वंचितों और आदिवासियों की सेवा, मेरे लिए परिवार के सदस्य की सेवा के समान है: नंदुरबार में पीएम मोदी
प्रभु श्रीराम भारत के अस्तित्व के आधार और भविष्य के प्रेरणा पुंज हैं: नंदुरबार में पीएम मोदी
कांग्रेस पार्टी देश से हिंदू आस्था को मिटाने का षड्यंत्र कर रही है: नंदुरबार में पीएम मोदी

जोहार! नंदुरबारमधील माझ्या सर्व भावांना आणि बहिणींना माझा नमस्कार। मैं देवमोगरा माता की धरती को नमन करता हूं। मैं महान आदिवासी सेनानी राघोजी भांगरे को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। हम सबको प्रेरणा देने वाले जननायक कृष्णाजी राव साबले, महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्री बाई फुले,उनको भी आदरपूर्वक नमन करते हुए, मैं प्रणाम करता हूं।

साथियों,

आज अक्षय तृतीया, आखा तीज का शुभ पर्व है। मैं सभी देशवासियों और खास करके मेरे किसान भाई बहनों, को अक्षय तृतिया की बधाई देता हूं। आज भगवान परशुराम जयंती भी है। मैं सभी देशवासियों को इस शुभ दिन की भी शुभकामनाएं देता हूं। और अक्षय तृतीया हो, और इतने सारे लोग आशीर्वाद देने के लिए आए हो, अक्षय तृतीया के दिन जो आशीर्वाद मिलता है न वो भी अक्षय होता है। आज इतनी विशाल संख्या में आपका ये आशीर्वाद,ये पक्का कर रहा है- उना एकदा, उना एकदा। उना एकदा... मै देख रहा हूँ, अभी भी हूजूम का हूजूम अंदर आ रहा है। साथियों, यहाँ नंदुरबार और गुजरात के बीच कोई दूरी ही नहीं है। पहले भी मेरा यहां खूब आना-जाना होता था। और नंदुरबार आए औऱ चौधरी की चाय न पीए, चौधरी की कड़क चाय यानि नंदुरबार की यादों से जुड़ जाती है। और चाय का रिश्ता, और आपके प्यार का कर्ज, मोदी कभी भी भूल नहीं सकता!

साथियों,

वंचितों, आदिवासियों की सेवा, मेरे लिए परिवार के सदस्य की सेवा जैसी ही है। मैं काँग्रेस के शाही परिवार की तरह बड़े घराने से नहीं निकला हूँ। मैं तो गरीबी में ही बड़ा हुआ हूँ। मुझे पता है, यहाँ आपने कितनी तकलीफ उठाई है! हमारे आदिवासी भाई-बहन यहां काफी ऊंचाई पर भी रहते हैं। पानी के लिए कैसे आपको उतरकर नीचे आना पड़ता था! तब पानी मिलता था! ये माताओं-बहनों सबको मालूम है। आपके जीवन में भी मुश्किलों का पहाड़ था। कितने ही आदिवासी परिवारों के पास पक्का घर नहीं था। आजादी के 60 साल बाद भी गाँवों में बिजली नहीं पहुंची थी। और इसीलिए, मोदी ने संकल्प लिया था, हर गरीब को घर, हर आदिवासी को घर, हर आदिवासी के घर में पानी, हर परिवार को पानी की सुविधा, दूर-सूदूर जंगलो में भी गांव क्यों न हो हर गाँव में बिजली।

