आजादी के बाद भारत की सभी व्यवस्थाओं के कांग्रेसीकरण से देश के पांच दशक बर्बाद हुए: मुंबई में पीएम मोदी
हम सबको मिलकर विकसित भारत बनाना है और इसमें मुंबई की बहुत बड़ी भूमिका है: मुंबई में पीएम मोदी
मेरी गारंटी है कि कुछ ही सालों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन जाएंगे: मुंबई में पीएम मोदी
कांग्रेस और इंडी अघाड़ी की माओवादी इकोनॉमिक्स, मुंबई के पहिए ही जाम कर देगी: मुंबई में पीएम मोदी

जय भवानी..जय भवानी, जय शिवाजी, छत्रपती शिवाजी महाराज की..छत्रपति शिवाजी महाराज की.. समस्त मुंबईकरांना माझा राम- राम, कसे आहात तुम्ही? आप सभी हमें आशीर्वाद देने आएं हैं, मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

मुंबई ये शहर सिर्फ सपने नहीं देखता, मुंबई सपनों को जीता है। कुछ कर गुजरने का संकल्प लेकर चलने वालों को मुंबई ने कभी निराश नहीं किया है। इस ड्रीम सिटी में, मैं आपसे 2047 के ड्रीम को लेकर के आया हूं। एक सपना है देश का, एक संकल्प है देश का, हम सबने मिलकर विकसित भारत बनाना है और इसमें मुंबई की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

आप मुंबई के लोग रफ्तार की कीमत सबसे ज्यादा समझते हैं। भारत के साथ आजाद हुए कितने ही देश हमसे आगे निकल गए, हम क्या किसी से कम थे? फिर कमी कहां थी? कमी उस सरकार में थी जिसने भारतीयों के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं किया, विश्वास नहीं किया और मैंने ऐसे-ऐसे प्रधानमंत्री देखे हैं और मैं आप सबको कहूंगा मुंबईवालों को कि यूट्यूब पर जाकर के लाल किले से अब तक कौन प्रधानमंत्री, क्या बोले हैं सारा अवेलेबल है, आप हैरान हो जाएंगे एक वो भी वक्त था जब देश के प्रधानमंत्री लाल किले से हम भारतीयों को आलसी कहकर पुकारते थे, जिन सरकारों की सोच ऐसी रही हो, वो देश को कभी आगे नहीं बढ़ा सकते। मैं आज पूरी गंभीरता से कह रहा हूं आजादी के बाद गांधी जी की सलाह पर अगर कांग्रेस को भंग कर दिया गया होता तो आज भारत कम से कम 5 दशक आगे होता। आजादी के बाद भारत की सभी व्यवस्थाओं का जो कांग्रेसीकरण हुआ, उसने देश के 5 दशक बर्बाद किए हैं। साथियों, देश आज़ाद हुआ तो भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था था। हम दुनिया में नंबर छह पर थे और 2014 में जब कांग्रेस गई और हमें जब सत्ता सुपुर्द की तब देश की अर्थव्यवस्था 6 नंबर से 11 नंबर पहुंच गई थी। ये इन्होंने काम करके गये हैं और जब से आपने इस सेवक को काम दिया 10 साल में आज देश, दुनिया की पांचवें नंबर की आर्थिक ताकत बनकर के खड़ा है। आज भारत में, मुंबई में रिकॉर्ड इंवेस्टमेंट आ रहा है और मेरी गारंटी है कि कुछ ही सालों में जब मैं आपके बीच आऊंगा तो हम दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बन चुके होंगे और मैं आपको भी गारंटी देने आया हूं और मैं आपके बच्चों के लिए विश्वास लेकर के आया हूं। मैं आपको विकसित भारत देकर जाने वाला हूं इसलिए मोदी 24x7 फोर 2047 के मंत्र के साथ हर पल आपके नाम, हर पल देश के नाम, जी-जान से जुटा है।

साथियों,

कुछ लोग कहते हैं कि मोदी जो ये कहता है, वो असंभव है। निराशा की गर्त में डूब हुए लोग उनमें आशा का संचार करना लोहे के चने चबाने का काम होता है और इसलिए निराशा को पार करके बैठे हुए लोग हर पल, हर चीज असंभव ही अनुभव करते हैं। ये वो लोग हैं जिनको लगता था राम मंदिर भी उनको असंभव लगता था।

