इंडिया मोबाइल कांग्रेस और दूरसंचार क्षेत्र में देश की सफलता, आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण की शक्ति को दर्शाती है: प्रधानमंत्री
देश के लगभग हर जिले में आज 5जी है जो कभी 2जी से जूझ रहा था: प्रधानमंत्री
भारत ने अपना Made in India 4G Stack launch किया है। ये देश की बड़ी स्वदेशी उपलब्धि है। अब भारत दुनिया के उन 5 देशों की लिस्ट में आ गया है, जिनके पास ये सामर्थ्य है: पीएम
हमारे पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार, दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार, नेतृत्व करने के लिए जनशक्ति, गतिशीलता और मानसिकता है: प्रधानमंत्री
भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी अब एक विशेषाधिकार या विलासिता नहीं है, यह अब हर भारतीय के जीवन का एक अभिन्न अंग है: प्रधानमंत्री
यह निवेश करने, नवाचार करने और भारत में निर्माण करने का सबसे अच्छा समय है!: प्रधानमंत्री
Mobile, telecom, electronics और पूरे technology ecosystem में, जहां भी global bottlenecks हैं, वहां भारत के पास दुनिया को solution देने का मौका है: पीएम

कैबिनेट में मेरे सहयोगी ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी जी, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, विदेशों से आये हमारे अतिथि, टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े सभी महानुभाव, यहाँ उपस्थित विभिन्न कॉलेजों से आए मेरे युवा साथी, देवियों और सज्जनों!

इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस खास एडिशन में, मैं आप सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं। अभी हमारे बहुत सारे स्टार्टअप्स ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने प्रेजेंटेशन दिए हैं। Financial Fraud Prevention, Quantum Communication, 6G, Optical Communication, Semiconductors, ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेजेंटेशन को देखकर ये विश्वास गहरा होता है कि भारत का तकनीकी भविष्य सक्षम हाथों में है। मैं इस कार्यक्रम के लिए और सभी नए Initiatives के लिए आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।

Friends,

IMC का ये आयोजन अब सिर्फ Mobile या Telecom तक सीमित नहीं रहा है। सिर्फ कुछ वर्षों में IMC का ये इवेंट, एशिया का सबसे बड़ा डिजिटल टेक्नोलॉजी फोरम बन गया है।

साथियों,

IMC की ये सक्सेस स्टोरी कैसे लिखी गई? इसे किसने ड्राइव किया है?

साथियों,

इस सक्सेस स्टोरी को लिखा है, भारत के Tech Savvy Mindset ने, इसे लीड किया है, हमारे युवाओं ने, भारत के टैलेंट ने, इसे गति दी है हमारे इनोवेटर्स ने, हमारे स्टार्टअप्स ने। और इसलिए ये मुमकिन हो पाया है क्योंकि, आज सरकार देश की प्रतिभा और क्षमता के साथ पूरी ताकत से खड़ी है। Telecom Technology Development Fund, Digital Communications Innovations Square, इन स्कीम्स के जरिए हम, हमारे स्टार्टअप्स को funds उपलब्ध करवा रहे हैं। 5G, 6G, Advanced Optical Communications और Tera-Hertz, इन technologies में test beds के लिए सरकार finance कर रही है, ताकि हमारे स्टार्टअप्स अपने products build कर पाएं। हम स्टार्टअप्स और देश के प्रीमियर रिसर्च इंस्टीट्यूट्स के बीच पार्टनरशिप को facilitate कर रहे हैं। आज सरकार की मदद से, Indian industry, startups और academia कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। Indigenous technologies का development और स्केलिंग हो, R&D के जरिए intellectual property create करना हो, Global standards के development में contribute करना हो, भारत हर आयाम में आगे बढ़ रहा है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज भारत एक effective platform बनकर उभरा है।

