देशभर में, भिन्‍न-भिन्‍न स्‍कूलों में बैठे हुए और इस समारोह में उपस्थित, सभी प्‍यारे विद्यार्थी एवं दोस्‍तों।

मेरे लिए एक सौभाग्‍य की घड़ी है कि मुझे भारत के भावी सपने जिनकी आंखों में सवार हैं, उन बालकों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला है। आज शिक्षक दिवस दिवस है। धीरे-धीरे इस प्रेरक प्रसंग की अहमियत कम होती जा रही है। शायद, बहुत सारे स्‍कूल होंगे, जहां 5 सितंबर को इस रूप में याद भी नहीं किया जाता होगा। शिक्षकों को अवार्ड मिलना, उनका समारोह होना, वहां तक ही ज्‍यादातर ये सीमित हो गया है। आवश्‍यकता है कि हम इस बात को उजागर करें कि समाज जीवन में शिक्षक का महात्‍म्‍य क्‍या है और जब तक हम उस महात्‍म्‍य को स्‍वीकार नहीं करेंगे, न उस शिक्षक के प्रति गौरव पैदा होगा, न शिक्षिक के माध्‍यम से, नई पीढ़ी में परिवर्तन में कोई ज्‍यादा सफलता प्राप्त होगी। इसलिए इस एक महान परंपरा को समयानुकूल परिवर्तन कर के अधिक प्राणवान कैसे बनाया जाए, अधिक तेजस्‍वी कैसे बनाया जाए और इस पर एक चिंतन बहस होने की आवश्‍यकता है। क्‍या कारण है कि बहुत ही साम‍र्थवान विद्यार्थी, टीचर बनना पसंद क्‍यों नहीं करते? इस सवाल का जवाब हम सबको खोजना होगा।

एक वैश्विक परिवेश में ऐसा माना जाता है कि सारी दुनिया में, अच्‍छे टीचरों की बहुत बड़ी मांग है, अच्‍छे टीचर मिल नहीं रहे हैं। भारत एक युवा देश है। क्‍या भारत यह सपना नहीं दे सकता कि हमारे देश से उत्‍तम प्रकार के टीचर्स एक्‍सपोर्ट करेंगे और आज भी बालक हैं, उनके मन में हम इच्‍छा नहीं जगा सकतें कि मैं भी एक अच्‍छा टीचर बन के देश और समाज के लिए काम आऊंगा, ये भाव कैसे जगे?

डॉ0 सर्वपल्‍ली राधाकृष्‍णन जी ने एक उत्‍तम सेवा इस देश की, की। वह अपना जन्‍मदिन नहीं मनाते थे। व‍ह शिक्षक का जन्‍म दिन मनाने का आग्रह करते थे। ये शिक्षक दिवस की कल्‍पना ऐसे पैदा हुई है , खैर अब तो दुनिया के कई देशों में इस परंपरा को जन्‍म मिला है। दुनिया में किसी भी बड़े व्‍यक्ति से पूछिए, उनके जीवन में सफलता के बारे में वह दो बातें अवश्‍य बताएगा। एक कहेगा, मेरी मां कहा योगदान है। दूसरा, मेरे शिक्षक का योगदान है। करीब-करीब सभी महापुरूषों के जीवन में ये बात हमें सुनने को मिलती है, लेकिन यही बात हम जहां है, वहां हम सजगतापूर्वक उसको जीने का प्रयास करते हैं क्‍या?

एक जमाना था शिक्षक के प्रति ऐसा भाव था, यानि, छोटा सा गांव हो तो पूरे गांव में सबसे आदरणीय कोई व्‍यक्ति हुआ करता था, तो शिक्षक हुआ करता था। नहीं मास्‍टर जी ने बता दिया है, मास्‍टर जी ने कह दिया है, ऐसा एक भाव था। धीरे-धीरे स्थिति काफी बदल गई है। उस स्थिति को पुन: प्रतिस्‍थापित कर सकते हैं।

एक बालक के नाते आपके मन में काफी सवाल होगें। आप में से कई बालक होंगे जिनको छुट्टी के दिन परेशानी होती होगी कि सोमवार कैसे आये और संडे को क्‍या-क्‍या किया जाकर के टीचर को बता दूं। जो अपनी मां को नहीं बता सकता, अपने भाई-बहन को नहीं बता सकता वो बात अपने टीचर को बताने के लिए इतना लालायित रहता हैं, इतना आपनापन हो जाता है, उसको और वही उसके जीवन को बदलता है, फिर उसका शब्‍द उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाता है।

