संसद के केंद्रीय कक्ष में 20 मई, 2014 को श्री नरेन्‍द्र मोदी के भाषण के मुख्‍य अंश :

आदरणीय आडवाणीजी, हमारे राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजनाथजी, भारतीय जनता पार्टी के सभी मुख्‍यमंत्री और सभी नवनिर्वाचित सदस्‍यगण, मैं आप सबका आभारी हूं कि आपने एकमत से मुझे यह नयी जिम्‍मेदारी सौंपी है। मैं विशेष रूप से आडवाणीजी और राजनाथजी का शुक्रगुजार और आभारी हूं जिन्‍होंने मुझे आशीर्वाद दिया है।

मैं अटलजी के स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में सोच रहा था। आज अगर उनका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता तो वह हमारे बीच होते और उनकी मौजूदगी से यह क्षण पूर्ण हो जाता। उनका आर्शीवाद हम पर है और भविष्‍य में भी रहेगा।

हम लोकतंत्र के मंदिर में हैं। हम पूरी शुद्धता के साथ काम करेंगे… हम किसी पद के लिए नहीं बल्कि देश की जनता के लिए काम करेंगे। कार्य और जिम्‍मेदारी सबसे बड़ी चीजें हैं। आपने जो जिम्‍मेदारी मुझे सौंपी है उसे मैं स्‍वीकार करता हूं।

मेरे लिए पद महत्‍वपूर्ण नहीं है, मैंने अपने जीवन में पद को अहमियत नहीं दी, मेरे लिए जिम्‍मेदारी हमेशा बड़ी चीज रही है।

हम सबको इस जिम्‍मेदारी को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित करना होगा। 13 सितंबर 2013 को भाजपा के संसदीय बोर्ड ने मुझे एक जिम्‍मेदारी दी और 15 सितंबर से मैंने एक कार्यकर्ता की भांति पूरी जिम्‍मेदारी के अहसास के साथ अपना कार्य शुरू कर दिया। उस समय मैंने यह 
परिश्रम यज्ञ शुरु किया और जब 10 मई 2014 को चुनाव प्रचार समाप्‍त हो गया तो मैंने अपने अध्‍यक्ष को फोन किया और अहमदाबाद जाने से पहले उनसे मिलना चाहा। उन्‍होंने मुझसे पूछा कि क्‍या मैं थका नहीं हूं और आराम की जरूरत है लेकिन मैंने उन्‍हें प्रचार अभियान का प्रतिवेदन देने की बात कही क्‍योंकि मुझे जो जिम्‍मेदारी सौंपी थी वह 10 मई को पूरी हो गयी थी।

एक अनुशासित सैनिक की तरह मैंने भी अपने अध्‍यक्ष को प्रतिवेदन दिया कि 13 सितंबर से 10 मई तक मैंने अपनी जिम्‍मेदारी अपनी पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश की है। इस प्रचार अभियान में मैंने बस एक कार्यक्रम रद्द किया और वह भी घोसी में क्‍योंकि वहां हमारे जिला अध्‍यक्ष की असमय मौत हो गयी थी।

13 years of Peace, Prosperity & ProgressCourtesy : The Hindu

एक वफादार और समर्पित कार्यकर्ता की तरह मैंने उन्‍हें बताया कि मैं आपको इस पवित्र भूमि पर यह प्रतिवेदन दे रहा हूं। मुझे जो भी कार्य सौंपा गया था, मैंने एक पार्टी कार्यकर्ता की भूमिका निभाते हुए उसे पूरा करने की कोशिश की है।

मैंने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद पहली बार मुख्‍यमंत्री का चैम्‍बर देखा था। आज भी वैसी ही स्थिति है क्‍योंकि इस ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में मैं पहली बार आया हूं।