साथियों,

हमने नंदूरबार के करीब सवा लाख, देखिए आजादी के सत्तर साल के बाद मैं ये कह रहा हूँ, करीब सवा लाख गरीबों को हमने पीएम-आवास पक्का घर दिया, सिर्फ नंदुरबार में। और मेरा एक काम है, करोगे आपलोग? मेरा एक काम करोगे? ये मेरा दिली काम है, करोगे? माताऐं-बहनें करेंगी? ये जो पीछे लोग खड़े हैं, वो करेंगे? हाथ ऊपर कर के बताओ करेंगे? तो मै बताऊँ, करेंगे। अच्छा, मेरा एक काम करना इन दिनों आप चुनाव के लिए. जब भी गांव में जाऐं, मोहल्ले में जाऐं, और अगर आपके ध्यान में आए कि ये दो परिवार है जिन्हें गैस का कन्केशन नहीं मिला है, ये दो परिवार रह गए हैं इनको नल से जल नहीं मिला है, अभी चार परिवार रह गए हैं, अभी कच्ची झोपड़ी में रहते हैं उनको पक्का घर नहीं मिला है, आप उनका नाम पता लिख लिजिए, और मुझे भेज दीजिए और मेरी तरफ से उनको गारंटी दे देना कि मोदी आए थे, मोदी ने कहा है कि तीसरे टर्म में मैं तीन करोड़ और घर बनाने वाला हूँ, आपको पक्का घर मिलेगा। ये बता देंगे। देखिए, आप ही मेरे मोदी हैं। तो करेंगे? देखिए, हमने घर दिया मतलब, चार दिवारें दी ऐसा नहीं है, हमने घर के साथ बिजली, पानी, गैस कनेक्शन भी दिया। NDA सरकार ने महाराष्ट्र के 20 हजार से अधिक गांवों में हर घर जल पहुंचाया है। मैं शिंदे जी औऱ देवेन्द्र जी को बधाई देता हूँ कि आपने मेरे हाथ मजबूत कर दिए हैं। इसमें नंदूरबार के 111 गांव, जो कठिन एरिया था, वो भी शामिल है। औऱ अभी तो ये ट्रेलर है, अभी तो मोदी को बहुत कुछ करना है औऱ आपके लिए करना है।

साथियों,

एक तरफ भाजपा के ये प्रयास हैं और दूसरी तरफ ये काँग्रेस है। कांग्रेस ने आदिवासी भाई-बहनों की कभी परवाह नहीं की। आदिवासी इलाकों में सिकल सेल एनीमिया एक बड़ा खतरा रहा है। लेकिन कांग्रेस ने इस बीमारी की तरफ उतना ध्यान ही नहीं दिया। ये बीजेपी है जिसने सिकल सेल एनीमिया को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चलाया है। और मेरी माताएं, बहनें, नौजवान, ये जो मैं सिकल सेल एनिमिया के लिए काम कर रहा हूँ न, वो चुनाव के लिए नहीं कर रहा हूँ। आने वाली आपकी अनेकों पीढियों के लिए मैं लगा हुआ हूँ, ताकि उनको ऐसी बीमारी न आए। कोई गरीब कुपोषण का शिकार न हो, हमने इसकी भी चिंता की। आज नंदूरबार के 12 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है। साथियों, काँग्रेस जानती है कि वो विकास में मोदी का मुक़ाबला कर ही नहीं सकते। इसलिए, इस चुनाव में वो झूठ की फैक्ट्री खोल कर बैठ गए हैं। झूठ फैलाकर वोट लेना चाहते हैं। कभी आरक्षण को लेकर झूठ. कभी संविधान को लेकर झूठ, और इन्होंने पूरा इकोसिस्टम ऐसी अफवाह फैलाने के लिए चौबीसों घंटे लगा रखा है।

