केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2023 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियों और श्रमिकों के वेतन में हाल ही में दर्ज की गई उल्लेखनीय वृद्धि की सराहना की। एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023 में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियों में 7.6% की वृद्धि हुई है और वेतन में 5.5% की वृद्धि देखी गई है।


उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र न केवल तेजी से आगे बढ़ा है, बल्कि अब फल-फूल रहा है।’’

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में राष्ट्रव्यापी रोजगार में 2018-19 के 1.6 करोड़ श्रमिकों से 2022-23 में 1.9 करोड़ तक की प्रभावशाली वृद्धि देखी गई है। कारखानों में रोजगार का हायर कंसंट्रेशन भी देखा गया, क्योंकि प्रति कारखाने श्रमिकों की संख्या भी 2018-19 के 65 से बढ़कर 2022-23 में 71 हो गई। डेटा से पता चलता है कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में प्रति श्रमिक मजदूरी में 5.5% की वृद्धि हुई है, अब श्रमिक औसतन ₹2.05 लाख सालाना कमा रहे हैं (प्रति श्रमिक मजदूरी 2018-19 के 1.69 लाख रुपये से बढ़कर 2022-23 में 2.05 लाख रुपये हो गई है।)

मैन्युफैक्चरिंग में सकल मूल्य वर्धन (GVA), यानी सृजित आर्थिक मूल्य, 2021-22 से 2022-23 तक 21% से अधिक बढ़ गया है। आर्थिक गतिविधि का एक प्रमुख इंडिकेटर GVA स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग इंजन ज़ोरदार गति से आगे बढ़ रहा है।

सीतारमण ने कहा, "GVA में 21% से अधिक की वृद्धि स्पष्ट संकेत है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पूरे जोरों पर है।"

भाजपा शासित राज्य; भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्रांति के केंद्र बन गए हैं, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों में भारी वृद्धि हुई है। इस सफलता में गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं।

गुजरात, जो अपनी उद्यमशीलता की भावना के लिए जाना जाता है, कुल उत्पादन में 17.7% की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, जबकि भारत का औद्योगिक गढ़ महाराष्ट्र कुल उत्पादन में 14.6% की हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 7.1% का योगदान दिया।

रोजगार के मामले में महाराष्ट्र ने असाधारण प्रदर्शन किया है, जहां कुल 12.8% लोगों को रोजगार मिला है। गुजरात दूसरे स्थान पर है, जहां कुल 12.6% लोगों को रोजगार मिला है, जबकि भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 8.1% नौकरियां (2022-23 में) प्रदान की हैं।

चालू कारखानों की संख्या के मामले में, इन तीन भाजपा शासित राज्यों ने शीर्ष स्थान हासिल किया है, जिसमें गुजरात 12.2% योगदान के साथ दूसरे स्थान पर, महाराष्ट्र 10.4% योगदान के साथ तीसरे स्थान पर और उत्तर प्रदेश 7.5% योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। एनडीए सहयोगी राज्य आंध्र प्रदेश 6.5% कारखानों के साथ पांचवें स्थान पर है।

ये तीन भाजपा शासित राज्य - गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के साथ मिलकर भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की रीढ़ बन गए हैं, और इनका भारत की कुल मैन्युफैक्चरिंग नौकरियों में 50% से अधिक का योगदान है।

मंत्री निर्मल सीतारमण ने कहा, "अधिक नौकरियों का मतलब है खाने के लिए अधिक भोजन और अधिक वेतन का मतलब है लाखों भारतीय परिवारों के लिए बेहतर जीवन स्तर। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में उभरा है।" उन्होंने इस उल्लेखनीय बदलाव के लिए मोदी सरकार की कई प्रमुख पहलों को श्रेय दिया।

मोदी सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल्स जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए मजबूत प्रोत्साहन प्रदान किया है, जिससे लाखों नए रोजगार सृजित हुए हैं। इसके साथ ही, मेक इन इंडिया पहल, जिसने हाल ही में 10 साल पूरे किए हैं, ने घरेलू उत्पादन में उछाल लाकर और विदेशी निवेश को आकर्षित करके देश के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को पुनर्जीवित किया है। पीएम मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान ने भी मैन्युफैक्चरिंग को काफी बढ़ावा दिया है। इसके समानांतर, मोदी सरकार के तहत पेश किए गए श्रम कानून सुधारों ने उद्योगों के लिए श्रमिकों को काम पर रखना आसान बना दिया है, साथ ही साथ कर्मचारी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की है और काम करने की स्थिति में सुधार किया है। इन सुधारों ने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत की महत्वपूर्ण छलांग के साथ, देश को घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बना दिया है, जिससे पूरे देश में औद्योगिक विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है।

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पीएम मोदी ने जीवन की चुनौतियों से पार पाने में दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 13, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में दृढ़ संकल्प, धैर्य और साहस की शक्ति पर प्रकाश डाला गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

"दैवं पुरुषकारेण यः समर्थः प्रबाधितुम्।

न दैवेन विपन्नार्थः पुरुषः सोऽवसीदति॥"

जिस व्यक्ति के पास कठिन से कठिन परिस्थितियों को अपने पक्ष में बदलने का संकल्प, लगन और साहस होता है, उसे जीवन की चुनौतियाँ कभी हरा नहीं सकतीं। वह बिना रुके लगातार प्रयास करता है और अपने अटूट निश्चय के बल पर आगे बढ़ते हुए आखिरकार सफलता हासिल करता है।