मैं सभी स्‍वतंत्रता सेनानियों और हमारे देश के संविधान निर्माताओं को नमन करता हूं क्‍योंकि उनकी वजह से दुनिया लोकतंत्र की ताकत देख रही है। विश्‍व के नेताओं ने जब मुझे फोन किया तो मैंने उन्‍हें भारत के करोड़ों मतदाताओं के बारे में बताया। वे अचंभित थे। यह हमारे संविधान की ताकत है कि एक गरीब और वंचित परिवार का गरीब व्‍यक्ति आज यहां खड़ा है। यह हमारे संविधान की ताकत और हमारे लोकतांत्रिक चुनावों की छाप है कि एक सामान्‍य नागरिक इतनी ऊंचाई तक पहुंच सकता है। भाजपा की जीत और किसी अन्‍य की हार पर बहस बाद में हो सकती है। नागरिकों को यकीं हो गया है कि यह लोक‍तांत्रिक तंत्र उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। लोकतंत्र में उनकी आस्‍था और मजबूत हुई है।

सरकार वह होती है जो गरीबों के बारे में सोचे, गरीबों की सुने और गरीबों के लिए काम करे। इसलिए नयी सरकार गरीबों, करोड़ों युवाओं, माताओं और बेटियों को समर्पित है जो अपने आदर और सम्‍मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सरकार ग्रामीणों के लिए है, किसानों के लिए है, दलितों और उत्‍पीडि़तों के लिए है, यह सरकार उनके लिए है, उनकी आकांक्षाओं के लिए और इसे पूरा करना ही हमारी जिम्‍मेदारी है। चुनाव प्रचार के दौरान मैंने हमारे देश के कई नये रूप देखे हैं। मैंने ऐसे भी लोग देखे जिनके तन पर सिर्फ एक कपड़ा था लेकिन हाथ में भाजपा का झंडा थामे हुए थे। यह वर्ग हमारी ओर आशा और आकांक्षा भरी नजरों से देख रहा है। इसलिए हमारा सपना, उनके सपनों को पूरा करने का है।

आडवाणीजी ने एक शब्‍द का इस्‍तेमाल किया है। मैं आडवाणीजी से प्रार्थना करूंगा कि वह फिर कभी यह शब्‍द इस्‍तेमाल न करें। उन्‍होंने कहा कि नरेन्‍द्रभाई ने हम पर कृपा की है।

(यह कहते ही मोदीजी का गला रुंध जाता है, थोड़ी देर भाषण रुका रहता है)

कृपया इस शब्‍द का इस्‍तेमाल मत कीजिए। क्‍या कोई बेटा कभी अपनी मां पर कृपा कर सकता है? कभी नहीं। जैसे भारत मेरी मां है, वैसे ही भाजपा भी मेरी मां है। इसलिए एक बेटा कभी कृपा नहीं कर सकता, वह तो सिर्फ समर्पित भाव से अपनी मां की सेवा कर सकता है। कृपा तो पार्टी ने मेरे ऊपर की है। इसने मुझे सेवा का यह मौका देकर मुझ पर उपकार किया है।

विगत में विभिन्‍न सरकारों ने अपने ढंग से कई अच्‍छे कार्य करने की कोशिश की है जिसके लिए वे सराहना पाने की हकदार हैं। जो भी अच्‍छा कार्य हुआ है हम उसे आगे बढ़ायेंगे। हम देश को कुछ देंगे। लोगों को निराश नहीं होना चाहिए। मैंने टीवी या मीडिया को नहीं देखा है, हर कोई इस फैसले का विश्‍लेषण कर रहा है…..लोगों ने उम्‍मीद के लिए वोट दिया है। यह जनादेश आशा का है। मैंने पहले भी कहा है कि यह चुनाव उम्‍मीद का है। आम आदमी में एक नयी आशा जगी है। यह इस चुनाव परिणाम का सबसे बड़ा महत्‍व है।

भाजपा को पूर्ण बहुमत देकर उन्‍होंने उम्‍मीद और विश्‍वास को वोट दिया है। लोगों ने उम्‍मीद और आस्‍था को वोट दिया है और मैं उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करुंगा। निराशा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए क्‍योंकि निराशा से कुछ हासिल नहीं हो सकता। सरकार का आदर्श वाक्‍य होगा- सबका साथ, सबका विकास। यह समय नयी उम्‍मीद और सामर्थ्‍य का है।

जिम्‍मेदारी का युग शुरु हो गया है। 2019 में, मैं संसद सदस्‍यों से एक रिपोर्ट कार्ड के साथ मुलाकात करूंगा। मेरी सरकार मेरे लिए नहीं बल्कि देश के लिए है। सरकार गरीबों के लिए है और हम उनके लिए कुछ करना चाहते हैं।