साथियों,

इंडिया मोबाइल कांग्रेस और टेलीकॉम सेक्टर में भारत की सफलता आत्मनिर्भर भारत के विज़न की ताकत को बताता है। आप याद करिए, मैंने जब मेक इन इंडिया की बात कही थी, तो कुछ लोग कैसे इसका मजाक उड़ाते थे। शक-संदेह में जीने वाले लोग कहते थे कि भारत technologically advanced चीजें कैसे बनाएगा? क्योंकि, उनके दौर में नई टेक्नोलॉजी को भारत तक आने में कई दशक लग जाते थे। देश ने उसका जवाब दिया। जो देश कभी 2G को लेकर Struggle करता था, आज उसी देश के लगभग हर ज़िले में 5G पहुंच चुका है। हमारा Electronics Production 2014 की तुलना में Six Times बढ़ चुका है। Mobile Phone Manufacturing में Twenty Eight Times, और export में One Hundred Twenty Seven Times की वृद्धि हुई है। पिछले एक दशक में Mobile Phone Manufacturing Sector ने लाखों डायरेक्ट जॉब्स क्रिएट की हैं। अभी हाल ही में, एक बड़ी स्मार्टफोन कंपनी का डेटा सामने आया है। आज 45 भारतीय कंपनियां उस एक बड़ी कंपनी की supply chain से जुड़ी हैं। इससे करीब साढ़े तीन लाख रोजगार देश में पैदा हुए हैं। और ये केवल एक कंपनी का आंकड़ा नहीं है। आज देश में कितनी ही कंपनियां बड़े स्केल पर manufacturing कर रही हैं। इसमें अगर Indirect Opportunities को जोड़ दें, तो हम कल्पना कर सकते हैं कि रोजगार का ये नंबर कितना बड़ा बन जाता है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही भारत ने अपना मेड इन इंडिया 4G स्टैक लॉन्च किया है। ये देश की बड़ी स्वदेशी उपलब्धि है। अब भारत दुनिया के उन 5 देशों की लिस्ट में आ गया है, जिनके पास ये सामर्थ्य है। ये डिजिटल self-reliance की दिशा में, technological independence की दिशा में देश का एक बड़ा कदम है। Indigenous 4G and 5G stack के जरिए हम न केवल seamless connectivity को सुनिश्चित कर पाएंगे, बल्कि, देशवासियों को तेज इंटरनेट और reliable services भी दे पाएंगे। इसी मकसद से, जिस दिन हमने अपना मेड इन इंडिया 4G स्टैक लॉन्च किया, उसी दिन देश में एक साथ करीब One Lakh 4G टावर्स को भी एक्टिव किया गया। दुनिया के कुछ देशों को एक लाख टॉवर की बात करते हैं ना, तो भी उनको अजूबा लगता है, ये आंकड़े बहुत बड़े लगते हैं लोगों को। इसके कारण एक साथ 2 करोड़ से ज्यादा लोग देश की डिजिटल मूवमेंट का हिस्सा बने हैं। इसमें कई ऐसे इलाके थे, जो रिमोट एरिया में थे। जो डिजिटल कनेक्टिविटी में पीछे छूट गए थे। अब ऐसे सभी क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंची है।

साथियों,

भारत के मेड इन इंडिया 4G स्टैक की एक और विशेषता है। हमारा 4G स्टैक एक्सपोर्ट रेडी भी है। यानी, ये भारत की Business Outreach का माध्यम भी बनेगा। इससे 2030 के भारत, यानि, ‘भारत 6G विज़न’ को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

साथियों,

10 सालों में भारत की टेक्नोलॉजी रिवॉल्यूशन, बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। और इस स्पीड और स्केल को मैच करने के लिए, बहुत लंबे समय से एक मजबूत Legal और Modern Policy Foundation की जरूरत महसूस हो रही थी। हमने इसके लिए Telecommunications Act बनाया। इस एक कानून ने The Indian Telegraph Act और The Indian Wireless Telegraph Act, उन दोनों को रिप्लेस किया। ये कानून तब के थे, जब यहां बैठे हम आप जैसे किसी व्यक्ति का जन्म भी नहीं हुआ था। और इसलिए, पॉलिसी लेवल पर जरूरत थी कि हम 21वीं सदी की अप्रोच के हिसाब से एक नई व्यवस्था बनाएं, और हमने वही किया है। ये नया कानून Regulator नहीं, बल्कि एक Facilitator की तरह काम करता है। अब Approvals आसान हुए हैं, Right-Of-Way Permissions जल्दी मिलती हैं। इसका परिणाम भी दिख रहा है। Fibre और Tower Network का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। इससे Ease of Doing Business बढ़ी है, इन्वेस्टमेंट्स को Encourage किया जा रहा है, और उद्योगों को Long-Term Planning में सुविधा हुई है।

साथियों,

आज हम देश में साइबर सेक्योरिटी को भी उतनी ही प्राथमिकता दे रहे हैं। Cyber Frauds के खिलाफ कानून सख्त किए गए हैं, और Accountability भी बढ़ाई है। और Grievance Redressal के मैकेनिज्म को भी बेहतर किया गया है। इंडस्ट्री और कंज्यूमर्स दोनों को, इसका बहुत बड़ा लाभ मिल रहा है।

Friends,

आज पूरा विश्व भारत के potential को recognize कर रहा है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market हमारे पास है। दूसरा सबसे बड़ा 5G Market यहाँ है। और Market के साथ ही, हमारे पास मैनपावर भी है, मोबिलिटी भी है और माइंडसेट भी है। और जब मैनपावर की बात आती है, तो भारत में स्केल और स्किल दोनों एक साथ दिखाई देते हैं। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है, और ये जनरेशन बहुत बड़े लेवल पर स्किल्ड बनाई जा रही है। भारत आज दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती Developer Population वाला देश है।

