एक स्टार्ट-अप प्रधानमंत्री

Published By : Admin | September 7, 2022 | 16:57 IST

जिस किसी को भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने और बातचीत करने का मौका मिलता है, वह उन्हें एक प्रेरक नेता और एक उत्सुक श्रोता बताते हैं। OYO के फाउंडर रितेश अग्रवाल का केस अलग नहीं है। रितेश को पीएम मोदी के साथ ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री पर चर्चा करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के साथ उनकी छोटी सी मुलाकात ने उन्हें एक नया बिजनेस मॉडल तैयार करने में मदद की।

एक वीडियो में रितेश ने पीएम मोदी को ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया जो न केवल मैक्रो लेवल पर गहरी नजर रखने की क्षमता रखते हैं, बल्कि ऐसे व्यक्ति हैं जो उन चीजों पर चर्चा कर सकते हैं जिनका जमीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री का एक उदाहरण शेयर किया। पीएम मोदी को उद्धत करते हुए रितेश ने कहा, 'भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है। हमारे देश में बहुत सारे किसान हैं। उनकी आय एक समय पर अलग-अलग हो सकती है। दूसरी ओर, ऐसे लोग हैं जो गांव जाना चाहते हैं और अनुभव लेना चाहते हैं। आप विलेज टूरिज्म का प्रयास क्यों नहीं करते, ताकि इनमें से कुछ किसानों को आय का एक स्थायी दीर्घकालिक स्रोत मिल सके और शहरी लोगों को यह देखने और अनुभव करने का मौका मिले कि वास्तव में गाँव का जीवन क्या है? ”


रितेश ने बताया कि कैसे विलेज टूरिज्म के बारे में पीएम के साथ बातचीत के कुछ मिनटों ने उनके लिए एक अवसर का निर्माण कर दिया, जिससे कई किसानों और ग्रामीण परिवारों को स्थायी आय अर्जित करने में लाभ हुआ है। रितेश ने बताया कि किसी विषय के बारे में गहरी पकड़ और व्यापक जानकारी पीएम मोदी को 'स्टार्ट-अप प्रधानमंत्री' बनाता है।

रितेश ने आगे कहा कि न केवल ट्रैवल एंड टूरिज्म, बल्कि पीएम मोदी के पास किसी भी इंडस्ट्री से संबंधित विषयों पर चर्चा करने की क्षमता और गहराई है। "मैंने उन्हें डेटा सेंटर्स के विस्तार के बारे में चर्चा करते हुए देखा है, हम सोलर से इथेनॉल तक, अक्षय ऊर्जा में कैसे अच्छा कर सकते हैं, भारत में पैनलों का निर्माण करने के लिए सभी कच्चे माल की क्या आवश्यकता है, और यह PLI योजना में किसी कंपनी को कैसे लाभ पहुंचा सकता है?....जब भी हम इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में बात करते हैं, हम खुद को सड़कों, रेलवे और राजमार्गों तक सीमित रखते हैं, लेकिन जब भी हम उनसे उद्योग प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिलते हैं, तो मैंने उन्हें उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी चर्चा करते देखा है। भारत इस साल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में अकेला सबसे बड़ा देश होगा, जिसके बारे में शायद ही लोग जानते हों। भारत ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग और इसके अनुसंधान और नवाचार का केंद्र बन गया है... इनमें से प्रत्येक उद्योग में, मेरे विचार में इतनी गहराई का होना अद्वितीय है और यही इन उद्योगों को तेजी से विकसित कर रहा है।"

रितेश ने कहा कि पीएम मोदी एक 'अविश्वसनीय श्रोता' हैं। उन्होंने केंद्रीय बजट से पहले आयोजित एक कार्यक्रम का एक उदाहरण दिया। उन्होंने उस कार्यक्रम को याद किया जिसमें पीएम मोदी ने भाग लिया था। उन्होंने एक बार फिर पीएम को उद्धत करते हुए कहा, " यदि पर्यटन का विस्तार करने की आवश्यकता है, तो हमें बड़े पैमाने पर और दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश करना चाहिए जिससे इंडस्ट्री इसका लाभ उठा सकें।" रितेश ने कहा कि गुजरात में केवड़िया इसी सोच का एक बड़ा उदाहरण है, कैसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास के आकर्षण ने वहां एक होटल उद्योग को फलने-फूलने में मदद की है। रितेश ने कहा, "दीर्घकालीन सुधारवादी और वैल्यू क्रिएटर के रूप में पीएम मोदी के बारे में मुझे इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में पांच, दस, पंद्रह साल के बारे में आगे की ओर देखना आकर्षक लगा।"


