Published By : Admin |
January 28, 2018 | 13:07 IST
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एनसीसी के शिविरों से हर युवा राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित हो रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
राष्ट्रीय कैडेट कोर को उनकी यूनिफॉर्म और यूनिफॉर्मिटी को लेकर नहीं बल्कि उनकी यूनिटी को लेकर जाना जाता है: पीएम मोदी
भारत का युवा भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है, हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
भीम ऐप के माध्यम से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दें और दूसरों को उस प्लेटफार्म से जुड़ने के लिए प्रेरित करें: एनसीसी कैडेट्स से प्रधानमंत्री मोदी
करीब एक महीना अनेक नये मित्रों के साथ हर कोई अपने-अपने साथ अपनी एक अलग पहचान ले करके आया, अपनी विविधताओं को लेकर आया, लेकिन महीने के भीतर-भीतर एक ऐसा माहौल बन गया कि आप सबके बीच एक अटूट नाता जुड़ गया। एक अपनेपन का नाता, और जब आप दूसरे राज्य के कैडेट से मिलते होंगे तो उनकी विशेषताओं, विविधताओं को जान करके अजरच होता होगा। इतनी उत्सुकताएं ले करके आप यहां से जाएंगे कि मन करेगा कि भारत के नागरिक के नाते आने वाले समय में मैं भारत को जितना ज्यादा जानू, भारत के हर कौन को जितना ज्यादा जानू, भारत की हर विविधता को पहचानू, अपने आप को उसके भीतर पाऊं। इसका संस्कार बीज यह NCC के कैंप में सहज रूप से हमारे भीतर बोया जाता है। यूं तो लगता है कि हम परेड करते हैं, यूं तो लगता है कि हम uniform पहनकरके आए हैं, यूं तो लगता है कि हम राजपथ के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हमें पता तक नहीं होता है कि हम हमारे भीतर यह विशाल भारत को कैसे संजोने लग जाते हैं। हम भारतमय कैसे बन जाते हैं। भारत के लिए कुछ न कुछ करने का मन में जज्बा कैसे पैदा हो जाता है। पता तक नहीं चलता। एक ऐसी Eco system, एक ऐसा वातावरण जो हमें पल-पल के लिए मेरा देश, मेरे देश का भविष्य, मेरे उज्जवल भविष्य में मेरी भूमिका, मेरा कर्तव्य, इन सारी बातों की प्रेरणा ले करके आप अपने-अपने क्षेत्र में यहां से लौट रहे हैं। राजपथ पर परेड में NCC के कैडेट और जिनको राजपथ पर चलने का, दिखने का मौका नहीं मिला, वैसे पार्श्व भूमि में काम करने वाले महीने भर कठोर तपस्या करने वाले हर किसी के प्रति दुनिया के दस देश के मेहमान और पूरा हिंदुस्तान और विश्वभर में फैला हुआ भारतीय समुदाय आपके हर कदम पर नाज़ कर रहा था। आपके हर कदम पर गर्व कर रहा था। जब आप चल रहे थे तो वह अनुभव कर रहा था कि मेरा देश आगे बढ़ रहा है। जब आप अपना हौंसला बुलंदी से दिखाते थे तो हर देशवासी feel कर रहा था कि देश का हौंसला बुलंदियों की ओर जा रहा है। यह माहौल, यह वातावरण यहां तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कसौटी इसके बाद शुरू होती है। NCC इसकी पहचान है एकता और अनुशासन। NCC यह कोई मैकेनिज्म नहीं है। NCC एक मिशन है, NCC यह सिर्फ uniform और uniformity नहीं है, यह सच्चे अर्थ में unity है। और इसलिए इस भाव को ले करके आखिरकार यह परेड, यह कैम्प, यह अनुशासन, यह कड़ी मेहनत किस काम के लिए है, यह सब क्यों? देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के हक का धन इन चीजों में क्यों लगाया जाता है, वो इसलिए लगाया जाता है कि देश के भीतर ऐसे न्युक्लियस तैयार हो ऐसी ईकाईयां बनती चलें, जो मिशन मोड में औरों को भी प्रेरित करते रहे और देश का जज्बा बढ़ता चले और इसलिए एक प्रकार से जिंदगी को बनाने का और उस बनी हुई जिंदगी से देश को बनाने का यह एक प्रयास होता है। अगर हम यही पर सब छोड़ कर जाते हैं। सिर्फ memories को, स्मृतियों को जीवनभर दोस्तों के बीच बांटते रहने के लिए काम आने वाली हैं, तो शायद कुछ कमी रह गई। हम सबको इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमारा देश आजाद होने के बाद armed forces के लिए rules and regulation और नियमों का निर्माण होने से पहले इस देश में NCC का एक्ट बना था। राष्ट्र रक्षा से भी पहले राष्ट्र निर्माण को हमारे देश में युवा पीढ़ी के साथ जोड़ा गया था।
