Q. This is a question on trade, which, as you know, is often cited as one of the principal engines of economic growth. India, since you became Prime Minister, has decided not to go ahead and ratify the so-called Trade Facilitation Agreement. Also, India is, for the moment, outside both – APEC and TPP negotiations. So could you speak about your view of trade? And whether the domestic politics of India will allow you to pursue a liberal trade agenda?

A. जहां तक Trade facilitation का सवाल है, हम 101% agreed हैं। उसमें कोई दुविधा का विषय नहीं है, कयोंकि हम भी यह चाहते हैं। आज global economy का युग है। अगर global economy का युग है तो हमें हमारे infrastructure, हमारी facilities global standard की बनानी पड़ेगी। इसलिए हम भी मानते हैं कि विश्‍व के साथ हमको काम करना है। मेरे लिए Politics is not an issue at all. मैं लोकरंजक राजनीति वाला इंसान नहीं हूं। और नही लोकरंजक अर्थनीति वाला इंसान हूं। लेकिन मेरे देश में गरीब लोग हैं। गरीबों को भूखा रखकर हम नहीं चल सकते। और इसलिए food security और Trade facilitation - दोनों चीजें एक साथ चलनी चाहिए। ये मेरे देश का आग्रह है। ये पहले कर लो तो देखा जाएगा तो गरीबों के साथ अन्‍याय होगा। दुनिया को कोई तकलीफ नहीं है कि हम food security के लिए positive stand ले लें।

Q. This question deals with electricity. As I understand it, several hundred million Indians do not have adequate access to electricity. And the question a lot of people are asking is, how can these people come to enjoy a middle class life, and in the process, not set in motion economics that have a clearly negative impact on climate change given the amount of carbon that would be emitted?

A. यह बात सही है कि हमारे लिए आज बिजली जीवन में एक बड़ा महत्‍पूर्ण हिस्‍सा बन चुकी है। बिजली Luxury नहीं है। ये जीवन की Requirement बन गई है। और हम 24x7 बिजली पहुंचाने के लिए संकल्‍पबद्ध हैं। मेरी सरकार ने अपने Manifesto में कहा है, अपने Agenda में कहा है कि next 5 years में हिंदुस्‍तान के हर गांव में 24x7 power supply करेंगे। यह संभव है। हमने जिस प्रकार से energy sector में काम किया है, उसमें भी clean energy पर बल दे रहे हैं। हम solar के लिए Roof top policy लेकर के आ रहे हैं। और इसलिए हिंदुस्‍तान में अब बिजली का संकट रहेगा, ऐसी संभावनाएं बहुत कम हैं।

जहां तक Climate Change का सवाल है, शायद आप लोगों को जान के आश्‍चर्य होगा, मैंने पहले भी कहा, मैं गुजरात में जब था – Al Gore ने एक किताब लिखी है Inconvenient truth - मैंने एक किताब लिखी है, Convenient Action और वह मैंने Environment पर लिखी है। और जो किया जा सकता है, यानी political will से Environment friendly काम कैसे किया जा सकता है, वो मैंने उसमें सिद्ध करके दिखाया है। इसलिए Development and climate दुश्‍मन हैं, जो सोचा जा रहा है, गलत है। हम दोनों को Carefully Streamline करके आगे बढ़ा सकते हैं।

Q. Sir, India is, by many counts, the second largest Muslim country in the world in terms of population. Only Indonesia is larger. And as you know from your time here, America is seized by the challenge posed by the group ISIS. One of the questions that has been raised is whether you’re worried that the unrest sweeping large parts of the Arab and Muslim world might spread to India. And to the extent that you are, what are your plans to reduce your country’s susceptibility to radicalization and even violence?