मैंने कई ऐसे विद्यार्थी देखें हैं जो बाल भी ऐसे बतायेंगे जैसे उसका टीचर बनाता है, कपड़े भी ऐसे पहनेंगे जैसे उसका टीचर पहनता है, वो उनका हीरो होता है। ये जो अवस्‍था है, उस अवस्‍था को जितना हम प्राणवान बनाये, उतनी हमारी नयी पीढ़ी तैयार होगी।

चीन में एक कहावत है जो लोग साल का सोचते हैं, वो अनाज बोते हैं, जो दस साल का सोचते हैं, वो फलों के वृक्ष बोते हैं, लेकिन जो पीढि़यों को सोचते हैं वो इंसान बोते हैं। मतलब उसको शिक्षित करना, संस्‍कारित करना उसके जीवन को तैयार करना। हमारी शिक्षा प्रणाली को जीवन निर्माण के साथ कैसे हम जीवन्‍त बनायें।

मैंने 15 अगस्‍त को एक बात कही थी हमारे देश में इस वर्ष मेरी इच्‍छा हैं कि जितने स्‍कूल हैं, उनमें कोई स्‍कूल ऐसा न हो जिसमें बालिकाओं के लिए अलग टायलेट न हो। आज कई स्‍कूल ऐसे हैं जहां बालिकाओं के लिए अलग टायलेट नहीं हैं। कुछ स्‍कूल ऐसे भी हैं जहां बालक के लिए भी नहीं, बालिका के लिए भी नहीं है। अब यूं तो लगेगा कि ये ऐसा कोई काम है कि जो प्रधानमंत्री के लिये महत्वपूर्ण है , लेकिन जब मैं डिटेल में गया तो मुझे लगा कि बड़ा महत्‍वपूर्ण काम है, करने जैसा काम हैं, लेकिन मुझे उसमें, जो देशभर के टीचर मुझे सुन रहे हैं, मुझे हर स्‍कूल से मदद चाहिए , एक माहौल बनना चाहिए।

अभी मैं दो दिन पहले जापान गया था, मुझे एक भारतीय परिवार मुझे मिला लेकिन उनकी पत्‍नी जापानी है, पतिदेव इंडियन है वो मेरे पास आकर बोले कि एक बात करनी है। मैंने कहा बताओं। बोले कि आपका 15 अगस्‍त का भाषण भी सुना था आप जो सफाई पर बड़ा आग्रह कर रहे हैं, हमारे यहां नियम है जापान में, हम सभी टीचर और स्‍टूडेंट मिलकर के स्‍कूल में सफाई करते हैं। टायलेट वगैरह सब मिलकर सफाई करते हैं और ये हमारा हमारे स्‍कूल में हमारे चरित्र निर्माण का एक हिस्‍सा है। आप हिन्‍दुस्‍तान में ऐसा क्‍यों नहीं कर सकते हैं।

मैंने कहा, मुझे जाकर मीडिया वालों से पूछना पड़ेगा, वरना ये 24 घंटे चल पड़ता है। मैंने क्‍योंकि एक दिन देखा था कि जब मैं गुजरात में था तो कार्यक्रम आ रहा था। कार्यक्रम ये था कि बच्‍चे स्‍कूल में सफाई करते हैं, और क्या तूफान खडा कर दिया था, ये कैसी स्‍कूल है, ये कैसी मैनेजमेंट है, कैसे टीचर हैं, बच्‍चों पर दमन करते हैं, सब कुछ मैने देखा था एक दिन । खैर, मैंने उनसे तो मजाक कर लिया, लेकिन हम इसको एक राष्‍ट्रीय चरित्र कैसे बनायें और ये बन सकता और इसे बनाया जा सकता है।

