देशभर में, भिन्‍न-भिन्‍न स्‍कूलों में बैठे हुए और इस समारोह में उपस्थित, सभी प्‍यारे विद्यार्थी एवं दोस्‍तों।

मेरे लिए एक सौभाग्‍य की घड़ी है कि मुझे भारत के भावी सपने जिनकी आंखों में सवार हैं, उन बालकों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला है। आज शिक्षक दिवस दिवस है। धीरे-धीरे इस प्रेरक प्रसंग की अहमियत कम होती जा रही है। शायद, बहुत सारे स्‍कूल होंगे, जहां 5 सितंबर को इस रूप में याद भी नहीं किया जाता होगा। शिक्षकों को अवार्ड मिलना, उनका समारोह होना, वहां तक ही ज्‍यादातर ये सीमित हो गया है। आवश्‍यकता है कि हम इस बात को उजागर करें कि समाज जीवन में शिक्षक का महात्‍म्‍य क्‍या है और जब तक हम उस महात्‍म्‍य को स्‍वीकार नहीं करेंगे, न उस शिक्षक के प्रति गौरव पैदा होगा, न शिक्षिक के माध्‍यम से, नई पीढ़ी में परिवर्तन में कोई ज्‍यादा सफलता प्राप्त होगी। इसलिए इस एक महान परंपरा को समयानुकूल परिवर्तन कर के अधिक प्राणवान कैसे बनाया जाए, अधिक तेजस्‍वी कैसे बनाया जाए और इस पर एक चिंतन बहस होने की आवश्‍यकता है। क्‍या कारण है कि बहुत ही साम‍र्थवान विद्यार्थी, टीचर बनना पसंद क्‍यों नहीं करते? इस सवाल का जवाब हम सबको खोजना होगा।

एक वैश्विक परिवेश में ऐसा माना जाता है कि सारी दुनिया में, अच्‍छे टीचरों की बहुत बड़ी मांग है, अच्‍छे टीचर मिल नहीं रहे हैं। भारत एक युवा देश है। क्‍या भारत यह सपना नहीं दे सकता कि हमारे देश से उत्‍तम प्रकार के टीचर्स एक्‍सपोर्ट करेंगे और आज भी बालक हैं, उनके मन में हम इच्‍छा नहीं जगा सकतें कि मैं भी एक अच्‍छा टीचर बन के देश और समाज के लिए काम आऊंगा, ये भाव कैसे जगे?

डॉ0 सर्वपल्‍ली राधाकृष्‍णन जी ने एक उत्‍तम सेवा इस देश की, की। वह अपना जन्‍मदिन नहीं मनाते थे। व‍ह शिक्षक का जन्‍म दिन मनाने का आग्रह करते थे। ये शिक्षक दिवस की कल्‍पना ऐसे पैदा हुई है , खैर अब तो दुनिया के कई देशों में इस परंपरा को जन्‍म मिला है। दुनिया में किसी भी बड़े व्‍यक्ति से पूछिए, उनके जीवन में सफलता के बारे में वह दो बातें अवश्‍य बताएगा। एक कहेगा, मेरी मां कहा योगदान है। दूसरा, मेरे शिक्षक का योगदान है। करीब-करीब सभी महापुरूषों के जीवन में ये बात हमें सुनने को मिलती है, लेकिन यही बात हम जहां है, वहां हम सजगतापूर्वक उसको जीने का प्रयास करते हैं क्‍या?