A. जहां तक भारत का सवाल है, भारत में किसी भी संप्रदाय के व्‍यक्ति क्‍यों न हो, लेकिन एक मूल philosophy से वह drive करता है और भारत के philosophy के प्रतीक हैं भगवान बुद्ध, महात्‍मा गांधी। जहां अहिंसा, यह हमारे लोगों के स्‍वभाव में है। आपने देखा होगा, इतनी Terrorist Activity हमारे देश में चली। Terrorism के कारण हम परेशान हैं। लेकिन सारे Terrorist Activity हमारे यहां exported है। किसी ने हमारे यहां export किया है। Home grown नहीं है इसलिए हिंदुस्‍तान का जो मुसलमान है, उसके विषय में, मुझसे कभी एक बार CNN ने पूछा था, कि अल कायदा का ये जो चल रहा है, तो आपको क्‍या होगा, तो मैंने कहा था कि हिंदुस्‍तान का मुसलमान अलकायदा को फेल कर देगा।

Q. We hope so. Let me turn to foreign policy for a minute. For much of the Cold War, India’s articulated foreign policy was one of Non Alignment. And there was always the rhetoric of the five principles of co-existence. But as you know, and as everybody knows, the world is no longer aligned with the end of the Cold War. So what is India’s compass? What is India’s intellectual approach to this post-Cold War world when it comes to its foreign policy?

A. देखिए, हम 18th और 19th century की तरफ जाएं तो वह युग पूरा संघर्ष का युग था। हर शासक जो भी उसका दायरा होगा, वह अपने विस्‍तार के लिए लड़ाई लड़ता था। पूरे दो शताब्‍दी का इतिहास संघर्ष का इतिहास है, लड़ने का इतिहास है। बाद में आया इतिहास, समय जो आया, वह गुट का इतिहास आया। एक गुट ये, तो दूसरा गुट ये। ये आया। अब वक्‍त बड़ी तेजी से बदला है। 21वीं सदी गुट से चलने वाली नहीं है। और एक प्रकार से Irrelevant हुआ यह गुट। आज हर देश Inter dependent है। विश्‍व के सब देश को सब देशों की जरूरत हो, ऐसे युग में हम प्रवेश कर चके हैं। और इसलिए गुट या समूहों के द्वारा नहीं, सह-अस्तित्‍व के विश्‍वास को लेकर आगे बढ़ना पड़ेगा। इसलिए एक नई philosophy, हम चाहे या न चाहें, already, practically जगह ले चुकी है। सभी देश मान लीजिए जो लोग G-20 में होंगे, वही G-4 में भी होंगे। जो G-7 में होंगे वही G-9 में होंगे। यानी आप देख सकते हैं कि कोई ऐसा समूह नहीं बन पा रहा है। हर कोई हर जगह पे भी जगह बना रहा है तो जगत पूरा बदल चुका है। हम ये पुराने समूहों की कल्‍पना लेकर के चलते थे, उसमें से बाहर निकल जाएं और हम Inter-dependent world है, उसको accept करें। ये जगत तेजी से जुड़ा रह है। Technology ने जोड़ा है, हमारी अपनी आवश्‍यकताओं से जुड़ रहे है, और हमारी युवा पीढ़ी ने एक नए बदलाव को स्वीकार कर लिया है, इसलिए पुराने सारे parameters अब काम नहीं आएंगे।

Q. After this meeting here in New York, you are heading for Washington. You’ll meet with the President tonight, you’ve got meetings tomorrow. I expect one word you’re going to hear again and again and again is the word “partnership”. To describe the US-Indian relationship. So my question for you is whether you are comfortable with that word and to the extent you are or are not, what is your definition of the word “partnership” when it comes to India and the United States?

A. पहली बात यह है कि हर चीज में comfort नहीं होने की जरूरत होती भी है। अब पति-पत्‍नी में भी 100% comfort नहीं होता है। लेकिन उसके बावजूद भी एक लंबे समय तक Binding रहता है। कुछ चीजे हैं, जो भारत और अमेरिका को जोड़ती हैं। और वो है:

सबसे बड़ी चीज लोकतंत्र। Openness, सोसाइटी में जो openness है, वह दोनों के संस्‍कारों में है। तीसरी बात, आप देखिए अमेरिका - सारी दुनिया अमेरिका में आके बसी है, यह अमेरिका के character का हिस्‍सा है कि सबको assimilate करती है। और Indian, दूसरी दुनिया में बसा हुआ है। तो सारी दुनिया को assimilate करने की ताकत Indian में है। ये दोनों ऐसे character हैं, जो एक-दूसरे को जोड़ते हैं। और तीसरी बात है, आर्थिक। आर्थिक बात वो लेन देन का विषय रहता है। व्‍यापारिक संबंध रहते हैं कभी आपके फायदे में, कभी हमारे फायदे में। वह give & take formula के आधार पर चलते हैं। लेकिन दोनों देशों के लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा दोनों देशों को जोड़कर रखती है।

Q. You’ve described what features India and US have in common. But another word you’re going to hear a lot tomorrow is “strategic partnership”. Do you have a vision for that partnership and how the US and India can work together on global and regional issues?