साथियों,

आरक्षण पर काँग्रेस का हाल ‘चोर मचाए शोर’, ये ‘चोर मचाए शोर’ वाला है। धर्म के आधार पर आरक्षण बाबासाहेब के सिद्धांतों के खिलाफ है, बाबासाहेब की भावना के खिलाफ है, संविधान निर्माताओं ने जो संविधान बनाया, उसकी पीठ में छूरा भोंकने वाला, ये माफ न कर सकें, ऐसा पाप है। लेकिन काँग्रेस पार्टी का एजेंडा है- दलित, पिछड़े, आदिवासी का आरक्षण छीनकर के, मॉइनॉरिटी के नाम पर अपने वोटबैंक को दे देना। और मैं ऐसे हवा में नहीं कर रहा हूँ, मेरे पास मजबूत उदाहरण है। औऱ इसलिए मेरे भाई-बहन, आप घर घर हर आदिवासी परिवार को समझाइए और मेरे आदिवासी समाज के पढ़े लिखे लोग हैं उनको भी मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूँ, आप समाज को जगाइए, ये कितना बड़ा संकट कांग्रेस वाले ले कर आए हैं। अब उन्होंने क्या किया, कर्नाटक में धर्म के आधार पर आरक्षण देने के दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया। और उन्होंने कहा रातोंराता कर्नाटक में जितने भी मुसलमान लोग हैं, उन सब को रातोंरात ओबीसी बना दिया, एक आर्डर निकाल दिया, मुख्यमंत्री ने ठप्पा मार दिया। अब हुआ क्या OBC को जो आरक्षण मिलता है, उसका सबसे बड़ा हिस्सा, ये रातोंरात OBC बन गए, इन्होंने लूट लिया। अब बताइए कि वो आदिवासियों के लिए करना चाहते हैं, वो दलितों के लिए करना चाहते हैं औऱ ये कर्नाटक का मॉडल पूरे देश में लागू करना चाहती है। SC, ST, OBC का आरक्षण खत्म करने के लिए, मैं गंभीरता से कह रहा हूँ, ये महा अघाढ़ी, आरक्षण का महाभक्षण का, महाअभियान चला रही है। वहीं SC, ST, OBC का आरक्षण बचाने के लिए मोदी, आरक्षण का महारक्षण का महायज्ञ कर रहा है। मैं पिछले 17 दिनों से लगातार काँग्रेस पार्टी को चुनौती दे रहा हूँ! मैंने काँग्रेस से पूछा है कि वो लिखकर दे, वो SC, ST, OBC का आरक्षण, उसके टुकड़े करके उसका एक टुकड़ा मुसलमान को नहीं बांटेगी। मेरा सवाल सही है कि गलत है भाई? सही है कि गलत है? अब वो मुसलमानों को देना चाहते हैं। और कांग्रेस जवाब भी नहीं देती है। सच बोलो न भाई! हम नही देंगे। इसका मतलब, इनका हिडन एजेंडा है। आपका हक लूटने का खेल है भाई। मेरे इस चैलेंज पर कांग्रेस की चुप्पी यानि दाल में काला है। ये चाहें जितनी भी कोशिश कर लें, देशविरोधी ताकतों के साथ मिलकर कितना ही झूठ फैला लें, आपके पास मोदी का भरोसा है, आपके पास मोदी की गारंटी है! और आप लिख कर रखिए, मोदी जब तक जिंदा है, मोदी जब तक जिंदा है, SC, ST, OBC में से आरक्षण का रत्ती भर भी हिस्सा मैं किसी भी धर्म के आधार पर नहीं देने दूंगा। कोई उसको हाथ नहीं लगा सकता है। औऱ देशवासी, मैं बड़े ही जिम्मेवारी के साथ कहना चाहता हूँ, औऱ दायित्व के साथ कहना चाहता हूँ वंचित का जो अधिकार है! चाहे SC हो ST हो OBC हो, वंचित का जो अधिकार है, मोदी उसका चौकीदार है। मोदी की चौकीदारी में, जब मोदी जैसा चौकीदार हो तो किसने अपनी मां का दूध पिया है जो आपका हक छीन सकता है।