आपने मुझे जो जिम्‍मेदारी सौंपी है उसे पूरा करने के लिए मैं अपनी ताकत लगा दूंगा। मैं आपको कभी भी नीचा नहीं दिखाऊंगा।

हमें अपने देश के लिए मरने का सौभाग्‍य तो प्राप्‍त नहीं हुआ लेकिेन आजाद भारत में पैदा हुए प्रत्‍येक नागरिक को अपना जीवन देश के लिए जीने को समर्पित करना चाहिए। हमारे जीवन का हर क्षण और हमारे शरीर के हर अंश को 125 करोड़ देशवासियों के लिए समर्पित करना चाहिए, हमें इस सपने को संजोये रखना है। तभी देश तेजी से प्रगति करेगा।

स्‍वभाव से मैं एक आशावादी हूं। यह मेरे डीएनए में लिखा है। निराशा मेरे पास नहीं फटकती। इस मौके पर मैं वो बात दोहराना चाहता हूं जो मैने यहां एक कालेज में कही थी। पानी के इस ग्‍लास को देखिये, कुछ लोग कहेंगे कि यह पानी से आधा भरा है और कुछ कहेंगे कि आधा खाली है। मेरी सोच तीसरे तरह की है। मैं कहता हूं कि यह ग्‍लास आधा पानी से भरा है आधा हवा से भरा है। आपको यह आधा खाली नजर आ सकता है लेकिन मैं इसे ऐसे नहीं देखता। यही वजह है कि मैं सवभाव से आशावादी हूं। एक रचनात्‍मक सफर पर चलने के लिए आशावादी होना जरूरी और महत्‍वपूर्ण है। एक आशावादी व्‍यक्ति ही देश में उम्‍मीद ला सकता है और कायम कर सकता है। हर व्‍यक्ति के जीवन में कठिनाइयां और प्रतिकूल समय आता है। 2001 में, गुजरात में जब भूकंप आया था तो हम सबके चारों ओर मौत पसरी थी। हर ओर तबाही थी। दुनियाभर में सबने सोचा कि सब कुछ मिट गया है। लेकिन थोड़े से ही वक्‍त में गुजरात अपने पैरों पर खड़ा हो गया। हमें निराशा पीछे छोड़नी होगी। कौन कहता है कि दुनिया का सबसे बड़ा और जागरुक लोकतंत्र आगे नहीं बढ़ सकता? अगर 125 करोड़ देशवासी एक कदम आगे बढ़ायेंगे तो पूरा देश 125 करोड़ कदम आगे बढ़ेगा।

दुनिया में कौन सा दूसरा देश है जहां छह ऋतुएं होती हैं। हमारी धरती पर कृपा हुई है, हमारी जमीन उपजाऊ है और प्राकृतिक संसाधनों से भरी हुई है। हमारे देश से लोग विदेश में जाते हैं, वे दौलत और शोहरत कमाते हैं, हमें बस उन्‍हें यहां अवसर देना होगा।

इस चुनाव में हमने दो बातों पर जोर दिया- सबका साथ, सबका विकास। हम सबका विकास और तरक्‍की चाहते हैं लेकिन यह भी जरूरी है कि हम सबको साथ लेकर चलें। यह चुनाव नयी आशा का प्रतीक है। मेरे साथ योग्‍य साथी हैं और मेरे वरिष्‍ठ नेताओं के मार्गदर्शन के साथ मुझे पूरा विश्‍वास है कि जो जिम्‍मेदारी मुझे 13 सितंबर 2013 को मिली थी और जो 16 मई 2014 को पूरी हुई और आज जो नई जिम्‍मेदारी मुझे मिली है, मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि जब हम 2019 में मिलेंगे तब मैं आपके समक्ष अपना रिपोर्ट कार्ड रखूंगा। मैं सतत मेहनत और कठोर परिश्रम करूंगा।