A. देखिए, अभी भारत और अमेरिका ने मिलकर के - शांति की दिशा में प्रयास करना, एक विषय है, लेकिन आर्थिक विकास को लेकर के - अभी हम मिलने वाले हैं तो उस विषय को भी जोड़ने वाले हैं। यहां पर जो रिसर्च होता है, उस रिसर्च का उपयोग, हो सकता है कि अन्‍य देशों के साथ मिलकर विशेषकर भारत के साथ मिलकर के, जहां पर उस रिसर्च के धरती पर उतरने में utility ज्‍यादा है, तो हम उन क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं। दुनिया की तरफ देखने का हमारा दृष्टिकोण, वो सिर्फ उपयोगितावाद पर नहीं है। मैं आज भी मानता हूं, कि भारत और अमेरिका के संबंध, अमेरिका के हित के लिए अमेरिका के संबंध और भारत के हित के लिए भारत के संबंध, उसके बजाय, अमेरिका और भारत मिलकर के दुनिया के हित में हम क्‍या कर सकते हैं अगर ये Base line बनती है तो हम दोनों की ताकत विश्‍व को बहुत काम आ सकती है। और मैं जब Mr. Kerry मुझसे मिले थे, तो मैंने इस विषय को बड़े विस्‍तार से उनके सामने मैंने प्रस्‍तुत किया था।

Q. Is Afghanistan one of the areas where you think we can work together in a productive way?

A. अफगानिस्‍तान, ये तो बड़ा example है। अफगानिस्‍तान, actually एक example है। भारत के बहुत लोग अफगानिस्‍तान में रहते हैं। और एक प्रकार से अमेरिका और India के Partnership ने अफगानिस्‍तान में बहुत बड़ा Role play किया है। हम भी चाहते हैं कि अफगानिस्‍तान स्थिर, लोकतांत्रिक तरीके से विकास की यात्रा को आगे बढाए। ये हम भी चाहते हैं। अमेरिका ने वहां जो security measures में मदद की, उसके कारण वहां एक stability मिली। आज भी हमारी कोशिश ये है। और जो अभी चुनाव होने के बाद नई सरकार वहां प्रस्‍थापित हुई है, उस सरकार में भी तालमेल करने में भारत और अमेरिका ने, दोनों ने मिलकर के बहुत ही सद्भावना अपनी प्रकट करते रहे हैं। और एक अच्‍छे नतीजे की तरफ अफगानिस्‍तान गया है। लेकिन हमने अमेरिका से यही Request की है कि आप जो, withdrawal वाला, defence के withdrawal का विषय है - इराक जैसी गलती नहीं करनी चाहिए। क्‍योंकि इसके बाद इतना तेजी से withdraw करने के बाद इराक का जो हाल हुआ, अफगानिस्‍तान में withdrawal की process बहुत slow होनी चाहिए। अफगानिस्‍तान को अपने बल पर खड़े होने देना चाहिए। तभी जाकर के तालिबान को उभरने से वह रोक पाएगा। और इसलिए अमेरिका और भारत दोनों ने मिलकर के अफगानिस्‍तान में पूरी तरह कंधे से कंधा मिलाकर के काम किया है।

Q. Mr Prime Minister, you set an admirable example for the world in June when you accepted the arbitration decision of a Law of the Sea Tribunal, even though it awarded most of the Bay of Bengal that was under dispute to Bangladesh. Would you be willing to submit your land border problems with China to arbitration or adjudication? The Chinese government has thus far rejected the use of arbitration or adjudication. The Philippines is now putting China to the test. Would India be willing to do something similar?