एक जमाना था शिक्षक के प्रति ऐसा भाव था, यानि, छोटा सा गांव हो तो पूरे गांव में सबसे आदरणीय कोई व्‍यक्ति हुआ करता था, तो शिक्षक हुआ करता था। नहीं मास्‍टर जी ने बता दिया है, मास्‍टर जी ने कह दिया है, ऐसा एक भाव था। धीरे-धीरे स्थिति काफी बदल गई है। उस स्थिति को पुन: प्रतिस्‍थापित कर सकते हैं।

एक बालक के नाते आपके मन में काफी सवाल होगें। आप में से कई बालक होंगे जिनको छुट्टी के दिन परेशानी होती होगी कि सोमवार कैसे आये और संडे को क्‍या-क्‍या किया जाकर के टीचर को बता दूं। जो अपनी मां को नहीं बता सकता, अपने भाई-बहन को नहीं बता सकता वो बात अपने टीचर को बताने के लिए इतना लालायित रहता हैं, इतना आपनापन हो जाता है, उसको और वही उसके जीवन को बदलता है, फिर उसका शब्‍द उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाता है।

मैंने कई ऐसे विद्यार्थी देखें हैं जो बाल भी ऐसे बतायेंगे जैसे उसका टीचर बनाता है, कपड़े भी ऐसे पहनेंगे जैसे उसका टीचर पहनता है, वो उनका हीरो होता है। ये जो अवस्‍था है, उस अवस्‍था को जितना हम प्राणवान बनाये, उतनी हमारी नयी पीढ़ी तैयार होगी।

चीन में एक कहावत है जो लोग साल का सोचते हैं, वो अनाज बोते हैं, जो दस साल का सोचते हैं, वो फलों के वृक्ष बोते हैं, लेकिन जो पीढि़यों को सोचते हैं वो इंसान बोते हैं। मतलब उसको शिक्षित करना, संस्‍कारित करना उसके जीवन को तैयार करना। हमारी शिक्षा प्रणाली को जीवन निर्माण के साथ कैसे हम जीवन्‍त बनायें।

मैंने 15 अगस्‍त को एक बात कही थी हमारे देश में इस वर्ष मेरी इच्‍छा हैं कि जितने स्‍कूल हैं, उनमें कोई स्‍कूल ऐसा न हो जिसमें बालिकाओं के लिए अलग टायलेट न हो। आज कई स्‍कूल ऐसे हैं जहां बालिकाओं के लिए अलग टायलेट नहीं हैं। कुछ स्‍कूल ऐसे भी हैं जहां बालक के लिए भी नहीं, बालिका के लिए भी नहीं है। अब यूं तो लगेगा कि ये ऐसा कोई काम है कि जो प्रधानमंत्री के लिये महत्वपूर्ण है , लेकिन जब मैं डिटेल में गया तो मुझे लगा कि बड़ा महत्‍वपूर्ण काम है, करने जैसा काम हैं, लेकिन मुझे उसमें, जो देशभर के टीचर मुझे सुन रहे हैं, मुझे हर स्‍कूल से मदद चाहिए , एक माहौल बनना चाहिए।

अभी मैं दो दिन पहले जापान गया था, मुझे एक भारतीय परिवार मुझे मिला लेकिन उनकी पत्‍नी जापानी है, पतिदेव इंडियन है वो मेरे पास आकर बोले कि एक बात करनी है। मैंने कहा बताओं। बोले कि आपका 15 अगस्‍त का भाषण भी सुना था आप जो सफाई पर बड़ा आग्रह कर रहे हैं, हमारे यहां नियम है जापान में, हम सभी टीचर और स्‍टूडेंट मिलकर के स्‍कूल में सफाई करते हैं। टायलेट वगैरह सब मिलकर सफाई करते हैं और ये हमारा हमारे स्‍कूल में हमारे चरित्र निर्माण का एक हिस्‍सा है। आप हिन्‍दुस्‍तान में ऐसा क्‍यों नहीं कर सकते हैं।

मैंने कहा, मुझे जाकर मीडिया वालों से पूछना पड़ेगा, वरना ये 24 घंटे चल पड़ता है। मैंने क्‍योंकि एक दिन देखा था कि जब मैं गुजरात में था तो कार्यक्रम आ रहा था। कार्यक्रम ये था कि बच्‍चे स्‍कूल में सफाई करते हैं, और क्या तूफान खडा कर दिया था, ये कैसी स्‍कूल है, ये कैसी मैनेजमेंट है, कैसे टीचर हैं, बच्‍चों पर दमन करते हैं, सब कुछ मैने देखा था एक दिन । खैर, मैंने उनसे तो मजाक कर लिया, लेकिन हम इसको एक राष्‍ट्रीय चरित्र कैसे बनायें और ये बन सकता और इसे बनाया जा सकता है।