साथियों,

दुनिया को कभी ना कभी इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा कि भारत भूमि में रहने वाले लोग अपने विचारों के इतने पक्के थे, अपने इरादों के इतने पक्के थे कि एक सपना लेकर के 500 साल तक लड़ते रहे। ये छोटा इतिहास नहीं है 500 साल का अविरत संघर्ष, अनेक पीढ़ियों का संघर्ष, लाखों लोगों का बलिदान और 500 साल तक संजोया हुआ सपना आज रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं। ये निराशा की गर्त में डूबे हुए वो लोग हैं जिनको आर्टिकल-370 का हटना भी असंभव लगता था, आज हमारी आंखों के सामने आर्टिकल-370 की जो दीवार थी ना वो दीवार को मैंने कब्रिस्तान में गाड़ दिया है और जो सपने संजो रहे हैं कि वे कभी 370 का पुनर्जागरण करेंगे, फिर से लगाएंगे वो कान खोलकर के सुन लें ये विरासत मामूली विरासत नहीं है, दुनिया की कोई ताकत दोबारा 370 नहीं ला सकती है।

साथियों,

हमारा देश दशकों तक सीरियल बम धमाकों से लहूलुहान होता रहा, आतंकी हमलों से मां भारती का सीना चीर दिया जाता था। मुंबई जैसे हमारे शहर थर्राते रहते थे, एक ही गूंज सुनाई देती थी। कहीं कोई लावारिस चीज दिखाई दे तो पुलिस को जानकारी देना, एयरपोर्ट जाओ, स्टेशन पर जाओ हर जगह पर लिखा रहता था लावारिस चीज को हाथ मत लगाना, लावारिस चीज से चौकन्ना रहना 10 साल हो गए सुना है क्या? सब बंद हो गया कि नहीं हो गया? ये इनको असंभव लगता था और अभी आज बता रहे थे तीन तलाक, देश की संसद ने तीन तलाक को ही तलाक..तलाक..तलाक कह दिया। महिलाओं को 33 परसेंट आरक्षण 40 साल तक इंतजार करते रहे लोग, संसद में बहस होती थी और जो आज संविधान को सिर पर रखकर नाच रहे हैं उन लोगों ने पार्लियामेंट में 33 परसेंट आरक्षण के बिल को छीनकर के फाड़ दिया था। इन सबकी छाती पर बैठकर के आरक्षण हुआ कि नहीं हुआ? कांग्रेस 60 साल तक कहती रही कि गरीबी हटाएंगे और इनका तो फैशन था आप सच में जरा जो हिस्ट्री में रूचि रखते हैं जरा देख लीजिए आप लाल किले से इन प्रधानमंत्रियों के भाषण सुनेंगे और इन परिवार के सभी प्रधानमंत्रियों के भाषण सुनेंगे तो उनके 20-25 मिनट के भाषण में 10 मिनट वो गरीबी पर बोलते थे और कोई भी चुनाव का उनका भाषण सुन लीजिए वो गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब..गरीब.. गरीब.. माला ही जपते रहते थे, लोगों की आंख में धूल झोंकते थे और गरीबों को एहसास कराते रहते थे कि तुम तो गरीबी में ही जीने के लिए ही पैदा हुए हो। इस देश में गरीबी को हटाना असंभव लगता था। भाइयों-बहनों, मोदी ने दस साल में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर के दिखा दिया है, जो असंभव लगता था, वो संभव हुआ कि नहीं हुआ? संभव हुआ कि नहीं हुआ? ये किसने संभव बनाया? ये किसने संभव बनाया? ये किसने संभव बनाया? कौन सी ताकत है, जिसने ये किया है? ये कौन सी ताकत है? मोदी नहीं, ये आपके वोट की ताकत है ना इसके कारण हुआ है। ये आपके वोट का सामर्थ्य है और इसलिए मैं जो अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, जो शांति और सुरक्षा चाहते हैं, जो विकास के अनगिनत अवसर चाहते हैं, जो भारत को विश्व में माथा ऊंचा करके जीने वाला देश के रूप में देखना चाहते हैं ऐसे हर नागरिक को कहता हूं जरा घर से बाहर निकलिए और अपने वोट का उपयोग कीजिए और मेरा आपसे आग्रह है मैं आज मुंबईकर के पास आया हूं, आपसे आशीर्वाद मांगने आया हूं, आप रिकॉर्ड तोड़कर मतदान करके दिखाइए इस बार और जब मदतान करने के लिए घर से निकलें ना तो याद करना कभी वो बम धमाके हुआ करते थे, सुबह घर से निकलते थे तो शाम को जिंदा लौटेंगे कि नहीं लौटेंगे इसका कोई विश्वास नहीं था, आज गर्व के साथ आपकी बेटी शाम को आनंद से घर लौट सकती है ये याद करके जाना और कमल पर और मेरे साथियों के जो सिंबल है उनपर अपना बटन दबाकर के मोदी को जरा मजबूत कीजिए। आपका एक वोट राष्ट्रहित में बड़े फैसलों का आधार बना है और इसलिए एक-एक वोट जरूरी है।