A. चीन और भारत दोनों सक्षम हैं, बातचीत के द्वारा अपनी समस्‍या का समाधान करने के लिए। चीन और भारत Direct बातचीत कर रहे हैं। इसलिए कोई अलग arbitration की आवश्‍यकता नहीं रहती है। अभी भी, चीन के साथ मेरे व्‍यक्तिगत संबंध भी अच्‍छे रहे हैं। चीन के राष्‍ट्रपति अभी-अभी आए थे। और Border dispute को हम मानते हैं, Border dispute है और कई बातों में हमने चर्चा की है। उस चर्चा को हम और आगे बढ़ाएंगे। लेकिन हम दोनों इस बात से सहमत हैं, कि हम मिलकर के बहुत ही जल्‍द इन समाधानों को करेंगे। इसलिए हमें arbitration की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Q. You’ve often said that there is no compromise on the dignity of women. So given the enormous potential of Indian women, and the challenges they face everyday, what is your vision for a Made in India approach for ending gender-based violence and inequality? Is your government exploring the establishment of a Prime Ministerial task force or any other concrete milestones to be a global leader on this issue that is so fundamental to the lives of so many?

A. मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने, जो मैंने initiative लिए, उसके विषय में अच्‍छे शब्‍द सुनाए। दुनिया के कई भाग ऐसे है, जहां देश का प्रमुख महिला नहीं बन पाती है। Prime Minister या President किसी महिला को बनना है, आज भी कई देशों में दिक्‍कत है, लेकिन भारत और एशिया के देश ऐसे हैं, जहां महिलाएं प्रधानमंत्री रही हैं। और आज मेरी Foreign Minister भी महिला हैं, सुषमा स्‍वराज यहां बैठी हैं। मेरी Foreign Secretary भी महिला हैं, सुजाता सिंह। और मेरी Cabinet में 25% women हैं, Cabinet Ministers. लेकिन इस बात से बात पूरी नहीं होती है। Women empowerment के लिए सबसे पहली बात है girl child education. हम लोग dedicated हैं, girl child education के लिए। और I would like to share my experience in Gujarat. मैं जब गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो मेरे यहां girl child education को जब मैंने जाना, पहली बार जब मैं मुख्‍यमंत्री बना। It was Painful for me कि गुजरात जैसे राज्‍य में girl child education का ये हाल है? फिर मैंने, मेरे यहां school शुरू होती है 15th June को। जबकि हमारे यहां temperature होता है 45 डिग्री। यहां पर 24 डिग्री में भी गर्मी लगती है। हम 45 डिग्री में वहां रहते है। तो 13, 14, 15 जून, मैं खुद गांव जाता था। मेरे पूरे मंत्रिपरिषद के लोग गांव जाते थे। सारे मेरे MLA, MP जाते थे। मैं घर-घर जाकर भिक्षा मांगता था और लोगों को मैं कहता था कि भिक्षा में आप मुझे वचन दीजिए कि आप अपनी बेटी को पढ़ाओगे। मैं खुद बच्चियों को स्‍कूल लेकर जाता था। और मैं 100% enrolment में सफल हुआ। When I was a Chief Minister, 100% मैं सफल हुआ। वहां पर मैं अटका नहीं।

मैं कहीं पर भी जाता था, Public function में, तो मुझे gift कुछ न कुछ देते रहते हैं लोग, वह gift देते थे। उस gift को मैं auction करता था। जब मैं मुख्य मंत्री पद से गुजरात से वापिस निकला, तो उस auction में मुझे 78 करोड़ रुपये Total मिले। 78 करोड़ रुपये मैंने girl child education के लिए दान दे दिया सरकार को। ये commitment है हम लोगों का। तो girl child education और मेरी सरकार का Agenda है ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ और उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। दुनिया के कई देश हैं, जहां महिलाओं को Voting right पाने के लिए सालों तक संघर्ष करने पड़े। आंदोलन चलाने पड़े। Develop countries में भी women को voting right के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी। भारत में women को election में भी 30% Reservation है। कोई भी Body होगी, 30% महिलाएं compulsory है। इतना हम forward looking देश हैं।

Q. You mentioned about the Jammu and Kashmir floods. I was originally born in Srinagar. Our families have obviously been tremendously affected. So my question, or rather request, is that Government of India should allow international organization to come in. Currently, there is a tremendous amount of bureaucracy in allowing international organization to come in.