दूसरा मैं देश के गणमान्‍य लोगों से भी आग्रह करना चाहता हूं। आप डाक्‍टर बने होंगे, व‍कील बने होंगे, इंजीनियर बने होंगे, आई ए एस अफसर बने होंगे, आई पी एस अफसर बने होंगे, बहुत कुछ होंगे। क्‍या आप अपने निकट के कोई स्‍कूल पसंद करके सप्‍ताह में ज्‍यादा नहीं, एक पीरियड, उन बच्‍चें को पढ़ाने का काम कर सकते हैं? विषय तय करें स्‍कूल के साथ बैठ कर के। आप मुझे बताइए? अगर हिंदुस्‍तान में पढ़े-लिखे लोग सप्‍ताह में, अगर एक पीरियड, कितने ही बड़े अफसर क्‍यों न बने हों, वह जाकर के बच्‍चों के साथ बितायें। उनको कुछ सिखाएं।

आप मुझे बताइए शिक्षा में मान लीजिए कहीं शिकायत है कि शिक्षा में अच्‍छे टीचर नहीं हैं, ये फलना नहीं है, ढिकना नहीं है, इसको ठीक किया जा सकता है या नहीं किया जा सकता है? हम राष्‍ट्र निमार्ण को एक जनांदोलन में परिवर्तित करें। हर किसी की शक्ति को जोड़े, हम ऐसा देश नहीं हैं कि जिसको इतना पीछे रहने की जरूरत है। हम बहुत आगे जा सकते हैं और इसलिए हमारा राष्‍ट्रीय चरित्र कैसे बने, इस पर हम लोगों का कोई इम्‍फैसिस होना चाहिए, प्रयास होना चाहिए। और हम सब मिलकर के करेंगे। इसको किया जा सकता है।

एक विद्यार्थी के नाते आपके भी बहुत सारे सपने होंगे। मैं नहीं मानता हूं, जिंदगी में परिस्थितियां किसी को भी रोक पाती हैं, नहीं रोकती हैं। अगर आगे बढ़ने वालों के इरादों में दम हो और मैं मानता हूं, इस देश के नौजवानों में, बालकों में वो सामर्थ्‍य है। उस सामर्थ्‍य को लेकर के वो आगे बढ़ सकते हैं।

टेक्‍नोलोजी का महात्‍म्‍य बहुत बढ़ रहा है। मैं सभी शिक्षकों से आग्रह करता हूं। कुछ अगर सीखना पड़े तो सीखें। भले हमारी आयु 40-45-50 पर पहुंचे हो, मगर हम सीखें। और हम जिन बालकों के साथ जी रहे हैं, जो कि आज टेकनोलोजी के युग में पल रहा है, बढ़ रहा है, उसे उससे वंचित ना रखें। अगर हमें उसे वंचित रखेंगे तो यह बहुत बड़ा क्राइम होगा, इट्स ए सोशल क्राइम। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि आधुनिक विज्ञान, टेक्‍नोलोजी से हमारे बालक जुड़े। वह विश्‍व को उस रूप में जानने के लिए उसको अवसर मिलना चाहिए। यह हमारी कोशिश रहनी चाहिए। मैं कभी-कभी बालकों से पूछता हूं।

आपको भी एक सवाल पूछना चाहता हूं, जवाब देंगे आप लोग? देंगे ? अच्‍छा, आप में से कितने बालक हैं, जिनको दिन में चार बार भरपूर पसीना निकलता है शरीर से? कितने हैं? नहीं है ना ? देखिए जीवन में खेल कूद नहीं है तो जीवन खिलता नहीं है। ये उमर ऐसी है, इतना दौड़ना चाहिए, इतनी मस्‍ती करनी चाहिए, इतना समय निकालना चाहिए, शरीर में कम से कम चार बार पसीना निकलना चाहिए।वरना क्‍या बन जाएगी जिंदगी आपकी। करोगे, पक्‍का? क्‍योंकि देखिए आप तो किताब, टीवी और कंप्‍यूटर, इस दायरे में जिंदगी नहीं दबनी चाहिए। इससे भी बहुत बड़ी दुनिया है और इसलिए ये मस्‍ती हमारे जीवन में होनी चाहिए। आप लोगों में से कितने हैं, जिनको पाठ्यक्रम के सिवाय किताबें पढ़ने का शौक हैं? चलिये बहुत अच्‍छी संख्‍या में हैं। ज्‍यादातर जीवन चरित्र पढ़ने का शौक है, ऐसे लोग कितने हैं? वो संख्‍या बहुत कम है। मेरा विद्यार्थियों से आग्रह है, जिसकी जीवनी आपको पसंद हो, जीवन चरित्र आपको पढ़ना चाहिए। जीवन चरित्र पढ़ने से हम इतिहास के बहत निकट जाते है। क्‍योंकि उस व्‍यक्ति के बारे में जो भी लिखा जाता है, उसके नजदीक के इतिहास को हम भलीभांति जानते है।