साथियों,

आज भारत में एक जीबी वायरलेस डेटा की कीमत, एक कप चाय के दाम से भी कम है, चाय का उदाहरण देना मेरी आदत है। Per User Data Consumption में हम दुनिया के अग्रिम देशों में आते हैं। इसका अर्थ है कि भारत में Digital Connectivity अब कोई Privilege या लग्जरी नहीं है। ये भारतीयों के जीवन का एक अटूट हिस्सा है।

साथियों,

इंडस्ट्री और इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने के माइंडसेट में भी भारत सबसे आगे दिखता है। भारत का डेमॉक्रेटिक सेटअप, सरकार की वेलकमिंग अप्रोच और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की पॉलिसीज, इनसे भारत की पहचान एक इन्वेस्टर फ्रेंडली डेस्टिनेशन के रूप में बनी है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में हमारी सक्सेस, इस बात का प्रमाण है कि सरकार डिजिटल फर्स्ट माइंडसेट से किस तरह से जुड़ी हुई है। इसलिए मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ - This Is The Best Time To Invest, Innovate And Make In India! Manufacturing से Semiconductors तक, Mobiles से Electronics और स्टार्टअप्स तक हर एक फील्ड में, भारत में ढेर सारी संभावनाएं हैं, ढेर सारी एनर्जी है।

साथियों,

कुछ सप्ताह पहले ही 15 अगस्त को मैंने लालकिले से घोषणा की है, कि ये साल बड़े बदलावों का, बड़े रिफॉर्म्स का साल है। हम रिफॉर्म्स की गति बढ़ा रहे हैं, और इसलिए हमारी इंडस्ट्री का, हमारे इनोवेटर्स का दायित्व भी बढ़ रहा है। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे स्टार्टअप्स की है, हमारे यंग इनोवेटर्स की भी है। अपनी स्पीड से, अपनी Risk Taking Abilities से स्टार्टअप्स नए रास्ते, नए अवसर बना रहे हैं। और इसीलिए मुझे देखकर खुशी है कि IMC ने भी इस साल 500 से ज्यादा स्टार्टअप्स को बुलाकर, उन्हें इन्वेस्टर्स और ग्लोबल मेंटर्स के साथ जुड़ने का मौका दिया है।

साथियों,

इस सेक्टर की ग्रोथ में हमारे Established Players का रोल लगातार बढ़ रहा है। ये प्लेयर्स देश की इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए, Stability, Scale और Direction देते हैं। उनके पास रिसर्च और डेवलपमेंट की Capabilities हैं। और इसीलिए, हमें स्टार्टअप्स की Speed और Established Players की Scale दोनों से पावर मिलेगी।

साथियों,

हमारी इंडस्ट्री से जुड़े ऐसे कई विषय हैं, जिन पर स्टार्टअप्स के युवा, हमारी academia, रिसर्च इंस्टिट्यूट, रिसर्च कम्युनिटी और पॉलिसीमेकर्स, सबको मिल करके काम करने की जरूरत है। IMC जैसा प्लेटफॉर्म ऐसे संवाद शुरू करने में उपयोगी हो, तो शायद लाभ हमारा अनेक गुना बढ़ जाएगा।

साथियों,

हमें देखना होगा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में कहां रुकावटें आ रही हैं। मोबाइल, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स और पूरे टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में, जहां भी global bottlenecks हैं, वहां भारत के पास दुनिया को solution देने का मौका है। उदाहरण के लिए, हमने पहचाना कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की capacity, अब कुछ गिने-चुने देशों तक सीमित थी, और पूरी दुनिया diversification चाहती थी। आज भारत ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारत में 10 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर काम हो रहा है।

साथियों,

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में, ग्लोबल कंपनियां trusted partners की तलाश कर रही हैं, जो scale और reliability दोनों में सही उतरें। दुनिया telecom network equipment के design और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी भरोसेमंद पार्टनर्स चाहती है। क्या भारतीय कंपनियां reliable global suppliers और design partners नहीं बन सकती हैं?

साथियों,

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में चिपसेट्स और बैटरियों से लेकर, displays और sensors तक, ये काम देश के भीतर और ज्यादा होने की जरूरत है। दुनिया पहले से कहीं ज्यादा data generate कर रही है। इसलिए storage, security और sovereignty जैसे सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो जाएंगे। डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करके भारत एक global data hub बन सकता है।

साथियों,

मुझे आशा है कि आने वाले सेशंस में, हम इसी अप्रोच को, इसी टारगेट को लेकर आगे बढ़ेंगे। एक बार फिर IMC के इस पूरे कार्यक्रम के लिए आप सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Thank you.

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भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है: पीएम मोदी
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।