A. पहली बात है कि दुनिया के कई देशों ने अपने आप कश्‍मीर को मदद पहुंचाई है। जब गुजरात में भूकंप हुआ था, गुजरात में भी अंतर्राष्‍ट्रीय community ने काफी मदद पहुंचाई थी। और ये तो बात सही है कि दुनिया भर में एक अच्‍छी चीज बनी है कि कहीं पर भी Natural Calamity होती तो सभी देश मदद करते ही हैं। जब पाकिस्‍तान में भूकंप हुआ था, तो मैं सबसे पहले, क्‍योंकि गुजरात उसके पड़ोस में ही है, तो हमने सबसे ज्‍यादा पाकिस्‍तान में मदद पहुंचाई थी। तो यह मानवता का काम है। सब लोग मानवता का काम करते रहते हैं।

Q. You’ve now been in office for 4 months. Is there any leader – whether in India or another country – about whom you say, “That’s someone who set a model that I would like to follow in my position as Prime Minister”?

A. मैं मानता हूं, ऐसा मैं कहूंगा तो कइयों के साथ अन्‍याय होगा, क्‍योंकि इतने सारे लोग हैं, हरेक से मुझे कुछ सीखना है। अगर मैं एक का नाम लूंगा तो 50 लोग नाराज हो जाएंगे। इसलिए मुझे दुनिया में जो भी अनुभवी लोग हैं, सबसे कुछ न कुछ सीखना है। और सबसे सीख करके मेरे देश के लिए मुझे अच्‍छा करना है। इसलिए मैं कहता हूं, दुनिया में जो श्रेष्‍ठ है, वो मुझे मेरे देश में लाना है।

Thank You.

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ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार: पीएम मोदी
August 02, 2026
मैं प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवाओं से, इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह करता हूं: प्रधानमंत्री
आज जब देश ने 'विकसित भारत' का लक्ष्य तय किया है, तो यह बहुत जरूरी है कि देश के युवा फिट रहें, उनमें भरपूर आत्मविश्वास हो और वे नशीले पदार्थों से हमेशा दूर रहें: पीएम मोदी
हमें हर युवा को नशे के जाल में फंसने से बचाना होगा: प्रधानमंत्री
समाज का सहयोग, योग और ध्यान हमें नशे की लत से लड़ने के लिए अंदर से मजबूत बनाते हैं और आज नशा-मुक्ति केंद्र जैसी सुविधाएँ भी लत छोड़ने में मदद करती हैं: पीएम मोदी
यदि कोई युवा अनजाने में नशे के जाल में फंस भी गया है, तो इसका बिल्कुल भी यह अर्थ नहीं है कि उसके लिए सभी दरवाजे बंद हो गए हैं: प्रधानमंत्री
हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर घर का कोई बच्चा नशे की लत का शिकार हो जाता है, तो हमें इसे छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि उसे लत से मुक्त कराने के लिए डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए: पीएम मोदी
हमें परिवार में बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने की संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए, ताकि आप उन्हें इस तरह के दुष्चक्र में फंसने से पहले ही सहारा दे सकें: प्रधानमंत्री
मैं अपने प्रोफेसरों से अपील करता हूँ कि वे अपने छात्रों के साथ नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों पर चर्चा करें और अच्छे नतीजे पाने के लिए कैंपस में नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएँ: पीएम मोदी


नमस्‍कार!

आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं। इस संकल्प को लेकर, इसक कार्यक्रम से जुड़े सभी पूज्य संतजन, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे सभी राज्यपाल, सभी मुख्यमंत्री, अन्‍य सभी जनप्रतिनिधिगण, 28 हजार से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से युवा साथी, मैं आज इस शुभ घड़ी पर, शुभ संकल्प के लिए करोड़ों-करोड़ों नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आज हम सभी जिस अभियान के साक्षी बन रहे हैं, वह अभियान व्यक्ति के लिए हैं, परिवार के लिए हैं, समाज के लिए भी है और सबसे बड़ी बात है, यह राष्‍ट्र के लिए है।

साथियों,

विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है, क्योंकि आज जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए आवश्यक है, देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्‍मविश्‍वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा-हमेशा दूर ही रहे, दूर हो। यही इस अभियान का उद्देश्य है। इसलिए हम सबको यह संकल्प लेना है, हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझे, हर तरह से जागरूक रहे और उससे दूर रहें और इस संकल्प में अब ‘राष्‍ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियान की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