आज NCC 70 साल की हो गई है। सात दशक यात्रा और मेरे जैसे लाखों-लाखों NCC के कैडेट देशभक्ति के संस्कार पा करके जीवन की राह पर चलते पड़े। दोस्तों, NCC से हमें sense of mission मिलता है। 70 साल NCC के होना समय की मांग है कि एक बार हम relook करे, जहां से चले थे जहां पहुंचे और आगे जहां देश को ले जाना है। इस NCC का रूप क्या हो, और कौन सी नई चीजें जोड़ी जाए। उसका विस्तार क्या हो और इन सारे विषयों से जुड़े हुए लोगों से मैं आह्वान करूंगा कि जब हम NCC के 75 साल मनाएं हम एक खाका तैयार करें और उस 75 साल के मिशन को एक ऐसी ऊंचाईयों पर NCC को ले जाने वाला बनाए कि देश के हर कौने में NCC अपनी करतूतों के कारण, NCC के कैडेट के करतूतों के कारण देश के हर कौने में कुछ नयापन आए, कुछ बदलाव आए, कोई गौरव की भावना जगे। इस संकल्प को ले करके हम आज जब 70 साल कर रहे है, 75 साल का मिशन तय करे। मैं नहीं मानता हूं कि मेरे देश का कोई नौजवान अब भ्रष्टाचार को सहने के लिए तैयार है। भ्रष्टाचार के खिलाफ नफरत का भाव समाज में अनुभव हो रहा है, लेकिन सिर्फ हम भ्रष्टाचार से नफरत ही करते रहे, रोष प्रकट करते रहे, गुस्सा दिखाते रहे। इतने से काम चलेगा क्या? फिर तो यह लड़ाई बहुत लम्बी चलानी पड़ेगी, यह लड़ाई रूकने वाली नहीं है। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ की लड़ाई, यह कालेधन की लड़ाई मेरे देश के नौजवानों का भविष्य बनाने के लिए हैं। और अगर मेरे देश के नौजवानों का भविष्य बनता है तो उसी से मेरे देश का भविष्य भी बनने वाला है। लेकिन मैं इस देश का प्रधानमंत्री आज भारत के नौजवानों से कुछ मांगना चाहता हूं। मेरे NCC के कैडेट से कुछ मांगना चाहता हूं।
मैं जानता हूं आप मुझे कभी निराश नहीं करेंगे। मेरे देश के नौजवान मुझे निराश नहीं करेंगे। न मैं आपसे वोट मांगने के लिए कह रहा हूं। न मैं राजनीति के मंच पर हमारी प्रगति हो इसके लिए आपकी मदद चाहता हूं। मेरे देश के नौजवानों मैं आपसे मदद चाहता हूं भारत को इस भ्रष्टाचार रूपी दिमक से मुक्ति दिलाने के लिए। आपको लगता होगा कि हम क्या कर सकते हैं? आपको लगता होगा कि हम ज्यादा से ज्यादा किसी को कुछ देंगे नहीं। ज्यादा से ज्यादा हम किसी से कुछ लेंगे नहीं। वो तो आप करेंगे ही, लेकिन इतने से बात अटकेगी नहीं। एक काम अगर आप ठान लें और नियम बना ले कि साल में कम से कम सौ नए परिवारों को मैं इस काम के लिए जोड़ूंगा, वो कौन सा काम है। अगर accountability आती है, transparency आती है, तो अपनेआप चीजों में बदलाव आता है। क्या आप तय कर सकते हैं कि अब हम जहां भी कुछ खरीद करने जाएंगे, जहां भी पैसे का लेन-देन होगा वो cash से नहीं करेंगे। हम सब mobile phone वाले हो गए हैं। क्या भीम एप डाउनलोड करके हम भीम एप के द्वारा ही हर चीज़ खरीदेंगे और जिस दुकान से खरीदेंगे, जिस Store में जाते होंगे, जिस Mall में जाते होंग उन पर भी आग्रह करेंगे या नहीं, यह आपको करना होगा। आप इसकी आदत डालिये। आप देखिए इतनी transparency आना शुरू हो जाएगा, इतनी accountability सरल हो जाएगी कि हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में मजबूत कदम उठा पाएंगे और यह काम मेरे नौजवानों की मदद के बिना नहीं हो सकता। मेरे NCC के कैडेट एक मिशन मोड़ में इस काम का उठा ले कीसी की हिम्मत है कि देश को भ्रष्टाचार की ओर खींचे रख पाए। इतना ही भ्रष्ट व्यक्ति इतने ही बड़े पद पर पहुंच जाएगा, तो भी उसको ईमानदारी के रास्ते पर आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