साथियों,

इन लोगों ने जब जनादेश चुराकर सरकार बनाई, मैं महाराष्ट्र की बात कर रहा हूं, जनादेश को चुराकर सरकार बनाई तो विकास कार्यों से भी अपनी दुश्मनी निकाली। बुलेट ट्रेन का काम हो, मुंबई मेट्रो का काम हो, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हो, JNPT में कंटेनर टर्मिनल का काम हो, मुंबई से जुड़े हर बड़े प्रोजेक्ट को इन्होंने लटकाया-अटकाया और भटकाया। ये मुंबई के लोगों से दुश्मनी निकाल रहे थे। साथियों, मोदी का एक महत्वपूर्ण संकल्प है, मोदी मुंबई को उसका हक लौटाने के लिए आया है। आज दुनिया का आधुनिकतम इंफ्रास्ट्रक्चर मुंबई को मिल रहा है। आज यहां अटल सेतु है, मुंबई मेट्रो का विस्तार हो रहा है, मुंबई लोकल का आधुनिकीकरण हो रहा है, नवी मुंबई में एयरपोर्ट बन रहा है, वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं और वो दिन दूर नहीं जब देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई को मिलेगी।

साथियों,

आगे बढ़ते हुए भारत में NDA गठबंधन रोजगार के नए-नए सेक्टर्स बना रहा है। पिछले 10 साल में भारत में सवा लाख से ज्यादा नए स्टार्टअप्स बने हैं। 8 हज़ार से अधिक स्टार्टअप्स तो अकेले हमारे मुंबई में हैं। बीते 10 सालों में भारत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बना है जी। हम कभी मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे आज हम मोबाइल फोन एक्सपोर्ट कर रहे हैं जी। टेक्नोलॉजी से लेकर टेक्सटाइल तक, टैलेंट से लेकर टूरिज्म तक, स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स तक आने वाले 5 सालों में नौजवानों के लिए असीम अवसरों से भरा भारत दुनिया की नजरों में एक बहुत बड़ी आशा का कारण, विश्वास का कारण बना हुआ है और इसका बहुत बड़ा फायदा मुंबई के युवाओं को होगा, मुंबई के प्रोफेशनल्स को होगा। हमारी सरकार मातृभाषा में पढ़ाई को भी बहुत महत्व दे रही है। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत अब मराठी में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई संभव होगी। मैंने सुप्रीम कोर्ट से कहा था मैंने कम से कम आप जजमेंट का ऑपरेटिव पार्ट होता है वो तो उस क्लाइंट की भाषा में दो ये क्या अंग्रेजी का झंडा लेकर घूम रहे हो तुम लोग और आज सुप्रीम कोर्ट से अगर कोई मराठी भाषी व्यक्ति का केस चल रहा है और उसको जजमेंट का ऑपरेटिव पार्ट मराठी में चाहिए तो मिलना तय हो चुका है दोस्तों।

भाइयों और बहनों,

शहरी मिडिल क्लास हो या फिर शहरी गरीब, ease of living ये मोदी की प्राथमिकता है। जो झुग्गियों में रहता है उसको भी आज पक्के घर का भरोसा मिला है। सबके घर का सपना पूरा हो, इसके लिए मोदी सरकार हजारों करोड़ की मदद दे रही है। आज महाराष्ट्र के 45 हजार से ज्यादा रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट्स रेरा कानून के दायरे में आए हैं मतलब इन्वेस्टर के लिए विश्वास का पक्का व्यवस्था मिली है। अकेले महाराष्ट्र में ही 17 हजार से ज्यादा इन्वेस्टर्स की शिकायतों का निवारण हुआ है।

साथियों,

क्वालिटी हेल्थकेयर और सस्ता हेल्थकेयर, ये हमारा फोकस है और अब तो मोदी ने ये तय किया है आप जो बेटे-बेटी कमाते हैं ना आज हर घर में बुजुर्ग होते ही हैं, माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची, नाना-नानी और 70 साल के बाद छोटी-मोटी कोई ना कोई बीमारी तो होती ही होती है अब जो बेटा- बेटी मेहनत करके कमाते हैं उनके सामने चिंता रहती है, वो मां-बाप को संभालने के लिए तैयार हैं लेकिन एक तरफ अगर बीमारी आ गई तो चिंता रहती है कि रोजमर्रा की जिंदगी कैसे गुजारेंगे और बच्चों की आशा-अपेक्षाओं का क्या? हर कमाने वाले बेटे-बेटी को चिंता रहती है। मोदी ने तय किया है कोई भी व्यक्ति, हिंदुस्तान का कोई भी व्यक्ति जो 70 साल से ऊपर है अब उनके बीमारी में उनके इलाज की चिंता उनके बेटा- बेटी पर नहीं रहेगी, ये जिम्मा मोदी संभालेगा। हम जानते हैं मेडिकल इंश्योरेंस कराने में आपको कितनी दिक्कत आती थी, वो भी अब भूल जाइये अब मोदी आपके बुजुर्ग माता-पिता का अस्पताल में इलाज करायेगा और वो भी मुफ्त।

भाइयों और बहनों,

10 साल पहले तक सामान्य गरीब और मिडिल क्लास के लिए बैंक लोन सपना होता था। आज बिना गारंटी का लोन मिल रहा है। पहले फुटपाथ पर, रेहड़ी पर काम करने वालों को बैंक के दरवाजे तक जाने की हिम्मत नहीं थी जिनको कोई नहीं पूछता था मोदी उनको पूजता है और मैं हमारे शिंदे जी वगैरह का आभार व्यक्त करता हूं कि एक आध साल पहले मुझे यहां बुलाया था और करीब एक लाख रेहड़ी- पटरी वाले भाई- बहन इकट्ठे हुए थे और उनको हजारों- करोड़ रुपये बैंक से लोन मिला था। उनकी पूरी जिंदगी बदल गई। वरना पहले क्या था रेहड़ी- पटरी वालों साहूकार के पास से बहुत महंगे ब्याज में पैसे लेते थे और कारोबार में से ज्यादा पैसा ब्याज में चला जाता था। आज उनको बैंक से लोन मिलता है और गारंटी कौन देता है? गारंटी मोदी देता है, बिना गारंटी पैसे मिलता है और ये मेरे रेहड़ी- पटरी वाले भाई- बहन, पाई-पाई समय पर चुकता करते हैं बैंकों पर कोई बोझ नहीं होने देते हैं।

साथियों,

मोदी के पास 10 साल का रिपोर्ट कार्ड है और 25 साल का रोडमैप भी है और दूसरी तरफ इंडी गठबंधन वालों के पास क्या है? जितने लोग उतनी बातें, जितने दल उतनी घोषणाएं और जितने दल उतने प्रधानमंत्री। कांग्रेस के माओवादी मेनिफेस्टो में जितनी घोषणाएं हैं अगर उनका हिसाब लगाएं तो देश दिवालिया हो जाएगा। इनकी नज़र हमारे मंदिरों के सोने पर है। इनकी नजर महिलाओं के मंगलसूत्र पर है। इन लोगों ने 50 परसेंट इन्हेरिटेंस टैक्स का आइडिया फ्लोट किया है यानी आप अपने बच्चों को अपनी विरासत नहीं दे पाएंगे। आपने कितनी ही मेहनत करके कितना ही कमाया हो इकट्ठा किया हो आधा ये सरकार छीन लेना चाहती है। आपको बच्चों को नहीं देने देगी। ये आपकी प्रॉपर्टी का एक्सरे करके, अपने वोटबैंक को, जो वोट जिहाद करते हैं ना उनको देने के लिए वो निर्णय कर चुके हैं। साथियों, ये इनके इरादे बहुत खतरनाक हैं। कांग्रेस के लिए ये अस्तित्व बचाने की लड़ाई है। वो किसी भी हद तक जा सकती है।

साथियों,

मुंबई तो भारत का economic powerhouse है। आप देखिए, 10 साल पहले शेयर बाज़ार कहां था और आज कहां है? आज देश के लाखों-लाख छोटे-छोटे निवेशक बाज़ार से जुड़े हैं। दुनिया के 4th largest stock मार्केट पर देश-दुनिया का भरोसा बढ़ता जा रहा है। इंडी अघाड़ी वाले जो साजिशें रच रहे हैं, उसका एक मकसद इस भरोसे को भी तोड़ना है। मैं आपको सावधान कर रहा हूं कांग्रेस और इंडी अघाड़ी की माओवादी इकोनॉमिक्स, मुंबई के पहिए ही जाम कर देगी दोस्तों। मैं कल्पना करता हूं कि इनकी सोच देश के लिए कितनी भयंकर आर्थिक स्थिति पैदा कर सकती है।

साथियों,

मुंबई चैत्य भूमि से प्रेरणा पाती है। ये भी हमारी सरकार है, जिसने चैत्य भूमि सहित देश-दुनिया में बाबा साहेब के पंचतीर्थ विकसित किए हैं। साथियों, शिवतीर्थ की इस भूमि में यहां कभी बाला साहेब ठाकरे और वीर सावरकर की हुंकार गूंजी थी। लेकिन आज विश्वासघाती अघाड़ी को देखकर, उनकी आत्मा को कितना दुख होता होगा। ये नकली शिवसेना वाले इन्होंने बाला साहेब को धोखा दिया, इन्होंने शिवसैनिकों के बलिदान को धोखा दिया। सत्ता के लिए ये राम मंदिर को गाली देने वालों के साथ चले गए। सत्ता के लिए ये मुंबई हमले के बाद पार्टी कर रहे लोगों के साथ चले गए, जो कांग्रेस दिन-रात वीर सावरकर को गालियां देती हैं, आज ये उसकी गोद में बैठे हैं और मैं एनसीपी के नेता को चुनौती देता हूं आप राहुल से बयान करवाइये कि वो जिंदगी में कभी भी वीर सावरकर का अपमान नहीं करेगा जरा एक बयान करवा दीजिये। अभी उन्होंने चुनाव है इसलिए उन्होंने चुप करवाया है, ताला मारा है उसको, लेकिन जरा बुलवा दीजिए एक बार कि मैं जीवनभर वीर सावरकर के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलूंगा। जरा एक बार बुलवा दीजिए उनको, वो नहीं कर सकते क्योंकि उनको पता है चुनाव खत्म होते ही फिर से वीर सावरकर को गालियां देना शुरू करने वाले हैं। साथियों, महाराष्ट्र की मिट्टी के साथ धोखा करने वाले लोग, महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाने वाले लोग साथियों, वो भी एक वक्त था कभी शिवसेना की पहचान, यहां घुसपैठियों के खिलाफ खड़े होने की थी। आज वो ही नकली शिवसेना, CAA का विरोध कर रही है। इनको अब हिंदुओं, बौद्ध, जैन, सिख शरणार्थियों को नागरिकता देने पर भी आपत्ति है। हिंदुस्तान में ऐसा हृदय परिवर्तन किसी पार्टी का नहीं हुआ, जैसा अभी की नकली शिवसेना का हुआ है।

साथियों,

अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए, तुष्टिकरण के लिए, इस पूरी अघाड़ी ने, पूरी मुंबई को, पूरे देश को धोखा दिया है। जिस कसाब ने मुंबइकरों को दहलाया इस शहर को खून से रंग दिया ये लोग उसको क्लीन चिट दे रहे हैं। जिस पाकिस्तान की आज दुनिया में कोई नहीं सुन रहा, ये अघाड़ी वाले सर्जिकल और एयरस्ट्राइक पर उसी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। ये हमारी सेना को ही झूठा करार दे रहे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की इस धरती का इससे बड़ा अपमान और क्या होगा?

साथियों,

इंडी अघाड़ी वाले लगातार बाबा साहेब अंबेडकर का, हमारे संविधान का भी अपमान कर रहे हैं। बाबा साहेब धर्म के आधार पर आरक्षण के खिलाफ थे। पूरी संविधान सभा एकमत हुई थी कि हमारे देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होगा लेकिन इंडी अघाड़ी वाले दलित, पिछड़े, आदिवासियों के हक का आरक्षण छीनकर, धर्म के आधार पर वोट जिहाद करने वालों को देना चाहते हैं। सत्ता के लिए इनकी ये धोखेबाज़ी नहीं चलेगी और आर्टिकल-370 हटाकर देश में एक संविधान लागू कराने वाला मोदी, संविधान का सबसे बड़ा रक्षक है। और जो लोग जो लोग आज संविधान को माथे पर लेकर के नाच रहे हैं उन्होंने पहले संविधान के शरीर को तोड़ा, हमारे संविधान की जो पहली प्रत है उसमें एक हिस्सा है संविधान के संबंध में लिखा हुआ बातें, दूसरा उसमें चित्र काम है वो सब मिलाकर के एक संविधान बना है और इन चित्रों में हजारों साल की हमारी विरासत को चित्रांकित किया गया है। इन्होंने पहला काम किया पंडित नेहरू ने वो चित्र वाला संविधान अलमारी में रख दिया और सिर्फ बाद में, बाद में उसके आत्मा को उन्होंने चूर- चूर कर दिया। अब ये लोग संविधान की पीठ में छुरा भोंकने की कोशिश कर रहे हैं। मैं कांग्रेस को किसी दलित, पिछड़े, आदिवासी का आरक्षण कभी भी छीनने नहीं दूंगा और ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

मैंने लाल किले से कहा था यही समय है, सही समय है। ये भारत का समय है। ये समय का चक्र तेज़ी से चलता रहे इसकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी मुंबई की है। हर मुंबईकर को मतदान करना है। सारे रिकॉर्ड तोड़ने हैं। भाजपा और शिवसेना के हमारे सारे उम्मीदवारों को विजयी बनाकर के दिल्ली भेजना है। हमारे एनसीपी के साथियों को, मैं नकली वालों की बात नहीं कर रहा, मुंबई नॉर्थ लोकसभा से श्रीमान पीयूष गोयल जी, मुंबई नॉर्थ- वेस्ट लोकसभा से रवींद्र वायकर जी, मंबई नॉर्थ- ईस्ट लोकसभा से मिहिर कोटेचा जी, मंबई नॉर्थ- सेंट्रल से उज्जवल निकम जी, मुंबई साउथ- सेंट्रल से राहुल शेवाले जी, मुंबई साउथ लोकसभा से श्रीमती यामिनी जाधव जी इन सभी के पक्ष में 20 मई को ज्यादा से ज्यादा मतदान करना है और जब आप वोट देंगे ना आप इनको वो वोट सीधा का सीधा मोदी के खाते में जाएगा। साथियों, मैं पूरा हिंदुस्तान घूम के आया हूं और मैं विश्वास से कहता हूं इस बार के चुनाव नतीजे पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाले होंगे। भारत एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में उभरेगा 4 जून और इसलिए साथियों आप सबका सक्रिय सहयोग मेरे साथ बोलिए भारत माता की..

भारत माता की..

भारत माता की..

बहुत- बहुत धन्यवाद।

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भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है: राइजिंग भारत समिट में पीएम मोदी
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।