कोई जरूरी नहीं है कि एक ही प्रकार के जीवन को पढ़े, खेल-कूद में कोई आदमी आगे बढ़ा है तो उसका जीवन चरित्र है, तो वो पढ़ना चाहिए। सिने जगत में किसी ने प्रगति की है, उसका जीवन पढ़ने को मिलता है तो वो पढ़ना चाहिए। व्‍यापार जगत में किसी ने प्रगति की है, उसका जीवन चरित्र मिलता है तो इसको पढ़ना चाहिए। साइंटिस्‍ट के रूप में किसी ने काम किया है तो उसका जीवन पढ़ना चाहिए, लेकिन जीवन चरित्र पढ़ने से हम इतिहास के काफी निकट और बाई एण्ड लार्ज सत्‍य को समझने की भी सुविधा पड़ती है।

इसलिए हमारी कोशिश रहनी चाहिए, वरना आजकल तो, आप लोगों को वो आदत है, पता नहीं, हर काम गूगल गुरु करता है। कोई भी सवाल है, गूगल गुरु के पास चले जाओ। इंफोर्मेशन तो मिल जाती है, ज्ञान नहीं मिलता है, जानकारी नहीं मिलती है। इसलिए हम सब उस दिशा में प्रयास करें। मुझे बताया गया है कि कुछ विद्यार्थियों के मन में कुछ सवाल भी है। तो मुझे अच्‍छा लगेगा, उनसे गप्‍पें-गोष्‍ठी करना। बहुत हल्‍का-फुल्‍का माहौल बना दीजिए, जरा गंभीर रहने की जरूरत नहीं है। आपके शिक्षक लोगों ने कहा होगा, हाय ऐसा मत करो, यूं मत करो, ऐसे सब कहा होगा ना, हां। तो आपको शिक्षक ने जो कहा है, यहां से जाने के बाद उसका पालन कीजिए। अभी हंसते-खेलते आराम से बैठिए फिर हम बातें करेंगे।

फिर एक बार आप सबको मेरी बहुत शुभकामनाएं। ‘टीचर्स डे’ पर देश के सभी शिक्षकों को मैं प्रणाम करता हूं। शुभकामनाएं देता हूं और हम जैसे अनेकों के जीवन को बनाने में शिक्षकों का बड़ा रोल है। सबका ऋण स्‍वीकार करता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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भारत-बेल्जियम संबंधों की जड़ें इतिहास में गहरी हैं: बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर के साथ जॉइंट प्रेस मीट में पीएम मोदी
September 03, 2026

Your Excellency, Mr. Prime Minister
दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार!

प्रधानमंत्री जी की पहली भारत यात्रा पर उनका हार्दिक स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।

यह उनकी पहली भारत यात्रा जरूर है, लेकिन भारत से उनका परिचय पुराना है। वे लंबे समय तक Antwerp के Mayor रहे हैं, और उन्होंने Antwerp की बड़ी Indian community और भारत-बेल्जियम डायमंड ट्रेड को हमेशा समर्थन दिया है।

Friends,

भारत और बेल्जियम के संबंधों की जड़ें इतिहास में गहरी हैं। पहले विश्व युद्ध में बेल्जियम में हजारों भारतीय सैनिकों का साहस और बलिदान, हमारी साझा स्मृति का अहम हिस्सा है।

आज, democratic values, market economy और गहरे people-to-people ties हमे natural partners बनाते हैं।

Friends,

दस वर्ष पहले मुझे बेल्जियम की यात्रा करने का अवसर मिला था; और मुझे बहुत खुशी है, कि पिछले एक दशक में हमारी साझेदारी ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