रितेश ने आगे कहा कि पीएम मोदी में एक एंटरप्रेन्योर के कई गुण हैं। उन्होंने कहा, "पीएम मोदी, इम्पैक्ट के मामले में बड़ा सोचते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले वह छोटे पैमाने पर अनुभव प्राप्त करते हैं। उनकी क्षमता बड़े पैमाने की पहल को देखने और उसके क्रियान्वयन को बहुत बारीकी से ट्रैक करने की है।” OYO के फाउंडर ने कहा, “हमारे देश में एक नेता है जो कह रहा है कि हम Incremental होने से संतुष्ट नहीं हैं। हम एक ऐसा देश हैं जहां दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनने की आकांक्षा और प्रेरणा के साथ एक अरब से अधिक लोग हैं।"

Disclaimer:

It is part of an endeavour to collect stories which narrate or recount people’s anecdotes/opinion/analysis on Prime Minister Shri Narendra Modi & his impact on lives of people.

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भारत में नई चेतना का संचार करने वाले नेता: नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
June 14, 2026

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया।

किसी राष्ट्र की नियति उसके नेताओं की नियति से गहराई से जुड़ी होती है। मजबूत और निर्णायक नेतृत्व में राष्ट्र आगे बढ़ते हैं और समृद्ध होते हैं, जबकि कमजोर, अनिर्णायक और भ्रष्ट नेतृत्व के दौर में उनका क्षरण होने लगता है। जनता किसी राष्ट्र की जीवन-ऊर्जा होती है, लेकिन नेता वही होते हैं जो इस सामूहिक ऊर्जा को सही और उत्पादक दिशा देते हैं। अपने संस्थापकों और नेताओं के बिना किसी राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। जब हम संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में सोचते हैं, तो थॉमस जेफरसन, जॉर्ज वॉशिंगटन, अब्राहम लिंकन, जॉन एफ. केनेडी और एफ.डी. रूजवेल्ट जैसे प्रमुख नेताओं के नाम हमारे मन में आते हैं। इसी तरह, भारतीय राष्ट्र का निर्माण भी महात्मा गांधी, बी.आर. आंबेडकर और वीर सावरकर जैसे महान संस्थापक पुरोधाओं के विजन पर हुआ है।

मजबूत नेतृत्व जनता के मनोबल को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि दूरदर्शी नेता राष्ट्र को समृद्धि और गौरव के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। नेतृत्व का महत्व किसी राष्ट्रीय संकट के समय सबसे अधिक होता है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने प्रलय के दौरान मनु महाराज के विशाल जहाज का मार्गदर्शन कर उसे सुरक्षित बचाया था। संकट की घड़ी में नेता ही राष्ट्र का मार्गदर्शन करते हैं और उसे कठिनाइयों से बाहर निकालते हैं। श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भी भारतीय राजनीति में ऐसे ही एक संकटपूर्ण दौर के दौरान केंद्र में अपनी प्रमुख भूमिका स्थापित की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे समय राष्ट्रीय परिदृश्य पर उभरे, जब भारतीय राजनीति गहरे संकट के दौर से गुजर रही थी और देश पर एक नाममात्र के प्रधानमंत्री को थोपे जाने की स्थिति बन गई थी। सरकार पॉलिसी पैरालिसिस से जूझ रही थी। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था में गहराई तक जड़ें जमा चुका था और कोलगेट, 2जी स्पेक्ट्रम तथा कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे घोटाले बार-बार सामने आने वाली घटनाएं बन गए थे। मीडिया, कारोबारी जगत और राजनेताओं के बीच एक अपवित्र गठजोड़ बन गया था, जो बिना किसी भय के सार्वजनिक धन की लूट में लगा हुआ था। उद्यमी, उद्योग जगत और अकादमिक क्षेत्र निराशा के माहौल में डूब चुके थे तथा भारतीय राज्य व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। आम लोगों के मन में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर गर्व की भावना क्षीण होती जा रही थी।

उस निर्णायक मोड़ पर श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी एक स्पष्ट, सशक्त और दूरदर्शी विजन के साथ राष्ट्रीय मंच पर उभरे। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और अनुभवी पीढ़ी सहित समाज के विभिन्न वर्गों को नई प्रेरणा दी। पीएम नरेन्द्र मोदी ने नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति लोगों के मन में आशा, विश्वास और भरोसे को फिर से स्थापित किया। उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को नई ऊर्जा दी, उद्यमिता और उद्योग जगत को प्रोत्साहित किया तथा नौकरशाही में भी नई कार्यसंस्कृति और उत्साह का संचार किया। स्वयं साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण पीएम मोदी को भारतीय समाज की गहरी समझ थी और आरएसएस प्रचारक के रूप में उन्होंने भारतीय संस्कृति तथा उसकी मूल चेतना को भी निकटता से समझा था।

भारत के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल, उनका प्रशासनिक और चुनावी रिकॉर्ड बेदाग रहा। पीएम मोदी अपने साथ "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" का मंत्र लेकर आए।