आगामी वर्ष 2015-16 हम सबके लिए महत्‍वपूर्ण है, यह पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय का शताब्‍दी वर्ष होगा। उन्‍होंने चरैवेति-चरैवेति का मंत्र दिया और इससे ही बलिदान और कठोर परिश्रम का तंत्र स्‍थापित हुआ। हमें सोचना होगा कि हम उनके सपनों को किस तरह पूरा करें और उन्‍हें पूरा करने के लिए कार्य करें। पार्टी और सरकार दोनों को सोचना चाहिए कि इस आगामी कार्यक्रम को हम किस तरह आयोजित कर सकते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय ने अंत्‍योदय यानी सबसे कमजोर की सेवा पर जोर दिया था। यही वजह है कि मैं यह कहता हूं कि यह सरकार गरीबों और वंचितों की है। वैश्विक परिप्रेक्ष्‍य में भी भारत के चुनाव और इन नतीजों की रचनात्‍मक और सकारात्‍मक ढंग से समीक्षा की जा रही है। विश्‍व को पहला संदेश यह नहीं जाता है कि करोड़ों लोगों ने एक पार्टी को वोट देकर एक व्‍यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया है। लेकिन महत्‍वपूर्ण तो यह है कि करोड़ों लोगों ने एक अच्‍छा जनादेश दिया है और दुनिया में भारत के स्‍थान को ऊंचा किया है।यही इन चुनावों का संदेश है। कौन चुनाव जीता और कौन हारा, ये महत्‍वपूर्ण नहीं है। चुनाव के ये नतीजे विश्‍व को भारत और उसके लोकतांत्रिक मूल्‍यों और क्षमताओं की ओर आकर्षित करेंगे। भारत के आम नागरिकों में आशा का संचार हआ है और यही उम्‍मीद विश्‍व में मानवतावादी शक्तियों में जगी है। यह बहुत अच्छा संकेत है।

भाइयो और बहनो, एक बार फिर मैं आप सब लाखों कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट करता हूं जिन्‍होंने यह जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की। जो मोदी आपके समक्ष खड़ा है, वह आपको इसलिए बड़ा दिखायी देता है क्योंकि मेरी पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं ने मोदी को कंधे पर बिठा लिया है। आज हमने जो कुछ भी हासिल किया है वह हमारी पांच पीढ़ियों के बलिदान का परिणाम है। जनसंघ को लोग नहीं जानते थे, कुछ लोगों को लगा कि यह सामाजिक, सांस्‍कृतिक संगठन है। आज, मैं उन सभी पीढि़ेयों को नमन करता हूं जिन्‍होंने राष्‍ट्रवादी लक्ष्‍य के लिए बलिदान दिया। हमें नहीं भूलना चाहिए कि आज हम यहां पूर्ववर्ती पीढ़ियों के बलिदान की वजह से खड़े हैं। यह जीत हमारे लाखों कार्यकर्ताओं की है। अगर हम इस प्रकार सोचेंगे तो समाज और पार्टी को शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा। भाजपा ऐसी पार्टी है जो अपने मजबूत संगठन पर टिकी है। यह हमारी ताकत है और हममें से कोई भी संगठन के ऊपर या बाहर नहीं है।

आपने मुझे यह नयी जिम्‍मेदारी सौंपी है, आडवाणीजी ने मुझे आशीर्वाद दे दिया है। आपने मुझ पर भरोसा जताया है। आपको मुझसे उम्‍मीदें हैं और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपको किसी भी क्षण ऐसा नहींलगेगा कि आपको पीछे छोड़ दिया गया है। एक बार फिर आप सबको धन्‍यवाद देता हूं।

( द हिन्‍दू से साभार)

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भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
भारत न केवल तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था भी है: प्रधानमंत्री
एक उभरती हुई ताकत होने के साथ-साथ, भारत एक विश्वसनीय ताकत भी है: प्रधानमंत्री
भारत के लिए 'राष्ट्र प्रथम' ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्धांत है: प्रधानमंत्री
भारत में माओवादी आतंक अब अपने अंतिम चरण में है: प्रधानमंत्री
"यह कभी नहीं हो सकता" वाली सोच से बदलकर "यह होकर रहेगा" वाली सोच अपनाना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है: प्रधानमंत्री
सरकार गरीबों और मध्यम वर्ग को सशक्त बना रही है: प्रधानमंत्री
140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों से ही 'विकसित भारत' का सपना साकार होगा: प्रधानमंत्री

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!