आज हमारे सहयोग का दायरा traditional sectors से आगे बढ़कर defence और clean energy जैसे strategic क्षेत्रों तक पहुँच चुका है। हम ज़ोरावर टैंक जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के काकिनाड़ा में हम दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स में से एक डेवलप कर रहे हैं।

Friends,

आज विश्व एक बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। फूड, फ्यूएल या सप्लाइ चेन्स, हर क्षेत्र में अनिश्चितता का प्रभाव पड़ रहा है।

इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी भारत की economy ने अपनी गति बनाए रखी है। पिछले quarter में हमने 7.8% की growth दर्ज की है। आज भारत की growth story दुनिया के लिए विश्वास और नए अवसरों का स्रोत बन रही है।

Friends,

इस वर्ष की शुरुआत में, हमने ऐतिहासिक भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया। विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक शक्तियों के बीच यह अभूतपूर्व सहयोग, वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को भी नई मजबूती देगा।

भारत की निरंतर आर्थिक प्रगति और इस Agreement ने हमारे आर्थिक संबंधों के लिए नई भावनाओं के द्वार खोले हैं। आज हमने इन संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

Friends,

बेल्जियम की कम्पनीज़ के लिए हमने भारत में “इन्वेस्टमेंट Fast-Track Mechanism” का गठन किया है। हमने India-Belgium Business Forum को एक रेग्युलर मेकनिज़म बनाने का निर्णय लिया है। हम दोनों देशों की फाइनैन्शल, फिन-टेक और रेग्युलेटोरी संस्थाओं के बीच ताल-मेल बढ़ाएंगे।

और इन सभी पहलों से, हम अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को डबल करने का लक्ष्य साकार करेंगे।

Friends,

रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारे संबंधों का एक प्रमुख स्तम्भ है। आज हमने दोनों देशों के बीच मिलिटरी एक्सचेंज और ट्रेनिंग सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई है।

हमारी सरकारों और डिफेन्स इंडस्ट्रीज़ के बीच हुए एग्रीमेंट्स से डिफेन्स co-development और co-production के नए अवसर खुलेंगे। हम अपनी एजेन्सीज़ के बीच intelligence sharing और crime के विरुद्ध को-ऑपरेशन को भी और मजबूत करेंगे।

Friends,

एक क्लीन एनर्जी फ्यूचर और reliable सप्लाइ चेन हमारी साझी प्रथमिकताएँ है। Renewable Energy पर आज हुआ MOU हमारे सस्टेनिबिलिटी सहयोग को नई गति देगा। क्रिटिकल मिनरल्स में हमने processing और recycling में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

Semiconductors में Belgium की expertise और भारत का स्केल एक-दूसरे के पूरक हैं। इस दिशा में हम बेल्जियम के IMEC इंस्टिट्यूट को भारत के semiconductor ecosystem से जोड़ने के लिए मिलकर काम करेंगे।

Friends,

People-to-people ties हमारे संबंधों की सबसे बड़ी ताकत हैं। आज हमने अपने स्टार्ट-अप्स के बीच कनेक्ट मजबूत करने, और मैरीटाइम सेक्टर में केपैसिटी बिल्डिंग बढ़ाने पर सहमति बनाई।

हम यूनिवर्सिटी और रिसर्च सहयोग को भी सुदृढ़ करेंगे। और टैलेंट मोबिलिटी के लिए हम जल्द-ही “माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्ट्नर्शिप एग्रीमेंट” करेंगे।

Friends,

आज हमने regional और global developments पर भी विस्तार से चर्चा की। भारत और बेल्जियम, दोनों ही rule of law, dialogue और diplomacy में विश्वास रखते हैं।

यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते हैं। और आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझी प्रतिबद्धता है।

Your Excellency,

पिछले महीने बेल्जियम और नीदरलैंड ने मिलकर hockey world cup host किया। मैं इस world cup के भव्य आयोजन के लिए आपको बधाई देता हूँ। मैं अपने खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदर्शन के लिए उनकी सराहना करता हूँ।

Diamonds ने भारत और बेल्जियम को लंबे समय से जोड़ा है। आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को एक व्यापक साझेदारी का नया रूप दे रहे हैं।

मुझे विश्वास है कि आज की हमारी चर्चा आपसी संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। एक बार फिर, आपका और आपके delegation का भारत में हार्दिक स्वागत है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।