साथियों,

हम तो माता शबरी की पूजा करने वाले लोग हैं, लेकिन काँग्रेस ने कभी आदिवासी समाज को सम्मान नहीं दिया और न मिलने दिया। आदिवासी क्रांतिकारियों ने आज़ादी की लड़ाई में इतने बलिदान दिये। लेकिन, काँग्रेस ये बलिदान की बात मानने को तैयार नहीं है। आज़ादी की लड़ाई का पूरा श्रेय कांग्रेस केवल एक परिवार को ही देती रही है। ये भाजपा है जो देशभर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर म्यूज़ियम बनवा रही है। ताकि आने वाली पीढियों को पता चले कि हमारे पूर्वज आदिवासियों ने देश के लिए कितने बड़े बलिदान दिए थे।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, भाजपा ने, एनडीए ने आदिवासी बेटी को राष्ट्रपति बनाया, औऱ पहली बार ऐसा हुआ लेकिन, आपको याद रहना चाहिए कि वो कौन लोग थे जिन्होंने आदिवासी बेटी द्रौपदी मुर्मु जी को चुनाव, राष्ट्रपति का चुनाव हराने के लिए, रात-दिन एक कर लिए थे, वो कौन थे ? ये कांग्रेस वाले थे जिन्होंने एक आदिवासी बेटी को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए रात-दिन एक किया था। और काँग्रेस पार्टी ने ऐसा क्यों किया औऱ इसकी एक वजह, अभी दो तीन दिन पहले ही खुली है। कांग्रेस के जो शाहजादे हैं ना उनके गुरू अमेरिका में रहते हैं, ये कांग्रेस के शाहजादे के ये गुरू अमेरिका में रहते हैं। उन्होंने भारत के लोगों पर रंगभेदी टिप्पणी की है। रंग के आधार पर भेद, ऐसा गंभीर आरोप लगाया है। अरे! जिनका रंग, भगवान कृष्ण जैसा होता है, कांग्रेस उन्हें अफ्रीकन मानती है। और इसलिए द्रौपदी मूर्मु जी राष्ट्रपति बनें, उन्हें ये मंजूर ही नहीं था। आप लोग बताइए, यहां जो भगवान कृष्ण के रंग वाले हैं क्या वो सब अफ्रीकन हैं क्या? क्या ये अपमान है या नहीं है? क्या आदिवासी समाज का अपमान, इसका बदला लेने के लिए, ये रंग की बातें कर रहे हो।

साथियों,

काँग्रेस पार्टी का एजेंडा इतना खतरनाक है कि शहजादे के गुरू ने इसका भी खुलासा किया है। ये शहजादे के गुरू ने अमेरिका से कहा है कि राममंदिर का निर्माण और रामनवमी का उत्सव, ये Idea of India के खिलाफ है, भारत के विचार के खिलाफ है। उन्होंने यहां तक कह दिया मोदी मंदिर जाता है, वो भी उनके पेट में चूहे दौड़ने लग जाते हैं। कांग्रेस, मेरा मंदिर जाना भी भारत विरोधी बता रही है। बताइए भाई? मंदिर जाना ये देश द्रोह है क्या? जरा आप बताइए? ये देश द्रोह है क्या? क्या ये भारत विरोधी काम है क्या? आप कल्पना कर सकते हैं? आप काँग्रेस की मानसिकता देखिए, ये राम के देश में राममंदिर को देशविरोधी बता रहे हैं। ये तुष्टिकरण के लिए सरकारी इफ्तारी करने वाले लोग, ये आतंकवादियों की कब्रों को संवारने वाले लोग, ये हम सबके प्रभु राम औऱ जिनका राममंदिर, जहां हम जाते हैं उस राममंदिर जाने को देशविरोधी बता रहे हैं। मेरे भाई बहन, हम तो माता सबरी के पुजारी हैं। ये इंडी गठबंधन हमला, ये मोदी पर नहीं, ये 140 करोड़ देशवासियों की आस्था है। ये हमला आप पर है, ये मेरे देश के आदिवासियों पर हमला है। कांग्रेस पार्टी देश से हिन्दू आस्था को मिटाने का षड्यंत्र कर रही है।