देश में कभी-कभी निराशा होती थी कि भ्रष्टाचार की बातें बड़ी होती है, लेकिन बड़े-बड़े लोगों को कुछ नहीं होता है। आज ऐसे कालखंड से आप गुजर रहे हैं। एक ऐसे समय से गुजर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के कारण इस देश के तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्री जेलों में सड़ रहे हैं। कौन कहता है ‘ईश्वर नहीं है’ कौन कहता है ईश्वर के यहां न्याय नहीं है। अब कोई बचने वाला नहीं है। और इसलिए मैं आज NCC के कैडेट के सामने उनके माध्यम से देशभर के NCC के कैडेट हो NSS के नौजवान हो, नेहरू युवा केंद्र के नौजवान हो, स्कूल-कॉलेज के छात्र हो, मेरे देश के लिए जीने-मरने वाले नौजवान हो मैं आपसे मदद चाहता हूं। इस लड़ाई के लिए आप मेरे साथ सिपाही बन करके आ जाइये। आइये हम मिल करके भारत को इस दिमक से मुक्ति दिला दें, तो देश के गरीबों के हक की लड़ाई हम हम जीत पाएंगे। हम बुराईयों को मिटाते हैं, उसका सबसे ज्यादा फायदा मेरे देश के गरीबों को होता है। जब पैसे सही जगह पर खर्च होते हैं तो किसी गरीब के घर में सस्ती दवाई पहुंचती है। जब पैसे सही जगह पर खर्च होते हैं तो एक गरीब बच्चों के पढ़ने के लिए अच्छे शिक्षक, अच्छे स्कूल की व्यवस्था बनती है। जब पैसे सही जगह पर उपयोग होते हैं तो गांव तक जाने के लिए सड़क बनती है, जब पैसे सही जगह पर उपयोग होते हैं तो इस देश के दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित उनके लिए कुछ करने का अवसर पैदा होता है। और इसलिए मेरे देश के प्यारे नौजवानों अब इन दिनों आधार के विषय में चर्चा सुन रहे हैं। जो लोग Technology को जानते हैं, जो बदलते हुए युग को जानते हैं उनको मालूम है कि डेटा यह दुनिया में आने वाले समय में एक बहुत बड़ी ताकत बनने वाला है। जिसके पास डेटा है वो देश ताकतवर माना जाएगा, वो दिन दूर नहीं होगा। आधार ने डिजिटल वर्ल्ड में डेटा की दुनिया में बहुत बड़ी ताकत का भारत को गर्व दिया है, गौरव दिया है। और अब आधार के माध्यम से लोगों को जो benefit मिलने चाहिए, गरीब को, सामान्य मानव को वो पहले गलत हाथों में चले जाते थे। भ्रष्टाचार का वो भी एक रास्ता था, जो बच्ची पैदा नहीं होती थी, वो सरकारी दफ्तर में बड़ी होती थी, शादी हो जाती थी और विधवा भी हो जाती थी और सरकारी खजाने से विधवा पेंशन भी चला जाता था। यही कारोबार चलता रहा, आधार के कारण, Direct benefit transfer के कारण जो हक़दार थे, उनका identification हो पाया, उन्हीं को मिलने लगा। और मेरे देश के नौजवानों सिर्फ Technology की मदद से कुछ ही योजनाओं में अभी तो शत-प्रतिशत नहीं है, आरंभ है, करीब-करीब 60 हजार करोड़ रुपया देश का जो गलत हाथों में जाता था, वो बच गया। यह सब संभव है। और इसलिए मेरे नौजवान cashless society की दिशा में less cash का मंत्र ले करके भीम ऐप का सर्वाधिक उपयोग करते हुए हम अगर खरीद बिक्री का सारा कारोबार, फीस भी देनी है तो भीम ऐप से देंगे। तो आप देखिए किस प्रकार से देश में बदलाव शुरू होता है।
मेरे नौजवान साथियों एक उत्तम अनुभव जीवन में मिला है आपको । बहुत ही कम समय में देश के हर कौने के व्यक्ति के साथ जी करके देश का अनुभव करने का अवसर मिलता है। feeling मिलती है। भारत का एक नया स्पर्श आपको मिलता है, इस नव चेतना के साथ, इस नव संकल्प के साथ इस नव अरमान के साथ New India बनाने के लिए हम सभी संकल्प ले करके चले। 2022 में जब भारत आजादी के 75 साल मनाएगा, तब आजादी के दिवानों के सपने पूरे करने का सामर्थ्य हम अर्जित करके देश को आगे बढ़ाए, New India बनाए, आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्यवाद।
भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
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India is not only a fast-growing economy, but also a credible one: PM
Along with being a rising power, India is also a reliable power: PM
For India, Nation First is the highest guiding principle: PM
Maoist terror is breathing its last in India: PM
The shift in mindset from "this can never be done" to "this will be done" is India's greatest achievement: PM
The government is empowering the poor and middle-class: PM
The collective efforts of 140 crore Indians will realise the dream of a Viksit Bharat: PM
स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।
रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...
साथियों,
हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।
साथियों,
भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।
साथियों,
कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।
साथियों,
यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।
साथियों,
सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।
साथियों,
आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।
साथियों,
2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
और साथियों,
कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।
साथियों,
जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।
साथियों,
साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।
साथियों,
हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।
साथियों,
12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।
साथियों,
नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।
साथियों,
पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।
साथियों,
मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।
साथियों,
हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।
साथियों,
पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।
साथियों,
एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।
साथियों,
वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।
साथियों,
पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।
साथियों,
GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।
साथियों,
मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।
साथियों,
एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्लास सबसे ज्यादा बोलता है।
साथियों,
मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्या-क्या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।
साथियों,
मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?
साथियों,
कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!
साथियों,
एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।
साथियों,
एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।
साथियों,
यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।
साथियों,
इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।
साथियों,
यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।
साथियों,
आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।
साथियों,
आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!