काशी का सांसद होने के नाते मुझे खुशी है कि यह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पिछले साल काशी की पवित्र धरती से शुरू हुआ था। इसलिए वैज्ञानिक स्‍पष्‍टता के साथ-साथ इसमें आध्यात्मिक ऊर्जा भी है, संतों के आशीर्वाद भी हैं और महान सांस्कृतिक विरासत भी हैं। इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है, जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है। यही वजह है, देश के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने, NGOs ने इस दिशा में संकल्प लिया है। सबने मिलकर ‘काशी डिक्लेरेशन’ के जरिए रोडमैप तैयार किया है और आज हम देख रहे हैं, काशी से उठा वो कल्याणकारी विचार अब यह एक नेशनल प्रोजेक्ट्स बन गया है। आज से देशभर में ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान आरंभ हो रहा है।

साथियों,

कुछ काम ऐसे होते हैं, जो व्यक्तिगत रूप से कोई प्रयास करे, तो कभी-कभी निराश हो जाता है, थकान महसूस करता है, लंबी दूरी चलने में मन तैयार नहीं होता है, लेकिन जब सामूहिक अभियान बन जाता है, कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोग चल पड़ते हैं, तो ऐसे सभी जो व्यक्तिगत रूप से अपने आप कुछ नहीं कर पाते हैं, उनको भी एक नई ऊर्जा मिल जाती है। सामूहिकता की एक ताकत होती है और आज उस ताकत को लेकर के यह अभियान हर युवा मन को छूने वाला है। थोड़ी देर पहले देश के लाखों युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली है। आपने अपने जीवन को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया है। आपने अपने स्कूल, अपने कॉलेज और अपने समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है।

साथियों,

आज लिया गया यह संकल्प आने वाले 100 सप्ताह तक लगातार ऐसे ही आगे बढ़ेगा। हर रविवार, कला, संस्‍कृति, स्पोर्ट्स, मेडिटेशन, आध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां होंगी। नशा मुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा। आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे, हंड्रेड मजबूत स्‍टेप्‍स।

साथियों,

आज हजारों स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लाखों विद्यार्थी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े हैं। माई भारत के वॉलंटियर्स भी लाखों की तादाद में आज इससे जुड़े हैं। मेरे एनएसएस के नौजवान भी आज हमारे साथ शामिल हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से, अलग-अलग संस्‍थानों से, अलग-अलग बैकग्राउंड के एक करोड़ से अधिक युवा आज एक साथ हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है, आप सब इस बड़े मोवमेंट के लीडर हैं। आपने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत का युवा कितना जागरूक है, कितना समझदार है और अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर है। मैं आप सभी को इस अभियान के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे युवा साथियों,

आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है। इसलिए, देश के लिए और अपने जीवन के लिए, खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है। नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है। अभी जिन नौजवानों ने नाट्य मंचन किया, बहुत कम समय में, बहुत अच्छे तरीके से नाट्य मंचन में उन्होंने समस्या भी बताई, समस्या के कारण पैदा हुए संकट भी बताए और बाहर निकलने के सामूहिक प्रयत्न का रास्ता भी दिखाया। नाट्य मंचन छोटा था, लेकिन जैसा उन्होंने कहा, आओ हम नाटक देखें! यह नाटक नहीं था, यह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था। हमें जगा रहा था, हमें जूझने के लिए प्रेरित कर रहा था।

साथियों,

आजकल हम देखते हैं, आज के युवा स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया में छाए हैं, AI को लीड कर रहे हैं, Sports में तिरंगा लहरा रहे हैं, स्‍पेस से लेकर Science तक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। लेकिन साथियों, जब कोई युवा, अगर ड्रग्स के एडिक्‍शन में फंस जाए, तो केवल एक युवा नहीं हारता, एक सपना हार जाता है, एक सपने की बाल मृत्यु हो जाती है, एक परिवार हार जाता है, पूरा का पूरा परिवार टूट जाता है, समाज से भी नफरत का शिकार बन जाता है। नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक माँ की मुस्कान छीन लेता है। नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है। एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है। एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है। घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।

साथियों,

नशा मुक्त रहकर आपको अपने पोटेंशियल को प्रोटेक्ट करना है! आपको ध्यान रखना है, ड्रग्स कुछ समय के लिए 'High' देता है। लेकिन आपके करियर और फैमिली लाइफ को 'Low' कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।