साथियों,

प्रभु श्रीराम जीवन के उच्चतम आदर्शों, महानतम गुणों औऱ सुन्दरत्तम मूल्यों के महासंगम हैं। भारत के अस्तीत्व का आधार राम से है। औऱ भारत के भविष्य का प्रेरणापुंज भी प्रभु श्रीराम हैं। यहीं महाराष्ट्र की धरती पर ये संत आवाज उठी थी-“विश्वाचा विश्राम रे स्वामी माझा राम रे”। अर्थात्, मेरे राम तो पूरे विश्व के विश्राम हैं, आश्रय हैं। ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस पार्टी वाले Idea of India के खिलाफ मानती है। भगवान श्रीराम की सीख है-पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।। अर्थात्, दूसरों की सेवा से, परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। और किसी को पीड़ा देना ही सबसे बड़ा पाप है। ऐसे प्रभु राम को शहजादे, उनके गुरू और कांग्रेस पार्टी Idea of India के खिलाफ मानती है। हमारे राम कहते हैं-कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया॥ अर्थात्, जो दीन दुखियों की पीड़ा को जानता है, महसूस करता है, वही मेरा भक्त है। ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस Idea of India के खिलाफ मानती है। और ये भगवान राम की ही शिक्षा है-धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना॥ अर्थात्, सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस Idea of India के खिलाफ मानती है। ये राम ही हैं, जो सभी दीन-दुखियों को, वंचितों को गले लगाकर अपने पास बैठाते हैं। सहज सनेह बिबस रघुराई। पूँछी कुसल निकट बैठाई॥ ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस Idea of India के खिलाफ मानती है। हमारे राम जनजातीय समाज से कैसे मिलते हैं? हमारे राम जनजातीय समाज को मिलते हैं-पुरजन करि जोहारु घर आए। अर्थात, राम आदिवासियों की संस्कृति का सम्मान करते हैं। उनसे जोहार करके मिलते हैं। ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस Idea of India के खिलाफ मानती है। हमारे प्रभु श्रीराम ने हमें सिखाया है, और ये जो लोग देश छोड़ करके भाग गए हैं, वो जरा कान खोल करके सुन लें, हमारे प्रभु राम ने सिखाया है-अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात्, हमारी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। यानी, ‘राष्ट्र प्रथम’, Nation First, ऐसे प्रभु राम को कांग्रेस Idea of India के खिलाफ मानती है।

साथियों,

ये लोग इतने अहंकार से भरे हुए हैं कि गरीब, इनके लिए कोई मायने नहीं रखता। ये लोग सत्ता में रहते हैं तो गरीब को दुत्कारते हैं, उसे तरसा-तरसा कर रखते हैं। आज एक गरीब का बेटा, आपका सेवक बन करके, प्रधानमंत्री पद से जब काम कर रहा है, ये गरीब विरोधी मानसिकता वाले, शाही परिवार की मानसिकता वाले इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। ये नकली शिवसेना वालों की गरीब से कितनी नफरत है, ये उन्होंने फिर बताया है। ये नकली शिवसेना वाले मुझे जिंदा गाड़ने की बात कर रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस है जो कहती है- मोदी तेरी कब्र खुदेगी, और दूसरी तरफ ये नकली शिवसेना है, जो मुझे जिंदा गाड़ने की बात करती है। और मुझे गाली देते हुए भी ये लोग तुष्टिकरण का पूरा ध्यान रखते हैं। मोदी की कब्र खुदेगी, मोदी को जिंदा गाड़ देंगे, इसमें भी अपने वोटबैंक को पसंद आए...वही गाली दागोगे क्या? साथियों, मुझे कई बार ये सोचकर दुख होता है कि बाला साहेब ठाकरे को कितना दुख होता होगा। मैंने बालासाहेब को निकट से देखा है, उनके मन को दिल को छू करके देखा है। अब तो ये नकली शिवसेना वाले, बम धमाके को दोषी को भी अपने साथ प्रचार में ले जाने लगे हैं। इसका मतलब हुआ कि बिहार में चारा चोरी में जेल भुगत रहे व्यक्ति को कंधे पर बैठाकर घूम रहे हैं, महाराष्ट्र में बम धमाकों के दोषी को कंधे पर बैठाकर घूम रहे हैं। ऐसे पापियों को ले करके जिनको चलना पड़ रहा है, इन लोगों के विषय में पचास बार सोचना पड़ता है। इसलिए कोई बड़ी बात नहीं कि मुझे जमीन में जिंदा गाड़ने के सपने देख रहे हैं। ये लोग जनता का साथ और जनता का विश्वास तो गंवा चुके हैं, इनकी अपनी सियासी ज़मीन खिसक चुकी है, लेकिन ये भूल रहे हैं कि भारत की 140 करोड़ जनता, मेरी माताऐं -बहनें जो इतनी बड़ी तादाद में आयी हैं न, ये मेरी माताऐं-बहनें यही मोदी की रक्षक है। ये मातृशक्ति मेरा सुरक्षा कवच है। मुझ पर मातृशक्ति का इतना आशीर्वाद है कि ये लोग चाहकर भी मोदी को जीते जी भी और मरने के बाद भी जमीन में नहीं गाड़ पाएंगे।

