“हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हम ब्लू इकोनॉमी को अपनाकर धरती को हरा-भरा बनाने का लक्ष्य पा सकते हैं” - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

2014 के बाद के कालखंड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक नया अध्याय शुरू किया। उन्होंने भारत की विशाल क्षमता को पहचाना है, वे नए अवसर लाए हैं और देश को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं।

ब्लू इकोनॉमी एक ऐसा क्षेत्र है जो कल्याण के साथ-साथ मजबूत आर्थिक विकास की क्षमता को देखते हुए सरकारी एजेंडे में शीर्ष पर है। भारतीय समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए अमृत काल विजन-2047 के तहत मोदी सरकार ने 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की शुरुआत की है, जो भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

'ब्लू इकोनॉमी’ शब्द का तात्पर्य इकोसिस्टम की सेहत से समझौता किए बिना खोज, बेहतर आजीविका और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए समुद्री और तटीय संसाधनों के टिकाऊ उपयोग से है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, शिपिंग और टूरिज्म आदि शामिल हैं।

नौ राज्यों, एक हजार से अधिक द्वीपों और असंख्य प्रमुख और छोटे बंदरगाहों तक फैली 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा के कारण भारत की समुद्री स्थिति अद्वितीय है। इसके अलावा, भारत 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक फैले एक विशाल एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन का दावा करता है। यह विशाल समुद्री क्षेत्र, देश के जीवित और निर्जीव दोनों संसाधनों की समृद्ध विविधता में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिसमें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस जैसे मूल्यवान भंडार शामिल हैं जो खोज और दोहन के लिए तैयार हैं।

मत्स्य पालन और जलीय कृषि; भोजन, पोषण और राष्ट्रीय आय के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो भारत में लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मछली किसानों का समर्थन करते हैं। आजीविका को बनाए रखने और समृद्ध करने में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को महसूस करते हुए, मोदी सरकार ने इस क्षेत्र के समग्र विकास को सुविधाजनक बनाने वाली परिवर्तनकारी नीतियां और कार्यक्रम बनाए हैं। ये प्रयास 5,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ब्लू रिवोल्यूशन स्कीम के माध्यम से हुए, जिसके बाद मत्स्य पालन और जलीय कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड तथा 2019 में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी के लिए एक समर्पित मंत्रालय का निर्माण किया गया।

इन पहलों की सफलताओं के आधार पर, सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को केंद्र में रखते हुए मत्स्य पालन उत्पादन, उत्पादकता और आजीविका को और बढ़ाने के लिए पीएम-मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) शुरू की।

20,050 करोड़ रुपये के अब तक के उच्चतम निवेश के साथ, PMMSY का लक्ष्य; उत्पादन, टेक्नोलॉजी के उपयोग से लेकर फसल कटाई के बाद के प्रबंधन तक इंफ्रास्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण कमी को दूर करना है। इस योजना के तहत, मजबूत फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ने ठोस आकार लिया है। अंतर्देशीय मत्स्य पालन में, अनुमोदित परियोजनाओं में 44,408 केजेस, अंतर्देशीय जलीय कृषि के लिए 20,849 हेक्टेयर, 11,940 पुन: परिसंचरण जलीय कृषि प्रणाली, 3,995 बायोफ्लॉक यूनिट्स, अंतर्देशीय सैलाइन-एल्कलाइन कल्चर के लिए 2,855 हेक्टेयर, 788 मछली और 4 स्कैम्पी हैचरी, और 14 ब्रूड बैंक शामिल हैं।

समुद्री मत्स्य पालन की श्रेणी के तहत मछली पकड़ने वाले जहाजों में 2,255 बायो-टॉयलेट्स, 1,518 खुले समुद्री केजेस, मौजूदा मछली पकड़ने वाले जहाजों में 1,172 अपग्रेड, 463 गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज और खारे पानी के जलीय कृषि के लिए 1,380 हेक्टेयर भूमि को मंजूरी दी गई है।

PMMSY के तहत, मछुआरों को 2,494 सागर मित्रों और 79 मत्स्य सेवा केंद्रों के माध्यम से विस्तार और सहायता सेवाओं के साथ-साथ रिप्लेसमेंट नावों और जालों, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध या कम अवधि के दौरान आजीविका सहायता के साथ सहायता प्रदान की जाती है। मछली वेंडिंग केंद्र, मछली चारा संयंत्र, कोल्ड स्टोरेज, मछली खुदरा बाजार और मूल्य वर्धित उद्यम इकाइयां जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएं भी स्थापित की गई हैं। जलीय स्वास्थ्य का समर्थन करने के लिए, 17 रोग निदान केंद्र और गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं, 29 मोबाइल केंद्र और परीक्षण प्रयोगशालाएं और 5 जलीय रेफरल प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

यह योजना सजावटी मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल की खेती पर भी पर्याप्त ध्यान देती है। समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए 46,000 से अधिक राफ्ट और 66,000 से अधिक मोनोलिन ट्यूब जाल को कवर करने के अलावा 2100 से अधिक सजावटी मछली पालन इकाइयों को मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड योजना को मत्स्य पालन क्षेत्र तक बढ़ा दिया गया है, जिससे छोटे किसानों की संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ गई है।

समावेशी विकास के अपने विचार के अनुरूप, सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है। नए तालाबों के निर्माण, एकीकृत मछली पालन, पुन: परिसंचरण जलीय कृषि प्रणाली और सजावटी मत्स्य पालन इकाइयों सहित 1,391 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत को मंजूरी दी गई है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि पीएम-मत्स्य संपदा योजना का लाभ हर लाभार्थी तक पहुंचे, सरकार मत्स्य संपदा जागरूकता अभियान से छह महीने लंबी आउटरीच पहल शुरू करने के लिए तैयार है। इसमें फरवरी 2024 तक 2.8 करोड़ मछली किसानों और 3,477 तटीय गांवों को शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की ‘समृद्धि के लिए बंदरगाह और प्रगति के लिए बंदरगाह’ पहल, देश में शिपिंग क्षेत्र में क्रांति ला रही है। इस दिशा में, सागरमाला योजना, बंदरगाह आधुनिकीकरण और विस्तारित कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश में बंदरगाह आधारित विकास के लिए जमीन तैयार करती है। सागरमाला के तहत, सरकार बंदरगाह इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, सड़क और रेल परियोजनाओं के साथ-साथ मछली बंदरगाहों के विकास, तटीय समुदायों को सहायता और रो-पैक्स नौका सेवाओं सहित क्रूज टर्मिनलों के निर्माण के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह विशाल समुद्र तट, संभावित रूप से नौगम्य अंतर्देशीय जलमार्गों और प्रमुख वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर भारत की रणनीतिक उपस्थिति का उपयोग करता है।

इसी का नतीजा है कि बीते 9 वर्षों में देश के बड़े बंदरगाहों की क्षमता दोगुनी हो गई है। इसके अलावा, बड़े जहाजों के लिए टर्नअराउंड समय 2014 में 42 घंटे की तुलना में आज 24 घंटे से भी कम है। मोदी सरकार के पिछले नौ वर्षों के दौरान तटीय कार्गो यातायात दोगुना हो गया है, जबकि राष्ट्रीय जलमार्गों के कार्गो हैंडलिंग में चार गुना वृद्धि हुई है। उल्लेखनीय है कि लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत का निरंतर सुधार हो रहा है। इसके अलावा, सरकार इस तरह के डेवलपमेंट के कार्बन फुटप्रिंट के प्रति सचेत है, इसलिए इस क्षेत्र के लिए नेट जीरो पॉलिसी के माध्यम से प्रमुख बंदरगाहों को कार्बन-न्यूट्रल बनाने के लिए समर्पित प्रयास भी जारी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में समुद्री पर्यटन की अपार संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा, "भारत के पास एक विशाल तटरेखा, मजबूत नदी इकोसिस्टम और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है जो समुद्री पर्यटन के लिए नई संभावनाएं पैदा करता है।" इस दिशा में, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लोथल में एक राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर स्थापित किया जा रहा है, जो लगभग 5,000 साल पुराना विश्व धरोहर स्थल है जिसे 'शिपिंग का उद्गम स्थल' कहा जाता है। एमवी-गंगा विलास आज दुनिया की सबसे लंबी नदी क्रूज सेवा है। भविष्य में, मुंबई में एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल आ रहा है और विशाखापत्तनम तथा चेन्नई में आधुनिक क्रूज टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, भारत अपने अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से एक ग्लोबल क्रूज हब बनने के लिए तैयार है।

मोदी सरकार कई स्थानों पर जहाज निर्माण और मरम्मत केंद्र भी स्थापित कर रही है, जिससे आगामी 10 वर्षों में शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में से एक बनने की दिशा में भारत के संकल्प को बढ़ावा मिल रहा है।

गहरे समुद्रीय मिशन के तहत चल रहे प्रयासों में सबसे खास है "समुद्रयान" परियोजना। इसमें "मत्स्य 6000" नामक गहरे समुद्र में जाने वाला एक सबमर्सिबल व्हीकल बनाया जा रहा है। जिसका उपयोग गहरे समुद्र में दुर्लभ समुद्री खनिजों, पॉलीमेटेलिक मैंगनीज नोड्यूल संसाधनों की खोज और गहरे समुद्र की जैव विविधता का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, सरकार O-SMART और एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन और अपतटीय ऊर्जा उत्पादन के विकास जैसी अपनी पहलों के माध्यम से समुद्री और तटीय इकोसिस्टम के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

इन घरेलू प्रयासों से आगे बढ़कर, मोदी सरकार वैश्विक मंच पर ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए समुद्री कूटनीति में सक्रिय रूप से लगी हुई है। पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी के माध्यम से, भारत का लक्ष्य टिकाऊ समुद्री संसाधन प्रबंधन के लिए सहयोग को बढ़ावा देना है। इस तरह की कूटनीतिक पहल न केवल वैश्विक समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाती है बल्कि साझा लाभ और पारस्परिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में 8% हिस्सा रखता है।

यद्यपि, ब्लू इकोनॉमी के लिए प्रधानमंत्री का विजन तत्काल आर्थिक लाभ की सोच से परे है। पर्यावरणीय चिंताओं, आजीविका वृद्धि और टेक इनोवेशन को एकीकृत करके, सरकार एक समग्र मॉडल बनाना चाहती है जो सतत विकास लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करते हुए प्रकृति और मानव समृद्धि दोनों को बनाए रखे।

ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट-2023 में अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत; डेवलपमेंट, डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी और डिमांड के संयोजन वाले कुछ चुनिंदा देशों में से एक है। उन्होंने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा, "जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो यह आपके लिए एक सुनहरा अवसर है।"

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।