दूसरा मैं देश के गणमान्‍य लोगों से भी आग्रह करना चाहता हूं। आप डाक्‍टर बने होंगे, व‍कील बने होंगे, इंजीनियर बने होंगे, आई ए एस अफसर बने होंगे, आई पी एस अफसर बने होंगे, बहुत कुछ होंगे। क्‍या आप अपने निकट के कोई स्‍कूल पसंद करके सप्‍ताह में ज्‍यादा नहीं, एक पीरियड, उन बच्‍चें को पढ़ाने का काम कर सकते हैं? विषय तय करें स्‍कूल के साथ बैठ कर के। आप मुझे बताइए? अगर हिंदुस्‍तान में पढ़े-लिखे लोग सप्‍ताह में, अगर एक पीरियड, कितने ही बड़े अफसर क्‍यों न बने हों, वह जाकर के बच्‍चों के साथ बितायें। उनको कुछ सिखाएं।

आप मुझे बताइए शिक्षा में मान लीजिए कहीं शिकायत है कि शिक्षा में अच्‍छे टीचर नहीं हैं, ये फलना नहीं है, ढिकना नहीं है, इसको ठीक किया जा सकता है या नहीं किया जा सकता है? हम राष्‍ट्र निमार्ण को एक जनांदोलन में परिवर्तित करें। हर किसी की शक्ति को जोड़े, हम ऐसा देश नहीं हैं कि जिसको इतना पीछे रहने की जरूरत है। हम बहुत आगे जा सकते हैं और इसलिए हमारा राष्‍ट्रीय चरित्र कैसे बने, इस पर हम लोगों का कोई इम्‍फैसिस होना चाहिए, प्रयास होना चाहिए। और हम सब मिलकर के करेंगे। इसको किया जा सकता है।

एक विद्यार्थी के नाते आपके भी बहुत सारे सपने होंगे। मैं नहीं मानता हूं, जिंदगी में परिस्थितियां किसी को भी रोक पाती हैं, नहीं रोकती हैं। अगर आगे बढ़ने वालों के इरादों में दम हो और मैं मानता हूं, इस देश के नौजवानों में, बालकों में वो सामर्थ्‍य है। उस सामर्थ्‍य को लेकर के वो आगे बढ़ सकते हैं।

टेक्‍नोलोजी का महात्‍म्‍य बहुत बढ़ रहा है। मैं सभी शिक्षकों से आग्रह करता हूं। कुछ अगर सीखना पड़े तो सीखें। भले हमारी आयु 40-45-50 पर पहुंचे हो, मगर हम सीखें। और हम जिन बालकों के साथ जी रहे हैं, जो कि आज टेकनोलोजी के युग में पल रहा है, बढ़ रहा है, उसे उससे वंचित ना रखें। अगर हमें उसे वंचित रखेंगे तो यह बहुत बड़ा क्राइम होगा, इट्स ए सोशल क्राइम। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि आधुनिक विज्ञान, टेक्‍नोलोजी से हमारे बालक जुड़े। वह विश्‍व को उस रूप में जानने के लिए उसको अवसर मिलना चाहिए। यह हमारी कोशिश रहनी चाहिए। मैं कभी-कभी बालकों से पूछता हूं।

