिया भर में भ्रम फैले हुए थे, कश्मीर के बाबत में, इन सारे भ्रमों को नीरस करने का काम सर्वाधिक मतदान करके कश्मीर के मतदाताओं ने पूरा किया है। और इसलिए हिंदुस्तान जिस बात की वकालत पिछले 50 साल से कर रहा था, उसको ठप्पा मारने काम कश्मीर के नागरिकों ने किया है। हम उनकी जितनी बधाई करें, उतनी कम है। और मैं उनका, कश्मीर के नागरिकों का अभिनंदन करता हूं। और हमारा भरोसा, हम और आपका भरोसा कश्मीर के नागरिकों के प्रति है और उन कश्मीर के नागरिकों के भरोसे के प्रति हम देश की एकता और अखंडता के साथ प्रतिबद्ध लोग हैं। और इसलिए मैं फिर एक बार इस सदन के माध्यम से और मैं सभापति जी आपके माध्यम से, संपूर्ण राष्ट्र को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कश्मीर के लिए हिंदुस्तान के सदनों ने जो प्रस्ताव पारित किए हुए हैं, उसको letter and spirit से follow किया जाएगा। उसमें कोई compromise नहीं किया जाएगा, ये मैं विश्वास दिलाता हूं देशवासियों को।

मैं फिर एक बार सदन को प्रार्धना करता हूं कि हम सब मिलकर के सर्वसम्मति से राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण को, धन्‍यवाद प्रस्‍ताव को, पारित करें। और मैं सबका धन्यवाद करता हूं।

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Bodo Agreement heralds a new beginning for Bodo People; will strengthen unity & integrity of Assam: PM
January 30, 2020
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Bodo Agreement inspired by the mantra of 'Sabka Saath, Sabka Vikas & Sabka Vishwas' and spirit of 'Ek Bharat-Shresth Bharat' : PM
Development of Bodo areas foremost priority of Government; Work has begun on Rs. 1500 crore development package: PM

The Prime Minister Shri Narendra Modi has termed the Bodo Agreement as a historic chapter for peace and development in Assam. Hailing the Bodo Agreement, He said it is inspired by the by the mantra of 'Sabka Saath, Sabka Vikas & Sabka Vishwas' and spirit of 'Ek Bharat-Shresth Bharat'.

In a series of tweets, Prime Minister said, “As India remembers Pujya Bapu on his Punya Tithi, Assam is witnessing a historic chapter for peace and development. After a wait of 50 years, agreement with our Bodo friends heralds a new beginning. It will strengthen Assam's unity, bring development and usher in a bright future.

After signing this historic agreement with Bodo organizations, foremost priority of our govt is development of Bodo areas. Work has begun on a comprehensive Rs 1500 crore package. Our special focus will be on ease of living and ensuring that Bodos benefit fully from govt schemes.

Bodo friends joining us on path of peace sends a clear message that solution to issues is possible when we leave path of violence & repose faith in democracy & Constitution. I welcome my Bodo friends to the mainstream. We are committed to ensure development of Bodo areas.

The 5 decade old Bodo issue finds resolution on the Punyatithi of Pujya Bapu today. The accord between the Bodo groups & Govt will strengthen the unity & integrity of Assam. I welcome decision of my Bodo friends for leaving violence & reposing faith in democracy & Constitution.

The accord with our Bodo friends is a message to Assam & other violence affected parts of the country. Nation's development can be given momentum only in an environment free of violence &fear. Happy that entire energy of our Bodo friends will further strengthen Assam's development.

The accord with our Bodo friends was made while protecting the interest of other communities of Assam. This is a victory for all, it's victory for humanity. It is inspired by the mantra of 'Sabka Saath, Sabka Vikas & Sabka Vishwas', & by the spirit of 'Ek Bharat-Shresth Bharat'”.