साथियों,

महाराष्ट्र के एक दिग्गज नेता, चालीस पचास साल से वे ऐसे ही फ्री मारते रहते हैं। बारामती के चुनाव के बाद, वे इतने चिंतित हैं, इतने चिंतित हैं कि उन्होंने बयान दिया है औऱ ये बयान उन्होंने, मैं पक्का मानता हूँ कि काफी लोगों से विचार विमर्श करके ही दिया होगा। वे इतने हताश औऱ निऱाश हो गए हैं कि उनको लगता है कि चार जून के बाद सार्वजनिक जीवन में, राजनीतिक जीवन में अगर टिक के रहना है तो छोटे-छोटे राजनीतिक दलों को कांग्रेस में Merge हो जाना चाहिए। इसका मतलब जो नकली एनसीपी है, औऱ ये नकली शिवसेना है उन्होंने कांग्रेस में Merger करने का मन बना लिया है। अब आप को मैं बताता हूँ जब चार जून के बाद कांग्रेस में जा करके मरने के बजाय, सीना तान करके हमारे अजीत दादा औऱ सिंदे जी के साथ आओ औऱ बड़े शान से सपने पूरे हो जाएगें।

भाइयों-बहनों,

13 मई को काँग्रेस और इंडी अघाड़ी को आपका वोट ही जवाब देगा। नंदुरबार से हमारी बेटी हिना गावित जी आपकी सुख-दुख की साथी हैं। आप जानते हैं न कि हिना मेरी कितनी मदद करती है, पार्लियामेंट में आपने देखा होगा, ये छोटी बेटी है लेकिन पार्लियामेंट में विपक्ष वालों के छक्के छुड़ा देती है। आप उन्हें ज्यादा से ज्यादा वोट देकर बहुत बड़ी जीत दिलाइए। और मेरा इसलिए आग्रह है कि मतदान ज्यादा होना चाहिए भाई, करोगे? करोगे? पहले मतदान फिर जलपान। मंजूर है? अच्छा मेरा एक काम करोगे? मेरा एक काम करोगे? जरा हाथ ऊपर करके कहिए। माताऐं-बहनें बताइए मेरा काम करोगे?जरा हाथ ऊपर करके बताइए, मेरा एक काम करोगे? देखिए, घर-घर जाना और लोगों को कहना अपने मोदी जी आए थे, और मोदी जी ने आपको प्रणाम भेजा है। मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे? हर परिवार में मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे? बोलिए,

