द वर्ल्ड दिस वीक ऑन इंडिया

Published By : Admin | March 11, 2025 | 16:47 IST

इस सप्ताह भारत वैश्विक चर्चाओं के केंद्र में रहा; जिसमें ट्रेड, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक जुड़ाव से संबंधित प्रमुख डेवलपमेंट्स शामिल हैं। यूरोपियन यूनियन के साथ एक महत्वपूर्ण ट्रेड पैक्ट के लिए डेडलाइन तय करने से लेकर अपनी AI महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने तक, भारत का फॉरवर्ड मोमेंटम कई क्षेत्रों में दिखाई देता है।

भारत और EU ने ट्रेड पैक्ट के लिए डेडलाइन तय की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपियन कमीशन की प्रेजिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने लंबे समय से पेंडिंग भारत-EU ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिसके लिए  ईयर-एंड डेडलाइन तय की गई है। लीडर्स ने व्यापार बाधाओं को दूर करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, इस समझौते को गहन आर्थिक सहयोग की दिशा में एक कदम के रूप में पेश किया।

भारत का डिफेंस पुश: सैन्य क्षमताओं का अपग्रेडेशन

भारत अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। रूस के साथ एक नए सौदे से  T-72 टैंक के इंजन को अपग्रेड , किया जाएगा, जिससे उनकी बैटलफील्ड एजिलिटी एंड ऑफेंसिव केपेबिलिटी में वृद्धि होगी। इस बीच, रूस नेएडवांस्ड Su-57E लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिएभारत के मौजूदा Su-30MKI प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने का प्रस्ताव दिया है। यदि इसे अंतिम रूप दिया जाता है, तो यह भारत के एयर कॉम्बैट फ्लीट को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

AI महत्वाकांक्षाएँ: भारत का नेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल

भारत अपने स्वदेशी नेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) .के साथ आर्टिफिशियल-इंटेलिजेंस की दौड़ में प्रवेश कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य भारत की AI क्षमताओं को मजबूत करना है, और यह डिजिटल रूप से सशक्त समाज और नॉलेज-ड्रिवेन इकोनॉमी की दिशा में सरकार के व्यापक प्रयास के अनुरूप है।

दिल्ली मेट्रो दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-सिटी नेटवर्क बन जाएगा

2025 के अंत तक, दिल्ली मेट्रो  न्यूयॉर्क को पीछे छोड़ देगी और एक ही शहर में ऑपरेट होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन जाएगा। फेज 4 के तहत अपनी व्यापक विस्तार योजनाओं के साथ, मेट्रो सिस्टम से शहरी परिवहन चुनौतियों का समाधान करने और राष्ट्रीय राजधानी में भीड़भाड़ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

ग्लोबल बिजनेस एक्सपैंशन के लिए एक हब के तौर पर भारत

मल्टीनेशनल कंपनियाँ रीजनल और ग्लोबल एक्सपैंशन के लिए भारत को एक बेस के रूप में देख रही हैं। जापानी एग्रीकल्चरल मशीनरी दिग्गज Kubota ने अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यात के लिए इसे एक हब के रूप में उपयोग करते हुए अपने  भारत ऑपरेशन का विस्तार, करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम ग्लोबल इंडस्ट्रीज के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन सेंटर के रूप में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

समुद्र की शक्ति का उपयोग

अपनी विशाल 7,500 किलोमीटर की तटरेखा के साथ, भारत समुद्री वेव एनर्जी का दोहन. करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव कर रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी में यह इनोवेटिव कदम अधिक सस्टेनेबल और डाइवर्स बिजली आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, फॉसिल-फ्यूल पर निर्भरता को कम कर सकता है और भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत कर सकता है।

‘फोरम फॉर गुड’ में कनेक्ट हुए भारतीय प्रवासी

यूएई में,  35 देशों के 500 से अधिक प्रभावशाली लीडर्स ‘फोरम फॉर गुड’ के उद्घाटन समारोह में एकत्रित हुए, यह आयोजन वैश्विक भारतीय लीडर्स के लिए एक मंच के रूप में तैयार किया गया था, जहाँ वे सस्टेनेबल डेवलपमेंट, इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और समान आर्थिक विकास सहित महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर सकें। यह मंच उद्योगों के बीच की बाधाओं को तोड़ते हुए एक्शन-ओरिएंटेड चर्चाओं का एक मंच बन गया।

बुक फेस्टिवल्स: युवा भारतीयों के लिए आकर्षण का केंद्र

भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में बुक फेस्टिवल्स का उभार एक ग्रोइंग ट्रेंड है, जो अंग्रेजी कृतियों के साथ-साथ अपनी मूल भाषाओं में साहित्य की खोज करने के लिए उत्सुक यंग ऑडियंस को आकर्षित करता है। ये फेस्टिवल्स  साहित्यिक जुड़ाव , के लिए प्रमुख स्थल बन रहे हैं, जो पीढ़ियों और संस्कृतियों को जोड़ते हुए भारत की बहुभाषी साहित्यिक परंपरा को सेलिब्रेट करते हैं।

डिफेंस, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत के डायनमिक डेवलपमेंट्स से पता चलता है कि यह देश , परम्परा के साथ आधुनिकीकरण को संतुलित करते हुए .आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे देश नई ग्लोबल पार्टनरशिप्स बना रहा है और अपनी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, यह वर्ल्ड स्टेज पर एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
February 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र और मानवता की सेवा में सर्वस्व समर्पण को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया:

"यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"

इसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र की महिमा का वर्णन स्वयं हिमालय करता है, जिसकी कीर्ति नदियों के साथ समुद्र तक प्रवाहित होती है और जिसकी भुजाओं के समान दिशाएं उसे नमन करती हैं, उस राष्ट्र को हम अपना सर्वस्व समर्पित करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी इसी भावना के साथ अपना संपूर्ण जीवन देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया था।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

“सर्वस्व समर्पण उस चेतना की अभिव्यक्ति है, जिसमें राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि होती है। अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसी भावना से देश के जन-जन को सशक्त बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः।

यस्येमाः प्रदिशो यस्य बाहू कस्मै देवाय हविषा विधेम॥"