आपको भी एक सवाल पूछना चाहता हूं, जवाब देंगे आप लोग? देंगे ? अच्‍छा, आप में से कितने बालक हैं, जिनको दिन में चार बार भरपूर पसीना निकलता है शरीर से? कितने हैं? नहीं है ना ? देखिए जीवन में खेल कूद नहीं है तो जीवन खिलता नहीं है। ये उमर ऐसी है, इतना दौड़ना चाहिए, इतनी मस्‍ती करनी चाहिए, इतना समय निकालना चाहिए, शरीर में कम से कम चार बार पसीना निकलना चाहिए।वरना क्‍या बन जाएगी जिंदगी आपकी। करोगे, पक्‍का? क्‍योंकि देखिए आप तो किताब, टीवी और कंप्‍यूटर, इस दायरे में जिंदगी नहीं दबनी चाहिए। इससे भी बहुत बड़ी दुनिया है और इसलिए ये मस्‍ती हमारे जीवन में होनी चाहिए। आप लोगों में से कितने हैं, जिनको पाठ्यक्रम के सिवाय किताबें पढ़ने का शौक हैं? चलिये बहुत अच्‍छी संख्‍या में हैं। ज्‍यादातर जीवन चरित्र पढ़ने का शौक है, ऐसे लोग कितने हैं? वो संख्‍या बहुत कम है। मेरा विद्यार्थियों से आग्रह है, जिसकी जीवनी आपको पसंद हो, जीवन चरित्र आपको पढ़ना चाहिए। जीवन चरित्र पढ़ने से हम इतिहास के बहत निकट जाते है। क्‍योंकि उस व्‍यक्ति के बारे में जो भी लिखा जाता है, उसके नजदीक के इतिहास को हम भलीभांति जानते है।

कोई जरूरी नहीं है कि एक ही प्रकार के जीवन को पढ़े, खेल-कूद में कोई आदमी आगे बढ़ा है तो उसका जीवन चरित्र है, तो वो पढ़ना चाहिए। सिने जगत में किसी ने प्रगति की है, उसका जीवन पढ़ने को मिलता है तो वो पढ़ना चाहिए। व्‍यापार जगत में किसी ने प्रगति की है, उसका जीवन चरित्र मिलता है तो इसको पढ़ना चाहिए। साइंटिस्‍ट के रूप में किसी ने काम किया है तो उसका जीवन पढ़ना चाहिए, लेकिन जीवन चरित्र पढ़ने से हम इतिहास के काफी निकट और बाई एण्ड लार्ज सत्‍य को समझने की भी सुविधा पड़ती है।

इसलिए हमारी कोशिश रहनी चाहिए, वरना आजकल तो, आप लोगों को वो आदत है, पता नहीं, हर काम गूगल गुरु करता है। कोई भी सवाल है, गूगल गुरु के पास चले जाओ। इंफोर्मेशन तो मिल जाती है, ज्ञान नहीं मिलता है, जानकारी नहीं मिलती है। इसलिए हम सब उस दिशा में प्रयास करें। मुझे बताया गया है कि कुछ विद्यार्थियों के मन में कुछ सवाल भी है। तो मुझे अच्‍छा लगेगा, उनसे गप्‍पें-गोष्‍ठी करना। बहुत हल्‍का-फुल्‍का माहौल बना दीजिए, जरा गंभीर रहने की जरूरत नहीं है। आपके शिक्षक लोगों ने कहा होगा, हाय ऐसा मत करो, यूं मत करो, ऐसे सब कहा होगा ना, हां। तो आपको शिक्षक ने जो कहा है, यहां से जाने के बाद उसका पालन कीजिए। अभी हंसते-खेलते आराम से बैठिए फिर हम बातें करेंगे।

फिर एक बार आप सबको मेरी बहुत शुभकामनाएं। ‘टीचर्स डे’ पर देश के सभी शिक्षकों को मैं प्रणाम करता हूं। शुभकामनाएं देता हूं और हम जैसे अनेकों के जीवन को बनाने में शिक्षकों का बड़ा रोल है। सबका ऋण स्‍वीकार करता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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भारत-न्यूजीलैंड संबंध स्थायी मित्रता, समान मूल्यों और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं: ऑकलैंड में पीएम मोदी
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !