विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में नवनियुक्त युवाओं को लगभग 70,000 नियुक्ति पत्र वितरित किए
"आज पूरी दुनिया भारत की विकास यात्रा में उसके साथ सहभागी बनने के लिए उत्सुक है"
“आज, भारत अपनी राजनीतिक स्थिरता के लिए जाना जाता है, जो आज की दुनिया में बहुत महत्व रखता है; आज भारत सरकार की पहचान एक निर्णायक सरकार के रूप में होती है; आज, सरकार अपने प्रगतिशील आर्थिक और सामाजिक निर्णयों के लिए जानी जाती है”
"नागरिकों के कल्याण के संदर्भ में सरकारी योजनाओं का गुणात्मक प्रभाव होता है"
"नौकरियों के लिए 'रेट कार्ड' के दिन चले गए; वर्तमान सरकार का ध्यान युवाओं के भविष्य को ‘सुरक्षित' बनाने पर है"
“लोगों को बांटने के लिए भाषा का दुरुपयोग किया जा रहा था, सरकार अब भाषा को रोजगार का सशक्त माध्यम बना रही है”
"अब सरकार अपनी सेवाएं घर-घर तक पहुंचाकर नागरिकों के पास पहुंच रही है"

नमस्कार!

राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले ये रोजगार मेले, एनडीए और भाजपा सरकार की नई पहचान बन गए हैं। आज एक बार फिर 70 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले हैं। मुझे खुशी है कि बीजेपी के शासन वाली राज्य सरकारें भी सभी बीजेपी के स्‍टेट में भी लगातार इस तरह के रोजगार मेले आयोजित कर रही हैं। जो लोग इस समय सरकारी नौकरी में आ रहे हैं, उनके लिए ये बहुत महत्वपूर्ण समय है।

आजादी का अमृतकाल अभी शुरू ही हुआ है। आपके सामने अगले 25 वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। आपको वर्तमान के साथ ही देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी जी-जान से जुट जाना है। मैं आज नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी युवाओं को और उनके परिवारजनों को बहुत-बहुत बधाई और बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज भारत में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर, दोनों में ही नौकरियों के निरंतर नए मौके बन रहे हैं। बहुत बड़ी संख्या में हमारे नौजवान स्वरोजगार के लिए भी आगे आ रहे हैं। बिना गारंटी बैंक से मदद दिलाने वाली मुद्रा योजना ने करोड़ों युवाओं की मदद की है। स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया जैसे अभियानों से युवाओं का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ा है। सरकार से मदद पाने वाले ये नौजवान अब खुद अनेक युवाओं को नौकरी दे रहे हैं।

बीते वर्षों में जिस तरह बड़े पैमाने पर युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई हैं, यह अभियान भी अपने-आप में अभूतपूर्व है। देश में सरकारी नौकरी देने वाले प्रमुख संस्थानों जैसे SSC, UPSC और RRB ने पहले के मुकाबले इन व्‍यवस्‍थाओं के माध्‍यम से ज्यादा युवाओं को नौकरी दी है। और अभी जो वीडियो दिखाया गया, उसमें उसका जिक्र भी है।

इन संस्थाओं का जोर परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और सरल बनाने पर भी रहा है। पहले जिन भर्ती परीक्षाओं को पूरा होने में उसका जो चक्र होता था, वो चक्र पूरा होने में साल-डेढ़ साल का समय यूं ही लग जाता था, और वो अगर कोई कोर्ट-कचहरी में चला गया तो दो-दो, पांच-पांच साल बिगड़ जाते थे। ये सारी चीजों से बाहर निकलकर अब कुछ ही महीनों में सारा चक्र, सारी प्रक्रियाएं पारदर्शी पद्धति से पूर्ण कर दी जाती हैं।

साथियों,

आज पूरी दुनिया हमारी विकास यात्रा में साथ चलने के लिए तत्पर है। भारत को लेकर ऐसा विश्वास और हमारी अर्थव्यवस्था पर इतना भरोसा पहले कभी नहीं रहा। आप जानते हैं, एक तरफ वैश्विक मंदी, कोरोना जैसी भयंकर वैश्विक महामारी, दूसरी तरफ युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन टूटना, कितनी-कितनी कठिनाइयां पूरी दुनिया में दिखाई दे रही हैं। इन सबके बावजूद, और मेरे युवा साथियों, इस बात पर आप गौर कीजिए, इन सारी दिक्कतों के बावजूद भी भारत अपनी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है।

आज विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत आ रही हैं। आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर है। जब इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश आता है तो उससे production बढ़ता है, उद्योग का विस्तार होता है, नए-नए उद्योग लगते हैं, उत्पादन बढ़ता है, एक्सपोर्ट बढ़ता है और स्वाभाविक है बिना नए नौजवानों के ये काम हो ही नहीं सकता, और इसलिए employment बहुत तेजी से बढ़ता है, रोजगार बहुत तेजी से बढ़ता है।

हमारी सरकार के निर्णयों ने प्राइवेट सेक्टर में कैसे लाखों नए अवसर पैदा किए हैं, अभी हमारे डॉक्टर जितेंद्र सिंह जी विस्तार से वो एक-एक वाक्य में ब्यौरा इसका दे रहे थे। लेकिन मैं जरा एक उदाहरण आपके सामने रखना चाहता हूं। जैसे ऑटोमोबाइल सेक्टर है। देश की GDP में इस सेक्टर का योगदान साढ़े छह परसेंट से ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की Automotive industry ने बड़ी छलांग लगाई है।

आज भारत से Passenger Vehicle का दुनिया के कई देशों में एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। Commercial Vehicle का Export, इतना ही नहीं हमारे Three-Wheeler-Two-Wheelers उनके एक्सपोर्ट में भी बहुत वृद्धि हो रही है। 10 साल पहले ये इंडस्ट्री 5 लाख करोड़ रुपए के आस-पास थी। आज ये इंडस्ट्री 5 लाख करोड़ से jump लगा करके 12 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की हो गई है। Electric Mobility का भी भारत में लगातार विस्तार हो रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर को भारत सरकार की PLI स्कीम से भी बहुत मदद मिल रही है। तेजी से आगे बढ़ते हुए ऐसे ही सेक्टर्स लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बना रहे हैं।

साथियों,

आज भारत एक दशक पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा मजबूत देश है। राजनीतिक भ्रष्टाचार, योजनाओं में गड़बड़ी, जनता-जनार्दन के धन का दुरुपयोग, पुरानी जितनी सरकारें आप देखेंगे उनकी पहचान यही बन गई थी। आज भारत को उसकी राजनीतिक स्थिरता के लिए जाना जाता है। Political stability, ये दुनिया में बहुत मायने रखती है।

आज भारत सरकार की पहचान उसके निर्णायक फैसलों से होती है। एक decisive government. आज भारत सरकार की पहचान उसके आर्थिक और प्रगतिशील सामाजिक सुधारों से हो रही है। ग्लोबल एजेंसियां लगातार इस बात को घोषित कर रही हैं, अनुमान लगा रही हैं और विश्वास से कह रही हैं कि चाहे हाईवे का निर्माण हो या रेलवे का, Ease of Living की बात हो या फिर Ease of Doing Business की चर्चा, भारत पिछली सरकारों की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

बीते वर्षों में भारत ने अपने फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर और अपने सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाखों करोड़ रुपए का निवेश किया है। लाखों करोड़ रुपए के इस निवेश ने भी रोजगार के करोड़ों अवसर बनाए हैं। अब जैसे सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का मैं एक उदाहरण देता हूं, जो हमारे सामाजिक जीवन से जुड़ा हुआ विषय है। और वो है पानी, और उसके लिए हमने चलाया है जल जीवन मिशन। ये जल जीवन मिशन, उसके पीछे अब तक करीब-करीब 4 लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

जब ये मिशन शुरू हुआ था, तो ग्रामीण इलाकों में हर 100 में से यानी 100 घर अगर गांव में हैं, तो सिर्फ 15 घर ही थे, जहां पाइप से पानी आता था। ये मैं एवरेज बता रहा हूं, 100 घर में से 15 घर में पाइप से पानी आता था। आज जल जीवन मिशन की वजह से हर 100 में से बासठ (62) घरों में पाइप से पानी आने लगा है और अभी भी तेज गति से काम चल रहा है। आज देश के 130 जिले ऐसे हैं- ये छोटा क्षेत्र नहीं है, 130 जिले ऐसे हैं, जहां के हर गांव में, हर घर में नल से जल आता है।

और साथियों,

जिन घरों में अब साफ पानी पहुंच रहा है, वहां लोगों का समय भी बचा है, लेकिन इससे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण जो लाभ हो रहा है, और वो गंभीर बीमारियों से भी बचे हैं। पीने का शुद्ध पानी आरोग्य के लिए बहुत बड़ी औषधि बन जाता है। एक स्टडी में सामने आया है कि जब हर घर पाइप से पानी पहुंचने लगा तो डायरिया से होने वाली 4 लाख मौतें मौत होने से बच गईं, चार लाख जिंदगियां बच गईं, यानी जल जीवन मिशन, चार लाख लोगों का जीवन बचाएगा।

ये स्टडी ये भी कहती है कि हर घर जल पहुंचने से देश के गरीबों के 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक बचने वाले हैं, यानी गरीब के घर का पैसा बचने वाला है, मध्‍यम वर्ग के परिवार का पैसा बचने वाला है। इन पैसों को उन्हें पानी का इंतजाम करने में, पानी से होने वाली बीमारियों के इलाज में खर्च करना पड़ता था। जल जीवन का एक और बड़ा लाभ ये भी होगा कि इससे महिलाओं का बहुत सारा समय भी बचेगा।

इस रोजगार मेले में नौकरी पाने वाले आप सभी समझ सकते हैं कि सरकार की एक-एक योजना का कितना बड़ा Multiplier Effect होता है। जल-जीवन मिशन का उदाहरण आपके सामने मैंने रखा है। ऐसे ही आप जब अब सरकारी व्यवस्था में आए हैं तो सरकार की हर योजना को, अपने विभाग के हर लक्ष्य को तेजी से प्राप्त करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे, ये मेरा आपसे भरोसा भी है, अपेक्षा भी है।

साथियों,

देश में चल रहा ये रोजगार अभियान, पारदर्शिता और सुशासन, गुड गवर्नेंस दोनों का ही प्रमाण है। हम सभी ने देखा है कि कैसे हमारे देश में परिवारवादी पॉलिटिकल पार्टियों ने हर व्यवस्था में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दिया। जब सरकारी नौकरी की बात आती थी, तो उसमें ये परिवारवादी पार्टियां भाई-भतीजावाद, सिफारिश और भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा देती थीं। इन परिवारवादी पार्टियों ने देश के करोड़ों युवाओं के साथ विश्वासघात किया है।

2014 में हमारी सरकार बनने के बाद, अब भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता भी आई है और भाई-भतीजावाद भी खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार में ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्ती में इंटरव्यू समाप्त होने का लाभ लाखों युवाओं को हुआ है। एक तरफ हमारी सरकार के ये ईमानदार प्रयास हैं तो दूसरी तरफ और ये बात मैं चाहता हूं मेरे नौजवान पूरा समझने का प्रयास करें। हकीकतों के आधार पर कुछ बातें आ रही हैं, दूसरी तरफ भाई-भतीजावाद है।

अभी आपने एक दो दिन पहले मीडिया में आई रिपोर्ट देखी होगी, अखबारों में, टीवी में काफी कुछ देखने को मिला। एक राज्य की उसमें चर्चा है, और चर्चा क्‍या है, एक राज्य में Cash for Job के घोटाले की जांच में जो बातें बाहर निकल करके आई हैं, वो मेरे देश के नौजवानों के लिए बहुत बड़ा चिंता का विषय ले करके आई हैं। उस राज्‍य की क्‍या पद्धति है, क्‍या बात उभर करके आई है, नौकरी सरकारी चाहिए तो हर पद के लिए, जैसे होटल में आप खाना खाने जाएं तो रेट कार्ड होता है ना, हर पद के लिए 'रेट कार्ड' है। रेट कार्ड बताया गया और रेट कार्ड भी कैसा है, छोटे-छोटे गरीबों को लूटा जा रहा है। अगर आप सफाई कर्मी की नौकरी चाहिए, तो उसके लिए आपको ये रेट रहेगा, भ्रष्‍टाचार में इतना देना पड़ेगा। अगर आपको ड्राइवर की नौकरी चाहिए तो ड्राइवर की नौकरी के लिए ये रेट रहेगा, अगर आपको क्‍लर्क की नौकरी चाहिए, टीचर की नौकरी चाहिए, नर्स की नौकरी चाहिए तो आपको ये रेट रहेगा। आप सोचिए हर पद के लिए उस राज्य में 'रेट कार्ड' चला करता है और कट मनी का कारोबार चलता है। देश का नौजवान कहां जाएगा। ये स्वार्थी राजनीतिक दल, Jobs के लिए 'rate card' बनाते हैं।

अब देखिए कुछ दिन पहले एक और मामला सामने आया था। रेलवे के एक मंत्री ने जॉब देने के बदले में गरीब किसानों की जमीनें लिखवा ली थीं। जॉब के बदले में जमीन प्रणाली वो भी केस सीबीआई में चल रहा है, कोर्ट में चल रहा है।

भाइयों-बहनों,

आप देखिए आपके सामने दो चीजें साथ हैं, एक तरफ परिवारवादी वो पार्टियां, भाई-भतीजावाद करने वाली वो पार्टियां, भ्रष्‍टाचार में रोजगार के नाम पर देश के नौजवानों को लूटने वाली पार्टियां, जॉब रेट कार्ड, हर चीज में रेट कार्ड, हर चीज में कट मनी। उनका रास्‍ता है रेट कार्ड, जबकि हम युवाओं के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य को सेफ गार्ड करने पर काम कर रहे हैं। रेट कार्ड आपकी काबिलियत को, आपके सामर्थ्‍य को, आपके सपनों को चूर-चूर कर देते हैं। हम आपके सेफ गार्ड में लगे हैं जो आपके सपनों के लिए जीते हैं। आपके संकल्‍पों को साकार करने के लिए काम करते हैं। आपकी हर इच्‍छा, आकांक्षा, आपके परिवार की हर इच्‍छा, आकांक्षा, उसको सेफगार्ड करने में हम लगे हैं। अब देश तय करेगा देश के नौजवानों का भविष्‍य रेटकार्ड के भरोसे चलेगा कि सेफगार्ड व्‍यवस्‍था के अंदर सुरक्षित तरीके से पनपेगा।

साथियों,

ये भाई-भतीजावाद वाली पार्टियां देश के सामान्‍य मानवी से आगे बढ़ने के अवसर छीन लेती हैं। जबकि हम देश के सामान्‍य मानवी के लिए नित नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

हमारे देश में कुछ राजनीतिक दलों ने लोगों को भाषा के नाम पर एक-दूसरे से भिड़ने के लिए, देश को तोड़ने के लिए भाषा को एक हथियार बनाया, लेकिन हम भाषा को, लोगों को रोजगार देने, उन्हें सशक्त करने का माध्यम बना रहे हैं। हमारी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि किसी को अपना सपना पूरा करना हो तो कोई भी भाषा उसके सामने दीवार ना बने। भारत सरकार आज जिस तरह मातृभाषा में भर्ती परीक्षा पर जोर दे रही है, entrance exam पर जोर दे रही है, उसका भी सर्वाधिक लाभ मेरे देश के बेटे-बेटियों को मिल रहा है, हमारे नौजवानों को हो रहा है। Regional language में परीक्षा होने से युवाओं को आसानी से अपनी योग्यता साबित करने का अवसर मिला है।

साथियों,

आज तेजी से आगे बढ़ते हुए भारत में, सरकारी व्यवस्थाओं और सरकारी कर्मचारियों के काम करने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। एक समय था, जब देश के सामान्य नागरिक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते थे। आज सरकार अपनी सेवाएं लेकर, देश के नागरिकों के घर तक पहुंच रही है। अब जनता की अपेक्षाओं को समझते हुए, क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। विभिन्न सरकारी दफ्तर और विभाग, जनता के प्रति संवेदनशील रहते हुए काम करने पर जोर, ये हमारी प्राथमिकता है।

इतने सारे मोबाइल एप्स के माध्यम से, डिजिटल सेवाओं के माध्यम से, सरकार से मिलने वाली सुविधाएं अब बहुत आसान हो गई हैं। पब्लिक ग्रीवांस सिस्टम को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। इन बदलावों के बीच, आपको भी देश के नागरिकों के प्रति पूरी संवेदनशीलता से काम करना है। आपको इन सुधारों को और आगे बढ़ाना है। और इन सबके साथ ही, आप लगातार कुछ न कुछ नया सीखने की प्रवृत्ति को हमेशा बनाए रखिए।

सरकार में प्रवेश ये जिंदगी का आखिरी मुकाम नहीं हो सकता है। आपको इससे भी आगे बढ़ना है और नई ऊंचाइयों को प्राप्‍त करना है। आपके जीवन के नए सपने, नए संकल्‍प, नया सामर्थ्‍य उभर करके आना चाहिए। और इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल, ये ऑनलाइन पोर्टल जो है, iGoT के माध्यम से नई सुविधा बनाई है। हाल ही में, इसके यूजर्स की संख्या 10 लाख के आंकड़े को पार कर गई है।

इस ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध courses का आप पूरा फायदा उठाएं। आपको नौकरी में बहुत काम आएगा। आपको प्रगति करने के लिए नए रास्‍ते खुल जाएंगे। और मैं दोस्‍तों आपको यहां से आगे देखना चाहता हूं। आप भी आगे बढ़ें, देश भी आगे बढ़े। ये 25 साल मेरे लिए आपकी प्रगति के भी हैं और हम सबके लिए देश की प्रगति के भी हैं।

आइए,

अमृतकाल के अगले 25 वर्षों की यात्रा में हम कंधे से कंधा मिलाकर, मिल करके विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेज गति से चल पड़ें, आगे बढ़ें। मैं एक बार फिर आपको और आपके परिवार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!