भारत न केवल पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के ट्रैक पर है, बल्कि उम्मीदों से कहीं और आगे उन्हें ले जा रहा है : प्रधानमंत्री
हमने उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 21% कम किया है : प्रधानमंत्री मोदी
हमारी सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में 2.63 गीगावाट से बढ़कर अब 2020 में 36 गीगावाट हो गई है : पीएम मोदी

महामहिम,

यह शिखर सम्मेलन पेरिस समझौते की पांचवीं वर्षगांठ पर आयोजित हो रहा है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी लड़ाई में सबसे महत्वाकांक्षी कदम है। आज, जैसा कि हम अपनी नजरें और ऊपर करना चाह रहे हैं, तो हमें अतीत की ओर से भी अपनी दृष्टि को ओझल नहीं करना चाहिए। हमें न केवल अपनी महत्वाकांक्षाओं पर दोबारा विचार करना चाहिए बल्कि पहले से निर्धारित लक्ष्यों के संबंध में अपनी उपलब्धियों की भी समीक्षा करनी चाहिए। तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी आवाजें विश्वसनीय हो सकती हैं।

महामहिम,

मुझे विनम्रतापूर्वक आपसे यह साझा करना है कि भारत न केवल पेरिस समझौते के अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में है, बल्कि वह अपेक्षाओं से अधिक उन्हें पार करने की राह में है। हमने 2005 के स्तर पर अपनी उत्सर्जन तीव्रता को 21 प्रतिशत तक कम कर दिया है। हमारी सौर क्षमता 2014 में 2.63 गीगावाट से बढ़कर 2020 में 36 गीगावाट हो गई है। भारत दुनिया में चौथी सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाला देश है।

यह 2022 से पहले 175 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। और, हमारे पास अब एक और महत्वाकांक्षी लक्ष्य है- 2030 तक 450 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता। हम अपने वनआच्छादित क्षेत्रों का विस्तार करने और जैवविविधता की रक्षा करने में सफल रहे हैं। और वैश्विक मंच पर भारत दो प्रमुख पहलों में अग्रणी रहा है:

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, और

आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन

महामहिम,

2047 में, भारत एक आधुनिक, स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएगा। इस ग्रह के अपने सभी साथी निवासियों के लिए मैं आज एक महत्वपूर्ण संकल्प व्यक्त करना चाहता हूं। 100 साल का भारत न केवल अपने लक्ष्यों को पूरा करेगा, बल्कि आपकी अपेक्षाओं से भी आगेनिकलेगा।

 

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।