पीएम मोदी ने सरकारी सेवाओं के तेज डिजिटलीकरण के माध्यम से फाइनेंस में मौजूद जड़ता को कम किया और सरकार को आम नागरिकों की उंगलियों तक पहुंचा दिया। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने गजेटेड अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता को समाप्त कर आम नागरिकों के लिए सेल्फ-अटेस्टेशन की व्यवस्था लागू की। यह आम नागरिकों की प्रगति में बाधा बनने वाली नौकरशाही अड़चनों के प्रति उनकी सूक्ष्म समझ को दर्शाता है। उनके द्वारा शुरू किए गए सुधारात्मक उपायों के कारण अंतरराष्ट्रीय बिजनेस इंडिकेटर्स में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ। पीएम मोदी ने एक दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। अब नियम और नीतियां बंद एसी कमरों में नहीं, बल्कि लोगों के बीच बनती हैं।

पीएम मोदी ने सत्ता संभालने के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए लगातार कार्य किया है। पीएम मोदी ने स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) जैसी पहलों की शुरुआत की। सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और शिपिंग पोर्ट्स को मंजूरी दी, साथ ही ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और स्टेशनों के निर्माण को भी गति दी। पीएम मोदी ने नए IIT और IIM स्थापित कर भारत के हायर एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया। पीएम मोदी ने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के मंत्र के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों का भारतीय सरकार के प्रति विश्वास फिर से मजबूत किया। उनकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पारंपरिक चूल्हों के धुएं से माताओं और बहनों को होने वाली परेशानी को समझते हुए उन्होंने पीएम उज्ज्वला योजना की शुरुआत की।

पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता और सैनिटेशन को जनचर्चा का हिस्सा बनाया। इस योजना के तहत बनाए गए शौचालयों के जरिए पीएम मोदी ने हमारी माताओं और बहनों को गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया। पीएम नरेन्द्र मोदी के भागीरथ प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत की महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया।

राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत पीएम मोदी ने देश में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नेतृत्व किया। औपनिवेशिक विरासत के अवशेष रहे इंडियन पीनल कोड (IPC) और सीआरपीसी (Code of Criminal Procedure) को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता का मार्ग प्रशस्त किया गया। पीएम मोदी निरंतर हमारे पवित्र तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण और विकास में जुटे हुए हैं। उनके प्रयासों से अयोध्या और काशी जैसे हमारे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों को नई पहचान और भव्य स्वरूप मिला। पीएम मोदी ने ब्रांड एंबेसडर की तरह आयुर्वेद के स्वदेशी ज्ञान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया और आयुर्वेद को प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां तैयार कीं।

पीएम मोदी अपने उल्लेखनीय कार्यों, अटूट समर्पण और विकसित भारत के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से हर भारतीय को 2047 तक विकसित भारत के अपने विजन में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

फिर भी, किसी नेता की वास्तविक पहचान केवल उसकी बनाई गई नीतियों या स्थापित संस्थाओं से नहीं होती, बल्कि उससे होती है कि वह अपने लोगों में कितना आत्मविश्वास पैदा करता है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है—शासन-व्यवस्था में विश्वास, भारत की सभ्यतागत विरासत में विश्वास, सामान्य नागरिकों की क्षमताओं में विश्वास और राष्ट्र के भविष्य में विश्वास।

अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और गरीबों के सशक्तिकरण से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई देने तक, पीएम मोदी के नेतृत्व ने समकालीन भारत पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने गवर्नेंस को एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दिया है, जिससे लाखों लोग देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित हुए हैं।

जैसे-जैसे भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है, विकसित भारत का विजन अब कोई दूर का सपना नहीं रह गया है; यह एक सामूहिक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है। इतिहास उन नेताओं को याद रखता है जो तब आगे आते हैं जब उनके राष्ट्र को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे नेता जो केवल अपने समय का नेतृत्व ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की नियति को भी आकार देते हैं।

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया। एक अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी और आकांक्षी भारत की नींव रखी जा चुकी है। अब राष्ट्र के सामने इस गति को आगे बढ़ाने और विकसित भारत के सपने को साकार करने का दायित्व है।

जब भारत और भी बड़ी संभावनाओं की दहलीज पर खड़ा है, तब रॉबर्ट फ्रॉस्ट के शब्द नए अर्थों और नई प्रासंगिकता के साथ गूंजते हैं,

"ये वन मनोहर हैं, गहरे हैं और रहस्यमय भी,

लेकिन मुझे अपने वादे निभाने हैं,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है।"

भारत के लिए ये वादे उसके लोगों, उसकी सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हैं। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियां उस यात्रा की मजबूत नींव हैं। यह यात्रा अभी जारी है और आगे का मार्ग अनिश्चितताओं से नहीं, बल्कि अवसरों, उद्देश्य और विकसित भारत के संकल्प से परिपूर्ण है।

(रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं।)