सचिवों के समूहों ने शासन के विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलाव के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए
भारत सरकार के सचिवों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और पर्यावरण पर प्रधानमंत्री के सामने अपने विचार प्रस्तुत किए

भारत सरकार के सचिवों के तीन समूहों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को शासन के विभिन्नम क्षेत्रों में सुधार से जुड़े बदलाव पर आधारित अवधारणाओं से अवगत कराया।

‘अभिशासन’ पर आधारित प्रस्तुवति में नागरिक-केन्द्रित सेवा वितरण, डिजिटल समावेशन, नवीन खोज और कानूनों का सरलीकरण जैसे विषय शामिल थे।

‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ पर आधार‍ित प्रस्तु ति उन्नेत अवसर और शिक्षण के लिए पहुंच, रोजगार और स्टांर्ट-अप तथा विज्ञान में सहजता जैसे क्षेत्रों पर केन्द्रित थी।

‘ऊर्जा और पर्यावरण’ पर आधारित प्रस्तुपति में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों और ऊर्जा दक्षता से संबंधित सुझाव शामिल थे।

इस अवसर पर कई केन्द्रीय मंत्री और नीति आयोग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

कुल मिलाकर नौ निर्धारित प्रस्तुऔतियों के मौजूदा क्रम में शासन संबंधी वि‍भिन्नर बिन्दु ओं पर अब तक कुल चार प्रस्तुीतियां की गई हैं।

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”