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा: वडोदरा, गुजरात में पीएम मोदी
September 08, 2026
हम भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं ताकि तेज गति से लोगों और सामानों की आवाजाही हो सके, नए अवसर पैदा हो सकें और आर्थिक विकास को गति मिल सके: प्रधानमंत्री
समर्पित माल ढुलाई गलियारा तीव्र गति से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा है: प्रधानमंत्री
चिप्स से लेकर जहाजों तक, भारत अब विनिर्माण क्षेत्र के नए भविष्य का निर्माण कर रहा है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुनेत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।

साथियों,

आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।

साथियों,

इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।

साथियों,

ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।

साथियों,

2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।

साथियों,

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।

साथियों,

इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।

साथियों,

ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।

साथियों,

फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वो भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरु हुई हैं। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।

साथियों,

रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्तधाराओं का विजन रखा है, उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर, इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्किल और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, ये वड़ोदरा करीब डेढ़ सौ साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले, यहां टेक्स्टाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरु हुई थी, जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो-ढाई दशक में वड़ोदरा MSMEs का एक बड़ा हब बन गया है। और मुझे याद है, जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था, तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा, तो हर हफ्ते कोई ना कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो, क्योंकि यहां पर आते थे, तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी, यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया है। अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C-295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है, तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच-मेट्रो कोच बनाने का, रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक, भारत ने करीब 50 हज़ार, ये आंकड़ा सुनिए, 2014 के बाद भारत ने अब तक 50 हज़ार आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 50 हजार आधुनिक कोच तो किए ही हैं, करीब ढाई लाख वेगन, मालगाड़ी के लिए जो वेगन होते हैं, भारतीय रेल में जोड़े गए हैं, ढाई लाख।

साथियों,

अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।

साथियों,

‘झूठ की गूंज’ से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर्स पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।

साथियों,

आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा, इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चिप इंडस्ट्री है, डेटा सेंटर और AI से जुड़ी इंडस्ट्री है, इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें AI में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है, तो देश को उसकी तैयारी, उसका इकोसिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं, किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं का फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करके की जा रही है, आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है।

साथियों,

दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तो दुनिया की ज़रूरतें भी बदल रही हैं और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था, लेकिन अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर भी फोकस है, स्किल का महत्मय बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो, एक बड़ी जरूरत बन गई है। और इसीलिए, आज हम अपनी शिक्षा नीति को, शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवाशक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की हैं। पहली घोषणा, देश की पारंपरिक ज़रूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल, हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के ऐसे बच्चों की, परिवारों के पैसे की बचत हो। और इसीलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री-कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनके कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान, अपनी तैयारी कर रहे हैं, उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी।

साथियों,

भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी AI के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है, AI सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है, अगर कोई इस स्किल को जानता है, तो वो खेती के लिए नया AI solution बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में technology विकसित कर सकता है। Manufacturing की productivity बढ़ा सकता है। Robotics में अपना startup शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए AI को समझने वाले और AI का इस्तेमाल करने वाले युवा हों। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।

साथियों,

भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है, ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। और इसलिए, हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत शुभकामनाएं।

अब मेरा एक काम करना पड़ेगा वडोदरा वालों को, करेंगे? पक्के तौर पर? आप सबने वड़ोदरा को इतना स्वच्छ बना दिया, कितनी मेहनत करनी पड़ी। मैं देख रहा था, हमारे नौजवान दिन-रात सफाई में लगे हुए थे। लेकिन एक बार हम तय करें कि अब हम वडोदरा को गंदा होने ही नहीं देंगे। मैं खुद गंदगी नहीं करूँगा, ये संकल्प लें, तो वडोदरा गंदा होगा? वडोदरा गंदा होगा? तो दिवाली ऐसी चकाचक जाएगी या नहीं, नवरात्रि शानदार जाएगी या नहीं, गणेशोत्सव में चार चाँद लगेंगे या नहीं, तो इतना काम तो हो जाएगा।

शाबाश।

धन्यवाद।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!