साथियों,

हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी कहा गया है- "जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ। आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥'' अर्थात, जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दें, इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए, ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है।

साथियों,

हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गईं है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत, यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए rehabilitation center जैसी सुविधाएं भी हैं। इसलिए, अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है, तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है, घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग मांगे, मन खोलकर के उससे बात करें, जो एक्सपर्ट्स हैं, उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए, ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी, थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा, उसमें बदलाव आ रहा है, वो खोया-खोया लग रहा है, वो मुँह छुपा रहा है, कमरे में बंद हो जा रहा है, देर रात आ रहा है, पैसे अनाब-शनाब मांग रहा है, यह सारी चीजों से पता चल जाता है, भनक आ जाती है, कुछ मामला गड़बड़ है।

साथियों,

एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स साथियों से भी करना चाहता हूँ, आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों, हमें एक और बात ध्यान रखनी है, जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वह कमजोर नहीं होते, जो नशे को परास्‍त करके निकला है न, वह असली योद्धा होता है, समाज को उनका सम्मान करना चाहिए, अपनापन देना चाहिए, उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता, उसका साहस उसकी पहचान होता है।

साथियों,

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों पर सख्ती के साथ कार्रवाई हो रही है। पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स भी जब्त की गई है। यह दिखाता है कि, ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है। मुझे विश्वास है, केन्‍द्र सरकार, राज्य सरकार, हर कोई इसे मिशन मोड में करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे देश का युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी युवा ऊर्जा को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों को भी आगे बढ़ाएगा। और जब मैं आज अनेक महान संतों को मेरे सामने देख रहा हूं, दूर से मैं मन से उनको प्रणाम करता हूं। मैं इन सभी सामाजिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक गुरुजन, आपका देश के कोने-कोने में संगठन है, आपके युवा साथी डिवोटीज हैं। आने वाले 100 दिन में हर एक संगठन, एक सप्ताह अपने जिम्मे ले सकता है, पूरा सप्ताह पूरे देश में वह संगठन नेतृत्व करे, बाकी सब शक्तियां उसके साथ जुड़े और रविवार को बहुत बड़ा कार्यक्रम करें। दूसरे सप्ताह, दूसरा संगठन, दूसरी शक्ति, सप्ताह भर प्रयोग करें, कार्यक्रम करे और रविवार को बड़ा कार्यक्रम करे। अगर 100 सप्ताह हमारे देश के ऐसे आध्यात्मिक, सामाजिक संगठन, युवा संगठन एक-एक सप्ताह अपने जिम्मे ले लें और बाकी सारी शक्तियां वह जुड़े और रविवार सब मिलकर के करें, आप कल्पना कर सकते हैं, देश में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। मैं एक बार फिर आप सबने समय निकाला, इस पवित्र कार्य में हम सबको आशीर्वाद दिए, इसके लिए संतों का, आचार्यो का, संगठन के महारथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इन एक करोड़ से ज्यादा जुटे नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, आपने यह बहुत बड़ा काम किया है। मैं माई भारत के वॉलंटियर्स की बधाई करता हूं, वो जो भी ठान लेते हैं, आजकल करके दिखाते हैं। अभी पिछले दिनों मुझे माई भारत के वॉलंटियर्स को मिलने का मौका मिला, वह हिन्‍दुस्‍तान के सीमावर्ती गांवों में जाकर के एक-एक सप्ताह रूक करके आए हैं। जिसे कभी देश का आखिरी गांव कहा जाता है, जाता था जिसको आज हम देश का पहला गांव कहते हैं, वहां जाकर के आए। उनके अनुभव बड़े प्रेरक थे और आज इतना बड़ा कार्यक्रम माई भारत के वॉलंटियर्स कर पाते हैं, यह अपने आप में उनकी राष्‍ट्र के प्रति जागरूक समर्पित भावना का प्रतीक है, मैं उनकी बधाई देता हूं, उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सामूहिक प्रयत्नों से यह हमारी मोवमेंट घर-घर पहुंचेगी, हर युवा के दिन में पहुंचेगी और यह ड्रग्स के कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा खौफ भी बन जाएगी। आइए, हम सब मिलकर के आगे चलें, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!